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शनिवार, 20 मई 2017
भारतीय शास्त्रीय संगीत
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संगीत का इतिहास
भारत में संगीत की विकास यात्रामुख्य लेख :भारतीय संगीत का इतिहासप्रगैतिहासिक काल से ही भारत में संगीत की समृद्ध परम्परा रही है। गिने-चुने देशों में ही संगीत की इतनी पुरानी एवं इतनी समृद्ध परम्परा पायी जाती है। ऐसा जान पड़ता है किभारतमें भरत के समय तक गान को पहले केवलगीतकहते थे।
वाद्य में जहाँ गीत नहीं होता था, केवल दाड़ा, दिड़दिड़ जैसे शुष्क अक्षर होते थे, वहाँ उस निर्गीत या बहिर्गीत कहते थे और नृत्त अथवा नृत्य की एक अलग कला थी। किंतु धीरे धीरे गान, वाद्य और नृत्य तीनों का "संगीत" में अंतर्भाव हो गया -गीतं वाद्यं तथा नृत्यं त्रयं संगतमुच्यते
।
भारत से बाहर अन्य देशों में केवल गीत और वाद्य को संगीत में गिनते हैं; नृत्य को एक भिन्न कला मानते हैं। भारत में भी नृत्य को संगीत में केवल इसलिए गिन लिया गया कि उसके साथ बराबर गीत या वाद्य अथवा दोनों रहते हैं। हम ऊपरकह चुके हैं कि स्वर और लय की कला को संगीत कहते हैं।
स्वरऔर लय गीत और वाद्य दोनों में मिलते हैं, किंतु नृत्य में लय मात्र है, स्वर नहीं। हम संगीत के अंतर्गत केवल गीत और वाद्य की चर्चा करेंगे, क्योंकि संगीत केवल इसी अर्थ में अन्य देशों में भी व्यवहृत होता है।भारतीय संगीतमें यह माना गया है कि संगीत के आदि प्रेरक शिव और सरस्वती है। इसका तात्पर्य यही जान पड़ता है कि मानव इतनी उच्च कला को बिना किसी दैवी प्रेरणा के, केवल अपने बल पर, विकसित नहीं कर सकता।
भारतीय संगीत का आदि रूप वेदों में मिलता है।वेदके काल के विषय में विद्वानों में बहुत मतभेद है, किंतु उसका कालईसा से लगभग 2000 वर्ष पूर्व था - इसपर प्राय: सभी विद्वान् सहमत है। इसलिए भारतीय संगीत का इतिहास कम से कम 4000 वर्ष प्राचीन है।वेदोंमें वाण, वीणा और कर्करि इत्यादि तंतु वाद्यों का उल्लेख मिलता है। अवनद्ध वाद्यों में दुदुंभि, गर्गर इत्यादि का, घनवाद्यों में आघाट या आघाटि और सुषिर वाद्यों में बाकुर, नाडी, तूणव, शंख इत्यादि का उल्लेख है
मिस्र से पाइथागोरस और अफलातून दोनों ने संगीतसीखा। यूनान के संगीत पर मिस्र के संगीत का बहुत बड़ा प्रभाव पड़ा।यूरोपमें सबसे पहलेयूनानमें संगीत एक व्यवस्थित कला के रूप में विकसित हुआ। भरत की मूर्छनाओं की तरह यहाँ भी कुछ "मोड" बने जिससे अनेक प्रकार की "धुने" बनती थी। यहाँ भी तत, सुषिर, अवनद्ध और धन वाद्य कई प्रकार के थे। यूरोप मेंपाइथागोरसपहला व्यक्ति हुआ है जिसनेगणितके नियमोंद्वारा स्वरों के स्थान को निर्धारित किया।लगभग 16वीं शती से यूरोप में संगीत का एक नई दिशा में विकास हुआ। इसे स्वरसंहति (हार्मनी) कहते हैं। संहति मेंकई स्वरों का मधुर मेल होता है, जैसे स, ग, प (षड्ज, गांधार, पंचम) की संगति। इस प्रकार के एक से अधिक स्वरों के गुच्छे को "संघात" (कार्ड) कहते हैं।
बुधवार, 17 मई 2017
भ्रूणहत्या : एक अभिषाप
और लड़कों के लिए अनुकरणीय शिक्षा...,
...
