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शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

चेंजमेकर महावीर आचार्य ने युवाओं के साथ की स्वच्छ राजनीति पर चर्चा

चेंजमेकर महावीर आचार्य ने युवाओं के साथ की स्वच्छ राजनीति पर चर्चा व वालंटियर के साथ मिलकर लगाये पौधे 
 बाड़मेर/31.08.2018 
स्पेस शिक्षण समिति द्वारा संचालित स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में भाग ले रहे युवाओं के साथ चेंज मेकर महावीर आचार्य ने स्वच्छ हो राजनीति चेंज मेकर्स महाअभियान के तहत स्वच्छ राजनीति पर चर्चा की व वॉलंटियर के साथ मिलकर पौधारोपण भी किया । 
चर्चा के दौरान युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में आम नागरिकों को अपने मत के प्रति जागरुक करते हुए आने वाले चुनाव में ज्यादा से ज्यादा संख्या में मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
इसके साथ ही उन्होंने युवाओं से विभिन्न मुद्दों पर उनकी राय भी सुनी जैसे हमारा राजनेता कैसा हो ? हमें मत क्यों देना चाहिए ? युवाओं को राजनीति से जुड़ना चाहिए ? आदि। 
कार्यक्रम में वालंटियर जुगताराम सारण सहित समिति संचालक दिनेश कुमावत, हॉस्टल वार्डन भारमल राम, कैलाश गोयल, विजय जानी, दमाराम सियाग, अचलाराम, विक्रम दान चारण, नरपत सिंह, नाथू सिंह खारची आदि मौजूद रहे। 
युवाओं ने भी कुछ इस प्रकार राजनीति को स्वच्छ करने के लिए अपने विचार रखे -
  
 मतदान हमारा अधिकार है इसलिए हमें मतदान अवश्य करना चाहिए हम मतदान के द्वारा अपनी पसंद का उम्मीदवार चुनते हैं अगर हमारे मत का प्रयोग नहीं करते हैं तो हमारा मत व्यर्थ चला जाएगा हमारी पसंद का कोई नेता नहीं मिलेगा हमें सोच समझकर उम्मीदवार का चुनाव करना चाहिए ।
 - नरपत सिंह खारची 

   


हमारा राजनीतिक उम्मीदवार शिक्षित होना चाहिए शिक्षा को बढ़ावा देने वाला तथा युवाओं का साथ दें। 
 - त्याग सिंह 





राजनीति में युवाओं को आगे आना चाहिए राजनेताओं के लिए भी कम से कम ग्रेजुएट होना अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि राजनीति में शिक्षित वर्ग ज्यादा जुड़े और इसी प्रकार राजनीति को स्वच्छ किया जा सकता है 
 - नाथू सिंह खारची




हमेशा धर्मनिरपेक्ष 36 कोम को साथ लेकर चलने वाला तथा बिना भेदभाव के सब के विकास के लिए काम करने वाला व्यक्ति ही राजनीति को स्वच्छ कर सकता है
 - विक्रमदान चारण


राजनीति में धर्मनिरपेक्षता को ध्यान में रखते हुए जातिवाद नहीं किया जाए और निष्पक्षता से कार्य किया जाए 
- लच्छा राम प्रजापत


गुरुवार, 9 अगस्त 2018

गढ़ सिवाना - Fort Sivana - बाड़मेर, राजस्थान


राजस्थान की छप्पन की पहाडियों में स्थित सिवाना दुर्ग का इतिहास बड़ा गौरवशाली है | कहा जाता है की इस दुर्ग का निर्माण राजा भोज के पुत्र वीर नारायण पंवार ने १० वि शताब्दी में करवाया था बाद में ये दुर्ग सोनगरा चौहानों के अधिकार में आ गया|जब अल्लाउद्दीन खिलजी ने अपनी साम्राज्यवादी निति के तहत गुजरात और मालवा पर अधिकार कर लिया फिर वो अपने विजित प्रदेशो के मध्य स्थित राजपुताना के दुर्गो पर अधिकार करने की तरफ अग्रसर हुवा और उसने रणथम्भोर और चित्तोड पर अधिकार करने के उपरान्  २ जुलाई १३०८ ईस्वी में सिवाना दुर्ग पर आक्रमण करने हेतु सेना भेजी| उस समय दुर्ग पर वीर सातलदेव अथवा सीतलदेव चौहान का अधिकार था और उसका राज्य क्षेत्र लगभग सम्पूर्ण बाड़मेर पर था और उसके गुजरात के सोलंकियो से अच्छे मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध थे और जिसकी दृष्टी में दुर्ग को शत्रु के हाथो सौपने के बाद अपमानजनक जीवन व्यतीत करने की बजाय दुर्ग की रक्षा करते हुवे वीर गति को प्राप्त करना ज्यादा बेहतर था |शाही सेना ने दुर्ग के चारो तरफ घेरा डाल दिया किन्तु लम्बे समय तक शाही सेना को इस अभेद दुर्ग पर अधिकार करने में सफलता प्राप्त नहीं हुई और उलटे शाही सेना को ज्यादा क्षति हुई अनेक सैनिको के साथ साथ सैना नायक नाहर खा को अपने प्राण गवाने पड़े|तब स्वय अल्लाउद्दीन ने एक बड़ी सेना सहित इस दुर्ग के चारो तरफ घेरा डाला और लबे समय तक घेरा डालने से दुर्ग के भीतर की रसद समाप्त हो जाने के कारण सातलदेव ने अपने राजपूत सैनिको सहित दुर्ग के दरवाजे खोल कर शाही सेना पर आक्रमण कर दिया और युद्ध करते हुवे वीर गति को प्राप्त हुवे|तब अल्लाउद्दीन ने  इस पर अधिकार कर लिया था और इस दुर्ग का नाम उसने खैराबाद रखा था और उसने यहाँ कमाल्लुद्दीन को सूबेदार नियुक्त किया| डा मोहनलाल गुप्ता के अनुसार अल्लाउद्दीन ने तारीखे अलाई में इस दुर्ग का उल्लेख इस प्रकार किया है “ सिवाना दुर्ग एक भयानक जंगल के बीच स्थित था |जंगल जंगली आदमियों से भरा हुवा था जो राहगीरों को लुट लेते थे | इस जंगल के बीच पहाड़ी पर काफिर सातलदेव एक सिमुर्ग ( फ़ारसी पुरानो में वर्णित एक भयानक और विशाल पक्षी) की भाँती रहता था और उसके कई हजार काफिर सरदार पहाड़ी गिद्धों की भाँती उसकी रक्षा करते थे|


