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सोमवार, 20 नवंबर 2017

भीलवाड़ा : आचार्य समाज द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ

भीलवाड़ा : आचार्य समाज द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ
20.11.2017/भीलवाड़ा
राजस्थान आचार्य ब्राह्मण विकास समिति सनवाड़ उदयपुर के प्रधान एवम नव निर्वाचित अध्यक्ष महोदय परम सम्मानिय भ्राता श्री देवी लाल जी आचार्य साहब श्रीमान बालू लाल जी आचार्य एवम सभी परिवार जनो द्वारा आज मेवाड़ की धरा पर जो दृश्य स्थापन किया गया वह काबिल ऐ तारीफ़ अतुल्य अद्भुत और सर्व प्रसंसनीय हैं । और सर्वत्र क्षेत्रो को आमंत्रित मेवाड़ मारवाड़ ढूंढाड़ शेखावाटी हाड़ौती मालवा आदि स्व समाज के स्वजनों की उपश्थिति साक्षात् महाकुम्भ सा सुखद एवम मनोरम दृश्य प्रतीत हुआ जो कि सामाज को देवतुल्य महात्मा पुण्यश्रेष्ठ स्व. पंडित रामपाल जी आचार्य जी हलेड़ की प्रथम पावन पुण्य स्मृति के यादगार और ऐतिहासिक क्षणों की समाज के समक्ष एक नई मिशाल पेश कर  सौगात प्रदान की हैं ।।।
हे युग पुरुष ....  महात्मन परम श्रधेय बाबा श्री रामपाल जी आचार्य आपके देवलोक पर्यंत प्रथम बरसी पर हम सब समाज जन आपके पुण्य कृत्य सद्कर्मो और सांस्कृतिक लोकाचार निर्वहन की परम्परा को कोटिस वन्दन कोटि कोटि  नमन करते हैं .....।।।।।
हे युग पुरुष
आपको युगों युगों तक हम भूल नही पाएंगे ... आप श्री की आत्मा अजर रहे अमर रहे .... ।।। हम आपके प्रति कृतज्ञ हैं जो ऐसे समाज सेवी परिवार जन बंधु बान्धव पुत्र पौत्रादि सन्तति हमारे मध्य समर्पण का इतिहास लिखते हैं ... ।।।।
आचार्य समाज के विशाल बैनर तले समाज को गौरव और स्वाभिमान का अहसास करवाने वाले कुछ दृश्य
A. प्रातः राजकीय चिकित्सालय में फलों का वितरण
बी. दोपहर वृद्धाश्रम और चिकित्सालय में भोजन वितरण
C. रक्त दान जीवन दान महादान सर्वोपरी मान कर
विशाल  ब्लड डोनेशन केम्प का आयोजन एवम एक सौ एक रक्त यूनिट रक्तदान द्वारा एक सौ एक से भी अधिक अनजान लोगो के जीवन बचाने में सहयोग क्योकि एक रक्त यूनिट में से अलग अलग रक्त उत्पादों के घटक तैयार होते हैं  ।। धन्य हो ।।।
D. तीन सौ से अधिक शैक्षणिक राजनीतिक क्रीड़ा एवम अन्य क्षेत्र में अपना लोहा मनवाने वाली सामाजिक प्रतिभाओ की होंसला अफजाई कर सम्मानित करना ......।।।।
जय हो ।।।
E. समारोह में शिरकत कर रहें नगर सुधार न्यास के यशश्वी चेयरमैन श्री गोपाल जी खंडेलवाल ने भीलवाड़ा शहर में आचार्य समाज को होस्टल हेतु भूमि आबंटन की घोषणा की जो आज के इस स्मृति दिवस को सुनहरे अक्षरों में नामांकित करता हैं ।।

रविवार, 19 नवंबर 2017

भारतीय सुंदरी के सिर Miss World का ताज, मानुषी की ये 10 खास बातें

भारतीय सुंदरी के सिर Miss World का ताज, मानुषी की ये 10 खास बातें
18 Nov. 2017
भारत की मानुषी छिल्लर मिस वर्ल्ड चुनी गईं. 17 वर्षों के बाद किसी भारतीय सुंदरी के सिर यह ताज सजा है. चीन के सान्या शहर में आयोजित मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में मानुषी ने खिताब अपने नाम किया. जान‍िए मानुषी के बारे में 10 खास बातें.
1 मानुषी छिल्लर हरियाणा की हैं. देश में हरियाणा की गिनती सबसे खराब महिला पुरुष रेशियो के लिए की जाती है. मानुषी सोनीपत के भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज फॉर वूमेन की छात्रा रह चुकी हैं.
2 .मानुषी के पिता डाक्टर मित्र बसु छिल्लर DRDO में वैज्ञानिक हैं. जबकि मां मां डाक्टर नीलम छिल्लर न्यूरो केमिस्ट्री में हेड ऑफ डिपार्टमेंट हैं.
3 .मानुषी की उम्र केवल 20 साल है. मिस वर्ल्ड जीतने वाली वो छठीं भारतीय महिला हैं. मानुषी ने दिल्ली के सेंट थॉमस स्कूल से पढ़ाई की है.
4 .जब पीजेंट के लिए मानुषी का सिलेक्शन हुआ वो एमबीबीएस कर रही थीं.
5 मानुषी एक ट्रेंड कुचिपुड़ी डांसर हैं. उन्होंने राजा और राधा रेड्डी जैसे नामचीन गुरुओं से नृत्य का प्रशिक्षण लिया है.
6 .मानुषी नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा का भी हिस्सा रह चुकी हैं. उन्हें खाली वक्त में तैराकी और पेंटिंग करना पसंद है. उनकी कविता में भी रुचि है.
7 .मानुषी इंग्लिश में दक्ष हैं. उन्होंने कक्षा 12 में अंग्रेजी की ऑल इंडिया सीबीएसई टॉपर हैं.मिस इंडिया के अलावा मानुषी ने मिस फोटोजेनिक का अवॉर्ड अपने नाम किया.
8 .मानुषी छिल्लर मिस हरियाणा भी रह चुकी हैं.
9 .मिस इंडिया के अलावा मानुषी ने मिस फोटोजेनिक का अवॉर्ड अपने नाम किया.
10 .मिस वर्ल्ड मानुषी का परिवार फिलहाल दिल्ली में रहता है.

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

संपादकीय : राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस 2017

                 ### संपादकीय ###
राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस 2017
*लोकतंत्र की मजबूती के लिये स्वतंत्र, निष्पक्ष और साहसिक पत्रकारिता आवश्यक है।
पर क्या आज ऐसी स्थितियां है?
मेरे विचार :- 
लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ मीडिया या पत्रकारिता को माना जाता है। पत्रकारिता लोकतंत्र को मजबूत करता है लेकिन यह तभी सम्भव है जब पत्रकारिता स्वतंत्र निष्पक्ष और साहसिक हो। आज हम देखते हैं कि मीडिया का व्यवसायीकरण हो रहा है। ज्यादातर अखबारों व टीवी चैनल पर विज्ञापनों की भरमार रहती है जोकि पत्रकारिता के मुख्य उद्देश्य ( आम जनता की समस्याओं को उठाना ) को कम कर देता है। इसके अलावा कुछ मीडिया समूह क्षैत्रीय व आम नागरिकों से जुड़ी समस्याओं की खबरों को महत्व न देकर ज्यादा टीआरपी व मसालेदार चटपटी खबरों को ही महत्व देते हैं। इससे पत्रकारिता की ईमेज दिन प्रतिदिन आम जनता की नज़र में खराब हो रही है। इसलिए लोग अपनी समस्याओं को सोसियल मीडिया साईट्स के द्वारा अभिव्यक्त कर रहे हैं ।
Mahaveer Acharya BARMER
edition & chief
Acharya samachar online
Www.Facebook.com/mahaveer2011

गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

गेस्ट कोर्नर : मां की करूणा

पूरी कहानी पढियेगा.....
वो विधवा थी पर श्रृंगार ऐसा कर के रखती थी कि पूछो मत। बिंदी के सिवाय सब कुछ लगाती थी। पूरी कॉलोनी में उनके चर्चे थे। उनका एक बेटा भी था जो अभी नौंवी कक्षा में था । पति रेलवे में थे उनके गुजर जाने के बाद रेलवे ने उन्हें एक छोटी से नौकरी दे दी थी । उनके जलवे अलग ही थे । 1980 के दशक में बॉय कटिंग रखती थी । सभी कालोनी की आंटियां उन्हें 'परकटी' कहती थी । 'गोपाल' भी उस समय नया नया जवान हुआ था । अभी 16 साल का ही था । लेकिन घर बसाने के सपने देखने शुरू कर दिए थे । गोपाल का आधा दिन आईने के सामने गुजरता था और बाकि आधा परकटी आंटी की गली के चक्कर काटने में।
गोपाल का नव व्यस्क मस्तिष्क इस मामले में काम नहीं करता था कि समाज क्या कहेगा ? यदि उसके दिल की बात किसी को मालूम हो गई तो ? उसे किसी की परवाह नहीं थी । परकटी आंटी को दिन में एक बार देखना उसका जूनून था ।
उस दिन बारिश अच्छी हुई थी । गोपाल स्कूल से लौट रहा था । साइकिल पर ख्वाबो में गुम उसे पता ही नहीं लगा कि अगले मोड़ पर कीचड़ की वजह से कितनी फिसलन थी । अगले ही क्षण जैसे ही वह अगले मोड़ पर मुड़ा साइकिल फिसल गई और गोपाल नीचे । उसी वक्त सामने से आ रहे स्कूटर ने भी टक्कर मार दी । गोपाल का सर मानो खुल गया हो । खून का फव्वारा फूटा । गोपाल दर्द से ज्यादा इस घटना के झटके से स्तब्ध था । वह गुम सा हो गया । भीड़ में से कोई उसकी सहायता को आगे नहीं आ रहा था । खून लगातार बह रहा था । तभी एक जानी पहचानी आवाज गोपाल नाम पुकारती है । गोपाल की धुंधली हुई दृष्टि देखती है कि परकटी आंटी भीड़ को चीर पागलों की तरह दौड़ती हुई आ रही थी । परकटी आंटी ने गोपाल का सिर गोद में लेते ही उसका माथा जहाँ से खून बह रहा था उसे अपनी हथेली से दबा लिया । आंटी की रंगीन ड्रेस खून से लथपथ हो गई थी । आंटी चिल्ला रही थी "अरे कोई तो सहायता करो, यह मेरा बेटा है, कोई हॉस्पिटल ले चलो हमें ।"
गोपाल को अभी तक भी याद है । एक तिपहिया वाहन रुकता है । लोग उसमे उन दोनों को बैठाते हैं । आंटी ने अब भी उसका माथा पकड़ा हुआ था । उसे सीने से लगाया हुआ था । गोपाल को टांके लगा कर घर भेज दिया जाता है । परकटी आंटी ही उसे रिक्शा में घर लेकर जाती हैं । गोपाल अब ठीक है । लेकिन एक पहेली उसे समझ नहीं आई कि उसकी वासना कहाँ लुप्त हो गई । जब परकटी आंटी ने उसे सीने से लगाया तो उसे ऐसा क्यों लगा कि उसकी माँ ने उसे गोद में ले लिया हो । वात्सल्य की भावना कहाँ से आई । उसका दृष्टिकोण कैसे एकक्षण में बदल गया । क्यों वह अब मातृत्व के शुद्ध भाव से परकटी आंटी को देखता था ।
(2017) आज गोपाल एक रिटायर्ड अफसर है । समय बिताने के लिए कम्युनिटी पार्क में जाता है । वहां बैठा वो आज सुन्दर औरतों को पार्क में व्यायाम करते देख कर मुस्कुराता है । क्योंकि उसने एक बड़ी पहेली बचपन में हल कर ली थी । वो आज जानता है, मानता है, और कई लेख भी लिख चूका है कि महिलाओं का मूल भाव मातृत्व का है । वो चाहें कितनी भी अप्सरा सी दिखें दिल से हर महिला एक 'माँ' है । वह 'माँ' सिर्फ अपने बच्चे के लिए ही नहीं है । वो हर एक लाचार में अपनी औलाद को देखती है । दुनिया के हर छोटे मोटे दुःख को एक महिला दस गुणा महसूस करती है क्योंकि वह स्वतः ही कल्पना कर बैठती है कि अगर यह मेरे बेटे या बेटी के साथ हो जाता तो ? इस कल्पना मात्र से ही उसकी रूह सिहर उठती है । वो रो पड़ती है । और दुनिया को लगता है कि महिला कमजोर है । गोपाल मुस्कुराता है, मन ही मन कहता है कि "हे, विश्व के भ्रमित मर्दो ! औरत दिल से कमजोर नहीं होती, वो तो बस 'माँ' होती है।"

रविवार, 24 सितंबर 2017

लाइफ लाइन एक्सप्रेस में 27 सितंबर से होगा निःशुल्क इलाज

लाइफ लाइन एक्सप्रेस में 27 सितंबर से होगा निःशुल्क इलाज
- दुनिया की ऐसी पहली ट्रेन है, जिसमें अस्पताल है और कई असाध्य रोगों की सर्जरी भी ट्रेन में की जाती है।
बाड़मेर, 23 सितंबर। बाड़मेर जिला मुख्यालय पर पहली मर्तबा लाइफ लाइन एक्सप्रेस मंे 26 सितंबर से 16 अक्टूबर तक आमजन का निःशुल्क इलाज होगा। इंडिया फाउंडेशन की ओर से संचालित लाइफ लाइन एक्सप्रेस मंे मोतियाबिंद,पोलियो, मुख कैंसर, मिर्गी, स्त्री रोग जांच के साथ परिवार नियोजन सेवाएं उपलब्ध होगी।
लाइफ लाइन एक्सप्रेस इम्पैक्ट के उप परियोजना निदेशक डा.याज्ञनिक वाजा ने बताया कि यह दुनिया की ऐसी पहली ट्रेन है, जिसमें अस्पताल है और कई असाध्य रोगों की सर्जरी भी ट्रेन में की जाती है। इस ट्रेन को 1991 में शुरु किया था और तब से देश के कोने-कोने में पहुंचकर लोगों का इलाज जारी है। इस ट्रेन में ऑपरेशन से लेकर हर प्रकार के इलाज की सुविधाएं हैं। इसलिए इसे हॉस्पीटल ऑन व्हील कहा जाता है। इसमें
-दो सर्जीकल ऑपरेशन थियेटर, जिसमें पोलियो से लेकर कटे होठों और मोतियाबिंद जैसे ऑपरेशन किए जाते हैं। ऑपरेशन थियेटर में पांच टेबल हैं, जो आधुनिक मेडिकल उपकरणों से जुड़ी हैं। ट्रेन में दो रिकवरी रूम हैं, जिसमें ऑपरेशन के बाद मरीजों को रखा जाता है। ऑपरेशन थियेटर में इलाज के लिए अल्ट्रा मार्डन माइक्रोस्कोप से लेकर लेबोरेटरी, एक्सरे यूनिट भी है। ट्रेन में डेंटल रूम, ऑप्थेलोलॉजी ट्रीटमेंट से लेकर मेडिकल स्टाफ के लिए रूम बने हुए हैं। उन्हांेने बताया कि लाइफ लाइन एक्सप्रेस का खुद का पावर हाउस है, जो पूरी ट्रेन को बिजली सप्लाई करता है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे पूरी ट्रेन में हैं, जिससे पूरी मॉनीटरिंग कंट्रोलरूम में बैठकर की जा सकती है। उन्हांेने बताया कि इस टेªन में अब तक दस लाख मरीजांे के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान एक लाख लोगांे के आपरेशन किए जा चुके है। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.कमलेश चौधरी ने बताया कि लाइफ लाइन एक्सप्रेस के जरिए अधिकाधिक लोगांे को लाभांवित करने के लिए माकूल इंतजाम किए गए है। ग्रामीण क्षेत्रांे से अतिरिक्त चिकित्सकीय कार्मिक लगाए गए है। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डा.बी.एल.मंसूरिया ने बताया कि राजकीय चिकित्सालय मंे अतिरिक्त वार्ड आरक्षित करने के साथ मरीजांे के लिए समुचित सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। मरीजांे का उपचार रोजाना प्रातः 9 से सांय 5 बजे तक होगा। मरीज को अपने साथ आधार कार्ड या अन्य पहचान कार्ड लाना होगा। भर्ती किए गए मरीजांे के साथ एक व्यक्ति के सहयोगी के रूप मंे रहने की अनुमति होगी।
क्या रहेगा कार्यक्रमः निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 27 से 30 सितंबर तक आंखांे का परीक्षण कर 28 से 03 अक्टूबर तक मोतियाबिंद के आपरेशन किए जाएंगे। इसी तरह 4 एवं 5 अक्टूबर को पोलियो परीक्षण तथा 5 से 7 अक्टूबर को आपरेशन होंगे। कटे-फटे होंठ एवं जलने के बाद संकूचन का परीक्षण 4 एवं 5 अक्टूबर को करने के साथ 5 एवं 6 अक्टूबर को आपरेशन किए जाएंगे। कान के रोगियांे का परीक्षण 8 से 11 अक्टूबर को होगा। इसके बाद 9 से 14 अक्टूबर तक आपरेशन होंगे। इसी तरह 28 सितंबर से 10 अक्टूबर तक स्त्री रोग जांच ब्रेस्ट एवं सरवाइकल कैंसर, मुख कैंसर जांच होगी। इसके बाद 7 एवं 8 अक्टूबर को आपरेशन होंगे। मिर्गी रोगियांे का परीक्षण एवं उपचार 14 एवं 15 अक्टूबर तथा दातांे का उपचार एवं परीक्षण 6 से 12 अक्टूबर तक होगा। परिवार नियोजन कार्यक्रम 7 से 13 अक्टूबर तक चलेगा। 
चलता-फिरता अस्पतालः ट्रेन की बोगियों में ही अस्पताल जैसी सुविधाएं लाइफ लाइन ट्रेन की बोगियों को चलते-फिरते अस्पताल का स्वरूप दे दिया गया है। ट्रेन की बोगियां अस्पताल जैसी सुविधाओं से लैस है। वातानुकूलित आपरेशन थिएटर के साथ ही कांफ्रेंस हाल ही मौजूद है। कांफ्रेंस हाल में बैठ कर चिकित्सक मरीजों के आपरेशन को एलईडी पर देख सकते है। कांफ्रेंस हाल में 36 इंच की टीवी स्क्रीन लगाई गई है। उसे सीसी कैमरे के माध्यम से आपरेशन थिएटर और अन्य स्थानों से जोड़ा गया है। इसके अलावा ट्रेन की बोगी में डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, पैथालांजी, दंत चिकित्सा के लिए आधुनिक उपकरण, मेडिकल स्टोर, मरीजों को आपरेशन के बाद तीन घंटे रखने के लिए व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मरीजों के परीक्षण के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का अलग-अलग वातानुकूलित चेम्बर बनाया गया है। चिकित्सकों का चेम्बर भी वातानुकूलित है। ट्रेन में छोटा सा कैंटीन भी है। उसी में चिकित्सकों का नाश्ता और भोजन तैयार किया जाता है। इन उपकरणों को संचालित करने के लिए ट्रेन में एक जेनरेटर सेट भी लगाया गया है ताकि बिजली कटौती आदि की समस्या से न जूझना पड़े। इस ट्रेन में 40 से 50 की संख्या में चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी इलाज के दौरान मौजूद रहेगें।

