पेज

शुक्रवार, 29 मई 2020

शिक्षामंत्री डोटासरा बोले- रीट एग्जाम सितंबर में ही करवाएंगे 10वीं व 12वीं की परीक्षा के लिए सिर्फ 10 दिन का वक्त चाहिए

 शिक्षामंत्री डोटासरा बोले- रीट एग्जाम सितंबर में ही करवाएंगे 10वीं व 12वीं की परीक्षा के लिए सिर्फ 10 दिन का वक्त चाहिए*
*जुलाई माह से शुरू होगा स्कूल में नया सत्र, सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बंद विद्यालयों का कर सकते हैं उपयोग*👇

दैनिक भास्कर
May 26, 2020, 05:00 AM IST
सीकर. शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सितंबर माह में हर हाल में में रीट-2020 परीक्षा आयोजित करवाएंगे। रीट भर्ती को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है। हमारा यही प्रयास रहेगा कि सितंबर के पहले सप्ताह में रीट की परीक्षा आयोजित हो। वहीं सेकेंड ग्रेड की शिक्षक भर्ती परीक्षा भी जल्द आयोजित होगी। सबसे पहली प्राथमिकता बोर्ड की परीक्षाओं को आयोजित करवाना है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से चर्चा के उपरांत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए थे।
बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी शुरू हो गई है। 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए सिर्फ 10 दिन का वक्त चाहिए। कोविड-19 हर जिले में तेजी से फैल रहा है इसलिए अभी सेंटर बढ़ाने का कार्य चल रहा है। जल्द ही परीक्षाओं की तिथि भी घोषित कर सकते हैं। 
शिक्षामंत्री डोटासरा ने कहा कि लॉकडाउन के चलते शिक्षा कार्य काफी प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को भी परेशानी हो रही है। अभी तक की तैयारी के अनुसार स्कूलों का नया सत्र 1 जुलाई से ही शुरू होगा। अभी तक सत्र आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। हम तैयारी कर रहे हैं कि किस तरह से बच्चों की कक्षाएं लगाई जा सके। इसके लिए अगर सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत पड़ेगी तो प्रदेशभर में बंद पड़े स्कूलों को फिर से काम में लिया जा सकता है।
इसके साथ ही सभी स्कूलों में सैनिटाइजर और मास्क की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों से बात कर रहे हैं। इस बार सोशल डिस्टेंस के साथ ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया कार्यक्रम भी शुरू कर सकते हैं। 
स्कूल खुलने के बाद भी चलेगा स्माइल प्रोजेक्ट 
ऑनलाइन पढ़ाई के लिए स्माइल प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। यह प्रोजेक्ट लॉकडाउन समाप्त होने के बाद भी जारी रहेगा। स्माइल प्रोजेक्ट को स्कूल खोलने के बाद भी बंद नहीं किया जाएगा। शिक्षा राज्यमंत्री गोविंदसिंह डोटासरा का कहना है कि दूरदर्शन और आकाशवाणी के जरिए जो पढ़ाई करवाई जा रही है उससे अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।


मंगलवार, 26 मई 2020

जेईई मेन 18 तथा नीट 26 जुलाई से

जेईई मेन 18 तथा नीट 26 जुलाई से

कोटा.
 नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नेशनल इलेजिब्लिटी कम ऐंट्रेंस टेस्ट (नीट यूजी ) तथा सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इन दोनों परीक्षाओं में 26 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होंगे।

*नीट यूजी*
कॅरियर काउंसलिंग एक्सपर्ट पारिजात मिश्रा ने बताया कि नीट यूजी 26 जुलाई को दोपहर 2 से शाम 5 बजे के बीच ऑफ लाइन मोड में होगी। परीक्षा के 15 दिन पहले प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। जिसमें परीक्षा केन्द्र का शहर व स्थान बताया जाएगा।
इस मेडिकल प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ऑल इंडिया गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की 15 प्रतिशत, स्टेट कोटे की 85 प्रतिशत, सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी की 100 प्रतिशत, एएफ एमसी की 100 प्रतिशत, प्राइवेट डीम्ड यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस की सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। एम्स व जिपमैर जैसे सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट के प्रवेश भी इस वर्ष पहली बार इसी परीक्षा के माध्यम से होंगे।
आयुष कोर्स की 100 प्रतिशत तथा वेटेनरी कोर्स की 15 प्रतिशत सीटों पर भी इसी परीक्षा के माध्यम से प्रवेश होंगे। इस वर्ष 543 मेडिकल कॉलेजों की 79 हजार 855 एमबीबीएस सीटों तथा 313 डेंटल कॉलेज की 26 हजार 949 सीटों के लिए होने वाली इस परीक्षा के लिए 15 लाख 93 हजार 452 स्टूडेंट्स ने आवेदन किया है। परीक्षा तीन घंटे की होगी। जिसमें 45 प्रश्न फि जिक्स, 45 कैमेस्ट्री, 90 प्रश्न बॉयलॉजी के पूछे जाएंगे। हर प्रश्न 4 अंक का होगा, गलत होने पर एक अंक की माइनस मार्किंग होगी।

*जेईई मेन*
कॅरियर काउंसलिंग एक्सपर्ट अमित आहूजा ने बताया कि जेईई मेन 18 से 23 जुलाई के मध्य आयोजित होगी। यह परीक्षा प्रत्येक दिन दो शिफ्टों में नए समय पर सुबह 9 से दोपहर 12 और दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक होगी। परीक्षाएं कुल 10 शिफ्टों में होने की संभावना है, क्योंकि परीक्षा की तिथियां 18, 20, 21,22 एवं 23 जुलाई प्रस्तावित है, साथ ही जनवरी जेईई मेन परीक्षा 4 दिन में 8 शिफ्टों में हुई थी। विद्यार्थी 31 मई तक पुन: अपने परीक्षा केन्द्र बदलने एवं आवेदन में हुई त्रुटियों के सुधार कर सकते हैं।
जेईई.मेन जुलाई की आवेदन तिथि समाप्त होने के साथ 2 लाख 85 हजार नए विद्यार्थी आवेदन कर चुके हैं। 19 मई से 24 मई तक 20 हजार विद्यार्थियों ने आवेदन किए हैं। ये ऐसे विद्यार्थी माने जा सकते हैं, जो भारत के बाहर पढऩे के इच्छुक थे। इस प्रकार जेईई मेन जुलाई में 9 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों के बैठने की संभावना है। विद्यार्थी दिए गए समयान्तराल में अपनी सुविधानुसार परीक्षा केन्द्रों को बदल सकते हैं, जिससे उन्हें कम से कम यात्रा करनी पड़े। जेईई मेन जुलाई के प्रवेश पत्र परीक्षा से 15 दिन पूर्व जारी किए जाएंगे।


बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा मंत्री ने दिए 42.78 करोड़ रुपये

बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा मंत्री ने दिए 42.78 करोड़ रुपये
शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा.
जयपुर: बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गार्गी एवं बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य की 1 लाख 2 हजार 624 बालिकाओं को 42.78 करोड़ रुपये की राशि उनके खातों में स्थानान्तरित करने के निर्देश दिए थे.

शिक्षा मंत्री के निर्देश पर बैंक द्वारा बालिकाओं के खातों में उनकी पात्रता अनुसार राशि स्थानान्तरित किए जाने की शुरूआत भी हो चुकी है. माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा आयोजित कक्षा 10वीं एवं कक्षा 12वीं परीक्षा 2019 में 75 प्रतिशत या इससे अधिक अंक प्राप्त करने वाली बालिकाओं को गार्गी एवं बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार दिए जाने हेतु यह राशि उनके खातों में स्थानान्तरित की जा रही है.

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ हुई बैठक में उनकी पहल पर यह तय किया गया था कि कोरोना के इस विकट दौर में भी बालिका शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा जाए और उनकी शिक्षा में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और इसी के चलते बालिकाओं के खातों में राशि स्थानांतरित करना शुरू किया. 

डोटासरा ने बताया कि गार्गी पुरस्कार हेतु कक्षा 10वीं की आवेदन करने वाली पात्र 42 हजार 644 बालिकाओं को प्रति बालिका 3 हजार रुपये के आधार पर  12.79 करोड रुपये की राशि प्रदान की जा रही है. इसी तरह कक्षा 12वीं की आवेदन करने वाली पात्र  59 हजार 980 बालिकाओं  को 5 हजार रुपये प्रति के आधार पर 29.99 करोड़ रुपये राशि उनके खातों में स्थानान्तरित करने की कार्यवाही की जा रही है

गौरतलब है कि गार्गी एवं बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए शिक्षा विभाग की ओर से माह फरवरी-मार्च 2020 में शाला दर्पण पर ऑनलाइन आवेदन पत्र भरवाये गए थे.


विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में एक अगस्त से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र 2020-21: यूजीसी

विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में एक अगस्त से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र 2020-21: यूजीसी


यूजूसी ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को अगस्त में नया सत्र शुरू करने के लिए आदेश दिया है.
नई दिल्ली. देश जब कोरोना महामारी से जूझ रहा है ऐसे में यूजीसी ने छात्रों के खुश करने वाला निर्णय लिया है. इससे स्टूडेंट्स की फाफी हद तक परेशानी और निराशा दोनों दूर होगी. यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को एक अगस्त से शैक्षणिक सत्र 2020-21 शुरू करने के लिए कहा है.

