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मंगलवार, 26 मार्च 2019

RTE एडमिशन : आज निकलेगी ओनलाईन लोटरी

RTE: 31 हजार निजी स्कूलों के लिए मिले 18.91 लाख आवेदन


वेब पोर्टल एवं ऐप के माध्यम से लिए आवेदनों के बाद अब लॉटरी के माध्यम से उपलब्ध सीटों पर प्रवेश देने की कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ) के तहत शिक्षा सत्र 2019-20 में निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। प्रदेश के 31 हजार स्कूलों में 19 लाख बच्चों ने नि:शुल्क शिक्षा के लिए आवेदन किए हैं।


पिछले साल से 10 फीसदी बढ़े

वेब पोर्टल एवं ऐप के माध्यम से लिए आवेदनों के बाद अब लॉटरी के माध्यम से उपलब्ध सीटों पर प्रवेश देने की कार्रवाई की जाएगी। आरटीइ के तहत इस साल पिछले साल के मुकाबले आवेदनों में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश के प्राथमिक व माध्यमिक निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन करने वालों में से 18 लाख 91 हजार 867 को पात्र माना हैं। जबकि 182 विद्यार्थी अपात्र माने गए है।


इस साल आरटीइ के तहत प्रवेश के लिए 31 हजार 101 विद्यालयों में आवेदन किए गए है। इनमें प्रारंभिक शिक्षा के 19 हजार 662 व माध्यमिक शिक्षा के 11 हजार 439 विद्यालय हैं। हालांकि आरटीइ के तहत प्रवेश के लिए प्रारम्भिक व माध्यमिक के 33 हजार 951 विद्यालय पात्र घोषित किए गए थे। शेष 2850 में प्रवेश के लिए कोई भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।


अंतिम तिथि बढ़ाने पर मिले और आवेदन 

सरकार ने 14 मार्च आवेदन करने की अंतिम तिथि रखी थी। बाद में 14 मार्च को इसे बढ़ाकर 23 मार्च कर दिया। ऐसे में अतिरिक्त मिले 9 दिन में साढ़े लाख विद्यार्थियों ने और आवेदन कर दिए।


लॉटरी 27 मार्च को निकलेगी

27 मार्च को सुबह 11.30 बजे आरटीई प्रवेश के विद्यार्थियों की लॉटरी निकलेगी। जिसमें विद्यार्थियों के वरीयतानुसार स्कूलें आवंटित की जाएगी। इसके बाद 31 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया जारी रहेगी।

- डॉ. मूलचंद बोहरा, उपनिदेशक, आरटीई, प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर



शुक्रवार, 22 मार्च 2019

राजस्थान : BJP लोकसभा चुनाव 16 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम पर लगी मुहर

#Rajasthan

भाजपा के उम्मीदवारों की सूची

●- जोधपुर - गजेन्द्रसिंह शेखावत

●- गंगानगर - निहालचंद

●- बीकानेर - अर्जुनराम मेघवाल

●- झुंझुनू - नरेंद्र खीचड़

●- सीकर - सुमेधानंद सरस्वती

●- जयपुर ग्रामीण - कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़

●- जयपुर - रामचरण बोहरा

●- टोंक सवाई माधोपुर - खुशवीरसिंह जौनपुरिया

●- अजमेर - भागीरथ चौधरी

●- पाली - पीपी चौधरी

●- जालौर - देव जी पटेल

●- उदयपुर - अर्जुनलाल मीणा

●- चित्तौड़गढ़ - सीपी जोशी

●- भीलवाड़ा - सुभाष चंद्र बहेरिया

●- कोटा - ओम बिरला

●- झालावाड़ बारां- दुष्यंत सिंह


पहली सूची में 16 उम्मीदवार घोषित

बुधवार, 20 मार्च 2019

बाड़मेर के ईलोजी की कहानी || होली के अद्भुत देवता ईलोजी

#Barmer

जानिए बाडमेर की होली की ऐतिहासिक यात्रा अब तक,और बाड़मेर के ईलोजी की कहानी

होली के अद्भुत देवता ईलोजी।


बाड़मेर होली का त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास, उमंग, विशेष उत्साह एवं उछड़कूद के साथ देश के कौने-कौने में मनाया जाता है। चारों ओर रंग-बिरंगी पिचकारियों की बौछारे बरसती नजर आती है। अनेकों रंगों, गुलाल एवं अबीर होली के आकर्षण बने रहते हैं। विशाल देश जिसमें अनकों धर्म, जाति, सम्प्रदाय के लोग निवास करते है लेकिन होली के इस रंगीन त्यौहार को सभी मिल जुलकर मनाते है। राष्ट्रीय एकता, आत्मीयता, बन्धुत्व की भावना इस त्यौहार में दिखार्इ देती है। यह त्यौहार देश के विभिन्न स्थानों पर विभिन्न तौर तरीकों के साथ मनाया जाता है। कहीं लठ मार होली चलती है, तो कहीं रंग गुलाल उड़ते है। कहीं भाभी देवरों के बीच होली है तो कहीं बेत की मार देखने को मिलती है। कहीं कीचड़ एवं धूल भरी होली खेली जाती है तो कहीं पत्थरों की बौछारे भी होती है। विभिन्न प्रकार की होली खेलने पर भी अनेकों रंग इस त्यौहार में रंगीनी ले ही आते है। राग फाग, संग का साथ, नृत्यों की थरकन, मस्ती की मल्हार, गधों की सवारी, जिन्दों का जनाजा इस त्यौहार के अलबेले आकर्षण होते है।


होली के इस त्यौहार पर अदभूत देवता र्इलोजी का पूजन राजस्थान प्रदेश के अनेकों स्थानों पर बड़े ही चाव से किया जाता है। र्इलोजी होली के देवता है जिसे फागण देवता से भी राजस्थान में सम्बोधित किया जाता है। जो शहरों एवं कस्बों के मध्य भाग में, आम चौराहों पर और जहां जनमानस का अधिकाधिक आवागमन होता है वहां इसकी स्थापना की जाती है। यह र्इलोजी एक विशाल बैठी हुर्इ प्रतिमा होती है। कहीं पर भी र्इलोजी की खड़ी अथवा सोर्इ हुर्इ प्रतिमा का निर्माण देखने को नहीं मिला है। यह पाषाणों, र्इटों आदि की चुनार्इ से इसका निर्माण किया जाता है। जिस पर प्लास्टर कर इसे मनुष्य की आकृति में बदल दिया जाता है। सिर पर सुन्दर पाग-साफा, कानों में कुण्डल, गले में हार, गोल मटोल चेहरा, चमकती हुर्इ विशाल आंखें, हाथों की भुजाओं पर बाजुबन्द, कलार्इयों में कंगन, भारी भरकम शरीर, फैला हुआ पेट, विशाल पैरों के घुटनों को आगे किये हुए यह र्इलोजी होते है। लिंग का स्थान विशेष तौर से बनाया जाता है। इनके शरीर पर विभिन्न रंगों की रंगीनी की जाती है। जो प्रतिमा की सुन्दरता में चार चांद जड़ देते है। होली के दिन इस प्रतिमा को सुन्दर वस्त्रों से भी सुशोभित किया जाता है और कहीं-कहीं पर वस्त्रों के स्थान पर रंग ही प्रतिमा पर पोत दिये जाते है जिससे प्रतिमा अति आकर्षक दिखार्इ देती है। सिर पर बनी पाग में दुल्हों की भांति कलंगी, तुरे, मोर आदि लगाये जाते है और गले में हार पहनाया जाता है। हाथों में नारियल थमा देते है। 


कौन थे ईलोजी


यह र्इलोजी कौन थे, इनका पूजन क्यों किया जाता है, इनको इतना सजाया और संवारा क्यों जाता है यह विचारणीय प्रश्न सामने खड़ा होना स्वाभाविक है। बड़े बजुर्गो के कथनासुार र्इलोजी नासितक राजा हिरण्यकश्यप के होने वाले बहनोर्इ थे। जो इसकी बहन होलिका से शादी करने के लिये दुल्हे की वेशभूषा में बनठनकर विशाल बरात लेकर आये थे। लेकिन निर्दयी राजा हिरण्यकश्यप प्रहलाद को जिन्दा जलाने के लिये अगिन से न जलने का वरदान प्राप्त अपनी बहन होलिका की गोद में उसे धधकती चित्ता में बिठा दिया। अगिन की धूं-धूं में होलिका जलकर राख हो गर्इ और प्रहलाद सकुशल बच गया। आसितक प्रहलाद ने नासितक राजा हिरण्यकश्यप पर विजय अवश्य ही प्राप्त की लेकिन र्इलोजी ने अपने होने वाली वधु को सदा-सदा के लिये खो दिया। इस गम में इन्होंने जली हुर्इ होलिका की राख को अपने शरीर पर मलकर अपनी इच्छा को पूर्ण किया और आजीवन अखण्ड कुंवारे रह गये। इसी कारण होली का दूसरा दिन धूलेली अर्थत धूलभरी होली के रूप में मनाया जाता है। इसी प्रकार दंतकथाओं के अनुसार ये शहर एवं कस्बों के रक्षक देवता के रूप में इनकी स्थापना की जाती है । 

