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मंगलवार, 27 जून 2017

किशोरावस्था

B.ed students
Paper 1 st Unit 2
किशोरावस्था की परिभाषा
किशोरावस्था शब्द अंग्रजी भाषा के Adolescence शब्द का हिंदी पर्याय है। Adolescence शब्द का उद्भव लेटिन भाषा से माना गया है जिसका सामान्य अर्थ है बढ़ाना या विकसित होना। बाल्यावस्था से प्रौढ़ावस्था तक के महत्वपूर्ण परिवर्तनों जैसे शारीरिक, मानसिक एवं अल्पबौधिक परिवर्तनों की अवस्था किशोरावस्था है। वस्तुतः किशोरावस्था यौवानारम्भ से परिपक्वता तक वृद्धि एवं विकास का काल है। 10 वर्ष की आयु से 19 वर्ष तक की आयु के इस काल में शारीरिक तथा भावनात्मक स्वरूप से अत्यधिक महवपूर्ण परिवर्तन आते हैं। कुछ मनोवैज्ञानिक इसे 13 से 18 वर्ष के बीच की अवधि मानते हैं, जबकि कुछ की यह धारणा है कि यह अवस्था 24 वर्ष तक रहती है।
लेकिन किशोरावस्था को निश्चित अवधि की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। यह अवधि तीव्र गति से होने वाले शारीरिक परिवर्तनों विशेषतया यौन विकास से प्रारंभ हो कर प्रजनन परिपक्वता तक की अवधि है। विश्व स्वस्था संगठन के अनुसार यह गौण यौन लक्षणों (यौवानारम्भ) के प्रकट होने से लेकर यौन एवं प्रजनन परिपक्वता की ओर अग्रसर होने का समय है जब व्यक्ति मानसिक रूप से प्रौढ़ता की ओर अग्रसर होता है और वह सामाजिक व आर्थिक दृष्टी से उपेक्षाकृत आत्मा-निर्भर हो जाता है जिससे समाज में अपनी एक अलग पहचान बनती है। किशोरावस्था तीव्र शारीरिक भावनात्मक और व्यवहार सम्बन्धी परिवर्तनों का काल है।
किशोर बात-बात में अपनी अलग पहचान का आग्रह करते हैं और एक बच्चे की तरह माता-पिता पर निर्भर रहने की उपेक्षा एक प्रौढ़ की तरह स्वतंत्र रहना चाहते हैं। वे अपने माता-पिता से थोड़ा दूरी बनाना शुरू कर देते हैं और अपने सम-आयु समूह (Pear Group) में ही अधिकतर समय व्यतीत करने लगते हैं। यौन-उर्जस्विता के कारण वे विपरीत लिंग की ओर आकर्षित होते हैं।
व्यवहारिक परिवर्तन
उपयुक्त परिवर्तनों के कारण किशोरों के व्यवहार में निम्न लक्षण उजागर होते हैं -
अ) स्वतन्त्रता
शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिपक्वता की प्रक्रिया से गुजरते हुएकिशोरों में स्वतंत्र रहने की प्रवृति जाग्रत होती है। जिससे वे अपने आप को प्रौढ़ समाज से दूर रखना प्रारंभ करते हैं।
ब) पहचान
किशोर हर स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने केलिए संघर्ष करते हैं। वे अपनी पहचान बनाए रखें के लिए लिंग भेद तथा अपने को अन्य से उच्च एवंयोग्य दर्शाने के प्रयास में होते हैं।
स) धनिष्ठता
किशोरावस्था के दौरान कुछ आधारभूत परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन अधिकतर यौन संबंधों के क्षेत्र के होते हैं। किशोरों मेंअचानक विपरीत लिंग के प्रति रुचि उत्पन्न होती है। वे आकर्षण एवं प्रेम के मध्य अंतर स्पष्ट नहीं कर पाते और मात्र शारीरिक आनंद एवंसंतुष्टि के लिए सदैव भटके रहते हैं।समवय समूहों पर निर्भरताअपनी पहचान व स्वतन्त्रा को बनाए रखने के लिए, किशोरे अपने माता-पिता के भावनात्मक बंधनों को त्याग कर अपने मित्रों के साध हीरहना पसंद करते हैं।
किशोरावस्था के निम्लिखित महत्वपूर्ण लक्षण इसकी अन्य अवस्थाओं से भिन्नता को प्रकट करते हैं-
क) शारीरिक परिवर्तनकिशोरावस्था में तीव्रता से शारीरिक विकास और मानसिक परिवर्तन होते हैं। विकास की प्रक्रिया के कारण अंगों में भी परिवर्तन आता है, जो व्यक्तिगत प्रजनन परिपक्वता को प्राप्त करते हैं। इनका सीधा सम्बन्ध यौन विकास से है।
ख) मनौवैज्ञानिक परिवर्तनकिशोरावस्था मानसिक, भौतिक और भावनात्मक परिपक्वता के विकास की भीअवस्था है। एक किशोर, छोटे बच्चे की तरह किसी दूसरे पर निर्भर रहने की उपेक्षा, प्रौढ़ व्यक्ति की तरह स्वतंत्र रहने की इच्छा प्रकट करता है। इस समय किशोर पहली बार तीव्र यौन इच्छा का अनुभ करता है, इसी कारण विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित रहता है। इस अवस्था में किशोर मानसिक तनाव से ग्रस्त रहता है यह अवस्था अत्यंत संवेदनशील मानी गयी है।
ग) सामाजिक सांस्कृतिक परिवर्तनकिशोरों में सामजिक-सांस्कृतिक मेलजोल के फलस्वरूप कुछ और परिवर्तन भी आते हैं। सामान्यता: समाज किशोरों की भूमिका को निश्चित रूप में परिभाषित नहीं करता। फलस्वरूप किशोर बाल्यावस्थाऔर प्रौढावस्था के मध्य अपने को असमंजस की स्थिति में पाते हैं। उनकी मनौवैज्ञानिक आवश्यकताओं को समाज द्वार महत्व नहीं दिया जाता, इसी कारण उनमें क्रोध, तनाव एवं व्यग्रता की प्रवृतिया उत्पन्न होती हैं। किशोरावस्था में अन्य अवस्थाओं की उपेक्षा उत्तेजना एवं भावनात्मकता अधिक प्रबल होती है।
किशोरावस्था की समस्याएं
किशोरावस्था एक ऐसी संवेदनशील अवधि है जब व्यक्तित्व में बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं। वे परिवर्तन इतने आकस्मिक और तीव्र होते हैं कि उनसे कई समस्याओं का जन्म होता है। यघपि किशोर इन परिवर्तनों को अनुभव तो करते हैं पर वे प्राय: इन्हें समझने में असमर्थ होते हैं। अभी तक उनके पास कोई ऐसा स्रोत उपलब्ध नहीं है जिसके माध्यम से वे इन परिवर्तनों के विषय में वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त कर सकें। किन्तु उन्हें इन परिवर्तनों और विकास के बारे में जानकारी चाहिए, इसलिये वे इसके लिए या तो सम-आयु समूह की मदद लेते हैं, या फिर गुमराह करने वाले सस्ते साहित्य पर निर्भर हो जाते हैं। गलत सूचनाएं मिलने के कारण वे अक्सर कई भ्रांतियों का शिकार हो जाते हैं जिससे उनके व्यक्तित्व विकास पर कुप्रभाव पड़ताहै।किशोरों को इसलिये भी समस्याएं आते है क्योंकि वे विपरीत लिंग के प्रति एकाएक जाग्रत रुचि को ठीक से समझ नहीं पाने। माँ बाप से दूर हटने की प्रवृति और सम-आयु समूह के साथ गहन मेल-मिलाप भी उनके मन में संशय और चिंता पैदा करता है। किन्तु परिजनों के उचित मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें सम-आयु समूह की ही ओर उन्मुख होना पड़ता है। प्राय: देखा गया है कि किशोर सम-आयु समूह के दबाव के सामने विवश हो जाते हैं और उन में से कुछ तो बिना परिणामों को सोचे अनुचित कार्य करने पर मजबूर हो जाते हैं। कुछ सिगरेट, शराब, मादक द्रव्यों का सेवन करने लगते हैं और कुछ यौनाचार की ओर भी आकर्षित हो जाते हैं और इस सब के पीछे सम-आयु समूह का दबाव आदि कई कारण हो सकते हैं।