समस्या v /s समाधान

संपादकीय✍✍✍✍
समस्या v /s समाधान
बाड़मेर/14.09.2017.....01:30 ए.एम.
बाड़मेर से जोधपुर के बीच चलने वाली डेमू रेल गाड़ी में असुविधा की भरमार
पहले बाड़मेर जोधपुर के बीच लोकल रेलगाड़ी चलती थी जो कि अब बन्द कर दी गई। इसकी जगह अब डेमू रेलगाड़ी ने ले ली हैं। इस रेलगाड़ी का संचालन बाड़मेर से दो बार होता हैं सुबह 4:50 ए.एम. और रात को 12:30 ए.एम. बजे जिसमें रात को असुविधा की भरमार है।
रात को चलने वाली ये डेमू रेलगाड़ी में न तो लाईटिंग की व्यवस्था है और न ही बाथरूम के नलों में पानी आता है। यात्रियों को अँधेरे व गर्मी में यात्रा करनी पड़ रही है। और तो और यहा लोग सीट पर आकर लेट जाते हैं।
और बहाना बनाते हैं कि दो जने ओर यहाँ आने वाले हैं। मेरी तबीयत खराब है वगेरह वगेरह और कुछ तो ऐसे भी लोग होते हैं जो गुंडागर्दी पर उत्तर आते हैं। मै तो नहीं देता जगह यहीं सोउंगा जो करना हैं करलो।
लो बताओ बात ये तो हद ही हो गई जैसे की कोई अपने घर का माल हो वैसे व्यहवहार कर रहे हैं और इनको कोई रोकने टोकने वाला नहीं। रेल्वे पुलिस को कहते हैं तो जवाब मिलता है आप उन्हें उठा दो कि जगह दे दें । अरे भाई हमारे कहने से उठते तो हम आपको क्यों कहते ?  बिचारे यात्री नीचे पायदान फर्श पर सोने को मजबूर है। इस डेमू रेल में सिर्फ बैठने की सीटें हैं बस में होती है वैसे। कुछ तो सामान रखने वाली रेंक पर हू सो जाते है।
तो देख लो सभी ये हकीकत है हमारे भारतीय रेल्वे की और इसमें यात्रा करने वाले भारतीयों की।
और सपने देख रहे है हम "बुलैट ट्रेन" चलाने की। जबकि यहाँ तो डेमू रेल की हालत खस्ता है।
हम सबको इस बारे में सोचना चाहिए कि आखिर इसके पीछे कौन जिम्मेदार है.......???
1. भारतीय रेल्वे
2. हम लोग खुद जो ऐसा होने देते हैं और आवाज़ नहीं उठाते
3. बढती जनसंख्या
4. वे सीटों को अपनी बापूति समझकर सोने वाले लोग
मेरी बात को वो लोग अच्छे से समझ रहे होंगे जिन्होंने कभी रात में ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हुए यात्रा की हैं।
तो आज अपनी आवाज़ बुलंद करो इस अव्यवस्था के खिलाफ।।
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Mahaveer Acharya
Barmer
Editor & chief
आचार्य समाचार ओनलाईन
acharyasamacharonline.blogspot.com

रविवार, 10 सितंबर 2017

महावीर स्कूल को मिला सम्मान

आज दैनिक भास्कर द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष में आयोजित गुरू शिक्षक सम्मान समारोह में महावीर विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय सहित कई विद्यालयों व शिक्षकों को सम्मानित किया गया। प्रबन्धक निर्देशक श्री जीवराज शर्मा ने  धन्यवाद ज्ञापित किया।

बुधवार, 16 अगस्त 2017

आचार्य समाज ने स्वतंत्रता दिवस मनाया

बाड़मेर/15.08.2017
आचार्य समाज द्वारा 71 वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया। समाज के सभाभवन पर वरिष्ठ संरक्षक श्री ईश्वरलाल आचार्य पूर्व उपसभापति नगर पालिका बाड़मेर  द्वारा ध्वजारोहण किया गया। शहीदों की शहादत को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर समाज की पुष्कर धर्मशाला के कार्यवाहक अध्यक्ष स्वरुप आचार्य , पूर्व पार्षद रमेश आचार्य, महावीर आचार्य, रामलाल , प्रवीण खत्री, नेमीचंद , जयराम, दलपत , कपिल, तपेश आदि उपस्थित रहे। साथ ही शाम को कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष में भजन व अन्य कार्यक्रम भी आयोजित हुए।

बुधवार, 9 अगस्त 2017

जज्बे को सलाम,बाढ़ राहत के लिए सौंपे वृद्वावस्था पेंशन के एक हजार रूपए

जज्बे को सलाम,बाढ़ राहत के लिए सौंपे वृद्वावस्था पेंशन के एक हजार रूपए

बाड़मेर, 09 अगस्त। 
अतिवृष्टि से प्रभावित लोगांे की मदद के लिए जिला प्रशासन के साथ विभिन्न स्वयंसेवी संगठन जुटे हुए है। लेकिन बुधवार को बाड़मेर कलेक्ट्रेट मंे उस समय सेवा की भावना और जज्बे का सलाम करता नजर आया, जब एक महिला भंवरीदेवी अपनी वृद्वावस्था पेंशन के एक हजार रूपए सहायता के बतौर बाड़मेर जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते को देने के लिए पहुंची। सेवा की भावना एवं उसके जज्बे को देखकर जिला कलक्टर भी भावविभोर हो गए। उन्हांेने भंवरीदेवी का आभार जताया।
बाड़मेर जिले मंे पिछले दिनांे हुई अतिवृष्टि से हजारांे परिवारांे के आशियाने ढह गए। कई गांवांे मंे पानी भरने से सैकड़ांे लोगांे को जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षित स्थानांे पर ठहराया गया है। इनकी मदद के लिए जिला प्रशासन के साथ विभिन्न संगठन भी प्रयास कर रहे है। इन लोगांे की मदद के लिए आचार्याें का वास निवासी श्रीमती भंवरीदेवी पत्नी स्व.मांगीलाल आचार्य भी अपनी वृद्वावस्था पेंशन मंे से 1 हजार रूपए लेकर पहुंची। उन्हांेने जिला कलक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते को एक हजार रूपए बाढ़ पीडि़तांे की सहायता के लिए सुपुर्द किए। जिला कलक्टर नकाते ने भंवरीदेवी का आभार जताते हुए कहा कि आप जैसे लोगांे की वजह से मानवता जिन्दा है। वे उनके जज्बे और सेवा की भावना को सलाम करते है।

सोमवार, 31 जुलाई 2017

बेटी ने जीता सिल्वर

बेटी ने जीता सिल्वर
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल की छात्रा (शहीद भगत सिंह स्पोटर्स अकेडमी की खिलाड़ी) महक शर्मा ने हरियाणा सब जूनियर स्टेट वुशु कप चैंपियनशिप 2017-18 में जीता सिल्वर।
Daughter won Silver
mahak Sharma, the student of Saraswati Vidya Mandir School (Shahid Bhagat Singh Sports Academy player), Silver won the All-Junior State Wushu Cup Championship in 2017-18.


शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

इस बार 191 दिन रहेगा स्कूलों का कार्य दिवस

*इस बार 191 दिन रहेगा स्कूलों का कार्य दिवस*
राजसमंद |
शिक्षाविभाग ने इस सत्र का शिविरा पंचांग जारी कर दिया। शिक्षण सत्र एक जुलाई से नौ मई 2018 तक रहेगा। इस बार कार्य दिवस 191 दिन का रहेगा। सबसे कम कार्य दिवस अक्टूबर में रहेगा। जबकि मार्च में बोर्ड की परीक्षा, 13 से 25 अप्रैल तक वार्षिक परीक्षा होगी। 30 अप्रैल को रिजल्ट एक मई को नवीन सत्र शुरू और 10 मई से 18 जून तक ग्रीष्म कालीन अवकाश होगा। इस बार एक जुलाई से स्कूल शुरू हो गए। लेकिन विभाग ने प्रवेशोत्सव का द्वितीय चरण 15 जुलाई तक बढ़ा दिया। वहीं निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण भी इसी दौरान चला है। इससे शिक्षण कार्य मध्य जुलाई से शुरू हुआ। अगस्त में 25 दिन का कार्य दिवस रहेगा। 17 से 19 अगस्त तक प्रथम परख होगा। 26 से 28 अक्टूबर को द्वितीय परख, 11 से 23 अद्धवार्षिक परीक्षा होगी। 8 से 10 फरवरी तृतीय परख का होगा। बोर्ड की परीक्षाएं मार्च से शुरू होगी। गृह परीक्षा 13 से 25 अप्रैल तक बीच होगी। 30 अप्रैल को रिजल्ट एक मई 2018 से नया सत्र शुरू होगा।
*समय परिवर्तन एक अक्टूबर से होगा*
इसबार शिविरा पंचांग के अनुसार एकल पारी वाले स्कूलों में एक अक्टूबर से समय परिवर्तन भी हो जाएगा। स्कूलों का समय सुबह 9 बजकर 35 मिनट से 3 बजकर 40 मिनट तक होगा। संस्था प्रधान को सुबह 9 बजकर 20 से शाम को 3 बजकर 40 मिनट तक रुकना होगा। स्टॉफ के लिए सुबह साढ़े नौ से शाम 3 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। दो पारी वाले स्कूल में 5-5 घंटे के अनुसार सुबह सात से शाम 5 बजे तक स्कूल रहेगा। एक अप्रैल 2018 से फिर से सुबह का परिवर्तन हो जाएगा।
* शेक्षिक समाचार *

