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गुरुवार, 30 अप्रैल 2020
UGC NET 2020: ये 5 बातें जो परीक्षा पास करने के लिए हैं जरूरी
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से एक वर्ष में दो बार राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (एनईटी) आयोजित करती है। केवल सहायक प्रोफेसर पद या जूनियर रिसर्च फैलोशिप (जेआरएफ) के लिए पात्रता के लिए भारतीय नागरिकों की पात्रता निर्धारित करने के लिए और भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर दोनों के लिए इसे पास करना जरूरी हैं।
बुधवार, 29 अप्रैल 2020
आचार्य (प्रबोधक)ने की स्वास्थ्य मन्त्री जी से कोरोना की मार्मिक अपील
विश्व शान्ति पुरस्कार से सम्मानित श्री धर्मचन्द आचार्य केकडी ने राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री मान अशोक जी गहलोत व माननीय चिकित्सा एवम स्वास्थ्य मन्त्री डॉ श्री मान रघु जी शर्मा को निवेदन किया है कि कोरोना की महामारी निरंतर बढ रही है ।राजस्थान सरकार के निर्देशनुसार , लोकडाऊन,व जनता घरो मे रहकर इस महामारी से पर काबू पा लिया गया है ।धर्मचन्द आचार्य केकडी ने माननीय स्वास्थ्य मन्त्री जी से कोरोना वायरस से मुक्ति के लिए राजस्थान मे कोरोना वेक्शीन के प्रयोग के लिये अपना शरीर महामारी से बचाव के लिए कोरोना वेकसिन हेतु उपयोग मे लेने का निवेदन किया है ।
श्री आचार्य वर्तमान मे राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय फलोदी ,ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा, तहसील गंगरार ,जिला चित्तौड़गढ़, राजस्थान मे प्रबोधक लेबल =2 हिन्दी के पद पर कार्यरत हैं ।ओर वर्तमान मे रघुनाथपुरा चेक पोस्ट रुपालिया रोड,पंचायत समिति गंग रार पर 24 मार्च 2020 से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
मंगलवार, 28 अप्रैल 2020
कॉलेज और यूनिवर्सिटी की परीक्षा घर से, तीन हो सकते हैं मॉडल
विश्वविद्यालय और कॉलेज ऑनलाइन परीक्षाः सरकार ने गठित की थी विशेषज्ञों की समिति
लॉक डाउन के कारण छात्रों की परीक्षाएं भी प्रभावित हो रही हैं। विश्वविद्यालय और कॉलेज अंतिम सेमेस्टर की ऑनलाइन परीक्षा किस तरह हो सकती हैं। इसे लेकर केन्द्र सरकार ने एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के कुलपति नागेश्वर राव इस समिति के अध्यक्ष है। यूजीसी कुछ सप्ताह में सुझावों पर फैसला ले सकती है।
मॉडल 1 : डेढ़ घंटे का होगा लिखित सब्जेक्टिव टाइप एग्जाम
समिति ने सुझाव दिया है कि शिक्षक "क्विज असाइनमेंट" विकल्प का उपयोग करके गूगल क्लासरूम एप्लीकेशन में प्रश्न पत्र अपलोड कर सकते हैं। यह पेपर डेढ़ घंटे का होगा। छात्रों को कैमरा और ऑडियो के साथ गूगल मीट में शामिल होने और गूगल क्लासरूम से प्रश्न पत्र पहुंच सकते हैं। कागज की एक प्लेन शीट पर लिखे उत्तर समय सीमा से पहले अपलोड किए जा सकते हैं। इनविजिलेटर छात्रों को गूगल मीट से रिकॉर्डिंग और मॉनिटरिंग कर सकते हैं। ऐसे में कोई धोखाधड़ी होने पर छात्रों को पकड़ा जा सकता है और अनफेयर मीन्स (यूएफएम) मामला दर्ज किया जा सकता है।
मॉडल-2 : कड़ी निगरानी में बहुविकल्पीय प्रश्न परीक्षा
पैनल ने सुझाव दिया है कि एमसीक्यू परीक्षाण को ऑनलाइन प्रॉक्टर सेवा के माध्यम से किया जा सकता है। एक ऑनलाइन प्रॉक्टर सेवा वीडियो और ऑडियो के माध्यम से परीक्षार्थी की निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग करती है ताकि परीक्षा में धोखाधड़ी न हो। जीमेट और जीआर परीक्षाएं ऑनलाइन प्रॉक्टरिंग के माध्यम से ही होती है। छात्रों को घर से परीक्षा का उपयोग करने के लिए लॉगइन क्रेडेंशियल और एक वेब लिंक दिया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि परीक्षार्थी स्क्रीन से बाहर जाता है तो उसे चेतावनी दी जा सकती है या उसकी परीक्षा रद्द की जा सकती है।
मॉडल-3 : प्रोजेक्ट्स, ऑनलाइन प्रेजेंटेशन या लिखित मूल्यांकन
केस स्टडी और प्रोजेक्ट्स, प्रोजेक्ट बेस मूल्यांकन रिटन असेसमेंट और ऑनलाइन प्रेजेंटेशन या लिखित मूल्यांकन के आधार पर वाइवा-वॉइस आधारित होगा। समय सीमा से दो घंटे पहले छात्रों को एक प्रॉब्लम (केस स्टडी/ प्रोजेक्ट) दी जाएगी और एक हैंडरिटन सॉल्यूशन अपलोड करने के लिए कहा जाएगा। हैंडरिटन सॉल्यूशन देने के बाद अगले दिन फैकल्टी को गूगल मीट मीटिंग के माध्य से ऑनलाइन प्रेजेंटेशन या वाइवा आयोजित करने की आवश्यकता होती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टूडेंट्स को पहले से ही सब्मिट प्रॉब्लम का सॉल्यूशन प्रेजेंट करने की अनुमति होगी.
Corona updates : भारत में संक्रमित 28255, राज्यों के आंकड़े देखें लिंक पर क्लिक करके।
*अब तक 28255 केस* / _*888की मौत*
*कोरोना वायरस अपडेट*
● 1.हरियाणा में एक साल तक भर्तियों पर रोक, ममता बोलीं- बंगाल में लाखों लोगों के क्वारैंटाइन के इंतजाम नहीं, घर में आइसोलेट हो जाएं
● 2. आईसीएमआर ने रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट को लेकर राज्य सरकारों को एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया है कि चीन की दो कंपनियों से मिलीं किट का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए। सरकार इन्हें लौटाएगी।
● 3. न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले ये यह खबर दी है। यह ऑफिस एम्स के टीचिंग ब्लॉक में है। संक्रमित सुरक्षाकर्मी के संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जा रहा है।
● 4. कर्नाटक में बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में सोमवार को एक 50 साल के कोरोना संक्रमित ने अस्पताल की ईमारत से कूद कर आत्महत्या कर ली।
*राज्यों के हाल*
● *महाराष्ट्र; कुल संक्रमित- 8068*
बृहन्मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने सोमवार को बताया कि यहां कोरोना को मात देने वाले 4 मरीजों की एंटीबॉडी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। अब उनके प्लाज्मा का इस्तेमाल दूसरे मरीजों के इलाज में किया जाएगा। बीएमसी ने ठीक हुए दूसरे मरीजों से भी ब्लड प्लाज्मा डोनेट करने की अपील की है। सोमवार को यहां सबसे ज्यादा 440 मरीजों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
● *राजस्थान; कुल संक्रमित- 2234*
यहां सोमवार को 49 मरीजों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इनमें से जयपुर में 19, झालावाड़ में 9, टोंक में 8, जोधपुर में 6, कोटा में 4, जबकि अजमेर, भीलवाड़ा और जैसलमेर में 1-1 मरीज मिला। उधर, 14 राज्यों में फंसे राजस्थान के श्रमिकों को लाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने 19 आईएएस और आईपीएस अफसरों को यह जिम्मेदारी सौंपी है
● *मध्यप्रदेश; कुल संक्रमित- 2090*
इंदौर में बाकी देश से ज्यादा घातक वायरस के एक्टिव होने की आशंका जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि यह वायरस चीन के वुहान में फैले वायरस जैसा ही है। इंदौर के सैंपल जांच के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे भेजे गए हैं। यहां दूसरे प्रदेशों के संक्रमितों के सैम्पल से इंदौर के मरीजों के सैम्पल की तुलना की जाएगी। राज्य में रविवार को संक्रमण के 145 मामले आए।
● *उत्तरप्रदेश; कुल संक्रमित- 1873*
दिल्ली के बाद अब उत्तरप्रदेश में भी प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना संक्रमितों का इलाज शुरू हो गया है। रविवार को लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल में भर्ती एक डॉक्टर को प्लाज्मा थैरेपी दी गई। यह प्लाज्मा एक डॉक्टर ने ही डोनेट किया था। अब उनकी सेहत में सुधार का इंतजार है।