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अकादमिक कैलेंडर समिति ने प्रवेश प्रक्रिया को 1 से 31 अगस्त तक शुरू करने की सिफारिश की है. समिति ने अपनी सिफारिश में कहा, "अकादमिक सत्र: 2020-21 पुराने / नये छात्रों के लिए 1.8.2020-1 1.09.2020 से शुरू होगा. इसके अनुसार समिति सत्र 2020-21 के लिए अकादमिक कैलेंडर का पालन करने की सिफारिश करती है.


यूजीसी ने कहा कि दूसरे और तीसरे वर्ष के छात्रों के लिए कक्षाएं 1 अगस्त से शुरू होंगी, जबकि प्रथम सेमेस्टर के लिए नया बैच 1 सितंबर से शुरू होगा. परीक्षाएं 1 जनवरी, 2021 से 25 जनवरी तक आयोजित की जाएंगी. दूसरा सेमेस्टर 27 जनवरी से शुरू होगा और 25 मई तक होगा.


बता दें कि यूजीसी ने 6 अप्रैल को समिति का गठन किया था ताकि परीक्षा और शैक्षणिक कैलेंडर से संबंधित मुद्दों के बारे में विचार-विमर्श किया जा सके. पैनल की अध्यक्षता यूजीसी के पूर्व प्रोफेसर और हरियाणा के वीसी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आरसी कुहाड़ ने की थी.


रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों और अनुसंधान कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय / राज्य स्तर पर सामान्य प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा सकती है."विश्वविद्यालय 31-21.2020 तक नवीनतम सत्र 2020-21 के लिए यूजी और पीजी कार्यक्रमों में प्रवेश लेंगे."


*विश्वविद्यालय छह-सप्ताह के पैटर्न का पालन करें*

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को किसी भी तरह के परिश्रम से निपटने की मांग करने की स्वतंत्रता के लिए कार्रवाई की एक आकस्मिक योजना तैयार करनी चाहिए. समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि "2019 -2020 के शेष सत्र और नए सत्र 2020-2021 के नुकसान की भरपाई के लिए सभी विश्वविद्यालय छह-सप्ताह के पैटर्न का पालन करें.



समिति ने कहा कि छात्रों/शोधार्थियों के लिए न्यूनतम प्रतिशत उपस्थिति की आवश्यकता के संबंध में, लॉकडाउन की अवधि में सभी को उपस्थित माना जाए. क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर, विश्वविद्यालयों को परियोजनाओं/शोध प्रबंधों को आगे बढ़ाने वाले यूजी/ पीजी छात्रों की सुविधा के लिए उचित रणनीति अपनाने की सिफारिश की गई है.


*विश्वविद्यालय स्काइप से लें व्यवहारिक परीक्षा*

समिति ने कहा कि विश्वविद्यालय स्काइप या अन्य मीटिंग ऐप्स के माध्यम से व्यावहारिक परीक्षाएं और वाइवा ले सकते हैं. मध्यवर्ती सेमेस्टर के मामले में, आगामी सेमेस्टर के दौरान व्यावहारिक परीक्षाएं आयोजित की जा सकती हैं.

10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा जून में, पहले सप्ताह में जारी होगा टाइम टेबल, ऑनलाइन भेजेंगे अंक

10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा जून में, पहले सप्ताह में जारी होगा टाइम टेबल, ऑनलाइन भेजेंगे अंक

सीकर. लॉकडाउन (lock down) की वजह से फंसी राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं (Rajasthan Board Exam 2020) अगले महीने हो सकती है। इसके लिए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। जून के पहले सप्ताह तक परीक्षा का नया शैड्यूल जारी होने की संभावना है।

10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा जून में, पहले सप्ताह में जारी होगा टाइम टेबल, ऑनलाइन भेजेंगे अंक
(Board exams in Rajasthan will cunduct in June) सीकर. लॉकडाउन (lock down) की वजह से फंसी राजस्थान बोर्ड की परीक्षाएं (Rajasthan Board Exam 2020) अगले महीने हो सकती है। इसके लिए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। जून के पहले सप्ताह तक परीक्षा का नया शैड्यूल जारी होने की संभावना है। कक्षा दसवीं व बारहवीं की शेष परीक्षाएं सोशल डिस्टेंस के आधार पर होगी। ऐसे में प्रदेशभर में नए सेंटर बनाने की संभावना भी बढ़ गई है। कक्षा दसवीं की दो परीक्षाओं में सर्वाधिक विद्यार्थी हैं। बोर्ड प्रशासन नए सिरे से परीक्षार्थियों की बैठक व्यवस्था बनाने में जुटा है। कई सेंटरों पर जगह कम होने पर सार्वजनिक स्थानों के साथ निजी सेंटरों पर भी परीक्षा कराई जा सकती है।

*यह है बड़ा पेच: स्कूलों में बने क्वॉरंटीन सेंटर*

प्रदेश में लगातार प्रवासियों का आना जारी है। ऐसे में सरकारी स्कूलों को क्वॉरंटीन सेंटर बनाया हुआ है। सरकार के सामने चुनौती यही है कि क्वॉरंटीन सेंटर के साथ परीक्षाएं कैसे कराई जाए। संभावना है कि इस महीने के आखिर तक प्रवासियों के आवागमन का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद स्कूल भवन भी खाली होने के साथ लॉकडाउन में छूट मिल सकती है।

*वीक्षकों से ऑनलाइन मंगवाए अंक*

लॉकडाउन की वजह से बोर्ड की कॉपियां भी जिला मुख्यालयों पर अटक गई थी। पिछले दिनों वीसी में शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने यह मामला उठाया था। इसके बाद सीएम ने कॉपी के बण्डल वीक्षकों तक भिजवाने के निर्देश दिए। बोर्ड के अनुसार अब तक जो परीक्षाएं हो चुकी हैं उनकी ज्यादातर कॉपियों की जांच हो गई है। बोर्ड ने समय पर परिणाम जारी करने के लिए ऑनलाइन ही अंक मंगाने का काम भी शुरू कर दिया है। बोर्ड ने वीक्षकों से तत्काल अंक मंगवाने के लिए वेबसाइट पर एक लिंक उपलबध कराया गया है। इस लिंक के जरिए वीक्षक अंकों की ऑनलाइन एन्ट्री कर सकते हैं। कॉपियों के बण्डल जिलास्तर पर बने संग्रहण केन्द्रों पर जमा कराने व ओएमआर शीट संग्रहण केन्द्र या बोर्ड कार्यालय भिजवानी होगी।

*इनका कहना है*

शिक्षा विभाग की तैयारी लगभग पूरी है। वीसी में मुख्यमंत्री को पूरी स्थिति के बारे में जानकारी दे दी है। जल्द ही बोर्ड परीक्षाओं को लेकर कोई निर्णय होगा। समय पर परीक्षा परिणाम जारी हो इसके लिए बोर्ड ने वीक्षकों से अंक मंगवाना भी शुरू कर दिया है।

गोविन्द सिंह डोटासरा, शिक्षा मंत्री



*JOIN NOW THIS LINK👉🏻* *https://t.me/rajasthanshikshagroup_01*
     *✍🏻📚राजस्थान शिक्षा ग्रुप📚✍🏻*

लॉकडाउन खत्म होने के बाद कौनसे क्षेत्र तेज़ी से उभरेंगे , और कौनसे क्षेत्रो को पटरी पे आने में ज्यादा समय लगेगा :-

लॉकडाउन खत्म होने के बाद कौनसे क्षेत्र तेज़ी से उभरेंगे , और कौनसे क्षेत्रो को पटरी पे आने में ज्यादा समय लगेगा :- 
- कोरोना वायरस के लॉकडाउन के चलते पूरे विश्व के सभी देशों की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है , क्योंकि सभी काम ठप पड़े है , कुछ देशों में और भारत मे भी अब लॉकडाउन में ढील दी जा रही है ताकि व्यापार फिरसे शुरू हो सके ।

-विस्तार से जानते है कौनसे क्षेत्र जल्द उभरेंगे लॉकडाउन खुलने के बाद ,और कौनसे क्षेत्र को अधिक समय लगेगा उभरने में :- 

A. कौनसे क्षेत्र लॉकडाउन खुलने के बाद जल्द उभरेंगे :- 

1. शिक्षा क्षेत्र :- 

- लॉकडाउन के कारण छात्र छात्राए अपने घरों में बंद है , और घर मे रहने से अनेक कारणों के कारण उनको पढ़ाई में बाधा आ रही है , उनका रोज का रूटीन कॉलेज , विश्वविद्यालय , या कोचिंग जाने का बाधित हो गया है , और बिना निरन्तरता के पढ़ाई करने मुश्किल हो जाता है ।

- इसलिए विद्यार्थी वर्ग में सबसे ज्यादा पढ़ने को लेके मांग उठेगी देश भर में एक सर्वे के मुताबिक , इसलिए शिक्षा से जुड़े सभी क्षेत्रो में कम समय मे ही तेज़ी देखने को मिलेगी ।