सोमवार, 17 जुलाई 2017

गायन

गायन
हैरी बेलाफोन्ट 1954 गायन एक ऐसी क्रिया है जिससे स्वर की सहायता सेसंगीतमयध्वनिउत्पन्न की जाती है और जो सामान्यबोलचाल की गुणवत्ता कोरागऔर ताल दोनों के प्रयोग से बढाती है। जो व्यक्ति गाता है उसेगायकयागवैयाकहा जाता है। गायक गीत गाते हैं जोएकलहो सकते हैं यानी बिना किसी और साज यासंगीतके साथ या फिर संगीतज्ञोंव एकसाजसे लेकर पूरे आर्केस्ट्रा या बड़े बैंड के साथ गाए जा सकते हैं। गायन अकसर अन्य संगीतकारों के समूह में किया जाता है, जैसे भिन्न प्रकार के स्वरों वाले कई गायकों के साथ या विभिन्न प्रकार के साज बजाने वाले कलाकारों के साथ, जैसे किसी रॉक समूह या बैरोक संगठन के साथ। हर वह व्यक्ति जो बोल सकता है वह गा भी सकता है, क्योंकि गायन बोली का ही एक परिष्कृत रूप है।गायन अनौपचारिक हो सकता है और संतोष या खुशी के लिये कियाजा सकता है, जैसे नहाते समय या कैराओके में; या यह बहुत औपचारिक भी हो सकता है जैसे किसी धार्मिक अनुष्ठान के समय या मंच पर या रिकार्डिंग के स्टुडियो में पेशेवर गायन के समय। ऊंचे दर्जे के पेशेवर या नौसीखिये गायन के लिये सामान्यतः निर्देशन और नियमित अभ्यास आवश्यकता होती है।
[1] पेशेवर गायक सामान्यतः किसी एक प्रकार के संगीत में अपने पेशे का निर्माण करते हैं जैसे शास्त्रीयया रॉक और आदर्श रूप से वे अपने सारे करियर के दौरान किसी स्वर-अध्यापक या स्वर-प्रशिक्षक की सहायता से स्वर-प्रशिक्षण लेते हैं।मानव स्वरमुख्य लेख :Human voiceवोकल फोर्ड्स या कॉर्ड्स का एक लेबल्ड संरचनात्मक आरेख।अपने भौतिक पहलू में, गायन एक अच्छी तरह से परिभाषित तकनीक है जो फेफड़ों के प्रयोग पर, जो हवा की आपूर्ति, या धौंकनी की तरह कार्य करते हैं, स्वर यंत्र जो बांसुरी या कम्पक का काम करता है, वक्ष औरसिरकी गुहाएं, जो वायु वाद्य़ में नली की तरह, ध्वनि विस्तारक का कार्य करती हैंऔरजीभजो तालू, दांतों और होठों के साथ मिलकर स्वरों और व्यंजनों का उच्चारण करती है, पर निर्भर होती है। हालाँकि ये चारों प्रणालियां स्वतंत्र रूप से कार्य करती हैं, उन्हें एक मुखऱ तकनीक की स्थापना के लिये समन्वित किया जाता है और वे एक दुसरे के साथ अंतर्क्रिया करने के लिये बनी होती हैं।
[2]निष्क्रिय श्वास क्रिया के समय, हवा मध्यपटल के साथ अंदर ली जाती है जबकि उच्छ्वास की क्रिया बिना किसी प्रयास के हो जाती है। पेट,आंतरिक अंतर्पसलीय और अधो श्रोणिक पेशियां उच्छ्वास की क्रिया में सहायक हो सकती है। बाह्य अंतर्पसलीय, स्केलीनऔर स्टर्नोक्लीडोमैस्टायड पेशियां उच्छ्वास में सहायता करती हैं। स्वर रज्जु आवाज की पिच में परिवर्तन करते हैं। होठों को बंद रख कर स्वर उत्पन्न करने को गुनगुनाने की संज्ञा दी जाती है।प्रत्येक व्यक्ति के गायन की अद्वितीय न केवल आवाज रज्जुओं के वास्तविक आकार व बनावट के कारण ही नहीं होती बल्कि उस व्यक्ति के शेष शरीर के आकार और बनावट पर भी निर्भर होती है। मनुष्य के स्वर रज्जुओं की मोटाई ढीली की जा सकती है या, कसी जा सकती है या बदली भी जा सकती है औरउन पर से हवा बदलते हुए दबाव के साथ प्रवाहित की जा सकती है। वक्ष और गर्दन का आकार,जीभकी स्थिति और अन्यथा असंबंधित पेशियों के तनाव को बदला जा सकता है। इनमें से किसी भी कार्य के होने पर उत्पन्न आवाज की पिच,आयतन, लय या सुर में परिवर्तन हो जाता है। ध्वनि शरीर के विभिन्न भागों में भी प्रतिध्वनित होती है और एक व्यक्ति का आकार और हड्डियों का ढांचा उस व्यक्ति द्वारा उत्पन्न ध्वनि को प्रभावित कर सकता है।गायक आवाज को कुछ इस तरह प्रस्तुत करना भी सीख सकते हैं जिससे कि वह उनके स्वर तंत्र में बेहतर तरीके से गूंज सके। इसे मुखर प्रतिध्वनिकरण के नाम सो जाना जाता है। मुखर स्वर और उत्पादन पर एक प्रमुख प्रभाव स्वर यंत्र के कार्य से होता है, जिसे लोग भिन्न तरीकों से प्रयोग करके भिन्न प्रकार के स्वर उत्पन्न करते हैं। स्वर यंत्र के इन भिन्न प्रकार के कार्यों का भिन्न प्रकार की मुखर पंजियों के रूप में वर्णन किया जाता है।
[3]इस सफलता के लिये गायकों द्वारा प्रयुक्त विधि में गायक के फार्मेंट का प्रयोग किया जाता है, जिसेकानके आवृति दायरे के सबसे अधिक संवेदनशील भाग से खास तौर पर अनुकूल पाया गया है।
[4]मुखर पंजीकरणमुख्य लेख :
Vocal registration साँचा:
Vocal registrationमुखर पंजीकरण मानव की आवाज के भीतर स्थितमुखर रजिस्टरोंकी प्रणाली को संदर्भित करता है। मानव आवाज की पंजी एक विशेष सुरों की श्रृंखला होती है, जो स्वर रज्जुओं के समान कंपनों में उत्पन्न होती है और एक समान गुणवत्ता लिये होती है। पंजियों का मूल स्वर यंत्र के कार्य में होता है। वे इसलिये होती हैं क्योंकि स्वर रज्जुओं में कई अलग अलग तरह के कंपन उत्पन्न करने कीक्षमता होती है। कम्पन के ये प्रकार पिचों के एक विशेष दायरे में प्रकट होते हैं और खास तरह के स्वर उत्पन्न करते हैं।
[6]शब्द "पंजी" कुछ भ्रामक हो सकता है क्यौंकि यह मानव आवाज के कई पहलुओं को अपने में संजोए होता है। पंजी शब्द का प्रयोग निम्न में से किसी के संदर्भ में भी किया जा सकता है:
[7]*.गायन के दायरे के किसी खास भाग जैसे ऊपरी, मध्यम या निचली पंजियां*.कोईप्रतिध्वनिक्षेत्र जैसे, वक्ष स्वर या शीर्ष स्वर।*.स्वरीकरण प्रक्रिया (स्वरीकरण प्रक्रिया में स्वर रज्जु के कंपन द्वारा मुखर स्वर उत्पन्न किया जाता है जिसे फिर स्वर प्रणाली की प्रतिध्वनि द्वारा संशोधित किया जाता है)।*.कोई निश्चित मुखर लय या गायन "रंग"*.आवाज का एक क्षेत्र जिसे स्वर के व्यवधान द्वारा परिभाषित या सीमांकित किया जाता है।भाषा विज्ञानमें, एकपंजीकृत भाषावह भाषा है जो सुर और स्वर को एकएकल स्वर विज्ञानप्रणाली में संयुक्त करती है। वाक रोगविज्ञान में शब्द मुखर पंजी के तीन तत्व होते हैं - स्वर राज्जों का कोई निश्चित कम्पन प्रकार, पिचों की कोई निश्चित श्रंखला और कोई निश्चित प्रकार की आवाज। वाक रोगविशेषज्ञ स्वरयंत्र के शरीर विज्ञान क्रिया के आधार पर चार मुखर पंजियों की पहचान करते हैं - मुखर फ्राई पंजी, मोडल पंजी, फाल्सेटो पंजी और सीटी पंजी। यही नजरियाकई मुखर शिक्षाविदों ने भी अपनाया है।
[8]स्वर प्रतिध्वनिकरण या स्वर गुंजनमुख्य लेख :Vocal resonationस्वर प्रतिध्वनिकरणएक प्रक्रिया है जिसके द्वारा स्वर उत्पादनक्रिया के मूल उत्पाद के सुर या गहराई को हवा से भरी गुहाओं द्वारा उस समय बढ़ाया जाता है जब वह उनमें से बाहरी हवा तक जाते हुए गुजरती है। प्रतिध्वनि क्रिया से संबंधित कई शब्दों में ध्वनि-विस्तारण, प्रचुरीकरण, विस्तार, सुधार, तीव्रीकरण और दीर्घीकरण शामिल हैं, हालाँकि पक्के वैज्ञानिक प्रयोग के लिये स्वर के अधिकारी उनमें से अधिकांश पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं। किसी गायक या वक्ता द्वारा इन शब्दों से निकाला जाने वाला मुख्य निष्कर्ष यहहोता है कि प्रतिध्वनि का अंतिम परिणाम एक बेहतर आवाज होनी चाहिये।
[9]शरीर में सात ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें संभावित स्वर प्रतिध्वनिकारकों के रूप में सूचीबद्ध किया जा सकता है। शरीर में सबसे नीचे की स्थिति से सबसे ऊपर की स्थिति की श्रंखला में ये क्षेत्र हैं, वक्ष, वायुनली वृक्ष, स्वरयंत्र, गला, मुखगुहा, नासगुहा और साइनस।
[10]वक्ष स्वर और शीर्ष स्वरमुख्य लेख :
Chest voiceऔरHead voiceवक्ष स्वरऔरशीर्ष स्वरमुखर संगीत में प्रयुक्त पद हैं। इन पदों का प्रयोग मौखिक स्वर शिक्षाविदों में बड़ेपैमाने पर भिन्न तरह से होता है और वर्तमान में इन पदों के विषय में मुखर संगीत पेशेवरों में कोई स्थिर राय नहीं है। वक्ष स्वर का प्रयोग स्वर की सीमा के किसी विशेष भाग या स्वर पंजी के किसी विशेष प्रकार - स्वर गुंजन क्षेत्र, या विशिष्ट स्वर ताल - के संबंध में किया जा सकता है।[7]शीर्ष स्वर का प्रयोग भी स्वर की सीमा के किसी विशेष भाग या स्वर पंजी के प्रकार या स्वर गुंजन क्षेत्र के संदर्भ में किया जा सकता है।[7]इतिहास और विकासवक्ष स्वर और शीर्ष स्वर पदों का पहला लिखित संदर्भ 13वीं शताब्दी के आस-पास मिलता है, जब जोहान्स डी गार्लैंडिया और जेरोम ऑफ मोराविया नामक लेखकों द्वारा इसे गले के स्वर (पेक्टोरिस, गट्टोरिस, कैपिटिस - उस समय यह संभव है कि शीर्ष स्वर का अर्थ फाल्सेटो पंजी से था) से अलग पहचाना गया।[9]इन पदों को बाद में बेल कैंटो नामक इतालवी आपेरा गायन विधि में समाविष्ट कर लिया गया, जिसमें वक्ष स्वर को तीनों स्वर पंजियों-वक्ष, पैसेजियो और शीर्ष पंजी: में सबसे नीचे और शीर्ष स्वर को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया था।
[10]यह बात आज भी कुछ स्वर शिक्षाविदों द्वारा पढ़ाई जाती है। आजकल प्रचलित बेल कैंटो माडल पर आधारित एक और पद्धति के अनुसार पुरूष और स्त्री के स्वरों को तीन पंजियों में विभाजित किया गया है। पुरूषों के स्वरों को वक्ष पंजी, शीर्ष पंजी और फाल्सेटो पंजी में और स्त्रियों के स्वर को वक्ष पंजी, मध्य पंजी और शीर्ष पंजी में विभाजित किया गया है। ये शिक्षाविद कहते हैं कि शीर्ष पंजी गायक के सिर में महसूस किये जाने वाले गुंजन का वर्णन करने के लिये गायन में प्रयुक्त एक स्वर तकनीक है।
[11]लेकिन पिछले दो सौ वर्षों में मानव के शरीरक्रिया विज्ञान की जानकारी और गायन और स्वर के उत्पादन की भौतिक क्रिया की समझ में वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप कई स्वरशिक्षाविदों जैसे इंडियाना विश्वविद्यालय के राल्फ एप्पेलमैन और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के विलियम वेनार्ड ने वक्ष स्वर और शीर्ष स्वर पदों के प्रयोग को पुनर्परिभाषित कर दिया है या उनका प्रयोग करनाही बंद कर दिया है।[10]खास तौर परवक्ष पंजीऔरशीर्ष पंजीपदों का प्रयोग विवादास्पद हो गया है क्योंकि स्वर पंजी को आजकल स्वर तंत्र की क्रिया के उत्पाद के रूप में देखा जाता है जो कि वक्ष, फेफडों और सिर के शरीरक्रियाविज्ञान से असंबंधित है। इसी वजह से कई स्वर शिक्षाविद यह तर्क करते हैं कि पंजियों के वक्ष या सिर में उत्पन्न होने की बात करना अनर्गल है। वे कहते हैं कि इन क्षेत्रों में महसूस होने वाले कंपन प्रतिध्वनियां हैं और उनका वर्णन पंजियों की बजाय स्वर के गुंजन से संबंधित पदों में किया जाना चाहिये। ये स्वर शिक्षाविद पंजी के स्थान परवक्ष स्वरऔरशीर्ष स्वरपदों का प्रयोगअधिक पसंद करते हैं। इस नजरिये के अनुसार जिन समस्याओं को लोग पंजी की समस्याएं मानते हैं वे दरअसल प्रतिध्वनि के समंजन की समस्याएं हैं। यह नजरिया वाक रोगशास्त्र,स्वर विज्ञानऔरभाषाविज्ञानसहित स्वर पंजियों का अध्ययन करने वाले अन्य शैक्षणिक क्षेत्रों के नजरियों से भी सामंजस्य रखता है। हालाँकि दोनो ही विधियां अभी भी प्रयोग में हैं, फिर भी वर्तमान स्वर शिक्षाविद व्यवसाय नए अधिक वैज्ञानिक नजरिये को अपनाना पसंद करता है। हां, कुछ स्वर शिक्षाविद दोनों नजरियों के विचारों का प्रयोग करते हैं।[7]वक्ष स्वर शब्द का समकालीन प्रयोग अकसर किसी विशिष्ट स्वर वर्ण या स्वर के ताल के संदर्भ में होता है। शास्त्रीय गायन में, इसका प्रयोग पूरी तरह से मोडल पंजी या सामान्य स्वर के निचले भाग तक ही सीमित होता है। गायन के अन्य प्रकारों में वक्ष स्वर को अकसर समूचे मोडल पंजी में प्रयोग में लाया जाता है। वक्ष सुर गायक के स्वर की अर्थपूर्ण रंगपट्टिका में स्वरों की आश्चर्यजनक कतार लगा सकते हैं।
[12]लेकिन वक्ष में ऊंचे स्वरों को उत्पन्न करने की कोशिश में ऊंची पंजियों में अधिक बलशालीवक्ष स्वर का प्रयोग बलप्रयोग उत्पन्न कर सकता है। बलप्रयोग से अंततोगत्वा स्वर का ह्रास हो सकता है।
[13]गायन के स्वरों का वर्गीकरणमुख्य लेख :Voice typeऔरVoice classification in non-classical musicसाँचा:Vocal rangeयूरोपीय शास्त्रीय संगीत औरआपेरामें, स्वरों का प्रयोगसंगीत के वाद्योंकी तरह किया जाताहै। स्वर संगीत लिखने वाले गीतकारों को गायकों के हुनर और स्वर के गुणों की पहचान होना आवश्यक होता है।स्वर वर्गीकरणएक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा मानवीय गायन स्वरों का मूल्यांकन करके उन्हें विभिन्न स्वर प्रकारोंका नाम दिया जाता है। इन गुणों में स्वर का दायरा, स्वर कावजन, स्वर का टेसीट्यरा, स्वर की गहराई और स्वर के परिवर्तन बिंदु जैसे स्वर के तोड़ और उठाव आदि शामिल होते हैं। अन्य ध्यान देने योग्य बातों में भौतिक गुण, वाकस्तर, वैज्ञानिक परीक्षण और स्वर पंजीकरण शामिल हैं।
[14]यूरोपीयशास्त्रीय संगीतमें विकसित स्वर वर्गीकरण से संबंधित विज्ञान गायन के अधिक आधुनिक प्रकारों से अनुकूलन में पिछड़ गया है।आपेरामें स्वर वर्गीकरण का प्रयोग अकसर भावी स्वरों को संभावित भूमिकाओं से जोड़ने के लिये किया जाता है। शास्त्रीय संगीत में आजकल कई विभिन्न प्रणालियां हैं जिनमें शामिल हैं-जर्मनफैकप्रणाली और कोरल संगीत प्रणाली। कोई एक प्रणाली न तो सभी स्थानों में लागू है और न ही स्वीकृत है।[10]फिर भी अधिकांश शास्त्रीय संगीत प्रणालियां सात भिन्न मुख्य स्वर प्रकारों को मान्यता देती हैं। स्त्रियों को तीन समूहों में विभाजित किया गया है - सोप्रानो, मेज़ो-सोप्रानो और कान्ट्राल्टो। पुरूषों को सामान्यतः चार समूहों में बांटा गया है - काउंटरटीनॉर, टीनॉर, बैरिटोन और बैस। तरूण होने के पहले की उम्र वाले बच्चों की आवाजोंपर ध्यान देते समय एक आठवें पद, ट्रेबल, का प्रयोग किया जासकता है। इन सभी मुख्य प्रकारों में से हर एक के कई उपप्रकार होते हैं जो आवाजों की अलग पहचान के लिये विशिष्ट स्वर गुणों जैसे कलराटुरा सुविधा व स्वर के वजन की पहचान करते हैं।[7]इस बात पर ध्यान देना चाहिये कि कोरल संगीत में, गायकों के स्वर केवल आवाज की गहराई के आधार पर बंटे होते हैं। कोरल संगीत प्रत्येक लिंग में अधिकतर स्वर के भागों को ऊंची और नीची आवाजों (एसएटीबी (SATB), या सोप्रानो, आल्टो, टीनॉर और बैस) में बांटता है। परिणामस्वरूप, आदर्शकोरल स्थिति में दुर्वर्गीकरण हो जाने की बहुत संभावनाएं होती हैं।[7]चूंकि अधिकांश लोगों की आवाज मध्यम होती है, उन्हें उनके लिये या तो बहुत ऊंचा या बहुत नीचा भाग देना चाहिये; मेज़ो-सोप्रानो को सोप्रानो या आल्टो गाना चाहिये और बैरिटोन को टीनॉर या बैस गाना चाहिये। प्रत्येक विकल्प गायक के लिये कठिनाईयां प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन अधिकांश गायकों के लिये नीचे के सुर में गाने में ऊंचे सुर में गाने की अपेक्षा कम खतरा होता है।
[15]संगीत के समकालीन प्रकारों (जिन्हें कभी-कभी समकालीन व्यावसायिक संगीत का नाम दिया जाता है) में गायकों को उनके द्वारा गाए जाने वाले संगीत के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है, जैसे जैज़, पॉप, व्लूज़, सोल, कंट्री, फोक, या रॉक शैलियां। वर्तमान समय में गैर-शास्त्रीय संगीत में कोई आधिकारिक स्वर वर्गीकरण नहीं है। अन्य प्रकार के गायन में शास्त्रीय स्वर के प्रकारों का प्रयोग करने के प्रयत्न किये गए हैं लेकिन ऐसे प्रयत्न विवादग्रस्त हो गए हैं।
[16]स्वर के प्रकारों के वर्गीकरण का विकास इस भरोसे पर किया गया था कि गायक शास्त्रीय स्वर तकनीक का प्रयोग एक खास दायरे में रहकर बिना विस्तारित स्वर उत्पादन के साथ करेगा। चूंकि समकालीन संगीतज्ञ भिन्न स्वर तकनीकों, माइक्रोफोनों, का प्रयोग करते हैं और विशिष्ट स्वर भूमिका में जमने के लिये मजबूर नहीं होते हैं, इसलिये सोप्रानो, टीनॉर, बैरिटोन जैसे पदों का प्रयोग भ्रामक या गलत हो सकता है।
[17]स्वर शिक्षाशास्त्रमुख्य लेख :Vocal pedagogyएर्कोल डी' रॉबर्टी: कॉन्सर्ट, सी.1490गायन के अध्यापनके अध्ययन को स्वर शिक्षाशास्त्र कहते हैं। स्वर शिक्षाशास्त्र की कला और विज्ञान का एकलंबा इतिहास है जो प्राचीनग्रीस में शुरू हुआ था और आज तक विकसित और परिवर्तित हो रहा है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]स्वर के शिक्षाशास्त्र की कला और विज्ञान का व्यवसाय करने वाले पेशों में स्वर प्रशिक्षक,कोरल निर्देशक, मुखर संगीत शिक्षकों, ओपेरा निर्देशक और गायन के अन्य अध्यापक शामिल हैं।स्वर शिक्षाशास्त्र के सिद्धांत उपयुक्त स्वर तकनीक के विकास का भाग हैं। अध्ययन के लिये आदर्श क्षेत्रों में निम्न शामिल हैं:
[18][19]*.मानवीय शरीर रचना शास्त्रऔर शरीरक्रियाविज्ञान जो गायन की भौतिक प्रक्रिया से संबंधित है,*.स्वर का स्वास्थ्य और गायन से संबंधित स्वर के विकार*.श्वास क्रिया और गायन के लिये वायु का समर्थन*.स्वर उत्पादन*.स्वर की प्रतिध्वनि या स्वर का प्रोजेक्शन*.स्वर का पंजीकरण: स्वर रज्जुओं के समान कंपन प्रकार में उत्पन्न समान गुणवत्ता वाले तालों या लय की विशिष्ट श्रंखला, जो स्वर यंत्र से उत्पन्न होती है, क्योंकि इन सभी कंपन प्रकारों में से प्रत्येक पिचों के एक विशिष्ट दायरे में आते हैं और कुछ खास तरह की ध्वनियों को उत्पन्न करते हैं।*.स्वर वर्गीकरण*.स्वर की शैलियां: शास्त्रीय गायकों के लिये, इनमें लाइडर सेआपेरातक की शैलियां शामिल हैं; पॉप गायकों के लिये, शैलियों में "बेल्टेड आउट" ब्लूज़ बैलाड-जाज़ गायकों के लिये, शैलियों में स्विंग बैलाड और स्कैटिंग शामिल हैं।*.सोस्टेनूटो और लोगाटो जैसी शैलियों में प्रयुक्त तकनीकें, दायरे का विस्तारण, सुर की गुणवत्ता, वाइब्रेटो और कलराटुरास्वर की तकनीकउपयुक्त स्वर की तकनीक से किया गया गायन एक एकीकृत और समन्वयित क्रिया है जो गायन की भौतिक प्रक्रियाओं को प्रभावी रूप से संयोजित करती है। मौखिक स्वर के उत्पादन में चार भौतिक प्रक्रियाओं का प्रयोग होता है - श्वसन क्रिया, स्वर उत्पादन, प्रतिध्वनि और उच्चारण। ये प्रक्रियाएं निम्न श्रंखला में होती हैं:1.सांस ली जाती है2.स्वर यंत्र में आवाज शुरू होती है3.स्वर प्रतिध्वनिकारक आवाज को ग्रहण करते और उसको प्रभावित करते हैं4.उच्चारक आवाज को समझी जा सकने योग्य इकाइयों का रूप प्रदान करते हैंयद्यपि ये चारों प्रक्रियाएं अध्ययन के समय अलग-अलग पढ़ीजाती हैं, वास्तव में वे एक संयोजित कार्य में मिली होती हैं। किसी प्रभावशाली गायक या वक्ता के साथ सुनने वाले का ध्यान कभी उसमें होने वाली प्रक्रिया की ओर नहीं जाता है क्यौंकि मन और शरीर इस तरह से समायोजित हो जाते हैं कि सुनने वाले को केवल उसके फलस्वरूप उत्पन्न एकीकृत कार्य का ही ध्यान रहता है। इस प्रक्रिया में समायोजन की कमी होने पर कई स्वर संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।[17]चूंकि गायन एक समायोजित उपक्रम है, इसलिये किसी भी व्यक्तिगत तकनीकी क्षेत्र और प्रक्रियाओं के बारे में अन्य लोगों के संदर्भ के बिना कहना कठिन होता है। उदाहरण के लिये, स्वर निर्माण के बारे में तभी कह जा सकता है जब वह श्वसन क्रिया से जुड़ा हो, उच्चारक प्रतिध्वनि को प्रभावित करते हैं, प्रतिधवनिकारक स्वर रज्जुओं पर असर डालते हैं, स्वर रज्जु श्वास नियंत्रण को प्रभावित करते हैं, आदि। स्वर के विकारों के कारण अकसर उस समायोजित प्रक्रिया के एक भाग में रूकावट आ जाती है जिससे स्वर अद्यापक को अपने विद्यार्थी में प्रक्रिया के किसी एक भाग पर अधिक जोर देना पड़ता है जब तक कि वह समस्या ठीक न हो जाय। लेकिन गायन की कला के कुछ क्षेत्र समायोजित कार्यों के परिणामों से कि उनके बारे में पारम्परिक नामों जैसे स्वरीकरण, प्रतिध्वनिकरण, उच्चारण या श्वसनक्रिया के अंतर्गत बात करना कठिन है।एक बार विद्यार्थी गायन की क्रिया में काम आने वाली प्रक्रियाओं व उनकी कार्यप्रणाली के प्रति सजग हो जाता है तो वह उनका समायोजन करने की कोशिश में लग जाता है। अपरिहार्य रूप से विद्यार्थी और अध्यापक किसी एक प्रकार की तकनीक के बारे में अधिक चिंतित हो जाते हैं। कई प्रक्रियाएं भिन्न दरों पर आगे बढ़ सकती हैं जिससे एक असंतुलन या समायोजन की कमी हो जाती है। विद्यार्थी की भिन्न कार्यों को समायोजित करने की क्षमता पर सबसे अधिक निर्भर स्वर की तकनाक के क्षेत्र हैं:[7]1.स्वर के दायरे को अपनी अधिकतम सीमा तक ले जाना2.एक समान सुर के गुण वाली एक समान आवाज की उत्पत्ति का विकास करना3.लचीलेपन और फुर्ती का विकास करना4.एक संतुलित वाइब्रेटो प्राप्त करनागायन योग्य स्वर का विकास करनागायन एक हुनर है जिसके लिये उच्च रूप से विकसित पेशी प्रतिवर्ती क्रियाओं की जरूरत होती है। गायन के लिये अधिक पेशीय शक्ति की जरूरत नहीं होती लेकिन पेशी के उच्च दर्जे के समायोजन की जरूरत पड़ती है। लोग अपने स्वरों को गीतों और स्वर के व्यायामों के ध्यानपूर्वक और व्यवस्थित अभ्यास द्वारा विकसित कर सकते हैं। स्वर शिक्षाविद अपने विद्यार्थियों से अपनी आवाज की कसरत बुद्धिमत्तापूर्वक करने का निर्देश देते हैं। गायकों कोहमेशा यह सोचना होता है कि वे किस तरह की आवाज निकाल रहे हैं और गाते समय उन्हें किस तरह की अनुभूति हो रही है।
