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गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

सबसे बड़ा पुण्य Sabse Bda Punya

सबसे बड़ा पुण्य Sabse Bda Punya

🔴 एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था.वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था. यहाँ तक कि जो मोक्ष का साधन है अर्थात भगवत-भजन, उसके लिए भी वह समय नहीं निकाल पाता था।

🔵 एक सुबह राजा वन की तरफ भ्रमण करने के लिए जा रहा था कि उसे एक देव के दर्शन हुए. राजा ने देव को प्रणाम करते हुए उनका अभिनन्दन किया और देव के हाथों में एक लम्बी-चौड़ी पुस्तक देखकर उनसे पूछा-

🔴 “महाराज, आपके हाथ में यह क्या है?”

🔵 देव बोले- “राजन! यह हमारा बहीखाता है, जिसमे सभी भजन करने वालों के नाम हैं।”

🔴 राजा ने निराशायुक्त भाव से कहा- “कृपया देखिये तो इस किताब में कहीं मेरा नाम भी है या नहीं?”

🔵 देव महाराज किताब का एक-एक पृष्ठ उलटने लगे, परन्तु राजा का नाम कहीं भी नजर नहीं आया।

🔴 राजा ने देव को चिंतित देखकर कहा- “महाराज ! आप चिंतित ना हों , आपके ढूंढने में कोई भी कमी नहीं है. वास्तव में ये मेरा दुर्भाग्य है कि मैं भजन-कीर्तन के लिए समय नहीं निकाल पाता, और इसीलिए मेरा नाम यहाँ नहीं है।”

🔵 उस दिन राजा के मन में आत्म-ग्लानि-सी उत्पन्न हुई लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे नजर-अंदाज कर दिया और पुनः परोपकार की भावना लिए दूसरों की सेवा करने में लग गए।

🔴 कुछ दिन बाद राजा फिर सुबह वन की तरफ टहलने के लिए निकले तो उन्हें वही देव महाराज के दर्शन हुए, इस बार भी उनके हाथ में एक पुस्तक थी. इस पुस्तक के रंग और आकार में बहुत भेद था, और यह पहली वाली से काफी छोटी भी थी।

🔵 राजा ने फिर उन्हें प्रणाम करते हुए पूछा- “महाराज ! आज कौन सा बहीखाता आपने हाथों में लिया हुआ है?”

🔴 देव ने कहा- “राजन! आज के बहीखाते में उन लोगों का नाम लिखा है जो ईश्वर को सबसे अधिक प्रिय हैं!”

🔵 राजा ने कहा- “कितने भाग्यशाली होंगे वे लोग? निश्चित ही वे दिन रात भगवत-भजन में लीन रहते होंगे! क्या इस पुस्तक में कोई मेरे राज्य का भी नागरिक है?”

🔴 देव महाराज ने बहीखाता खोला, और ये क्या, पहले पन्ने पर पहला नाम राजा का ही था।

🔵 राजा ने आश्चर्यचकित होकर पूछा- “महाराज, मेरा नाम इसमें कैसे लिखा हुआ है, मैं तो मंदिर भी कभी-कभार ही जाता हूँ?

🔴 देव ने कहा- “राजन! इसमें आश्चर्य की क्या बात है? जो लोग निष्काम होकर संसार की सेवा करते हैं, जो लोग संसार के उपकार में अपना जीवन अर्पण करते हैं. जो लोग मुक्ति का लोभ भी त्यागकर प्रभु के निर्बल संतानो की सेवा-सहायता में अपना योगदान देते हैं उन त्यागी महापुरुषों का भजन स्वयं ईश्वर करता है. ऐ राजन! तू मत पछता कि तू पूजा-पाठ नहीं करता, लोगों की सेवा कर तू असल में भगवान की ही पूजा करता है। परोपकार और निःस्वार्थ लोकसेवा किसी भी उपासना से बढ़कर हैं।

🔵 देव ने वेदों का उदाहरण देते हुए कहा- “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छनं समाः एवान्त्वाप नान्यतोअस्ति व कर्म लिप्यते नरे..”

🔴 अर्थात ‘कर्म करते हुए सौ वर्ष जीने की ईच्छा करो तो कर्मबंधन में लिप्त हो जाओगे.’ राजन! भगवान दीनदयालु हैं. उन्हें खुशामद नहीं भाती बल्कि आचरण भाता है.. सच्ची भक्ति तो यही है कि परोपकार करो. दीन-दुखियों का हित-साधन करो. अनाथ, विधवा, किसान व निर्धन आज अत्याचारियों से सताए जाते हैं इनकी यथाशक्ति सहायता और सेवा करो और यही परम भक्ति है..”