केंद्र में खिलजियो की शक्ति कमजोर होने पर राव मल्लिनाथ के भाई राठोड जैतमल ने इस दुर्ग पर अधिकार कर  लिया और काफी लम्बे समय तक जैतमलोत राठोड़ो ने इस दुर्ग पर शासन किया फिर जोधपुर के शासक राव मालदेव ने इस दुर्ग को राठोड जैतमलोतो के वंशज डूंगरसी से हस्तगत कर लिया था| 

जोधपुर के शासक मालदेव ने विक्रम संवत १५९४ और ईस्वी संवत २० जून १५३८ में सिवाना पर सेना भेजी और वहा के स्वामी राठोर डूंगरसी को निकाल कर वहा जोधपुर राज्य का अधिकार स्थापित किया और मंगलिया देवा (भादावत ) को वहा का किलेदार नियुक्त किया|( मुह्नोत नैणसी की ख्यात और वीरविनोद के अनुसार हालाकिं वीर विनोद में आक्रमण का वर्ष १५९५ दिया गया है ) राव मालदेव ने ही इस दुर्ग के परकोटे का निर्माण करवाया था और इसकी सुरक्षा व्यवस्था को सुद्रढ़ किया था |
तारीखे शेरशाही के अनुसार जोधपुर नरेश मालदेव ने शेरशाह सूरी के जोधपुर पर आक्रमण के दौरान भाग कर सिवाना की पहाडियों में शरण ली थी| जोधपुर की मुह्नोत नैणसी की ख्यात के अनुसार इस समय मालदेव के साथ राठोड जैसा, भैरुदासोत चम्पावत ,राठोड महेश घड्सियोत, राठोड जैतसी बाघावत और फलोदी का स्वामी राव राम और पोकरण का स्वामी जेतमाल भी साथ में गए थे| 



सिवाना का अभिलेख (1537) – Inscription of Siwana - सिवाना दुर्ग के द्वितीय द्वार में अन्दर दोनों तरफ शिलालेख लगे हुवे है जिसमे दायी और लगे शिलालेख में राव मालदेव की सिवाना किले पर विजय का सूचक है|इसमें विजय के उपरान्त किये जाने वाले प्रबंध का भी वर्णन किया गया है| इसमें उस समय की स्थानीय भाषा का भी बोध होता है |
“ स्वस्ति श्रे (श्री) गणेश प्रा (प्र) सादातु (त्र) समतु (संवत १५९४ वर्षे आसा (षा) ढ वदि ८ , दिने बुधवा (स) रे मह (हां) राज (जा) धिराज मह (हा ) राय (ज) श्री मालदे (व) विजे (जय) राजे (राज्ये ) गढ़सी वने (वाणों) लिए (यो) गढ़री (री) कु चि म (माँ) गलिये देव भदाऊ तू (भंदावत) रे हाथि (थ) दि (दी) नि गढ़ थ (स्त) भेराज पंचा (चो) ली अचल गदाधरे (ण) तु रावले वहीदार लिष ( खी) त सूत्रधार करमचंद परलिय सूत्रधार केसव”
डा० गोपीनाथ शर्मा के अनुसार इसमें दी गई अष्टमी तिथि के बजाय सप्तमी होनी चाहिए और इसे चैत्रादी संवत १५९५ मारवाड़ में प्रचल्लित श्रावणदी के विचार से लेना चाहिए|( देखे फोटोग्राफ)