कहा जाता है कि ये क्षेत्रपाल, भैरू का रूप है। जो कि अक्सर बांझ महिलाओं को पुत्र दिया करते है। इस सम्बन्ध में अनेकों कथाऐं विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित हैं। कहा जाता है कि एक सेठ के कार्इ पुत्र नहीं हुआ। र्इलोजी की होली के दिन लिंग पूजा की गर्इ और उसे पुत्र की प्रापित हुर्इ। याचना के अनुसार उसे जीवित पाडे-भैसे की बलि देनी थी लेकिन सेठ ने हत्या न करके भैसे को र्इलोजी-क्षेत्रपाल-भैरू की प्रतिमा के बांध कर चला गया। कुछ समय पश्चात भैसा रस्सी समेत प्रतिमा को उखाड़ कर घसीटता हुआ भागने लगा। रास्ते में एक देवी ने र्इलोजी की यह दशा देखी तो वह खिलखिलाकर हंसने लगी और मजाक करने लगी। तब र्इलोजी ने आवेश में आकर कहा कि तू तो मठ में बैठी मटका करे है सेठ ने बेटा कोनी दिया। मैं दिया जको म्हारो हाल देख। उसी दिन से र्इलोजी मजाक का प्रतीक बन बैठा। आज भी र्इलोजी को होली के कुछ दिन पूर्व में ही हर्षोल्लास के साथ सजाया संवारा जाता है। अनेकों राग फाग इनके जीवन पर गार्इ जाती है । जिसमें र्इलोजी रो विया आयो लगनिया कुण लिखसी रे आदि राग फाग के तौर पर अपने सगे सम्बनिधयों, मित्रों, हमझोलियों की मजाक को जोड़कर गाते है। होलिका के जलने के कारण र्इलोजी डोकरो गले रे बांध्यों टोकरों। इन्हीं र्इलोजी की होली के दिन खूब पूजा की जाती है। 

कहा जाता है कि र्इलोजी का एक ही चमत्कार प्रसिद्ध है कि यह बांझ स्त्रियों को पुत्र देते है जिसके कारण इनके लिंग की पूजा की जाती है। होली के दिन र्इलोजी की पूजा हेतु नारियल चढाये जाते है। अगरबत्तियों का धूप किया जाता है। लिंग पर कुंकुम के छींटे दिये जाते है और उन पर पुष्प बरसाये जाते है। लेकिन आजकल युवा वर्ग द्वारा भददी गालियों में राग फाग गाने के कारण महिलाओं द्वारा र्इलोजी का पूजन कम होने लगा है। कहीं-कहीं अंध श्रद्धालू महिलाएं इन भददी हरकतों के बीच भी र्इलोजी का पूजन करती है। मजाक का मजमा होली के दूसरे दिन नता खोकर राग फाग में अश्लील, भददी एवं बेहुदी मजाकों की समा बांध देते हैं। र्इलोजी की प्रतिमा के पास जमा रहता है। यदि वृद्धावस्था में किसी की पत्नी मर जाय और दूसरी पत्नी मिलनी दुर्लभ हो जाय, किसी लम्बी उम्र में शादी न हो और न होने की पूर्ण सम्भावना हो तो मजाक में कहते है कि र्इलोजी रो लिंग पूज नहीं तो इणोरी तरह कंवारो रह जासी। गन्दे गीत, गाली गलौच भरी फाग राग र्इलोजी के जीवन को अंकित करते हुए गार्इ जाती है। जिसमें संभोग की विभिन्न क्रियाओं का चित्रण बेहुदी तरीके से किया जाता है  र्इलोजी के पास चंग बजाने वालों की अपार भीड़ रहती है जो शादी के समय साज की प्रतीक दिखार्इ देते है । रंगों की बौछार इनकी शादी की खुशी का वातावरण बताती है। इनकी सजावट दुल्हे की याद दिलाती है और होलिका की याद में चिर समाधि इसकी चित्ता के पास लगाकर आजीवन कंवारा रहने की स्मृति ताजा करती है। अज्ञान, अंधविश्वासी बांझ सित्रयां पुत्र प्रापित हेतु इनकी पूजा करती है वहीं युवा वर्ग ऐसे समय में अपनी शालीनता खोकर राग फाग में अश्लील, भददी एवं बेहुदी मजाकों की समा बांध देते हैं। 

कुछ भी हो र्इलोजी वास्तव में र्इलोजी है । जिनकी स्मृति होली के दिन स्वत: ही हो आती है। यह मजाकिया दिलवालों के राजा है वहां अपनी शक्ल-सूरत से राह चलने वालों को स्वत: ही अपनी ओर आकर्षित किये बिना नहीं रहते। जिन पर प्रतिवर्ष इनकी साज-सजावट के लिये हजारों रूपया व्यय किया जाता है। इनकी प्रतिमाएं चौराहों पर, अनेकों मार्ग निकलने वालों स्थानों पर, मूल बाजार में बनी हुर्इ होती हैं । अक्सर मूत्र्तियां खुली रहती है। कहीं-कहीं इनकी सुरक्षा हेतु जालीदार किवाड़ बना दिये जाते है। लिंग केवल वर्ष भर में होली के दिन ही लगाया जाता है। जहां इनकी विशाल प्रतिमा बिठार्इ जाती है उसके आसपास में यदि कोर्इ बाजार है तो उसका नामकरण र्इलोजी के नाम पर होगा। ऐसे र्इलोजी मार्केट, र्इलोजी चौराहा, र्इलोजी मार्ग, र्इलोजी चौक राजस्थान के अनेकों शहरों एवं कस्बों में है। ऐसे होली के अदभूत देवता र्इलोजी राजस्थान प्रदेश के अनेकों नगरों एवं कस्बों में स्थापित है जहां इनका होली एवं धुलेली के दिन बड़ा महत्व समझा जाता है। बाड़मेर की पत्थर मार होली भारतवर्ष धार्मिक तीज त्यौहारों के लिये जगत विख्यात है। अनेकों धर्म, सम्प्रदायों के नाना प्रकार के त्यौहार इस देश की पुण्य भूमि में मनाये जाते हैं। त्यौहारों की पंकित में होली एक अनोखा त्यौहार है, जो सभी धर्म और सम्प्रदाय के लोग अवश्य मनाते है लेकिन मनाने के तरीके अवश्य ही भिन्न-भिन्न है। 

विशाल देश में होली का त्यौहार कहीं रंग के बौछारों के बीच मनाया जाता है तो कहीं लठ मारकर होली का आनन्द लूटा जाता है। कहीं पर भाभीदेवरों के बीच रंग के साथ होली खेली जाती है तो कहीं पर चंग साज के साथ नाचकूदकर होली का उल्लास प्रकट किया जाता है। होली एक होते हुए भी इसके रूप अनेक बने हुए है। राजस्थान के पशिचमी सीमावत्र्ती बाड़मेर नगर में होली का त्यौहार पत्थरों की लड़ार्इ के बीच मनाया जाता था, जो आजकल रंग की बौछारों, गुलाल की उड़ान के रूप में बदल गया है। होली का यह रंगीला त्यौहार 80-90 वर्ष पूर्व बाड़मेर नगर में पत्थरों की लड़ार्इ से मनाया जाता था। आपसी वैमनस्य, वैरभाव, दुश्मनी को दूर रखते हुए होली का त्यौहार परस्पर पत्थरों की मार के बीच हर्षोल्लास एवं स्नेह के साथ खेला जाता था। इस त्यौहार को खेलने के लिये एक पखवाड़ा पहले तैयारियां आरम्भ हो जाती थी। दो दलों, दो मौहल्लों के बीच यह मोहब्बत की पत्थर मार होली खेली जाती थी। दोनों दलों के लोग अपने मकानों, दुकानों, धार्मिक प्रतिष्ठानों, मनिदरों आदि ऊंची-ऊंची छतों पर पहले से ही पत्थरों के ठेर एकत्रित करके रखते थे और इन पत्थरों की मार से बचने के लिये युद्ध मैदानों में जिस ढ़ाल का उपयोग करते थे उसकी सार सम्भाल की जाती थी । लेकिन यह पत्थर मार होली, होली दहन के दूसरे दिन धूलेड़ी के दिन खूब तबियत के साथ खेली जाती थी। होली दहन के दिन दोनों दलों, दोनों मौहल्लों के बीच अपार स्नेह मिलन होता था और एक-दूसरे को पराजित करने की शर्त लगाते थे। इस दिन चंग के साथ सामूहिक रूप से खूब नाचते एवं गाते भी थे और जैसे ही दूसरे दिन का प्रभात हुआ कि आकाश में पत्थरों की बौछारे चलनी आरम्भ हो जाती थी। मकान, दुकान, धर्मशालाएं, मनिदरों की छतों पर बाड़मेर की गोलाकार रंग-बिरंगी पगड़ी बांधे धोती-तेवटा पहने, कमर कसे, ढ़ाल लिये लोगों की झलकियां देखने को मिलती थी। दो दलों के बीच दोनों ओर से हवा को चीरते हुए पत्थर चलते थे। घरों में भूल से बाहर रखे बर्तन इन पत्थरों के निशान बनकर चकना चूर हो जाते थे । छोटे बालक-बालिकाएं एवं गृहणियां इस लड़ार्इ के दौरान बाहर नहीं निकलती थी। पत्थरों की विचित्र लड़ार्इ के बीच किसी को सिर, हाथ-पांव, आंख आदि पर चोटे लगती थी। लेकिन वे तनिक भी इसकी परवाह किये बिना सामने वाले दल पर पत्थरों की बौछारे करने में अति व्यस्त रहते थे। इस स्नेह पत्थर लड़ार्इ के बीच कर्इ लोग काने बन गये और कर्इयों के सिर भी फूट गये लेकिन इनकी प्रेम की पत्थर मार होली चलती रहती। यदि इस बीच पत्थरों का संग्रह खत्म होता था तो अपनी छतों से कूदकर पुन: पत्थर एकत्रित करने पड़ते थे। इस बीच दूसरे दल वाला मौका पाकर उसे धर दबोचता और लाठियों से पिटार्इ करता। यदि वह अपनी हार स्वीकार करता तो उसे छोड़ दिया जाता। इस हार को स्वीकार न करने वाले कर्इ लोगों ने छत से कूदने पर अपने पैर तुड़वा लिये और जीवन भर लंगड़े बने रहे । लेकिन होली का हार नहीं मानते थे। पत्थरों की यह विचित्र पत्थर मार होली धूलेड़ी के दोपहर तक चलती। उसके पश्चात दोनों दलों के लोग उसी सस्नेह, उल्लास एवं आनन्द के एक-दूसरे से मिलते। घायल मित्रों की मरहम पटटी करने के साथ-साथ सामूहिक रूप से मिष्ठान खाकर खूब गले मिलते थे। यही पत्थरों की होली धीरे-धीरे धूल एवं कीचड़ उछालकर मनार्इ जाने लगी। जो आज भी कहीं-कहीं नगर में देखी जाती है । यह भी विचित्र रूप लिये रहती है। राहगीरों पर खूब दिन खोलकर धूल बरसाने का आनन्द लिया जाता है और कीचड़ से उसके सारे शरीर को पोत दिया जाता है। इस अवसर पर खूब खुलकर होली की फागों में गन्दे गीतोें को गाया जाता है। पुरूषों द्वारा पत्थरों की परस्पर लड़ार्इ की होली, धूल एवं कीचड़ में बदली वहां औरतों द्वारा भी होली के कर्इ दिन पूर्व गालियों में फागे नियमित रूप से रात्रि में गाती थी । कर्इ-कर्इ स्थानों पर जो महिलाएं देर रात तक गालियों भरी फागों गाने के साथ-साथ अभद्र तरीके से नाचकर अपना उल्लास प्रकट करती थी। लेकिन आजकल महिलाओं में कुछ विशेष जाति समुदाय को छोड़कर गाली-गलोच की फागे नहीं गार्इ जाती है। होली पत्थरों की लड़ार्इ से नीचे उतरती हुर्इ शहर का सबसे गन्दे पानी संग्रहित नरगासर तालाब के कीचड़ पोतने एवं हलवार्इयों की भटिटयों की राख और गली की धूल के बीच मनार्इ जाने लगी। ज्यों-ज्यों व्यकित आधुनिक परिवेश में आया त्यों-त्यों इसमें रददोबदल होने लग गया। 