2. डेटा साइंस / आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) :- 

- AI (कृत्रिम बुद्धि) का मतलब सरलतम शब्दों में कहें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है एक मशीन में सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कंप्यूटर साइंस का सबसे उन्नत रूप माना जाता है और इसमें एक ऐसा दिमाग बनाया जाता है, जिसमें कंप्यूटर सोच सके...कंप्यूटर का ऐसा दिमाग, जो इंसानों की तरह सोच सके। 

- इस क्षेत्र ने बहुत कुछ अच्छा सीखा है महामारी के दौरान , यह क्षेत्र अब आने वाले समय मे हर मुमकिन कोशिश करेगा के टेक्नोलॉजी को इतना आगे बढ़ाया जाए ताकि भविष्य में अगर ऐसी कोई महामारी आये तो उससे पूरी तैयारी के साथ निपटा जाए ।

- उदहारण के तौर पे अभी इस क्षेत्र ने रोबोट बनाये है जो कोरोना मरीजो की जाँच के साथ उनकी देखभाल भी कर रहे है ,इससे डॉक्टर और अन्य स्टाफ मरीज के सीधे संपर्क में आने से बचेगा ,और उनको संक्रमण होने का खतरा कम होगा । इसी प्रकार के आविष्कारो की भविष्य में मांग बढ़ेगी जिससे यह क्षेत्र अच्छी प्रगति कर सकेगा । 

3. ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन क्षेत्र :- 

- इसमे कोई शक नही के लॉकडाउन के कारण सबसे ज्यादा वस्तुयों की आपुर्ति में बाधा आयी है , और भारत के साथ पूरे विश्व मे वस्तुयों की आपुर्ति रुकी हुई है । 
- जब लॉकडाउन खुलेगा तो लोगो की मांग रोज मर्रा की वस्तुयों के लिए अपनेआप बढ़ेगी ,और उस मांग की आपुर्ति के लिए यह क्षेत्र बिना किसी शक के अपनेआप उभरेगा कम समय मे । 

4. E - commerce :- इसका मतलब फ्लिपकार्ट ,अमेज़न ,जोमैटो जैसे सुविधाओं से है ।
- यह क्षेत्र भी रोज मर्रा की खाने पीने से लेके पहनने तक कि सभी वस्तुएं प्रदान करता है ,इसलिए इस क्षेत्र में भी तेजी कम समय मे ही आ जायेगी । 

5. डिजिटल मार्केट , ऑनलाइन कंटेंट :- 

- इस क्षेत्र में यूट्यूब , ब्लॉग इत्यादी आते है ।
- हम देख रहे है के बहुत से अध्यापक , कॉलेज , विश्वविद्यालय इत्यादि ऑनलाइन पढ़ा रहे है लॉकडाउन के कारण , इसलिए अब लॉकडाउन के बाद यह सब अपने ऑनलाइन प्रोग्राम को और बढ़ावा देंगे ताकि भविष्य में ऐसा कुछ हो तब भी ऑनलाइन आराम से पढ़ाया जा सके । 
- इंटरनेट की सुविधाएं प्रत्येक गाव ,और पिछड़े इलाकों तक पहुचाई जाएगी । 
- इससे जुड़े मोबाइल ,लैपटॉप , इत्यादि की खरीद बढ़ेगी क्योंकि हर छात्र यह अपना एक बैकअप तैयार रखेगा जिससे वह बादमे घर बैठके भी पढ़ सके अगर ऐसी कोई स्तिथि भविष्य में उतपन्न होती है तो । 

6. मेडिकल , फार्मा ,दवाइयों का क्षेत्र :- 

- महामारी के चलते इस क्षेत्र को वैसे कम ही नुकसान हुआ है ,क्योंकि इस क्षेत्र की सप्लाई चेन बाधित नही की गई कहिपे भी ।
- और अब कोरोना के इलाज के लिए अलग अलग प्रकार की दवाएं उपयोग में लायी जा रही है , इससे साफ हो जाता है के इनकी बिक्री भी बढ़ेगी और इससे जुड़े डेटोल , सैनिटाइजर , मास्क इत्यादि की मंग भी बढ़ेगी , इएलिये इस क्षेत्र में अधिक तेजी दर्ज की जाएगी बाकी क्षेत्रो के मुकाबले ।
7. कृषि क्षेत्र :- 

- कृषि क्षेत्र में लॉकडाउन का ज्यादा प्रभाव नही पड़ेगा ,क्योंकि इसकी मांग वैसी की वैसी बनी हुई है , हालांकि कुछ ऐसे कृषि उत्पादन जो रोज काम नही आते उनकी मांग में कमी देखी जा सकती है । 
- लेकिन कृषि क्षेत्र एक सुरक्षित क्षेत्र देखा जा रहा है और भविष्य के लिए कृषि में निवेश करना एक अच्छा निवेश साबित हो सकता है । 

- - इसके अलावा Gym , राशन किराना ,नाई का काम,  सब्जियां , साबुन इत्यादि बनाने वाली कम्पनिया , पेट्रोल ,डीजल , रेलवे , कंस्ट्रक्शन क्षेत्र इत्यादि में भी कम समय मे अच्छी तेजी दर्ज की जाएगी । 

B- कौनसे क्षेत्रो में लंबे समय तक मंदी रहने के आसार है :- 

1. होटल इंडस्ट्री और टूरिज्म इंडस्ट्री :-  इस महामारी के कारण लोग लॉकडाउन खुलने के बाद भी ट्रेवल करना नजरअन्दाज करेंगे , लोग विदेश जाना भी कुछ समय के लिये बन्द कर देंगे काफी 
- लोग होटल में रुकना भी कम कर देंगे क्योंकि उन्हें नही पता होगा के उनसे पहले होटल में कौन रुक के गया है । 
- इसलिए इन दोनों क्षेत्र को उभरने में थोड़ा अधिक समय लगेगा । इसके साथ साथ एविएशन ( उड्डयन) क्षेत्र  में बहुत मंदी देखी जा सकेगी । 

2. ऑटोमोबाइल क्षेत्र :- 
- वाहनों का उत्पादन , उनकी बिक्री थोड़े समय के लिए काफी कम हो जाएगी , क्योंकि एक तो लोगो के पास कैश में पैसा नही होगा इतना के वाहन ख़रीदे , और हो सकता है वाहन की कीमतों में गिरवाट भी देखी जाए निकट भविष्य में ।

3. रियल एस्टेट :- जमीन , फ्लैट ,प्रॉपर्टी की कीमतें गिरेंगी क्योंकि इनकी खरीद की मांग बाजार में कम होती जा रही है । 

4. बैंकिंग क्षेत्र :- बैंक विभिन्न उद्योगों को लोन तो दे देगा लॉकडाउन के बाद लेकिन उनमें से ऐसे उद्योग भी होंगे जिनसे उनको पैसा ज्यादा वापस नही मिलेगा , इसलिए बैंक भी रिस्क पे है , पहले से ही डूबत लोन अधिक है और अब एक सर्वे के मुताबिक बताया जा रहा है के बैंक जितने लोन देगा लॉकडाउन के बाद उसमें से 20% लोन जरूर डूबेंगे ,इसलिए बैंको के लिए भी यह चिंताजनक बात है ।

C. निष्कर्ष :- विभिन्न सर्वे के मुताबिक 2020 में यह क्षेत्र मंदी के दौर से गुजरेंगे लेकिन 2021 और 2022 तक आते आते इनमे काफी सुधार होने की उम्मीद है।
- इसके अलावा विश्व अब अपनी निर्भरता चीन से हटा रहा है ,और भारत की ओर निवेश के लिए देख रहा है , इसलिए भारत के लिए यह एक अच्छा मौका साबित हो सकता है । 

stayhome#like#share#current affairs by ajit singh👍

भारत कोरोना संक्रमित देशों की सूची में टॉप-10 में शामिल, लगातार चौथे दिन सबसे ज्यादा बढोत्तरी

*भारत कोरोन संक्रमित देशों की सूची में टॉप-10 में शामिल, लगातार चौथे दिन सबसे ज्यादा बढोत्तरी*

*फर्स्ट इंडिया राजस्थान*
नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है. देश में जारी स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार कोरोना संक्रमण के अब तक 138,845 मामले सामने आ चुके  हैं. इसी के साथ भारत सबसे ज्यादा संक्रमित देशों की सूची में नंबर 10 पर पहुंच गया है. 

*लगातार चौथे दिन सबसे ज्यादा बढोत्तरी:*
पिछले 24 घंटों में देश में संक्रमित मरीजों के 6977 नए मामले सामने आए हैं. यह लगातार चौथे दिन सबसे ज्यादा बढोत्तरी है. वहीं इसके साथ ही पिछले 24 घंटे में 154 लोगों ने दम भी तोड़ा है. ऐसे में अब मृतकों की संख्या भी बढ़कर 4021 पहुंच गई है. वहीं राहत वाली खबर यह है कि 57 हजार 721 लोग ठीक भी हो चुके हैं. 



*भारत दुनिया में कोरोन संक्रमित देशों की सूची में टॉप-10 में शामिल:*
बता दें कि देश में कोरोना वायरस का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आया था. तब से अब तक करीब 138,845 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के चलते भारत दुनिया में कोरोन संक्रमित देशों की सूची में टॉप-10 में शामिल हो गया है. इस सूची में अमेरिका टॉप पर है. इसके बाद ब्राजील, रूस, स्पेन, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी और तुर्की हैं.