डा मोहन लाल गुप्ता के अनुसार तबकात ए अकबरी एवं अकबरनामा में भी सिवाना दुर्ग का उल्लेख है| राव मालदेव के बाद उसका पुत्र राव चंद्रसेन जोधपुर का शासक बना चूँकि चंद्रसेन राव मालदेव का तीसरा पुत्र था और प्रथम दो पुत्रो में ज्येष्ठ पुत्र राम और उदय सिंह के ज्येष्ठ होने के बावजूद अपनी प्रिय रानी के पुत्र होने के कारण राव मालदेव ने राव चंद्रसेन को जोधपुर का उतराधिकारी बनाया था इसलिए ताउम्र चंद्रसेन को अपने बड़े भाइयो राम और उदयसिंह से संगर्ष करण पड़ा था| राम का विवाह मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह की पुत्री से हुवा था अत उदय सिंह जी ने उसे केलवा की जागीर प्रदान कर दी थी बाद में राम अकबर की सेवा में चला गया था और उसी के कहने पर अकबर ने शाही सेना भेज कर जोधपुर पर अधिकार कर लिया और चंद्रसेन को भाग कर भाद्राजुन की पहाडियों में शरण लेनी पड़ी थी|जोधपुर का शासन अकबर ने बीकानेर के शासक रायमल को सुपुर्द कर दिया था |चंद्रसेन का बड़ा भाई उदयसिंह फलोदी जागीर का स्वामी था और वो भी चंद्रसेन के विरुद्ध था और उनमे कई बार युद्ध भू हुवा था| अकबर चंद्रसेन के उत्पाती व्यवहार के कारण हमेशा उससे नाखुश रहा और आखिर में जब चंद्रसेन सिवाना किले में रहने लगा था|जब अजमेर में अकबर को चंद्रसेन के उत्पात की सुचना मिली तो उसने  चंद्रसेन के विरुद्ध अपने  सेनापतियो में शाह कुली खा मरहम, शिमाल खा, बीकानेर नरेश राय सिंह, केशेदास मेड़ता वाला और जगतराम आदि सरदारों को भेजा और कहा की यदि चंद्रसेन अपने किये पर शर्मिंदा हो तो उसे समझा देना अन्यथा आक्रमण कर देना| शाही सेना ने सिवाना दुर्ग पर घेरा डाला किन्तु वो इस अभेद दुर्ग को भेद नहीं पाई और रायमल ने अजमेर में बादशाह के समीप उपस्थित होकर और सेना भेजने हेतु निवेदन किया| उधर चंद्रसेन दुर्ग को अपने विश्वासपात्र पत्ता के हवाले कर वहा से भाग गया| और सेना को भेजने के बावजूद शाही सैना दुर्ग को भेद पाने में असमर्थ रही तब अकबर ने शाहबाज खान को भेजा| शाहबाज खा ने पूर्व के समस्त सरदारों को वापस भेज दिया और योजनाबद्ध तरीके से दुर्ग पर घेरा दाल कर प्रबल आक्रमण किये जिसके कारण रसद समाप्त होने के कारण पत्ता ने सिवाना दुर्ग शाहबाज खान के सुपुर्द कर वो राव चंद्रसेन के पास चला गया|इस प्रकार शाही सेना के कई माह तक दुर्ग पर घेरा डाले रही और जिसमे जलाल खा जैसे सेनापति भी मारा गया अंतत बड़ी मुश्किल से शाहबाज खा दुर्ग हासिल करने में सफल हो गया इससे सिवाना दुर्ग की अभेदता का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है 



अकबर ने सिवाना दुर्ग को राव मालदेव के पुत्र रायमल को दे दिया था जिसे बाद में उसके पुत्र कल्याणदास वीर कल्ला को प्राप्त हुवा| इतिहासकार गौरीशंकर ओझा के अनुसार अकबर ने वीर कल्लाजी द्वारा किसी मनसबदार को मारने की बात पर नाराज होने पर जोधपुर के उदयसिंह को सिवाना दुर्ग पर अधिकार करने का आदेश दिया| उदय सिंह ने कुंवर भोपत और कुंवर जैत सिंह को दुर्ग पर आक्रमण करने का आदेश दिया जिस पर उन्होंने  अनेक सरदारों को लेकर सिवाना दुर्ग पर घेरा डाल दिया किन्तु वीर कल्लाजी द्वारा दिन में उन पर आक्रमण कर उनके अनेक सरदारों को मार डाला और उन्हें वहा से भागना पड़ा| फिर बादशाह ने स्वयं उदयसिंह को सिवाना रवाना किया वह जोधपुर होते हुवे सिवाना गया और एक नाई की सहायता से उसने २ जनवरी 1589 को दुर्ग में प्रवेश कर लिया और वीर कल्ला जी ने बड़ी वीरता पूर्वक युद्ध करते हुवे वीरगति को प्राप्त हुवे और उनकी पत्नी हाडी रानी ने ललनाओं के साथ जौहर किया था|आज भी जहा वीर कल्लाजी वीरगति को प्राप्त हुवे थे वहा प्रतिवर्ष एक मेला भरता है और एक छतरी का भी निर्माण किया गया है |

सिवाना नगर में वीर कल्लाजी की मूर्ति एक चौराहे पर भी लगी हुई है और उच्च माध्यमिक विधालय में वीर कल्लाजी के घोड़े की समाधि बनी हुई जिसके बारे में कहा जाता है की उसने अपने स्वामी के प्राणों की रक्षा करते हुवे अपने प्राणों की आहुति दी थी|



सिवाना नगर के प्रवेश द्वार पर एक शिलालेख लगा हुवा है जिसमें लडकियों को न मारने की राजाज्ञा उत्कीर्ण है|सिवाना दुर्ग के अन्दर देखने लायक प्रमुख स्थल दुर्ग के परकोटे पर बने बुर्ज है जहा से सिवाना नगर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है| दुर्ग के अन्दर राजमहल के अवशेष और त्रिकलाश प्रसाद के अवशेष देखे जा सकते है| दुर्ग के अन्दर दुर्ग का मुख्य जल स्रोत तालाब देखने लायक है और उससे थोडा उपर राजमहल के पास एक शिवलिंग जिसके आगे नंदी बैठे है एक चबूतरे पर बने हुवे है|