[17]स्वर के व्यायामों के कई उद्देश्य होते हैं, जिनमें आवाज को गर्म करना, आवाज के दायरे को बढ़ाना, स्वर को क्षितिजवत और लंबवत कतार में लगाना और स्वर की तकनीकें सीखना जैसे, लेगेटो, स्टैकेटो, गतिकी का नियंत्रण, तेज बोलना, चौड़े अंतरालों पर आराम से गाना सीखना, कम्पित ध्वनि से गाना, मेलिस्मा गाना और स्वर की त्रुटियों का सुधार।[7]आवाज के दायरे को बढ़ानास्वर के विकास का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है, गुण या तकनीक में परिवर्तन की ओर बिना किसी तरह का ध्यान खींचे अपने स्वर के दायरे की प्राकृतिक सीमा के भीतर गाना सीखना। स्वर शिक्षाविद कहते हैं कि कोई गायक यह लक्ष्य केवल तभी प्राप्त कर सकता है जब गायन के लिये आवश्यक सभी भौतिक प्रक्रियाएं (जैसे स्वरयंत्र की क्रिया, श्वास का समर्थन, प्रतिध्वनि का समंजन और उच्चारण) प्रभावी रूप से एक साथ कार्य कर रही हों। अधिकांश स्वर शिक्षाविद इन प्रक्रियाओं के समायोजन के लिये (1) स्वर के सबसे आरामपूर्ण टेसीटूरा में अच्छी गायन की आदतों के निर्माण और फिर (2) अपने दायरे को धीरे-धीरे बढ़ाने में विश्वास करते हैं।[3]ऊंचे या नीचे गाने की क्षमता को प्रभावित करने वाले तीन घटक हैं:1.ऊर्जाघटक - "ऊर्जा" के कई अर्थ हैं। इसका मतलब स्वर को बनाने में शरीर की संपूर्ण क्रिया से, भीतर सांस लेने वाली और सांस बाहर करने वाली पेशियों के बीच संबंध जिसे श्वास समर्थन प्रक्रिया कहते हैं, से, स्वर रज्जुओं पर श्वास से डाले गए दबाव और उस दबाव के प्रति उनके प्रतिरोध से, तथा आवाज के गतिकीय स्तर से होता है।2.स्थानघटक - "स्थान" से मतलब है मुंह के भीतर के स्थान का आकार और तालू और स्वरयंत्र की स्थिति। सामान्य तौर पर गायक का मुंह जितना ऊंचा वह गाता है, उतना ही अधिक खुलना चाहिये। भीतरी स्थान या नर्म तालू और स्वर यंत्रको गले को शिथिल करके चौड़ा किया जा सकता है। स्वर शिक्षाविद इसका वर्णन जम्हाई लेने की शुरूआत की तरह करते हैं।3.गहराईघटक - "गहराई" के दो अर्थ हैं। इसका मतलब शरीर और स्वर प्रक्रिया में गहराई के वास्तविक भौतिक अनुभव से और सुर के गुण से संबंधित गहराई के मानसिक सिद्धांतों से है।मैककिनी का कहना है, ये तीनों घटक तीन मूल नियमों में व्यक्त किया जा सकते हैं - (1) जब आप ऊंचा गाते हैं, आपको अधिक ऊर्जा का प्रयोग करना चाहिये, जब आप नीचे गाते हैं तो आप कम ऊर्जा का प्रयोग करना होता है। (2) जब आप ऊंचा गाते हैं, आपको अधिक स्थान का प्रयोग करना पड़ता है, जब आपनिचले सुर में गाते हैं, आप कम स्थान का प्रयोग करते हैं। (3) जब आप ऊंचा गाते हैं, आप अधिक गहराई का प्रयोग करते हैं, जब आप निचले सुर में गाते हैं, आपको कम गहराई की जरूरत होती है।[7]मुद्रागायन की प्रक्रिया शरीर की कुछ खास भौतिक दशाओं की उपस्थिति में सर्वोत्तम कार्य करती है। हवा को शरीर में मुक्त रूप से खींचने और बाहर निकालने और हवा की आवश्यक मात्रा के प्राप्त करने की क्षमता श्वसन प्रक्रिया के भिन्न भागों की मुद्रा द्वारा गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। वक्ष का भीतर दबा होना फेफड़ों की क्षमता को सीमित कर देता है और सख्त पेट मध्यपट को नीचे की ओर आने सेरोक सकता है। अच्छी मुद्रा श्वसन प्रक्रिया को अपना मूल कार्य ऊर्जा के व्यर्थ खर्च के बिना सुचारू रूप से करने देती है। अच्छी मुद्रा स्वर निर्माण को शुरू करना और प्रतिध्वनिकारकों की ट्यूनिंग को आसान बनाती है क्योंकिसही संयोजन शरीर में अनावश्यक तनाव उत्पन्न होने से रोकता है। स्वर शिक्षाविदों ने यह बात भी देखी है कि जब गायक अच्छी मुद्रा अपनाते हैं, तो उन्हें गाते समय अधिक आत्मविश्वास का अनुभव होता है। श्रोता भी अच्छी मुद्रा वाले गायकों के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया करते हैं। आदतन अच्छी मुद्रा बेहतर रक्त प्रवाह और शरीर को थकान व तनाव से बचाकर अंततोगत्वा शरीर के कुल स्वास्थ्य में सुधार लाती है।[3]आदर्श गायन मुद्रा के आठ अंश होते हैं:1.हल्का सा अलग महसूस करना2.पैर सीधे लेकिन घुटने खुले हुए3.कमर सामने की ओर सीधे4.रीढ़ सही रेखा में जमी हुई5.पेट सपाट रखे हुए6.सीना आराम से सामने की ओर तना हुआ7.कंधे नीचे और पीछे की ओर8.सिर सीधे सामने की ओरश्वास व श्वास का समर्थनप्राकृतिक श्वसन की तीन अवस्थाएं होती हैं, भीतर को सांस लेना, सांस को बाहर निकालना और विश्राम की अवस्था, ये अवस्थाएं सामान्य तौर पर जानबूझ कर नियंत्रित नहीं होती हैं। गायन में श्वसन क्रिया की चार अवस्थाएं होती हैं, भीतर सांस खींचना, नियंत्रण बनाने की अवधि, एक नियंत्रित उच्छवास अवधि (स्वर निर्माण) और एक पुनर्वास अवधि।ये अवस्थाएं तब तक गायक के नियंत्रण में होनी चाहिये जब तक कि वे प्रतिवर्ती क्रियाएं न बन जाएं। कई गायक सचेत नियंत्रणों को उनके प्रतिवर्ती क्रियाओं में बदलने के पहले ही छोड़ देते हैं, जिससे अंततोगत्वा दीर्घकालिक स्वर की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।[20]वाइब्रेटोवाइब्रेटो का प्रयोग गायकों (और कई साजवादकों द्वारा-जैसे डोरी युक्त साज जिन पर एक कमान का प्रयोग करके वाइब्रेटो धुन उत्पन्न की जा सकती है) द्वारा तब किया जाता है जब कोई अनवरत सुर तेजी से और लगातार ऊपर और नीचे की पिच में जाता है जिससे सुर में जरा सा कम्पन उत्पन्न हो जाता है। वाइब्रेटो किसी अनवरत सुर में एक लहर होती है। वाइब्रेटो प्राकृतिक रूप से होता है और उचित श्वास समर्थन और आराम की स्थिति में काम कर रहे स्वर यंत्र का परिणाम होता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]कुछ गायक वाइब्रेटो का प्रयोग अभिव्यक्ति के रूप में करते हैं। कईसफल कलाकारों ने गहरे, प्रचुर वाइब्रेटो की नींव पर अपने करियर का निर्माण किया है।मुखर संगीतमुख्य लेख :Vocal musicमुखर संगीतएक या अधिक गायकों द्वारा, साजों के साथ या बिना साजों के, प्रस्तुतसंगीतहोता है, जिसमें गायन का मुख्य भाग होता है। मुखर संगीत शायद संगीत का सबसे प्राचीन प्रकार है, क्योंकि इसेमानवीय स्वरके अलावा और किसी साज की जरूरत नहीं होती। सभी संगीतसंस्कृतियोंमेंकिसी प्रकार का मुखर संगीत पाया जाता है और सम्पूर्ण विश्व की सभी संस्कृतियों में गायन की दीर्घकालिक परंपराएं रही हैं।ऐसा संगीत जो गायन का प्रयोग तो करता है पर उसे मुख्य रूप से पेश नहीं करता है, सामान्य तौर पर साज-संगीत माना जाता है। उदाहरण के लिये, कुछ ब्लूज़ रॉक गीतों में सादे बुलावे-व-प्रतिक्रिया वाले कोरस हो सकते हैं, लेकिन गीत में साज से उत्पन्न धुनों पर अधिक जोर होता है। मुखर संगीत आदर्श रूप से गाए हुए शब्दों जिन्हें गीत कहते हैं,को पेश करता है, हालाँकि मुखर संगीत के ऐसे भी उदाहरण हैं जिन्हें बिना भाषा वाले शब्दों या आवाजों - कभी-कभी संगीतके ओनोमोटोपिया के रूप में - का प्रयोग किये भी प्रस्तुत किया गया है। गीत के साथ गाए हुए किसी भी मुखर संगीत के छोटे से टुकड़े को गाना कहते हैं।मुखर संगीत की विधाएं2013 में डीप पर्पल के साथ रॉक गायक इयान गिलन लाइव प्रदर्शन कर रहे हैं।मुख्य लेख :Music genreमुखर संगीत को कई भिन्न तरीकों और शैलियों में लिखा जाता है जिन्हें अकसर किसी खास विधा का नाम दिया जाता है। इन विधाओं में शामिल हैं: कला संगीत, लोकप्रिय संगीत, पारम्परिक संगीत, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय संगीत और इन विधाओं के मिश्रण। इन मुख्य विधाओं में कई उप-विधाएं होती हैं। उदा. लोकप्रिय संगीत में ब्लूज़,जाज़, देशी संगीत, ईज़ी लिसेनिंग, हिप हॉप, रॉक संगीत और कई अन्य विधाएं शामिल हैं। एक उप-विधा में एक और उप-विधा भी हो सकती है, जैसे, जाज़ में वोकेलीज़ और स्कैट गायन।लोकप्रिय और पारम्परिक संगीतकई आधुनिक पॉप संगीत समूहों में, एक मुख्य गायक गाने के प्राथमिक सुरों या धुन की प्रस्तुति करता है और कोई और गायक गाने के पार्श्व में गायन या स्वरसंगति का कार्य करता है। पिछले गायक गाने के कुछ, लेकिन सामान्य तौर पर पूरे नहीं, हिस्सों का गायन ही करते हैं और अकसर गाने के पार्श्व में गुनगुनाने जैसा कार्य करते हैं। पांच भागों वाला गॉस्पेल कपेला संगीत इसका एक अपवाद है, जिसमें मुख्य आवाज पांच आवाजों में से सबसे ऊंची होती है और वह गीत का नहीं, बल्कि, उतार-चढ़ाव का गायन करती है। कुछ कलाकार आडियो रिकार्डिंगों में रिकार्ड किये हुए संगीत को आच्छादित करके मुख्य और पिछले दोनों प्रकार का गायन कर लेते हैं।लोकप्रिय संगीत में कई मुखर स्वर शैलियां शामिल हो सकती हैं। हिप-हॉप रैपिंग का प्रयोग करता है, जिसमें किसी ताल पर बिना किसी सहयोग के गीतों को तालपूर्ण रूप से प्रस्तुत किया जाता है। कुछ प्रकार की रैपिंग में जमैकाईटोस्टिंग की तरह, पूरी या अधिकांश बोलचाल या शब्दों का उच्चारण होता है। कुछ अन्य प्रकार की रैपिंग में गायक छोटे या अधूरे गाए गए भागों को जोड़ सकते हैं। ब्लूज़ गायन ब्लू सुरों के प्रयोग पर आधारित होता है-ऐसे सुर जो अभिव्यक्ति के लिये मुख्य सुर से कम पिच पर गाए जाते हैं।भारी धातु और हार्डकोर पंक उपविधाओं में, मुखर शैलियों में चीख, चिल्लाहट और मौत के गुर्राने जैसे असामान्य स्वर शामिल हो सकते हैं।लास वेगास में रैपर बुस्ता राइम्स प्रदर्शन कर रहे है।लोकप्रिय और शास्त्रीय विधाओं की जीवंत प्रस्तुतियों में एक अंतर यह होता है कि जबकि शास्त्रीय गायक अकसर छोटेया मध्यम आकार के हालों में बिना ध्वनि-विस्तारकों की सहायता के गाते हैं, लोकप्रिय संगीत में, लगभग सभी प्रस्तुतियों में माइक्रोफोन और पीए सिस्टम (ध्वनि विस्तारकों और प्रवर्द्धक) का प्रयोग किया जाता है, भले ही वह किसी छोटे से कॉफी हाउस नें भी क्यों न हो। माइक्रोफोन के प्रयोग का लोकप्रिय संगीत पर कई तरह से प्रभाव हुआ है। एक, इससे अंतरंग और अभिव्यक्तिपूर्ण गायनशैलियों जैसे क्रूनिंग का विकास हो सका है, जिसमें पर्याप्त प्रॉजेक्शन या आवाज का उत्पादन बिना माइक्रोफोन के संभव नहीं हो सकता था। इसी तरह, माइक्रोफोन का प्रयोग करने वाले पॉप गायक इतनी अन्य सुर शैलियों की प्रस्तुति कर सकते हैं जो बिना ध्वनि-विस्तारक के नहीं हो सकता है, जैसे, फुसफुसाहट की आवाज निकालना, गुनगुनाना और आधी और पूरी गाई हुई धुनों का मिश्रण करना। इसी प्रकार, कुछ गायक माइक्रोफोन का प्रयोगकरके प्रभाव उत्पन्न करते हैं, जैसे माइक को मुंह के बहुतपास लाकर बढ़ा हुआ बैस प्रभाव प्राप्त करना या हिप-हॉप बीटबाक्सरों की तरह माइक में पी और बी के विस्फोटक स्वर निकाल कर तबले जैसा प्रभाव उत्पन्न करना।जबकि कुछ बैंड पार्श्व में स्थित गायकों का प्रयोग केवल मंच पर गाने के समय ही करते हैं, लोकप्रिय संगीत में पार्श्विक गायकों की अन्य भूमिकाएं भी होती हैं। कई रॉक और मेटल बैंडों में पार्श्विक गायन करने वाले संगीतकार वाद्य भी बजाते हैं, जैसे रिद्म गिटार, इलेक्ट्रिक बैस याड्रम। लैटिन या अफ्रो-क्यूबाई समूहों में, पार्श्विक गायक गाते समय ताल मिलाने वाले वाद्य या शेकर बजाते हैं। कुछ पॉप और हिप-हॉप समूहों और संगीत थियेटर में हेडसेट माइक्रोफोनों से गाते हुए पार्श्विक गायकों को विस्तृत रूप से तैयार किये गए नृत्य में अभिनय करना होता है।गायन से आजीविका कमानागायकों के मेहनतानों और कार्य-दशाओं में बहुत भिन्नता देखने में आती हैं। जबकि संगीत के अन्य क्षेत्रों जैसे संगीत शिक्षा में नौकरियां पूर्णकालिक, तनख्वाह वाली होती हैं, गायन की नौकरियां एकल प्रस्तुतियों या प्रदर्शनों या उनकी श्रंखलाओं पर (जैसे, आपेरा या संगीत थियेटर प्रदर्शन की दो हफ्तों की श्रंखला) आधारित होती हैं। गायन की नौकरियों से आय चूंकि अनियमित होती है, गायकअकसर अपनी आय को संगीत से संबंधित अन्य काम, जैसे गायन का प्रशिक्षण देकर, स्वर के पाठ पढ़ाकर या चर्च में कोरल निर्देशक का काम करके बढ़ाते हैं। इच्छुक गायकों की संख्या काफी अधिक होने के कारण, गायन में नौकरी पाना बहुतप्रतिस्पर्धात्मक हो सकता है।1973 में एम्सटर्डम में अपने अंतिम दौरे के दौरान मारिया कैलस.चर्च के गायकों के दल में एकल गायक 30 से 500 डालर तक कमा सकते हैं। सामुदायिक गायक समूह में गाने वाले लोग 200 से 3000 डालर प्रति वर्ष तक कमा सकते हैं, जबकि पेशेवर कार्यक्रम के कोरल समूह के सदस्य प्रति प्रदर्शन 80 डालर या अधिक कमा लेते हैं। रेडियो या टीवी के प्रदर्शनों में भाग लेने वाले गायक स्थानीय स्टेशन पर 75 डालर प्रति प्रदर्शन और राष्ट्रीय नेटवर्क शो (उदा. सीबीएस (CBS) या एनबीसी (NBC)) में 125 या अधिक डालर की कमाई कर सकते हैं। नृत्य बैंडों या नाइट क्लब प्रदर्शन समूहों में काम करने वाले जैज़ या पॉप गायक 225 या अधिक डालर प्रति सप्ताह तक कमा सकते हैं। पेशेवर आपेरा कोरस गायक 350 से 750 डालर प्रति सप्ताह तक लेते हैं। आपेरा एकल गायकों को, जिनके लिये नौकरियों के अवसर बहुत सीमित होते हैं, 350 से 20000 डालर तक मिल सकते हैं। शास्त्रीय कार्यक्रम के एकल गायक, जिनके लिये नौकरीके अवसर काफी सीमित हैं, प्रति प्रदर्शन लगभग 350 डालर या अधिक की कमाई करते हैं।[21]गायक बनने के इच्छुक लोगों में संगीत का हुनर, उत्कृष्ट आवाज, लोगों के साथ काम करने की क्षमता और प्रदर्शन करने और नाटकीयता का शौक होना आवश्यक है। इसके अलावागायकों में लगातार सीखने और परिष्कार करने की आकांक्षा और लगन होनी चाहिये,[21]क्योंकि गायन का अध्ययन प्रारंभिक डिप्लोमा या डिग्री के समाप्त होने के साथ खत्म नहीं होता-पेशेवर गायक अपने प्रारंभिक प्रशिक्षण के समाप्त होने के कई दशकों बाद भी अपने हुनर को बढ़ाने और नई शैलियां सीखने के लिये संगीत का प्रशिक्षण प्राप्त करने का प्रयत्न करते रहते हैं। साथ ही गायक बनने के इच्छुक लोगों को गानों को समझने के लिये, अपने चुने हुए संगीत की शैली के मुखर साहित्य को पढ़ने और कोरल संगीत की तकनीकों में माहिर होने के लिये, दृश्य गायन और गानों को याद रखने,पियानो के मूल हुनरों, नए गीत सीखने में मदद और कानों के अभ्यास या मौखिक कसरतों के लिये, मुखर तकनीकों में विशेष हुनर प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। शास्त्रीय गायन और कुछ अन्य विधाओं में, विदेशी भाषाओं जैसे फ्रेंच, इतालवी, जर्मन या अन्य भाषाओं का ज्ञान होना आवश्यक है। कॉलेज और विश्वविध्यालय के प्रशिक्षण के पहले, गायक बननेके इच्छुकों को संगीत पढ़ना सीखना, मूल पियानो का अध्ययन करना और समूह गान व एकल दोनों स्थितियों में गाने का अनुभव प्राप्त करना चाहिये।कॉलेज और विश्वविध्यालय का प्रशिक्षण हमेशा जरूरी नहीं होता लेकिन उसके बराबर के प्रशिक्षण का होना आम तौर पर आवश्यक है।[21]सेकंडरी स्कूल के बाद गायन में शास्त्रीयव गैरशास्त्रीय दोनों तरह के गायकों के लिये प्रशिक्षण उपलब्ध है। शास्त्रीय श्रेणी में गायन का अध्ययन कंजर्वेटरियों और युनिवर्सिटी संगीत कार्यक्रमों में किया जा सकता है, इससे डिप्लोमा और बैचलर डिग्री से लेकर मास्टर की डिग्री और डॉक्टर ऑफ़ म्यूजिकल आर्ट्स तक की उपाधियां उपलब्ध हैं। लोकप्रिय और जैज़ शैलियों में, कॉलेज और युनिवर्सिटी डिग्रियां उपलब्ध हैं, हालाँकि इस तरह के कार्यक्रमों की संख्या कम है।गायक बनने के इच्छुक विद्यार्थियों के अपने पेशेवर प्रशिक्षण को पूरा कर लेने के बाद, उन्हें किसी आपेरा निर्देशक, कोयरमास्टर या कंडक्टर के सामने गायन की परीक्षा देकर संगीत के हुनर के खरीदारों के सम्मुख स्वयंको बेचने के लिये कदम उठाने चाहिये। मुखर संगीत की जिस शैली में व्यक्ति प्रशिक्षित होता है, हुनर को खरीदने वाले लोग, रिकार्ड कम्पनी के प्रतिनिधि, आपेरा या संगीत थियेटर के निर्देशक, कौयर निर्देशक, नाइट क्लब मैनेजर या कान्सर्ट प्रोमोटर हो सकते हैं। अपने प्रशिक्षण और प्रदर्शन के अनुभव को दर्शाते हुए अपने संक्षि्त परिचय के अलावा गायक एक प्रोमोशनल किट तैयार करते हैं जिसमें पेशेवर तरीके से लिये गए फोटो, अपने गायन के अभिनय से युक्त (हेड शॉट्स) सीडी या डीवीडी और संगीत के आलोचकों यापत्रकारों की समीक्षाओं की प्रतियां होती हैं। कुछ गायक साक्षात्कार और अन्य अभिनय के अवसरों के लिये एक एजेंट या मैनेजर को भी रखते हैं, एजेंट या मैनेजर को अकसर मंच परकाम करने से प्राप्त फीस का कुछ प्रतिशत दिया जाता है।स्वास्थ्य संबंधी लाभवैज्ञानिक अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि गायन का लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर हो सकता है। कोरल गायन में भाग ले रहे विध्यार्थियों के सर्वे से प्राप्त स्वयं दिये गए ब्यौरे के अनुसार किये गए एक प्राथमिक अध्ययन में फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि, बेहतर मूड, तनाव में कमी और सामाजिक व आध्यात्मिक लाभ महसूस किये गए।[22]फिर भी, फेफडों की क्षमता के एक काफी पुराने अध्ययन में पेशेवर गायन के प्रशिक्षण प्राप्त लोगों की तुलना बिना प्रशिक्षण वाले लोगों से की गई और फेफड़ों की क्षमता के बढ़ने के दावों के समर्थन में कोई बात नहीं पाई गई।[23]गायन तनाव को कम करकेप्रतिरोधक्षमता प्रणालीपर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि कोरल संगीत को गाने और सुनने दोनों से तनाव के हारमोनों के स्तर कम होते हैं और प्रतिरोधक्षमता बढ़ती है।[24]2009 में गायन और स्वास्थ्य के बीच संबंध का अध्ययन करने के लिये एक बहुराष्ट्रीय सहयोग की स्थापना की गई, जिसका नामगायन में प्रगत अंतरअनुशासनीय शोध(एर्स) रखा गया।