*देश में लॉकडाउन लागू किए आज दो महीने पूरे:*
वहीं देश में लॉकडाउन लागू किए आज दो महीने पूरे हो गए हैं. पीएम मोदी ने 24 मार्च को पहले लॉकडाउन की घोषणा की थी, जो कि 25 मार्च से लागू हुआ था. फिलहाल लॉकडाउन का चौथा चरण कुछ रियायतों के साथ 31 मई तक जारी रहेगी.

सोमवार, 25 मई 2020

2600 स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान, टिकट बुकिंग के लिए खुले एक हजार काउंटर।

2600 स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान, टिकट बुकिंग के लिए खुले एक हजार काउंटर।

नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस के कारण श्रमिकों के सामने उत्पन्न हो रही समस्या को देखते हुए 1 जून से भारतीय रेलवे ने लगभग 100 जोड़ी ट्रेनों के संचालन का फैसला लिया है। इसको ध्यान में रखते हुए टिकट काउंटर भी खोल दिए गए हैं। जिससे यात्रियों को टिकट बुकिंग की सुविधा आसानी से मिल सके।
श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को समस्या न हो इसको ध्यान में रखते हुए रेलवे ने आगामी 10 दिनों में ही 2600 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय ले लिया है। ये निर्णय रेलवे ने इसलिए लिया है ताकि श्रमिकों को आसानी से ट्रेन उपलब्ध हो सके और वो अपने गंतव्य तक जा सकें।
अब तक रेलवे ने लगभग 45 लाख से ज्यादा लोगों को उनके गृह राज्य तक पहुंचाने का काम किया है। इस पूरे मामले को ध्यान में रख कर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने बयान दिया है कि विभिन्न राज्यों में फंसे लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए 1 मई से ही श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों ने मिलकर आगामी 10 दिनों के लिए एक विशेष योजना तैयार करते हुए 2600 ट्रेनों के संचालन का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि हम अब 36 लाख से अधिक यात्रियों को उनके घर तक पहुंचाएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि रेलवे ने श्रमिकों को घर पहुंचाने के लिए व्यवस्था कर ली है और पूरी तरह से तैयार है।
अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि लोगों की ये शिकायतें मिल रही थीं कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग में काफी समस्या हो रही है। इसीलिए देशभर में 1000 से अधिक टिकट काउंटर खोल दिए गए हैं।

रविवार, 24 मई 2020

देश की सबसे शक्तिशाली रेल इंजन WAG-12 B का परिचालन शुरू हो गया

भारतीय रेलवे की बड़ी उपलब्धि, देश के सबसे शक्तिशाली रेल इंजन का परिचालन शुरू :- 

- भारतीय रेलवे ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. देश की सबसे शक्तिशाली रेल इंजन WAG-12 B का परिचालन शुरू हो गया. 
             NOTE :- WAG - 12 रेल इंजन का नाम है ,और इस रेल इंजन में बहुत से प्रकार होते है जिसमे से भारत मे  "WAG-12 B" प्रकार का इंजन बनाया गया है ।

- इसी के साथ अब भारत हाई हार्स पावर वाले लोकोमोटिव का उत्पादन करने वाले विशिष्ट वर्ग में शामिल होने वाला दुनिया का 6वां देश बन गया .

- यह "MAKE IN INDIA" का एक प्रोजेक्ट है ।
1. WAG-12 बनाने का समझौता :- 

- 2015 में फ्रांस की एक कम्पनी "अलस्ट्रोम" और भारतीय कम्पनी "मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड" (बिहार) के बीच मे भारत मे रेलवे के सबसे शक्तिशाली इंजन WAG-12 बनाने के लिए समझौता हुआ था ।
- यह समझौता 25,000 करोड़ का था ,और उस वक़्त का रेलवे का सबसे बड़ा यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश( FDI) था । 

- इस समझौते के तहत कुल 800 "WAG-12 B" इंजन का निर्माण किया जाना था ,जिसमे से पहले 5 इंजन फ्रांस में बनाये गए थे और बाकी के 795 भारत मे तैयार किये जाने थे ,भारत मे भी बिहार में इन इंजन का निर्माण किया जाना था । 

- 10 अप्रैल 2018 में प्रधानमंत्री जी ने इस प्रोजेक्ट की शुरुआत का उदघाटन किया था । 

- कुल 11 वर्षो में 800 WAG-12 B इंजन भारत को मिलेंगे ,जिसमे से 35 इंजन 2020 में तैयार होंगे , 60 इंजन 2021 में और 100 इंजन 2022 में ,और इसी प्रकार कुल 800 इंजन भारत को धीरे धीरे मिलेंगे । 

- Alstom नागपुर (महाराष्ट्र) और सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) में डिपो स्थापित कर रहा है जो लोकोमोटिवों के निवारक और सुधारात्मक रखरखाव , इंजन सर्विस , मेंटेनेन्स आदि के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

2. WAG-12 B लोकोमोटिव इंजन की विशेषताएं :- 

- भारत मे अब तक का  सबसे शक्तिशाली रेल इंजन होगा WAG-12 B ।

- लोकोमोटिव एक लैटिन शब्द है जो लोकस (अर्थ - जगह) + मोवेरी (अर्थ : स्थिति बदलना ) से बना है - 1605 के आसपास । 

- लोकोमोटिव का मतलब हुआ कि एक स्व-चालित  वाहन का इंजन, जो स्टीम, डीजल या बिजली द्वारा संचालित होता है ।

- WAG-12 B  लाइट (बिजली) से चलने वाला रेल इंजन है । 

- ग्रीन" लोकोमोटिव पर्यावरण के अनुकूल एलईडी लाइट का उपयोग करता है और इसमें कम वोल्टेज केबल भी हैं. 

- यह इंजन 12,000 हॉर्स पॉवर (hp) का है ।
           NOTE :- अश्वशक्ति ( Horsepower (hp)) एक शक्ति की मापन इकाई है। यह एक गैर-SI इकाई है। 'हॉर्सपॉवर' शब्द का सबसे पहले उपयोग 18वीं शताब्दी के अन्तिम काल में स्कॉटलैण्ड के इंजीनियर जेम्स वाट ने किया। 

- 12,000 hp का मतलब 9000 किलोवॉट है ।

- अब तक भारत मे 10,000 hp से कम शक्ति की ही इंजन थे  जैसे WAG-9 , WAG-5 , WAP-5 इत्यादि .

- यह WAG-12 B  इंजन एक साथ करीब 118 माल-डिब्बा को लेके चल सकती है , जिनका वजन करीबन 6000 टन होगा । 
- इसकी रफ्तार 100 किमी प्रति घंटा होगी , और अधिकतम 120 किमी प्रति घण्टे की रफ्तार से यह दौड़ सकेगी । 
- इसके अलावा इसमे GPS सिस्टम भी है ।

3. कहाँ हुआ इसका परीक्षण :- 

-  WAG-12- 60027 नाम का इंजन "पंडित दीनदयाल उपाध्याय" जंक्शन (उतर प्रदेश )से दोपहर 02:08 बजे चली ट्रेन डेहरी-ऑन-सोन, गढ़वा रोड होते हुए बैराडीह तक गई। 

- इस ट्रेन में 118 डिब्बे थे, और इसे 120 किमी प्रति घण्टा की रफ्तार तक चलाया गया । 

4. यह इंजन भारत मे बनाने के फायदे :- 

- अलस्टॉम का दावा है कि मधेपुरा परियोजना से भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 10,000 से अधिक नौकरियां पैदा होगी. इन नौकरियों से बिहार, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के लोगों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा .

-इसके अलावा हमारे यह माल ढोने की क्षमता बढ़ेगी , जिससे विदेशी कम्पनिया भारत के इस बढ़ते infrastructure को देखते हुए भारत मे निवेश करेगी अपने माल के उत्पादन के लिए । 

- भारत रेल इंजन निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा , भारत मे ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे । 

- यह ट्रेन इंजन पूर्वी समर्पित माल ढुलाई गलियारा (Eastern Dedicated Freight Corridor) ,जो कि पश्चिम बंगाल से भारत के उत्तरी भागो को जोड़ता है ,    और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा ( western dedicated freight corridor) , जो कि उत्तरी भारत को दक्षिण भारत से जोड़ता है ,  यह दोनों  भारत में भारतीय रेल द्वारा निर्मित होने वाला माल ढुलाई के कॉरिडोर (गलियारे) है  , इन क्षेत्रों में इसको ज्यादा चलाया जाएगा ,ताकि इन क्षेत्रों में अधिक मात्रा में विकास हो , और यह क्षेत्र आपस मे व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ा सके । 
      NOTE :- भारतीय रेल मंत्री - पीयूष गोयल ।

stayhome#like#share#current affairs by ajit singh👍

MBBS, एमडी या डेंटल कोर्स में दाखिले के लिए यूनिफॉर्म एग्जाम NEET ही होगा - सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि MBBS, एमडी या डेंटल कोर्स में दाखिले के लिए यूनिफॉर्म एग्जाम NEET ही होगा :-

- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने कहा कि NEET के जरिये मेडिकल और डेंटल कोर्स में दाखिले का जो फैसला लिया गया था वह एडमिशन में करप्शन को खत्म करने के लिए लिया गया है और यह दाखिला प्रक्रिया यूनिफॉर्म और सही है।

- क्या है पूरा मामला विस्तार से जानते है :-

1. NEET ( National Eligibility cum Entrance Test )की परीक्षा :-

- भारत में चिकित्सा-स्नातक के पाठ्यक्रमों (एमबीबीएस , बीडीएस आदि) में प्रवेश पाने के लिये एक अर्हक परीक्षा (qualifying entrance examination) होती है जिसका नाम राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) है।

- देश के सभी मेडिकल कॉलेज , केंद्र सरकार द्वारा संचालित , राज्य सरकार द्वारा संचालित , निजी कॉलेज या कोई अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने के लिए सिर्फ एक NEET की ही परीक्षा कराई जाएगी , और NEET में पास होने के बाद इन सभी कॉलेज में अंको के आधार पे प्रवेश मिलेगा , इसके अलावा कोई अलग से परीक्षा नही होगी ।

- पहली बार NEET की परीक्षा का आयोजन 2013 में किया गया था । और साल में एक बार यह परीक्षा होती है ,और इसी के जरिये मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलता है ।

- 2013 से 2018 तक NEET का आयोजन CBSE बोर्ड द्वारा किया जाता था , CBSE बोर्ड मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन आता है ।
- लेकिन 2019 से NEET की परीक्षा के आयोजन का जिम्मा NTA ( National Testing Agency) को सौंपा गया है , यह एजेंसी भी मानव संसाधन मंत्रालय के अधीन है ,और इसकी स्थापना नवम्बर 2017 में की गई थी । JEE की परीक्षा भी अब NTA ही कराएगी ।

2. NEET को क्यों लाया गया :-

- इससे पहले 'AIPMT' (ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट) की परीक्षा होती थी। यह परीक्षा देशभर में एक साथ होती थी। इस परीक्षा में आए अंकों के आधार पर ही छात्रों को केवल केन्द्र सरकार द्वारा संचालित मेडिकल संस्थानों में प्रवेश दिया जाता था।

- लेकिन राज्य सरकार के कॉलेज में प्रवेश के लिए छात्रों को अलग से परीक्षा देनी पड़ती थी , इसके अलावा कुछ निजी या अल्पसंख्यक समुदाय की मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए छात्रों को अलग परीक्षा देनी पड़ती थी ,इस प्रकार छात्रों को 5 से 7 प्रकार के अलग अलग पाठ्यक्रम वाली परीक्षाएं देनी पड़ती थी , इससे छात्रों को बहुत दिक्कत होती थी ।

- साथ ही निजी कॉलेज वाले प्रवेश के लिए डोनेशन के रूप में भी पैसे लेते थे छात्रों से , और तो और काउंसलिंग भी सबकी अलग होती थी और बहुत समय खराब हो जाता था छात्रों का भी ।

- इन अलग अलग परीक्षाओ में अनेक धांधलियां होती थी ,जैसे भ्रष्टाचार , दूसरे समुदाय के छात्रों को सीट न देना इत्यादि ।

- इन सभी को देखते हुए सरकार ने देश भर की सभी प्रकार की मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए सिर्फ एक परीक्षा NEET को शुरू किया , ताकि पारदर्शिता अधिक हो , धांधलियां बिल्कुल न हो ,और प्रवेश को लेके हो रहे भ्रष्टाचार को भी रोक जा सके ।

3. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुचा :-

- तमिल नाडु के एक शहर वेल्लोर में Christian Medical college नाम का एक अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय का एक कॉलेज है , यह कॉलेज भी NEET परीक्षा के आने से पहले अपने कॉलेज में छात्रों को प्रवेश देने के लिए अलग से अपनी खुदकी एक परीक्षा कराता था ।

- लेकिन NEET ने इस कॉलेज से यह अलग से परीक्षा कराने पे प्रतिबन्द लगा दिया , और बदले में यह कॉलज सुप्रीम कोर्ट पहुच गया , और कोर्ट में इन्होंने निम्न तर्क दिए :-
A. अनुच्छेद 19 (1) (g) के तहत हर नागरिक को हक़ है के वह अपने हिसाब से देश के किसी भी कोने में , किसी भी प्रकार का व्यापार , व्यवसाय (कानूनी तौर पे ) इत्यादि कर सकता है अपने हिसाब से बिना किसीकी रोक टोक के ।

B. अनुच्छेद 25:- इसके तहत भारत में प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने की, आचरण करने की तथा धर्म का प्रचार करने की स्वतंत्रता है।
- अब क्योंकि यह ईसाइयों के कॉलेज है , तो उन्होंने कहा के हमारे ऊपर प्रतिबन्द लगाना हमारे मौलिक अधिकार के इस अनुच्छेद 25 का उल्लघन है ।

C. अनुच्छेद 26 , 29 और 30 ( सार तीनो का ) :- धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक-वर्र्गों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।
- Christian medical college वालो ने कहा के परीक्षा कराने का हक़ हमसे छीन लेना इन सभी अनुच्छेदों का उल्लघंन है , और हमे अधिकार दिया जाए के हम अपने कॉलेज की प्रवेश परीक्षा NEET के साथ न करके अलग से स्वतंत्र रूप से करवाये ।

4. सुप्रीम कोर्ट का फैसला :-

- सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल ,2020 को इस मामले पे अपना फैसला सुनाया और फैसले में इस कॉलेज के सभी तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ NEET की परीक्षा ही होगी जिससे सभी कॉलेज में प्रवेश मिलेगा ,और अलग से किसी कॉलेज को परीक्षा कराने का कोई हक नही है ।

- सुप्रीम कोर्ट ने NEET की परीक्षा के पक्ष में निम्न तर्क दिए :-

A. अनुच्छेद 19 (1)(g) :- इसके तहत नागरिक को हक़ तो है व्यापार करने का ,लेकिन अगर उसके व्यापार से एक बड़े समुदाय ,जैसे छात्र वर्ग , को नुकसान पहुच रहा है तो सरकार उस व्यवसाय पे कुछ प्रतिबन्ध लगा सकती है ।
- कोर्ट ने कहा के NEET की परीक्षा सबके लिए समान है ,इसमे किसीके साथ कोई भेदभाव नही किया जाता है ,और परिणाम पूरा पारदर्शी होता है । 
- और प्रवेश में चल रहे भ्रष्टाचार , धांधलियां , शिक्षा का व्यापार करना इत्यादि को रोकने के लिए NEET की परीक्षा का कदम सही है । 

 B. अनुच्छेद 29 और 30 :- कोर्ट ने कहा के अल्पसंख्यक वर्ग को भी अधिकार है अपनी संस्था खोलने और चलाने का , और इन कॉलेजो से निकलने वाले डॉक्टर ही आगे जाके देश का स्वास्थ्य क्षेत्र चलाएंगे , अगर धांधलियों से प्रवेश दिए गए तो देश मे अच्छे डॉक्टर नही होंगे ,और देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को भी यह एक खतरा है ।

-  अब क्योंकि सार्वजनिक हित और सार्वजनिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की है और यह जिम्मेदारी सरकार को नीति निदेशक तत्व भी देते है  , इसलिए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर लोग ही आये इसकी जिम्मेदारी भी सरकार की है  ,इसलिये सरकार इन सभी कॉलेजो की आधारभूत सरंचना को बदलने का और उसपे निगरानी रखने का पूरा हक रखती है । 

- इसलिए कोर्ट ने कहा के कॉलेज वालो के सभी तर्क गलत है , और कोर्ट के इस फैसले से कोई भी अल्पसंख्यक संस्था के संवैधानिक हक़ का किसी प्रकार का कोई भी उल्लंघन नही होता है । 

stayhome#like#share#current affairs by ajit singh👍

शनिवार, 23 मई 2020

कोतवाली में पैंडल हैंडवाशर लगवाया।



बाड़मेर 23 मई। 
कोरोना से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है सोशियल डिस्टेसिंग एवं वस्तुओं को कम से कम छूना इसी मकसद से शनिवार को पुलिस कोतवाली में पैरों से चलने वाला हैंडवाशर भाजपा नगर मंडल की प्रेरणा से भामाशाह कमल सिंहल (मिठाई व्यवसायी) द्वारा भेंट किया गया। नगर मंडल अध्यक्ष सुरेश मोदी ने बताया कि पुलिस प्रशासन भी कोरोना वारियर्स के रूप में लगातार सेवाए दे रहे है एवम इनके स्वास्थ्य की चिंता करना भी हमारा दायित्व बनता है । बाङमेर शहर कोतवाली में लोगो की आवाजाही भी ज्यादा होती है। इसलिए पैरों से संचालित होने वाला हैंडवाशर दिया गया है। मशीन देने वाले भामाशाह कमल सिंहल ने बताया कि मैन एक वीडियो बीएसएफ का देखा था उसको देखकर इस मशीन का निर्माण करवाने की प्रेरणा मिली जिससे मैंने अपनी दुकान के लिए ऐसा सिस्टम बनाने के लिए प्रयास किया इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष सुरेश मोदी से बात हुई तो उन्होंने इस तरह की एक मशीन को पुलिस कोतवाली में भेंट करने की सलाह दी। जिस पर हमने एक मशीन ओर बनाई एवम थानाधिकारी रामप्रताप सिंह को भेंट की। इस अवसर पर भामाशाह कमल सिंहल, नेता प्रतिपक्ष पृथ्वी चंडक, नगर प्रवक्ता आनंद पुरोहित, पार्षद सुनील सिंघवी, हरीश सोनी, प्रदीप शर्मा सहित भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हम सभी मिलजुलकर WHO के माध्यम से दुनिया के लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में नए आयाम हासिल करेंगे - डॉ हर्षवर्धन