अब होली पर गन्दी गालियों के स्थान पर राष्ट्रीय गीत, विकास के बोल एवं हास्य भरी फागों की धुन छार्इ रहती है। वहां गली की धूल, भटिटयों की राख एवं नरगासर के कीचड़ के स्थान पर रंग और गुलाल ने ले लिया है। धूलेड़ी के दिन अब रंग व गुलाल का ही आमतौर पर प्रयोग किया जाता है लेकिन मजाक के तौर पर आज से शताब्दी पूर्व गधे की सवारी का उपयोग हास्य के रूप में किया जाता था आज भी जारी है । विवाह में विदार्इ के गीत, मजाक के बोल जो महिलाएं गाती है उसे पुरूष, महिलाओं के अदभूत वेष बनाकर गाते और मनोरंजन करते है। श्मशान यात्रा के दृश्य उपसिथत कर इस दिन खूब मजाक किया जाता है। धूलभरी होली, कीचड़ की गन्दी होली से लेकर अब रंग भरी सुहावनी होली में भाभी देवर के बीच बड़े ही उत्साह एवं उमंग के बीच खेली जाती रही है। रंग एवं गुलाल भरी होली से पूर्व भाभी पर देवर पानी की बौछार से तीखी मार करता तब भाभी रस्सी अथवा कपड़े से तैयार सोटे से देवर की खूब तबीयत से पिटार्इ करती है । देवर भाभी की मार एवं तीखी पानी के बौछार से छटपटा जाती तब देवरों की बन आती और जब देवर महाशय की पानी की बाल्टी लुढक जाती तब भाभी के सोटे की बौछार उसे पीडि़त करती। आजकल भाभी देवरों के बीच यह होली खूब जमकर खेली जाती है। आजकल पानी के साथ खूब गहरा रंग डालकर भाभी के बदन के हर अंग को रंग रंगने में देवर आनन्द लेते है । होली के दिन बाड़मेर नगर में एक विराट बैठी हुर्इ आदमकद र्इलोजी की प्रतिमा की रचना की जाती है। उसे खूब सजाया संवारा जाता है। इस र्इलोजी की प्रतिमा की शानदार बट वाली मूछों, दाड़ी बनाने के साथ-साथ शरीर के प्रत्येक अंग को सजाने का सुन्दर प्रयास किया जाता है। सिर पर पाग धारण करार्इ जाती है और उसमें कलंगी और तुरों को बांधा जाता है।

रविवार, 17 मार्च 2019

आरटीई : स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश आवेदन की तिथि बढ़ाई, अब इस तारीख तक कर सकेंगे आवेदन...

आरटीई के तहत नि:शुल्क प्रवेश के पाने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी ..

इस संबंध में सरकार ने नया टाइम फ्रेम जारी कर दिया...

जयपुर।

शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने अब इन स्कूलों में प्रवेश की तिथि को 7 दिन बढ़ाकर 22 मार्च तक कर दिया है। हाल ही इस संबंध में सरकार ने नया टाइम फ्रेम जारी कर दिया है। गौरतलब है कि प्रदेश में करीब 32 हजार निजी स्कूल हैं, जिनमें एंट्री लेवल की कक्षा में नि:शुल्क सीटों पर विद्यार्थियों का प्रवेश होता है। इन स्कूलों में करीब 4 लाख सीट दुर्बल व असुविधाग्रस्त बच्चों के लिए आरक्षित हैं, लेकिन अभी तक करीब 3 लाख सीटों के लिए ही आवेदन विभाग को मिले हैं, ऐसे में सरकार ने अभिभावकों को 7 दिन का समय और दिया है। अभिभावक अब 22 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।


ऑनलाइन लॉटरी द्वारा प्रवेश के लिए विद्यार्थियों का वरियता क्रम 27 मार्च को निकाला जाएगा। 4 अप्रेल को संबंधित अभिभावकों को स्कूल में रिपोर्ट करना होगा। 8 अप्रेल को पात्र विद्यार्थियों का विद्यालय में प्रवेश होगा। 31 जुलाई को शेष 75 प्रतिशत प्रतिशत सीटों पर प्रवेशित विद्यार्थियों को प्राइवेट स्कूल पोर्टल पर एंट्री करनी होगी।



शनिवार, 16 मार्च 2019

बड़ी खबर : बेरोजगारी भत्ता अभी नहीं मिलेगा

नए बेरोजगारों को अब जून में मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

महकमे की वेबसाइट बाधित, बेरोजगारों को भत्ते का इंतजार

चूरू. राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद रोजगार कार्यालय में पंजीयन करवा चुके युवाओं को मिलने वाले बेरोजगारी भत्ते की राह में वेबसाइट की तकनीकी खामी आड़े आ रही है।

इसके अलावा अब लोकसभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लगने के कारण भी नई स्वीकृति जारी नहीं हो सकती। ऐसे में एक अक्टूबर के बाद आवेदन करने वाले जिले के हजारों बेरोजगार युवाओं को बढ़ा हुआ बेरोजगारी भत्ता आगामी जून माह से पहले मिलने की संभावना नहीं है। रोजगार महकमे के अधिकारियों की मानें तो 30 सितंबर २०१८ तक आवेदन करने वाले युवाओं को नई दर से बेरोजगारी भत्ता जारी किया जा चुका है। मगर एक अक्टूबर २०१८ से आज तक मिले सभी आवेदन चयन व स्वीकृति के अभाव में पैंडिंग हैं। इनका निस्तारण लोकसभा चुनाव को लेकर लगी आचार संहिता हटने के बाद किया जा सकेगा। ऐसे में एक सितंबर २०१८ तक आवेदन करने वालों को जून में मार्च माह का भत्ता मिल सकेगा। एक अक्टूबर 2018 व उसके बाद वाले आवेदकों को नवंबर, दिसंबर व जनवरी माह का भत्ता पुरानी दर से मिलेगा। फरवरी से इन्हें नई दर से जारी किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक विधानसभा चुनाव आचार संहिता के दौरान 15 दिसंबर 2018 के बाद राज्य में आवेदन अधिक आने से वेबसाइट पर दबाव बढऩे से ये ठप हो गई। जिस पर विभाग के निदेशालय की ओर से करीब 13 लाख रुपए खर्च कर नई वेबसाइट भी बनवादी गई। अब वो भी ठप पड़ी है। ऐसे में पता नहीं चल पा रहा है कि किस जिले में प्रतिदिन कितने आवेदन हो रहे हैं। क्योंकि देर रात को वेबसाइट चलने पर ई-मित्र संचालक युवाओं के आवेदन कर देते हैं। मगर सुबह इसमें ये पता नहीं चलता कि कौनसे जिले में कितने आवेदन हुए हैं।