🔵 राजा को आज देव के माध्यम से बहुत बड़ा ज्ञान मिल चुका था और अब राजा भी समझ गया कि परोपकार से बड़ा कुछ भी नहीं और जो परोपकार करते हैं वही भगवान के सबसे प्रिय होते हैं।

🔴 मित्रों, जो व्यक्ति निःस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करने के लिए आगे आते हैं, परमात्मा हर समय उनके कल्याण के लिए यत्न करता है. हमारे पूर्वजों ने कहा भी है- “परोपकाराय पुण्याय भवति” अर्थात दूसरों के लिए जीना, दूसरों की सेवा को ही पूजा समझकर कर्म करना, परोपकार के लिए अपने जीवन को सार्थक बनाना ही सबसे बड़ा पुण्य है. और जब आप भी ऐसा करेंगे तो स्वतः ही आप वह ईश्वर के प्रिय भक्तों में शामिल हो जाएंगे।

by AWGP Shantikunj Haridwar 

मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

अब 3जी स्मार्टफोन पर भी चल सकेगा Reliance Jio सिम, जानिये कैसे


अब 3जी स्मार्टफोन पर भी चल सकेगा Reliance Jio सिम

Last Updated: Tuesday, December 20, 2016

नई दिल्‍ली : वेलकम ऑफर और सस्ते टैरिफ प्लान के बाद अब रिलायंस जियो 3जी स्मार्टफोन यूजर्स को खुशखबरी देने की तैयारी में है। रिपोर्टों के अनुसार, रिलायंस जियो की 4जी सर्विसेस का इस्तेमाल अगले महीने से 3जी यूजर्स भी कर पाएंगे। जानकारी के मुताबिक, कंपनी दिसंबर के अंत में एक नया एप्प लांच करने वाली है, इस नए फीचर से 3जी फोन में इंस्टॉल करने के बाद, आसानी से जियो 4जी सिम का इस्तेमाल किया जा सकेगा। बता दें कि डिजिटल कंपनी रिलायंस जियो सिर्फ 4जी सिम पर ही काम करता है। ऐसे में अगर आपका स्मार्टफोन 3जी या 2जी से युक्‍त है तो आप भी जल्‍द इस सेवा का लाभ उठा पाएंगे।

रिपोर्टों के अनुसार, एक जनवरी से 3जी स्मार्टफोन यूजर्स भी हैप्पी न्यू ईयर ऑफर का लुत्फ उठा सकेंगे। जिसमें यूजर्स को 31 मार्च 2017 तक फ्री कॉलिंग, एसएमएस, डाटा मिलेगा। देश में अभी ज्यादातर फीचर फोन और 3जी स्मार्टफोन यूजर्स हैं। यदि कंपनी 3जी एप्प लांच कर देती है तो जियो उपभोक्‍ताओं की संख्या में और तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है।

सितंबर में आधिकारिक लॉन्चिंग के बाद कंपनी ने देशभर में काफी तेजी से ग्राहकों को अपने साथ जोड़ा है। जियो अब 3जी यूजर्स को भी अपने साथ जोड़ने की पूरी तैयारी में है। ग्राहक का फोन 4जी नहीं है तो भी वह रिलायंस जियो की सभी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेगा।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो 
आचार्य समाचार  online

सोमवार, 19 दिसंबर 2016

फि़ल्म “लाली” को मिले दो इंटरनेशनल अवार्ड

फि़ल्म “लाली” को मिले दो इंटरनेशनल अवार्ड

जयपुर/बाड़मेर

बालिका शिक्षा को लेकर बनी फि़ल्म “लाली” को 2 इंटरनेशनल अवार्ड मिले है। फिल्म को आगे भी सेंड डियुन फ़िल्म फेस्टिवल बीकानेर और छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल पुणे महाराष्ट्र में भी अवार्ड के लिए ऑफिसियल सलेक्शन हो गया हे।  फिल्म के निर्माता अक्षय दान भादरेश जयपुर से अवार्ड लेकर बाड़मेर पहुंचे।
इस उपलक्ष में शाम 5 बजे डाक बंगलो में उनके सम्मान में थार जन कल्याण संस्थान द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे फिल्म की पूरी स्टार कास्ट मौजूद रही। फिल्म का अधिकांश हिस्सा बाड़मेर जैसलमेर में शूट हुआ था। फिल्म के निर्देशक जुगल के नायक है। इस अवसर पर अक्षय दान भादरेश ने बताया की ये बाड़मेर की बेटियो के लिए सम्मान जनक कहानी पर बनी अच्छी और प्रेरणा दायक फ़िल्म हे। इससे समाज में अच्छी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इस फ़िल्म की कामयाबी का पूरा श्रेय फ़िल्म की पूरी टीम को दिया। इसी के साथ इस फ़िल्म के नायक स्व श्री भगवान आकोड़ा को श्रद्धांजलि देते हुए ये अवार्ड उनको समर्पित किया।