आज 135 करोड़ देश वासियों सहित मेरे लिए यह बेहद सम्मान और गौरव के पल हैं जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मुझे सर्वसम्मति से कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष चुना। मेरे प्रति आप सभी के विश्वास और भरोसे के लिए भी मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूं, भारत और सभी देशवासी भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि यह सम्मान हम सबको मिला है।

बोर्ड की 147वीं बैठक को संबोधित करते हुए मैंने कहा कि मौजूदा कोविड 19 संकट में वैश्विक संसाधनों के बेहतर समन्वय से मृतकों की संख्या घटाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन अधिक प्रभावी काम कर सके इसके लिए लिए मैं सभी सदस्यों के साथ मिलकर काम करूंगा।

इससे पहले मैंने WHO के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ हिरोकी नाकातानी जी से पदभार संभाला और उन्हें संगठन की उत्कृष्टता बढ़ाने के लिए दिल से आभार व्यक्त किया।

वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुए इस बैठक में जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन के वरिष्ठ अधिकारी जिनेवा से शरीक हुए। वहीं अन्य देशों के नेता और तकनीकी जानकार भी अपने अपने देशों से शामिल हुए।


चुनाव के बाद कार्यकारी बोर्ड को संबोधित करते हुए मैंने कोरोना महामारी के दौरान प्रभावी उपायों के लिए वैश्विक प्रयासों और सहयोग पर जोर दिया। मैंने कहा कि सभी सदस्य देशों और साझा हित रखने वाले पक्षों के बीच निरंतर तालमेल से ही स्वास्थ्य सुधारों को मजबूत किया जा सकेगा। वहीं सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरी है कि संसाधनों का अधिक उत्पादक, कुशल और लक्षित उपयोग किया जाना चाहिए।

मैंने कहा कि कोरोना महामारी ने दुनिया में मौजूदा स्वास्थ्य प्रणालियों की कमजोरियां उजागर करने के साथ ही दिखा दिया है कि स्वास्थ्य तैयारियों की अनदेखी के परिणाम कितने गंभीर हो सकते हैं। लिहाजा वैश्विक संकट के ऐसे समय में, जोखिम प्रबंधन और उन्मूलन दोनों पर ध्यान देने की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर लोक स्वास्थ्य पर ध्यान देने और अधिक निवेश के लिए साझेदारी को अधिक मजबूत बनाना होगा।

बैठक में दिए अपने पहले अध्यक्षीय भाषण को खत्म करने से पहले मैंने दुनियाभर में कोरोनावारियर्स और उनके परिजनों के लिए स्टैंडिंग ओवेशन दिया। वहीं जिनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन निदेशक डॉ टेडरॉस और उनकी टीम भी खड़ी होकर तालियां बजाती रही।

WHO का कार्यकारी बोर्ड 34 तकनीकी रूप से योग्य सदस्यों से बना होता है। बोर्ड का मुख्य काम विश्व स्वास्थ्य सभा के निर्णयों और नीतियों को लागू करना है। साथ ही बोर्ड विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी दिशा निर्देशन करता है।


मैंने कहा कि WHO इस सिद्धांत में विश्वास करता है कि स्वास्थ्य के उच्चतम मानक का लाभ जाति, धर्म, राजनीतिक विश्वास, आर्थिक या सामाजिक स्थिति के भेद के बिना हर मनुष्य के मौलिक अधिकारों में से एक है। इसलिए हम सदस्य देशों के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य दायित्वों के कुशल, प्रभावी और उत्तरदायी निर्वहन के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह मौलिक विश्वास हमारे मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे।

इस दौरान मैंने मीडिया से कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले समय में हम सभी मिलजुलकर WHO के माध्यम से दुनिया के लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में नए आयाम हासिल करेंगे।

गुरुवार, 21 मई 2020

सारी उम्र गरीबो को पीड़ा देने वाली कुरीति है -मृत्युभोज।


मानव विकास के रास्ते में यह गंदगी कैसे पनप गयी, समझ से परे है। जानवर भी अपने किसी साथी के मरने पर मिलकर वियोग प्रकट करते हैं, परन्तु यहाँ किसी व्यक्ति के मरने पर उसके सगे-सम्बन्धी जमकर मिठाईयां खाते हैं.इस शर्मनाक परम्परा को मानवता की किस श्रेणी में रखे..!

मृत्युभोज में आस-पास के कई गाँवों से ट्रेक्टर-ट्रोलियों में गिद्धों की भांति जनता इस घृणित भोज पर टूट पड़ती है। शिक्षित व्यक्ति भी इस जाहिल कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। इससे समस्या और विकट हो जाती है, क्योंकि अशिक्षित लोगों के लिए इस कुरीति के पक्ष में तर्क जुटाने वाला पढ़ा-लिखा वकील खड़ा हो जाता है।

यह कुरीति बन्द हो क्योंकि हमारे शास्त्र भी यही कहते हैं। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि किसी भी मृत व्यक्ति के घर बारह दिन तक पानी पीना भी हिन्दुओं के लिए वर्जित है।

परिजन के बिछुड़ने के साथ एक और दर्द जुड़ जाता है। मृत्युभोज के लिए 50 हजार से 2 लाख रुपये तक का साधारण इन्तज़ाम करने का दर्द। ऐसा नहीं करो तो समाज में इज्जत नहीं बचे। क्या गजब पैमाने बनाये हैं, हमने इज्जत के? अपने धर्म को खराब करके, परिवार को बर्बाद करके इज्जत पाने का पैमाना।

कपड़ों का लेन-देन भी ऐसे अवसरों पर जमकर होता है। कपड़े, केवल दिखाने के, पहनने लायक नहीं। बरबादी का ऐसा नंगा नाच, जिस प्रदेश में चल रहा हो, वहाँ पर पूँजी कहाँ बचेगी, उत्पादन कैसे बढ़ेगा, बच्चे कैसे पढ़ेंगे?

अजीब लगता हैं जब जवान बाप या माँ के मरने पर उनके बच्चे अनाथ होकर, सिर मुंडाये आस-पास घूम रहे होते हैं। और समाज के प्रतिष्ठित लोग उस परिवार की मदद करने के स्थान पर भोज कर रहे होते हैं। आप आश्चर्य करेंगे कि इधर शहीदों तक को नहीं बख्शा गया है। उनका स्मारक बनाने के नाम पर फोटो खिंचवाते ‘देशभक्त’ नेता और समाज के लोग, शहीद के परिवार को मिली सहायता स्वाहा करने से भी नहीं चूकते।

कुतर्कों का जाल

1. माँ-बाप जीवन भर हमारे लिए कमाकर गये हैं,तो उनके लिए हम कुछ नहीं करें क्या?

इस पहले कुतर्क से हमें भावुक करने की कोशिश होती है। हकीकत तो यह है कि आजकल अधिकांश माँ-बाप कर्ज ही छोड़ कर जा रहे हैं। उनकी जीवन भर की कमाई भी तो कुरीतियों और दिखावे की भेंट चढ़ गयी। फिर अगर कुछ पैसा उन्होंने हमारे लिए रखा भी है, तो यह उनका फर्ज था। हम यही कर सकते हैं कि जीते जी उनकी सेवा कर लें। लेकिन जीते जी तो हम उनसे ठीक से बात नहीं करते। वे खोंसते रहते हैं, हम उठकर दवाई नहीं दे पाते हैं। अचरज होता है कि वही लोग बड़ा मृत्युभोज या दिखावा करते हैं, जिनके माँ-बाप जीवन भर तिरस्कृत रहे। खैर! चलिए, अगर माँ-बाप ने हमारे लिए कमाया है, तो उनकी याद में हम कई जनहित के कार्य कर सकते हैं, पुण्य कर सकते हैं। जरूरतमंदो की मदद कर दें, अस्पताल-स्कूल के कमरे बना दें, पेड़ लगा दें। बहुत कार्य हैं करने के। परन्तु हट्टे-कट्टे लोगों को भोजन करवाने से उनकी आत्मा को क्या आराम मिलेगा? जीवन भर जो ठीक से खाना नहीं खा पाये, उनके घर में इस तरह की दावत उड़ेगी, तो उनकी आत्मा पर क्या बीतेगी? या फिर अपने क्रियाकर्म के लिए अपनी औलादों को कर्ज लेते, खेत बेचते देखेंगे, तो कैसी शान्ति अनुभव करेंगे? जो जमीन जीवन में बचाई, उनके मरने पर बिक गयी, तो क्या आत्मा ठण्डी हो जायेगी?

2. क्या घर आये मेहमानों को भूखा ही भेज दें?