अब तक इतने बेरोजगारों को मिला भत्ता


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वर्ग बेरोजगार

एससी 228

एसटी ०12

सामान्य 948

महिला 714

कुल 1902


इतना मिलता है बेरोजगार भत्ता

श्रेणी भत्ता

पुरुष 3000

महिला 3500

दिव्यांग 3500


आचार संहिता के कारण नए आवेदन स्वीकृत नहीं किए जा सकते। आचार संहिता हटने के बाद ही नए आवेदनों का चयन व स्वीकृति जारी की जा सकेगी।



शुक्रवार, 15 मार्च 2019

राजस्थान में दो चरणों में होंगे लोकसभा चुनाव

#LokSabhaElections2019 Update Live : राजस्थान में दो चरणों में होंगे लोस चुनाव 

29 अप्रैल को पहले चरण में 13 सीटों पर होंगे मतदान, टोंक-सवाई माधोपुर,अजमेर,पाली, जोधपुर,बाड़मेर,जालोर,उदयपुर,बांसवाड़ा,चित्तौड़गढ़,राजसमंद,भीलवाड़ा,कोटा,झालावाड़-बारां के पहले चरण में होगा मतदान


6 मई को दूसरे चरण में 12 सीटों पर होंगे मतदान, श्रीगंगानगर,बीकानेर,चूरू,झुंझुनूं,सीकर, जयपुर ग्रामीण,जयपुर शहर,अलवर,भरतपुर,करौली-धौलपुर,दौसा,नागौर में होगा मतदान

बाड़मेर : लोकसभा चुनाव से पहले ईवीएम व वीवीपेट मशीन के उपयोग हेतु जागरूकता प्रशिक्षण

ईवीएम वीवीपेट को लेकर खासा उत्साह,सूचना केन्द्र में स्थाई बूथ प्रारंभ



बाड़मेर, 14 मार्च। 
लोकसभा चुनाव को लेकर चलाए जा रहे मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के तहत आमजन मंे ईवीएम एवं वीवीपेट को लेकर आमजन मंे खासा उत्साह देखा जा रहा है। बाड़मेर जिले मंे आठ मोबाइल वैनांे के जरिए आमजन को मतदान प्रक्रिया के बारे मंे विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

जिला मुख्यालय पर सूचना केन्द्र मंे स्थाई ईवीएम एवं वीवीपेट मशीन के प्रदर्शन के लिए स्थाई मतदाता जागरूकता बूथ प्रारंभ किया गया है। यहां स्थाई मतदान जागरूकता बूथ मंे कंट्रोल यूनिट, बैलट यूनिट तथा वीवीपेट मशीन के जीवंत प्रदर्शन के साथ आम नागरिक मतदान कर सकते है। इसके अलावा दिए गए अपने वोट की वीवीपेट मशीन पर जांच भी कर सकेंगे। बाड़मेर जिले मंे विधानसभा चुनाव की तर्ज पर लोकसभा चुनाव मंे 2194 मतदान केन्द्रांे पर ईवीएम एवं वीवीपेट के जरिए मतदान होगा। बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र मंे दो एवं अन्य विधानसभा क्षेत्रांे मंे एक-एक मोबाइल वैन के जरिए मतदान केन्द्रांे एवं दूरदराज के गांवांे तथा ढाणियांे मंे पहुंचकर मतदाताआंे को ईवीएम से मतदान करने के बारे मंे जानकारी दी जा रही है। 







ईवीएम एवं वीवीपेट मशीन के लाइव डेमोन्सट्रेशन को लेकर ग्रामीणांे एवं महिलाआंे मंे खासा उत्साह देखा जा रहा है। उनको बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव मंे भी ईवीएम मशीन के साथ वीवीपेट मशीन का इस्तेमाल होगा। इसमंे मतदान करने के बाद मतदाता अगले सात सैकंड तक स्क्रीन में यह देख सकता है कि उसने किस प्रत्याशी को वोट किया है। बटन मतदाता की मनचाही जगह पर दबा है अथवा नहीं। इससे पारदर्शिता को बढ़ावा मिलने के साथ संबंधित व्यक्ति यह पता चल जाता है कि उसका मत कौनसे उम्मीदवार को गया है। इधर, जिला निर्वाचन अधिकारी हिमांशु गुप्ता ने बताया कि स्वीप के तहत लाइव डेमोन्सट्रेशन के लिए संबंधित उपखंड अधिकारियांे को पर्याप्त मात्रा मंे कंट्रोल यूनिट, बैलेट एवं वीवीपीएटी मशीनें प्रदान कर दी गई है। गुरूवार को चुनाव विभाग के निर्देशानुसार विशेषतौर पर बुजुगों को मतदान प्रक्रिया के बारे मंे बताया गया।


क्या है वीवीपेट : वोटर वेरीफिएबल पेपर आडिट ट्रेल ईवीएम के साथ संबद्ध स्वतंत्र प्रणाली है, जिससे मतदाता यह सत्यापित कर सकते हैं कि उनके मत यथा अभिप्रेत डाले गए हैं। वीवीपीएटी में एक पिं्रटर और एक वीवीपीएटी स्टेटस डिस्प्लेट यूनिट (वीएसडीयू) होती है। वीवीपीएटी 15 वोल्ट की बैटरी पर चलती है। कंट्रोल यूनिट एवं वीएसडीयू पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी के पास रखी जाती है तथा बैलेट यूनिट एवं पिं्रटर को मतदान कंपार्टमेंट में रखा जाता है। बटन दबाकर मतदान करने पर निर्वाचक मतदान प्रकोष्ठ के अन्दर मतदान यूनिट के साथ रखे पिं्रटर की पारदर्शी खिडकी से पिं्रटर के ड्रॉप बाक्स में ऐसे कागज की पर्ची कटकर गिरने के पूर्व उस अभ्यर्थी का क्रम संख्यांक नाम और चिन्ह जिसे उसने अपना मत दिया है, कागज दर्शित करने वाली मुद्रित कागज की पर्ची देखने में समर्थ होगा।

शुक्रवार, 8 मार्च 2019

बाड़मेर : आचार्य महा ब्राह्मण खेल महोत्सव होगा आयोजित

बीकानेर में आचार्य महा ब्राह्मण खेल महोत्सव सीजन 5 का आयोजन आगामी मई महीने में होगा।


बाड़मेर/06.03.2019

आचार्य समाज सभा भवन कोटडी में बाड़मेर आचार्य समाज की बैठक हुई। बैठक में बतौर मुख्य अतिथि बीकानेर से पधारे अतिथि व आचार्य महा ब्राह्मण खेल महोत्सव समिति के सदस्यों का सवाई आचार्य, खीमराज आचार्य कोटडा, रामचंद्र आचार्य व तपेश आचार्य ने माला पहनाकर स्वागत किया । उसके बाद आचार्य महा ब्राह्मण खेल महोत्सव के संयोजक प्रेम आचार्य ने बताया कि आगामी मई माह में 11 तारीख को बीकानेर में राज्य स्तरीय आचार्य समाज का खेल महोत्सव आयोजित किया जा रहा है जिसमें आचार्य समाज बंधुओं का स्नेह मिलन कार्यक्रम भी रखा गया है।




उन्होंने बताया कि 11 मई को बीकानेर में कार्यक्रम का उद्घाटन व समाज बंधुओं का स्नेह मिलन कार्यक्रम भी होगा और 12 मई को पहला लीग मैच खेला जाएगा जिसमें लगभग 16 से ज्यादा टीमें भाग लेंगी। उन्होंने आह्वान किया कि समस्त आचार्य ब्राह्मण समाज के भाई बंधु राज्य व देश के विभिन्न इलाकों से इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पहुंचेंगे इसी कड़ी में बाड़मेर की तरफ से भी क्रिकेट टीम व समाज बंधुओं को आने के लिए आमंत्रित किया।




इस दौरान कैलाश आचार्य ने संबोधित करते हुए कहा कि आचार्य समाज में अब चेतना जागृत हुई है और युवा वर्ग समाज को विभिन्न माध्यमों के जरिए आगे ले जाने का काम कर रहा है चाहे वह खेल का माध्यम हो या फिर शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य हो यह बहुत ही अच्छी पहल की जा रही है जिससे आचार्य समाज के अलग-अलग जगह पर रहने वाले समस्त बंधु इन मौकों पर एक साथ एक ही जाजम पर मिलते हैं विचार विमर्श करते हैं और समाज के उत्थान के लिए कार्य करते हैं उन्होंने आचार्य महाश्रमण खेल महोत्सव के आयोजन की पहल की सराहना की।




कार्यक्रम के अंत में आचार्य समाचार ऑनलाइन के एडिटर एंड चीफ महावीर आचार्य ने पधारे हुए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया और आचार्य महा ब्राह्मण खेल महोत्सव को प्रोत्साहन देने की बात कहते हुए ज्यादा से ज्यादा संख्या में बाड़मेर से आचार्य समाज बंधुओं के शामिल होने की बात कही। आचार्य समाज बाड़मेर की तरफ से पूर्व में आयोजित खेल महोत्सव में भी भाग लिया गया था जिसमें बाड़मेर की टीम फाइनल तक पहुंची थी जो कि बाड़मेर समाज के लिए बहुत ही गौरव की बात है। इस दौरान प्रेम आचार्य, राजेंद्र कुमार आचार्य, पतराम आचार्य, कैलाश आचार्य, बजरंग आचार्य, प्रवीण आचार्य, खीमराज कोटडा, रामचंद्र आचार्य, कैलाश आचार्य, ओम प्रकाश, तपेश आचार्य, महावीर आचार्य, राहुल शर्मा सहित समाज के बंधु उपस्थित रहे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।


गुरुवार, 7 मार्च 2019

कैसी परीक्षा! पेपर 100 अंको का, अभ्यर्थियों को मिले 148 नंबर तक

अभ्यर्थियों ने इसे हास्यासपद और लापरवाही बताते हुए पूरी परीक्षा प्रणाली की जांच कराने की मांग भी है...