शनिवार, 1 जुलाई 2017

देखें, GST लागू होने के साथ ही सस्ती हो गईं ये चीजें

देखें, GST लागू होने के साथ ही सस्ती हो गईं ये चीजें
Updated Jul 1, 2017, 12:35 AM IST
नई दिल्ली
जीएसटी लागू होने के साथ ही देश में तमाम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ गया। कुछ चीजें पहले से महंगी हो गईं तो कुछ प्रॉडक्ट्स और सेवाओं पर लोगों को बड़ी राहत मिल गई। जीएसटी काउंसिल ने 1,211 आइटम्स को 18 पर्सेंट के टैक्स स्लैब में रखा है। नीचे लिस्ट में देखें, शुक्रवार की आधी रात को जीएसटी लागू होने के साथ ही कौन सी चीजें हो गईं सस्ती।
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खाने की ये चीजें हो गईं सस्ती
1. मिल्क पाउडर
2. दही
3.छाछ
4.गैर-ब्रैंडेड शहद
5. डेयरी स्प्रेड
6. पनीर
7. मसाले
8. चाय
9. गेहूं
10. चावल
11. आटा
12. मूंगफली तेल
13. तिल का तेल 
14. सूरजमुखी का तेल
15. नारियल तेल
16. सरसों तेल (Mustard oil)
17. शुगर
18. गुड़
19. शुगर कन्फेक्शनरी
20. पास्ता
21. स्पाघेटी
22. मकरोनी
23. नूडल्स
24. फल और सब्जियां
25. अचार
26. मुरब्बा
27. चटनी
28. मिठाइयां
29. केचअप
30. सॉसेज
31. टॉपिंग्स ऐंड स्प्रेड्स
32. इंस्टैंट फूड मिक्स
33. मिनरल वॉटर
34.बर्फ
35. खंडसारी
36. बिस्किट्स
37. रायसिन ऐंड गम
38. बेकिंग पाउडर
39. नकली मक्खन
40. काजू
दैनिक उपयोग के इन प्रॉडक्ट्स के भी दाम हो गए कम
1. नहाने का साबुन
2. हेयर ऑइल
3. डिटर्जेंट पाउडर
4. साबुन
5. टिशू पेपर्स
6. नैपकिन्स
7. माचिस
8. कैंडल्स
9. कोयला
10. केरोसिन
11. घरेलू एलपीजी गैस
12. चम्मच
13. कांटे
14. करछुल
15. स्किमर्स
16. केक सर्वर्स
17. मछली का चाकू
18. चिमटा
19. अगरबत्ती
20. टूथपेस्ट
21. दंतमंजन
22. हेयर ऑइल
23. काजल
24. एलीपीजी स्टोव
25. प्लास्टिक तिरपाल
स्टेशनरी
1. नोटबुक्स
2. पेन
3. सभी तरह के पेपर
4. ग्राफ पेपर
5. स्कूल बैग
6. एक्सरसाइज बुक्स
7. पिक्चर, ड्रॉइंग और कलर बुक्स
8. चर्मपत्र
9. कार्बन पेपर
10. प्रिंटर्स
GST: 
हेल्थकेयर में इन चीजों के घट गए दाम
1. इन्सुलिन
2. एक्सरे फिल्म्स
3. डायग्नोस्टिक किट्स
4. नजर के चश्मों के लिए ग्लास
5. डायबिटीज और कैंसर की दवाएं
कपड़े और फुटवियर
1. सिल्क
2. वूलन फैब्रिक
3. खादी यार्न
4. गांधी टोपी
5. 500 रुपये से कम के फुटवियर 
जीएसटी
इन सामानों के भी घट गए दाम
1. 15 हॉर्सपावर से कम के डीजल इंजन
2. ट्रैक्टर के टायर और ट्यूब
3. सिलाई मशीन
4. स्टैटिक कन्वर्टर्स
5. बिजली के ट्रांसफार्मर
6. वाइंडिंग वायर्स
7. हेल्मेट
8. पटाखे
9. ल्यूब्रिकेंट्स
10. बाइक
11.100 रुपये से कम के मूवी टिकट
12. पतंगें
13. लग्जरी कारें
14. मोटरसाइकल
15. स्कूटर्स
16. इकॉनमी क्लास एयर टिकट
17. 7,500 रुपये के टैरिफ वाले होटल
18. सीमेंट