सिवाना के आस पास के पर्यटक स्थल – Places out & around Siwana Fort –
सिवाना वैसे तो चारो तरफ से थार मरुस्थल से घिरा है किन्तु भौगोलिक दृष्टी से ये क्षेत्र छप्पन की पहाडियों के मध्य स्थित है जो की अत्यत उपजाऊ क्षेत्र रहा है हालाकि वर्तमान में इस क्षेत्र का जल स्तर काफी नीचे जा चूका है| वर्षा काल में सिवाना की पहाड़िया चारो तरफ हरीतिमा छा जाने के कारण अत्यत मनोहारी बन जाती है| सिवाना के आस पास के प्रमुख पर्यटक स्थलों में हल्देश्वर मंदिर जहा वीर दुर्गा दास द्वारा निर्मित पोल भी दर्शनीय है| महाभारत कालीन भीमगोड़ा मंदिर भी देखने लायक है जिसके बारे में कहा जाता है की अज्ञात वास के दौरान पांड्वो ने कुछ समय यह भी व्यतीत किया था और यहाँ महाबली भीम ने अपने घुटने की ठोकर से पर्वत में से जलधारा उत्पन्न की थी| आशापुरी माता का मंदिर सिवाना में स्थित आशापुरी माताजी का मंदिर है जहा मंछाराम जी महाराज का आश्रम है जिसके द्वारा भीमगोड़ा और अनेक स्थानों पर गौशाला का संचालन किया जाता है और अनेक परोपकारी कार्यो का सम्पादन किया जाटा है|आसोतरा का ब्रम्हा मंदिर कहते है की पुरे भारत में कुछ ही ब्रम्हा जी के मंदिर है जिसमे राजस्थान में पुष्कर और नागोर के अलावा केवल मात्र आसोतरा में ब्रम्हा मंदिर है जिसका निर्माण स्वर्गीय खेताराम जी महाराज ने की थी जो की राजपुरोहित ब्राह्मण समाज के गुरु थे| वर्तमान में ट्रस्ट द्वारा भव्य मंदिर , विश्राम स्थल का निर्माण और दर्शनार्थियों हेतु प्रतिदिन  नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है और एक विशाल गौशाला का भी संचालन किया जाता है| हिंगलाज माता का मंदिर – चारणों की आराध्य देवी श्री हिंगलाज माता का मूल मदिर पाकिस्तान में है और दूसरा मंदिर दुर्ग के समीप पहाडियों में स्थित है |मोकलसर की बावड़ी और अमरतिया कुंवा सिवाना के आगे जालोर मार्ग पर स्थित मोकलसर में एक प्राचीन कुवा है अमरतिया बेराजिसका मीठा और औषधीय गुणों युक्त जल बड़ा प्रसिद्द है|इसके अलावा मोकलसर की एक बावड़ी पग बाव अत्यंत प्रसिद्द है|जालोर दुर्ग सिवान गढ़ से जालोर दुर्ग का भी भ्रमण किया जा सकता है जिसका इतिहास भी सिवाना की भाँती बड़ा गौरवशाली रहा है|जैन मंदिर  सिवाना में अनेक जैन मंदिर स्थित है |

सिवाणा कैसे जाए? How to get there?
सिवाना बाड़मेर से 104 किलोमीटर दूर है और बालोतरा से 36 किलोमीटर दूर है और बाड़मेर से और बालोतरा से निरंतर निजी और राजस्थान रोडवेज की  बस सेवा संचालित होती रहती है|जोधपुर और उदयपुर से भी बसे उपलब्ध है | उदयपुर से रात्री दस बजे निजी बस बाड़मेर के लिए जाती है जो प्रात 04:30 बजे शिवाना पहुचाती है| जय ट्रेवल्स – उदियापोल, उदयपुर फोन न०- 0294-2481177 – 2481199 बालोतरा से चत्तरी बस स्टेशन से सिवाना के लिए प्रत्येक आधे घंटे में बस सेवा संचालित होती है|
कहा ठहरे ? Where to stay?
होटल कीर्ति
संजीवनी काम्प्लेक्स
सत्कार काम्प्लेक्स के सामने , जालोर रोड- 344044
फोन-07073476418

भारत में न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट के बीच क्या अंतर होता है ?