पहली बात को शोक प्रकट करने आने वाले रिश्तेदार और मित्र, मेहमान नहीं होते हैं। उनको भी सोचना चाहिये कि शोक संतृप्त परिवार को और दुखी क्यों करें? अब तो साधन भी बहुत हैं। सुबह से शाम तक वापिस अपने घर पहुँचा जा सकता है। इस घिसे-पिटे तर्क को किनारे रख दें। मेहमाननवाजी आडे दिन भी की जा सकती है, मौत पर मनुहार की जरूरत नहीं है। बेहतर यही होगा कि हम जब शोक प्रकट करने जायें, तो खुद ही भोजन या अन्य मनुहार को नकार दें। समस्या ही खत्म हो जायेगी। 

3. हम किसी के यहाँ भोजन कर आये हैं, तो उन्हें भी बुलाना होगा!

इस मुर्ग़ी पहले या अंडे की पहेली को यहीं छोड़ दें। यह कभी नहीं सुलझेगी। अब आप बुला लो, फिर वे बुलायेंगे। फिर कुछ और लोग जोड़ दो। इनसानियत पहले से ही इस कृत्य पर शर्मिंदा है, और न करो। किसी व्यक्ति के मरने पर उसके घर पर जाकर भोजन करना वाकई में निंदनीय है और अब इतनी पढ़ाई-लिखाई के बाद तो यह चीज प्रत्येक समझदार व्यक्ति को मान लेनी चाहिए। गाँव और क़स्बों में गिद्धों की तरह मृत व्यक्तियों के घरों पर मिठाईयों पर टूट पड़ते लोगों की तस्वीरें अब दिखाई नहीं देनी चाहिए!

राजस्थान_मृत्युभोज_निवारण_अधिनियम_1960

#राजस्थान_मृत्युभोज_निवारण_अधिनियम_1960
(1960 का अधिनियम संख्या 1) 3 फ़रवरी 1960

राजस्थान सभी तरह की कुरीतियों एवं अंधविश्वासों का घर है| ऐसी कोई सामाजिक कुरीति अथवा अन्धविश्वास नहीं है जो राजस्थान में व्याप्त न हो | दहेज़, बाल विवाह, मृत्युभोज आदि सभी अंधविश्वासों एवं कुरीतियों ने राजस्थान को जकड़ रखा है | निर्धनता के बावजूद यहाँ मृत्युभोज बड़े पैमाने पर किया जाता है| लोग कर्ज की मर सहन कर लेते है पर मृत्युभोज (Mrityu Bhoj) करना नहीं छोड़ते| इसी अन्धविश्वास,कुरीति एवं प्रवृति से प्रांत वासियों को को मुक्ति प्रदान करने हेतु सन 1960 में राजस्थान मृत्युभोज निवारण अधिनियम पारित किया गया|




उद्देशिका-
इस अधिनियम के उद्देश्यों को प्रारंभ में ही स्पष्ट कर दिया गया है, यथा-
चूँकि राजस्थान राज्य में मृत्युभोज करने को निवारित करने के लिए उपबंध करना सामान्य जनता के हित में समीचीन है ;
अतः भारत गणतंत्र के दसवें वर्ष में राजस्थान विधान मंडल द्वारा इसे अधिनियम किया गया|
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ:-
(i) यह अधिनियम राजस्थान मृत्युभोज निवारण अधिनियम, 1960 कहलायेगा|
(ii) यह सम्पूर्ण राजस्थान में प्रवृत होगा|
(iii) यह तुरंत प्रभावशाली होगा |

2. परिभाषायें:- इस अधिनियम में, जब तक विषय या प्रसंग द्वारा अन्यथा अपेक्षित न हो-

(क) 'मृत्युभोज' से अभिप्राय किसी व्यक्ति की मृत्यु के अवसर पर, या उसके सम्बन्ध में बाद में किसी भी समय या किसी भी समयांतर के बाद आयोजित की गयी या दी गयी दावत से है तथा इसमें नुक्ता, मोअस्सर एवं चुहलम शामिल है; एवं 
(ख) 'मृत्यु भोज आयोजित करना या देना' में तैयार की गयी या बिना तैयार की गयी खाध्य वस्तुओ का वितरण शामिल है लेकिन इसमें धार्मिक या धर्म निरपेक्ष संस्कारों के निष्पादन के अनुसरण में परिवार के लोंगों या पूजा आदि कराने वाले व्यक्तियों या फकीरों को भोजन कराना शामिल नहीं है; परन्तु इस सब की कुल संख्या एक सौ (100) व्यक्ति से अधिक नहीं होनी चाहिए |

3. मृत्युभोज का प्रतिषेध:- कोई भी व्यक्ति राज्य में मृत्युभोज का आयोजन नहीं करेगा या मृत्युभोज नहीं देगा या उसमें शामिल नहीं होगा अथवा भाग नहीं लेगा |


टिप्पणी

इस धारा के अंतर्गत निम्नलिखित कार्यों को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है -
(i) मृत्यु भोज का आयोजन करना ;
(ii) मृत्यु भोज देना, एवं
(iii) मृत्यु भोज में सम्मिलित होना |

4. धरा 3 के उल्लंघन के लिए दंड :- जो कोई भी धारा 3 के उपबंधो का उल्लंघन करेगा या इसके उल्लंघन के लिए उकसायेगा, दुष्प्रेरित करेगा, उसके करने में सहायता करेगा, किसी भी विवरण के ऐसी अवधि के कारावास से जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या ऐसे जुर्माने से जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जायेगा |

टिप्पणी

किसी व्यक्ति को कोई कार्य करने के लिए उकसाना या उत्प्रेरित करना दुष्प्रेरण (abetment) है |1

उत्प्रेरण का अर्थ है - किसी कार्य को करने के लिए उद्धत करना, आगे बढ़ाना, प्रेरित करना या प्रोत्साहित करना |2

5. निषेधाज्ञा जारी करने की शक्ति :- यदि धारा 4 के अंतर्गत दंडनीय अपराध का संज्ञान लेने में सक्षम न्यायालय इससे समाधान कर लेता है कि इस अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन में किसी मृत्युहोज को करने की व्यवस्था की गयी है या की जाने वाली है या कोई मृत्युभोज दिया जाने वाला है, तो वहा न्यायलय ऐसे मृत्युभोज आयोजित करने अथवा देने का प्रतिषेध करते हुए एक निषेधाज्ञा जरी कर सकेगा |

टिप्पणी

निषेधाज्ञा जारी करने का मुख्या उद्धेश्य होता है -
(i) किसी अवैध अथवा दोषपूर्ण कार्य की निरंतरता को रोकना, एवं
(ii) ऐसे कार्य को प्रारंभ करने से निवारित  करना |3

6. धारा 5 के अधीन निषेधाज्ञा की अवज्ञा करने के लिए दंड :- जो कोई भी यह जानते हुए की धारा 5 के अधीन निषेधाज्ञा जरी की गयी है, ऐसी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करेगा वह किसी भी प्रकार से ऐसी अवधि के कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकेगी या ऐसे जुर्माने से जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से दण्डित किया जायेगा |

7. सरपंच आदि सुचना देने के लिए बाध्य :- (1) राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 (1994 का 13) के अधीन स्थापित ग्राम पंचायत का सरपंच या पंच तथा प्रत्येक पटवारी या लम्बरदार, धारा 4 या  6 के अधीन दंडनीय अपराध का संज्ञान करने में सक्षम सबसे नजदीक के मजिस्ट्रेट को तत्काल ऐसी सूचना देने के लिए बाध्य होगा जिसे वह अपनी अधिकारिता की स्थानीय परिसीमा के भीतर उस अपराध को करने के या किये जाने के आशय के सम्बन्ध से अपने पास रखता हो | 
(2) उपधारा (1) के द्वारा अपेक्षित सुचना देने में असमर्थ रहने वाला प्रत्येक सरपंच, पंच, पटवारी या लम्बरदार किसी भी प्रकार के ऐसी अवधि के कारावास से जो तीन माह तक का होगा, या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा |

टिप्पणी

मृत्युभोज की सुचना देने का कर्त्तव्य निम्नलिखित व्यक्तियों पर अधिरोपित किया गया है -

(i) सरपंच;
(ii) पंच;
(iii) पटवारी; एवं 
(iv) लम्बरदार

8. धन उधार लेने या उधार देने का प्रतिषेध:- (1) कोई भी व्यक्ति मृत्युभोज आयोजित करने या मृत्युभोज देने के लिए किसी अन्य व्यक्ति से धन या सामग्री न तो उधार लेगा या न कोई व्यक्ति उसे उधार देगा |
(2) इस जानकारी के साथ या विश्वास योग्य इन कारणों के होते हुए की उसके द्वारा उक्त प्रकार से दिए ऋण का उपयोग मृत्युभोज का आयोजन करने या मृत्युभोज देने के लिए किया जायेगा, तो उस दिए गए ऋण की अदायगी से सम्बन्ध में किया गया करार निष्प्रभावी होगा तथा उसे किसी भी न्यायालय में प्रवृत नहीं किया जायेगा |

9. अधिकारिता एवं अपराधों का संज्ञान :- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आलावा अन्य कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध के लिए न तो संज्ञान करेगा या न विचारण करेगा |