गुरुवार, 22 जून 2017

*भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना*

*भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना*
*वो सभी बातें जो हर आम आदमी योजना के सम्बन्ध में जानना चाहता है*
*1.भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना क्या है?*
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अन्तर्गत NFSA तथा RSBY अन्तर्गत आने वाले परिवार के सदस्यों को प्रति परिवार प्रति वर्ष सामान्य बीमारियों हेतु रू. तीस हजार  तथा गंभीर बीमारियों हेतु रू. तीन लाख तक का निःशुल्क इलाज सरकारी (सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा उनसे उच्च संस्थान) तथा सूचीबद् निजी चिकित्सालयों में अन्तरंग स्वास्थ्य सुविधाओं (IPD) के लिए दिया जाता है।
*2.यह योजना कब एवं क्यो प्रारम्भ की गई ?*
माननीय मुख्यमंत्री महोदया द्वारा बजट भाषण 2014-15 में स्वास्थ्य बीमा योजना की घोषणा की गई थी, जिसकी अनुपालना में दिनांक 13 दिसम्बर, 2015 से भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना प्रदेश में प्रारम्भ की गई।
*3.राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के पात्र परिवारों का क्या अर्थ है?*
सामान्य भाषा में वे परिवार जिनको राशन की दुकान से माह अक्टूबर 2015 के पष्चात गेहूँ प्राप्त हो रहा है वे परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत आते है।
*4.मैं राजस्थान राज्य के बाहर का निवासी हूं क्या मुझे इस योजना का लाभ मिल सकता है?*
नहीं, उक्त योजना केवल राजस्थान राज्य के निवासियों हेतु बनायी गयी है।
*5.क्या इलाज के दौरान मुझसे किसी भी तरह की राशि वसूल की जायेंगी?*
नहीं, इस योजना के अन्तर्गत सम्पूर्ण सुविधाएँ पूर्णतः निःशुल्क (कै शलेस) है।
*6.मैं राजस्थान का मूल निवासी हूं परन्तु राज्य के बाहर नौकरी करता हूं, क्या मुझे इस योजना का लाभ मिल सकता है?*
जी हां, उक्त योजना राजस्थान राज्य के निवासियों हेतु बनायी गयी है अतः आप इसका लाभ ले सकते है।
*7.मैं एक आम नागरिक हूँ। क्या मैं बीमा कम्पनी का प्रीमियम देकर योजना का लाभ ले सकता हूँ?*
जी नहीं। योजना में ऐसा कोई प्रावधान नही है।
*8.योजना के अन्तर्गत कितनी राशि की चिकित्सा सेवा कवर की गयी है?*
सामान्य बिमारियों हेतु रू. तीस हजार  तथा गंभीर बिमारियों हेतु रू. तीन लाख तक का बीमा कवर प्रति परिवार प्रति वर्ष किया गया है।
*9.योजना के अंतर्गत लाभार्थी के इलाज में क्या-क्या सम्मिलित है ?*
योजना के अन्तर्गत लाभार्थी को सामान्य वार्ड में योजनान्तर्गत आने वाले डिजीज पैकेज से सम्बन्धित निम्नाकिंत चिकित्सा सुविधाएँ शामिल है-
·         बिस्तर व्यय सामान्य वार्ड/आई.सी.यू. में
·         भर्ती व्यय तथा नर्सिग व्यय।
·         शल्य चिकित्सा में शामिल व्यय।
·         वेन्टीलेटर शुल्क, शल्य उपकरणों, दवाओं, आक्सीजन, प्रत्यारोपण उपकरण, एक्स-रे तथा अन्य जाँचों पर व्यय आदि।
·         अन्य सभी व्यय जो रोगी के इलाज के दौरान अस्पताल के द्वारा वहन किया गया है।
*10.योजना के अन्तर्गत कुल कितनी बीमारियां शामिल की गयी है?*
योजना के अन्तर्गत 14 चिकित्सा विशेषज्ञता से सम्बन्धित कुल 1715 डिजीज पैकेज निर्धारित किये गये है।
*11.योजना में कितनी सामान्य बीमारियां (Secondary illnesses) शामिल की गयी है?*
इस श्रेणी में सामान्य बीमारियों से सम्बन्धित 1148 डिजीज पैकेज को सूचीबद्ध किया गया है।
*12.योजना में कितनी चिन्हित गंभीर बीमारियाँ (Tertiary illness) शामिल की गयी है?*
इसके अन्तर्गत गंभीर बीमारियों से सम्बन्धित 500 डिजीज पैकेज शामिल है जिनके इलाज हेतु Pre-Authorization (पूर्वनिर्धारिकरण) लेना अनिवार्य है।
*13.राजकीय चिकित्सा संस्थानों हेतु आरक्षित पैकेज क्या है?*
इसके अन्तर्गत 67 डिजीज पैकेज आरक्षित किये गये है जिनके इलाज के लिए बीमा कवर सिर्फ राजकीय चिकित्सा संस्थानों में इलाज कराने पर ही प्राप्त किया जा सकेगा।
*14.मैं इलाज के लिये किस अस्पताल में जा सकता/सकती हूं?*
योजना में 480 सरकारी एवं 568 निजी सम्बद्ध अस्पताल सम्मिलित है इनमें से किसी भी अस्पताल पर जा कर इलाज की सुविधा प्राप्त की जा सकती है। इन अस्पतालों की सूची वैबसाइट पर उपलब्ध है। टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 पर सम्पर्क करके भी यह सूचना प्राप्त की जा सकती है।
*15.मेरे परिवार में कौन-कौन सदस्य इसका लाभ ले सकते है? क्या यह राशि परिवार के एक सदस्य के लिए है या सम्पूर्ण परिवार के लिए हैं?*
योजना की वालेट राशि सम्पूर्ण परिवार के लिए हैं। एक परिवार के अन्तर्गत आने वाले वे सभी सदस्य जिनका नाम परिवार की महिला मुखिया के भामाशाह कार्ड या Rsby कार्ड में अंकित हो, वे इस योजना का लाभ ले सकते है।
*16.मैंने वित्तिय वर्ष 2015-16 में मेरे परिवार के बीमा कवर की राशि का पूर्ण उपयोग कर लिया था। अब क्या वर्ष 2016-17 के लिए मुझे बीमा कवर की राशि प्राप्त होगी?*
जी नहीं, यह बीमा कवर की राशि 13-12-2015 से 12-12-2016 तक लिए है। अतः 13 दिसम्बर 2016 से नए कवर की राशि प्राप्त होगी।                                               *17.यदि राशि ईलाज के उपरान्त शेष बच जाती है, तो क्या अगले वर्ष उपयोग में ली जा सकती है?*
नही, यह राशि एक वर्ष के लिये ही है। यदि राशि शेष रह जाती है तो वह योजना प्रारम्भ होने से एक वर्ष की समाप्ति पर स्वतः ही निरस्त हो जाती है।
*योजना का लाभ कैसे लिया जावें ?*
*18.योजना का लाभ लेने हेतु मुझे कौन-कौन से दस्तावेजों की आवश्यकता होगी?*
योजना का लाभ लेने हेतु लाभार्थी परिवार की पहचान के लिये
·         भामाशाह कार्ड या
·         भामाशाह  Acknowledgement slip
·         आरएसबीवाई कार्ड अथवा उनके नम्बर द्वारा सत्यापन किया जा सकता है।
यदि भामाशाह कार्ड में मरीज का फोटो स्पष्ट नही है तो मरीज की पहचान के लिये आधार कार्ड या सरकारी अथवा अर्द्ध सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र जैसे वोटर आईडी/ड्राईविंग लाईसेंस/पैन कार्ड/कोई अन्य फोटो पहचान पत्र की आवश्यकता होती है।
*19.मरीज का व्यक्तिगत सत्यापन किस प्रकार से किया जाता है?*
मरीज का व्यक्तिगत सत्यापन हेतु साफ्टवेयर में 2 प्रकार के तरीके है। वर्तमान में फिंगर प्रिन्ट एवं ओ.टी.पी. मैसेज द्वारा सत्यापन किया जा रहा है। इनसे सत्यापन नही होने पर कोई वैलिड फोटो आई.डी. लगाई जाती है।
*20.मै कैसे पता कर सकता हूँ कि मैं एनएफएसए का पात्र हूं या नही?*
अपने राशन कार्ड में अकिंत 12 डिजिट का नम्बर स्वास्थ्य मार्गदर्शक/टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127/नजदीकी ई मित्र केन्द्र पर देकर अथवा अधिकृत राशन डीलर की ई-लिस्ट में आप अपनी पात्रता जांच सकते है।
*21.मै कैसे पता कर सकता हूँ कि मैं भामाशाह स्वास्थ्य बीमा का लाभ ले सकता हूं या नही?*
अपने परिवार के मुखियां के भामाशाह कार्ड में अकिंत 07 अक्षरों का नम्बर स्वास्थ्य मार्गदर्शक को दे कर/टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 पर सम्पर्क करके आप अपनी पात्रता जांच सकते है।
*22.मै बीपीएल कार्ड धारक हूं, क्या मैं भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का पात्र हूं?*
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में पात्रता हेतु एनएफएसए या आरएसबीवाई का लाभार्थी होना आवश्यक है। परिवार के मुखियां के भामाशाह कार्ड में अकिंत 07 अक्षरों का नम्बर अथवा भामाशाह ई-आई.डी. स्वास्थ्य मार्गदर्शक/टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127/ नजदीकी ई मित्र केन्द्र पर दे कर आप अपनी पात्रता जांच सकते है।
*23.मेरे पास भामाशाह कार्ड है। क्या मैं भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ ले सकता हूँ?*
केवल भामाशाह कार्ड होने से भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में लाभार्थी होना जरूरी नही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में आने वाले पात्र परिवार जिनका राशन कार्ड परिवार की मुखिया के भामाशाह कार्ड से लिंक हो गया है तथा भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के साफ्टवेयर में 7 अक्षरों का भामाशाह नम्बर डालने पर एनएफएसए लाभार्थी प्रदर्शित हो जाता है तो योजना का लाभ दिया जा सकता है।
*24.मै वृद्वावस्था पेंशन योजना का पात्र हूं एवं मेरे पास भामाशाह कार्ड भी है, क्या मै इस योजना का पात्र हूं?*
केवल भामाशाह कार्ड होने से भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में लाभार्थी होना जरूरी नही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में आने वाले पात्र परिवार जिनका राशन कार्ड परिवार की मुखिया के भामाशाह कार्ड से लिंक हो गया है तथा भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के साफ्टवेयर में 7 अक्षरों का भामाशाह नम्बर डालने पर एनएफएसए लाभार्थी प्रदर्शित हो जाता है तो योजना का लाभ दिया जा सकता है।
*25.मुझे भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड बनवाना है? यह कहाँ बनेगा?*
योजना के अन्तर्गत कोई अलग से कार्ड नहीं बनाया जाता है। जब भी आपके परिवार का कोई सदस्य इलाज के लिए अस्पताल जाए तो परिवार की महिला मुखिया का भामाशाह कार्ड/आर.एस.बी.वाई. कार्ड, अथवा इनका नम्बर अवश्य साथ लेकर जावें, लाभार्थी परिवार की पहचान अस्पताल द्वारा कर ली जायेगी। यदि किसी व्यक्ति द्वारा भामाशाह कार्ड बनवाने के लिये आवेदन किया गया है एवं उसे भामाशाह कार्ड नम्बर प्राप्त नही हुआ है तो भामाशाह कार्ड की Acknowledgement slip द्वारा भी लाभार्थी परिवार की पहचान की जा सकती है।
*26.क्या कोई योजना से सम्बद् अस्पताल मुझे भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने से मना कर सकता है?*
जी हा, निम्न परिस्थितियों में मना किया जा सकता हैः
1.उस अस्पताल में इलाज के लिए विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध नहीं है।
2.यदि अस्पताल द्वारा सम्बन्धित बीमारी का पैकेज नहीं चुना गया है।
3.यदि आपके परिवार के वालेट में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है।
*27.मेरे परिवार के वालेट में 15000रु की राशि उपलब्ध है परंतु इलाज के लिए मेरा पैकेज 18000रु है। क्या मैं अतिरिक्त राशि जमा करा कर अस्पताल में योजना में इलाज ले सकता हूँ?*
जी नहीं। यह मरीज परिवार के लिए पूर्णतः निःशुल्क योजना है। आप अतिरिक्त राशि जमा करा कर इलाज नहीं ले सकते है। यदि आपातकालीन स्थिती है तथा मरीज गंभीर हालत में है तो राशि में बढोतरी राज्य स्तर से की जा सकती है।
*28.लाभार्थी कितनी बार इस योजना के अन्तर्गत इलाज करा सकता है?*
परिवार के वालेट में उपलब्ध राशि के शेष रहने तक लाभार्थी परिवार द्वारा इस योजना में कितनी बार भी इलाज करवाया सकता है।
*29.योजना में शामिल पैकेज की सूचना कहां से प्राप्त की जा सकती है?*
उक्त सूचना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की वैबसाइट www.rajswasthaya.com एवं योजना की वैबसाइट www.healthrajasthan.gov.in पर उपलब्ध है। यह सूचना टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 से भी ली जा सकती है।
*30.योजना से जुड़े अस्पतालों की सूचना कहां से प्राप्त की जा सकती है?*
उक्त सूचना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की वैबसाइट www.rajswasthaya.com एवं योजना की वैबसाइट www.healthrajasthan.gov.in पर उपलब्ध है। यह सूचना टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 से भी ली जा सकती है।
*31.क्या योजना के अन्र्तगत लाभ लेने के लिये स्वास्थ्य संस्थान पर 24 घंटे भर्ती होना आवश्यक है?*
जनरल वार्ड प्रतिदिन पैकेज एवं आईसीयू प्रतिदिन पैकेज के अतिरिक्त अन्य किसी भी बीमारी का लाभ लेने के लिये 24 घंटे भर्ती होना आवश्यक नही है।
*32.मुझे केवल अपनी कुछ/सभी जांचे करवानी है क्या भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अन्तर्गत केवल जांच करवायी जा सकती है?*
जी नही, योजना में इस प्रकार का कोई प्रावधान नही है।
*33.क्या योजना के अन्र्तगत प्रसव सेवा का लाभ लिया जा सकता है।*
जी हाँ, राजकीय अथवा अधिकृत निजी अस्पताल में योजना के अन्तर्गत प्रसव सेवा का लाभ लिया जा सकता है।                   34.क्या योजना के अन्तर्गत प्रसव सेवा का लाभ लेने पर जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जायेगा?
राजकीय एवं जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत सम्बद्ध निजी अस्पतालो में जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि का भुगतान पूर्ववत किया जाता रहेगा।
*35.अस्पताल से डिस्चार्ज होने के कितने दिनो बाद तक मरीज फालोअप हेतु आ सकता है?*
डिस्चार्ज होने के 15 दिन के भीतर मरीज फालोअप हेतु आ सकता है। साथ ही 15 दिन की दवाईयाँ आदि भी पैकेज के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराई जायेगी।
*36.क्या लाभार्थी परिवार का मरीज ओ.पी.डी. में परामर्श, दवायें और जांचो आदि में किये गये व्यय का भुगतान इस योजना के द्वारा प्राप्त कर सकता है?*
हाँ, यदि मरीज को ओ.पी.डी. मे दिखाने के 7 दिन के भीतर भर्ती किया जाता है तो उसके द्वारा पूर्व में किया गया दवाईयों, जांचो, परामर्श शुल्क आदि में हुये व्यय को भी क्लेम पैकेज में शामिल किया जायेगा। बशर्ते की यह उसी अस्पताल में हुआ है जिसमें वह इलाज करा रहा है।
*37.क्या इस योजना के अन्तर्गत केवल योजना के बाद की (13 दिसम्बर 2015) बीमारिया हीं शामिल है?*
नहीं, इस योजना के अन्तर्गत योजना चालू होने से पूर्व की बीमारियों हेतु भी चिकित्सा कवर सम्मिलित है।
*38.क्या उक्त लाभार्थी परिवार में शामिल नवविवाहिता को भी इस योजना का लाभ मिलेगा?*
हाँ, परन्तु इसके लिये नवीन वधु का नाम भामाशाह कार्ड में तत्काल जुडवाया जाये। इसके लिए वो अपने नजदीकी ई-मित्र केन्द्र अथवा अटल सेवा केन्द्र (ई-मित्र की सुविधायुक्त) पर जाकर अपना नाम जुडवा सकते हैं। भामाशाह कार्ड में नाम होने पर ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ प्राप्त हो सकेगा अन्यथा लाभ नही मिलेगा।
*39.मेरे परिवार का भामाशाह कार्ड़ बना हुआ है पर किसी सदस्य का नाम नहीं जुडे होने पर उसे लाभ मिल पायेगा?*
नही, भामाशाह कार्ड में नाम होने पर ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ प्राप्त हो सकेगा। यदि परिवार के किसी भी सदस्य का नाम भामाशाह कार्ड में जुडने से रह गया है तो उसका नाम भी तत्काल जुडवाया जाये।
*40.परिवार ने भामाशाह कार्ड के लिए आवेदन कर दिया है, परन्तु भामाशाह कार्ड प्राप्त नहीं हुआ है, ऐसी स्थिति में योजना का लाभ किस प्रकार लिया जा सकता है?*
ऐसे परिवारों को भामाशाह कार्ड के आवेदन के समय एक Acknowledgement slip दी जाती है, ऐसे पात्र परिवारों के लिये साफ्टवेयर में Bhamashah EID विकल्प का प्रावधान किया जा चुका है। । Acknowledgement slip पर अंकित EID नम्बर डालने पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के पात्र परिवार आने पर लाभ दिया जा सकेगा।
*41.मेरा परिवार NFSA का लाभार्थी है परन्तु साफ्टवेयर में भामाशाह कार्ड द्वारा NFSAपरिवार नहीं दिखाने पर क्या करे?*
यदि भामाशाह कार्ड बनवाते समय आपने राशन कार्ड की एन्ट्री भामाशाह कार्ड में नही करवायी है तो ऐसी स्थिती में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के साफ्टवेयर में NFSA परिवार नहीं दिखायेगा। ऐसी स्थिती में अपने नजदीकी ई-मित्र केन्द्र अथवा अटल सेवा केन्द्र (ई-मित्र की सुविधायुक्त) पर जाकर अपने राशन कार्ड की संख्या भामाशाह कार्ड में जुडवा सकते हैं।
*42.भामाशाह कार्ड में राशन कार्ड़ नम्बर जुडवाने के कितने समय पश्चात यह सूचना भामाशाह कार्ड में अपडेट होती है?*
यह सूचना लगभग 48 घन्टे में भामाशाह पोर्टल पर अपडेट हो जाती है।
*43.NFSA का लाभार्थी होने का सत्यापन किसके द्वारा किया जावेगा?*
यह सत्यापन सम्बन्धित क्षैत्र के उपखण्ड़ अधिकारी द्वारा किया जाता है।
*44.क्या योजना के अन्तर्गत परिवहन सेवा भी निःशुल्क उपलब्ध है?*
सामान्यतः नहीं। परन्तु हृदय रोग तथा अत्याधिक आघात Poly Trauma की स्थिति में 100 रु प्रति डिस्चार्ज यात्रा भत्ता का प्रावधान है जो की वर्ष में अधिकतम रु0 500 प्रति परिवार हो सकता है। यह इलाज करने वाले संस्थान द्वारा दी जायेगी।
*45.स्वास्थ्य संस्थान पर योजना की जानकारी किसके द्वारा प्राप्त की जा सकती है?*
इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान पर योजना की जानकारी देने एवं रोगी की सहायता हेतु स्वास्थ्य मार्गदर्शक उपलब्ध है।
*46.भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में आशा सहयोगिनी की क्या भूमिका है?*
ग्राम स्तर पर आशा सहयोगिनी स्वास्थ्य की दृष्टि से स्वास्थ्य विभाग तथा समुदाय को जोडने वाली महत्वपूर्ण कडी है। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में भी अपनी सक्रिय सहभागिता से वे वंचित और अभावग्रस्त वर्ग को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा दिलाने में मदद कर रही है। इसके लिये आशा सहयोगिनी को अपने संबंधित क्षेत्र के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) कुल लाभार्थीयों की सूची प्रदान की गयी है।
आशा सहयोगिनी द्वारा अपनी आशा डायरी में लाभार्थी परिवारों को चिन्हित कर सभी लाभार्थी परिवारों से घर-घर जाकर संपर्क किया गया और भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की समस्त जानकारी दी गयी।
जानकारी देने में मदद के लिये उनको ’’बी.एस.बी.वाई. किट’ प्रदान किये गये जिसमें-
1आशा ब्राशर।
2.  भामाशाह कार्ड की डमी।
3.  राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड की डमी।
4.  निजी अस्पतालों की सूची व जानकारी वाला पम्पलेटस् प्रदान किये गये।
इस प्रकार आशा सहयोगिनी अपने क्षेत्र के प्रत्येक लाभार्थी परिवार तक भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की जानकारी पहुचानें, उन्हे मार्गदर्शन देने, अधिकृत निजी अस्पतालों की सूची उपलब्ध कराने और चिकित्सा संस्थान में लाभार्थियो की पहचान में सहयोग प्रदान कर रही है।