● *दिल्ली, संक्रमित- 2918*
बाबा साहब अंबेडकर अस्पताल के 29 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बाबू जगजीवन राम अस्पताल में भी डॉक्टरों समेत स्टाफ के 44 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। दिल्ली एम्स की चौथी नर्स संक्रमित मिली। उसके दो बच्चे भी संक्रमित हुए हैं।
● *बिहार, संक्रमित-326*
यहां सोमवार को संक्रमण के 49 नए मामले आए। हालांकि, अभी यह नहीं पता चल सका कि ये मरीज किन जिलों में मिले हैं। राज्य में संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित मुंगेर जिला है। यहां अब तक 36 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई हैं। इसके बाद नालंदा में 34 और पटना में 33 संक्रमित हैं।
सोमवार, 27 अप्रैल 2020
करीब 55 हजार प्रवासी लौटेंगे घर
- कोरोना से जिले को सुरक्षित करने के पुख्ता प्रबंध
बाडमेर, 27 अप्रेल।
राज्य सरकार द्वारा राजस्थान से जाने एवं बाहर से आने वाले श्रमिकों एवं प्रवासियों को उनके गन्तव्य स्थल तक पहुंचाने के पुख्ता प्रबंध किए गए है। देश के विभिन्न प्रदेशों से आने वाले प्रवासियों से जिले को कोरोना सक्रमण से बचाव को भी सभी जरूरी व्यवस्थाए की गई हैं।
इस सबन्ध में जिला कलक्टर विश्राम मीणा ने सोमवार को उपखण्ड अधिकारियो से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक कर तैयारियो की समीक्षा की।
स्वास्थ्य मानक हो पुरे
इस मौके पर उन्होने बताया कि राज्य सरकार द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में स्थित श्रमिकों एवं प्रवासियों की समस्याओं के निवारण हेतु निरन्तर प्रयास कर रही है। राज्य के श्रमिकों एवं प्रवासियों को स्वास्थ्य मानकों की पालना सुनिश्चित करते हुए उनके गन्तव्य निवास स्थल तक पहुंचाने हेतु राज्य सरकार सतत् प्रयत्नशील है। इसी क्रम में जिले के समस्त उपखण्ड अधिकारियों एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों की अक्षरक्षः पालना सुनिश्चित करने को कहा।
पचपन हजार लौंटेगे
जिला कलक्टर ने बताया कि अन्य राज्यों में केम्पों में रह रहे राजस्थान के श्रमिकों एवं प्रवासियों को प्राथमिकता प्रदान करते हुए लाया जाएगा। इनकी संख्या अनुमानित 56 हजार है, जो महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु एव पशिचम बंगाल समेत अन्य राज्यो से लौटेंगे।
उन्होने बताया कि अन्य राज्य राज्यों या जिलों से निजी वाहन या बसों से आने वाले श्रमिकों एवं प्रवासियों के जिले में प्रवेश से पूर्व सीमा पर चौक पोस्ट पर पूरी जांच पड़ताल की जाएगी। उनकी पूरी विस्तृत जानकारी लेकर उनकी मेडिकल जांच के बाद उन्हें जिले में प्रवेश दिया जाएगा, जहा से उन्हें जिले में प्रशासन द्वारा उनके नियत स्थान पर भेजा जाएगा। उनके नियत स्थान पर पहुंचने के बाद उन्हें क्वारंटाइन किया जाए।
परदेशी भी लौटेंगे
इसी प्रकार राजस्थान से बाहर जाने वाले श्रमिकों एवं प्रवासियों जिनके पास अपने निजी वाहन है, उन्हें संबंधित इंसिडेन्ट कमाण्डर द्वारा चरणबद्ध तरीके से पास जारी किए जाए। वही अन्य को इसी प्रकार पब्लिक ट्रान्सपोर्ट एवं बसों से भेजा जाएगा। इच्छुक प्रवासियों के लिए एक एकीकृत कॉल सेन्टर नम्बर 1800-180-6127, मउपजतंण्तंरंेजींदण्हवअण्पद तथा तंरबवअपकपदवि मोबाइल एप पर अपना रजिस्टेªशन करवा सकेंगे। इसके साथ ही वे ई मित्र कियोस्क की सेवाएं भी ले सकेंगे। पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद संबंधित राज्य की सहमति प्राप्त की जाएगी तथा सहमति के बाद चरणबद्ध रूप से इन्हें ले जाने की व्यवस्था की जाएगी।
गुजरात सीमा पर चौक पोस्ट
जिला कलक्टर ने बताया जिले में अधिकांश प्रवासी गुजरात होते हुए लौटेंगे, इसलिए इस सीमा पर गांधव, खारा, काठाड़ी, मंडप एव मंजल में चौकिया स्थापित की गई है। सर्वाधिक भार गांधव पर रहेगा। यह पर ब्लॉकवार टेंट लगाकर काउंटर खोले जाएंगे। पहले आने वाले प्रवासी का पूरा ब्यौरा अंकित किया जाएगा एव बाद उसकी मेडिकल जांच की जाएगी। ताकि एक साथ ज्यादा भीड ना हो। गन्तव्य स्थल के लिए रवाना होने से पूर्व इनकी आईएलआई के लक्षणों की स्क्रीनिंग की जाएगी गन्तव्य स्थल पर पहुंचने के बाद इन्हें क्वारंटाइन किया जाएगा। वही जाँच में संदिग्ध पाए जाने पर उसे यही पर रोक कर सीधे यही से हॉस्पिटल भेजा जाएगा।
छाया पानी भोजन मिलेगा
जिला कलक्टर मीणा ने बताया कि बाहर से आने वाले लोगों के लिए चौक पोस्ट पर भोजन, पेयजल, शौचालय एचं चिकित्सा जांच की सुचारू व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी। यहीं पर उनका रजिस्टेªशन किया जाएगा। वही अन्य जिले के लोगो की केवल गन्तव्य जिले के प्रशासन को सूचना दी जाएगी। चेक पोस्ट पर ट्रांजिट कैंप में पुलिस, पटवारी, ग्राम सेवक, शिक्षक, परिवहन विभाग और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मौजूद रहेंगे।इसी प्रकार आने और जाने वाली बसों का सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए सर्वोत्तम प्रबन्ध किया जाना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहन दान रतनू, अतिरिक्त जिला कलक्टर राकेश कुमार शर्मा, उपखण्ड अधिकारी नीरज मिश्र, सहायक निदेशक लोकसेवाएं के.के. गोयल, एसीपी मोहनकुमार सिंह चौधरी, सीएमएचओ कमलेश चौधरी, जिला रशद अधिकारी अश्विनी गुर्जर, जिला शिक्षा अधिकारी डालूराम चौधरी एव तहसीलदार प्रेम सिंह चौधरी मौजूद थे।
भाजपा ने आहत को राहत कार्यक्रम में राशन सामग्री, मास्क व सेनेटाइजर वितरण किये।
भारतीय जनता पार्टी बाड़मेर नगर मंडल द्वारा बाडमेर शहर के विभिन्न वार्डो में नगर अध्यक्ष सुरेश मोदी के निर्देशन में राशन सामग्री किट, मास्क व आयुर्वेदिक सेनेटाइजर वितरित किये गये।
नगर पार्षद प्रकाश खत्री ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी बाड़मेर नगर मंडल द्वारा कोरोना महामारी के दौरान आहत को राहत कार्यक्रम चलाते हुए बाड़मेर शहर के विभिन्न वार्डो व ग्रामीण क्षेत्रो में जरूरतमंद परिवारों को भोजन, राशन सामग्री के साथ-साथ मास्क व आयुर्वेदिक सेनेटाइजर बांटे जा रहे है ! इसी कड़ी में सोमवार को बाडमेर शहर के इंद्रा कॉलोनी, मिरासी बस्ती व लंगेरा फांटा के पास जोगयीं की बस्ती व आस पास के एरिया में 55 राशन सामग्री किट वितरण के लिए भाजपा नेता पीयूष डोसी, स्वरूप सिंह खारा, नगर परिषद प्रतिपक्ष नेता पृथ्वीराज चण्डक, आनंद पुरोहित, फ़क़ीर खां द्वारा राशन सामग्री किट वितरण करने के लिए गाड़ी को रवाना किया गया।
इसी कड़ी में वार्ड संख्या 10में भाजपा नेता रोचामल सिंधी, एडवोकेट सवाई महेश्वरी, कैलाश आचार्य के द्वारा पार्षद हरीश सोनी को वार्ड में वितरित करने हेतु मास्क व आयुर्वेदिक सेनेटाइजर दिए गए। इसी तरह वार्ड संख्या 19के पार्षद प्रतिनिधी ओमप्रकाश को भाजपा नेता गंगाविशन अग्रवाल, अब्दुल रहमान तेली, गोतम सिंघवी, ओम सिंह राठौड़, खीमराज जांगिड़ द्वारा वार्ड में वितरित करने हेतु मास्क व आयुर्वेदिक सेनेटाइजर वितरण करने के लिए दिए गए।
इसी तरह वार्ड संख्या 16में भाजपा नगर महामंत्री किशन बोहरा, नंदकिशोर राठी, एडवोकेट सन्नी शर्मा, ओमप्रकाश त्रिवेदी, विजय सियोटा प्रकाश खत्री द्वारा पार्षद प्रतिनिधि किशोर भार्गव को उनके वार्ड में मास्क व आयुर्वेदिक सेनेटाइजर वितरण करने के लिए दिए गए।
नगर अध्यक्ष सुरेश मोदी ने बताया कि आज टोटल 55 किट राशन सामग्री, 2100 मास्क व 300 सेनेटाइजर वितरित किये गए। शहर के जरूरतमंद व वंचित परिवारों को खादय सामग्री के किट देने का कार्य जारी है जो भविष्य में लोक डाउन खत्म न हो तब तक जारी रहेगा।
UGC: जुलाई के बजाय सितम्बर में शुरू करें यूनिवर्सिटी नया सत्र*
सुझाव के लिए UGC ने गठित की थी दो कमेटियां.....