...पति
ने घर मेँ पैर रखा....‘अरी सुनती हो !'
लडके का नाम युवराज है ।
बैँक मे काम करता है।
बस beti हाँ कह दे तो सगाई कर देते है."
वो मजाक मेँ निकाल देते ।
लेकिन बाप उसकी पगार मेँ से एक रुपया भी नही लेते थे...
युवराज की सगाई कर दी गई और शादी का मुहूर्त भी निकलवा दिया.
फेरे फिरने का समय आया....
मुझे आप सब की उपस्तिथि मेँ मेरे पापा के साथ बात करनी है,"
और दूसरा चेक तीन लाख जो मेने अपनी पगार मेँ से बचत की है...
मैँ नही चाहती कि आप को बुढापे मेँ आपको किसी के आगे हाथ फैलाना पडे !
आज के बाद सिगरेट के हाथ नही लगाओगे....
Aur whatsapp per zabardast share kijiye
या मत कीजये ये आपकी मर्जी
Please save girls....
बहुत ही मार्मिक क्षण : जब चिड़िया हो गयी मूर्छित
(शायद भयंकर धूप में प्यास के कारण चक्कर खाकर मूर्च्छित होकर गिर पड़ी)
मैंने तुरंत मेरे स्टूडेंट से पानी लाकर उस चिड़िया पर हल्के से छिड़काव करने को कहा जब दो कप पानी चिड़िया को छिड़काव किया तब जाके बिचारी कुछ हौस में आयी । बाद में उसको मैंने कप से ही पानी पिलाया लगभग आधा कप पानी पीने के बाद चिड़िया पुनः स्वच्छंद होकर उड़ गयी।
मुझे विश्वास है कि आप जरूर करेंगे। धन्यवाद
( जब वह चिड़िया कप से पानी पीते समय करूणामय नजरों से मेरी तरफ देख रही थी वह क्षण मेरे दिल को छू गया ।)
सोमवार, 1 मई 2017
संपादकीय : आरक्षण सही मायने में पिछडों के हक में या खिलाफ
संपादकीय........✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
आरक्षण के लोभियों के लिये यह जोर का तमाचा है जो लोग साधन सम्पन्न होने के बावज़ूद अपनी जाति के द्वारा पिछड़े होने का नाजायज फायदा उठा रहे हैं और अपने वर्ग ही नहीं अन्य वर्गों के भी गरीब व पिछड़े लोगों का हक छीनकर संविधान निर्माताओं को भी लज्जित कर रहे हैं कि उन्होंने पिछडों के लिये कोई अस्थायी व्यवस्था बनाई और आरक्षण वादियों ने इसे अपना ही एकाधिकार समझकर स्थायी कर दिया जिससे कुछ पिछड़े मजबूत होकर अपनी पीढ़ियों को मजबूत करने में लगे हैं और वास्तविकता में जो पिछडे हैं और गरीब हैं उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा चाहे वे किसी भी जाति के हो।
आरक्षण आर्थिक आधार पर हो न कि जाति के आधार पर ।
या फिर न ही हो तो ही ठीक है। समानता का अधिकार..........
Plz is sms ko ache se samjhe
स्कूल से
एक 6'th क्लास का बच्चा
अपने घर आकर
अपनी माँ से पूछता है :- "माँ ये SC और ST क्या हैं ?"
माँ :- बेटा,
ये तुम्हे क्यों जानना है ?
बच्चा :- माँ आज सर हमसे पूछ रहे थे
की कौन-कौन SC ST का हैं
माँ :- बेटा उन्होंने ऐसा क्यों पूछा,
उन्होंने नहीं बताया क्या ?