बुधवार, 21 जून 2017

स्कूली शिक्षा में कला : एक शिक्षक का नजरिया

स्कूली शिक्षा में कला : एक शिक्षक का नजरिया
►प्रशान्त सील
कल्पनाशील सोच-विचार को शायद एक दक्षता न माना जाता हो लेकिन यह अधिकतर कलात्मक दक्षताओं से भी अधिक आधारभूत है। छोटी कक्षाओं में यह सिखाना बहुत मुश्किल है। कला के संसार में अलग ही कल्पना की अलग ही उड़ान होती है और इस संसार में प्रवेश कर पाना आसान नहीं है। कला-शिक्षण के शुरुआत में सम्भव है कि किसी शिक्षक ने कोई आकृति बनाने या उसे रंगों से भरने या फिर सीधी लकीरें खींचने के लिए कहा हो। कभी-कभी बच्चे ऐसा करने में बोरियत महसूस करते हैं और कला की कक्षाओं में उनकी दिलचस्पी घटने लगती है। मैं आमतौर पर उन्हें कोई रंग-बिरंगा दृश्‍यचित्र बनाने को देता हूँ, या फिर जानवरों या किसी इन्सान की हल्की-फुलकी हंसी भरी तसवीर, तितलियाँ और चित्रकारी आदि। यदि यह उनका खुद का चुनाव होगा तो अधिक सम्भावना है कि वे इस पर मेहनत करेंगे। कभी-कभी वे शिल्प कार्य भी करते हैं। मैंने पाया है कि उन्हें इस गतिविधि में अमूमन अधिक मजा आता है।
आमतौर पर कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के बच्चों को जो वे करना चाहते हैं उसके चुनाव की छूट दी जाती है। कुछ दिलचस्पी लेते हैं और कुछ नहीं। बेहतर है कि विद्यार्थियों को ऐसा काम न दिया जाए जिसके लिए वे तैयार न हों। मेरी कोशिश विभिन्न विषयों पर कुछ विचार उन तक पहुँचाने की रहती है जिन्हें वे अपनी स्केच-बुक में प्रयोग कर सकें। वे बहुत अच्छा प्रदर्शन न कर रहे हों तब भी मैं उन्हें प्रोत्साहित करता हूँ। विद्यार्थी विचारों को अपना लेते हैं तो कुछ करने की इच्छा और प्रेरणा सबसे सशक्त होते हैं। यानी किए गए महत्वपूर्ण चुनाव में उनका दखल होना चाहिए। चुनाव वे स्वयं करेंगे तो काम भी बेहतर करेंगे।
महत्वपूर्ण चरण तब आता है जब वे बड़ी कक्षाओं में पहुँचते हैं, जैसे कि कक्षा 12 में। इसी दौर में वे रेखाचित्र बनाने की दक्षताएँ, कला का ज्ञान और रंगों की समझ विकसित करते हैं। इन कक्षाओं में स्थिर जीवन (स्टिल लाइफ़), कल्पनाशील चित्रकला, पुस्तकों के आवरण चढ़ाना, पोस्टर-निर्माण और लिनो प्रिन्ट आदि विशेष विषय होते हैं। पाठ्यचर्या का यह हिस्सा उन्हें सामग्री से “खेल-खिलवाड़” करने का मौका देता है। उदाहरण के लिए, पानी के रंगों की पारदर्शी रचना पर पेस्टल रंगों से चित्रकारी करना। पाठ का यह हिस्सा कला नहीं बल्कि कला की दक्षता या शिल्प है जो शिक्षक द्वारा बहुत ही ध्यान से पेश किया जाता है। कुछ विद्यार्थी आवेग में काम करते हैं, काम के महत्वपूर्ण पक्षों पर पर्याप्त ध्यान दिए बिना उसे खत्म करने की जल्दी में रहते हैं। मैं उन्हें अपने काम में जटिलता का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। खुले सवाल छोड़ता हूँ जिनसे ऐसे मुद्दे उठें जिन्हें वे अपने काम के लिए विचार में ला पाएँ। उनके लिए सबसे अधिक आवश्यकता सोच पाने के अभ्यास की है। मैं सुझाव माँगता हूँ तो पहले पूछता हूँ कि विद्यार्थी किस बारे में सोच रहा था। बहुत बार तो उसके पास पहले से ही कोई विचार होता है मगर उसे प्रयोग में लाने का आत्मविश्वास नहीं होता। मैं उन्हें यह कहकर प्रोत्साहित करता हूँ कि कुछ बातें अभ्यास से ही सीखी जा सकती हैं और अधिक अभ्यास बेहतर नतीजों की ओर ले जाता है।
पिछले कुछ सालों में मैंने जीवन में कला-शिक्षा के महत्व के बारे में अपनी सोच कुछ विद्यार्थियों तक पहुँचाई। पिछले ही साल कक्षा 12 के दो विद्यार्थी अपने डिग्री पाठ्यक्रम में फ़ैशन डिज़ाइनिंग करना चाहते थे। इसमें कोई शक नहीं कि बच्चे के व्यक्तित्व और दक्षताओं के विकास में कला-शिक्षा का महत्व है। कला से बच्चे की बुद्धि का विकास होता है। देखा गया है कि कला से सम्बद्ध गतिविधियों में शामिल बच्चे अन्य विषयों की भी बेहतर समझ विकसित कर पाते हैं फिर वह चाहे भाषा हो या भूगोल या फिर विज्ञान। अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि कला के सम्पर्क और परिचय में आने से मस्तिष्क की गतिविधि को बढ़ावा मिलता है। बच्चा समस्याओं के हल निकालना सीखता है। वह अपने विचार अलग-अलग तरह से दूसरों तक पहुँचाना भी सीखता है। कला बच्चे के समग्र व्यक्तित्व का विकास करती है, उसमें आत्म-सम्मान का निर्माण होता है और अनुशासन भी आता है। कला से सम्बद्ध होने की वजह से एक बच्चा अधिक रचनात्मक और नवाचारी बनता है तथा दूसरों के साथ सहयोग करना सीखता है। सारांश में, कला-गतिविधियाँ बच्चे के व्यक्तित्व-विकास, बौद्धिक प्रगति तथा अवलोकनात्मक दक्षताओं में बेहतरी लाने के लिए आवश्यक हैं।

योग का महत्व

योग का महत्व
यह प्रमाणित तथ्य हैं की योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है.
हम मनुष्य किसी चीज़ की ओर तभी आकर्षित होते हैं जब उनसे हमें लाभ मिलता है. जिस तरह से योग के प्रति हमलोग आकर्षित हो रहे हैं वह इस बात का संकेत हैं कि योग के कई फायदे हैं. योग को न केवल हमारे शरीर को बल्कि मन और आत्मिक बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है. दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे हैं, आइये! इनसे परिचय करें.
स्त्री पुरूष, बच्चे, युवा, वृद्ध सभी के लिए योग लाभप्रद और फायदेमंद है. शरीर क्षमताओं एवं लोच के अनुसार योग में किसी परिवर्तन और बदलाव किया जा सकता है. किसी भी स्थिति में योग लाभप्रद होता है.
मन और भावनाओं पर योग
जीवन में सकारात्मक विचारों का होना बहुत आवश्यक है. निराशात्मक विचार असफलता की ओर ले जाता है. योग से मन में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है. योग से आत्मिक बल प्राप्त होता है और मन से चिंता, विरोधाभास एवं निराशा की भावना दूर हो जाती है. मन को आत्मिक शांति एवं आराम मिलता है जिससे मन में प्रसन्नता एवं उत्साह का संचार होता है. इसका सीधा असर व्यक्तित्व एवं सेहत पर होता है.
तनाव से मुक्ति (Stress releaf through Yoga)
तनाव अपने आप में एक बीमारी है जो कई अन्य बीमारियों को निमंत्रण देता है. इस तथ्य को चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है. योग का एक महत्वपूर्ण फायदा यह है कि यह तनाव से मुक्ति प्रदान करता है. योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, यह प्रमाणित तथ्य है. योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है. तनाव मुक्त होने से शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है.
मानसिक क्षमताओं का विकास (Mental Functions improvement through Yoga)
स्मरण शक्ति एवं बौद्धिक क्षमता जीवन में प्रगति के लिए प्रमुख साधन माने जाते हैं. योग से मानसिक क्षमताओं का विकास होता है और स्मरण शक्ति पर भी गुणात्मक प्रभाव होता है. योग मुद्रा और ध्यान मन को एकाग्र करने में सहायक होता है. एकाग्र मन से स्मरण शक्ति का विकास होता है. प्रतियोगिता परीक्षाओं में तार्किक क्षमताओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं. योग तर्क शक्ति का भी विकास करता है एवं कौशल को बढ़ता है. योग की क्रियाओं द्वारा तार्किक शक्ति एवं कार्य कुशलता में गुणात्मक प्रभाव होने से आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
शरीर में लोच (Physical Functions improvement through Yoga)
योग से शरीर मजबूत और लचीला होता है. योग मांसपेशियों को सुगठित और शरीर को संतुलित रखता है. सुगठित और संतुलित और लोचदार शरीर होने से कार्य क्षमता में भी वृद्धि होती है. कुछ योग मुद्राओं से शरीर की हड्डियां भी पुष्ट और मजबूत होती हैं. यह अस्थि सम्बन्धी रोग की संभावनाओं को भी कम करता है.
सेहत और योग (Yoga and Health)
योग शरीर को सेहतमंद बनाए रखता है और कई प्रकार की शरीरिक और मानसिक परेशानियों को दूर करता है. योग श्वसन क्रियाओं को सुचारू बनाता है. योग के दौरान गहरी सांस लेने से शरीर तनाव मुक्त होता है. योग से रक्त संचार भी सुचारू होता है और शरीर से हानिकारक टाँक्सिन निकल आते हैं. यह थकान, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है एवं ब्लड प्रेसर को सामान्य बनाए रखने में भी सहायक होता है.

विश्राम का महत्व

विश्राम का महत्व -
विश्राम का जीवन में बहुत ही ज्यादा महत्व माना जाता है क्यों ? ऐसा इसलिए होता है कि जब हम पूरे दिन काम करते हैं तो हमारे शरीर के बहुत से सेल्स नष्ट हो जाते हैं और कुछ बाईप्रोडक्ट बनने लगते हैं जैसे- कैमिकल आदि। अब होगा क्या कि हम जितना ज्यादा काम करेंगे हमारे शरीर में उतना ही वेस्टप्रोडेक्ट बनता जाएगा लेकिन पूरी तरह व्यस्त रहने के कारण शरीर को उसे बाहर निकालने का समय ही नहीं मिल पाएगा। इसी को देखते हुए प्रकृति ने विश्राम करने का नियम बनाया है ताकि जब हम विश्राम करें तो हमारी सारी क्रियाएं बंद हो जाए और यह वेस्टप्रोडेक्ट बाहर निकल जाए।कई बार ऐसा भी होता है कि हम मानसिक या शारीरिक रूप से थक जाते हैं, कई बार काम के बोझ के कारण भी थकावट आ जाती है ऐसी स्थिति में विश्राम कर लेना ही उचित है। विश्राम के लिए श्वासन में लेटना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
                      यदि अधिक मानसिक कार्य के कारण तनाव है तो ऐसे में भी श्वासन में लेट सकते हैं। लेकिन श्वासन में आप केवल घर पर ही लेट सकते हैं, ऑफिस में या कहीं बाहर नहीं लेट सकते। ऐसे में श्वासन के स्थान पर अंजनिमुद्रा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे भी मानसिक तनाव दूर होता है।इसके लिए अपने हाथों को कटोरी की मुद्रा में बना लें, फिर आंखों को बंद करके एक हाथ से एक आंख को ढकें इससे माथे पर आपकी अंगुलियां आ जाएंगी। अब इसी तरह दूसरे हाथ को दूसरी आंखों पर टिकाएं जिससे माथेके ऊपर आपकी अंगुलियां आ जाएगी। दो से दस मिनट तक इस स्थिति में रहने के बाद आपकी सारी मानसिक परेशानी दूर हो जाएगी। इसके बाद अपने काम को शुरू कर सकते हैं।
अब जो नींद है वह रात के समय बहुत जरूरी है। जितनी गहरी नींद आएगी उतना ज्यादा हमारा शरीर डिटॉक्सीफाई होगा और जितना ज्यादा शरीर डिटॉक्सीफाई होगा उतनी ज्यादा फ्रेशनेश रहेगी।यदि रात को पेशाब करने या पानी पीने के लिए उठ गए तो इसका अर्थ है कि आपको गहरी नींद नहीं आई है। भोजन में जितना ज्यादा वेस्टप्रोडेक्ट होगा उतनी गहरी नींद आएगी लेकिन यह आलस्य वाली नींद होगी। स्टूडेंट, डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट आदि जिन्हें अधिक मानसिक कार्य करना पड़ता है, अधिक देर तक जागना पड़ता है। ऐसी व्यक्तियों को नैचुरल डाईट पर रहना चाहिए ताकि शरीर में वेस्टप्रोडेक्ट कम बने।अगर वेस्टप्रोडेक्ट शरीर में कम बनेगा तो नींद भी आवश्यकता से कम आएगी। हम क्या करते हैं कि अक्सर नींद को खत्म करने के लिए चाय-कॉफी का इस्तेमाल करते रहते हैं। लेकिन इसके स्थान पर फलाहार ले लिया जाए तो वेस्टप्रोडेक्ट बिल्कुल ही कम हो जाएंगे और शरीर को कोई नुकसान भी नहीं होगा। यदि कोई फंक्सन है, शादी-पार्टी और देर रात तक जागना हो तो सुबह से ही फलाहार, जूस आदि लेना शुरु कर दें। इससे न आलस्य आएगा और न ही थकावट होगी।

प्रदूषण

प्रदूषण पर निबंध 6 (450 शब्द)
प्रौद्योगिक उन्नति की आधुनिक दुनिया में, प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है जो की पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित कर रहा है। प्रदूषण का सबसे महत्वपूर्ण प्रकार हैं वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भू प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। सभी प्रकार के प्रदूषण निस्संदेह पूरे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं अतः जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। मनुष्य के मूर्ख आदतों से पृथ्वी पर हमारी स्वाभाविक रूप से सुंदर वातावरण दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
वाहनो के बढ़ती संख्या की वजह से उत्पन्न हानिकारक और ज़हरीली गैसों का उत्सर्जन, कारखाने और खुले में आग जलाना, वायु प्रदुषण के मुख्य कारण हैं। जीवन को बेहतर बनाने की भीड़ में, हर कोई अपने आसान दैनिक दिनचर्या के लिए अच्छी तरह से संसाधन चाहता है, लेकिन वे अपने प्राकृतिक परिवेश के बारे में जरा सा भी नहीं सोचते। ज्यादातर वायु प्रदूषण रोजमर्रा की सार्वजनिक परिवहन के द्वारा होता है। कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड विषैली गैसें है जो की वायु को प्रदूषित करती है और वातावरण में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर रहीं हैं|
उत्पादक कारखानें भी लोगों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, वायु प्रदूषण के लिए बड़ा योगदान कर रहीं हैं। निर्माण प्रक्रिया के दौरान कारखानों के द्वारा कुछ विषाक्त गैसें, गर्मी और ऊर्जा रिलीज होती है। कुछ अन्य आदतें जैसे की खुले स्थान पे घरेलु कचरे को जलाना आदि भी हवा की गुणवत्ता बिगाड़ रहीं हैं| वायु प्रदूषण इंसान और जानवरों में फेफड़ों के कैंसर सहित अन्य सांस की बीमारियां उत्पन्न कर रहीं हैं|
जल प्रदूषण भी एक बड़ा मुद्दा है जो सीधे समुद्री जीवन को प्रभावित करता है क्योंकि वे अपने उत्तरजीविता के लिए केवल पानी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों पर निर्भर रहते हैं। धीरे-धीरे समुद्री जीवन का ग़ायब होना वास्तव में मनुष्य और जानवरों की आजीविका पर असर डालेगा। कारखानों, उद्योगो, सीवेज सिस्टम और खेतों आदि के हानिकारक कचरे का सीधे तौर पे नदियों, झीलों और महासागरों के पानी के मुख्य स्रोत में मिलाना ही जल को दूषित करने का कारण है। दूषित पानी पीना गंभीर स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न करता है।
उर्वरक, कवकनाशी, शाकनाशी, कीटनाशकों और अन्य कार्बनिक यौगिकों के उपयोग के कारण मृदा प्रदूषण होता है। यह परोक्ष रूप से हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है क्योकि हम मिट्टी में उत्पादित खाद्य सामग्री खाते हैं। भारी मशीनरी, वाहन, रेडियो, टीवी, स्पीकर आदि द्वारा उत्पन्न ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण के कारण है जो की सुनने की समस्याओ और कभी कभी बहरापन का कारण बनती हैं। हमें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए अपने पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है जिससे की हम एक स्वस्थ्य और प्रदुषण मुक्त वातावरण पा सके।