अजमेर।
कोरोना संक्रमण के चलते यूजीसी द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। पहली कमेटी ने देश के विश्वविद्यालयों में जुलाई के बजाय सितम्बर में नया सत्र शुरू करने और दूसरी ने बकाया परीक्षा ऑनलाइन कराने की सिफारिश की है। यूजीसी के चेयरमैन प्रोफेसर डी पी सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन की स्थिति को देखते हुए दो उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई थी।
*जुलाई के बजाय सितम्बर में सत्र*
हरियाणा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.आर. सी. कुहाड़ कमेटी ने देश के सभी विश्वविद्यालयों में जुलाई के बजाय सितम्बर में सत्र 2020-21 शुरू करने की सिफारिश की है। वर्तमान की स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षा में देरी के चलते यह सिफारिश की गई है। हालांकि यह केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
*ऑनलाइन कराएं एग्जाम*
इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव की कमेटी ने विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन परीक्षा कराने को कहा है। उनकी कमेटी ने सिफारिश की है कि जिन विश्विद्यालय के पास ऑनलाइन परीक्षा कराने की आधारभूत सुविधा है उन्हें इसका तत्काल इस्तेमाल करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कई विश्वविद्यालयों के पास सुविधा नही हैं। यह लॉक डाउन खुलने और हालात सामान्य होने के बाद ही परीक्षाएं करा सकेंगे। मालूम हो कि राजस्थान में उच्च शिक्षा विभाग ने 15 जून के बाद विश्वविद्यालयों को स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर की बकाया वार्षिक परीक्षाएं कराने को कहा है।
यूजीसी ने सुझाव दिए हैं। राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग की जो भी सिफारिश होगी उसके अनुसार फैसला लिया जाएगा।
प्रो. आर. पी. सिंह, कुलपति मदस विश्वविद्यालय
यूजीसी का सुझाव ठीक है, पर राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों की परिस्थितियां अलग होती हैं। लॉकडाउन और इसके बाद कैसी परिस्थितियां होती हैं इस पर चर्चा की जाएगी।
प्रो. पी. सी. त्रिवेदी, कुलपति जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी
राज्यपाल से सम्मानित हुए *लजपतराय सिंधी* अब हमारे बीच नहीं रहे |
राज्यपाल से सम्मानित हुए *लजपतराय सिंधी* अब हमारे बीच नहीं रहे |
सन् 1950 में बाड़मेर आए ओर जयहिंद कॉलेज में निशुल्क कोचिंग करवाते थे तत्पश्चात् सन् 1951 गांधी चौक अरुण मेडिकल स्टोर पर कार्य करते।सन् 1957 में राजकीय चिकित्सालय के बाहर अरुण मेडिकल हॉल लगाई।सन् 1960-90 तक आंखों के ऑपरेशन व अन्य कई महँगे ऑपरेशन बिल्कुल निशुल्क करवाए एवम् मानव धर्म ट्रस्ट में निरंतर रूप से अपनी सेवाएँ दी।राजकीय चिकित्सालय में निरंतर रूप से सवेरे सूर्य उदय के साथ चाय, दूध, खिचड़ी मरीजों के बेड तक अपने हाथों से पहुँचा कर सेवा करी।भवानी गिरी मठ की दुकान में निशुल्क ड्रेसिंग कई सालों तक की। अरुण मेडिकल हॉल के सामने बबूल के पेड़ के नीचे कई साल तक पानी की प्याऊ पे अपने हाथों से पानी पिलाने का कार्य किया।
हर दुकानदार को मानव धर्म ट्रस्ट के प्रति जागरूक करने के लिए एक पहल चलाई गई, रोज का 1 रूपया 365 दिन का 365 रुपया। बाड़मेर शहर में पानी की किल्लत को देखते हुए एक रुपए में एक मटकी भरवाई जाती थी इसी बीच मेडिकल एसोसिएशन में कई साल केशियर के रूप में उन्होंने अपना दायित्व निभाया | परामर्श दाता बाड़मेर जिला केमिस्ट एसोसिएशन | संस्थापक मानव धर्म ट्रस्ट, चेयर मैन बाड़मेर जिला रेड क्रॉस सोसाइटी, आजीवन सदस्य एवं दीवार्षिक ट्रस्टी श्री गोपाल गौशाला बाड़मेर मैं अपनी निरंतर अमूल्य सेवाएं प्रदान की | _सन् 2012 राज्यपाल से सम्मानित_|| आपकी सेवाएं सदैव याद रहेंगी ||
बिजलीकर्मियो ने काली पट्टी बांधकर किया विरोध प्रदर्शन
राज्य सरकार से विधुत निगम को वेतन स्थगन से मुक्त रखने एवं विद्युतकर्मियो को बीमा योजना में शामिल करने की मांग
बाड़मेर, 27 अप्रेल।राजस्थान विद्युत तकनीकी कर्मचारी एसोसिएशन के प्रदेश व्यापी आव्हान पर सोमवार को पूरे बाड़मेर जिले में सभी संगठनों के अभियंता, मंत्रालयिक कर्मचारियों एवं तकनीकी कर्मचारियो ने हाथो पर काली पट्टी बांधकर सरकार के समक्ष विरोध प्रदर्शन कर कोरोना वाॅरियर्स का दर्जा देने की मांग की। सोमवार को प्रदेश के हर जिले में जीएसएस एवं लाइन पर काम करने वाला कर्मचारी हो, ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारी अधिकारी हो, सभी ने बढ़चढ़कर भाग लिया और सरकार के निर्णय का विरोध जताया।
एसोसिएशन के प्रदेश प्रवक्ता रमेश पंवार ने बताया कि संभवत यह पहला ऐसा विरोध प्रदर्शन था जिसमे एक संगठन के आव्हान पर सभी ट्रेड यूनियन के अभियंता ओर कर्मचारियों ने भाग लिया। उन्होने कहा कि कोरोनो जैसी वैश्विक महामारी में बिजली विभाग के सभी अधिकारी कर्मचारी निरन्तर 24 घंटे ड्यूटी देकर विधुत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखे हुए हैं। यह डिस्कोम के कर्मचारियों के ही कड़ी मेहनत का नतीजा है कि लोगो को लॉक डाउन में विधुत कटौती का सामना नही करना पड़ा।उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा राजस्थान प्रदेश चिकित्सा एवं पुलिस विभाग के स्थाई ओर संविदा कर्मचारियो के लिये कोरोना संक्रमण की स्थिति में राशि 50 लाख रूपए के बीमे की घोषणा की है, साथ ही वेतन स्थगन आदेश से मुक्त रखा गया है। लेकिन बिजली विभाग जो कि अतिआवश्यक सेवाओ में होने के बावजूद भी इस कोरोनाकाल में माह मार्च 2020 के वेतन का कुछ हिस्सा स्थगित करना विधुत निगमो के कर्मचारियो, अभियंताओ व अधिकारियो के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने जैसा हैं।
जबकि पूरे राजस्थान के लाॅक डाउन के दौरान कई तकनीकी कर्मचारी दुर्घटना एवं हादसे का शिकार हो गए है। इसके बावजुद इन कर्मचारियो को 50 लाख रूपए के बीमा पाॅलिसी में लाभ नहीं मिलना दुःखद है। कोरोना संक्रमण में लॉक डाऊन के दौरान भी बिजली विभाग के पांचो कंपनियो के अभियन्ता व तकनीकी कर्मचारी भी पुलिस विभाग व चिकित्सा विभाग के समान ही सातो दिन 24 घंटे अपनी ड्यूटी पर तैनात है तथा जनता को सुचारू रूप से बिजली पहुँचा रहे है। इस दोरान ड्यूटी के दोरान कोरोना संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में विद्युतकर्मियो को50 लाख रूपए के बीमा पाॅलिसी में सम्मलित किया जाना जरूरी हैं।
उन्होंने विद्युत निगम के कर्मचारियो, अभियंताओ, अधिकारियो के पुलिस व चिकित्सा विभाग की भाँति वेतन स्थगन से मुक्त रखने व कोरोना कर्मवीर का दर्जा देते हुए 50 लाख रूपए वाली बीमा योजना में शामिल करने, मार्च माह का स्थगित किया हुआ वेतन जारी करने की मांग की। साथ ही मांग नहीं माने जाने की स्थिति में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
भगवान परशुराम के बारे में कुछ रोचक तथ्य
।। भगवान परशुराम जयंती विशेष ।।
भगवान परशुराम त्रेता युग (रामायण काल) में एक ब्राह्मण ऋषि के यहां जन्मे थे। वह भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इंदौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ था। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार थे। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम कहलाए। वे जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये। आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से शार्ङ्ग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ। तदनन्तर कैलाश गिरिश्रृंग पर स्थित भगवान शंकर के आश्रम में विद्या प्राप्त कर विशिष्ट दिव्यास्त्र विद्युदभि नामक परशु प्राप्त किया। शिवजी से उन्हें श्रीकृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच, स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए। चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें त्रेता में रामावतार होने पर तेजोहरण के उपरान्त कल्पान्त पर्यन्त तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया।
वे शस्त्रविद्या के महान गुरु थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण व कर्ण को शस्त्रविद्या प्रदान की थी। उन्होंने एकादश छन्दयुक्त "शिव पंचत्वारिंशनाम स्तोत्र" भी लिखा। इच्छित फल-प्रदाता परशुराम गायत्री है-"ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि, तन्नोपरशुराम: प्रचोदयात्।" वे पुरुषों के लिये आजीवन एक पत्नीव्रत के पक्षधर थे।
*★★★पौरोणिक परिचय★★★*