इस अवसर पर थार जन कल्याण संसथान के  ईन्द्रप्रकाश पुरोहित, अबरार मोहम्मद, मॉगीलाल माहाजन, अमित बोहरा,रमेश कड़वासरा, मगाराम माली, बाबू भाई शैख़ जयश्री खत्री, विरेन्द्र जैन, रफिक मोहम्मद,  मनोहर सिंह बाबूदान, B मगदान,  नेपाल सिंह, सवाई कुमावत एडवोकेट हाकम सिंह एडवोकेट सुरेन्द्र बाघमालानी और समस्त कलाकार उपस्थित रहे।

रविवार, 18 दिसंबर 2016

जिन्हें लगता है राजनीतिक पार्टियों को इंकम टैक्स में छूट देकर मोदी ने बहुत ग़लत किया वो ये ज़रूर पढ़ लें !!

पूरे देश में हो हल्ला मच गया है कि मोदी ने तो ग़लत कर दिया , राजनीतिक पार्टियों को छूट दे दी , मोदी ऐसे कैसे काला धन मिटाएँगे , आम आदमी पर तो ढाई लाख के बाद जवाब देना पड़ेगा पर राजनीतिक पार्टियों के लिए छूट कर दी है ये तो ग़लत है ।

ये सब ऊपर लिखी बातें आजकल मीडिया में चल रही हैं और सब लोग मोदी जी पर गुस्सा निकाल रहे हैं जिन्हें ज़्यादा जानकारी नहीं है उनकी बात तो समझ में आती है पर मोदी भक्त भी इस मुद्दे पर ख़िलाफ़ बोलने लगे हैं । किसी की ग़लत बात की बुराई करने में कुछ भी ग़लत नहीं है लेकिन उससे पहले हमें सब कुछ जान लेने की ज़रूरत है ।

नम्बर एक 
बता दें कि देश के आयकर कानून (13A of the Income Tax Act, 1961 ) के अनुसार राजनैतिक पार्टियाँ आयकर मुक्त हैं । ये बात मोदी जी ने लागू नहीं की है ये पहले से ही लागू है हाँ ये बात ठीक है कि मोदी जी इसको बदल सकते हैं लेकिन उसके लिए लोकसभा और राज्यसभा से इसको पास करवाना पड़ेगा और नोटबंदी के इस मौक़े पर आपको लगता है विरोधी जो पहले से काले धन के लालच में सरकार का विरोध कर रहे हैं वो ऐसा कोई क़ानून पास होने देंगे वो भी तब जब मोदी सरकार के पास राज्यसभा में पूरे नम्बर नहीं हैं  । ज़रा सोचिए  ?मोदी सरकार ने पहले से बने हुए क़ानून की बात बस दोहराई है कुछ भी नया नहीं है ।

नम्बर दो 
इस घोषणा का मतलब यह नहीं है कि कोई भी राजनीतिक दल बिना हिसाब – किताब के पैसा जमा करा सकेंगे । ध्यान रहे कि सरकार ने चंदा देने की छूट पर बीस हज़ार की लिमिट लगा दी है यानी कि ऐसा नहीं है कि इंकम टैक्स की ये छूट असीमित रक़म पर राजनीतिक पार्टियों को मिलेगी बल्कि आपके लिए ये जान लेना आवश्यक है कि ये छूट केवल बीस हज़ार तक की डोनेशन या चंदे पर मिलेगी और साथ ही साथ हर बीस हज़ार चंदा देने वाले का पूरा हिसाब किताब दिखाना पड़ेगा । राजनीतिक पार्टियाँ घोटाले करने के लिए किसी का भी नाम लिखकर करोड़ों रुपए बीस बीस हज़ार चंदा तो दिखा सकती हैं लेकिन इतने सारे झूठे आधार कॉर्ड कहाँ से लाएँगी  ? इस बीस हज़ार के चंदे में रसीद भी देनी पड़ेगी और पैन कॉर्ड भी लगाना पड़ेगा ।