जाने दवाइयों के सेवन से जुडी सावधानियां और Medicine Side Effects

Posted by Seema Gautam
डॉक्टर के परामर्श के बिना बहुत से व्यक्ति स्वयं व दूसरों को दवाएं खाने व खिलाने लगते हैं जो अन्य खतरों के अलावा Medicine Side Effects से भी प्रभावित होते है। अपनी मर्जी से सिर दर्द में एस्पिरिन की गोली, कमजोरी में विटामिन्स की गोलियां, कैप्सूल अथवा सिरप, हाजमा ठीक करने के लिए एन्जाइम्स की गोली, नींद लाने के लिए नींद की गोली आए दिन खा लेना मामूली बात हो गई है। आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी “नीम हकीम खतरा-ए-जान” अर्थात अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है और जब शरीर और स्वास्थ्य का मामला हो, तो ऐसे में दवाओं की आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर उनका सेवन करना और कराना खतरे से खाली नहीं है।
माना कि कभी कभार इस प्रकार के दवाओं के सेवन से लाभ मिल भी जाता है, लेकिन यह लाभ ठीक वैसा ही होता है, जैसा कि अंधेरे में ठीक निशाना लगना। यदि डॉक्टर के परामर्श के अनुसार एलोपैथिक दवाएं सेवन की जाएं, तो वे मरीज की शारीरिक अवस्था देखकर देते हैं, जिससे Medicine Side Effects होने की संभावना कम रहती है, परंतु यदि उनका प्रयोग अपनी मर्जी से अनिश्चित काल तक किया जाए, तो इनके Side Effects होने की काफी संभावना रहती है। उदाहरण के लिए यदि आपके सिर में तेज दर्द हो रहा है, तो ऐसी हालत में कोई दर्द निवारक गोली ले लेना हानिप्रद नहीं है, लेकिन यदि आपको हर रोज सिर दर्द की तकलीफ होती हो, तब आप डॉक्टर के परामर्श के बिना कई दिनों तक लगातार दर्द निवारक गोलियां खाते रहते हैं, तो यह आदत निश्चय ही आपके शरीर और स्वास्थ्य, दोनों के लिए हानिकारक सिद्ध होगी।
स्वयं दवाइयां न लें –
सभी तरह की एंटीबायोटिक दवाएं लिवर में ही निष्क्रिय की जाती हैं। इसी कारण उनका लिवर पर बुरा असर होता है। हमारी आंतों के मित्र जीवाणु, जो “बी’ काम्पलेक्स बनाकर हमारी सहायता करते हैं, एंटीबायोटिक के प्रयोग से मर जाते हैं। अत: इनके प्रयोग के समय साथ में विटामिन बी काम्पलेक्स की गोलियां सेवन के लिए दी जाती हैं।
टेट्रासाइक्लीन के Medicine Side Effects से रोगी को उलटी, अतिसार, मुंह में छाले, पेट में गैस बनना, भूख कम लगना, नाखून व दांतों का पीला पड़ना जैसे कष्ट भुगतने पडते हैं।
कुछ दवाई जो बुखार के कैप्सूल के नाम से खरीदते हैं और अपनी मर्जी से लंबे बुखार में देते हैं। इसके सेवन से रक्त में सफेद कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है। इसके Medicine Side Effects से नर्व की विकृति से रोगी की सुनने की शक्ति प्रभावित होती है। इसके अलावा त्वचा में खुजली, उलटी, सिर दर्द, जी मिचलाना, जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, पेट दर्द आदि दुष्परिणाम भी अनुसंधानों से प्राप्त हुए हैं।
बीपी या फिर बुखार में बिना डॉक्टर के परामर्श के दवा नहीं लेनी चाहिए। इससे भले ही अल्पकालिक फायदा मिल जाए, लेकिन मल्टी ड्रग रजिस्टेंट की आशंका बढ़ जाती है।
आजकल कार्टिजोन वर्ग की हाइड्राकोर्टिजोन, प्रिडनीसोलोन आदि दवाएं विस्तृत रूप से इस्तेमाल की जाती हैं। इनके लगातार सेवन करने और एकाएक छोड़ने से घातक लक्षण भी देखने में आते हैं। शरीर में जल संचय होना, सारे शरीर में शोथ, चेहरा सूजना इनमें प्रमुख हैं।
इसी प्रकार से मनचाहे टॉनिक का लंबे समय तक इस्तेमाल करना हानिकारक हो सकता है। इसमें मिला आयरन, विटामिन्स, ह्मिसरोफास्फेट्स, हार्मोन्स की शरीर में अधिकता हानिकारक प्रभाव पैदा करते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि Medicine Side Effects से बचने के लिए दवाइयां अपनी इच्छानुसार न खाकर, डॉक्टर के निर्देशानुसार ही सेवन की जाएं। तभी हम इनके दुष्परिणामों से बच सकते हैं।
खांसी को दबाने वाले सिरप खांसी आने की उत्तेजना को कम करते हैं। इसे सप्रेसेंट कहते हैं। खांसी की वजह पर असर करने वाली दवा बलगम बाहर निकालती है। इसे एक्सपेक्टरेंट कहते हैं। अगर आपको सूखी खांसी है तो सप्रेसेंट का इस्तेमाल करें और अगर बलगम वाली खांसी है तो एक्सपेक्टरेंट का। गलत दवा का इस्तेमाल आपकी तकलीफें बढ़ा सकता है।
हर दिन लिया जाने वाला संतुलित डायट आपके शरीर को सभी पोषक तत्व देता है। किसी भी व्यक्ति को मल्टीविटामिन की गोलियां किसी खास अवस्था में ही डॉक्टर लेने के लिए कहते हैं।
दवाइयों की जानकारी जरूरी है अकसर एलोपैथिक दवाएं सबके लिए लाभदायक नहीं होतीं, क्योंकि एक ही दवा किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाती है, तो दूसरे को असर नहीं करती। इसलिए इन दवाओं का प्रयोग करने से पहले इनके गुण-दोषों, मात्रा, दुष्प्रभाव, सेवन अवधि इत्यादि की बखूबी जानकारी होनी चाहिए।
आप जो भी दवा लेते हैं, उसके Medicine Side Effects के बारे में जरूर पता करें। ओटीसी यानी ओवर द काउंटर कैटिगरी में आने वाली दवाओं के भी कुछ Side Effects होते हैं। इसकी जानकारी दवा के रैपर या बॉटल पर लिखी होती है।
एलोपैथी की तरह ही आयुर्वेद की दवाओं का भी मिसयूज घातक साबित हो रहा है। दवाएं किसी भी पद्धति की हों, लेकिन उनके इस्तेमाल के लिए सख्त गाइड लाइन और निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एक आयुर्वेद दवा के इस्तेमाल के बाद न्यूयार्क में स्टडी की गई। इससे शरीर में Medicine Side Effects से लेड की मात्रा बढ़ गई।
वैसे एक स्वस्थ जीवनचर्या अपनाकर आप रोगों के इस कुचक्र से अपने आपको बचा सकते है, परन्तु फिर भी आपको अगर कोई रोग हो जाये तो नेचुरल या आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को प्राथमिकता दें | इनका असर थोड़ी देर से जरुर होता है पर इनके Medicine Side Effects ना के बराबर होते है |
हमारी वेबसाइट पर एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए ढेरो सुझाव व् लेख दिए गये है साथ ही छोटी- मोटी बिमारियों को ठीक करने के लिए कुछ आसन घरेलू नुस्खे भी बताये जाते है, इनका लाभ उठायें | और अपनी और अपने परिवार के स्वास्थ्य का ख्याल रखें
अगर आपको भी डॉक्टर का पर्चा ठीक से समझ नहीं आता है तो नीचे दिए गये कुछ शॉर्टकट जानना आपके लिए अच्छा होगा।
AC: खाने से पहले
PC: खाने के बाद
OD: दिन में एक बार
BD/BDS: दिन में दो बार
TD/TDS: दिन में तीन बार
QD/QDS: दिन में चार बार
SOS: जब जरूरत लगे
Tab: टैबलेट
Cap: कैप्सूल
Amp: इंजेक्शन रूप में
Ad Lib: जितनी जरूरत हो, उतना ही लें
G or Gm: ग्राम
Gtt: ड्रॉप्स
H: …घंटे बाद
Mg: मिलिग्राम
Ml: मिलिलीटर
PO: मुंह से

मंगलवार, 20 जून 2017

संपादकीय : शर्मिंदा - एक प्रेरणादायक कहानी

शर्मिंदा
फ़ोन की घंटी तो सुनी मगर आलस की वजह से रजाई में ही लेटी रही। उसके पति राहुल को आखिर उठना ही पड़ा। दूसरे कमरे में पड़े फ़ोन की घंटी बजती ही जा रही थी।इतनी सुबह कौन हो सकता है जो सोने भी नहीं देता, इसी चिड़चिड़ाहट में उसने फ़ोन उठाया। “हेल्लो, कौन” तभी दूसरी तरफ  से आवाज सुन सारी नींद खुल गयी।
“नमस्ते पापा।” “बेटा, बहुत दिनों से तुम्हे मिले नहीं सो हम दोनों ११ बजे की गाड़ी से आ रहे है। दोपहर का खाना साथ में खा कर हम ४ बजे की गाड़ी वापिस लौट जायेंगे। ठीक है।” “हाँ पापा, मैं स्टेशन पर आपको लेने आ जाऊंगा।”.फ़ोन रख कर वापिस कमरे में आ कर उसने रचना को बताया कि मम्मी पापा ११ बजे की गाड़ी से आरहे है और दोपहर का खाना हमारे साथ ही खायेंगे।
.रजाई में घुसी रचना का पारा एक दम सातवें आसमान पर चढ़ गया। “कोई इतवार को भी सोने नहीं देता, अब सबके के लिए खाना बनाओ। पूरी नौकरानी बना दिया है।” गुस्से से उठी और बाथरूम में घुस गयी। राहुल हक्का बक्का हो उसे देखता ही रह गया।जब वो बाहर आयी तो राहुल ने पूछा “क्या बनाओगी।” गुस्से से भरी रचनाने तुनक के जवाब दिया “अपने को तल के खिला दूँगी।” राहुल चुप रहा और मुस्कराता हुआ तैयार होने में लग गया, स्टेशन जो जाना था।
थोड़ी देर बाद ग़ुस्सैल रचना को बोल कर वो मम्मी पापा को लेने स्टेशन जा रहा है वो घर से निकल गया।.रचना गुस्से में बड़बड़ाते हुए खाना बना रही थी।दाल सब्जी में नमक, मसाले ठीक है या नहीं की परवाह किए बिना बस करछी चलाये जा रही थी। कच्चा पक्का खाना बना बेमन से परांठे तलने लगी तो कोई कच्चा तो कोई जला हुआ। आखिर उसने सब कुछ ख़तम किया, नहाने चली गयी।.
नहा के निकली और तैयार हो सोफे पर बैठ मैगज़ीन के पन्ने पलटने लगी।उसके मन में तो बस यह चल रहा था कि सारा संडे खराब कर दिया। बस अब तो आएँ , खाएँ और वापिस जाएँ ।थोड़ी देर में घर की घंटी बजी तो बड़े बेमन से उठी और दरवाजा खोला। दरवाजा खुलते ही उसकी आँखें हैरानी से फटी की फटी रह गयी और मुँह सेएक शब्द भी नहीं निकल सका।सामने राहुल के नहीं उसके अपने मम्मी पापा खड़े थे जिन्हें राहुल स्टेशन से लाया था।.
मम्मी ने आगे बढ़ कर उसे झिंझोड़ा “अरे, क्या हुआ। इतनी हैरान परेशान क्यों लग रही है। क्या राहुल ने बताया नहीं कि हम आ रहे हैं।” जैसे मानो रचना के नींद टूटी हो “नहीं, मम्मी इन्होंने तो बताया था पर…. रर… रर। चलो आप अंदर तो आओ।” राहुल तो अपनी मुसकराहट रोक नहीं पा रहा था।.
कुछ देर इधर उधर की बातें करने में बीत गया। थोड़ी देर बाद पापा ने कहाँ “रचना, गप्पे ही मारती रहोगी या कुछ खिलाओगी भी।” यह सुन रचना को मानो साँप सूँघ गया हो। क्या करती, बेचारी को अपने हाथों ही से बनाए अध पक्के और जले हुए खाने को परोसना पड़ा। मम्मी पापा खाना तो खा रहे थे मगर उनकी आँखों में एक प्रश्न था जिसका वो जवाब ढूँढ रहे थे। आखिर इतना स्वादिष्ट खाना बनाने वाली उनकी बेटी आज उन्हें कैसा खाना खिला रही है।.
रचना बस मुँह नीचे किए बैठी खाना खा रही थी। मम्मी पापा से आँख मिलाने की उसकी हिम्मत नहीं हो पा रही थी। खाना ख़तम कर सब ड्राइंग रूम में आ बैठे। राहुल कुछ काम है अभी आता हुँ कह कर थोड़ी देर के लिए बाहर निकल गया। राहुल के जाते ही मम्मी, जो बहुत देर से चुप बैठी थी बोल पड़ी “क्या राहुल ने बताया नहीं था की हम आ रहे हैं।”.
तो अचानक रचना के मुँह से निकल गया “उसने सिर्फ यह कहाँ था कि मम्मी पापा लंच पर आ रहे हैं, मैं समझी उसके मम्मी पापा आ रहे हैं।”फिर क्या था रचना की मम्मी को समझते देर नहीं लगी कि ये मामला है। बहुत दुखी मन से उन्होंने रचना को समझाया “बेटी, हम हों या उसके मम्मी पापा तुम्हे तो बराबर का सम्मान करना चाहिए। मम्मी पापा क्या, कोई भी घर आए तो खुशी खुशी अपनी हैसियत के मुताबिक उसकी सेवा करो। बेटी, जितना किसी को सम्मान दोगी उतना तुम्हे ही प्यार और इज़्ज़त मिलेगी। जैसे राहुल हमारी इज़्ज़त करता है उसी तरह तुम्हेभी उसके माता पिता और सम्बन्धियों की इज़्ज़त करनी चाहिए। रिश्ता कोई भी हो, हमारा या उसका, कभी फर्क नहीं करना।”रचना की आँखों में ऑंसू आ गए और अपने को शर्मिंदा महसूस कर उसने मम्मी को वचन दिया कि आज के बाद फिर ऐसा कभी नहीं होगा..!
By Mahaveer Acharya