परशुरामजी का उल्लेख रामायण, महाभारत, भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक ग्रन्थों में किया गया है। वे अहंकारी और धृष्ट हैहय वंशी क्षत्रियों का पृथ्वी से २१ बार संहार करने के लिए प्रसिद्ध हैं। वे धरती पर वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना चाहते थे। कहा जाता है कि भारत के अधिकांश ग्राम उन्हीं के द्वारा बसाये गये। जिस मे कोंकण, गोवा एवं केरल का समावेश है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान परशुराम ने तीर चला कर गुजरात से लेकर केरल तक समुद्र को पिछे धकेलते हुए नई भूमि का निर्माण किया। और इसी कारण कोंकण, गोवा और केरल मे भगवान परशुराम वंदनीय है। वे भार्गव गोत्र की सबसे आज्ञाकारी सन्तानों में से एक थे, जो सदैव अपने गुरुजनों और माता पिता की आज्ञा का पालन करते थे। वे सदा बड़ों का सम्मान करते थे और कभी भी उनकी अवहेलना नहीं करते थे। उनका भाव इस जीव सृष्टि को इसके प्राकृतिक सौंदर्य सहित जीवन्त बनाये रखना था। वे चाहते थे कि यह सारी सृष्टि पशु-पक्षियों, वृक्षों, फल-फूल औए समूची प्रकृति के लिए जीवन्त रहे। उनका कहना था कि राजा का धर्म वैदिक जीवन का प्रसार करना है नाकि अपनी प्रजा से आज्ञापालन करवाना। वे एक ब्राह्मण के रूप में जन्में अवश्य थे लेकिन कर्म से एक क्षत्रिय थे। उन्हें भार्गव के नाम से भी जाना जाता है।
यह भी ज्ञात है कि परशुराम ने अधिकांश विद्याएँ अपनी बाल्यावस्था में ही अपनी माता की शिक्षाओं से सीख ली थीँ (वह शिक्षा जो ८ वर्ष से कम आयु वाले बालको को दी जाती है)। वे पशु-पक्षियों तक की भाषा समझते थे और उनसे बात कर सकते थे। यहाँ तक कि कई खूँखार वनैले पशु भी उनके स्पर्श मात्र से ही उनके मित्र बन जाते थे।
उन्होंने सैन्यशिक्षा केवल ब्राह्मणों को ही दी। लेकिन इसके कुछ अपवाद भी हैं जैसे भीष्म और कर्ण।
*उनके जाने-माने शिष्य थे―*
*भीष्म, द्रोण (कौरव-पाण्डवों के गुरु व अश्वत्थामा के पिता) एवं कर्ण।*
कर्ण को यह ज्ञात नहीं था कि वह जन्म से क्षत्रिय है। वह सदैव ही स्वयं को शुद्र समझता रहा लेकिन उनका सामर्थ्य छुपा न रह सका। उन्होंने परशुराम को यह बात नहीं बताई की वह शूद्र वर्ण के हैं, और भगवान परशुराम से शिक्षा प्राप्त कर ली। यदि कर्ण उन्हे अपने शुद्र होने की बात बता भी देते तो भी भगवान परशुराम कर्ण के तेज और सामर्थ्य को देख उन्हे सहर्ष शिक्षा देने को तैयार हो जाते। किन्तु जब परशुराम को इसका ज्ञान हुआ तो उन्होंने कर्ण को यह श्राप दिया की, उनके सिखाये हुए ज्ञान की जब कर्ण को सर्वाधिक आवश्यकता होगी, तब वह ज्ञान उसके किसी काम नहीं आएगा। इसलिए जब कुरुक्षेत्र के युद्ध में कर्ण और अर्जुन आमने सामने होते है तब वह अर्जुन द्वारा मार दिया जाता है, क्योंकि उस समय कर्ण को ब्रह्मास्त्र चलाने का ज्ञान, ध्यान में ही नहीं रहा।
*★★★इतिहास★★★*
प्राचीन काल में कन्नौज में गाधि नाम के एक राजा राज्य करते थे। उनकी सत्यवती नाम की एक अत्यन्त रूपवती कन्या थी। राजा गाधि ने सत्यवती का विवाह भृगुनन्दन ऋषीक के साथ कर दिया। सत्यवती के विवाह के पश्चात् वहाँ भृगु ऋषि ने आकर अपनी पुत्रवधू को आशीर्वाद दिया और उससे वर माँगने के लिये कहा। इस पर सत्यवती ने श्वसुर को प्रसन्न देखकर उनसे अपनी माता के लिये एक पुत्र की याचना की। सत्यवती की याचना पर भृगु ऋषि ने उसे दो चरु पात्र देते हुये कहा कि जब तुम और तुम्हारी माता ऋतु स्नान कर चुकी हो तब तुम्हारी माँ, पुत्र की इच्छा लेकर पीपल का आलिंगन करना और तुम उसी कामना को लेकर गूलर का आलिंगन करना। फिर मेरे द्वारा दिये गये इन चरुओं का सावधानी के साथ अलग-अलग सेवन कर लेना। इधर जब सत्यवती की माँ ने देखा कि भृगु ने अपने पुत्रवधू को उत्तम सन्तान होने का चरु दिया है ,तो उसने अपने चरु को अपनी पुत्री के चरु के साथ बदल दिया। इस प्रकार सत्यवती ने अपनी माता वाले चरु का सेवन कर लिया। योगशक्ति से भृगु को इस बात का ज्ञान हो गया और वे अपनी पुत्रवधू के पास आकर बोले कि पुत्री! तुम्हारी माता ने तुम्हारे साथ छल करके तुम्हारे चरु का सेवन कर लिया है। इसलिये अब तुम्हारी सन्तान ब्राह्मण होते हुये भी क्षत्रिय जैसा आचरण करेगी और तुम्हारी माता की सन्तान क्षत्रिय होकर भी ब्राह्मण जैसा आचरण करेगी। इस पर सत्यवती ने भृगु से विनती की कि आप आशीर्वाद दें कि मेरा पुत्र ब्राह्मण का ही आचरण करे, भले ही मेरा पौत्र क्षत्रिय जैसा आचरण करे। भृगु ने प्रसन्न होकर उसकी विनती स्वीकार कर ली। समय आने पर सत्यवती के गर्भ से जमदग्नि का जन्म हुआ। जमदग्नि अत्यन्त तेजस्वी थे। बड़े होने पर उनका विवाह प्रसेनजित की कन्या रेणुका से हुआ। रेणुका से उनके पाँच पुत्र हुए जिनके नाम थे - रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्वानस और परशुराम।
श्रीमद्भागवत में दृष्टान्त है कि गन्धर्वराज चित्ररथ को अप्सराओं के साथ विहार करता देख हवन हेतु गंगा तट पर जल लेने गई रेणुका आसक्त हो गयी, और कुछ देर तक वहीं रुक गयीं। हवन काल व्यतीत हो जाने से क्रुद्ध मुनि जमदग्नि ने अपनी पत्नी के आर्य मर्यादा विरोधी आचरण एवं मानसिक व्यभिचार करने के दण्डस्वरूप सभी पुत्रों को माता रेणुका का वध करने की आज्ञा दी।
अन्य भाइयों द्वारा ऐसा दुस्साहस न कर पाने पर पिता के तपोबल से प्रभावित परशुराम ने उनकी आज्ञानुसार माता का शिरोच्छेद एवं उन्हें बचाने हेतु आगे आये अपने समस्त भाइयों का वध कर डाला। उनके इस कार्य से प्रसन्न जमदग्नि ने जब उनसे वर माँगने का आग्रह किया तो परशुराम ने सभी के पुनर्जीवित होने एवं उनके द्वारा वध किए जाने सम्बन्धी स्मृति नष्ट हो जाने का ही वर माँगा।
*★★★पिता जमदग्नि की हत्या और परशुराम का प्रतिशोध संपादित करें★★★*
कथानक है कि हैहय वंशाधिपति कार्त्तवीर्यअर्जुन (सहस्त्रार्जुन) ने घोर तप द्वारा भगवान दत्तात्रेय को प्रसन्न कर एक सहस्त्र भुजाएँ तथा युद्ध में किसी से परास्त न होने का वर पाया था। संयोगवश वन में आखेट करते वह जमदग्निमुनि के आश्रम जा पहुँचा और देवराज इन्द्र द्वारा उन्हें प्रदत्त कपिला कामधेनु की सहायता से हुए समस्त सैन्यदल के अद्भुत आतिथ्य सत्कार पर लोभवश जमदग्नि की अवज्ञा करते हुए कामधेनु को बलपूर्वक छीनकर ले गया।
कुपित परशुराम ने फरसे के प्रहार से उसकी समस्त भुजाएँ काट डालीं व सिर को धड़ से पृथक कर दिया। तब सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने प्रतिशोध स्वरूप परशुराम की अनुपस्थिति में उनके ध्यानस्थ पिता जमदग्नि की हत्या कर दी। रेणुका पति की चिताग्नि में प्रविष्ट हो सती हो गयीं। इस काण्ड से कुपित परशुराम ने पूरे वेग से महिष्मती नगरी पर आक्रमण कर दिया और उस पर अपना अधिकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक पूरे इक्कीस बार इस पृथ्वी से क्षत्रियों का विनाश किया। यही नहीं उन्होंने हैहय वंशी क्षत्रियों के रुधिर से स्थलत पंचक क्षेत्र के पाँच सरोवर भर दिये और पिता का श्राद्ध सहस्त्रार्जुन के पुत्रों के रक्त से किया। अन्त में महर्षि ऋचीक ने प्रकट होकर परशुराम को ऐसा घोर कृत्य करने से रोका।
इसके पश्चात उन्होंने अश्वमेघ महायज्ञ किया और सप्तद्वीप युक्त पृथ्वी महर्षि कश्यप को दान कर दी। केवल इतना ही नहीं, उन्होंने देवराज इन्द्र के समक्ष अपने शस्त्र त्याग दिये और सागर द्वारा उच्छिष्ट भूभाग महेन्द्र पर्वत पर आश्रम बनाकर रहने लगे।
*★★★हैहयवंशी क्षत्रियों का विनाश★★★*
माना जाता है कि परशुराम जी ने 21 बार हैहयवंशी क्षत्रियों को समूल नष्ट किया था। क्षत्रियों का एक वर्ग है जिसे हैहयवंशी समाज कहा जाता है यह समाज आज भी है। इसी समाज में एक राजा हुआ था सहस्त्रार्जुन। परशुराम ने इसी राजा और इसके पुत्र और पौत्रों का वध किया था और उन्हें इसके लिए 21 बार युद्ध करना पड़ा था।
*★कौन था सहस्त्रार्जुन ? ★*
सहस्त्रार्जुन एक चन्द्रवंशी राजा था जिसके पूर्वज थे महिष्मन्त। महिष्मन्त ने ही नर्मदा के किनारे महिष्मती नामक नगर बसाया था। इन्हीं के कुल में आगे चलकर दुर्दुम के उपरान्त कनक के चार पुत्रों में सबसे बड़े कृतवीर्य ने महिष्मती के सिंहासन को सम्हाला। भार्गव वंशी ब्राह्मण इनके राज पुरोहित थे। भार्गव प्रमुख जमदग्नि ॠषि (परशुराम के पिता) से कृतवीर्य के मधुर सम्बन्ध थे। कृतवीर्य के पुत्र का नाम भी अर्जुन था। कृतवीर्य का पुत्र होने के कारण ही उन्हें कार्त्तवीर्यार्जुन भी कहा जाता है। कार्त्तवीर्यार्जुन ने अपनी अराधना से भगवान दत्तात्रेय को प्रसन्न किया था। भगवान दत्तात्रेय ने युद्ध के समय कार्त्तवीर्याजुन को हजार हाथों का बल प्राप्त करने का वरदान दिया था, जिसके कारण उन्हें सहस्त्रार्जुन या सहस्रबाहु कहा जाने लगा। सहस्त्रार्जुन के पराक्रम से रावण भी घबराता था।
*★युद्ध का कारण★*