बच्चा :- बताया पर सिर्फ इतना कि,
जो जो SC ST के हैं
उन्हें पैसे मिलेंगे,
पर माँ ये क्या होता हैं?
माँ :- बेटा
हमारे सविधान में
4 कास्ट बनायीं है --
SC, ST, Obc और General
तो सरकार उन्हें गरीब और पिछड़े हुए लोगो को मदद करने के लिए सुविधा दी हैं।
बच्चा -: पर माँ
सिर्फ उन्हें ही क्यों मिलती हैं और
मेरा दोस्त तो गरीब भी नहीं हैं फिर
भी उसे मिलेगे पैसे,
ये सुविधा गरीब के लिए हैं तो
हम भी गरीब है न तो
हमको क्यों नहीं मिलेंगे पैसे?
माँ :- बेटा ये सविधान में लिखा है।
बेटा :- पर माँ सविधान के बारे में कहा था की
सबको एक जैसा हक़ है तो फिर ये क्यों ?
माँ :- बेटा
ये सब राजनीति का गन्दा खेल हैं
उनकी वजह से आज
धर्म और जाति के नाम पर लोग एक सामान नही हैं
बेटा :- पर माँ हम क्या हैं,..? जिससे हम को पैसे नहीं मिलेगे
माँ :- बदनसीब,
हम लोग बदनसीब है बेटा
पूरे विश्व में कही पर
इस तरह का नियम नहीं है
बस हमारे भारत में है
ये सुविधा, सविधान निर्माता ने इसको सिर्फ 10 वर्ष के लिए रखा था
पर ये देश के दलालो ने इसको पूर्ण रूप से लागू कर दिया.
बेटा :- माँ क्या आगे भी
मुझे इसी तरह की दिक्कत होगी ?
माँ :- हाँ बेटा,
आगे तुझे पढ़ाई में,
नोकरी में, प्रमोशन में,
हर जगह दिक्कत आएगी,
जातिवाद का जहर तुझे मजबूर कर देगा और
तू कितना भी सहन करले,
एक दिन तू जरूर बोलेगा की ये कोटा बंद करो
बेटा :- माँ तो क्या हमारी मदद कोई नहीं करेगा,..?
काश में भारत छोड़ कही और पैदा हुआ होता
माँ :- ऐसा नहीं बोलते बेटा
इस धरती को
हमारे पूर्वजो ने खून से सींचा हैं और
बलिदान दिया है
तुम्हे गर्व होना चाहिए की तुम एक भारतीय हो,
बस ये सत्ता के भूखे लोग हमारी गरीबी दूर करने के बजाये वोट पाने की होड़ में हैं ।
बेटा :- माँ मेरा दोस्त बोलता हैं की पैसे मिलेगे तो पार्टी करेगे,
माँ हमें एक रोज की रोटी
बड़ी मुश्किल से मिलती हैं और
मेरे दोस्त पार्टी करेगे,
माँ में नहीं जाउगा स्कूल कल से ।
माँ :- नहीं बेटा,
तुम रोज स्कूल जाओ और पढ़ो,
पढ़लिख कर शायद तुम इस कोटा को बदल दो
बेटा :- हा माँ में खूब पढूंगा पर
हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं की आगे पढ़ सकूँ
माँ :- तू चिंता न कर, मैं काम करुँगी न तेरी पढ़ाई के लिए
ये सन्देश
हमारे राजनेताओ तक पहुचे और वो
सिर्फ गरीबो को कोटा दे न कि विकसित लोगो को..
आपकी पहल
शायद किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति का
जीवन सुधार दे.....
अगर 40% नंबर पाने वाला
पुलिस अधिकारी बन जाता है और
80% नंबर पाने वाला
रोजगार न मिलने के कारण चोर बन जाता है,
तब आप सोचिये,
क्या वो S.P साहब कभी उस चोर को पकड़ पायेगे जो
उनसे जायदा दिमाग रखता है|
आरक्षण हटाओ,
देश बचाओ...
Sahmat hain to...
Plz... share..it
.👍