नम्बर तीन 

आपका कभी इंकम टैक्स वालों से पाला तो पड़ा ही होगा वो बड़े शातिर खिलाड़ी होते हैं , मोदी जी को भी आपने देख लिया होगा कि ये काले धन को लेकर कितने सीरीयस हैं ? जब इन्होंने काले धन को रोकने के लिए नोटबंदी जैसा बड़ा फ़ैसला कर लिया तो क्या आपको लगता है वे राजनीतिक पार्टियों को यूँ ही छोड़ देंगे ? जब अर्थशास्त्र और राजनीति के जानकारों तथा मोदी जी की कार्य शैली को क़रीब से जानने वालों से बात की गयी तो नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि हो सकता है मोदी सरकार ने ये घोषणा जानभूझकर की हो ताकि विरोधियों को फँसाने का आसान मौक़ा हाथ लग जाए । आपने वो कहावत तो सुनी होगी कि शिकार को पकड़ने के लिए चारा फेंकना पड़ता है , वहीं मोदी सरकार ने किया है वरना सोचिए मोदी जी को ये घोषणा करने की ज़रूरत ही क्यूँ पड़ी इसको मीडिया में देने की बजाय राजनीतिक पार्टियों को चुपचाप भी तो बताया जा सकता था क्यूँकि इसमें तो हर पार्टी का फ़ायदा ही है 

और आपको याद होगा कि अभी कुछ दिन पहले 50 -25 % पर भी बहुत हो हल्ला मचा था और लोगों ने कहा था मोदी जी ये ग़लत कर रहे हैं लेकिन उसके बाद देश में ईडी और इंकम टैक्स विभाग जिस तरह से रेड मारकर काला धन ज़ब्त कर रहा है वो आपके सामने ही है ।

हमारे आंकलन के हिसाब से अगर किसी पार्टी ने इस चक्कर में फँसकर पैसा जमा करवाया कि मोदी सरकार ने तो छूट दे ही दी है उसका ऐसा बुरा हाल किया जाएगा कि वो लोग राजनीति करना भूल जाएँगे , मोदी जी आउट ओफ़ बॉक्स थिंकिंग वाले नेता हैं आप लोग देखते जाइएगा असली खेल तब शुरू होगा अगर किसी पार्टी ने पैसे बीस बीस हज़ार कर जमा करवा दिए ।  income tax और ED वाले शातिर खिलाड़ी इतने सवाल पूंछेंगे कि झूठलाल , पप्पू जैसों को नानी याद आ जाएगी ।

विरोधी पार्टियों को बीस पचास हज़ार जमा करवाने से तो कोई फ़ायदा होगा नहीं अगर उन्हें इस छूट का लाभ लेना है तो कम से कम 10 हज़ार या 20 हज़ार ऐसे लोग चाहिए होंगे जिनके खातों से ऐसी ट्रांसफ़र करवायी जा सके और कौन इंकम टैक्स के चक्कर में फँसना चाहेगा 10-20 आदमी की बात होती तो अलग बात थीबड़ी मात्रा में काले धन को ठिकाने लगाने को कहाँ से बीस हजारी दाता और उसका पैन कार्ड आएगा , फ़र्ज़ी नाम तो आसानी से ये लोग ला सकते हैं पर फ़र्ज़ी पैन कार्ड कहाँ से आएगा ? और फिर जिसका पैन कॉर्ड  लगेगा , उसका रिकार्ड भी खंगाला जाएगा तो भैया वो तो आप भूल ही जाओ ।

हमें तो ये भी लगता है कि विपक्षी पार्टियाँ इस छूट का फ़ायदा उठाकर एक धेला भी जमा नहीं करवाने वाली बस मुद्दे को मीडिया में उछालकर मोदी सरकार को ख़ूब बदनाम किया जाएगा ।

By: Jindal on Saturday, December 17th, 2016

मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

निरिक्षण किया :आचार्य समाज नि:शुल्क शिक्षा केन्द्र

बहुत दिनों बाद "आचार्य समाज नि:शुल्क शिक्षा केन्द्र" का निरिक्षण किया। भाई कपिल आचार्य ने बताया कि केन्द्र की शुरुआत से  8 माह बाद भी नियमित रूप से 50-60 विद्यार्थी केन्द्र पर पहूँच रहे हैं। बच्चों में शैक्षणिक सुधार  हो रहा है। हमारे द्वारा रखी गई नींव को मजबूत आधार प्रदान कर केन्द्र के बहुत अच्छे तरीके से संचालन के लिये कपिल व रामलाल आचार्य को बहुत अभिनन्दन व शुभकामनाएं दी। बहुत ही सुखद भैंट के साथ ही आगामी 26 जनवरी पर गणतंत्र दिवस कार्यक्रम को लेकर चर्चा की । आचार्य समाज बाड़मेर द्वारा यह अनोखी पहल सार्थक व समाज के उज्ज्वल भविष्य की ओर प्रेरणादायक प्रयास साबित होगा।
#धन्यवाद सभी अभिभावकों का अपने बच्चों को नियमित शिक्षा केन्द्र पहूचाने के लिये।
#धन्यवाद समाज के बन्धु का संचालन में सहयोग के लिये।
#धन्यवाद विद्या भारती परिवार ( संस्कार केन्द्र )
#आप सर्वजातीय बन्धुओं से निवेदन है कि अपने बच्चों को केन्द्र पर नि:शुल्क कोचिंग प्राप्त करने के लिये जरूर भेजें।
"धन्यवाद"

********निवेदक*******

महावीर आचार्य ( प्रचार मंत्री - आचार्य समाज बाड़मेर )
संयोजक व निर्देशक - आचार्य समाज नि:शुल्क शिक्षा केन्द्र बाड़मेर
संपादक - आचार्य समाचार ओनलाईन
acharyasamacharonline.blogspot.com

सोमवार, 12 दिसंबर 2016

500 व 2000 के नोट मे चिप के बाद अब रेडियो एक्टिव इंक की खबर से फैली सनसनी!