मंगलवार, 27 जून 2017

किशोरावस्था

B.ed students
Paper 1 st Unit 2
किशोरावस्था की परिभाषा
किशोरावस्था शब्द अंग्रजी भाषा के Adolescence शब्द का हिंदी पर्याय है। Adolescence शब्द का उद्भव लेटिन भाषा से माना गया है जिसका सामान्य अर्थ है बढ़ाना या विकसित होना। बाल्यावस्था से प्रौढ़ावस्था तक के महत्वपूर्ण परिवर्तनों जैसे शारीरिक, मानसिक एवं अल्पबौधिक परिवर्तनों की अवस्था किशोरावस्था है। वस्तुतः किशोरावस्था यौवानारम्भ से परिपक्वता तक वृद्धि एवं विकास का काल है। 10 वर्ष की आयु से 19 वर्ष तक की आयु के इस काल में शारीरिक तथा भावनात्मक स्वरूप से अत्यधिक महवपूर्ण परिवर्तन आते हैं। कुछ मनोवैज्ञानिक इसे 13 से 18 वर्ष के बीच की अवधि मानते हैं, जबकि कुछ की यह धारणा है कि यह अवस्था 24 वर्ष तक रहती है।
लेकिन किशोरावस्था को निश्चित अवधि की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। यह अवधि तीव्र गति से होने वाले शारीरिक परिवर्तनों विशेषतया यौन विकास से प्रारंभ हो कर प्रजनन परिपक्वता तक की अवधि है। विश्व स्वस्था संगठन के अनुसार यह गौण यौन लक्षणों (यौवानारम्भ) के प्रकट होने से लेकर यौन एवं प्रजनन परिपक्वता की ओर अग्रसर होने का समय है जब व्यक्ति मानसिक रूप से प्रौढ़ता की ओर अग्रसर होता है और वह सामाजिक व आर्थिक दृष्टी से उपेक्षाकृत आत्मा-निर्भर हो जाता है जिससे समाज में अपनी एक अलग पहचान बनती है। किशोरावस्था तीव्र शारीरिक भावनात्मक और व्यवहार सम्बन्धी परिवर्तनों का काल है।
किशोर बात-बात में अपनी अलग पहचान का आग्रह करते हैं और एक बच्चे की तरह माता-पिता पर निर्भर रहने की उपेक्षा एक प्रौढ़ की तरह स्वतंत्र रहना चाहते हैं। वे अपने माता-पिता से थोड़ा दूरी बनाना शुरू कर देते हैं और अपने सम-आयु समूह (Pear Group) में ही अधिकतर समय व्यतीत करने लगते हैं। यौन-उर्जस्विता के कारण वे विपरीत लिंग की ओर आकर्षित होते हैं।
व्यवहारिक परिवर्तन
उपयुक्त परिवर्तनों के कारण किशोरों के व्यवहार में निम्न लक्षण उजागर होते हैं -
अ) स्वतन्त्रता
शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिपक्वता की प्रक्रिया से गुजरते हुएकिशोरों में स्वतंत्र रहने की प्रवृति जाग्रत होती है। जिससे वे अपने आप को प्रौढ़ समाज से दूर रखना प्रारंभ करते हैं।
ब) पहचान
किशोर हर स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने केलिए संघर्ष करते हैं। वे अपनी पहचान बनाए रखें के लिए लिंग भेद तथा अपने को अन्य से उच्च एवंयोग्य दर्शाने के प्रयास में होते हैं।
स) धनिष्ठता
किशोरावस्था के दौरान कुछ आधारभूत परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन अधिकतर यौन संबंधों के क्षेत्र के होते हैं। किशोरों मेंअचानक विपरीत लिंग के प्रति रुचि उत्पन्न होती है। वे आकर्षण एवं प्रेम के मध्य अंतर स्पष्ट नहीं कर पाते और मात्र शारीरिक आनंद एवंसंतुष्टि के लिए सदैव भटके रहते हैं।समवय समूहों पर निर्भरताअपनी पहचान व स्वतन्त्रा को बनाए रखने के लिए, किशोरे अपने माता-पिता के भावनात्मक बंधनों को त्याग कर अपने मित्रों के साध हीरहना पसंद करते हैं।
किशोरावस्था के निम्लिखित महत्वपूर्ण लक्षण इसकी अन्य अवस्थाओं से भिन्नता को प्रकट करते हैं-
क) शारीरिक परिवर्तनकिशोरावस्था में तीव्रता से शारीरिक विकास और मानसिक परिवर्तन होते हैं। विकास की प्रक्रिया के कारण अंगों में भी परिवर्तन आता है, जो व्यक्तिगत प्रजनन परिपक्वता को प्राप्त करते हैं। इनका सीधा सम्बन्ध यौन विकास से है।
ख) मनौवैज्ञानिक परिवर्तनकिशोरावस्था मानसिक, भौतिक और भावनात्मक परिपक्वता के विकास की भीअवस्था है। एक किशोर, छोटे बच्चे की तरह किसी दूसरे पर निर्भर रहने की उपेक्षा, प्रौढ़ व्यक्ति की तरह स्वतंत्र रहने की इच्छा प्रकट करता है। इस समय किशोर पहली बार तीव्र यौन इच्छा का अनुभ करता है, इसी कारण विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित रहता है। इस अवस्था में किशोर मानसिक तनाव से ग्रस्त रहता है यह अवस्था अत्यंत संवेदनशील मानी गयी है।
ग) सामाजिक सांस्कृतिक परिवर्तनकिशोरों में सामजिक-सांस्कृतिक मेलजोल के फलस्वरूप कुछ और परिवर्तन भी आते हैं। सामान्यता: समाज किशोरों की भूमिका को निश्चित रूप में परिभाषित नहीं करता। फलस्वरूप किशोर बाल्यावस्थाऔर प्रौढावस्था के मध्य अपने को असमंजस की स्थिति में पाते हैं। उनकी मनौवैज्ञानिक आवश्यकताओं को समाज द्वार महत्व नहीं दिया जाता, इसी कारण उनमें क्रोध, तनाव एवं व्यग्रता की प्रवृतिया उत्पन्न होती हैं। किशोरावस्था में अन्य अवस्थाओं की उपेक्षा उत्तेजना एवं भावनात्मकता अधिक प्रबल होती है।
किशोरावस्था की समस्याएं
किशोरावस्था एक ऐसी संवेदनशील अवधि है जब व्यक्तित्व में बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन आते हैं। वे परिवर्तन इतने आकस्मिक और तीव्र होते हैं कि उनसे कई समस्याओं का जन्म होता है। यघपि किशोर इन परिवर्तनों को अनुभव तो करते हैं पर वे प्राय: इन्हें समझने में असमर्थ होते हैं। अभी तक उनके पास कोई ऐसा स्रोत उपलब्ध नहीं है जिसके माध्यम से वे इन परिवर्तनों के विषय में वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त कर सकें। किन्तु उन्हें इन परिवर्तनों और विकास के बारे में जानकारी चाहिए, इसलिये वे इसके लिए या तो सम-आयु समूह की मदद लेते हैं, या फिर गुमराह करने वाले सस्ते साहित्य पर निर्भर हो जाते हैं। गलत सूचनाएं मिलने के कारण वे अक्सर कई भ्रांतियों का शिकार हो जाते हैं जिससे उनके व्यक्तित्व विकास पर कुप्रभाव पड़ताहै।किशोरों को इसलिये भी समस्याएं आते है क्योंकि वे विपरीत लिंग के प्रति एकाएक जाग्रत रुचि को ठीक से समझ नहीं पाने। माँ बाप से दूर हटने की प्रवृति और सम-आयु समूह के साथ गहन मेल-मिलाप भी उनके मन में संशय और चिंता पैदा करता है। किन्तु परिजनों के उचित मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें सम-आयु समूह की ही ओर उन्मुख होना पड़ता है। प्राय: देखा गया है कि किशोर सम-आयु समूह के दबाव के सामने विवश हो जाते हैं और उन में से कुछ तो बिना परिणामों को सोचे अनुचित कार्य करने पर मजबूर हो जाते हैं। कुछ सिगरेट, शराब, मादक द्रव्यों का सेवन करने लगते हैं और कुछ यौनाचार की ओर भी आकर्षित हो जाते हैं और इस सब के पीछे सम-आयु समूह का दबाव आदि कई कारण हो सकते हैं।

गुरुवार, 22 जून 2017

*भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना*

*भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना*
*वो सभी बातें जो हर आम आदमी योजना के सम्बन्ध में जानना चाहता है*
*1.भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना क्या है?*
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अन्तर्गत NFSA तथा RSBY अन्तर्गत आने वाले परिवार के सदस्यों को प्रति परिवार प्रति वर्ष सामान्य बीमारियों हेतु रू. तीस हजार  तथा गंभीर बीमारियों हेतु रू. तीन लाख तक का निःशुल्क इलाज सरकारी (सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा उनसे उच्च संस्थान) तथा सूचीबद् निजी चिकित्सालयों में अन्तरंग स्वास्थ्य सुविधाओं (IPD) के लिए दिया जाता है।
*2.यह योजना कब एवं क्यो प्रारम्भ की गई ?*
माननीय मुख्यमंत्री महोदया द्वारा बजट भाषण 2014-15 में स्वास्थ्य बीमा योजना की घोषणा की गई थी, जिसकी अनुपालना में दिनांक 13 दिसम्बर, 2015 से भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना प्रदेश में प्रारम्भ की गई।
*3.राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के पात्र परिवारों का क्या अर्थ है?*
सामान्य भाषा में वे परिवार जिनको राशन की दुकान से माह अक्टूबर 2015 के पष्चात गेहूँ प्राप्त हो रहा है वे परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत आते है।
*4.मैं राजस्थान राज्य के बाहर का निवासी हूं क्या मुझे इस योजना का लाभ मिल सकता है?*
नहीं, उक्त योजना केवल राजस्थान राज्य के निवासियों हेतु बनायी गयी है।
*5.क्या इलाज के दौरान मुझसे किसी भी तरह की राशि वसूल की जायेंगी?*
नहीं, इस योजना के अन्तर्गत सम्पूर्ण सुविधाएँ पूर्णतः निःशुल्क (कै शलेस) है।
*6.मैं राजस्थान का मूल निवासी हूं परन्तु राज्य के बाहर नौकरी करता हूं, क्या मुझे इस योजना का लाभ मिल सकता है?*
जी हां, उक्त योजना राजस्थान राज्य के निवासियों हेतु बनायी गयी है अतः आप इसका लाभ ले सकते है।
*7.मैं एक आम नागरिक हूँ। क्या मैं बीमा कम्पनी का प्रीमियम देकर योजना का लाभ ले सकता हूँ?*
जी नहीं। योजना में ऐसा कोई प्रावधान नही है।
*8.योजना के अन्तर्गत कितनी राशि की चिकित्सा सेवा कवर की गयी है?*
सामान्य बिमारियों हेतु रू. तीस हजार  तथा गंभीर बिमारियों हेतु रू. तीन लाख तक का बीमा कवर प्रति परिवार प्रति वर्ष किया गया है।
*9.योजना के अंतर्गत लाभार्थी के इलाज में क्या-क्या सम्मिलित है ?*
योजना के अन्तर्गत लाभार्थी को सामान्य वार्ड में योजनान्तर्गत आने वाले डिजीज पैकेज से सम्बन्धित निम्नाकिंत चिकित्सा सुविधाएँ शामिल है-
·         बिस्तर व्यय सामान्य वार्ड/आई.सी.यू. में
·         भर्ती व्यय तथा नर्सिग व्यय।
·         शल्य चिकित्सा में शामिल व्यय।
·         वेन्टीलेटर शुल्क, शल्य उपकरणों, दवाओं, आक्सीजन, प्रत्यारोपण उपकरण, एक्स-रे तथा अन्य जाँचों पर व्यय आदि।
·         अन्य सभी व्यय जो रोगी के इलाज के दौरान अस्पताल के द्वारा वहन किया गया है।
*10.योजना के अन्तर्गत कुल कितनी बीमारियां शामिल की गयी है?*
योजना के अन्तर्गत 14 चिकित्सा विशेषज्ञता से सम्बन्धित कुल 1715 डिजीज पैकेज निर्धारित किये गये है।
*11.योजना में कितनी सामान्य बीमारियां (Secondary illnesses) शामिल की गयी है?*
इस श्रेणी में सामान्य बीमारियों से सम्बन्धित 1148 डिजीज पैकेज को सूचीबद्ध किया गया है।
*12.योजना में कितनी चिन्हित गंभीर बीमारियाँ (Tertiary illness) शामिल की गयी है?*
इसके अन्तर्गत गंभीर बीमारियों से सम्बन्धित 500 डिजीज पैकेज शामिल है जिनके इलाज हेतु Pre-Authorization (पूर्वनिर्धारिकरण) लेना अनिवार्य है।
*13.राजकीय चिकित्सा संस्थानों हेतु आरक्षित पैकेज क्या है?*
इसके अन्तर्गत 67 डिजीज पैकेज आरक्षित किये गये है जिनके इलाज के लिए बीमा कवर सिर्फ राजकीय चिकित्सा संस्थानों में इलाज कराने पर ही प्राप्त किया जा सकेगा।
*14.मैं इलाज के लिये किस अस्पताल में जा सकता/सकती हूं?*
योजना में 480 सरकारी एवं 568 निजी सम्बद्ध अस्पताल सम्मिलित है इनमें से किसी भी अस्पताल पर जा कर इलाज की सुविधा प्राप्त की जा सकती है। इन अस्पतालों की सूची वैबसाइट पर उपलब्ध है। टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 पर सम्पर्क करके भी यह सूचना प्राप्त की जा सकती है।
*15.मेरे परिवार में कौन-कौन सदस्य इसका लाभ ले सकते है? क्या यह राशि परिवार के एक सदस्य के लिए है या सम्पूर्ण परिवार के लिए हैं?*
योजना की वालेट राशि सम्पूर्ण परिवार के लिए हैं। एक परिवार के अन्तर्गत आने वाले वे सभी सदस्य जिनका नाम परिवार की महिला मुखिया के भामाशाह कार्ड या Rsby कार्ड में अंकित हो, वे इस योजना का लाभ ले सकते है।
*16.मैंने वित्तिय वर्ष 2015-16 में मेरे परिवार के बीमा कवर की राशि का पूर्ण उपयोग कर लिया था। अब क्या वर्ष 2016-17 के लिए मुझे बीमा कवर की राशि प्राप्त होगी?*
जी नहीं, यह बीमा कवर की राशि 13-12-2015 से 12-12-2016 तक लिए है। अतः 13 दिसम्बर 2016 से नए कवर की राशि प्राप्त होगी।                                               *17.यदि राशि ईलाज के उपरान्त शेष बच जाती है, तो क्या अगले वर्ष उपयोग में ली जा सकती है?*
नही, यह राशि एक वर्ष के लिये ही है। यदि राशि शेष रह जाती है तो वह योजना प्रारम्भ होने से एक वर्ष की समाप्ति पर स्वतः ही निरस्त हो जाती है।
*योजना का लाभ कैसे लिया जावें ?*
*18.योजना का लाभ लेने हेतु मुझे कौन-कौन से दस्तावेजों की आवश्यकता होगी?*
योजना का लाभ लेने हेतु लाभार्थी परिवार की पहचान के लिये
·         भामाशाह कार्ड या
·         भामाशाह  Acknowledgement slip
·         आरएसबीवाई कार्ड अथवा उनके नम्बर द्वारा सत्यापन किया जा सकता है।
यदि भामाशाह कार्ड में मरीज का फोटो स्पष्ट नही है तो मरीज की पहचान के लिये आधार कार्ड या सरकारी अथवा अर्द्ध सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी फोटो पहचान पत्र जैसे वोटर आईडी/ड्राईविंग लाईसेंस/पैन कार्ड/कोई अन्य फोटो पहचान पत्र की आवश्यकता होती है।
*19.मरीज का व्यक्तिगत सत्यापन किस प्रकार से किया जाता है?*
मरीज का व्यक्तिगत सत्यापन हेतु साफ्टवेयर में 2 प्रकार के तरीके है। वर्तमान में फिंगर प्रिन्ट एवं ओ.टी.पी. मैसेज द्वारा सत्यापन किया जा रहा है। इनसे सत्यापन नही होने पर कोई वैलिड फोटो आई.डी. लगाई जाती है।
*20.मै कैसे पता कर सकता हूँ कि मैं एनएफएसए का पात्र हूं या नही?*
अपने राशन कार्ड में अकिंत 12 डिजिट का नम्बर स्वास्थ्य मार्गदर्शक/टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127/नजदीकी ई मित्र केन्द्र पर देकर अथवा अधिकृत राशन डीलर की ई-लिस्ट में आप अपनी पात्रता जांच सकते है।
*21.मै कैसे पता कर सकता हूँ कि मैं भामाशाह स्वास्थ्य बीमा का लाभ ले सकता हूं या नही?*
अपने परिवार के मुखियां के भामाशाह कार्ड में अकिंत 07 अक्षरों का नम्बर स्वास्थ्य मार्गदर्शक को दे कर/टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 पर सम्पर्क करके आप अपनी पात्रता जांच सकते है।
*22.मै बीपीएल कार्ड धारक हूं, क्या मैं भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का पात्र हूं?*
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में पात्रता हेतु एनएफएसए या आरएसबीवाई का लाभार्थी होना आवश्यक है। परिवार के मुखियां के भामाशाह कार्ड में अकिंत 07 अक्षरों का नम्बर अथवा भामाशाह ई-आई.डी. स्वास्थ्य मार्गदर्शक/टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127/ नजदीकी ई मित्र केन्द्र पर दे कर आप अपनी पात्रता जांच सकते है।
*23.मेरे पास भामाशाह कार्ड है। क्या मैं भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ ले सकता हूँ?*
केवल भामाशाह कार्ड होने से भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में लाभार्थी होना जरूरी नही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में आने वाले पात्र परिवार जिनका राशन कार्ड परिवार की मुखिया के भामाशाह कार्ड से लिंक हो गया है तथा भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के साफ्टवेयर में 7 अक्षरों का भामाशाह नम्बर डालने पर एनएफएसए लाभार्थी प्रदर्शित हो जाता है तो योजना का लाभ दिया जा सकता है।
*24.मै वृद्वावस्था पेंशन योजना का पात्र हूं एवं मेरे पास भामाशाह कार्ड भी है, क्या मै इस योजना का पात्र हूं?*
केवल भामाशाह कार्ड होने से भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में लाभार्थी होना जरूरी नही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में आने वाले पात्र परिवार जिनका राशन कार्ड परिवार की मुखिया के भामाशाह कार्ड से लिंक हो गया है तथा भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के साफ्टवेयर में 7 अक्षरों का भामाशाह नम्बर डालने पर एनएफएसए लाभार्थी प्रदर्शित हो जाता है तो योजना का लाभ दिया जा सकता है।
*25.मुझे भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड बनवाना है? यह कहाँ बनेगा?*
योजना के अन्तर्गत कोई अलग से कार्ड नहीं बनाया जाता है। जब भी आपके परिवार का कोई सदस्य इलाज के लिए अस्पताल जाए तो परिवार की महिला मुखिया का भामाशाह कार्ड/आर.एस.बी.वाई. कार्ड, अथवा इनका नम्बर अवश्य साथ लेकर जावें, लाभार्थी परिवार की पहचान अस्पताल द्वारा कर ली जायेगी। यदि किसी व्यक्ति द्वारा भामाशाह कार्ड बनवाने के लिये आवेदन किया गया है एवं उसे भामाशाह कार्ड नम्बर प्राप्त नही हुआ है तो भामाशाह कार्ड की Acknowledgement slip द्वारा भी लाभार्थी परिवार की पहचान की जा सकती है।
*26.क्या कोई योजना से सम्बद् अस्पताल मुझे भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ देने से मना कर सकता है?*
जी हा, निम्न परिस्थितियों में मना किया जा सकता हैः
1.उस अस्पताल में इलाज के लिए विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध नहीं है।
2.यदि अस्पताल द्वारा सम्बन्धित बीमारी का पैकेज नहीं चुना गया है।
3.यदि आपके परिवार के वालेट में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है।
*27.मेरे परिवार के वालेट में 15000रु की राशि उपलब्ध है परंतु इलाज के लिए मेरा पैकेज 18000रु है। क्या मैं अतिरिक्त राशि जमा करा कर अस्पताल में योजना में इलाज ले सकता हूँ?*
जी नहीं। यह मरीज परिवार के लिए पूर्णतः निःशुल्क योजना है। आप अतिरिक्त राशि जमा करा कर इलाज नहीं ले सकते है। यदि आपातकालीन स्थिती है तथा मरीज गंभीर हालत में है तो राशि में बढोतरी राज्य स्तर से की जा सकती है।
*28.लाभार्थी कितनी बार इस योजना के अन्तर्गत इलाज करा सकता है?*
परिवार के वालेट में उपलब्ध राशि के शेष रहने तक लाभार्थी परिवार द्वारा इस योजना में कितनी बार भी इलाज करवाया सकता है।
*29.योजना में शामिल पैकेज की सूचना कहां से प्राप्त की जा सकती है?*
उक्त सूचना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की वैबसाइट www.rajswasthaya.com एवं योजना की वैबसाइट www.healthrajasthan.gov.in पर उपलब्ध है। यह सूचना टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 से भी ली जा सकती है।
*30.योजना से जुड़े अस्पतालों की सूचना कहां से प्राप्त की जा सकती है?*
उक्त सूचना चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की वैबसाइट www.rajswasthaya.com एवं योजना की वैबसाइट www.healthrajasthan.gov.in पर उपलब्ध है। यह सूचना टोल फ्री नम्बर 1800-180-6127 से भी ली जा सकती है।
*31.क्या योजना के अन्र्तगत लाभ लेने के लिये स्वास्थ्य संस्थान पर 24 घंटे भर्ती होना आवश्यक है?*
जनरल वार्ड प्रतिदिन पैकेज एवं आईसीयू प्रतिदिन पैकेज के अतिरिक्त अन्य किसी भी बीमारी का लाभ लेने के लिये 24 घंटे भर्ती होना आवश्यक नही है।
*32.मुझे केवल अपनी कुछ/सभी जांचे करवानी है क्या भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अन्तर्गत केवल जांच करवायी जा सकती है?*
जी नही, योजना में इस प्रकार का कोई प्रावधान नही है।
*33.क्या योजना के अन्र्तगत प्रसव सेवा का लाभ लिया जा सकता है।*
जी हाँ, राजकीय अथवा अधिकृत निजी अस्पताल में योजना के अन्तर्गत प्रसव सेवा का लाभ लिया जा सकता है।                   34.क्या योजना के अन्तर्गत प्रसव सेवा का लाभ लेने पर जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जायेगा?
राजकीय एवं जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत सम्बद्ध निजी अस्पतालो में जननी सुरक्षा योजना की प्रोत्साहन राशि का भुगतान पूर्ववत किया जाता रहेगा।
*35.अस्पताल से डिस्चार्ज होने के कितने दिनो बाद तक मरीज फालोअप हेतु आ सकता है?*
डिस्चार्ज होने के 15 दिन के भीतर मरीज फालोअप हेतु आ सकता है। साथ ही 15 दिन की दवाईयाँ आदि भी पैकेज के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराई जायेगी।
*36.क्या लाभार्थी परिवार का मरीज ओ.पी.डी. में परामर्श, दवायें और जांचो आदि में किये गये व्यय का भुगतान इस योजना के द्वारा प्राप्त कर सकता है?*
हाँ, यदि मरीज को ओ.पी.डी. मे दिखाने के 7 दिन के भीतर भर्ती किया जाता है तो उसके द्वारा पूर्व में किया गया दवाईयों, जांचो, परामर्श शुल्क आदि में हुये व्यय को भी क्लेम पैकेज में शामिल किया जायेगा। बशर्ते की यह उसी अस्पताल में हुआ है जिसमें वह इलाज करा रहा है।
*37.क्या इस योजना के अन्तर्गत केवल योजना के बाद की (13 दिसम्बर 2015) बीमारिया हीं शामिल है?*
नहीं, इस योजना के अन्तर्गत योजना चालू होने से पूर्व की बीमारियों हेतु भी चिकित्सा कवर सम्मिलित है।
*38.क्या उक्त लाभार्थी परिवार में शामिल नवविवाहिता को भी इस योजना का लाभ मिलेगा?*
हाँ, परन्तु इसके लिये नवीन वधु का नाम भामाशाह कार्ड में तत्काल जुडवाया जाये। इसके लिए वो अपने नजदीकी ई-मित्र केन्द्र अथवा अटल सेवा केन्द्र (ई-मित्र की सुविधायुक्त) पर जाकर अपना नाम जुडवा सकते हैं। भामाशाह कार्ड में नाम होने पर ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ प्राप्त हो सकेगा अन्यथा लाभ नही मिलेगा।
*39.मेरे परिवार का भामाशाह कार्ड़ बना हुआ है पर किसी सदस्य का नाम नहीं जुडे होने पर उसे लाभ मिल पायेगा?*
नही, भामाशाह कार्ड में नाम होने पर ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ प्राप्त हो सकेगा। यदि परिवार के किसी भी सदस्य का नाम भामाशाह कार्ड में जुडने से रह गया है तो उसका नाम भी तत्काल जुडवाया जाये।
*40.परिवार ने भामाशाह कार्ड के लिए आवेदन कर दिया है, परन्तु भामाशाह कार्ड प्राप्त नहीं हुआ है, ऐसी स्थिति में योजना का लाभ किस प्रकार लिया जा सकता है?*
ऐसे परिवारों को भामाशाह कार्ड के आवेदन के समय एक Acknowledgement slip दी जाती है, ऐसे पात्र परिवारों के लिये साफ्टवेयर में Bhamashah EID विकल्प का प्रावधान किया जा चुका है। । Acknowledgement slip पर अंकित EID नम्बर डालने पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के पात्र परिवार आने पर लाभ दिया जा सकेगा।
*41.मेरा परिवार NFSA का लाभार्थी है परन्तु साफ्टवेयर में भामाशाह कार्ड द्वारा NFSAपरिवार नहीं दिखाने पर क्या करे?*
यदि भामाशाह कार्ड बनवाते समय आपने राशन कार्ड की एन्ट्री भामाशाह कार्ड में नही करवायी है तो ऐसी स्थिती में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के साफ्टवेयर में NFSA परिवार नहीं दिखायेगा। ऐसी स्थिती में अपने नजदीकी ई-मित्र केन्द्र अथवा अटल सेवा केन्द्र (ई-मित्र की सुविधायुक्त) पर जाकर अपने राशन कार्ड की संख्या भामाशाह कार्ड में जुडवा सकते हैं।
*42.भामाशाह कार्ड में राशन कार्ड़ नम्बर जुडवाने के कितने समय पश्चात यह सूचना भामाशाह कार्ड में अपडेट होती है?*
यह सूचना लगभग 48 घन्टे में भामाशाह पोर्टल पर अपडेट हो जाती है।
*43.NFSA का लाभार्थी होने का सत्यापन किसके द्वारा किया जावेगा?*
यह सत्यापन सम्बन्धित क्षैत्र के उपखण्ड़ अधिकारी द्वारा किया जाता है।
*44.क्या योजना के अन्तर्गत परिवहन सेवा भी निःशुल्क उपलब्ध है?*
सामान्यतः नहीं। परन्तु हृदय रोग तथा अत्याधिक आघात Poly Trauma की स्थिति में 100 रु प्रति डिस्चार्ज यात्रा भत्ता का प्रावधान है जो की वर्ष में अधिकतम रु0 500 प्रति परिवार हो सकता है। यह इलाज करने वाले संस्थान द्वारा दी जायेगी।
*45.स्वास्थ्य संस्थान पर योजना की जानकारी किसके द्वारा प्राप्त की जा सकती है?*
इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान पर योजना की जानकारी देने एवं रोगी की सहायता हेतु स्वास्थ्य मार्गदर्शक उपलब्ध है।
*46.भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में आशा सहयोगिनी की क्या भूमिका है?*
ग्राम स्तर पर आशा सहयोगिनी स्वास्थ्य की दृष्टि से स्वास्थ्य विभाग तथा समुदाय को जोडने वाली महत्वपूर्ण कडी है। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में भी अपनी सक्रिय सहभागिता से वे वंचित और अभावग्रस्त वर्ग को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा दिलाने में मदद कर रही है। इसके लिये आशा सहयोगिनी को अपने संबंधित क्षेत्र के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) कुल लाभार्थीयों की सूची प्रदान की गयी है।
आशा सहयोगिनी द्वारा अपनी आशा डायरी में लाभार्थी परिवारों को चिन्हित कर सभी लाभार्थी परिवारों से घर-घर जाकर संपर्क किया गया और भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की समस्त जानकारी दी गयी।
जानकारी देने में मदद के लिये उनको ’’बी.एस.बी.वाई. किट’ प्रदान किये गये जिसमें-
1आशा ब्राशर।
2.  भामाशाह कार्ड की डमी।
3.  राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना कार्ड की डमी।
4.  निजी अस्पतालों की सूची व जानकारी वाला पम्पलेटस् प्रदान किये गये।
इस प्रकार आशा सहयोगिनी अपने क्षेत्र के प्रत्येक लाभार्थी परिवार तक भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की जानकारी पहुचानें, उन्हे मार्गदर्शन देने, अधिकृत निजी अस्पतालों की सूची उपलब्ध कराने और चिकित्सा संस्थान में लाभार्थियो की पहचान में सहयोग प्रदान कर रही है।