ऋषि वशिष्ठ से शाप का भाजन बनने के कारण सहस्त्रार्जुन की मति मारी गई थी। सहस्त्रार्जुन ने परशुराम जी के पिता जमदग्नि के आश्रम में एक कपिला कामधेनु गाय को देखा और उसे पाने की लालसा से वह कामधेनु को बलपूर्वक आश्रम से ले गया। जब परशुराम को यह बात पता चली तो उन्होंने पिता के सम्मान के खातिर कामधेनु वापस लाने की सोची और सहस्त्रार्जुन से उन्होंने युद्ध किया। युद्ध में सहस्त्रार्जुन की सभी भुजाएँ कट गईं और वह मारा गया।
तब सहस्त्रार्जुन के पुत्रों ने प्रतिशोधवश परशुराम की अनुपस्थिति में उनके पिता जमदग्नि को मार डाला। परशुराम की माँ रेणुका पति की हत्या से विचलित होकर उनकी चिताग्नि में प्रविष्ट हो सती हो गयीं। इस घोर घटना ने परशुराम को क्रोधित कर दिया और उन्होंने संकल्प लिया-"मैं हैहय वंश के सभी क्षत्रियों का नाश करके ही दम लूँगा"। उसके बाद उन्होंने अहंकारी और दुष्ट प्रकृति के हैहयवंशी क्षत्रियों से 21 बार युद्ध किया। क्रोधाग्नि में जलते हुए परशुराम ने सर्वप्रथम हैहयवंशियों की महिष्मती नगरी पर अधिकार किया तदुपरान्त कार्त्तवीर्यार्जुन का वध। कार्त्तवीर्यार्जुन के दिवंगत होने के बाद उसके पाँच पुत्र जयध्वज, शूरसेन, शूर, वृष और कृष्ण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते रहे।
*★★★दन्तकथाएँ★★★*
ब्रह्मवैवर्त पुराण में कथानक मिलता है कि कैलाश स्थित भगवान शंकर के अन्त:पुर में प्रवेश करते समय गणेश जी द्वारा रोके जाने पर परशुराम ने बलपूर्वक अन्दर जाने की चेष्ठा की। तब गणपति ने उन्हें स्तम्भित कर अपनी सूँड में लपेटकर समस्त लोकों का भ्रमण कराते हुए गोलोक में भगवान श्रीकृष्ण का दर्शन कराके भूतल पर पटक दिया। चेतनावस्था में आने पर कुपित परशुरामजी द्वारा किए गए फरसे के प्रहार से गणेश जी का एक दाँत टूट गया, जिससे वे एकदन्त कहलाये।
*★★★रामायण काल★★★*
उन्होंने त्रेतायुग में रामावतार के समय शिवजी का धनुष भंग होने पर आकाश-मार्ग द्वारा मिथिलापुरी पहुँच कर प्रथम तो स्वयं को "विश्व-विदित क्षत्रिय कुल द्रोही" बताते हुए "बहुत भाँति तिन्ह आँख दिखाये" और क्रोधान्ध हो "सुनहु राम जेहि शिवधनु तोरा, सहसबाहु सम सो रिपु मोरा" तक कह डाला। तदुपरान्त अपनी शक्ति का संशय मिटते ही वैष्णव धनुष श्रीराम को सौंप दिया और क्षमा याचना करते हुए "अनुचित बहुत कहेउ अज्ञाता, क्षमहु क्षमामन्दिर दोउ भ्राता" तपस्या के निमित्त वन को लौट गये। रामचरित मानस की ये पंक्तियाँ साक्षी हैं- "कह जय जय जय रघुकुलकेतू, भृगुपति गये वनहिं तप हेतू"। वाल्मीकि रामायण में वर्णित कथा के अनुसार दशरथनन्दन श्रीराम ने जमदग्नि कुमार परशुराम का पूजन किया और परशुराम ने रामचन्द्र की परिक्रमा कर आश्रम की ओर प्रस्थान किया।
जाते-जाते भी उन्होंने श्रीराम से उनके भक्तों का सतत सान्निध्य एवं चरणारविन्दों के प्रति सुदृढ भक्ति की ही याचना की थी।
*★★★महाभारत काल★★★*
भीष्म द्वारा स्वीकार न किये जाने के कारण अंबा प्रतिशोध वश सहायता माँगने के लिये परशुराम के पास आयी। तब सहायता का आश्वासन देते हुए उन्होंने भीष्म को युद्ध के लिये ललकारा। उन दोनों के बीच २३ दिनों तक घमासान युद्ध चला। किन्तु अपने पिता द्वारा इच्छा मृत्यु के वरदान स्वरुप परशुराम उन्हें हरा न सके।
परशुराम अपने जीवन भर की कमाई ब्राह्मणों को दान कर रहे थे, तब द्रोणाचार्य उनके पास पहुँचे। किन्तु दुर्भाग्यवश वे तब तक सब कुछ दान कर चुके थे। तब परशुराम ने दयाभाव से द्रोणचार्य से कोई भी अस्त्र-शस्त्र चुनने के लिये कहा। तब चतुर द्रोणाचार्य ने कहा कि मैं आपके सभी अस्त्र-शस्त्र उनके मन्त्रों सहित चाहता हूँ ताकि जब भी उनकी आवश्यकता हो, प्रयोग किया जा सके। परशुरामजी ने कहा-"एवमस्तु!" अर्थात् ऐसा ही हो। इससे द्रोणाचार्य शस्त्र विद्या में निपुण हो गये।
परशुराम कर्ण के भी गुरु थे। उन्होने कर्ण को भी विभिन्न प्रकार कि अस्त्र शिक्षा दी थी और ब्रह्मास्त्र चलाना भी सिखाया था। लेकिन कर्ण एक सूत का पुत्र था, फिर भी यह जानते हुए कि परशुराम केवल ब्राह्मणों को ही अपनी विधा दान करते हैं, कर्ण ने छल करके परशुराम से विधा लेने का प्रयास किया। परशुराम ने उसे ब्राह्मण समझ कर बहुत सी विद्यायें सिखायीं, लेकिन एक दिन जब परशुराम एक वृक्ष के नीचे कर्ण की गोदी में सर रखके सो रहे थे, तब एक भौंरा आकर कर्ण के पैर पर काटने लगा, अपने गुरुजी की नींद में कोई अवरोध न आये इसलिये कर्ण भौंरे को सेहता रहा, भौंरा कर्ण के पैर को बुरी तरह काटे जा रहा था, भौरे के काटने के कारण कर्ण का खून बहने लगा। वो खून बहता हुआ परशुराम के पैरों तक जा पहुँचा। परशुराम की नींद खुल गयी और वे इस खून को तुरन्त पहचान गये कि यह खून तो किसी क्षत्रिय का ही हो सकता है जो इतनी देर तक बगैर उफ़ किये बहता रहा। इस घटना के कारण कर्ण को अपनी अस्त्र विद्या का लाभ नहीं मिल पाया।
एक अन्य कथा के अनुसार एक बार गुरु परशुराम कर्ण की एक जंघा पर सिर रखकर सो रहे थे। तभी एक बिच्छू कहीं से आया और कर्ण की जंघा पर घाव बनाने लगा। किन्तु गुरु का विश्राम भंग ना हो, इसलिये कर्ण बिच्छू के दंश को सहता रहा। अचानक परशुराम की निद्रा टूटी और ये जानकर की एक ब्राम्हण पुत्र में इतनी सहनशीलता नहीं हो सकती कि वो बिच्छू के दंश को सहन कर ले। कर्ण के मिथ्याभाषण पर उन्होंने उसे ये श्राप दे दिया कि जब उसे अपनी विद्या की सर्वाधिक आवश्यकता होगी, तब वह उसके काम नहीं आयेगी।
*★★★विष्णु अवतार★★★*
भृगुश्रेष्ठ महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को विश्ववन्द्य महाबाहु परशुराम का जन्म हुआ था। वे भगवान विष्णु के आवेशावतार थे।
*★कल्कि पुराण★*
कल्कि पुराण के अनुसार परशुराम, भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के गुरु होंगे और उन्हें युद्ध की शिक्षा देंगे। वे ही कल्कि को भगवान शिव की तपस्या करके उनके दिव्यास्त्र को प्राप्त करने के लिये कहेंगे।
*★मार्शल आर्ट में योगदान★*
भगवान परशुराम शस्त्र विद्या के श्रेष्ठ जानकार थे। परशुराम केरल के मार्शल आर्ट कलरीपायट्टु की उत्तरी शैली वदक्कन कलरी के संस्थापक आचार्य एवं आदि गुरु हैं।वदक्कन कलरी अस्त्र-शस्त्रों की प्रमुखता वाली शैली है। भगवान परशुराम को मार्शल आर्ट का जनक माना जाता है।🙏
*★★★ भगवान परशुराम के विशेष मंत्र★★★*
*मंत्र इस प्रकार हैं ―*
1. 'ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात्।।'
2. 'ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम: प्रचोदयात्।।'
3. 'ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नम:।।'
रविवार, 26 अप्रैल 2020
लोकडाउन में बहुत सरल व सिर्फ परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में की शादी
कोरोना संकट में दिए 5 लाख 20 हजार रूपए राहत कोष में दान।

जोधपुर के वरुण धनाडिया ने कोरोना महामारी के संक्रमण से लड़ने में दिन रात एक कर पहले गरीबों और जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन बांटा, फिर समाज के प्रबुद्ध जनों को कोरोना के विरूद्ध संदेश देने के लिए एक सूत्र में बांधा, फिर आरोग्य सेतु ऐप को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रयोजन किए और अब अपने बुजुर्ग दादा जी की बात मानते हुए पूर्व में तय तिथि पर विवाह तो किया परंतु प्रधानमंत्री Narendra Modi जी से प्रेरित होकर बहुत ही साधारण ढ़ंग से विवाह रचा कर विवाह पर आने वाले खर्च को PM Cares कोष में (4 लाख 1 हज़ार) और मुख्यमंत्री सहायता कोष में (1 लाख 1 हज़ार) सहायता राशी के रूप में देकर एक अदभुत उदाहरण सबके सामने प्रस्तुत किया है, जो कि बहुत ही प्रेरणात्मक है।
वरुण एक युवा नेता है और समाज सेवा से जुड़े काम करते रहते है। वरुण जी का अपने सामाजिक दायित्व के प्रति सजग होकर कोरोना से लड़ने का जज़्बा बहुत ही सराहनीय है। छोटे भाई वरुण को नव विवाह की बहुत बहुत बधाई और आने वाले समृद्ध दांपत्य जीवन की ढेरों शुभकामनाएं।
#IndiaFightsCorona
भारतीय जनता पार्टी ने कोरोना वॉरियर्स का किया सम्मान
मास्क व सेनेटाइजर का वितरण भी जारी
भारतीय जनता पार्टी द्वारा शनिवार को सफाई क्षेत्र के कोरोना वॉरियर्स का भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेश मोदी व नेता प्रतिपक्ष पृथ्वीराज चंडक के नेतृत्व में भाजपा पार्षद दल द्वारा सम्मान व बहुमान किया गया।
नगर परिषद उपनेता प्रतिपक्ष हरीश सोनी ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना महामारी घोषित करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू के साथ ही लॉकडाउन घोषित किया गया था। उसके बाद से ही विपरीत हालातों में भी शहर की सफाई व्यवस्था को सुचारू रूप से रखते हुए नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों द्वारा इस महामारी दौरान भी सेवा का भाव मन मे रखते हुए कोरोना वॉरियर्स भूमिका बखूबी निभाते हुए शहर की सफाई व्यवस्था सुचारू रखी।