जयपुर। ASO NEWS

हाल ही आयोजित रेलवे ग्रुप डी की परीक्षा में शामिल हुए कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें की है। इस संबंध में उन्होंने रेल मंत्री को पत्र भी लिखा है। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रश्न पत्र के कुल नंबर 100 थे, लेकिन कई अभ्यर्थियों के 100 में से 148 व 109 नंबर तक आए हैं। अभ्यर्थियों ने इसे हास्यासपद और लापरवाही बताते हुए पूरी परीक्षा प्रणाली की जांच कराने की मांग भी है।

कई छात्रों ने बताया कि उनके पास प्रमाण के तौर पर पंजीकरण नंबर भी हैं। जल्द से जल्द परिणाम में सुधार कर योग्य अभ्यर्थियों को राहत दी जानी चाहिए। वहीं, जांच व आवश्यक सुधार नहीं होने पर अभ्यर्थियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। गौरतलब है कि परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी शामिल हुए थे।



वहीं इधर... 'व्यवस्था के प्रश्न हल कर रहे विद्यार्थी!, कुर्सी-टेबल ले जाते दिखे

सवाईमाधोपुर। 12वीं बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली है, लेकिन इन दिनों बोर्ड परीक्षाओं में फर्नीचर का बोझा विद्यार्थी ढो रहे हैं। ऐसा ही आलम मंगलवार को गीता देवी आदर्श बामावि में देखने को मिला। जहां निजी स्कूली बच्चे बोर्ड परीक्षा के फर्नीचर को सिर पर, कंधे व हाथों में कुर्सी-टेबल उठाकर ले जाते दिखाई दिए। बोर्ड परीक्षा आगामी सात मार्च से शुरू हो जाएगी। इसके लिए जिले में कुल 27 केन्द्र बनाए गए हैं। बोर्ड परीक्षा के दौरान निजी स्कूल से सरकारी स्कूलों में फर्नीचर परिवहन की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल संस्थान प्रधानों की होती है, लेकिन जिला मुख्यालय पर मंगलवार को अलग ही नजारा देखने को मिला। यहां निजी स्कूलों के बच्चे खुद हाथों में फर्नीचर उठाकर गीता देवी आदर्श उमावि में पहुंचाते नजर आए।

जानकारी के अनुसार करीब आठ-दस साल पहले बोर्ड परीक्षा में फर्नीचर की व्यवस्था के लिए टेण्डर जारी किए जाते थे। जहां केन्द्र रहता था, वहां बोर्ड ही फर्नीचर उपलब्ध करवाता था, लेकिन अब इसको खत्म कर दिया। अब निजी शिक्षण संस्थानों को ही फर्नीचर की व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती नहीं होने से भी कई स्कूलों में दिक्कत आ रही है। कई स्कूलों में तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक नहीं है।

बुधवार, 6 मार्च 2019

ये कुछ सरकारी एप व नम्बर आपको बहुत मदद कर सकते हैं।

नई दिल्ली: भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहल को कुछ साल पहले लॉन्च किया गया था जहां नागरिकों को टेक्नॉलजी के कई रुप से अवगत करवाया गया. अब एसएमएस, एप्स, फोन कॉल और कई सरकारी सर्विस की मदद से एक नागरिक आराम से अपना काम कर सकता है. तो वहीं कई सारी जानकारियां भी जुटा सकता है. तो चलिए आज हम आपको कुछ ऐसे जरूरी सरकारी एप्स और फोन नंबर्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके पास जरूर होने चाहिए.

भारत के वीर- इस मोबाइल एप की मदद से आप शहीद जवानों के परिवार की मदद कर सकते हैं. जिसमें सीआरपीएफ शामिल है.

cVigil- चुनाव आयोग का ये एप है जहां आप चुनाव से जुड़ी हुई कोई भी गलत चीज या घटना के बारे में फास्ट ट्रैक शिकायत कर सकते हैं.

MADAD- विदेश मंत्रालय का एप है. ये उन लोगों के लिए है जो विदेश में रहते हैं. वीजा, पासपोर्ट या डाक्यूमेंट से जुड़ी कोई भी जानकारी लेनी हो तो इस एप का इस्तेमाल करें.

UTS- अनरिसर्वड टिकट को बुक करने के लिए

mPassport- पासपोर्ट से जुड़ी हुई कोई भी जानकारी चाहिए तो इस एप का इस्तेमाल करें.

नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल- जिन छात्रों को स्कॉलरशिप चाहिए उनके लिए.

1091- महिलाओं की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर.

18001201741- BHIM/UPI से जुड़ी हुई जानकारी के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.

Aaykar sETU- इनकम टैक्स और पैन कार्ड के लिए

108- नेशनल डिसास्टर हेल्पलाइन

1909- स्पैम मैसेज को रोकने के लिए

ePathshala- छात्रों और शिक्षकों केलिए जो मोबाइल और कंप्यूटर पर किताब पढ़ना चाहते हैं.

mKavach- वायरस को रोकने के लिए और मोबाइल सिक्योरिटी के लिए.

किसान सुविधा- कृषि से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए एप है.


1947- आधार का टोल फ्री नंबर

1800114949- साइबर सिक्योरिटी की शिकायत के लिए

UMANG-इस एप के तहत कई सरकारी डिपार्टमेंट एक प्लेटफॉर्म के नीचे आते हैं.

57575- पैन कार्ड एप्लिकेशन से जुड़ी हुई जानकारी

वोटर हेल्पलाइन-चुनाव आयोग का एप जहां आप नए वोटर आइडी कार्ड के लिए अप्लाई कर सकते हैं. वहीं वोटिंग लिस्ट में आपका नाम है या नहीं इसे भी चेक कर सकते हैं.

इंक्रेडिबल इंडिया- पर्यटन की जानकारी के लिए

मायस्पीड- इंटरनेट की स्पीड चेक करने के लिए

1098- छोटे बच्चों की मदद के लिए

BHIM- डिजिटली कोई टांजैक्शन करते हैं तो इस एप का इस्तेमाल करें.

Indian Police on Call- सबसे करीब पोलिस स्टेशन कौन सा है इसकी जानकारी मिलती है. वहीं पुलिस स्टेशन से जुड़ी जानकारी भी.

Startup India- सरकार के जरिए शुरू की गई कोई नई पहल के बारे में जानकारी लेने के लिए.

18002581800- पासपोर्ट से जुड़ी कोई भी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर

18002666868- इंडियन पोस्ट कस्टमर केयर

DigiLocker- जरूरी कागजात और डाक्यूमेंट को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल लॉकर

mParivahan- ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी से जुड़ी जानकारी के लिए

MyGov- सरकार को कोई आइडिया, फीडबैक या कुछ और जानकारी देने के लिए

1800110001- प्रधानमंत्री धन जन योजना

7738299899- EPF से जुड़ी जानकारी के लिए

Board Exam: एग्जाम फोबिया को कहें बॉय-बॉय...

इस तरह दूर करें एग्जाम का प्रेशर..
कोटा.एग्जाम का डर किसे नही होता जब एग्जाम बोर्ड का हो तो स्टूडेन्ट्स पर दबाव बढऩे के साथ -साथ यह डर और बढ़ जाता है लेकिन डर को दूर करती है विद्यार्थी की मेहनत। स्कोर करना इतना कठिन भी नही है, थोड़ी प्लानिंग और कुछ आसान तरीकों को जानकर न सिर्फ आपकी घबराहट दूर होगी बल्कि आप नम्बरों के मामले में भी किसी से पिछे नही रहेगें।

बोर्ड परीक्षा सिर पर है अब घरों में माहौल भी पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। 10 वीं और 12 वीं के छात्र-छात्राओं का अब पूरा फोकस एग्जाम पर है। घर में भी अब पूरी तरह माहौल पढ़ाई का ही नजर आ रहा है खास तौर पर पैरन्ट्स अपने बच्चों से खासी उम्मीद लगाए है। परीक्षा में विद्यार्थी सफलता प्राप्त करे इसी को लेकर ऐसे कई टिप्स बताए जा रहे है , जिन्हें परीक्षा के समय अपनाकर एग्जाम फोबियों को बॉय- बॉय कह सकते है।

ब्रेन पावर बढ़ाने के लिए 
सुबह की पढ़ाई-
वैसे तो सभी जानते हैं कि सुबह पढऩा कितना लाभदायक है क्योंकि एक अच्छी नींद के बाद आप एकदम ताजा और ऊर्जा से भरे होते हैं। सुबह के समय शांति का भी माहौल रहता है और पढ़ाई आप लंबे समय तक याद रखते हैं।

अच्छा खाएं-
अक्सर एग्जाम के डर से विद्यार्थी खाने से दूरी बना लेते है लेकिन परीक्षा में फोकस और अच्छे नंबर के लिए आपको अच्छा खाना भी होगा। आपकी डाइट ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक से अधिक हो।