बुधवार, 21 जून 2017

स्कूली शिक्षा में कला : एक शिक्षक का नजरिया

स्कूली शिक्षा में कला : एक शिक्षक का नजरिया
►प्रशान्त सील
कल्पनाशील सोच-विचार को शायद एक दक्षता न माना जाता हो लेकिन यह अधिकतर कलात्मक दक्षताओं से भी अधिक आधारभूत है। छोटी कक्षाओं में यह सिखाना बहुत मुश्किल है। कला के संसार में अलग ही कल्पना की अलग ही उड़ान होती है और इस संसार में प्रवेश कर पाना आसान नहीं है। कला-शिक्षण के शुरुआत में सम्भव है कि किसी शिक्षक ने कोई आकृति बनाने या उसे रंगों से भरने या फिर सीधी लकीरें खींचने के लिए कहा हो। कभी-कभी बच्चे ऐसा करने में बोरियत महसूस करते हैं और कला की कक्षाओं में उनकी दिलचस्पी घटने लगती है। मैं आमतौर पर उन्हें कोई रंग-बिरंगा दृश्‍यचित्र बनाने को देता हूँ, या फिर जानवरों या किसी इन्सान की हल्की-फुलकी हंसी भरी तसवीर, तितलियाँ और चित्रकारी आदि। यदि यह उनका खुद का चुनाव होगा तो अधिक सम्भावना है कि वे इस पर मेहनत करेंगे। कभी-कभी वे शिल्प कार्य भी करते हैं। मैंने पाया है कि उन्हें इस गतिविधि में अमूमन अधिक मजा आता है।
आमतौर पर कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के बच्चों को जो वे करना चाहते हैं उसके चुनाव की छूट दी जाती है। कुछ दिलचस्पी लेते हैं और कुछ नहीं। बेहतर है कि विद्यार्थियों को ऐसा काम न दिया जाए जिसके लिए वे तैयार न हों। मेरी कोशिश विभिन्न विषयों पर कुछ विचार उन तक पहुँचाने की रहती है जिन्हें वे अपनी स्केच-बुक में प्रयोग कर सकें। वे बहुत अच्छा प्रदर्शन न कर रहे हों तब भी मैं उन्हें प्रोत्साहित करता हूँ। विद्यार्थी विचारों को अपना लेते हैं तो कुछ करने की इच्छा और प्रेरणा सबसे सशक्त होते हैं। यानी किए गए महत्वपूर्ण चुनाव में उनका दखल होना चाहिए। चुनाव वे स्वयं करेंगे तो काम भी बेहतर करेंगे।
महत्वपूर्ण चरण तब आता है जब वे बड़ी कक्षाओं में पहुँचते हैं, जैसे कि कक्षा 12 में। इसी दौर में वे रेखाचित्र बनाने की दक्षताएँ, कला का ज्ञान और रंगों की समझ विकसित करते हैं। इन कक्षाओं में स्थिर जीवन (स्टिल लाइफ़), कल्पनाशील चित्रकला, पुस्तकों के आवरण चढ़ाना, पोस्टर-निर्माण और लिनो प्रिन्ट आदि विशेष विषय होते हैं। पाठ्यचर्या का यह हिस्सा उन्हें सामग्री से “खेल-खिलवाड़” करने का मौका देता है। उदाहरण के लिए, पानी के रंगों की पारदर्शी रचना पर पेस्टल रंगों से चित्रकारी करना। पाठ का यह हिस्सा कला नहीं बल्कि कला की दक्षता या शिल्प है जो शिक्षक द्वारा बहुत ही ध्यान से पेश किया जाता है। कुछ विद्यार्थी आवेग में काम करते हैं, काम के महत्वपूर्ण पक्षों पर पर्याप्त ध्यान दिए बिना उसे खत्म करने की जल्दी में रहते हैं। मैं उन्हें अपने काम में जटिलता का विकास करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। खुले सवाल छोड़ता हूँ जिनसे ऐसे मुद्दे उठें जिन्हें वे अपने काम के लिए विचार में ला पाएँ। उनके लिए सबसे अधिक आवश्यकता सोच पाने के अभ्यास की है। मैं सुझाव माँगता हूँ तो पहले पूछता हूँ कि विद्यार्थी किस बारे में सोच रहा था। बहुत बार तो उसके पास पहले से ही कोई विचार होता है मगर उसे प्रयोग में लाने का आत्मविश्वास नहीं होता। मैं उन्हें यह कहकर प्रोत्साहित करता हूँ कि कुछ बातें अभ्यास से ही सीखी जा सकती हैं और अधिक अभ्यास बेहतर नतीजों की ओर ले जाता है।
पिछले कुछ सालों में मैंने जीवन में कला-शिक्षा के महत्व के बारे में अपनी सोच कुछ विद्यार्थियों तक पहुँचाई। पिछले ही साल कक्षा 12 के दो विद्यार्थी अपने डिग्री पाठ्यक्रम में फ़ैशन डिज़ाइनिंग करना चाहते थे। इसमें कोई शक नहीं कि बच्चे के व्यक्तित्व और दक्षताओं के विकास में कला-शिक्षा का महत्व है। कला से बच्चे की बुद्धि का विकास होता है। देखा गया है कि कला से सम्बद्ध गतिविधियों में शामिल बच्चे अन्य विषयों की भी बेहतर समझ विकसित कर पाते हैं फिर वह चाहे भाषा हो या भूगोल या फिर विज्ञान। अध्ययनों से सिद्ध हुआ है कि कला के सम्पर्क और परिचय में आने से मस्तिष्क की गतिविधि को बढ़ावा मिलता है। बच्चा समस्याओं के हल निकालना सीखता है। वह अपने विचार अलग-अलग तरह से दूसरों तक पहुँचाना भी सीखता है। कला बच्चे के समग्र व्यक्तित्व का विकास करती है, उसमें आत्म-सम्मान का निर्माण होता है और अनुशासन भी आता है। कला से सम्बद्ध होने की वजह से एक बच्चा अधिक रचनात्मक और नवाचारी बनता है तथा दूसरों के साथ सहयोग करना सीखता है। सारांश में, कला-गतिविधियाँ बच्चे के व्यक्तित्व-विकास, बौद्धिक प्रगति तथा अवलोकनात्मक दक्षताओं में बेहतरी लाने के लिए आवश्यक हैं।

योग का महत्व

योग का महत्व
यह प्रमाणित तथ्य हैं की योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है.
हम मनुष्य किसी चीज़ की ओर तभी आकर्षित होते हैं जब उनसे हमें लाभ मिलता है. जिस तरह से योग के प्रति हमलोग आकर्षित हो रहे हैं वह इस बात का संकेत हैं कि योग के कई फायदे हैं. योग को न केवल हमारे शरीर को बल्कि मन और आत्मिक बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है. दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे हैं, आइये! इनसे परिचय करें.
स्त्री पुरूष, बच्चे, युवा, वृद्ध सभी के लिए योग लाभप्रद और फायदेमंद है. शरीर क्षमताओं एवं लोच के अनुसार योग में किसी परिवर्तन और बदलाव किया जा सकता है. किसी भी स्थिति में योग लाभप्रद होता है.
मन और भावनाओं पर योग
जीवन में सकारात्मक विचारों का होना बहुत आवश्यक है. निराशात्मक विचार असफलता की ओर ले जाता है. योग से मन में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है. योग से आत्मिक बल प्राप्त होता है और मन से चिंता, विरोधाभास एवं निराशा की भावना दूर हो जाती है. मन को आत्मिक शांति एवं आराम मिलता है जिससे मन में प्रसन्नता एवं उत्साह का संचार होता है. इसका सीधा असर व्यक्तित्व एवं सेहत पर होता है.
तनाव से मुक्ति (Stress releaf through Yoga)
तनाव अपने आप में एक बीमारी है जो कई अन्य बीमारियों को निमंत्रण देता है. इस तथ्य को चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है. योग का एक महत्वपूर्ण फायदा यह है कि यह तनाव से मुक्ति प्रदान करता है. योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, यह प्रमाणित तथ्य है. योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है. तनाव मुक्त होने से शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है.
मानसिक क्षमताओं का विकास (Mental Functions improvement through Yoga)
स्मरण शक्ति एवं बौद्धिक क्षमता जीवन में प्रगति के लिए प्रमुख साधन माने जाते हैं. योग से मानसिक क्षमताओं का विकास होता है और स्मरण शक्ति पर भी गुणात्मक प्रभाव होता है. योग मुद्रा और ध्यान मन को एकाग्र करने में सहायक होता है. एकाग्र मन से स्मरण शक्ति का विकास होता है. प्रतियोगिता परीक्षाओं में तार्किक क्षमताओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं. योग तर्क शक्ति का भी विकास करता है एवं कौशल को बढ़ता है. योग की क्रियाओं द्वारा तार्किक शक्ति एवं कार्य कुशलता में गुणात्मक प्रभाव होने से आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
शरीर में लोच (Physical Functions improvement through Yoga)
योग से शरीर मजबूत और लचीला होता है. योग मांसपेशियों को सुगठित और शरीर को संतुलित रखता है. सुगठित और संतुलित और लोचदार शरीर होने से कार्य क्षमता में भी वृद्धि होती है. कुछ योग मुद्राओं से शरीर की हड्डियां भी पुष्ट और मजबूत होती हैं. यह अस्थि सम्बन्धी रोग की संभावनाओं को भी कम करता है.
सेहत और योग (Yoga and Health)
योग शरीर को सेहतमंद बनाए रखता है और कई प्रकार की शरीरिक और मानसिक परेशानियों को दूर करता है. योग श्वसन क्रियाओं को सुचारू बनाता है. योग के दौरान गहरी सांस लेने से शरीर तनाव मुक्त होता है. योग से रक्त संचार भी सुचारू होता है और शरीर से हानिकारक टाँक्सिन निकल आते हैं. यह थकान, सिरदर्द, जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है एवं ब्लड प्रेसर को सामान्य बनाए रखने में भी सहायक होता है.