जिसके चलते इन कोरोना वॉरियर्स का हौसला अफजाई करने के लिए आज नगर परिषद आयुक्त, सफाई निरीक्षक एवं सफाई कर्मचारी प्रतिनिधि जमादारों को माला व साफा पहनाकर समानित किया गया तथा जमादारों को उनके क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए मास्क का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में पार्षद कमला देवी, दरिया चौधरी, उषा भार्गव, प्रकाश खत्री, सुनील सिंघवी, रमेश सिंह ईन्दा, खेतपुरी, कैलाश आचार्य, लक्ष्मण जीनगर, बांकाराम चौधरी, ओमप्रकाश जाटोल, नरपतसिंह धारा, लक्ष्मण सियाग, दुर्गेश माली, धर्मेंद्र फुलवरिया ने सहयोग किया।
राजस्थान बोर्ड 10वीं का छात्र बोला- परीक्षा रद्द कर सबको पास कर दो, शिक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब
राजस्थान बोर्ड 10वीं का छात्र बोला- परीक्षा रद्द कर सबको पास कर दो, शिक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब
24 Apr. 2020
RBSE 10th Exam 2020: राजस्थान बोर्ड 10वीं का छात्र बोला- परीक्षा रद्द कर सबको पास कर दो, शिक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब
RBSE 10th Exam 2020: राजस्थान बोर्ड 10वीं और 12वीं के लाखों छात्र जहां बेसब्री के साथ अपने शेष पेपरों की नई तिथियों के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं वहां लॉकडाउन और कोरोना वायरस से पैदा हुई स्थितियों के चलते राज्य में पहले से 9वीं और 11वीं कक्षा के सभी छात्रों को अगली क्लास में प्रमोट कर दिया गया है। इस बीच राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) के कक्षा 10वीं के छात्र ने शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासारा से ट्विटर पर अनुरोध करते हुए कहा 'कृपया शेष बची परीक्षाओं को रद्द कर दें और सभी बच्चों को अगली क्लास में प्रमोट कर दें। लॉकडाउन की स्थित में हम बहुत कंफ्यूज हैं। बचे हुए पेपरों को लेकर बहुत परेशान हैं।'
इसके जवाब में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासारा ने कहा, 'बेटा, कंफ्यूज और परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। अपनी पढ़ाई जारी रखें। परीक्षाएं जल्द ही शुरू होंगी।'
कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन के चलते राजस्थान में 10वीं 12वीं की बोर्ड लटकी हुई हैं। कई विषयों के पेपर अभी बाकी हैं। कोरोना की स्थिति के चलते इन्हें मार्च में ही स्थगित करना पड़ा था। फिलहाल बोर्ड के परीक्षार्थियों को घर में रहकर ही शेष रहे पेपरों के अध्ययन की सलाह दी गई है।
राजस्थान बोर्ड की परीक्षा में 10वीं और 12वीं में इस बार कुल 20.50 परीक्षार्थी पंजीकृत किए गए हैं। इनमें 10वीं के 11.35 लाख और 12वीं के 8.67 लाख विद्यार्थी हैं। बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षाएं 12 मार्च से शुरू हुई थी और 24 मार्च को पूरी होने वाली थी। जबकि कक्षा 12वीं की परीक्षाएं 5 मार्च से शुरू हो गई थी और 3 अप्रैल को पूरी होने वाली थी। बोर्ड ने शेष रही परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था।
वरिष्ठ उपाध्याय, प्रवेशिका और व्यावसायिक परीक्षा के स्टूडेंट्स भी आगे की परीक्षाओं की तिथियों के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। वरिष्ठ उपाध्याय में 3,847, प्रवेशिका में 6,972 और व्यवसायिक परीक्षा में 42,989 स्टूडेंट्स पंजीकृत हैं.
आजीवन अविवाहित रहे और बिना वेतन फ़ौज की नौकरी की लेफ्टिनेंट जनरल हनुत सिंह राठौड़
आजीवन अविवाहित रहे और बिना वेतन फ़ौज की नौकरी की लेफ्टिनेंट जनरल हनुत सिंह राठौड़
(वीर हनूत सिंह इस राजस्थानी संत ने तबाह किए थे 48 पाक टैंक)
राजस्थान की मिट्टी ने जहां महाराणा प्रताप और वीर दुर्गादास जैसे वीरों को जन्म दिया है वहीं भक्त शिरोमणि मीराबाई की भी जननी है। वीर हनूत सिंह में राजस्थानी मिट्टी के दोनों गुण थे। इन्हीं की अगुवाई में पूना हॉर्स रेजीमेंट ने वर्ष 1965 तथा 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान के 48 टैंक नष्ट कर दिए थे जिसके बाद पाक सेना के सामने हार स्वीकार करने के अतिरिक्त कोई ऑप्शन नहीं बचा।
ले. जनरल हनूत सिंह का जन्म 6 जुलाई 1933 को ले. कर्नल अर्जुन सिंह जी राठौड़ ठिकाना जसोल,राजस्थान के घर हुआ था। वह देश के पूर्व विदेश एवं रक्षामंत्री जसवंत सिंह के चचेरे भाई थे। देहरादून के कर्नन ब्राउन स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 1949 में एनडीए में दाखिल हुए। वहीं से उन्होंने सेना ज्वॉइन की। यहां वह सैकण्ड लेफ्टिनेंट पद पर नियुक्त हुए। इसके बाद वह सीढ़ी दर सीढ़ी तरक्की करते रहे।
भारत-पाक युद्ध में दिखाई ताकत-
भारत-पाक युद्ध में दिखाई ताकत-
वर्ष 1965 व 1971 में हनूत सिंह ने भारत-पाक युद्ध में पूना हॉर्स रेजीमेंट की ओर से भाग लिया। इनके नेतृत्व में ए.बी. तारपारे व सैकण्ड लेफ्टिनेंट अरूण क्षेत्रपाल ने युद्ध कौशल का परिचय देते हुए पाकिस्तान सेना के 48 टैंक ध्वस्त कर पाक सेना के छक्के छुड़ा दिए।
पाक ने कहा फक्र-ए-हिंद-
युद्ध में हनूत सिंह के कौशल से प्रभावित पाकिस्तान की यूनिट ने भारत की इस रेजीमेंट को फक्र-ए-हिंद के टाइटल से नवाजा जो कि भारतीय सेना के इतिहास में पहली बार किसी विरोधी सेना की ओर से नवाजा गया था। युद्ध में उन्हें बहादुरी दिखाने के लिए महावीर चक्र से भी नवाजा गया था।
आजीवन रहे बाल-ब्रहमचारी-
रेजीमेंट में हनूत सिंह गुरूदेव के नाम से जाने जाते थे। सभी लोग उन्हें यह कहते हुए सम्मान देते थे। उन्होंने शादी नहीं की। उनसे प्रभावित होकर उनकी यूनिट के अधिकतर अधिकारियों ने भी शादी नहीं की।
सिपाही से बन गए साधु-
उनका बचपन से ही आध्यात्म व योग की ओर रूझान था। सेना के दौरान उनका परिचय देहरादून के शैव बाल आश्रम से हुआ। सेना से रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने वहीं रहना शुरू कर दिया। उन्हें गुरूजी के नाम से जाना जाता था। शराब तथा मांस के वह सख्त खिलाफ थे।
देहरादून के बाल शिवयोगी से प्रभावित होकर उन्होंने उनसे दीक्षा ली। इसके बाद वह वहीं बस गए। वह वर्ष में दो महीने के लिए जोधपुर के बालासति आश्रम में आया करते थे। वहां भी वह परिवार से अधिक बात नहीं करते और अपनी आध्यात्मिक साधना में ही लीन रहते।
●सन् 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में महावीर चक्र विजेता जिन्हाेने अद्वितीय रणनीती से पाकिस्तान के 48 से अधिक टेंकाे काे नेस्तानाबूद कर दिया था।इस युद्ध के कारण ही भारतीय सेना लाहौर को घेरने में सफल हुई थी जिससे 1971 की लड़ाई में भारत पाकिस्तान के शकरगढ़ क्षेत्र में विजयी हुआ था।
अक्षय तृतीया की सबको शुभकामनाएं - ASO NEWS
समय के साथ बदलते - बदलते यह त्यौहार आखा तीज बण ग्या था पर अब इस त्यौहार का ही तीव्र गति से क्षय हो रहा है।
हमारे शहरी व पढे - लिखे समाज को इस का ना मतलब पता और ना महत्व।
खैर घणा सा मन्नै भी ना पता पर इतणा पता है कि इस दिन मेरी माँ खिच जरूर बणाया करती और खिच का सम्बंध सीधा हमारे अक्षय स्वास्थ्य से है।
अब आगे दो महीने गर्मी चरम पर होगी तथा हमारे शरीर को *जल* तथा शीध्र *सुपाच्य* भोजन की अधिक आवश्यकता होगी और वह भोजन है खिच, लापसी व दलिया आदि।
ये सब दूध, दही आदि मिला कर खाणे से शरीर तमनै धन्यवाद देगा।
सुन ल्यो इसके फायदे अर खाण के कायदे:-
गेँहू, बाजरा, मक्की, जौ आदि को दरदरा पीस कर तैयार किये जाने टुकड़ो को दलिया कहते हैं। इस दलिये को सादा या मनपसन्द दालों और सब्जियों के साथ पकाकर इसका सेवन किया जाता है।
दलिया को बनाने का तरीका बहुत ही आसान होता है. इसे दूध फलों और ड्राई फ्रुट के साथ बनाया जा सकता है। दलिया आप अपने स्वादानुसार बना सकते हैं जैसे कि मीठा या नमकीन। वहीं कई समृद्ध ग्रामीण लोगों द्वारा इसे दूध में भी बनाया जाता है, जबकि कई शहरी गरीब लोग इसे पानी में भी बनाकर खाते हैं।
गेँहू के पके हुए दलिये को मारवाड़ में " *थूल्ली* " कहते हैं। गेँहू के दलिये को छानकर एक समान आकार के दानों को अलग कर लिया जाता है, उसे " *बाट* " कहते है और उसी बाट को गुड़ के साथ पकाकर मांगलिक पकवान लापसी बनाई जाती है।
मक्की के पके हुए दलिये को " *घाट* " कहते हैं, उसे *छाछ* , *दही* और *सब्जियों* के साथ ठंडा या गर्म मौसम के अनुसार सेवन किया जाता है।
*खीच* या *खीचड़ा* :