न्यायपालिका संविधान का अंग है जो नागरिकों के हितों की रक्षा करता है. यह अंतिम प्राधिकरण है जो कानूनी मामलों और संवैधानिक व्यवस्था की व्याख्या करता है. यह नागरिकों, राज्यों और अन्य पार्टियों के बीच विवादों पर कानून लागू करने और निर्णय लेने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. न्यायालय अधिकारों की रक्षा के लिए देश में कानून को बनाए रखते हैं. न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालय और अन्य अधीनस्थ अदालतों के प्रमुख होते हैं.
न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट्स के समान नहीं होते हैं, इनकी शक्तियां न्यायाधीश से अपेक्षाकृत कम होती हैं. एक मजिस्ट्रेट का अधिकार क्षेत्र आमतौर पर एक जिला या एक शहर ही होता है. आइये इस लेख के माध्यम से न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट के बीच क्या अंतर होता है के बारे में अध्ययन करते हैं.
आइये सबसे पहले अध्ययन करते हैं मजिस्ट्रेट के बारे में
मजिस्ट्रेट कम से कम एक सिविल अधिकारी होता है, जो किसी विशेष क्षेत्र, यानी जिला या शहर में कानून का प्रबंधन करता है. 'मजिस्ट्रेट' शब्द मध्य अंग्रेजी 'मैजिस्ट्रेट' से लिया गया है, जिसका अर्थ है "कानूनों के प्रशासन के प्रभारी सिविल अधिकारी." यह वह व्यक्ति है जो सिविल या क्रिमिनल मामलों को सुनता है और निर्णय देता है. ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर जिले का मुख्य कार्यकारी, प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी होता है. वह जिले में कार्य कर रहीं विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मध्य आवश्यक समन्वय की स्थापना करता है.
मजिस्ट्रेट का इतिहास
वारेनहेस्टिंग्स ने 1772 में जिला मजिस्ट्रेट पद का सृजन किया था. जिला मजिस्ट्रेट का मुख्य कार्य सामान्य प्रशासन का निरीक्षण करना, भूमि राजस्व वसूलना और जिले में कानून-व्यवस्था को बनाए रखना. वह राजस्व संगठनों का प्रमुख होता था. वह भूमि के पंजीकरण, जोते गाए खेतों के विभाजन ,विवादों के निपटारे, दिवालिया, जागीरों के प्रबंधन, कृषकों को ऋण देने और सूखा राहत के लिए भी जिम्मेदार था. जिले के अन्य सभी पदाधिकारी उसके अधीनस्थ होते थे और अपने-अपने विभागों की प्रत्येक गतिविधि की जानकारी उसे उपलब्ध कराते थे. जिला मजिस्ट्रेट के कार्य भी इनको सौंपे जाते थे. जिला मजिस्ट्रेट होने के नाते वह पुलिस और जिले के अधीनस्थ न्यायालयों का निरीक्षण भी करता था.
मजिस्ट्रेट कितने प्रकार के होते हैं?
Who is a Magistrate in India
Source: www.indiaeducation.net.com
1. न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate): उच्च न्यायालय के परामर्श के बाद, राज्य सरकार प्रत्येक जिले में प्रथम और दूसरी श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की संख्या को सूचित कर सकती है. न्यायिक मजिस्ट्रेट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होता है और सत्र न्यायाधीश द्वारा शासित किया जाता है. क्या आप जानते हैं कि प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को अधिकतम 3 साल के लिए कारावास की सजा उत्तीर्ण करने या 5000 रुपये तक जुर्माना देने की अनुमति होती है या फिर दोनों. द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को निम्नतम स्तर की अदालत के रूप में जाना जाता है और अधिकतम 1 वर्ष या 3000 जुर्माना या दोनों की सजा देने का अधिकार होता है.
2. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Chief Judicial Magistrate): एक प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट को हर जिले में उच्च न्यायालय द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाता है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सत्र न्यायाधीश द्वारा अधीनस्थ और नियंत्रित होता है. उनके पास कारावास की सजा या जुर्माना लगाने की शक्ति सात साल से अधिक नहीं होती है.
3. मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (Metropolitan Magistrate): हम आप को बता दें कि दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को महानगरीय क्षेत्रों के रूप में माना जाता है और ऐसे क्षेत्रों के लिए नियुक्त मजिस्ट्रेट को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कहा जाता है. मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सत्र न्यायाधीश को रिपोर्ट करता है और मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होता है.
4. कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate):राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार एक जिले में कार्यकारी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाता है. इन कार्यकारी मजिस्ट्रेटों में से एक को जिला मजिस्ट्रेट और एक को अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त किया जाता है.
आइये अब न्यायाधीश के बारे में अध्ययन करते हैं
न्यायाधीश का सामान्य अर्थ है जो निर्णय लेता है. यानी न्यायाधीश एक ऐसा व्यक्ति है जो अदालत की कार्यवाही का पालन करता है, या तो अकेले, या फिर न्यायाधीशों के पैनल के साथ. कानून में, एक न्यायाधीश को न्यायिक अधिकारी के रूप में वर्णित किया गया है जो अदालत की कार्यवाही का प्रबंधन करता है और मामले के विभिन्न तथ्यों और विवरणों पर विचार करके कानूनी मामलों पर सुनवाई और निर्णय लेने के लिए चुना जाता है.