नई नोटों में चिप नहीं बल्कि रेडियो एक्टिव इंक का किया गया इस्तेमाल, नोट बता रहे खुद ही अपना पता।



दिल्ली : देश के हर हिस्से मे रोजाना करोड़ों रूपये की नई करेंसी की बरामदगी हो रही। खबर है इतनी बड़ी संख्या मे नोटो की बरामदगी मे IT विभाग की सफलता का कारण नोट में कोई चिप नहीं बल्कि रेडियो एक्टिव इंक बताया जा रहा है. बता दे कई देशो में रेडियोएक्टिव स्याही का प्रयोग इंडिकेटर के रूप में किया जाता है. जिससे किसी भी चीज़ को ढूंढने में आसानी होती है। हांलाकि किसी भी सरकारी ऐजेन्सी ने इस बात की पुष्टि नही की है.
नोट बता रहे अपने लोकेशन
दरअसल, लोग नए नोटों को भी वहीं छिपा कर रख रहे हैं जहां वो पहले रखते थे। एक ही जगह पर ज़्यादा मात्रा में पैसे को रखने के कारण यह आईटी विभाग के लिए क़ारग़र साबित हो रहा हैं। 500 और 2000 की नई करेंसी में इस इंक का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि क्षयांक यानि टी हाफ के कारण उसकी सक्रियता एक समय के बाद कम हो जायेगी। जिसके कारण आने वाले वक़्त में नई करेंसी भी बंद हो जाएगी। यह इंक इंडिकेटर के रूप में काम में लिया जा रहा है जिसके कारण अब नोट खुद ही अपना पता बता रहे हैं। 
रेडियो एक्टिव का इस्तेमाल
P32 फास्फोरस का रेडियोएक्टिव व आइसोटोप है। जिसके नाभिक में 15 प्रोटीन और 17 न्यूट्रोन होते हैं जिसे रेडियो एक्टिव स्याही में बेहद कम मात्रा में प्रयोग किया जाता है। यह रेडियोएक्टिव वार्निंग टेप की तरह प्रयोग होता है जिससे एक ही जगह पर मौजूद लिमिट से अधिक होने पर इंडिकेटर के तौर पर नोटों की मौजूदगी को यह सूचित करता है। इसी के चलते भारी मात्रा में इस पदार्थ वाली नगदी का संग्रह करते वह आईटी के रडार में आ रहे हैं |

गुरुवार, 8 दिसंबर 2016

डाटा ऑनलाईन के अंतर्गत 20 दिसंबर तक करानी होगी प्रविष्टि

डाटा ऑनलाईन के अंतर्गत 20 दिसंबर तक करानी होगी प्रविष्टि
ACHARYA SAMACHAR ONLINE
बाड़मेर, 07 दिसंबर। 
स्कूल शिक्षा विभाग (सामान्य शिक्षा) एवं संस्कृत शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त समस्त गैर-सरकारी विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक विद्यालय, मिलिट्री स्कूल्स, मदरसा एवं अन्य सभी विद्यालयों में पढ़ रहे बालक-बालिकाओं का डाटा ऑनलाइन किए जाने के लिए संबंधित विद्यालयों को राज्य सरकार द्वारा संचालित प्राइवेट स्कूल पोर्टल www-rte-raj-nic-in
पर 20 दिसंबर तक अपनी प्रविष्टि करानी होगी
प्रदेश में संचालित राज्य के गैर सरकारी एवं अन्य 37 हजार विद्यालयों के लगभग 80 लाख बालक-बालिकाओं का डाटा राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद् द्वारा ऑनलाईन किए जाने की कार्यवाही की जा रही है। प्रविष्टि की अंतिम तिथि पूर्व में 7 दिसम्बर रखी गयी थी, परन्तु बहुत से विद्यालयों द्वारा तिथि बढ़ाए जाने के आग्रह को स्वीकार करते हुए अंतिम तिथि 20 दिसंबर की गई है। राजस्थान प्रारम्भिक शिक्षा परिषद् के आयुक्त डॉ. जोगा राम ने बताया कि यह कार्य पूर्ण होने के बाद राज्य के सभी विद्यालयों एवं उनमें पढ़ रहे सभी बालक-बालिकाओं का डाटा ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगा।