समय प्रबंधन-
किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने का पहला नियम टाइम मैनेजमेंट होता है। आप अच्छे नंबर पाने के लिए टाइम मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दें। हर विषय को समय के अनुसार बांट लें। जिस विषय में आपकी पकड़ कमजोर है, उसे ज्यादा से ज्यादा समय दें, जो टॉपिक हमें आते हैं उनको हम अक्सर दोहराने के लिए पूरा समय नहीं देते। ये गलती न करें, बल्कि विषय के लिए बराबर का समय निश्चित करें।


कॉन्सेप्ट को समझें-
सिलेबस के हिसाब से हमेशा तैयारी ना करें। हर बार इसका काम करना जरूरी नहीं है। आवश्यक है कि आप पहले विषय को समझें और फिर आगे बढ़ें। कई बार क्या होता है कि आप रटकर एग्जाम में जाते हैं और अगर प्रश्नपत्र में सवाल थोड़ा अलग हो जाता है तो घबराहट होती है, ऐसे में आप विषय को समझकर एग्जाम में बैठेंगे तो हर तरह से जवाब देने के लिए तैयार होंगे।

नोट्स बनाएं
यह जांचा और परखा हुआ नियम है। नोट्स हमेशा आपकी मदद करेंगे। जब भी आप पढ़ें या रिवीजन करें तो ध्यान से उसके नोट्स बनाते चलें।

सैंपल पेपर-
सैंपल पेपर यह काफी कारगर हो सकता हैं, पिछले कुछ सालों के प्रश्नपत्रों को आप इकठ्ठा कर कई सवालों को जान सकते हैं। उन प्रश्नों को हल करें इससे आपके अंदर विश्वास पैदा होगा। साथ ही सिलेबस भी पूरा किया जा सकेगा।

टालें नहीं-
कल करें सो आज कर, आज करे सो अब इस कहावत को हमेशा याद रखें। अक्सर बच्चे पढ़ाई टालते हैं और बाद में पूरा सिलेबस देखकर दवाब में आ जाते हैं। अधूरा काम बाद में करने से आपके रिजल्ट पर असर पड़ता है। प्रतिदिन लक्ष्य निर्धारित करें और उसी के हिसाब से तैयारी शुरू करें।

ASO NEWS

राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होगी विंग कमांडर अभिनंदन की शौर्य गाथा

शिक्षा मंत्री गोविन्दसिंह डोटासरा ने किया ट्वीट, कहा सरकार ने इस पर फैसला किया है

जोधपुर. ASO NEWS
पाकिस्तान के फाइटर विमान को उनके सरजमीं पर जाकर धराशायी करने वाले भारत के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की शौयगाथा अब राजस्थान के स्कूली विद्यार्थी पढ़ेंगे। राज्य सरकार ने विंग कमांडर अभिनंदन की वीरता की कहानी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविन्दसिंह डोटासरा ने अपने ऑफिशियल ट्वीटर अकाउंट पर ट्वीट कर लिखा कि सरकार ने विंग कमांडर अभिनंदन की शौर्य गाथा की कहानी को राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम मेें शामिल करने का फैसला किया है।




गौरतलब है कि विंग कमांडर अभिनंदन- Wing Commander Abhinandan की शौर्य गाथा को लेकर पूरा भारत देश गर्व महसूस कर रहा है। पाकिस्तान आर्मी के हाथों पकड़े जाने के बाद सकुशल भारत लौटे अभिनंदन का पूरे भारतवर्ष ने जबरदस्त स्वागत किया था। आपको बता दें कि पुलवामा में आतंकी हमले के 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना में पीओके बालाकोट व अन्य जगहों पर एयरस्ट्राइक से हमला कर आतंकी ठिकानों को तहस-नहस कर दिया था। उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप अगले दिन पाकिस्तान के एफ-16 ने भारतीय वायुसेना सीमा का उल्लंघन करते हुए हमले का प्रयास किया, लेकिन मिग-21 लेकर उड़े भारतीय सेना के विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तान के एफ-16 के छक्के छुड़ा दिए और कुछ ही सैकण्ड में फैसला कर उसे धराशायी कर दिया। सामने के प्रहार से विंग कमांडर का मिग-21 क्रेश होने के कारण उन्हें पैराशूट से कूद कर अपनी जान बचानी पड़ी। गलती से विंग कमांडर अभिनंदन पीओके की जमीन पर उतर गए। जिस पर पाक आर्मी ने उन्हें पकड़ लिया था। भारत के अन्तराष्ट्रीय दबाव के बाद आखिर पाकिस्तान को विंग कमांडर को सकुशल सौंपना पड़ा था।

क्या आप IAS बनना चाहते हैं ?

IAS officer समाज में शक्ति तथा प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है! इसका एक कारण यह भी है की भारत में सभी सरकारी तंत्र की शक्तियों का केंद्र IAS officer ही होता है!जानने योग्य बात यह भी है की शहर के पुलिस अधीक्षक भी IAS (DM) के आधीन काम करते हैं.IAS officer के पास असीमित शक्तियां होती है जिसके कारण इस पद की जिम्मेदारी तथा प्रतिष्ठा और भी बढ़ जाती है!

इतनी बड़ी जिम्मेदारी के लिए सही व्यक्ति का चुनाव भी अपने आप में बहुत ही बड़ी जिम्मेंदारी है इसलिए भी सिविल सेवा परीक्षा को इस तरह से डिजाईन किया गया है की सिर्फ प्रतिभावान अभ्यर्थी का ही सिलेक्शन हो.! सिविल सेवा परीक्षा में लगभग 8-10 लाख में से 1000 का ही सिलेक्शन होता है और साधारण ग्रेजुएट से लेकर डॉक्टर्स, engineers, साइंटिस्ट भी इस परीक्षा में भाग लेते हैं.इसलिए इस परीक्षा में चयन बहुत ही कठिन होता है इसलिए सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है!

हर विद्यार्थी अपने जीवन में एक बार IAS बनने के लिए अवश्य ही सोचता है. इस पद से जुड़े सम्मान, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा शक्तियाँ इतनी ज्यादा है की सभी लोग IAS बनना चाहते हैं. इस सर्विस की शक्ति  एक नीली बत्ती की गाडी या हूटर तक ही सिमित नहीं होती है बल्कि हर एक व्यक्ति को प्रभावित तथा बदलने की क्षमता भी रखती है. यह भारत देश की सबसे बड़ी सरकारी नौकरी है जो हर व्यक्ति के जीवन को कही न कहीं प्रभावित करती है!


IAS एक सर्विस मात्र न होकर इससे कही बड़ी जिम्मेदारी है. IAS officer सभी स्तरों पर हो रहे प्रयासों को एक सूत्र में पिरो कर सभी के प्रयासों को एक सही दिशा प्रदान करता है. वह जिले में एक लीडर की तरह कार्य करता है तथा सभी को अच्छे कार्य करने के लिए प्रेरित भी करता है !

चाहे शहर हो या ज़िला हो, राज्य सरकार हो या भारत सरकार हो ,हर डिपार्टमेंट के शीर्ष पदों पर IAS अधिकारी ही होते हैं. इसलिए भी यह सर्विस सभी की मनपसंद सर्विस है.!

#आइए_जानते_हैं_फार्म_भरने_से_लेकर_आईएस_बनने_तक_का_संपूर्ण_जानकारी 👇👇👇

यूपीएससी का परीक्षा तीन चरणों में होता है---

1) Preliminary Exam
2)Mains Exam
3) Interview/Personality Test

#Notification

हर साल Union Public Serice Commission फरवरी माह में सिविल सर्विसेज का Notification प्रकाशित करता है जिसमे IAS के साथ साथ लगभग 24 Central Civil Services के लिए भी Notification दिया जाता है!भारत में  IAS – Indian Administrative Service, IPS - Indian Police Service तथा IFS -Indian Forest Service को ऑल इंडिया सर्विस कहा जाता है।  बाकि की सर्विस Central Civil Services में आती हैं । इनमे शीर्ष पर IFS – Indian Foreign Service होती है!

IAS परीक्षा में हर साल लगभग 8-10 lakh अभ्यर्थियों फॉर्म भरते है लेकिन केवल 1000 अभ्यर्थियों का चयन होता है! इसका अर्थ यह है की पासिंग परसेंटेज बहुत ही कम रहता है. और यदि सीटें कम हुई तो पासिंग परसेंटेज और भी कम हो जाता है. पिछले कुछ सालों से इस विज्ञापन में लगभग 1000 सीटें विज्ञापित की जाती है तथा अंतिम मेरिट के अनुसार सभी चयनित अभ्यर्थियों को उनके क्रम अनुसार सर्विसेज प्रदान की जाती हैं!

#Eligibility    #नागरिकता

इस परीक्षा में भारतीय नागरिकों के साथ साथ तिब्बत के रिफ्यूजी , नेपाल तथा भूटान के नागरिक भी शामिल हो सकते हैं परन्तु IAS तथा IPS में भर्ती के लिए, अभ्यर्थी को भारत का नागरिक होना अनिवार्य है. इस परीक्षा में भारतीय मूल के लोग जो अलग अलग देशों में हैं, वह भी शामिल हो सकते हैं!