शुक्रवार, 16 जून 2017

सोसियल मीडिया के नुकसान

सामाजिक मीडिया
importance of social media in our lives
सामाजिक मीडियापारस्परिक संबंध के लिए अंतर्जाल या अन्य माध्यमों द्वारा निर्मित आभासी समूहों को संदर्भितकरता है। यह व्यक्तियों और समुदायों के साझा, सहभागी बनाने का माध्यम है।
इसका उपयोग सामाजिक संबंध के अलावा उपयोगकर्ता सामग्री के संशोधन के लिए उच्च पारस्परिक मंच बनाने के लिए मोबाइल औरवेबआधारित प्रौद्योगिकियों के प्रयोग के रूप में भी देखा जा सकता है।स्वरूपसामाजिक मीडिया के कई रूप हैं जिनमें किइन्टरनेटफोरम, वेबलॉग, सामाजिकब्लॉग, माइक्रोब्लागिंग, विकीज, सोशल नेटवर्क, पॉडकास्ट, फोटोग्राफ, चित्र, चलचित्र आदि सभी आते हैं। अपनी सेवाओं के अनुसार सोशल मीडिया के लिए कई संचार प्रौद्योगिकी उपलब्ध हैं। उदाहरणार्थ-फेसबूक – विश्व का सर्वाधिक लोकप्रिय सोशल साइट*.सहयोगी परियोजना (उदाहरण के लिए, विकिपीडिया)*.ब्लॉग और माइक्रोब्लॉग (उदाहरण के लिए,ट्विटर)*.सोशल खबर ​​नेटवर्किंग साइट्स (उदाहरण के लिए डिग और लेकरनेट)*.सामग्री समुदाय (उदाहरण के लिए, यूट्यूब और डेली मोशन)*.सामाजिक नेटवर्किंग साइट (उदाहरण के लिए, फेसबुक)*.आभासी खेल दुनिया (जैसे, वर्ल्ड ऑफ़ वॉरक्राफ्ट)*.आभासी सामाजिक दुनिया (जैसे सेकंड लाइफ)
[1]विशेषता
सामाजिक मीडिया अन्य पारंपरिक तथा सामाजिक तरीकों से कई प्रकार से एकदम अलग है। इसमें पहुँच, आवृत्ति, प्रयोज्य, ताजगी और स्थायित्व आदि तत्व शामिल हैं। इन्टरनेट के प्रयोग से कई प्रकार के प्रभाव होते हैं। निएलसन के अनुसार ‘इन्टरनेट प्रयोक्ता अन्य साइट्स की अपेक्षा सामाजिक मीडिया साइट्स पर ज्यादा समय व्यतीत करते हैं’।दुनिया में दो तरह की सिविलाइजेशन का दौर शुरू हो चुका है, वर्चुअल और फिजीकल सिविलाइजेशन। आने वाले समय में जल्द ही दुनिया की आबादी से दो-तीन गुना अधिक आबादी अंतर्जाल पर होगी। दरअसल, अंतर्जाल एक ऐसी टेक्नोलाजी केरूप में हमारे सामने आया है, जो उपयोग के लिए सबको उपलब्ध है और सर्वहिताय है।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स संचार व सूचना का सशक्त जरिया हैं, जिनके माध्यम से लोग अपनी बात बिना किसी रोक-टोक के रख पाते हैं। यही से सामाजिक मीडियाका स्वरूप विकसित हुआ है।
[2]व्यापारिक उपयोगजन सामान्य तक पहुँच होने के कारण सामाजिक मीडिया को लोगों तक विज्ञापन पहुँचाने के सबसे अच्छा जरिया समझा जाता है। हाल ही के कुछ एक सालो में इंडस्ट्री में ऐसी क्रांति देखी जा रही है।फेसबुकजैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं का वर्गीकरण विभिन्न मानकोंके अनुसार किया जाता है जिसमें उनकी आयु, रूचि, लिंग, गतिविधियों आदि को ध्यान में रखते हुए उसके अनुरूप विज्ञापन दिखाए जाते हैं। इस विज्ञापन के सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हो रहे हैं साथ ही साथ आलोचना भी की जा रही है।
[3]समालोचनासामाजिक मीडिया की समालोचना विभिन्न प्लेटफार्म के अनुप्रयोग में आसानी, उनकी क्षमता, उपलब्ध जानकारी की विश्वसनीयता के आधार पर होती रही है। हालाँकि कुछ प्लेटफॉर्म्स अपने उपभोक्ताओं को एक प्लेटफॉर्म्स से दुसरे प्लेटफॉर्म्स के बीच संवाद करने की सुविधा प्रदान करते हैं पर कई प्लेटफॉर्म्स अपने उपभोक्ताओं को ऐसी सुविधा प्रदान नहीं करते हैं जिससे की वे आलोचना का केंद्र विन्दु बनते रहे हैं। वहीँ बढती जा रही सामाजिक मीडिया साइट्स के कई सारे नुकसान भी हैं। ये साइट्स ऑनलाइन शोषण का साधन भी बनती जा रही हैं। ऐसे कई केस दर्ज किए गए हैं जिनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का प्रयोग लोगों को सामाजिक रूप से हनी पहुँचाने, उनकी खिचाई करने तथा अन्य गलत प्रवृत्तियों से किया गया।
[4][5]सामाजिक मीडिया के व्यापक विस्तार के साथ-साथ इसके कई नकारात्मक पक्ष भी उभरकर सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष मेरठ में हुयी एक घटना ने सामाजिक मीडिया के खतरनाक पक्ष को उजागर किया था। वाकया यह हुआ था कि उस किशोर ने फेसबूक पर एक ऐसी तस्वीर अपलोड कर दी जो बेहद आपत्तीजनक थी, इस तस्वीर के अपलोड होते ही कुछ घंटे के भीतर एक समुदाय के सैकडों गुस्साये लोग सडकों पर उतार आए। जबतक प्राशासन समझ पाता कि माजरा क्या है, मेरठ में दंगे के हालात बन गए।प्रशासन ने हालात को बिगडने नहीं दिया और जल्द ही वह फोटोअपलोड करने वाले तक भी पहुँच गया। लोगों का मानना है कि परंपरिक मीडिया के आपत्तीजनक व्यवहार की तुलना में नए सामाजिक मीडिया के इस युग का आपत्तीजनक व्यवहार कई मायनेमें अलग है। नए सामाजिक मीडिया के माध्यम से जहां गडबडी आसानी से फैलाई जा सकती है, वहीं लगभग गुमनाम रहकर भी इस कार्य को अंजाम दिया जा सकता है। हालांकि यह सच नहीं है, अगर कोशिश की जाये तो सोशल मीडिया पर आपत्तीजनक व्यवहार करने वाले को पकडा जा सकता है और इन घटनाओं की पुनरावृति को रोका भी जा सकता है। केवल मेरठ के उस किशोर का पकडे जाना ही इसका उदाहरण नहीं है, वल्कि सोशल मीडिया की ही दें है कि लंदन दंगों में शामिल कई लोगों को वहाँ की पुलिस ने पकडा और उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए। और भी कई उदाहरण है जैसे बैंकुअर दंगे के कई अहम सुराग में सोशलमीडिया की बडी भूमिका रही। मिस्र के तहरीर चैक और ट्यूनीशिया के जैस्मिन रिवोल्यूशन में इस सामाजिक मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका को कैसे नकारा जा सकता है
।[6]सामाजिक मीडिया की आलोचना उसके विज्ञापनों के लिए भी की जाती है। इस पर मौजूद विज्ञापनों की भरमार उपभोक्ता को दिग्भ्रमित कर देती है तथा ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक इतर संगठन के रूप में काम करते हैं तथा विज्ञापनों की किसी बात की जवाबदेही नहीं लेते हैं जो कि बहुत ही समस्यापूर्ण है।

ब्लॉग बनाना

   ब्लॉग क्या है?
ब्लॉग एक वेबसाइट होती है. जिस पर आप नियमित तोर पर अपनी सुझाव, जानकारी या अनुभव record कर सकते है.
पुराने ज़माने में कुछ लोग डायरी लिखते थे, log लिखते थे. और आज-कल इन्टरनेट पर अगर आप log या पत्रिका लिखते है तो उसे Blog कहते है.Web Blog का शोर्टफॉर्म है Blog.
अगर आपके पास कोई ब्लॉग हैं उस पर काम करते है तो उस काम को blogging कहते हैं. जैसे मैं bloggingकरता हु और blogger वो इन्सान होता हैं जो blog लिखता हैं, यानि जो ब्लॉग पर काम करता है.
तो blog का फ़ायदा क्या है?
लोग अपनी भावना को प्रकट करने के लिए, अपना ज्ञान बाटने के लिए या अपना अनुभव दुसरो के साथ बाटने के लिए blog करते है.blog पढने वाला एक किसी भी विषय पर इन्टरनेट पर पढ़सकता है. कई एक्टर, राजनेता और IT के लोगो के blog बहुत ही फेमस है.कुछ लोग ब्लॉग के माध्यम से अपनी परेशानिया या समस्याए दुनिया को बताते हैं.कई blogger तो इतने फेमस, इतने पोपुलर हो गए है किउनके ब्लॉग पर बहुत सारे लोग आते है, बहुत ट्रैफिक आता है.और वो इस ट्रैफिक को विज्ञापन (Advertisement) दिखा कर पैसे भी कमाते हैं.
तो अगर आपको पता चल गया है की blog क्या होता है, तो अब बात आती है की इसे बनाते कैसे है?
Blog को आप बहुत आसन तरीके से बना सकते है, blog बनाते वक्त कोई किसी प्रकार का वेब डिजाइनिंग का knowledge होना जरुरी नहीं है क्योंकि blog केवल कुछ ही clicks के साथ 10 मिनट में बन जाता है. लेकिन अगर आपको blog के थीम के डिजाईन में एडिटिंग करनी है तो तब आपको HTML और CSS जैसे वेब डिजाइनिंग लैंग्वेज का knowledge होना जरुरी है.
हम इस पोस्ट में सीखेगे की Google के free Blogspot platform पर blog कैसे बनाते है. जो की हमेशा के लिए भी फ्री है, और साथ में इसको उपयोग में लेते वक्त आपको HTML और CSS का भी ज्ञान होना कोई जरुरी नहीं हैं. लेकिन काफी जगह टेम्पलेटया थीम एडिटिंग करते वक्त HTML और CSS की जरुरत पढ़ सकती है लेकिन इसकी जरुरत कब कैसे पढ़ती है यह आप Blogspot का प्रयोग करेगे तो ही पता चलेगा.लेकिन शुरुआती तोर में आपको HTML और CSS का ज्ञान होना कोई जरुरी नहीं हैं.और साथ में HTML और CSS सीखना भी कोई बड़ी बात नहीं हैं तो अगर आप यह भी Blogspot के प्रयोग के साथ सीखते है तो और भी अच्छा है
तो कैसे बनाते है Blog?
वैसे तो मैं भरोसा करता हूँ वर्डप्रेस (WordPress) पर, जो Blogspot की तरह ही एक platform है जहा पर वेबसाइट और blog बनाये जाते है,इस पोस्ट में मैंने Blogspot पर blog बनाने का ही पोस्ट इसलिए लिखा है क्योंकि Blogspot शुरुआतमें काफी अच्छा है. सिखने के लिए भी और साथ में फ्री भी है.
Blogspot पर Blog बनाने से पहले ये बाते आपको जरुर पता होनी चाहिएपहला: Blogspot प्लेटफार्म गूगल द्वारा जारी किया गया है. गूगल आपको फ्री में blogspot पर ब्लॉग्गिंग (Blogging) शुरू करने का अवसर देता है. जब आप अपने blogspot Blog में कोई भी पिक्चर,फोटो अपलोड करते है तो वो सब गूगल पिकासा में सेव रहती है. अब जैसे की पिकासा भी गूगल ने ही जरी कियाहै तो इसमें आपके सारे फोटो भी सेव और सिक्योर रहते हैं.blog बनाने के steps
Step #1 blogspot में login करेसबसे पहलेBlogspot.Com पर जाये जिसमे गूगल account से login करे. अगर आपके पास गूगल account नहीं हैं तो बना ले.पहली बार में blogspot में जाते वक्त अपनी प्रोफाइल बनाने के लिए बनाने के लिए 2 आप्शन शो होगे,Google Plusऔरblogspot profile. उस मेंसे मैं आपको सलाह देता हु Google plus को choose करे.जब आप लोग इन कर देते हैं, तब“New Blog” buttonपर click कीजिये,या फिरयहाँ clickकरके भी उस page तक पहुच सकते है.
Step #2 अपने blog का नाम देआप अपने blog का को भी नाम दे सकते है, आपको blog किस subject कर बनाना है उस पर आधारित अपने blog का नाम रख सकते है,और उसके बाद blog address रखे, उसमे आप कोई भी अपने blog का नाम ही address में डाले कई बार, पहले से किसी दुसरे user द्वारा वही address लिया हुआ होता है उस स्थिति में आप अपने address को थोडा बदल कर लिख सकते है.अंत में आत है blog की theme, जिसे template कहा जाता हैं, उसे आप अपने subject से related कोईभी choose करे सकते है. और फिर“Create Blog!”पर click कर दीजिये.अब आपका blog बन गया है यानी आपका blog live हो चूका हैं, जिसे आप address बार पर अपने blog का address डाल कर देख सकते है।
महावीर आचार्य बाड़मेर