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

एचपीसीएल की बाड़मेर रिफाइनरी की लागत बढ़ने का अनुमान

एचपीसीएल की बाड़मेर रिफाइनरी की लागत बढ़ने का अनुमान


हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की राजस्थान के बाड़मेर में प्रस्तावित 90 लाख टन सालाना क्षमता की रिफाइनरी की लागत 37,320 करोड़ रुपए के पूर्व अनुमान से बढ़कर 41,000 से 42,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया गया है।
एचपीसीएल ने मार्च 2013 में राजस्थान सरकार के साथ इस रिफाइनरी के लिये आपसी सहमति के ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे। यह रिफाइनरी बाड़मेर में केयर्न इंडिया की तेज खोज वाले क्षेत्र के पास ही राजस्थान के थार रेगिस्तान में लगनी है।
लेकिन राजस्थान में सत्ता परिवर्तन होने की वजह से रिफाइनरी परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका। राज्य की नई सरकार ने इस परियोजना को दी जाने वाली रियायतों और वित्तीय प्रोत्साहनों पर रोक लगा दी। एचपीसीएल के निदेशक (रिफाइनरी) विनोद एस. शेनॉय ने कहा, ‘‘हम राज्य सरकार से बातचीत कर रहे हैं, उन्हें रिफाइनरी के नये आकार और स्वरूप के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि रिफाइनरी का आकार तो वही रहेगा लेकिन इसे अब यूरो-छह ग्रेड के पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करने के अनुरूप बनाया जायेगा। इस लिहाज से ‘‘परियोजना की लागत पहले के 37,000 करोड़ रुपए के अनुमान से अधिक होगी।’’ इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) इसका नये सिरे से अध्ययन कर रही है।
शेनॉय ने कहा कि नया लागत अनुमान अभी सामने नहीं आया है लेकिन मोटे तौर पर परियोजना पर 4,000 से 5,000 करोड़ रुपए का खर्च बढ़ सकता है। एचपीसीएल के निदेशक मंडल ने मार्च 2013 में राजस्थान के बाड़मेर में 37,320 करोड़ रुपए की लागत से रिफाइनरी लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। तत्कालीन राजस्थान सरकार ने 2013 में इसके लिये जमीन अधिग्रहण का काम भी शुरू कर दिया था लेकिन बाद में इसे रोक दिया गया।

मोदी सरकार ने इस वजह से नहीं जारी किये 500 रुपये के नोट, अगर जारी कर देते तो हो जाता काम खराब

मोदी सरकार ने इस वजह से नहीं जारी किये 500 रुपये के नोट, अगर जारी कर देते तो हो जाता काम खराब



नई दिल्ली, 5 दिसम्बर: यह पोस्ट पढ़कर आप समझ जाएंगे कि नोटबंदी के पीछे बहुत ही टैलेंटेड लोगों का दिमाग चल रहा है, यह टीम कालेबाजारियों की एक एक गतिविधि से वाकिफ है और उनकी सभी चालों को फेल करती जा रही है। एक योजना के अंतर्गत ही अभी तक 500 रुपये के नोट जारी नहीं किये गए, अगर ये नोट जारी कर दिए गए होते तो मोदी सरकार का पूरा काम खराब हो गया होता और नोटबंदी फेल भी हो जाती लेकिन अब नोटबंदी को कोई भी फेल नहीं कर सकता। 

भारत पूरी तरह से भ्रष्टाचार के खून में रंगा हुआ है, पिछले कुछ दिनों की ख़बरें देखकर ऐसा लग रहा है कि सबसे ज्यादा भ्रष्ट बैंक हैं जिसमें लोगों का पैसा जमा रहता है। नोटबंदी के बाद कालेधन के चोरों ने बैंक मैनेजरों से मिलकर कालाधन सफ़ेद करना शुरू कर दिया। हजारों लाखों बैंक मैनेजर कालेधन को सफ़ेद करने में लगे हुए हैं और इस काम के लिए ये लोग कमीशन ले रहे हैं। कई बैंक मैनेजर पकडे भी जा रहे हैं। एक तरह से चोर बैंक मैनेजरों की छंटनी चल रही है। चोर बैंक मैनेजरों की पहचान उन्हें बैंकिंग सिस्टम से बाहर किया जा रहा है। 