अधिकार क्षेत्र के आधार पर, न्यायाधीशों की शक्ति, कार्य और नियुक्ति विधि अलग-अलग होती है.क्या आप जानते हैं कि न्यायाधीश चुनाव पक्षों के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका भी निभाता है और अभियोजन पक्ष, रक्षा वकीलों और अन्य मामलों के तर्कों द्वारा प्रस्तुत गवाहों, तथ्यों और साक्ष्य को ध्यान में रखकर निर्णय सुनाता है.
भारत के राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं और राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के गवर्नर के साथ चर्चा के बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं.
राज्य के उच्च न्यायालय के परामर्श के बाद राज्यपाल द्वारा जिला न्यायाधीशों को नियुक्त की जाती है. प्रत्येक सत्र विभाग के लिए उच्च न्यायालय द्वारा सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है और कानूनी  आधार पर उनको मौत की सजा सुनाने की भी शक्ति दी गई है.
अब मजिस्ट्रेट और न्यायाधीश के बीच क्या अंतर होता है के बारे में अध्ययन करते हैं:
- एक न्यायाधीश को मध्यस्थ व्यक्ति के रूप में वर्णित किया जा सकता है, यानी वह व्यक्ति जो अदालत में किसी मामले पर फैसला देता है. इसके विपरीत, मजिस्ट्रेट एक क्षेत्रीय न्यायिक अधिकारी होता है जिसे किसी विशेष क्षेत्र या क्षेत्र में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित राज्य की उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा निर्वाचित किया जाता है.
- एक मजिस्ट्रेट छोटे और मामूली मामलों पर फैसले देता है. दरअसल, मजिस्ट्रेट आपराधिक मामलों में प्रारंभिक फैसले देता है. इसके विपरीत, न्यायाधीश गंभीर और जटिल मामलों में फैसले सुनाता है, जिसमें कानून और व्यक्तिगत निर्णय की क्षमता का ज्ञान होना अत्यधिक आवश्यक है.
- एक न्यायाधीश के मुकाबले मजिस्ट्रेट के पास सीमित अधिकार क्षेत्र होते है.
- न्यायिक मजिस्ट्रेट और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किए जाते हैं जबकि राज्यपाल जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त करता है. इसके विपरीत, राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को नियुक्त करते हैं जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को भारत के मुख्य न्यायाधीश और विशेष राज्य के गवर्नर के परामर्श से राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है.
- एक न्यायाधीश के विपरीत, एक मजिस्ट्रेट में केवल सीमित कानून प्रवर्तन और प्रशासनिक शक्तियां होती हैं.
- न्यायाधीश हमेशा एक कानून की डिग्री के साथ एक अधिकारी होता है. लेकिन मजिस्ट्रेट को हर देश में एक कानून की डिग्री की आवश्यकता नहीं है. यानी मजिस्ट्रेट के पास कानूनी डिग्री हो भी सकती है और नहीं भी लेकिन न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए कानूनी डिग्री का होना अनिवार्य है, साथ ही साथ किसी अदालत में वकालत की प्रैक्टिस भी जरुरी है.
- मजिस्ट्रेट के पास जुर्माना और एक विशेष अवधि के लिए कारावास की सजा देने की शक्ति है. लेकिन न्यायाधीशों को अजीवन कारावास और यहां तक कि गंभीर अपराधों में मौत की सजा को पारित करने का भी अधिकार होता है.
तो अब आप समझ गए होंगे कि न्यायाधीश अदालत में एक निश्चित मामले पर निर्णय दे सकता है. अर्थात सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा किया गया फैसला अंतिम होता है और इसके लिए कोई अपील नहीं की जा सकती है. दूसरी तरफ मजिस्ट्रेट एक प्रबंधक की तरह होता है जो विशेष क्षेत्र के कानून और व्यवस्था की देखभाल करता है.

Source: www.livemint.com

बुधवार, 8 अगस्त 2018

"सड़क अब सड़क पर नहीं, फैक्टरी में बनेंगी - नितिन गडकरी"

केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि सड़क बनाने के तौर-तरीकों में बुनियादी बदलाव पर विचार किया जा रहा है और सड़क अब सड़क पर नहीं, बल्कि फैक्टरी में बनेंगी....

ऐसे में सड़क को फैक्टरी में बनाया जाएगा और फिर मौके पर उसे एसेंबल कर दिया जाएगा. फैक्टरी में प्री कास्ट फ्रेम बनाने की तैयारी चल रही है. इससे सड़कों को एसेंबल करना बहुत आसान हो जाएगा. इससे सड़क बनाने की रफ्तार भी बहुत बढ़ जाएगी. इसके लिए उन्होंने एक मलेशियाई कंपनी से 100 किलोमीटर सड़क परियोजना को प्रायोगिक तौर पर बनाने के लिए कहा है....

उन्होंने बताया कि स्टील फाइबर के इस्तेमाल से निर्माण की लागत घट सकती है. इस समय सरकार हर दिन 28 किलोमीटर सड़क बना रही है, जो कांग्रेस सरकार के मुकाबले बहुत अधिक है. उन्होंने कहा कि आज करीब 6-7 हजार किलोमीटर सड़क बनाने का काम सिर्फ जमीन अधिग्रहण न हो पाने के चलते रुका हुआ है. उन्होंने कहा कि इस समय हमने जमीन अधिग्रहण की कई बाधाएं दूर की हैं और प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया जा चुका है. इसके साथ ही अब मंत्रालय जमीन अधिग्रहण किए बिना किसी परियोजना का ठेका नहीं देता है. उन्होंने विश्वास जताया कि अगले साल तक सड़क निर्माण का काम प्रतिदिन 40 किलोमीटर तक हो जाएगा....

उन्होंने बताया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज किया गया है, निर्णाम की लागत घटी है और साथ ही उसकी गुणवत्ता भी बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि दिल्ली और मुंबई को जोड़ने वाला नया हाईवे मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के पिछड़े इलाकों से गुजरेगा. इससे इन इलाकों के लिए संभावनाएं बढ़ेंगी. इस नई हाईवे से दिल्ली और मुंबई की दूरी भी करीब 120 किलोमीटर घट जाएगी..... 