Tv and radio use in education b.ed. notes

सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी)सूचना व संचार प्रौद्योगिकी उनकार्योंकेलिए इस्तेमाल किया जाता है जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचनाकेपारेषण, संग्रहण, निर्माण, प्रदर्शन या आदान-प्रदानमेंकाम आते हैं। सूचना व संचार प्रौद्योगिकी की इस व्यापक परिभाषाकेतहत रेडियो, टीवी, वीडियो, डीवीडी, टेलीफोन (लैंडलाइन और मोबाइल फोन दोनों ही), सैटेलाइट प्रणाली, कम्प्यूटर और नेटवर्क हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर आदि सभी आते हैं; इसकेअलावा इन प्रौद्योगिकी से जुड़ी हुई सेवाएं और उपकरण, जैसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ई-मेल और ब्लॉग्स आदि भी आईसीटीकेदायरेमेंआते हैं।'सूचना युग'केशैक्षिक उद्देश्यों को साकार करनेकेलिएशिक्षामेंसूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी)केआधुनिक रूपों को शामिल करने की आवश्यकता है। इसे प्रभावी तौर पर करनेकेलिएशिक्षायोजनाकारों, प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण, वित्तीय, शैक्षणिक और बुनियादी ढांचागत आवश्यकताओंकेक्षेत्रमेंबहुत से निर्णय लेने की आवश्यकता होगी। अधिकतर लोगोंकेलिए यहकाम न सिर्फ एक नई भाषा सीखनेकेबराबर कठिन होगा, बल्कि उस भाषामेंअध्यापन करने जैसा होगा।यह खंड देशों को आपसमेंजोड़ने वाले उपग्रहों से लेकर कक्षामेंविद्यार्थियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों तक संचारकेऔजारों की पड़ताल करता है। यहखंड शिक्षकों, नीति-निर्माताओं, योजनाकारों, पाठ्यक्रम बनाने वालों और अन्य को आईसीटी उपकरणों, शब्दावली और प्रणालियोंकेभ्रामक जालमेंसे रास्ता निकालनेमेंमदद करेगा।शिक्षामेंसूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की भूमिकाशिक्षक, योजनाकार, शोधकर्ता आदि सभी लोग व्यापक पैमाने पर इस बात से सहमत दिखाई देते हैं कि आईसीटीमेंशिक्षापर सकारात्मक और महत्वपूर्ण प्रभाव डालने की क्षमताएं मौजूद हैं। जिस बात पर अब तक बहस चल रही है, वो यह है किशिक्षासुधारमेंआईसीटी की सटीक भूमिकाक्या हो और इसकी क्षमताओंकेबेहतरीन दोहनकेलिए सबसे बेहतरीन तरीकेक्या हो सकते हैं।इस खंडमेंऑनलाइन पत्रिकाओं और वेबसाइटकेलेख, रिपोर्ट और लिंक मौजूद हैं जिनमेंशिक्षापर आईसीटीकेप्रभावों की पड़ताल की गई है और बताया गया है कि स्कूलोंमेंप्रौद्योगिकी की दिशा क्या होनी चाहिए।''(यह खंडशिक्षामेंआईसीटीकेइस्तेमाल से निकले लाभोंकाविवरण देने वाले लेखों को भी उपलब्ध कराता है। साथ ही, इसमेंलेख औरकेस-स्टडी भी उपलब्ध कराए गए हैं जो शैक्षणिककार्यक्रमोंमेंआईसीटी को शामिल करने संबंधीदिशा-निर्देश मुहैया कराते हैं, जिनमेंविचार योग्य मसले, सीखने लायक सबक और आम गलतियों से बचने संबंधी सलाहको भी जोड़ा गया है)कार्यस्थल पर प्रौद्योगिकीप्रौद्योगिकीकेप्रयोग से जुड़ी नीतियों, रणनीतियों और व्यावहारिक कदमोंकेप्रदर्शनकेलिए दुनिया भर से ली गईं अन्वेषण,कामयाबी और विफलता की दास्तानें। इनकेतहत निम्न विषय शामिल होंगे:*.कई माध्यमों से अध्ययन*.शैक्षिक टीवी*.शैक्षिक रेडियो*.वेब आधारित निर्देश*.खोजकेलिए पुस्तकालय*.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमेंव्यावहारिक गतिविधियां*.मीडियाकाइस्तेमाल*.कम अवस्थामेंविकास, कम  जनसंख्या घनत्व, प्रौढ़ साक्षरता, महिलाशिक्षाऔरकार्यबलमेंवृद्धि जैसेक्षेत्रोंमेंप्रौद्योगिकीकालक्षित इस्तेमाल।*.शिक्षकों को तैयार करने और कैरियर से जुड़े प्रशिक्षणकेलिए प्रौद्योगिकी*.नीति-निर्माण, डिजाइन और डेटा प्रबंधनकेलिए प्रौद्योगिकी*.स्कूल प्रबंधनकेलिए प्रौद्योगिकीआज की प्रौद्योगिकी*.प्रौद्योगिकीकेविभिन्नक्षेत्रोंमेंअध्ययनकेलिए मौजूद चीजों पर एक नज़र*.निर्देशात्मक सामग्री*.ऑडियो, विजुअल और डिजिटल उत्पाद*.सॉफ्टवेयर और कंटेंटवेयर*.संपर्ककेमाध्यम*.मीडिया*.शैक्षणिक वेबसाइटकल की तकनीकभविष्य की प्रौद्योगिकीकेबारेमेंशिक्षासे जुड़े लोगों और नीति-निर्माताओं को जागरूक करना ताकि वे भविष्यकेहिसाब से अपनी योजनाएं बना सकें, न सिर्फ उस आधार पर जो आज उपलब्ध है, बल्कि आने वाली कल की नई-नई चीज़ों को ध्यानमेंरखते हुए।रेडियो और टीवी20वीं शताब्दी की शुरुआत से ही रेडियो और टीवीकाशिक्षामेंइस्तेमाल किया जा रहा है। आईसीटीकेये रूप तीन मुख्य तरीकों से इस्तेमाल किये जाते हैं:*.संवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देश (आईआरआई) और टीवी पर पाठ समेत सीधे कक्षामेंपढ़ाना।*.स्कूल प्रसारण, जहां प्रसारितकार्यक्रम अध्ययन और शिक्षणकेपूरक संसाधन मुहैया कराता है जो आमतौर पर उपलब्ध नहीं होते।*.सामान्य शैक्षिककार्यक्रम जो सामान्य और अनौपचारिकशिक्षाकेअवसर उपलब्ध कराते हैं। संवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देशमेंरोजानाकेआधार पर कक्षाओंके लिए प्रसारण पाठ शामिल हैं। विशेष मुद्दों और विशिष्ट स्तर पर रेडियो पाठ सीखने और पढ़ाने की गुणवत्ता सुधारनेकेलिए शिक्षकों को ढांचागत और दैनिक सहयोग मुहैया कराते हैं। संवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देश दूरकेस्कूलों औरकेन्द्रोंकेलिए तैयारपाठ लाकरशिक्षाकेविस्तारमेंयोगदान भी देता है जिनकेपास संसाधनों और शिक्षकों की कमी है। अध्ययन बताते हैं कि आईआरआई परियोजनाओं सेशिक्षातक पहुंच और औपचारिक और अनौपचारिकशिक्षाकी गुणवत्ता दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इससे बड़ी संख्यामेंलोगों तक शैक्षिक सामग्री पहुंचानेमेंकम-लागत भी आती है। टीवीकेपाठ अन्य कोर्स सामग्रीकेपूरककेतौर पर भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं या उन्हें अकेले भी पढ़ाया जासकता है। लिखी हुई सामग्री और अन्य संसाधन शैक्षिक टीवीकार्यक्रमोंकेसाथ अक्सर सीखने और निर्देश ग्रहण की क्षमता को बढ़ाते हैं। एशिया- प्रशांतक्षेत्रमेंशैक्षिक प्रसारणकाफी विस्तारित है। भारतमेंउदाहरणकेलिए इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी टीवी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कोर्सकाप्रसारण करती है। विशिष्ट पाठोंकेप्रसारणकेलिए इस्तेमालकेअतिरिक्त रेडियो और टीवीकाइस्तेमाल सामान्य शैक्षिककार्यक्रमोंकेप्रसारणकेलिए भी किया जा सकता है। वास्तवमें, शैक्षिक मूल्यकेसाथ किसी भी रेडियो या टीवीकेकिसी भीकार्यक्रम को ''सामान्य शैक्षिककार्यक्रम'' माना जा सकता है। अमेरिकासे बच्चोंकेलिए प्रसारित किया जाना वाला एक शैक्षिक टीवीकार्यक्रम ''सीसेम स्ट्रीट'' इसकाएक उदाहरण है। दूसरा उदाहरण, कनाडाकाशैक्षिक रेडियो चर्चाकार्यक्रम ''फार्म रेडियो फोरम'' है।रेडियो और टीवी प्रसारणकाशिक्षामेंइस्तेमालरेडियो और टीवीकाइस्तेमालशिक्षाकेएक माध्यमकेतौरपर क्रमश: 1920 और 1950केदशक से बड़े पैमाने पर कियाजा रहा है।शिक्षामेंरेडियो और टीवी प्रसारणकेइस्तेमालकेतीन सामान्य तरीकेहैं-*.सीधे कक्षामेंपढ़ाना, जहां अस्थायी रूप से प्रसारणकार्यक्रम शिक्षककास्थान ले लेते हैं।*.स्कूल प्रसारण, जहां प्रसारितकार्यक्रम शिक्षण और अध्ययनकेलिए पूरक संसाधन मुहैया कराते हैं, जो अन्यथानहीं होते।*.सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्टेशनों पर सामान्य शैक्षिककार्यक्रम जो सामान्य और अनौपचारिक शैक्षिक अवसर प्रदान करते हैं।सीधे कक्षामेंपढ़ानेकासबसे महत्वपूर्ण और सर्वोत्तम दस्तावेजी उदाहरण संवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देश है। ''इसमेंरोजानाकेआधार पर कक्षाकेलिए 20-30 मिनट प्रत्यक्ष शिक्षण (डायरेक्ट टीचिंग) और शैक्षिक प्रशिक्षण शामिल होता है। गणित, विज्ञान, स्वास्थ्य और भाषाओंकेविशेष स्तर पर विशिष्ट शिक्षणकेउद्देश्य से बनाए गए रेडियोकेपाठ कक्षामेंपढ़ानेकी गुणवत्ता को सुधारने और सीमित संसाधनों वाले स्कूलोंमेंखराब तरीकेसे प्रशिक्षित शिक्षकों को नियमित सहयोगकेउद्देश्य को पूरा करते हैं।'' संवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देश परियोजना को भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशोंमेंलागू किया गया है। एशियामेंसंवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देश सबसे पहले 1980मेंथाईलैंडमेंक्रियान्वित हुआ था; 1990मेंयह परियोजना इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपालमेंशुरू हुई। संवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देश अन्य दूरस्थशिक्षाकार्यक्रमों से इस मामलेमेंअलग है कि प्राथमिक तौर पर इसकाउद्देश्यशिक्षाकी  गुणवत्ता को बढ़ाना है- सिर्फशिक्षातक पहुंच को ही नहीं- और औपचारिक व अनौपचारिक दोनों ही व्यवस्थाओंमेंइसने खूब सफलता हासिल की है। दुनिया भरमेंहुए सघन शोध दिखाते है कि अधिकतर संवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देश परियोजनाओंकापरिणाम सीखनेकेपरिणामों और शैक्षणिक समानता पर सकारात्मक रहा। अन्य कदमोंकेमुकाबले यह प्रणाली अपनी कम लागत वाली आर्थिकीकेचलतेकाफी किफायती औरकारगर साबित हुई है।केन्द्र द्वारा चलाया जाने वाला टीवीकार्यक्रम सैटेलाइटकेजरिए देश भरमेंएक निश्चित समय पर प्रसारित किया जाता है, उसमेंवही सब कुछ पढ़ाया जाता हैजो किसी सामान्य माध्यमिक स्कूलमेंपढ़ाया जाता है। हरेक घंटे किसी एक नये विषय पर प्रसारण शुरू किया जाता है। विद्यार्थियों को भी टीवी पर अलग-अलग शिक्षकों से पढ़नेकामौकामिलता है, लेकिन स्कूलमेंसभी स्तरकेसभी विषयोंकेलिएकेवल एक शिक्षक होता है।इसकार्यक्रमकेस्वरूपमेंपिछले कुछ सालोंमेंकई बदलाव देखने को मिले हैं जिसमेंशिक्षण की प्रणाली व्यक्तिकेन्द्रित से हट कर ज्यादा संवादात्मक प्रक्रियामेंपरिवर्तित हो गई जो समुदाय को शिक्षण की प्रविधिकेइर्द-गिर्द बुने गए एककार्यक्रम से जोड़ती है। इस रणनीतिकाउद्देश्य सामुदायिक मुद्दों औरकार्यक्रमोंकेबीच संबंध बनाना था जिससे बच्चों को समग्रशिक्षादी जा सके, समुदाय को स्कूलोंकेप्रबंधन और संगठनमेंशामिल किया जा सकेतथा सामुदायिक गतिविधियों को अंजाम देनेकेलिए छात्रों को उत्प्रेरित किया जा सके। टीवीकार्यक्रमोंकाआकलनकाफी उत्साहजनक रहा है।आम सेकंडरी स्कूलोंकेमुकाबले ड्रॉपआउट की संख्यामेंकमी रही और तकनीकी स्कूलों से भी यह मामूली रूप से बेहतर रहा है। एशियामेंचीन की 44 रेडियो और टीवी युनिवर्सिटी (जिनमेंचाइना सेंट्रल रेडियो और टेलीविजनयुनिवर्सिटी भी शामिल है), इंडोनेशिया की युनिवर्सिटास टर्बुकाऔर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने प्रत्यक्ष स्कूली शिक्षण और स्कूली प्रसारणमें  रेडियो और टीवीकापर्याप्त प्रयोग किया है ताकि वे अपनी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचनेमेंकामयाब हो सके। ये संस्थान अक्सर प्रसारणकेसाथ मुद्रित सामग्री और ऑडियो कैसेट भी मुहैया कराते हैं।जापान युनिवर्सिटी  वर्ष 2000 से 160 टीवी और 160 रेडियो कोर्स चला रही है। हरेक कोर्स 15-45 मिनटकाहोता है और 15 सप्ताह तक लगातार प्रति सप्ताह एक बार ऐसे व्याख्यानकाप्रसारण होता है। सुबह छह बजे से लेकरदोपहर 12 बजेकेबीच ये प्रसारण किये जाते हैं। इसकेअलावा छात्रों को पूरक सामग्रीकेतौर पर मुद्रित शिक्षण सामग्री दी जाती है और आमने-सामने शिक्षणकेअलावा ऑनलाइन सुविधा भी दी जाती है।अक्सर मुद्रित सामग्री, कैसेट और सीडी-रॉमकेमाध्यम से चलाया जाने वाला स्कूली प्रसारण प्रत्यक्ष कक्षा शिक्षण की ही तरह राष्ट्रीय पाठ्यक्रम से जुड़ा होता हैऔर तमाम किस्मकेविषयोंकेलिए इसे विकसित किया जाता है। कक्षा शिक्षणकेविपरीत, स्कूली प्रसारणकाउद्देश्य शिक्षककास्थान लेना नहीं होता बल्कि सिर्फ पारंपरिक कक्षा शिक्षण की प्रणालीमेंमूल्य संवर्धन करना होता है। स्कूल प्रसारण संवादात्मक रेडियो दिशा-निर्देश (आईआरआई) से कहीं ज्यादा लचीला होता है क्योंकि इसमेंशिक्षकों को तय करना पड़ता है कि वे कैसेप्रसारण सामग्रीकाअपने कक्षाओंमेंएकीकरण कर सकें। जो बड़े प्रसारण संस्थान स्कूली प्रसारणकाकाम करते हैं, उनमेंब्रिटेनकाब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन एजुकेशन रेडियो, टीवी और एनएचकेजैपनीज ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन शामिल हैं। विकासशील देशोंमेंआमतौर पर इस किस्मकेस्कूली प्रसारण वहांकेशिक्षामंत्रालय और सूचना व प्रसारण मंत्रालयकेसंयुक्त सहयोग से चलाए जाते हैं।आमतौर पर शैक्षणिक प्रसारणोंमेंकई किस्मकेकार्यक्रम शामिल होते हैं- खबरोंकेकार्यक्रम, वृत्तचित्र, क्विजकार्यक्रम और शैक्षणिककार्टून, जिनमेंसभी किस्मकेसीखने वालोंकेलिए अनौपचारिक शैक्षणिक अवसर मौजूद होते हैं। एक अर्थमेंदेखें तो इसकिस्मकेअंतर्गत सूचना औरशिक्षाकेमूल्योंकेलिहाज से कोई भी रेडियो या टीवीकार्यक्रम इसकाहिस्सा हो सकता है। कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिनकी पहुंच दुनियाभरमेंहै। ये हैं- अमेरिकाकाटीवीकार्यक्रम सीसेम स्ट्रीट, हर किस्म की सूचनाएं देने वाला चैनल नेशनल ज्यॉग्राफिक और डिस्कवरी और रेडियोकार्यक्रम वॉयस ऑफ अमेरिका। कनाडामेंचालीसकेदशकमेंशुरू किया गया फार्म रेडियोफोरम दुनिया भरमेंरेडियो परिचर्चाओंकेलिए मॉडल बन चुकाहै। यह अनौपचारिक शैक्षणिककार्यक्रमोंकाएक नायाब उदाहरण है।विद्यार्थीकेंद्रित शैक्षणिक माहौल बनानेमेंभूमिकाशोध रिपोर्टकेअनुसार सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी)केसही इस्तेमाल से विषय-वस्तु और शैक्षणिक प्रविधि दोनोंमेंबुनियादी बदलाव किए जा सकते हैं और यही 21वीं सदीमेंशैक्षणिक सुधारोंकेकेंद्रमेंभी रहा है। यदिकायदे से इसे विकसित किया गया और लागू किया जाए, तो सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समर्थित शिक्षण ज्ञान और दक्षताकेप्रसारमेंमहत्वपूर्ण भूमिकानिभा सकता है जो आजीवन अध्ययनकेलिए छात्रों को उत्प्रेरित करता रहेगा।यदिकायदे से इस्तेमाल किया जाए, तो सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) और इंटरनेट प्रौद्योगिकी से अध्ययन और अध्यापनकेनए तरीकेखोजे जा सकते हैं, बजाय इसकेकि शिक्षक और विद्यार्थी वही करते रहें जो पहले करते रहे थे। शिक्षण और अध्ययनकेये नए तरीकेदरअसल अध्ययन की उन रचनात्मक शैलियों से उपजते हैं जो शिक्षण प्रणालीमेंअध्यापक कोकेंद्र से हटा कर विद्यार्थी कोकेंद्रमेंलाता है।सक्रिय अध्ययनसूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समर्थित शिक्षण और अध्ययन परीक्षा, गणना और सूचनाओंकेविश्लेषणकेऔजारों को प्रेरित करते हैं जिससे छात्रोंकेपास सवाल उठाने को मंच मिलता है और वे सूचनाकाविश्लेषण कर सकते हैं और नई सूचनाएं गढ़ सकते हैं।काम करते वक्त इस तरह छात्र सीख पाते हैं। जब बच्चे जीवन की वास्तविक समस्याओं से सीखते हैं जिससे शिक्षण की प्रक्रिया कम अमूर्त बन जाती है और जीवन स्थितियोंकेज्यादा प्रासंगिक होती है। इस तरह से याद करने या रटने पर आधारित शिक्षणकेविपरीत आईसीटी समर्थित अध्ययन बिल्कुल समय पर शिक्षणकारास्ता देता है जिसमेंसीखने वाला जरूरत पड़ने पर उपस्थित  विकल्पमेंसे यह चुन सकता है कि उसे क्या सीखना है।सह-अध्ययनसूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समर्थित अध्ययन छात्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञोंकेबीच संवाद ओर सहयोगको बढ़ावा देता है, इस बात से बिल्कुल जुदा रहते हुए कि वे कहां मौजूद हैं। वास्तविक दुनियाकेसंवादों की मॉडलिंगकेअलावा आईसीटी समर्थित अध्ययन सीखने वालों को मौकादेता है कि वे विभिन्न संस्कृतियोंकेलोगोंकेसाथकाम करना सीख सकें जिससे उसकी संचार और समूह की क्षमतामेंसंवर्धन होता है तथा दुनियाकेबारेमेंउनकी जागरूकता बढ़ती है। यह आजीवन सीखनेकाएक मॉडल है जो सीखनेकेदायरे को बढ़ाता है जिसमेंन सिर्फ संगी-साथी, बल्कि विभिन्नक्षेत्रोंकेसंरक्षक और विशेषज्ञ भी सिमट आते हैं।सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समर्थित शिक्षण की प्रभावकारितासूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की शैक्षणिक क्षमताएं उनकेइस्तेमाल पर निर्भर करती है और इस बात परकि उनकाइस्तेमाल किस उद्देश्यकेलिए किया जा रहा है। किसी अन्य शैक्षणिक उपकरणकेविपरीत सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सभीकेलिए समान रूप सेकाम नहींकरता और हर जगह एक तरीकेसे लागू नहीं किया जा सकता है। पहुंच को बढ़ानायह गणना करना मुश्किल है कि सूचना व संचार प्रौद्योगिकी(आईसीटी) ने किस हद तक  बुनियादीशिक्षाको प्रसारित करनेमेंमदद की है क्योंकि इस किस्मकेअधिकतर प्रयोग या तो छोटे स्तरों पर किए गए हैं या फिर इनकेबारेमेंजानकारी उपलब्ध नहीं है। प्राथमिक स्तर पर इस बातकेबहुत कम साक्ष्य मिलते हैं कि सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) ने कुछ भी किया है। उच्चशिक्षाऔर वयस्क  प्रशिक्षणमेंकुछ साक्ष्य हैं कि उन व्यक्तियों और समूहोंकेलिएशिक्षाकेनए अवसर खुल रहेहैं जो पारंपरिक विश्वविद्यालयोंमेंनहीं जा पाते। दुनियाकेसबसे बड़े 33 मेगा विश्वविद्यालयोंमेंसालाना एक लाख से ज्यादा छात्र पंजीकरण करवाते हैं और एक साथ मिल कर ये विश्वविद्यालय करीब 28 लाख लोगों की सेवा कर रहे हैं। इसकी तुलना आप अमेरिकाके3500 कॉलेजों और विश्वविद्यालयोंमेंपंजीकृत एक करोड़ 40 लाख छात्रों से कर सकते हैं। गुणवत्तामेंवृद्धिशैक्षणिक रेडियो और टीवी प्रसारणकामूलभूतशिक्षाकी गुणवत्ता पर असर अब भी बहुत खोजकाविषय नहीं है, लेकिन इस मामलेमेंजो भी शोध हुए हैं, वे बताते हैं कि यह क्लासरूम शिक्षणकेही समान प्रभावकारी है। कई शैक्षणिक प्रसारण परियोजनाओंमेंसंवादात्मक रेडियो परियोजनाकासबसे ज्यादा विश्लेषण हुआ है। इसकेनिष्कर्ष बताते हैं किशिक्षाकास्तर ऊपर उठानेमेंयहकाफी प्रभावशाली साबित हुआ है। इसकेसबूत बढ़े हुए अंक और उपस्थिति की दर है।इसकेउलट कंप्यूटर, इंटरनेट और संबंधित प्रौद्योगिकीकेप्रयोगकाआकलन एक ही कहानी कहता है। अपनी शोध समीक्षामेंरसेल कहते हैं कि आमने-सामनेशिक्षाग्रहण करने वालों और सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी)केमाध्यम से पढ़ने वालोंकेअंकोंकेबीच कोई अंतर नहीं रहा है। हालांकि, दूसरोंकादावा है कि ऐसा सामान्यीकरण निष्कर्षात्मक है। वे कहते हैं कि सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समर्थित दूरस्थशिक्षापर लिखे गए तमाम आलेख प्रयोगिक शोध औरकेस स्टडी को ध्यानमेंनहीं रखते। कुछ अन्य आलोचकोंकाकहना है कि सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी)  समर्थित दूरस्थशिक्षामेंस्कूल छोड़ने की दरकाफी ज्यादा होती है।कई ऐसे भी अध्ययन हुए हैं जो इस दावेकासमर्थन करते नजरआते हैं कि कंप्यूटरकाइस्तेमाल मौजूदा पाठ्यक्रम को संवर्धित करता है। शोध दिखाता है कि पाठन, ड्रिल और निर्देशोंकेलिए कंप्यूटरकेइस्तेमालकेसाथ पारंपरिक शैक्षणिक विधियोंकाइस्तेमाल पारंपरिक ज्ञान समेत पेशेवर दक्षतामेंवृद्धि करता है और कुछ विषयोंमेंअधिक अंक लानेमेंमदद रकता है जो पारंपरिक प्रणाली नहीं करवा पाती। छात्र जल्दी सीख भी जाते हैं, ज्यादा आकर्षित होते हैं और कंप्यूटरकेसाथकाम करते वक्त वे कहीं ज्यादा उत्साही होते हैं। दूसरी ओर कुछ लोगोंकामानना है कि ये सब मामूली लाभ हैं और जिन तमाम शोधों पर ये दावे आधारित हैं, उनकी प्रणालीमेंही बुनियादी दिक्कत है।ऐसे ही शोध बताते हैं कि पर्याप्त शिक्षण सहयोगकेसाथ कंप्यूटर, इंटरनेट और संबद्ध प्रौद्योगिकीकाइस्तेमालवास्तवमेंसीखनेकेवातावरण को सीखने वाले परकेंद्रित कर देता है। इन अध्ययनों की यह कह कर आलोचना की जाती है कि ये विवरणात्मक ज्यादा हैं और इनमेंव्यावहारिकता कम है। उनकाकहना है कि अब तक कोई साक्ष्यनहीं हैं कि बेहतर वातावरण बेहतर अध्ययन और नतीजों को जन्म दे सकता है। अगर कुछ है, तो वह गुणात्मक आंकड़े हैंजो छात्रों और अध्यापकोंकेसकारात्मक नजरिये को ध्यानमेंरखकर बनाए गए हैं जो कुल मिला कर सीखने की प्रक्रिया पर सकारात्मक असर को रेखांकित करते हैं।एक बड़ी दिक्कत इस सवालकेमूल्यांकनमेंयह आती है कि मानक परीक्षाएं उन लाभों को छोड़ देती हैं जो सीखने वाले परकेंद्रित वातावरण से अपेक्षित हैं। इतना ही नहीं, चूंकि प्रौद्योगिकीकाइस्तेमाल पूरी तरह सीखनेकेएक व्यापक तंत्रमेंसमाहित है, इसलिए यहकाफी मुश्किल है कि प्रौद्योगिकी को स्वतंत्र रख कर यह तय किया जा सकेकि क्या उसकेकारण कोई फायदा हुआ है या इसमेंकिसी एककारक याकारकोंकेमिश्रणकाहाथ है।