विश्राम का महत्व

विश्राम का महत्व -
विश्राम का जीवन में बहुत ही ज्यादा महत्व माना जाता है क्यों ? ऐसा इसलिए होता है कि जब हम पूरे दिन काम करते हैं तो हमारे शरीर के बहुत से सेल्स नष्ट हो जाते हैं और कुछ बाईप्रोडक्ट बनने लगते हैं जैसे- कैमिकल आदि। अब होगा क्या कि हम जितना ज्यादा काम करेंगे हमारे शरीर में उतना ही वेस्टप्रोडेक्ट बनता जाएगा लेकिन पूरी तरह व्यस्त रहने के कारण शरीर को उसे बाहर निकालने का समय ही नहीं मिल पाएगा। इसी को देखते हुए प्रकृति ने विश्राम करने का नियम बनाया है ताकि जब हम विश्राम करें तो हमारी सारी क्रियाएं बंद हो जाए और यह वेस्टप्रोडेक्ट बाहर निकल जाए।कई बार ऐसा भी होता है कि हम मानसिक या शारीरिक रूप से थक जाते हैं, कई बार काम के बोझ के कारण भी थकावट आ जाती है ऐसी स्थिति में विश्राम कर लेना ही उचित है। विश्राम के लिए श्वासन में लेटना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
                      यदि अधिक मानसिक कार्य के कारण तनाव है तो ऐसे में भी श्वासन में लेट सकते हैं। लेकिन श्वासन में आप केवल घर पर ही लेट सकते हैं, ऑफिस में या कहीं बाहर नहीं लेट सकते। ऐसे में श्वासन के स्थान पर अंजनिमुद्रा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे भी मानसिक तनाव दूर होता है।इसके लिए अपने हाथों को कटोरी की मुद्रा में बना लें, फिर आंखों को बंद करके एक हाथ से एक आंख को ढकें इससे माथे पर आपकी अंगुलियां आ जाएंगी। अब इसी तरह दूसरे हाथ को दूसरी आंखों पर टिकाएं जिससे माथेके ऊपर आपकी अंगुलियां आ जाएगी। दो से दस मिनट तक इस स्थिति में रहने के बाद आपकी सारी मानसिक परेशानी दूर हो जाएगी। इसके बाद अपने काम को शुरू कर सकते हैं।
अब जो नींद है वह रात के समय बहुत जरूरी है। जितनी गहरी नींद आएगी उतना ज्यादा हमारा शरीर डिटॉक्सीफाई होगा और जितना ज्यादा शरीर डिटॉक्सीफाई होगा उतनी ज्यादा फ्रेशनेश रहेगी।यदि रात को पेशाब करने या पानी पीने के लिए उठ गए तो इसका अर्थ है कि आपको गहरी नींद नहीं आई है। भोजन में जितना ज्यादा वेस्टप्रोडेक्ट होगा उतनी गहरी नींद आएगी लेकिन यह आलस्य वाली नींद होगी। स्टूडेंट, डॉक्टर, इंजीनियर, साइंटिस्ट आदि जिन्हें अधिक मानसिक कार्य करना पड़ता है, अधिक देर तक जागना पड़ता है। ऐसी व्यक्तियों को नैचुरल डाईट पर रहना चाहिए ताकि शरीर में वेस्टप्रोडेक्ट कम बने।अगर वेस्टप्रोडेक्ट शरीर में कम बनेगा तो नींद भी आवश्यकता से कम आएगी। हम क्या करते हैं कि अक्सर नींद को खत्म करने के लिए चाय-कॉफी का इस्तेमाल करते रहते हैं। लेकिन इसके स्थान पर फलाहार ले लिया जाए तो वेस्टप्रोडेक्ट बिल्कुल ही कम हो जाएंगे और शरीर को कोई नुकसान भी नहीं होगा। यदि कोई फंक्सन है, शादी-पार्टी और देर रात तक जागना हो तो सुबह से ही फलाहार, जूस आदि लेना शुरु कर दें। इससे न आलस्य आएगा और न ही थकावट होगी।

प्रदूषण

प्रदूषण पर निबंध 6 (450 शब्द)
प्रौद्योगिक उन्नति की आधुनिक दुनिया में, प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है जो की पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित कर रहा है। प्रदूषण का सबसे महत्वपूर्ण प्रकार हैं वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भू प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। सभी प्रकार के प्रदूषण निस्संदेह पूरे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहे हैं अतः जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। मनुष्य के मूर्ख आदतों से पृथ्वी पर हमारी स्वाभाविक रूप से सुंदर वातावरण दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
वाहनो के बढ़ती संख्या की वजह से उत्पन्न हानिकारक और ज़हरीली गैसों का उत्सर्जन, कारखाने और खुले में आग जलाना, वायु प्रदुषण के मुख्य कारण हैं। जीवन को बेहतर बनाने की भीड़ में, हर कोई अपने आसान दैनिक दिनचर्या के लिए अच्छी तरह से संसाधन चाहता है, लेकिन वे अपने प्राकृतिक परिवेश के बारे में जरा सा भी नहीं सोचते। ज्यादातर वायु प्रदूषण रोजमर्रा की सार्वजनिक परिवहन के द्वारा होता है। कार्बन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड विषैली गैसें है जो की वायु को प्रदूषित करती है और वातावरण में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर रहीं हैं|
उत्पादक कारखानें भी लोगों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, वायु प्रदूषण के लिए बड़ा योगदान कर रहीं हैं। निर्माण प्रक्रिया के दौरान कारखानों के द्वारा कुछ विषाक्त गैसें, गर्मी और ऊर्जा रिलीज होती है। कुछ अन्य आदतें जैसे की खुले स्थान पे घरेलु कचरे को जलाना आदि भी हवा की गुणवत्ता बिगाड़ रहीं हैं| वायु प्रदूषण इंसान और जानवरों में फेफड़ों के कैंसर सहित अन्य सांस की बीमारियां उत्पन्न कर रहीं हैं|
जल प्रदूषण भी एक बड़ा मुद्दा है जो सीधे समुद्री जीवन को प्रभावित करता है क्योंकि वे अपने उत्तरजीविता के लिए केवल पानी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों पर निर्भर रहते हैं। धीरे-धीरे समुद्री जीवन का ग़ायब होना वास्तव में मनुष्य और जानवरों की आजीविका पर असर डालेगा। कारखानों, उद्योगो, सीवेज सिस्टम और खेतों आदि के हानिकारक कचरे का सीधे तौर पे नदियों, झीलों और महासागरों के पानी के मुख्य स्रोत में मिलाना ही जल को दूषित करने का कारण है। दूषित पानी पीना गंभीर स्वास्थ्य संबंधी विकार उत्पन्न करता है।
उर्वरक, कवकनाशी, शाकनाशी, कीटनाशकों और अन्य कार्बनिक यौगिकों के उपयोग के कारण मृदा प्रदूषण होता है। यह परोक्ष रूप से हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है क्योकि हम मिट्टी में उत्पादित खाद्य सामग्री खाते हैं। भारी मशीनरी, वाहन, रेडियो, टीवी, स्पीकर आदि द्वारा उत्पन्न ध्वनि, ध्वनि प्रदूषण के कारण है जो की सुनने की समस्याओ और कभी कभी बहरापन का कारण बनती हैं। हमें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए अपने पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है जिससे की हम एक स्वस्थ्य और प्रदुषण मुक्त वातावरण पा सके।

जाने दवाइयों के सेवन से जुडी सावधानियां और Medicine Side Effects

Posted by Seema Gautam
डॉक्टर के परामर्श के बिना बहुत से व्यक्ति स्वयं व दूसरों को दवाएं खाने व खिलाने लगते हैं जो अन्य खतरों के अलावा Medicine Side Effects से भी प्रभावित होते है। अपनी मर्जी से सिर दर्द में एस्पिरिन की गोली, कमजोरी में विटामिन्स की गोलियां, कैप्सूल अथवा सिरप, हाजमा ठीक करने के लिए एन्जाइम्स की गोली, नींद लाने के लिए नींद की गोली आए दिन खा लेना मामूली बात हो गई है। आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी “नीम हकीम खतरा-ए-जान” अर्थात अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है और जब शरीर और स्वास्थ्य का मामला हो, तो ऐसे में दवाओं की आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर उनका सेवन करना और कराना खतरे से खाली नहीं है।
माना कि कभी कभार इस प्रकार के दवाओं के सेवन से लाभ मिल भी जाता है, लेकिन यह लाभ ठीक वैसा ही होता है, जैसा कि अंधेरे में ठीक निशाना लगना। यदि डॉक्टर के परामर्श के अनुसार एलोपैथिक दवाएं सेवन की जाएं, तो वे मरीज की शारीरिक अवस्था देखकर देते हैं, जिससे Medicine Side Effects होने की संभावना कम रहती है, परंतु यदि उनका प्रयोग अपनी मर्जी से अनिश्चित काल तक किया जाए, तो इनके Side Effects होने की काफी संभावना रहती है। उदाहरण के लिए यदि आपके सिर में तेज दर्द हो रहा है, तो ऐसी हालत में कोई दर्द निवारक गोली ले लेना हानिप्रद नहीं है, लेकिन यदि आपको हर रोज सिर दर्द की तकलीफ होती हो, तब आप डॉक्टर के परामर्श के बिना कई दिनों तक लगातार दर्द निवारक गोलियां खाते रहते हैं, तो यह आदत निश्चय ही आपके शरीर और स्वास्थ्य, दोनों के लिए हानिकारक सिद्ध होगी।
स्वयं दवाइयां न लें –
सभी तरह की एंटीबायोटिक दवाएं लिवर में ही निष्क्रिय की जाती हैं। इसी कारण उनका लिवर पर बुरा असर होता है। हमारी आंतों के मित्र जीवाणु, जो “बी’ काम्पलेक्स बनाकर हमारी सहायता करते हैं, एंटीबायोटिक के प्रयोग से मर जाते हैं। अत: इनके प्रयोग के समय साथ में विटामिन बी काम्पलेक्स की गोलियां सेवन के लिए दी जाती हैं।
टेट्रासाइक्लीन के Medicine Side Effects से रोगी को उलटी, अतिसार, मुंह में छाले, पेट में गैस बनना, भूख कम लगना, नाखून व दांतों का पीला पड़ना जैसे कष्ट भुगतने पडते हैं।
कुछ दवाई जो बुखार के कैप्सूल के नाम से खरीदते हैं और अपनी मर्जी से लंबे बुखार में देते हैं। इसके सेवन से रक्त में सफेद कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है। इसके Medicine Side Effects से नर्व की विकृति से रोगी की सुनने की शक्ति प्रभावित होती है। इसके अलावा त्वचा में खुजली, उलटी, सिर दर्द, जी मिचलाना, जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, पेट दर्द आदि दुष्परिणाम भी अनुसंधानों से प्राप्त हुए हैं।
बीपी या फिर बुखार में बिना डॉक्टर के परामर्श के दवा नहीं लेनी चाहिए। इससे भले ही अल्पकालिक फायदा मिल जाए, लेकिन मल्टी ड्रग रजिस्टेंट की आशंका बढ़ जाती है।
आजकल कार्टिजोन वर्ग की हाइड्राकोर्टिजोन, प्रिडनीसोलोन आदि दवाएं विस्तृत रूप से इस्तेमाल की जाती हैं। इनके लगातार सेवन करने और एकाएक छोड़ने से घातक लक्षण भी देखने में आते हैं। शरीर में जल संचय होना, सारे शरीर में शोथ, चेहरा सूजना इनमें प्रमुख हैं।
इसी प्रकार से मनचाहे टॉनिक का लंबे समय तक इस्तेमाल करना हानिकारक हो सकता है। इसमें मिला आयरन, विटामिन्स, ह्मिसरोफास्फेट्स, हार्मोन्स की शरीर में अधिकता हानिकारक प्रभाव पैदा करते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि Medicine Side Effects से बचने के लिए दवाइयां अपनी इच्छानुसार न खाकर, डॉक्टर के निर्देशानुसार ही सेवन की जाएं। तभी हम इनके दुष्परिणामों से बच सकते हैं।
खांसी को दबाने वाले सिरप खांसी आने की उत्तेजना को कम करते हैं। इसे सप्रेसेंट कहते हैं। खांसी की वजह पर असर करने वाली दवा बलगम बाहर निकालती है। इसे एक्सपेक्टरेंट कहते हैं। अगर आपको सूखी खांसी है तो सप्रेसेंट का इस्तेमाल करें और अगर बलगम वाली खांसी है तो एक्सपेक्टरेंट का। गलत दवा का इस्तेमाल आपकी तकलीफें बढ़ा सकता है।
हर दिन लिया जाने वाला संतुलित डायट आपके शरीर को सभी पोषक तत्व देता है। किसी भी व्यक्ति को मल्टीविटामिन की गोलियां किसी खास अवस्था में ही डॉक्टर लेने के लिए कहते हैं।
दवाइयों की जानकारी जरूरी है अकसर एलोपैथिक दवाएं सबके लिए लाभदायक नहीं होतीं, क्योंकि एक ही दवा किसी व्यक्ति को लाभ पहुंचाती है, तो दूसरे को असर नहीं करती। इसलिए इन दवाओं का प्रयोग करने से पहले इनके गुण-दोषों, मात्रा, दुष्प्रभाव, सेवन अवधि इत्यादि की बखूबी जानकारी होनी चाहिए।
आप जो भी दवा लेते हैं, उसके Medicine Side Effects के बारे में जरूर पता करें। ओटीसी यानी ओवर द काउंटर कैटिगरी में आने वाली दवाओं के भी कुछ Side Effects होते हैं। इसकी जानकारी दवा के रैपर या बॉटल पर लिखी होती है।
एलोपैथी की तरह ही आयुर्वेद की दवाओं का भी मिसयूज घातक साबित हो रहा है। दवाएं किसी भी पद्धति की हों, लेकिन उनके इस्तेमाल के लिए सख्त गाइड लाइन और निगरानी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एक आयुर्वेद दवा के इस्तेमाल के बाद न्यूयार्क में स्टडी की गई। इससे शरीर में Medicine Side Effects से लेड की मात्रा बढ़ गई।
वैसे एक स्वस्थ जीवनचर्या अपनाकर आप रोगों के इस कुचक्र से अपने आपको बचा सकते है, परन्तु फिर भी आपको अगर कोई रोग हो जाये तो नेचुरल या आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली को प्राथमिकता दें | इनका असर थोड़ी देर से जरुर होता है पर इनके Medicine Side Effects ना के बराबर होते है |
हमारी वेबसाइट पर एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए ढेरो सुझाव व् लेख दिए गये है साथ ही छोटी- मोटी बिमारियों को ठीक करने के लिए कुछ आसन घरेलू नुस्खे भी बताये जाते है, इनका लाभ उठायें | और अपनी और अपने परिवार के स्वास्थ्य का ख्याल रखें
अगर आपको भी डॉक्टर का पर्चा ठीक से समझ नहीं आता है तो नीचे दिए गये कुछ शॉर्टकट जानना आपके लिए अच्छा होगा।
AC: खाने से पहले
PC: खाने के बाद
OD: दिन में एक बार
BD/BDS: दिन में दो बार
TD/TDS: दिन में तीन बार
QD/QDS: दिन में चार बार
SOS: जब जरूरत लगे
Tab: टैबलेट
Cap: कैप्सूल
Amp: इंजेक्शन रूप में
Ad Lib: जितनी जरूरत हो, उतना ही लें
G or Gm: ग्राम
Gtt: ड्रॉप्स
H: …घंटे बाद
Mg: मिलिग्राम
Ml: मिलिलीटर
PO: मुंह से