साबुत गेँहू को अच्छी तरह से साफ करके उसे पानी से हल्का सा नम करके थोड़ी देर रखते हैं और बाद में उसे *हमामदस्ते* या ऊखल में मूसल से हल्का सा कूटते है, आजकल गरीब लोग इसे मिक्सर में थोड़ी देर चला बणाते हैं पर उससे इसकी गुणवत्ता कम हो जाती है, फिर उसे एक छाज में लेकर हाथ से मसलते हुए फटक कर उसके छिलके को अलग कर लेते हैं और वापस से *हमामदस्ते* या *ऊखल* में कूटकर उसके बड़े टुकड़े कर लेते हैं।
छिलके उतरे हुए इन बड़े टुकड़ों को साबुत मूंग के साथ पकाकर खीच या खीचड़ा बनाया जाता है। थाली में इस खीच को बहुत सारे देशी घी के साथ हाथों से अच्छी तरह से मथकर आटे व गुड़ से बनी " *गलवाणी* " के साथ इसका सेवन किया जाता है। राजस्थान में विशेषकर अक्षय तृतीया यानी *आखातीज* के दिन अवश्य ही बनाया जाता है।
*दलिया, खीच, खीचड़ा खाने के फायदे* :
दलिया हमारी सेहत के लिए बहुत ही लाभप्रद होता हैं, दलिया खाने से आपके शरीर को कई प्रकार से फायदा पहुंचते हैं हालांकि पश्चिमी जगत की खाणे का सामान बेचणे वाली कंपनियों ने यह *दुष्प्रचार* किया कि बीमार लोगों को ही दलिया खिलाया जाता है परन्तु ये धारणा गलत है और दलिया सभी लोगों स्वस्थ रहने के लिए इसे जरूर खाणा चाहिए।
दलिये में कई प्रकार के विटामिन और प्रोटीन पाये जाते है. इसके साथ ही दलिये में लो कैलोरी और ज्यादा फाइबर भी होता और ये दोनों चीजें शरीर के लिए लाभकारी होती है। दलिया आपके शरीर में कई प्रकार के पोषक तत्वों जो की कम होते हैं उनको पूरा भी करता है दलिये में आयरन, मैग्नीशियम,जस्ता, तांबा, फास्फोरस और प्रोटीन आदि भी होते हैं।
आजकल के दौर में बाहर का खाणा खाणे से हर किसी को कोलेस्ट्रॉल बढणे की समस्या आम है लेकिन शरीर में ज्यादा मात्रा में फाइबर होने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रण में रखा जा सकता है और दलिया व खिचड़ी में फाइबर होता हैं इसलिए इसको खाने से कोलेस्ट्रॉल अधिक होने की समस्या को कम किया जा सकता है इसके साथ ही दलिया खाने से मनुष्य को दिल से संबन्धित बीमारियां भी नहीं होती है।
आजकल के बच्चों में *अड़ंग-बड़ंग* खाणे से वजन बढ़ने की समस्या अधिक बढ़ रही हैं वहीं दलिये को सुबह के वक्त खाने से शरीर को पूरा आहार मिलता है क्योंकि इसमें कार्बोहाइड्रेट की सही मात्रा पाई जाती है जिससे वजन नहीं बढ़ता हैं और थोड़ा सा दलिया खाने से ही पेट भरा जाता हैं अर उनका वजन कोन्या बढता।
आजकल अधिक लोगों में हड्डियां कमजोर होने की समस्या पाई जा रही है अर दलिये को रोजाना खाने से हड्डियों में मजबूती आती है क्योंकि दलिये में मैग्नीशियम और कैल्शियम अधिक मात्रा में होते हैं। दलिया रोजाना खाने वालों को उम्र बढ़ने पर भी घुटनों में दर्द नहीं होता है। इसके साथ ही दलिया के सेवन से पथरी की परेशानी भी दूर होती है।
दलिया और साबुत अनाज में मैग्नीशियम पाया जाता है और मैग्नीशियम कई तरह के एंजाइम बनाता है, जो इंसुलिन के बनाने में कारगर होते हैं और साथ ही ये ग्लूकोज को भी ब्लड तक पहुंचाते हैं। रोजाना दलिया खाने से डायबिटीज होने की दिक्कत भी दूर होती है।
शरीर में आयरन की मात्रा थोड़ी होने से इसका असर हीमोग्लोबिन पर पड़ता है और हीमोग्लोबिन की कमी शरीर में हो जाती है। हीमोग्लोबिन की कमी से शरीर में कमजोरी और थकान आती है लेकिन दलिये में आयरन की मात्रा काफी होती है, जो बॉडी में हीमोग्लोबिन की मात्रा को सही कर देता है और ये शरीर के तापमान सहित मेटाबॉलिज्म को भी सही रखता है।
दलिया खाने से व्यक्ति पूरा दिन शरीर में ताकत अनुभव करता है, क्योंकि दलिये में कार्बोहाइड्रेट होता है। रोजाना इसको खाने से शरीर को कई तरह के विटामिन और मिनरल्स आदि मिलते है।
दलिया का रोजाना सेवन करने से पाचन तंत्र सही से कार्य करता है और फाइबर से भरपूर होने के कारण ये पेट के रोगों को आसानी से दूर करने में सहायता भी करता है। अर जै पेट सही तै सेहत सही✅।
दलिया एक प्रकार का पौष्टिक भोजन है जो पोषण की सभी जरूरतों को पूरा करता है और अगर आपको ज्यादा खाना खाना पसंद नहीं है, तो आप दलिया का सेवन कर शरीर को सभी जरूरी तत्व दे सकते हैं।
दलिये में पाए जाने वाले विटामिन और खनिज हमारे इम्युनिटी सिस्टम को मजबूती प्रदान करते हैं। इसलिए कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वाले लोगों को रोजाना दलिया खाना चाहिए।
इसमें मौजूद मैग्नीशियम न्यूरोट्रांसमीटर का अच्छा स्रोत हैं। जब शरीर न्यूरोट्रांसमीटर को रिलीज करता हैं, तो मन शांत होता हैं और इससे अच्छी नींद आती हैं। इसलिए जिन लोगों को नींद नहीं आती है वो इसको जरूर खाएं।
दलिया बहुत ही हल्का और स्वादिष्ट आहार हैं। इसे अधिक लोगों द्वारा सुबह खाया जाता है और इसे ज्यादातर सर्दियों में पसंद किया जाता हैं। एक शोध के अनुसार यह पता चला है कि इसे खाने से अच्छी नींद आती हैं और इसे रात में खाना भी अच्छा माना जाता है।
तो साथियों *बंद करो बिमारियों का रोणा,*
*खाओ देशी अर हो ज्याओ शुरू स्वस्थ होणा* ।
शनिवार, 25 अप्रैल 2020
सुप्रीम कोर्ट ने ST समुदाय के शत-प्रतिशत (100%) आरक्षण को खारिज करते हुए बताया गैर-कानूनी.
- आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में शिक्षक भर्ती में अनुसूचित जनजाति को उनके क्षेत्र में दिए जा रहे 100% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने 22 अप्रैल 2020 को ठहराया गैर-कानूनी ।
1. यह फैसला किसने सुनाया :-
- जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में बनाई गई पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक बेंच ने यह फैसला 22 अप्रैल ,2020 को सुनाया ।
2. क्या था पूरा मामला :-
- वर्ष 2000 में जब आंध्र प्रदेश और तेलंगाना एक थे ,इनका विभाजन नही हुआ था तब वहां के राज्यपाल ने एक आदेश जारी किया था के शिक्षकों की भर्ती में अनुसूचित जनजाति वाले क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति वाले लोगो को 100% आरक्षण दिया जाएगा ।
- सामान्य भाषा मे कहे तो अनुसूचित जनजाति वाले क्षेत्र में केवल अनुसूचीत जनजाति वाले लोग ही शिक्षक की नौकरी ले सकेंगे ,और वही लोग वहापे पढ़ाएंगे ।
3. यह आदेश राज्यपाल ने कैसे दिया :-
- हमारे संविधान में अनुसूचित जनजाति वाले क्षेत्रो के के संरक्षण और इन क्षेत्रो में कानून बनाने के लिए दो अनुसूची है :-
a. अनुसूची VI - इसमे केवल चार राज्य है , असम ,मेघालय, त्रिपुरा ,मिज़ोरम ।
b.अनुसूची V - इसमे 10 राज्य को रखा गया है ,जिसमे से एक आंध्र प्रदेश है ।
- इस अनुसूची का 5(1) पैराग्राफ (सामान्य भाषा मे ) यह कहता है के " राज्यपाल के पास यह विशेष अधिकार है के राज्य या केंद्र सरकार द्वारा इन क्षेत्रों के लिए बनाये गए कानूनों को राज्यपाल चाहे तो लागू होने से रोक सकता है ,या उसमे थोड़ा फेरबदल करके उसे लागू कर सकता है ।
- इसी में तहत राज्यपाल ने यह आदेश जारी किया था
- राज्यपाल का यह आदेश जारी करने के पीछे कारण बताए के दूसरे शिक्षक इन क्षेत्रों में नौकरी लेने के बाद यहां पढ़ाने के लिए स्कूल कभी नही आते , और यह क्षेत्र बहुत पिछड़ा है इसलिए यहां के लोगो के विकास के लिए उन्हें ही नौकरी देनी चाहिए ।
4. कुछ समय बाद यह मामला कोर्ट में पहुचा :-
-हाई कोर्ट का फैसला :- हाई कोर्ट ने इस आदेश को सही ठहराया और कहा के विशेष परिस्थितियों में यह आरक्षण दिया जा सकता है ।
-बादमे मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुचा और सुप्रीम कोर्ट ने इसपे निम्न फैसले दिए :-
- सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी जजमेंट को भी दोहराया है, जिसके अनुसार आरक्षण संवैधानिक रूप से वैध है अगर वह 50 प्रतिशत से आगे नहीं जाते हैं, और यह आदेश इसका उल्लघंन है ।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा ये कोई विशेष परिस्थिति नही है ,अगर शिक्षक नही आते तो उनपे करवाई की जाए
- कोर्ट ने कहा के पांचवी अनुसूची के तहत राज्यपाल केंद्र और राज्य के कानून को लागू होने से रोक सकता है , लेकिन वह नया कानून बनाके उसे लागू नही कर सकता है ।
- कोर्ट ने इसे तीन अनुच्छेदों का उल्लघन बताया है :-
अनुच्छेद 14 ,अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 , और कहा के यह एक प्रकार से दूसरे लोगो के नौकरी पाने के अवसर के प्रति भेदभाव था , इसलिए इसे खारिज कर दिया गया ।
NOTE:- आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के विभाजन 2 जून ,2014 को हुआ था और तेलंगाना नया राज्य बना था ।
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Ramayan Ka Corona connection || रामायण का कोरोना कनेक्शन
आजकल रामायण को ले कर एक पोस्ट बहुत चल रही है , जिसमे रामचरित्रमानस की कुछ चौपाई और दोहों को करोना से जोड़ा जा रहा है । जबकि इनका वास्तविक अर्थ वह बिल्कुल नही है जो बताया जा रहा है। आइये उनके असल अर्थ पर नजर डालें.