उन्होंने कहा कि आज एनएचएआई या सड़क क्षेत्र को लेकर लोगों का भरोसा बहुत बढ़ गया है और ऐसा उनके अच्छे कामों के चलते है. आज यहां भ्रष्टाचार नहीं है. उन्होंने कहा कि सड़क बनाने में 10 प्रतिशत तक प्लास्टिक या रबड़ वेस्ट का इस्तेमाल किया जाएगा. जल्द ही इसके लिए पर्यावरण मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श करके नेटिफिकेशन जारी किया जाएगा....

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

आ रहा है Jio GigaFiber, 15 अगस्त से शुरू होगी बुकिंग, यहां जानिए कैसे होगा रजिस्ट्रेशन


नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी की 41वीं एजीएम में कुछ महत्वपूर्ण ऐलान किए थे. इनमें जियो फोन-2 के अलावा जियो GigaFiber ब्रॉडबैंड सेवा का भी ऐलान किया गया था. अब इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होने वाला है. जियो GigaFiber के लिए 15 अगस्त से रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा. जियो GigaFiber के जरिए कंपनी ब्रॉडबैंड सेवा में भी कदम रखने वाली है. खास बात यह है कि जियो GigaFiber के साथ DTH कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा. इसमें यूजर्स को स्मार्ट होम की सुविधा मिलेगी. रजिस्ट्रेशन शुरू होने से पहले एक बार जरूर जान लीजिए कि आपको इसमें क्या-क्या मिलेगा और कैसे बुक करना होगा.

TV से कर सकेंगे HD वीडियो कॉल
रिलायंस जियो GigaFiber की खास बात यह है कि इसे लेने वाले यूजर्स को राउटर के साथ सेट-टॉप बॉक्स भी मिलेगा. इस सेट-टॉप बॉक्स से यूजर्स जियो GigaTV का भी लाभ ले सकेंगे. GigaFiber सेट-टॉप बॉक्स के जरिए स्मार्ट टीवी से देशभर में HD वीडियो कॉल्स भी की जा सकेंगी. इस सेवा की शुरुआत देश के 1100 शहरों में एक साथ होगी.

कैसे मिलेगा GigaFiber राउटर

माय जियो ऐप या फिर जियो की ऑफिशियल वेबसाइट से जियो GigaFiber को बुक कर सकते हैं. 15 अगस्त से इसके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू होगा. सबसे ज्यादा जिस शहर से यूजर्स रजिस्टर्ड होंगे, वहीं से जियो GigaFiber की शुरुआत की जाएगी. सर्विस एक्टिवेट होने के बाद जियो सर्विस इंजीनियर घर आकर कनेक्शन को इंस्टॉल करेंगे. 


ये होंगे जियो GigaFiber के प्लान
जियो GigaFiber के प्लान्स की बात करें तो इसमें शुरुआती प्लान 500 रुपए से लेकर अधिकतम 1500 रुपए का प्लान होगा.



हाई स्पीड ब्रॉडबैंड सर्विस
जियो Jio GigaTV में सेट-टॉप बॉक्स से हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड सर्विस दी जाएगी. जियो GigaTV में कई फीचर्स को जोड़ा गया है. इसमें वॉयस कॉल से लेकर टीवी रिमोट के जरिए जियो ऐप का एक्सेस शामिल है. Jio GigaTV के जरिए आप किसी भी Jio GigaTV पर वीडियो कॉल कर सकेंगे. हाई क्वालिटी की वीडियो कॉल के लिए गीगा फाइबर के जरिए एमबीपीएस की जगह जीबीपीएस की स्पीड मिलेगी.

शुरू होगा प्राइस वॉर
रिलायंस जियो ने टेलिकॉम सेक्टर में कदम रखते ही डाटा और कॉल्स की दरों में अन्य कंपनियों के सामने चुनौती पेश की, ठीक उसी तरह से ब्रॉडबैंड सेवा में भी प्राइस वॉर शुरू होने वाला है. मुकेश अंबानी ने इसके लिए संकेत देते हुए कहा कि Jio GigaFiber ब्रॉडबैंड प्लान अन्य टेलिकॉम कंपनियों के प्लान्स से सस्ता होगा. जियो के ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने से सबसे ज्यादा नुकसान एयरटेल को उठाना पड़ सकता है. एयरटेल फिलहाल टेलिकॉम के अलावा, डीटीएच और ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करती है. रिलायंस जियो ने भी अब इन क्षेत्रों में कदम रख दिया है, जिसका फायदा यूजर्स को होने की उम्मीद है.



अमीर सांसदों से वेतन छोड़ने की बात करने वाले वरुण गांधी ने 9 वर्षों से नहीं ली सैलरी


नई दिल्ली : भारतीय राजनीति में ऐसी मिसाल कम ही देखने को मिलती हैं, जिनमें नेता जो कहें, उन पर खुद भी अमल करें. लेकिन एक नेता ने अपने कहे पर अमल करके राजनीति में नई मिसाल कायम की है. बीजेपी सांसद वरुण गांधी अमीर सांसदों द्वारा अपना वेतन छोड़ने की मांग करते रहे हैं. ऐसा नहीं है कि वे केवल दूसरे सांसदों को वेतन नहीं लेने की सलाह देते हैं बल्कि वे खुद भी वेतन नहीं ले रहे हैं. वरुण गांधी ने पिछले 9 साल से सांसद के रूप में मिलने वाले वेतन को गरीब और जरूरतमंदों में बांट रहे हैं. वेतन का एक पैसा भी वह अपने लिए इस्तेमाल नहीं करते हैं. 