#शैक्षिक_योग्यता

इस परीक्षा के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से किसी भी विषय में ग्रेजुएट होना अनिवार्य है, फाइनल वर्ष appearing वाले छात्र भी इस परीक्षा में भाग ले सकते हैं. इस परीक्षा की ख़ास बात यह है की ग्रेजुएशन में किसी भी #मिनिमम_पर्सेंटेज_की_रिक्वायमेंट_नहीं_होती। साथ ही साथ किसी भी सब्‍जेक्‍ट की अनिवार्यता नहीं होती है। किसी भी विषय के ग्रेजुएट इस परीक्षा में भाग ले सकते हैं!

#आयु_सीमा

इस परीक्षा के लिए अभ्यर्थी को 21 साल की न्यूनतम आयु का होना अनिवार्य है!अलग अलग श्रेणीओं के लिए अलग अलग अधिकतम आयू सीमा निर्धारित की गयी है! सामान्य श्रेणी के लिए 32 वर्ष , अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 35 वर्ष और एससी व एसटी के लिए 37 वर्ष तक की आयु निर्धारित की गयी है। विकलांग श्रेणी में और भी ज्यादा छूट दी जाती है. आयु की गणना विज्ञापित वर्ष की दिनांक 1 अगस्त से की जाती है!

#फॉर्म_भरने_पर_प्रतिबंध

जो अभ्यर्थी पिछली किसी भी परीक्षा में IAS- Indian Administrative Service या IFoS - Indian Foreign Service में सेलेक्ट हो चुके है वे अभ्यर्थी फॉर्म नहीं भर सकते हैं!




#फॉर्म_भरने_से_जुड़े_कुछ_महत्वपूर्ण_तथ्य

फॉर्म भरते समय अभ्यर्थी को सभी Basic information जैसे नाम, पिता का नाम, माता का नाम इत्यादि भरने होते हैं. सिविल सेवा प्रारम्भिक परीक्षा के लिए सेंटर भी अंकित करना होता है. यह परीक्षा देश के 72 शहरों के विभिन्न केन्द्रों पर एक साथ आयोजित की जाती है!फॉर्म भरने के लिए एक महीने का समय मिलता है जिसकी सारी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है!

ख़ास बात यह है की अभ्यर्थियों को सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का optional subject भी फॉर्म भरते समय बताना होता है. Notification  में 26 optional subjects की सूची में से किसी एक का चुनाव करना होता है तथा फॉर्म में अंकित करना होता है. फॉर्म भरते समय आपको अपना परीक्षा का माध्यम भी बताना होता है! आप हिन्‍दी और इंग्लिश दोनों में से किसी भी माध्यम में परीक्षा दे सकते हैं। 

फॉर्म भरते समय आपको अपनी पसंद की Services को क्रमवार बताना होता है! इसे service preference भी कहते हैं! साथ ही साथ आपको अपनी पसंद के राज्यों की सूचि भी क्रमबद्ध रूप में देनी होती है की आप कहाँ सर्विस करना पसंद करेंगे! इसके लिए आपसे फॉर्म भरते समय कोई प्रश्न नहीं पुछा जाता.!

 UPSC pre exam के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है इच्छुक उम्मीदवार 18 मार्च तक फार्म भर सकते हैं ! 

#Fee

सामान्य और पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों ( Male) के लिए फार्म फीस ₹100 लगता है.!

महिला उम्मीदवारों की कोई भी Form Fee नहीं लगता.!
Sc/St/ PH उम्मीदवारों की Form Fee  नहीं लगता !

#Attempts

इस परीक्षा में हर श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए अटेंप्‍ट निर्धारित किये गए हैं . अटेंप्‍ट का मतलब है की किसी भी श्रेणी के अभ्यर्थी, इस परीक्षा में कितनी बार शामिल हो सकते हैं। #सामान्य_श्रेणी_के_लिए_6_Attempts निर्धारित हैं । #अन्य_पिछड़ा_वर्ग_के_लिए_9_Attempts_और_एससी_एसटी_के_लिए_कोई_सीमा_नहीं_है  ( Unlimited attempts till 37 year of age ) ध्‍यान देने वाली बात यह है की  फॉर्म भरने को Attempt काउंट नहीं किया जाता । प्रारम्भिक परीक्षा के किसी भी एक पेपर में सम्मिलित होने को Attempt मान लिया जाता है!

#परीक्षा_प्लान

UPSC, इस परीक्षा को दो चरणों में आयोजित करता है :- पहला चरण है प्रारम्भिक परीक्षा तथा दूसरा चरण है मुख्य परीक्षा. मुख्य परीक्षा के दो भाग होते है – पहला मुख्य लिखित परीक्षा तथा दूसरा इंटरव्यू चरण!पहले चरण को प्रारम्भिक परीक्षा कहते हैं तथा इसके मार्क्स फाइनल मेरिट में नहीं जोड़े जाते हैं. यह परीक्षा सिर्फ अभ्यर्थियों की संख्या कम करने के लिए है  इसलिए qualifying मात्र है . मुख्य परीक्षा के दोनों भागों में अर्जित मार्क्स के आधार पर फाइनल मेरिट लिस्ट बनती है!




#सिवील_सेवा_प्रारम्भिक_परीक्षा_का_Syllabus

सिवील सेवा प्रारम्भिक परीक्षा में दो पेपर होते है! फर्स्‍ट पेपर में जनरल स्‍टडीज के सारे एरिया कवर होते हैं। ये सारे टॉपिक जैसे History, Geography, Economy, Current Events, General Science, Environment, Technology Indian Polity and Governance आदि होते है । जबकि सेकेंड पेपर यानि aptitude में एसएससी, बैंकिंग एग्‍जाम टाइप के क्‍वेश्‍चन रहते हैं। जैसे कांप्रिहेंसिव, लॉजिकल रीजनिंग, बेसिक न्‍यूमेरेसी आदि होते हैं।

#सिवील_सेवा_प्रारम्भिक_परीक्षा

सिविल सेवा परीक्षा का पहला पड़ाव सिवील सेवा प्रारम्भिक परीक्षा है जिसे जून माह में संपूर्ण भारत के 72 शहरों के विभिन्न केन्द्रों पर एकसाथ आयोजित किया  जाता है! सिवील सेवा प्रारम्भिक परीक्षा का आयोजन देश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था UPSC द्वारा प्रत्येक वर्ष किया जाता है!परीक्षा के लिए लगभग 8-10 लाख लोग फॉर्म भरते हैं तथा लगभग 5 लाख लोग परीक्षा देते हैं! इस परीक्षा में सिलेक्शन के चांसेस कम होने के कारण तथा पेपर के standard के कारण इसे बहुत कठिन परीक्षा माना जाता है!

यह परीक्षा दो पारियों में आयोजित की जाती है. प्रारम्भिक परीक्षा में दो पेपर होते हैं। पहला सामान्य अध्ययन I है जो की सामान्य अध्ययन विषयों से जुड़ा होता है तथा दूसरा सामान्य अध्ययन II पेपर होता है जो Aptitude से जुड़ा है तथा सिर्फ क्वालीफाई करना होता है तथा प्रारम्भिक परीक्षा की मेरिट में इसके नंबर नहीं जुड़ते!

पहले पेपर में 100 Questions होते है तथा 2 घंटे का समय होता है!प्रत्येक प्रश्न 2 मार्क्स का होता है. इसी तरह दूसरे पेपर में 80 Questions होते है तथा 2 घंटे का समय होता है. इस परीक्षा में 1/3 की Negative Marking होती है. इसका अर्थ यह है की एक Question गलत होने पर सही Question पर मिलने वाले मार्क्स का 1/3 मार्क्स काटे जाते हैं!



ध्यान रखने योग्य बात यह है की प्रारम्भिक परीक्षा में पास होना अनिवार्य है तभी आप सिविल सेवा मुख्य परीक्षा देने के लिए योग्य होंगे!

#सिवील_सेवा_मुख्य_परीक्षा/Civil Services Main Exam

IAS Prelims परीक्षा का रिजल्ट जुलाई माह के अंत तक घोषित कर दिया जाता है! (50 days after pre exam result announced) तथा जो भी अभ्यर्थी इसको पास कर लेते हैं उन्हें सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए दोबारा ऑनलाइन आवेदन करना होता है जिसके लिए लगभग 20 दिन का समय दिया जाता है! इसे Detail Application Form भी कहते हैं. IAS इंटरव्यू में इसका बहुत महत्व होता है. मुख्य परीक्षा लिखित में विज्ञापित सीटों की संख्या के 15 गुना अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है!इस परीक्षा में सभी पेपर सब्जेक्टिव होते हैं तथा सभी की समय सीमा 3 घंटे होती है!

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में दो तरह के पेपर होते है! एक तो वे पेपर्स जो सभी के लिए समान यानी कॉमन होते हैं और दुसरे ऑप्शनल सब्जेक्ट के पेपर होते है जो की प्रत्येक सब्जेक्ट के लिए अलग होते हैं. अभ्यर्थी ऑप्शनल Subject का चयन करते हैं तथा उसी के पेपर देते हैं!  सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में कुल 9 पेपर होते हैं जिनका टोटल 1750 मार्क्‍स होता है । इसमें आपको 9 में से 7 सब्‍जेक्‍ट में ज्‍यादा फोकस करना है। क्‍योंकि 7 सब्‍जेक्‍ट पेपर्स में से ही मेरिट बनाई जाती है!इंग्लिश तथा सामान्य भाषा का पेपर केवल पास करना होता है तथा इसके मार्क्स नहीं जुड़ते हैं. ख़ास बात यह है की जो माध्यम आपने फॉर्म पर अंकित किया हो उसी माध्यम से आप परीक्षा दे सकते हैं!दूसरे माध्यम से परीक्षा देने पर answer चेक नहीं किया जाता ऐसा निर्देश प्रत्येक पेपर पर लिखा होता है!