भावार्थ:-जो मूर्ख मनुष्य सब की निंदा करते हैं, वे चमगादड़ होकर जन्म लेते हैं।
इस का अर्थ है कि जो व्यक्ति सबकी निंदा करता है वह चमगादड़ होकर जन्म लेगा , उसका जीवन चमगादड़ जैसा होगा अर्थात जिस प्रकार चमगादड़ का मल मूत्र स्वयं उसके ही ऊपर गिर कर उसे ही दूषित करता है उसी प्रकार निंदक द्वारा की गई निंदा भी स्वयं निंदक के चरित्र को ही दूषित करती है , जिस प्रकार चमगादड़ दुनिया को उल्टी दृष्टि से देखता है वैसे ही निंदक भी दूसरों के व्यवहार को उल्टी दृष्टि से देखता है अर्थात वह दूसरो की अच्छाइयों में भी बुराई खोजता है ।
मोह सकल ब्याधिन्ह कर मूला। तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सूला॥
काम बात कफ लोभ अपारा। क्रोध पित्त नित छाती जारा॥
भावार्थ:-सब रोगों की जड़ मोह (अज्ञान) है। उन व्याधियों से फिर और बहुत से शूल उत्पन्न होते हैं। काम वात है, लोभ अपार (बढ़ा हुआ) कफ है और क्रोध पित्त है जो सदा छाती जलाता रहता है ।
जब गरुड़जी ने कागभुशुंडीजी से मानस रोगों के बारे में पूछा उस प्रसंग की यह चौपाई है , जहां कागभुशुंडीजी काम , क्रोध , लोभ की तुलना , वात , पित्त और कफ जनित रोगों से करते है ।
सनातन धर्म तीन शरीर होना बताता है ,
पहला कारण शरीर , जिसमे आत्मा फलीभूत होती है , इस शरीर का रोग स्वयं को शरीर समझना है जिसे #अविद्या कहते है ।
दूसरा सूक्ष्म शरीर है जिसमे मन आदि अंतःकरण आते है , काम , क्रोध , लोभ आदि इस सूक्ष्म शरीर के रोग है जिन्हें #आधि कहते है ।
तीसरा स्थूल शरीर है , वात ,पित्त , कफ , के असंतुलन और संक्रमण , संघात से इसमे रोग उत्तपन्न होते है जिन्हें #व्याधि कहा जाता है ।
जब कोई मनुष्य अविद्या , आधि एवं व्याधि इन तीनो रोगों से मुक्त होता है तब वह स्वरूप में अथवा स्व में स्थित होता है जिसे #स्वस्थ पुरुष कहते है ।
✍️Ashish Piplonia
परशुराम जयंती कब और क्यों मनाई जाती हैं इसका महत्व और शायरी मैसेज
परशुराम जयंती कब और क्यों मनाई जाती हैं इसका महत्व और शायरी मैसेज | Why Parshuram Jayanti Celebrated, Significance and Shayari Message in Hindi
भगवान परशुराम जिन्हें विष्णु जी का छठा अवतार कहा जाता है. परशुराम जयंती वैशाख माह के शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है. अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती के रूप में बनाया जाता है. इस दिन का विशेष महत्त्व होता है क्योकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन किये गए पुण्य का प्रभाव कभी ख़त्म नही होता है. भगवान परशुराम की माता का नाम रेणुका और पिता ऋषि जमदग्नि थे. वे उनकी चौथी संतान थे.
परशुराम का तेज और शौर्य ही था कि उन्होंने कार्तवीर्य सहस्रार्जुन का वध करके अराजकता को समाप्त किया तथा नैतिकता और न्याय का साथ दिया. भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में जन्म लिया उनका मुख्य उद्देश्य धर्मं की स्थापना और अधर्म को मिटाना था. इनकी गिनती हनुमान, महर्षि वेदव्यास, रजा बलि, विभीषण, अश्वत्थामा, ऋषि मार्कंडेय, कृपाचार्य जैसे अवतारों में होती है.
परशुराम पृथ्वी के पापबोझ को नष्ट करने और सभी प्रकार की बुराई को दूर करने के लिए आए थे. इस दिन उपवास रखना बहुत फायदेमंद माना जाता है. इस दिन से हिंदू संस्कृति के स्वर्ण युग की शुरुआत हुई है और इसे पूरे भारत में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. परशुराम जयंती पर दान और ब्राह्मण को भोजन भी कराया जाता है.
परशुराम जयंती क्यों मानते है. (Why Parshuram Jayanti Celebrated)
परशुराम को अपार ज्ञान था और वे एक महान योद्धा भी थे. वे मानव जाति के हित के लिए जीना चाहते थे. वे एक महान इंसान थे. परशुराम ने हमेशा जरूरतमंद लोगों की मदद की. इस दिन शुभ मुहूर्त देखे बिना ही कार्य किए जाते हैं क्योकि इस दिन को शुभ माना जाता है. परशुराम जयंती को हिंदुओं द्वारा समर्पण और उत्साह के साथ मनाया जाता है. मूल रूप से परशुराम का नाम राम था.
भगवान परशुराम की कहानी (Lord Parshuram Story)
भगवान परशुराम के के बारे में कुछ कहानियां बहुत प्रसिद्ध हैं. प्राचीन काल में महिष्मती नगरी नाम का एक शहर था. इस शहर पर हैहय वंश के कार्तवीर्य अर्जुन का शासन था. देवी पृथ्वी भगवान विष्णु के पास गई क्योंकि वह क्षत्रियों से परेशान थी. उसने उनसे मदद मांगी तभी भगवान विष्णु ने उसे वचन दिया कि वह क्षत्रियों को नष्ट करने के लिए जमदग्नि को एक पुत्र के रूप में जन्म लेगा. भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया और राजाओं को हराया.
परशुराम ने अर्जुन को मारा और 21 बार क्षत्रियों से पृथ्वी को मुक्त किया. उन्होंने सामंतपंचक जिले में पांच तालाबों को अपने खून से भर दिया. संत त्रिचिक ने परशुराम को ऐसा करने से रोका इसलिए उन्होंने पृथ्वी को संत कश्यप को उपहार में दिया और महेंद्र पर्वत पर रहने लगे.
जानापाव की पहाड़ी पर भगवान परशुराम का जन्म हुआ. यहाँ पर परशुराम के पिता ऋर्षि जमदग्नि का आश्रम था. कहते हैं कि प्राचीन काल में इंदौर के पास ही मुंडी गांव में स्थित रेणुका पर्वत पर माता रेणुका भी रहती थीं.
महत्वपूर्ण तथ्य (Interesting Facts)
- भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार थे.
- पिता की आज्ञा का पालन करते हुए उन्हें अपनी माता का वध करना पडा और पिता से ही वरदान मांगकर उन्होंने अपनी माता को पुनः जीवित किया.
- खास बात यह है की अक्षय तृतीय को दो अन्य भगवान नर -नारायण और हयग्रीव का भी अवतार हुआ था.
- परशुराम जी ने अपने बाल्य जीवन में भोलेनाथ की महा तपस्या की जिससे उनका नाम परशुराम पडा.
- परशुराम के अनेक नाम जैसे – रामभद्र, भृगुपति, भागर्व, भृगुवंशी से जाना जाता है.
- परशुराम वीरता के प्रमुख है.
- परशुराम जी जन्म से ब्राह्मण थे.
- विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म श्रीराम के पूर्व हुआ था. श्रीराम सातवें अवतार थे. वर्तमान शोधकर्ताओं के शोधानुसार श्रीराम का जन्म 5114 ईसा पूर्व हुआ था. दूसरी ओर माथुर चतुर्वेदी ब्राह्मणों के ‘इतिहास-लेखक’ के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म 5142 वि.पू. वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन रात्रि के प्रथम प्रहर में हुआ था.
- भगवान परशुराम का जन्म 6 उच्च ग्रहों के योग में हुआ, इसलिए वह तेजस्वी, वर्चस्वी, और ओजस्वी महापुरुष बने.
परशुराम जयंती के लिए शायरी मैसेज (Parshuram Jayanti Shayari Messages)
अंगारे नहीं फौलाद है हम
परशुराम की औलाद है हम
ब्राह्मण वंश के हम चीते हैं
जो खुद के जिगर पर जीते हैं
जय श्री परशुराम
ब्राह्मण ” बदलते हैँ तो नतीजे बदल जाते हैँ,
सारे मंजर, सारे अंजाम बदल जाते हैँ,
कौन कहता है परशुराम फिर नहीं पैदा होते..?
पैदा तो होते है बस नाम बदल जाते हैँ.
बन्दूक????का जमाना है इसलिए
तलवारे????म्यांन मे रख कर बैठे है.
वरना जितने तूने बाइक???? से किलोमीटर????नही काटे,
उतने हमारे पूर्वजो????ने सर????काटे हैं!!
जय दादा परशुराम की.!
Parshuram Jayanti Status
परशुराम का फरसा एक बार चमकाना होगा
जहाँ राम ने जन्म लिया मंदिर वही बनाना होगा
जय श्री राम
जय श्री परशुराम
ये पंडित हिट तो नहीं होना चाहता..
परशुराम दादा पर इतना
काबिल जरूर बना दे की…..
मेरे दोस्त लोग छाती ठोक के कहे…
ये पंडित यार है अपना यार
जय दादा परशुराम
शेरनी की नस्लें, सियार पैदा नहीं करती
ब्राह्मण की मां गद्दार पैदा नहीं करती
सुनो दुनिया वालो…!
भेड़ियों की ताकत से चीते मरा नहीं करते और
परशुराम के दीवाने किसी से डरा नहीं करते…
Jai Parshuram Status
अंगारे नहीं फौलाद है हम
परशुराम की औलाद है हम
ब्राह्मण वंश के हम चीते हैं
जो खुद के जिगर पर जीते हैं
बहुत राम बन लिए हिंदुओं अब
परशुराम बनने का समय आ गया है,
घर घर भगवा छाएगा राम राज फिर आएगा.





