Ict use in education

शिक्षक द्वारा आईसीटी का उपयोगशिक्षक
सामान्य रूप से आईसीटी का सबसे अधिकउपयोगप्रशासनिक कार्यों के लिएकरते हैंशिक्षक अक्सर आईसीटी का उपयोग 'नियमित कार्य' (रिकॉर्ड रखने, लेसन प्लान विकास, सूचना प्रस्तुति, इंटरनेट पर बुनियादी जानकारी की खोज) के लिए करते हैं।अधिक जानकार शिक्षक "कंप्यूटर सहायता अनुदेश”पर कम भरोसा करते हैंआईसीटी के उपयोग के अधिक जानकार शिक्षक कंप्यूटर सहायता अनुदेश का उपयोग अन्य शिक्षकों की तुलना में कम करते हैं, लेकिन कुल मिलाकर आईसीटी का अधिक उपयोग करते हैं।
शिक्षक आईसीटी का उपयोगकैसे करते हैं, यह उनकीसामान्य शिक्षण शैली पर निर्भरकरताहैआईसीटी के उपयोग के प्रकार शिक्षक के शैक्षणिक दर्शन केसाथ जुड़ा होता हैं।
जो शिक्षक आईसीटी का सर्वाधिक उपयोगकरते हैं – और सर्वाधिक प्रभावकारी तरीके से – उनके पारंपरिक 'संचरण-विधि' द्वारा शिक्षण के उपयोग की संभावना कम होती है। जो शिक्षक अधिक प्रकार के सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, उनकी प्रवृत्ति"रचनात्मक" शिक्षण की अधिक होती है।शिक्षण और सीखने में सहायता के लिए आईसीटी की शुरूआत औरउपयोग शिक्षकों के लिए अधिक समय खर्च करने वाला होता है,दोनों स्थितियों में जबकि वे शिक्षण प्रथाओं और रणनीतियों में परिवर्तन कर रहे हों और जबकि ऐसी रणनीतियों का नियमित रूप से उपयोग किया जाता है।
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सीधे शब्दों में कहें तो: आईसीटी के साथ अध्यापन में अधिक समय लगता है (इस बात पर अनुमान अलग-अलग होते हैं किएक ही सामग्री को कवर करने के लिए कितने अतिरिक्त समय की आवश्यकता होती है; 10% एक आम अनुमान है)।
शिक्षक का आत्मविश्वास और प्रेरणाकुछहीशिक्षकआत्मविश्वासपूर्वकआईसीटी का उपयोगकर सकते हैंआईसीटी संसाधनों के एक विस्तृत रेंज का प्रयोग करने में कुछ ही शिक्षकों को आत्मविश्वास बना रहता है, और जिस तरह से पाठ संचालित किया जाता है, सीमित विश्वास उसे प्रभावित करता है।भयकई शिक्षकों को आईसीटी का उपयोग करने से रोकता हैओईसीडी देशों में, कई शिक्षकों को आईसीटी का उपयोग करनेके प्रति अभी भी भय है, इसलिए वे अपने शिक्षण में उनके उपयोग के लिए अनिच्छुक रहते हैं।कम से कम शुरुआत में, आईसीटी से संपर्क शिक्षक के व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सक्षम उपकरण के रूप में महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत हो सकता है।व्यावसायिक विकास जारी रखनेमेंशिक्षककी प्रभावीभागीदारी को बढ़ावा देनेके लिए प्रोत्साहन प्रणालियांविकसितकी जानीचाहिए
शिक्षकों को व्यावसायिक विकास गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए अतिरिक्त प्रेरणा और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। प्रोत्साहन कई तरीकों से दिया जा सकता है, जिनमें प्रमाणीकरण, पेशेवर उन्नति, वेतनवृद्धियां, व्यावसायिक विकास हेतु सवैतनिक अवकाश, स्कूल और समुदाय स्तर पर और साथियों के बीच औपचारिक और अनौपचारिक मान्यता, कम अलगाव तथा अधिक उत्पादकता
।शिक्षकों द्वाराआईसीटीकेउपयोगके लिएसबसे
महत्वपूर्ण कारक हैसुगमताशिक्षक के आईसीटी से संबंधित कौशल के विकास को जारी रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है उनके द्वारा नियमित रूप से इनका उपयोग कर पाना तथा प्रासंगिक आईसीटी उपकरण के लिए सुगमता लाना।विषय ज्ञानशिक्षककाविषय ज्ञान आईसीटीकेउपयोगको प्रभावित करताहैजिस तरह शिक्षकों द्वारा पाठ में आईसीटी का उपयोग कियाजाता है, वह इस बात पर निर्भर करता है कि अपने विषयों परशिक्षकों की कितनी पकड़ है और वे किस तरह आईसीटी संसाधनों को प्रासंगिक बनाकर उनका उपयोग कर सकते हैं।
शिक्षककी विषयवस्तु परमहारथऔर छात्रकी ग्रहण क्षमता कीसमझ आईसीटीकेउपयोगको अधिक प्रभावी बनाती हैप्रमाण यह बताता है कि जब शिक्षक - विषय ज्ञान और जिस तरह से विद्यार्थी विषय को समझते हैं – इन दोनों बातोंके अपने ज्ञान का उपयोग करते हैं, तब के छात्र की उपलब्धि पर आईसीटी के प्रयोग का अधिक प्रत्यक्ष प्रभावपड़ता है।
आईसीटी के माध्यम से नई/ अतिरिक्त जानकारीसेसंपर्क पर्याप्त नहीं हैप्राप्ति पर प्रभाव सबसे अधिक तब होता है जब विद्यार्थियों को सोचने के लिए चुनौती दी जाए और उनकी अपनी समझ पर सवाल किए जाएं, बजाय नई और अतिरिक्त जानकारी के सम्पर्क में लाने के।
आईसीटी विषय के मामले मेंस्व-शिक्षाके लिए शिक्षक कीसहायता कर सकते हैंअद्यतन और सीखने के अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग प्रदानकर, आईसीटी शिक्षक को उसके विषय क्षेत्र में स्व-शिक्षाके लिए सक्षम कर सकते हैं।शिक्षक का व्यावसायिक विकासशिक्षकका सततप्रशिक्षण औरसहायताशिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी के सफल उपयोग के लिए महत्वपूर्ण हैशिक्षक का प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी के सफल प्रयोग के लिए मुख्य चालक के रूप में देखा जाता है।
शिक्षककाव्यावसायिक विकासएक प्रक्रिया है,एक घटना नहींआईसीटी के उपयोग में शिक्षकों को सहज महसूस करवाने के लिए परंपरागत, एक बार की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाएंअधिक प्रभावी नहीं पाई गई हैं, उनके द्वारा शिक्षण में समेकित करने में तो बिल्कुल भी नहीं। असतत, 'एक-बार के' प्रशिक्षण कार्यक्रम सतत  व्यावसायिक विकास गतिविधियों की तुलना में कम प्रभावी देखे गए हैं।
आईसीटीकापरिचय शिक्षकों के व्यावसायिक विकासकी आवश्यकताओं में वृद्धि करता हैशिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी का प्रभावी उपयोग शिक्षकों के प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास की जरूरत को बढ़ाता है। हालांकि, इस तरह की बढ़ी हुई ज़रूरतों के लिए अधिक और बेहतर शैक्षिक सामग्री के लिए सुगमता प्रदान कर, नियमित प्रशासनिक कार्यों में सहायता देकर, मॉडल और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों का सिम्युलेशन प्रदान कर, और शिक्षार्थी को सहायता के नेटवर्क उपलब्ध कराकर – आमने-सामने तथा दूरस्थ शिक्षा – दोनों वातावरणों में - और वास्तविक समय में या एसिंक्रोलॉजी के लिए आईसीटी महत्वपूर्ण उपकरण हो सकते हैं
saफल शिक्षक व्यावसायिक विकास के मॉडल तीन चरणों में विभाजित किएजा सकतेहैंसफल सतत-व्यावसायिक विकास के मॉडल तीन चरणों में विभाजित किए जा सकते हैं:1) सेवा-पूर्व, शिक्षा शास्त्र, विषय की महारथ, प्रबंधन कौशल और विभिन्न शिक्षण उपकरणों (आईसीटी सहित) के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना;2) सेवा-के दौरान, संरचित, आमने-सामने तथा दूरस्थ शिक्षा के अवसर, सेवापूर्व प्रशिक्षण को विस्तृत करने और सीधे शिक्षक की जरूरतों के लिए प्रासंगिक के निर्माण में; और3) शिक्षकों के लिए आईसीटी द्वारा सक्षम सतत औपचारिक और अनौपचारिक शैक्षणिक और तकनीकी सहायता, दैनिक जरूरतों और चुनौतियों पर लक्षित करना।
शिक्षक काप्रभावी व्यावसायिक विकास,प्रभावी शिक्षण पद्धतियोंकेमॉडलके अनुरूप होनाचाहिएशिक्षक के प्रभावी व्यावसायिक विकास यथासंभव कक्षा के वातावरण के अनुरूप होना चाहिए। आईसीटी के उपयोग पर ‘हैंड्स-ऑन” अनुदेश आवश्यक है जहां आईसीटी को शिक्षण औरसीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। इसके अलावा, व्यावसायिक विकास गतिविधियां प्रभावी तरीकों और व्यवहार के मॉडल के अनुरूप होनी चाहिये और उन्होंने शिक्षकों के बीच सहयोग का प्रोत्साहन तथा समर्थन करना चाहिए।
स्कूल स्तर पर आईसीटी सुविधाओं के उपयोग से सतत व्यावसायिक विकास को सफलता के लिए एक प्रमुख कारक के रूप में देखा जाता है, खासकर तब जबकि ये शिक्षकों की दैनिक आवश्यकताओं और प्रथाओं के लिए सीधे प्रासंगिक संसाधनों और कौशलों पर केन्द्रित हों।मूल्यांकन विधियों में प्रशिक्षण महत्वपूर्ण हैव्यावसायिक विकास में शैक्षणिक पद्धतियों के मूल्यांकन और संशोधन के तरीके तथा शिक्षक को मूल्यांकनके विभिन्न तरीकों के सम्पर्क में लाना शामिल होने चाहिये।
प्रभावी व्यावसायिक विकास योजनाके लियेपर्याप्तनियोजन की आवश्यकता होतीहैशिक्षक की व्यावसायिक विकास गतिविधियों के निर्माण और भागीदारी में मूल्यांकन से पहले आवश्यकता का मूल्यांकन होना चाहिए, इन गतिविधियों की नियमित निगरानी और आकलन होना चाहिये, और फीडबैक लूप स्थापित किये जाने चाहिए अगर व्यावसायिक विकास प्रभावी करना हो, जो शिक्षकों की जरूरतों के लिए लक्षित हो।शिक्षकों के लिएसतत,नियमित रूप से समर्थन महत्वपूर्ण हैशिक्षक के व्यावसायिक विकास में मदद के लिये सतत और नियमित मदद आवश्यक है और यह आईसीटी के उपयोग के माध्यम से प्रदान की जा सकती है (वेब साइटों, चर्चा समूहों, ई मेल समुदायों, रेडियो या टीवी प्रसारण के रूप में)।सक्षमता प्रदान करने वाले कारकशिक्षकद्वाराआईसीटीकेउपयोग का अनुकूलनलागूकरने के लिएकई किस्म केपरिवर्तन किये जानेचाहिएशिक्षण के तरीकों में परिवर्तन, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन में फेरबदल, और स्कूलों को और अधिक स्वायत्तता प्रदान करने से आईसीटी के उपयोग के अनुकूलनमें मदद मिलती है।
सक्षमता प्रदान करने वाले पर्याप्त कारक होने के साथ, शिक्षक आईसीटी का उतना 'रचनावादी' उपयोग कर सकते हैं, जितना उनका शैक्षणिक दर्शन अनुमति देता हो।कार्यशीलतकनीकी अवसंरचना (जाहिर है)महत्वपूर्णहैयदि उनके द्वारा आईसीटी का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाना हो तो शिक्षकों को कार्यशील कंप्यूटर की पर्याप्त उपलब्धता होनी चाहिये, और उन्हे पर्याप्त तकनीकी सहायता प्रदान की जानी चाहिये
।आईसीटीकेपरिचयमेंसमय लगता हैनए कौशल विकसित करने, अपनी मौजूदा शिक्षण पद्धतियों और पाठ्यक्रम में अपनी एकरूपता का पता लगाने और आवश्यक अतिरिक्त पाठ की योजना बनाने के लिये शिक्षकों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिये, यदि आईसीटी का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करना हो।स्कूल प्रशासन और समुदायकीसहायतामहत्वपूर्ण हो सकतीहैशिक्षक द्वारा आईसीटी के उपयोग के लिए स्कूल प्रशासकोंऔर कुछ मामलों में आसपास के समुदाय का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है। इस कारण से, दोनों समूहों की लक्षित पहुंच अक्सर आवश्यक होती है यदि शिक्षा में आईसीटी के सहयोग पर निवेश अनुकूलित किया जाना हो।अभ्यास के
समुदाय शिक्षककेव्यावसायिक विकासमें सहायता के लियेमहत्वपूर्ण उपकरणहो सकते हैंअभ्यास तथा साथियों के नेटवर्क के औपचारिक और अनौपचारिक समुदाय के अस्तित्व शिक्षा की पहल और गतिविधियों में आईसीटी की सहायता के लिये महत्वपूर्ण उपकरण हो सकते हैं। इस तरह की सहायता तंत्रों की मदद आईसीटी के उपयोग के माध्यम से की जा सकती है।शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी शुरू करने सेसीखे गये सबकसाझा करने की आवश्यकता हैचूंकि शिक्षा की सहायता के रूप में आईसीटी की शुरूआत अक्सर एक बड़े परिवर्तन या सुधार प्रक्रिया का हिस्सा होती है, यह महत्वपूर्ण है कि आईसीटी के सफल प्रयोग की जानकारी को बढ़ावा दिया जाये तथा इसका फैलाव किया जाये।