English तथा भारतीय भाषा के पेपर में पास होने के लिए सिर्फ 25% अंक लाने होते है!भारतीय भाषा का कंपल्सरी पेपर अरुणाचल प्रदेश,मणिपुर,मेघालय, मिजोरम,नागालैंड तथा सिक्किम के अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य नहीं है! यह दोनों पेपर 300 मार्क्स के होते हैं. शेष सभी पेपर 250 मार्क्स के होते हैं!




#पेपरों_की_संख्या

सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में कुल 9 पेपर होते हैं जिनका टोटल 1750 मार्क्‍स होता है! सामान्य अध्ययन के 4 पेपर होते हैं!एक निबंध का पेपर होता है , एक इंग्लिश का तथा एक भाषा का पेपर भी होता है! दो पेपर ऑप्शनल सब्जेक्ट के होते हैं!यह सारे पेपर्स Weekend में होते हैं इसलिए यह परीक्षा दो हफ्ते तक चलती है. पेपर होने के बाद सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का रिजल्ट  नवंबर महीने में आता है!

#Civil_Services_मुख्य_परीक्षा_Syllabus

Civil Services  Essay Paper – इस पेपर में दिए गए टॉपिक्स में से 3 घंटे में 2 निबंध लिखने होते हैं । प्रत्येक निबंध 125 मार्क्‍स का होता है । पॉलिटिक्‍स, सोसायटी, टेक्‍नोलॉजी, फिलोसोफी  आदि से टॉपिक्स दिए जाते हैं ।

#General_Studies_पेपर_I में इंडियन हिस्‍ट्री, कल्‍चर, वर्ल्‍ड जियोग्रफी और सोसायटी कवर होता है।(Indian Heritage and Culture, History and Geography of the World and Society.)

#General_Studies_पेपर_II में गवर्नेंस, भारत का संविधान,  पॉलिटि, सोशल जस्टिस और इंटरनेशनल रिलेशन से प्रश्न आते हैं ।(Governance, Constitution, Polity, Social Justice and International relations.)

#General_Studies_पेपर_III में टेक्‍नोलॉजी, इकोनॉमिक डेवलपमेंट, बायोडायवर्सिटी, एनवायरमेंट, सिक्‍योरिटी, डिजास्‍टर मैनेजमेंट से प्रश्न आते हैं। (Technology, Economic Development, Biodiversity, Environment, Security and Disaster Management)

#General_Studies_पेपर_IV में Ethics, Integrity and Aptitude है। सामान्‍य शब्‍दों में कहा जाए तो आप क्‍या सोचते हैं, आपके विचार कैसे हैं ।(Ethics, Integrity and Aptitude) किसी घटना को लेकर आप कैसे रिएक्‍ट करते हैं। जैसे खुशी क्‍या है। इसका उत्‍तर अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग होता है । एक सैनिक के लिए मोर्चे पर जीत उसकी खुशी हो सकती है और एक छात्र के लिए एग्‍जाम में टॉप करना खुशी हो सकती है।

#सिविल #सेवा_मुख्य_परीक्षा

सभी General Studies के पपेरों में 20 questions होते हैं जिनका उत्तर 3 घंटे में देना होता है. प्रत्येक 10 मार्क्स के लिए 150 शब्दों की तथा 15 मार्क्स के लिए 250 शब्दों की शब्द सीमा भी निर्धारित की गयी है.परंतु Ethics के पेपर में केस स्टडीज आती हैं इसलिए उसमे सिर्फ 12 प्रश्न ही पूछे जाते है. पेपर का structure फिक्स नहीं होता है और ये किसी भी साल बदल सकता है!

#Optional_Subject_के_पेपर_में 8 Question आते है जिनका 3 घंटे में ही उत्तर देना होता है!


#Optional_Subject_कैसी_चुने

#वैकल्पिक_विषय_का_महत्त्व 

👉यह कहना पूर्णत: सही नहीं है कि सामान्य अध्ययन 1000 अंकों का है और वैकल्पिक विषय सिर्फ 500 अंकों का, इसलिये अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन पर ज़्यादा बल देना चाहिये। 

👉ऐसा कहने वाले  शायद वैकल्पिक विषय के रणनीतिक महत्त्व को नहीं समझते। इस परीक्षा में यह बात बिल्कुल मायने नहीं रखती कि किसी अभ्यर्थी को कितने अंक हासिल हुए हैं। महत्त्व सिर्फ इस बात का है कि किसी उम्मीदवार को अन्य प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में कितने कम या अधिक अंक प्राप्त हुए हैं। 

👉विगत कुछ वर्षों के परीक्षा परिणामों पर नज़र डालें तो आप पाएंगे कि हिंदी माध्यम के लगभग सभी गंभीर अभ्यर्थियों को सामान्य अध्ययन में 325-350 अंक प्राप्त हुए (2014 की सिविल सेवा परिक्षा में निशांत जैन ने एक अपवाद के रूप में 378 अंक प्राप्त किये थे)। इसके विपरीत, अंग्रेज़ी माध्यम के गंभीर अभ्यर्थियों को इसमें औसत रूप से 20-30 अंक अधिक हासिल हुए, जबकि वैकल्पिक विषय में लगभग सभी गंभीर अभ्यर्थियों को 270-325 अंक हासिल हुए। इस औसत से वैकल्पिक विषय का महत्त्व अपने आप स्पष्ट हो जाता है। ध्यान रहे कि ये लाभ आपको तभी मिल सकता है जब आपने वैकल्पिक विषय का चयन बहुत सोच-समझकर  किया हो। 

उम्मीदवारों को वैकल्पिक विषय वही चुनना चाहिए जो उनके ग्रेजुएशन में सब्जेक्ट हो.! #जिस_विषय_में_उनकी_रुचि_है_वही_वैकल्पिक_सब्जेक्ट_को_चुनना_चाहिए! 

       सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों की संख्या विज्ञापित सीटों की संख्या से 2.5 गुना होती है! यानी लगभग 15000 में से 2500  ही इंटरव्यू के लिए चयनित होते हैं. ये सिविल सेवा का कठिनतम चरण होता है और यदि यहाँ सिलेक्शन हो गया तो फाइनल सिलेक्शन के चांसेस बहुत बढ़ जाते हैं!



#Personality_टेस्ट_या_IAS_इंटरव्यू

 इंटरव्यू, सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का दूसरा भाग होता है! इसे पर्सनालिटी टेस्ट कहते है!यह इंटरव्यू कुल 275 मार्क्स का होता है. इसे सामान्य भाषा में IAS इंटरव्यू भी कहते हैं. इसका सिलेबस निर्धारित नहीं है तथा आपके Detail Application Form (DAF) से अधिकांश प्रश्न पूछे जाते हैं! इसलिए DAF को पूरी सावधानी और पूरी सच्चाई के साथ भरनी चाहिए.!

  IAS इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थी को UPSC की Delhi स्थित धोलपुर हाउस बिल्डिंग में आना  होता है. यहाँ अभ्यर्थियों के सभी ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन किया जाता है तथा एक कॉमन हाल में बैठा दिया जाता है. UPSC के मेम्बेर्स की अध्यक्षता में एक इंटरव्यू पैनल बनाये जाते हैं जो की अभ्यर्थियोंअ का इंटरव्यू लेते हैं. इंटरव्यू पैनल में देश की विभिन्न क्षेत्रों  से जुड़े दिग्गजों को आमंत्रित किया जाता है. IAS Interview में अभ्यर्थी का confidence, attitude तथा प्रॉब्लम सोल्विंग स्किल्स चेक की जाती हैं. यहाँ अभ्यर्थी की personality का सब्जेक्टिव असेसमेंट किया जाता है तथा अधिकतम 275 मार्क्स में से मार्क्स दिए जाते हैं!

#आईएस_के_Interview_में_फेल_हो_जाने_पर_भी_नौकरी_मिलेगी_इस_पर_अभी_सरकार_विचार_कर_रहा_है !


#IAS_Toppers_के_Interview_अनुभवों_को_जानें

सिविल सेवा के इंटरव्यू लगभग 20 दिन तक चलते हैं तथा इंटरव्यू ख़त्म होने के 10 दिन के बाद ही फाइनल रिजल्ट आ जाता है. फाइनल मेरिट लिस्ट इंटरव्यू तथा  सिविल सेवा मुख्य परीक्षा लिखित के मार्क्स मिलकर बनती है. इसका अर्थ यह है की अधिकतम 2025 मार्क्स में से फाइनल मेरिट लिस्ट बनती है जिसके आधार पे सर्विसेज प्रदान की जाती है. लगभग 100 रैंक तक के अभ्यर्थियों को IAS सेवा मिल जाती है!

रिजल्ट के कुछ दिन बाद UPSC अपनी रिकमेन्डेशनस को Ministry of Personnel को भेजता है जिसके बाद ही सबको appointment letter जारी किये जाते है. जो अभ्यर्थी फाइनल रिजल्ट में जगह नहीं बना पाते हैं उन्हें पूरी प्रक्रिया से फिर से गुजरना होता है!

तो यह था सिविल सेवा के फॉर्म भरने से लेकर सिलेक्शन तक का सफ़र आशा है आपको यह लेख पसंद आया होगा !

शुभकामनाएं..!      ASO NEWS