वरुण गांधी सुल्तानपुर से सांसद हैं. वे अक्सर संसद सत्रों में जनहित के मुद्दों पर बहस नहीं होने और सांसदों के वेतन व भत्ते में होने वाले इजाफे पर चिंता जाहिर करते रहते हैं. उन्होंने इस साल के शुरू में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से अपील की थी कि आर्थिक रूप से सम्पन्न सांसदों द्वारा 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल में अपना वेतन छोड़ने के लिए आंदोलन शुरू करें. लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में वरुण गांधी ने कहा था कि भारत में असमानता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. भारत में एक प्रतिशत अमीर लोग देश की कुल संपदा के 60 प्रतिशत के मालिक हैं. भारत में 84 अरबपतियों के पास देश की 70 प्रतिशत संपदा है. यह खाई हमारे लोकतंत्र के लिए हानिकारक है. 

उन्होंने पत्र में लिखा था, ‘स्पीकर महोदया से मेरा निवेदन है कि आर्थिक रूप से सम्पन्न सांसदों द्वारा 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल में अपना वेतन छोड़ने के लिए आंदोलन शुरू करें. ऐसी स्वैच्छिक पहल से हम निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता को लेकर देशभर में एक सकारात्मक संदेश जाएगा.’

अभी हाल ही में उन्होंने एक ऐसे ही जरूरतमंद रामजी गुप्ता को ढाई लाख रुपये की आर्थिक मदद की थी. रामजी गुप्ता को कैंसर से जूझ रहे अपने पिता के इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी और उन्होंने इसके लिए वरुण गांधी से आर्थिक मदद की अपील की. वरुण गांधी ने रामजी गुप्ता की जरूरत को देखते हुए उन्होंने तत्काल ढाई लाख रुपये की मदद महैया कराई. 

इससे पहले वरुण गांधी ने सुल्तापुर के एक किसान को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मुहैया कराई थी. जानकारी के मुताबिक, बीजेपी सांसद 13 जिलों के जरूरतमंद किसानों को मदद पहुंचा चुके हैं. सुल्तानपुर में वह दो दर्जन गरीब लोगों का घर भी अपने पैसों से बनवा चुके हैं. 

इस मदद के पीछे वरुण गांधी तर्क देते हैं कि वह राजनीति में पैसा कमाने के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए आए हैं. उन्होंने कहा कि राजनीति के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद की जा सकती है. 

बुधवार, 1 अगस्त 2018

भामाशाह स्वास्थ्य नि:शुल्क बीमा योजना

योजना के बारे में

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का आरम्भ 13 दिसंबर 2015 से किया गया। योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ चुनिंदा निजी (प्राइवेट) अस्पतालों में भी ये सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। राज्य के लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को कम करना इस योजना का उद्देश्य है।

योजना के लिए पात्रता

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल परिवार इस योजना में पात्र हैं।

योजना का फायदा

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में प्रत्येक पात्र परिवार को प्रतिवर्ष सामान्य बीमारियों के लिए 30 हज़ार तथा गम्भीर बीमारियों के लिए 3 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध करवाया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती के दौरान हुए खर्च के अलावा भर्ती से 7 दिन पहले से 15 दिन बाद तक का खर्च शामिल किया जाता है।
इस योजना में 1401 बीमारियों को शामिल किया गया है। इनके अतिरिक्त नेफ्रोलॉजी, गेस्ट्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी तथा साइकियाट्री सहित 300 से अधिक स्पेशियलिटी उपचार के नए पैकेज भी जोड़े जाएंगे।
इससे पहले चल रही योजनाओं में केवल दवाइयां और जांच ही कैशलेस मिलती थीं, लेकिन अब भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में जांच, इलाज, डॉक्टर की फीस, ऑपरेशन आदि सब शामिल किये गए हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा ओ.पी.डी. व कैशलेस दवाओं के वितरण की व्यवस्था भी पहले से ज़्यादा बड़े स्तर पर की गई है।
राजस्थान की यह स्वास्थ्य बीमा योजना देश के अन्य राज्यों की इस तरह की योजनाओं से कहीं बेहतर है। इसमें बीमारियों और जांचों की संख्या भी और राज्यों से ज़्यादा है और निश्चित राशि भी। आज यह योजना पूरे प्रदेश के लाखों परिवारों के लिए जीवनदायी साबित हो रही है।

योजना का लाभ लेना है आसान

अस्पताल में भर्ती के समय वहां उपस्थित ‘स्वास्थ्य मार्गदर्शक’ मरीज़ और परिजनों की मदद करते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी को अपना भामाशाह कार्ड अस्पताल प्रशासन को देना होता है। उसके बाद की सारी प्रक्रिया की जि़म्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होती है।

योजना का क्रियान्वयन

योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल ऐप द्वारा मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। न्यू इंडिया इन्शोरेंस कम्पनी से इसका अनुबन्ध किया गया है।