गुरुवार, 15 जून 2017

ये रही वो लिस्ट जिसमें हैं तमाम चीजों पर 1 जुलाई से लगने वाली GST की टेक्स दरें

*0% GST Rates Items –*
गेहूं, चावल, दूसरे अनाज, आटा, मैदा, बेसन, चूड़ा, मूड़ी (मुरमुरे), खोई, ब्रेड, गुड़, दूध, दही, लस्सी, खुला पनीर, अंडे, मीट-मछली, शहद, ताजी फल-सब्जियां, प्रसाद, नमक, सेंधा/काला नमक, कुमकुम, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, पान के पत्ते, गर्भनिरोधक, स्टांप पेपर, कोर्ट के कागजात, डाक विभाग के पोस्टकार्ड/लिफाफे, किताबें, स्लेट-पेंसिल, चॉक, समाचार पत्र-पत्रिकाएं, मैप, एटलस, ग्लोब, हैंडलूम, मिट्टी के बर्तन, खेती में इस्तेमाल होने वाले औजार, बीज, बिना ब्रांड के ऑर्गेनिक खाद, सभी तरह के गर्भनिरोधक, ब्लड, सुनने की मशीन।
*5% GST Rates Items –*
ब्रांडेड अनाज, ब्रांडेड आटा, ब्रांडेड शहद, चीनी, चाय, कॉफी, मिठाइयां, *खाद्य तेल,* स्किम्ड मिल्क पाउडर, बच्चों के मिल्क फूड, रस्क, पिज्जा ब्रेड, टोस्ट ब्रेड, पेस्ट्री मिक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन फल-सब्जियां, पैकिंग वाला पनीर, ड्राई फिश, न्यूजप्रिंट, ब्रोशर, लीफलेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस, झाडू, क्रीम, *मसाले,* जूस, साबूदाना, जड़ी-बूटी, लौंग, दालचीनी, जायफल, जीवन रक्षक दवाएं, स्टेंट, ब्लड वैक्सीन, हेपेटाइटिस डायग्नोसिस किट, ड्रग फॉर्मूलेशन, क्रच, व्हीलचेयर, ट्रायसाइकिल, लाइफबोट, हैंडपंप और उसके पार्ट्स, सोलर वाटर हीटर, रिन्यूएबल एनर्जी डिवाइस, ईंट, मिट्टी के टाइल्स, साइकिल-रिक्शा के टायर, कोयला, लिग्नाइट, कोक, कोल गैस, सभी ओर (अयस्क) और कंसेंट्रेट, राशन का केरोसिन, रसोई गैस।
*12% GST Rates Items –*
नमकीन, भुजिया, *बटर ऑयल, घी*, मोबाइल फोन, ड्राई फ्रूट, फ्रूट और वेजिटेबल जूस, सोया मिल्क जूस और दूध युक्त ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड/फ्रोजन मीट-मछली, अगरबत्ती, कैंडल, आयुर्वेदिक-यूनानी-सिद्धा-होम्यो दवाएं, गॉज, बैंडेज, प्लास्टर, ऑर्थोपेडिक उपकरण, टूथ पाउडर, सिलाई मशीन और इसकी सुई, बायो गैस, एक्सरसाइज बुक, क्राफ्ट पेपर, पेपर बॉक्स, बच्चों की ड्रॉइंग और कलर बुक, प्रिंटेड कार्ड, चश्मे का लेंस, पेंसिल शार्पनर, छुरी, कॉयर मैट्रेस, एलईडी लाइट, किचन और टॉयलेट के सेरेमिक आइटम, स्टील, तांबे और एल्यूमीनियम के बर्तन, इलेक्ट्रिक वाहन, साइकिल और पार्ट्स, खेल के सामान, खिलौने वाली साइकिल, कार और स्कूटर, आर्ट वर्क, मार्बल/ग्रेनाइट ब्लॉक, छाता, वाकिंग स्टिक, फ्लाईएश की ईंटें, कंघी, पेंसिल, क्रेयॉन।
*18% GST Rates Items –*
हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉर्न फ्लेक्स, पेस्ट्री, केक, जैम-जेली, आइसक्रीम, इंस्टैंट फूड, शुगर कन्फेक्शनरी, फूड मिक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स कंसेंट्रेट, डायबेटिक फूड, निकोटिन गम, मिनरल वॉटर, हेयर ऑयल, साबुन, टूथपेस्ट, कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो, रजिस्टर, अकाउंट बुक, नोटबुक, इरेजर, फाउंटेन पेन, नैपकिन, टिश्यू पेपर, टॉयलेट पेपर, कैमरा, स्पीकर, प्लास्टिक प्रोडक्ट, हेलमेट, कैन, पाइप, शीट, कीटनाशक, रिफ्रैक्टरी सीमेंट, बायोडीजल, प्लास्टिक के ट्यूब, पाइप और घरेलू सामान, सेरेमिक-पोर्सिलेन-चाइना से बनी घरेलू चीजें, कांच की बोतल-जार-बर्तन, स्टील के ट-बार-एंगल-ट्यूब-पाइप-नट-बोल्ट, एलपीजी स्टोव, इलेक्ट्रिक मोटर और जेनरेटर, ऑप्टिकल फाइबर, चश्मे का फ्रेम, गॉगल्स, विकलांगों की कार।
*28% GST Rates Items –*
कस्टर्ड पाउडर, इंस्टैंट कॉफी, चॉकलेट, परफ्यूम, शैंपू, ब्यूटी या मेकअप के सामान, डियोड्रेंट, हेयर डाइ/क्रीम, पाउडर, स्किन केयर प्रोडक्ट, सनस्क्रीन लोशन, मैनिक्योर/पैडीक्योर प्रोडक्ट, शेविंग क्रीम, रेजर, आफ्टरशेव, लिक्विड सोप, डिटरजेंट, एल्युमीनियम फ्वायल, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, वैक्यूम क्लीनर, डिश वाशर, इलेक्ट्रिक हीटर, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, प्रिंटर, फोटो कॉपी और फैक्स मशीन, लेदर प्रोडक्ट, विग, घड़ियां, वीडियो गेम कंसोल, सीमेंट, पेंट-वार्निश, पुट्टी, प्लाई बोर्ड, मार्बल/ग्रेनाइट (ब्लॉक नहीं), प्लास्टर, माइका, स्टील पाइप, टाइल्स और सेरामिक्स प्रोडक्ट, प्लास्टिक की फ्लोर कवरिंग और बाथ फिटिंग्स, कार-बस-ट्रक के ट्यूब-टायर, लैंप, लाइट फिटिंग्स, एल्युमिनियम के डोर-विंडो फ्रेम, इनसुलेटेड वायर-केबल।
★★★★★★★★★★★★★★★

संपादकीय :- कलियुग का लक्ष्मण

कलियुग  का  लक्ष्मण
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" भैया, परसों नये मकान पे हवन है। छुट्टी (इतवार) का दिन है। आप सभी को आना है, मैं गाड़ी भेज दूँगा।"  छोटे भाई लक्ष्मण ने बड़े भाई भरत से मोबाईल पर बात करते हुए कहा।
         " क्या छोटे, किराये के किसी दूसरे मकान में शिफ्ट हो रहे हो ?"
      " नहीं भैया, ये अपना मकान है, किराये का नहीं ।"
         " अपना मकान", भरपूर आश्चर्य के साथ भरत के मुँह से निकला।
        "छोटे तूने बताया भी नहीं कि तूने अपना मकान ले लिया है।"
      " बस भैया ", कहते हुए लक्ष्मण ने फोन काट दिया।
         " अपना मकान" ,  " बस भैया "  ये शब्द भरत के दिमाग़ में हथौड़े की तरह बज रहे थे।
           भरत और लक्ष्मण दो सगे भाई और उन दोनों में उम्र का अंतर था करीब  पन्द्रह साल। लक्ष्मण जब करीब सात साल का था तभी उनके माँ-बाप की एक दुर्घटना में मौत हो गयी। अब लक्ष्मण के पालन-पोषण की सारी जिम्मेदारी भरत पर थी। इस चक्कर में उसने जल्द ही शादी कर ली कि जिससे लक्ष्मण की देख-रेख ठीक से हो जाये।
                प्राईवेट कम्पनी में क्लर्क का काम करते भरत की तनख़्वाह का बड़ा हिस्सा दो कमरे के किराये के मकान और लक्ष्मण की पढ़ाई व रहन-सहन में खर्च हो जाता। इस चक्कर में शादी के कई साल बाद तक भी भरत ने बच्चे पैदा नहीं किये। जितना बड़ा परिवार उतना ज्यादा खर्चा।
            पढ़ाई पूरी होते ही लक्ष्मण की नौकरी एक अच्छी कम्पनी में लग गयी और फिर जल्द शादी भी हो गयी। बड़े भाई के साथ रहने की जगह कम पड़ने के कारण उसने एक दूसरा किराये का मकान ले लिया। वैसे भी अब भरत के पास भी दो बच्चे थे, लड़की बड़ी और लड़का छोटा।
                मकान लेने की बात जब भरत ने अपनी बीबी को बताई तो उसकी आँखों में आँसू आ गये। वो बोली, "  देवर जी के लिये हमने क्या नहीं किया। कभी अपने बच्चों को बढ़िया नहीं पहनाया। कभी घर में महँगी सब्जी या महँगे फल नहीं आये। दुःख इस बात का नहीं कि उन्होंने अपना मकान ले लिया, दुःख इस बात का है कि ये बात उन्होंने हम से छिपा के रखी।"
          इतवार की सुबह लक्ष्मण द्वारा भेजी गाड़ी, भरत के परिवार को लेकर एक सुन्दर से मकान के आगे खड़ी हो गयी। मकान को देखकर भरत के मन में एक हूक सी उठी। मकान बाहर से जितना सुन्दर था अन्दर उससे भी ज्यादा सुन्दर। हर तरह की सुख-सुविधा का पूरा इन्तजाम। उस मकान के दो एक जैसे हिस्से देखकर भरत ने मन ही मन कहा, " देखो छोटे को अपने दोनों लड़कों की कितनी चिन्ता है। दोनों के लिये अभी से एक जैसे दो हिस्से  (portion) तैयार कराये हैं। पूरा मकान सवा-डेढ़ करोड़ रूपयों से कम नहीं होगा। और एक मैं हूँ, जिसके पास जवान बेटी की शादी के लिये लाख-दो लाख रूपयों का इन्तजाम भी नहीं है।"
           मकान देखते समय भरत की आँखों में आँसू थे जिन्हें  उन्होंने बड़ी मुश्किल से बाहर आने से रोका।
          तभी पण्डित जी ने आवाज लगाई, " हवन का समय हो रहा है, मकान के स्वामी हवन के लिये अग्नि-कुण्ड के सामने बैठें।"
               लक्ष्मण के दोस्तों ने कहा, " पण्डित जी तुम्हें बुला रहे हैं।"
          यह सुन लक्ष्मण बोले, " इस मकान का स्वामी मैं अकेला नहीं, मेरे बड़े भाई भरत भी हैं। आज मैं जो भी हूँ सिर्फ और सिर्फ इनकी बदौलत। इस मकान के दो हिस्से हैं, एक उनका और एक मेरा।"
          हवन कुण्ड के सामने बैठते समय लक्ष्मण ने भरत के कान में फुसफुसाते हुए कहा, " भैया, बिटिया की शादी की चिन्ता बिल्कुल न करना। उसकी शादी हम दोनों मिलकर करेंगे ।"
                 पूरे हवन के दौरान भरत अपनी आँखों से बहते पानी को पोंछ रहे थे, जबकि हवन की अग्नि में धुँए का नामोनिशान न था ।
भरत जैसे आज भी
मिल जाते हैं इन्सान
पर लक्ष्मण जैसे बिरले ही
मिलते  इस जहान

बुधवार, 14 जून 2017

***आचार्य समाज के सितारे***

***आचार्य समाज के सितारे***
धर्मेंद्र आचार्य सुपुत्र श्री बनवारीलाल आचार्य
सुजानगढ़, चुरू (राजस्थान)
रोल नं. 2556275
कक्षा 12 साइंस रिजल्ट 2017
89.60%
PCM = 95.67%
एक नज़र 10 के रिकार्ड पर
76% साइंस में 100/100