हजारों बैंक मैनेजर कालेधन को सफ़ेद तो कर रहे हैं लेकिन 100 रुपये के नोटों में कैश होने की वजह से अधिक कालेधन को सफ़ेद नहीं कर पा रहे हैं, जहाँ तक सवाल 2000 हजार रुपये के नोटों का है तो इन नोटों की कालाबाजारी करने वाले लोग पकडे भी जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि इन नोटों में जरूर कोई ना कोई टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की गयी है क्योंकि जहाँ भी नोटों के बण्डल इकठ्ठे दिखाई देते हैं, इनकम टैक्स अफसर वहां पर छापा मारकर उन नोटों को जब्त कर लेते हैं। ऐसा लगता है कि चोरों को पकड़ने के लिए ही 2000 रुपये के नोट छापे गए हैं। 

अब 500 रुपये के नोटों की बात करते हैं, इन्हीं नोटों का कालेधन वाले और कमीशनखोर बैंक मैनेजर इन्तजार कर रहे हैं, अभी जितना भी कालाधन है उसका 80-90 फ़ीसदी 500 रूपये के नोटों में है। कमीशनखोर बैंक मैनेजर 500 रुपये के नोटों का इन्तजार कर रहे हैं ताकि कालेधन चोरों से साठ गाँठ करके उनसे कमीशन लेकर उनके कालेधन को सफ़ेद करें। कालेधन के चोर भी 500 रुपये के नोटों का इन्तजार कर रहे हैं। वे भी सोच रहे हैं कि 500 रुपये के नोट आयें तो हम अपने दलाल बैंक मैनेजरों से मिलकर अपना कालाधन सफ़ेद करें। 2000 रुपये के नोट लेने से वे डर रहे हैं क्योंकि उसमे चिप लगी हुई है और 100 रुपये के नोट छिपाने में समस्या होगी और उन्हें ट्रक में ले जाना पड़ेगा। 

जैसे जैसे 30 दिसम्बर की तारीख नजदीक आती जा रही है, दलाल बैंक मैनेजरों और कालेधन चोरों की धडकनें बढ़ती जा रही हैं, अगर 500 रुपये के नोट आ जाते तो ये लोग अपना कालाधन सफ़ेद कर लेते, मोदी सरकार भी चालाकी दिखा रही है, वे भी ऐसे ही चोर बैंक मैनेजरों की धर पकड़ कर रहे हैं। चोरों की छटनी चल रही है। जैसे जैसे 30 दिसम्बर की तारीख नजदीक आती जाएगी इन चोरों की धडकनें बढ़ती जाएंगी। 

आपको बता दें कि पिछले एक हफ्ते से चोर बैंक मैनेजरों की धरपकड़ शुरू हो चुकी है जिसकी वजह से बैंकों में डर फ़ैल रहा है, कुछ बैंकों ने सही तरीके से काम करना शुरू कर दिया है जिसकी वजह से लाइनें कम हो गयी हैं लेकिन प्राइवेट बैंक मैनेजर अभी भी कालेबाजारी और दलाली में व्यस्त हैं। अगर ये लोग नहीं सुधरे तो जल्द ही पब्लिक इन्हें जूतों से पीटना शुरू कर देगी। 

सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार चोर बैंक मैनेजरों की पहचान करने के बाद 10 दिन पहले 500 रुपये के नोट जारी करना शुरू करेगी। अब कालाधन केवल बैंक मैनेजरों के माध्यम से सफ़ेद हो सकता है, लेकिन उन्हें इतना वक्त ही नहीं मिलेगा। अगर मोदी सरकार ने उन 10 दिनों में 500 रुपये के नोटों की सप्लाई पूरी कर दी तो बैंकों में लाइनें ख़त्म हो जाएंगी और कालेधन चोरों के पुराने नोट कागज़ बन जाएंगे, क्योंकि 30 दिसम्बर के बाद बैंक भी 500 और 1000 के पुराने नोट नहीं लेंगे। 

SBI का मानना है कि बैंकों के बाहर लम्बी लम्बी कतारों को कम करने के लिए 10 लाख करोड़ रुपये की जरूरत है। अगर ये नोट पूरे कर दिए गए तो लाइनें अपने आप ख़त्म हो जाएंगी। मोदी सरकार की मजबूरी यह है कि देशवासियों को पुराने नोट जमा करने का समय देना भी जरूरी है वरना एक दिन में कालेधन को सफ़ेद करने का काम बंद हो जाता। 

एसबीआई के प्रबंध निदेशक रजनीश कुमार ने कहा, "हमारे अध्ययन के मुताबिक, दो महीने की खपत राशि यानी बाजार में 10 लाख करोड़ रुपये की तरलता बढ़ाने की जरूरत है। इसके बाद कतारें अपने आप गायब हो जाएंगी।" कुमार ने यहां इन्क्लुसिव फाइनेंस इंडिया सम्मिट में कहा, "इनमें से 3-4 लाख करोड़ रुपये डिजिटल या ऑनलाइन माध्यम से जारी किया जाना चाहिए।"

केंद्र सरकार द्वारा 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों को लीगल टेंडर से बाहर करने के बाद देशभर में करोड़ों लोग पैसे निकालने के लिए रोजाना बैंकों तथा एटीएम के बाहर कतार में खड़े हो रहे हैं।

एसबीआई के अधिकारी ने कहा कि 500 रुपये के नोटों की कमी के कारण करेंसी के तेजी से चलन में विशेष परेशानी आ रही है।

उन्होंने कहा, "100 रुपये तथा 2,000 रुपये के नोट के बीच में कोई नोट नहीं है, जिसके कारण परेशानी आ रही है। एक बार जब 500 रुपये के नोट चलन में आ जाएंगे, हालत में सुधार होगा।"

उन्होंने कहा कि 500 रुपये के नोट उपलब्ध ही नहीं हैं।

कुमार ने कहा कि एसबीआई के 49,000 एटीएम में से 43,000 को नए नोटों के हिसाब से समायोजित कर लिया गया है। उन्होंने कहा, "एसबीआई के एटीएम से प्रतिदिन 17,000 से 19,000 करोड़ रुपये निकल रहे हैं।"

सोमवार, 5 दिसंबर 2016

हैण्ड राइटिंग देख कर लगता है की जैसे कंप्यूटर से लिखकर उसका प्रिंट आउट निकाला हो :


हैण्ड राइटिंग देख कर लगता है की जैसे कंप्यूटर से लिखकर उसका प्रिंट आउट निकाला हो :
वो कहते है न “कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों” बस इसी कहावत को चरितार्थ किया है नेपाल की रहने वाली प्रकृति मल्ला ने इस लड़की की हैण्ड राइटिंग देख कर लगता है की जैसे इस बच्ची ने अपने हाथों से न लिखकर किस कंप्यूटर से लिखकर उसका प्रिंट आउट निकाला हो.
प्रकृति अभी आठवी क्लास की स्टूडेंट है. वह नेपाल के सैनिक आवसीय महाविद्यालय में पढ़ती है. उनकी हैण्ड राइटिंग देखकर बड़ो-बड़ो को पसीने आ जाते हैं. अपनी इस खूबसूरत हैण्ड राइटिंग के लिए प्रकृति को नेपाल की सरकार और सेना ने पुरस्कृत भी किया हैं. इस तस्वीर में आप देख सकते है कि इस बच्ची की हैण्ड राइटिंग कितनी खूबसूरत हैं.
अच्छी हैण्ड राइटिंग होने के कई फायदे है. अगर आपकी हैण्ड राइटिंग अच्छी हो तो आपका इम्प्रेशन सामने वाले व्यक्ति पर अच्छा पड़ता हैं. बल्कि टीचर्स भी यही कहते है की अच्छी हैण्ड राइटिंग वाले स्टूडेंट्स को एग्जाम में अच्छे मार्क्स भी मिलते है.
इतनी छोटी उम्र में इस बच्ची की इतनी अच्छी हैण्ड राइटिंग किसी चमत्कार सी लगती है पर ऐसी खूबसूरत हैण्ड राइटिंग इस बच्ची ने बड़ी ही मेहनत से पाई है. प्रकृति ने काफी मेहनत करके अपनी हैण्ड राइटिंग को ऐसा बनाया है. प्रकृति के रिश्तेदारों का कहना है की वो रोजाना दो घंटे हैण्ड राइटिंग प्रैक्टिस करती थी, जसकी बदौलत उसकी हैण्ड राइटिंग आज इस काबिल हुई हैं.

मुख्यमंत्री पहुंची शहर गांव, शहीद प्रेमसिंह की शहादत को किया नमन

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बाड़मेर.
देश की रक्षा के लिए अपनी प्राणों की आहुति देने वाले जिले के शहर गांव निवासी शहीद प्रेमसिंह की शहादत को नमन करने के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सोमवार को उनके पैतृक गांव शहर पहुंची।


मुख्यमंत्री ने शहीद प्रेमसिंह की शहादत को नमन किया और बाद में शहीद प्रेमसिंह के परिवारजनों को सांत्वना दी। इससे पहले मुख्यमंत्री का हेलीपेड पर स्थानीय भाजपा नेताओं ने अगुवाई की। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर पुलिस और प्रशासन की तरह से चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रही।

करीब 45 मिनट रुकी मुख्यमंत्री
शहीद की शहादत को नमन करने उनके पैतृक गांव पहुंची मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे करीब 45 मिनट तक शहीद के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढ़स बंधाया। और मुख्यमंत्री ने शहीद के परिजनों को हरसम्भव मदद का भरोसा दिलाया।