10. अभियोग चलाने के लिए परिसीमा :- कोई भी न्यायालय उस तारीख से जिसको की अपराध के लिए जाने का अभिकथन किया गया है, एक वर्ष व्यतीत होने के बाद इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध पर संज्ञान नहीं करेगा |

11. नियम बनाने की शक्ति :- (1) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्विति करने के लिए नियम बनाएगी |
(2) इस धारा के अधीन बनाये गए समस्त नियम, उनके बनाये जाने के बाद, यथा शक्य शीघ्र, राज्य विधान मंडल के सदन के समक्ष कम से कम चौदह दिन पूर्व रखे जायेंगे तथा, वे ऐसे उपान्तार्नो के अधीन होंगे जो सदन के उस रूप में जिसमे उक्त प्रकार रखे गए है, या तो निरसन के द्वारा या संशोधन के द्वारा किये जायेंगे |

12. निरसन :- जयपुर प्रिवेंसन ऑफ़ फनरल फीस्टस एक्ट, 1947 ( सन 1947 का जयपुर अधि. 41) एवं राज्य के किसी भी भाग में प्रवृत तत्समान अन्य कानून एतद्द्वारा निरसित किये जाते है |

बुधवार, 20 मई 2020

जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने कोविड कोष मंे 10 लाख चेक सौंपा



बाड़मेर,20 मई। 
कोरोना से निपटने के लिए जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड की ओर से बुधवार को जिला कलक्टर विश्राम मीणा को दस लाख रूपए का चेक सौंपा गया।
जिला कलक्टर विश्राम मीणा को जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड के संयत्र प्रमुख वीरेश  देवरामनी ने 10 लाख रूपए का चेक सौंपा। उन्हांेने जेएसडब्ल्यू की ओर से कोरोना से जंग मंे सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्हांेने बताया कि कोविड-19 से लड़ाई मंे जेएसडब्ल्यू   जिला  प्रशासन   के साथ है। इससे निपटने के लिए मास्क, पूर्ण बॉडीसूट एवं अन्य राहत सामग्री वितरित की गई है। जिला कलक्टर विश्राम मीणा ने जेएसडब्ल्यू के सहयोग के लिए सराहना की।

शनिवार, 16 मई 2020

फोटोग्राफर एसोशियन ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर, के नाम ज्ञापन सौंपा।

बाड़मेर - फोटोग्राफर  एसोशियन ने शुक्रवार प्रतिनिधि मंडल सदस्य अजय आचार्य के नेतृत्व में अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा। 


मंडल सदस्य मगराज परमार ने बताया कि लॉकडाउन के समय फोटोग्राफर का व्यापार पर संकट आ गया है जिसके कारण फोटोग्राफर का जीवनयापन करना बहुत कठिन हो गया है। इस परिस्थिति में फोटोग्राफर एसोशियन ने निर्णय लिया कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौपा जायेगा। जिसके तहत शुक्रवार को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व जिला कलेक्टर के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर राकेश शर्मा को ज्ञापन सौपा गया। 

   मंडल सदस्य कौशल आचार्य ने बताया कि ज्ञापन में एसोशियन ने मांग की सरकार द्वारा फोटोग्राफरो की आर्थिक सहायता दी जाए व आगामी माह में शादी समारोह में फोटोग्राफी करने की अनुमति प्रदान की जाए। अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने एसोशियन की मांग को मानने का आश्वासन दिया। ततपश्चात एसोशियन के प्रतिनिधि मंडल बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन के कार्यालय पहुचं कर ज्ञापन की प्रतिलिपि सौपी। 

बाड़मेर विधायक द्वारा एसोशियन प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया गया कि आपकी मांग को मैं मुख्यमंत्री महोदय को अवगत करवा कर मनवाने का प्रयास करूंगा। व एक ज्ञापन की प्रतिलिपि केंद्रीय राज्यमंत्री व बाड़मेर - जैसलमेर सांसद कैलाश  चौधरी के निजी सचिव को भेजी गई। ज्ञापनों को एसोशियन के द्वारा भी ईमेल के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय व मुख्यमंत्री कार्यालय भेजा गया है। 

इस दौरान फोटोग्राफर प्रतिनिधि मंडल सदस्य रमेश गुप्ता, सवाई आचार्य, लालचंद सास्वत, विष्णु जीनगर, अश्विन रामावत, नीरज सिंधी, ललित सैन, मौजूद रहे।

एक जून से होगा नि:शुल्क किताबों का वितरण

10 जून तक चलेगा पहला चरण, नोडल स्कूलों में पहुंचेगी किताबें, दूसरा चरण जून के अंतिम सप्ताह में होगा शुरू.....


जयपुर। 
शैक्षिक सत्र 2020—21 के लिए पाठ्यपुतकों का वितरण किया जाएगा। यह काम 1 जून से शुरू होगा। किताबें छपकर तैयार हो गई हैं, अब इन्हें स्कूलों में भेजा जाएगा। निदेशक माध्यमिक शिक्षा सौरभ स्वामी ने बताया कि कक्षा 1 से 12 तक की नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल द्वारा किया जाएगा। 

पाठ्य पुस्तकों का वितरण निर्धारित पंचायत सभी मुख्यालय पर स्थित ब्लॉक नोडल स्कूलों में किया जाएगा। निदेशक माध्यमिक शिक्षा सौरभ स्वामी ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते यदि किसी ब्लॉक नोडल विद्यालय को आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है और वहां पर पर्याप्त जगह नहीं है तो पास के स्कूल में किताबें रखने की व्यवस्था की जाएगी।


*इन्हें मिलेंगी नि:शुल्क किताबें*

शैक्षिक 2020—21 में सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यार्थियों को नि:शुल्क किताबों का वितरण किया जाना है। इसके साथ ही कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाली सभी छात्राओं व अनुसूचित जाति, जनजाति के छात्रों और ऐसे छात्र जिनके अभिभावक आयकर दाता नहीं हैं, उन्हें नि:शुल्क पाठय पुस्तकें वितरित की जाएंगी।


RTE एक्ट के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश सीमा अब ढाई लाख, मुख्यमंत्री ने दी मंजूरी

मुख्यमंत्री ने आरटीई एक्ट के तहत शुक्रवार को प्रदेश के गैर सरकारी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर नि:शुल्क प्रवेश के लिए अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा एक लाख रुपए के स्थान पर ढाई लाख रुपए करने को मंजूरी दी है.....

जयपुर। 
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निशुल्क शिक्षा एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (आरटीई एक्ट) के तहत प्रदेश के गैर सरकारी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्बल वर्ग एवं असुविधाग्रस्त समूह के निशुल्क प्रवेश के लिए अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा एक लाख रूपए के स्थान पर ढाई लाख रूपए करने को मंजूरी दी है।



गहलोत की इस स्वीकृति से प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना को मजबूती मिलेगी। आय सीमा बढ़ाने से दुर्बल वर्ग और असुविधाग्रस्त समूह के और अधिक बच्चे गैर सरकारी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश पा सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से बड़ी संख्या में इस वर्ग के वे बच्चे भी बड़े एवं नामी निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे जो गत सरकार द्वारा अभिभावकों की आय सीमा ढ़ाई लाख रूपए सालाना से घटाकर एक लाख रूपए करने के कारण वंचित हो गए थे।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों शिक्षा विभाग की वीडियो कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया था कि निशुल्क शिक्षा एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना के अनुरूप जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को लाभ दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि अभिभावकों की आय सीमा घटाने के फैसले के कारण जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को गैर सरकारी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा ग्रहण करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो कि इस अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।



राहत पैकेज का तीसरा ब्लू प्रिंट / वित्तमंत्री ने एक घंटा 17 मिनट में 11 घोषणाएं कीं, पर 7 में साफ नहीं कि लागू कब होंगी; खेती के लिए 1 लाख करोड़ रु

राहत पैकेज का तीसरा ब्लू प्रिंट / वित्तमंत्री ने एक घंटा 17 मिनट में 11 घोषणाएं कीं, पर 7 में साफ नहीं कि लागू कब होंगी; खेती के लिए 1 लाख करोड़ रु, किसानों को दूसरे राज्यों में भी उपज बेचने की छूट



किसान जोखिम रहित खेती कर सकें और फसल बोने से पहले ही उन्हें पता रहे कि इसके कितने दाम मिलेंगे, इसकी व्यवस्था बनाई जाएगी.....

नई दिल्ली।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का तीसरा ब्रेकअप बताया। उन्होंने 11 घोषणाएं कीं। इनमें से 8 घोषणाएं किसानों और खेती से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स के बारे में थीं। बाकी तीन घोषणाएं प्रशासनिक सुधारों के बारे में थीं। सबसे बड़ा ऐलान खेती से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए हुआ है, जिसके लिए एक लाख करोड़ रुपए का फंड मिलेगा।


*तीन दिन के दौरान 4 घंटे 21 मिनट में 35 घोषणाएं*

बुधवार: एक घंटा 29 मिनट बोलीं, 15 घोषणाएं 
गुरुवार: एक घंटा 35 मिनट बोलीं, 9 घोषणाएं 
शुक्रवार: एक घंटा 17 मिनट बोलीं, 11 घोषणाएं 


कल की घोषणाओं को फिर उन्हीं 4 बुनियादी आधार पर समझें कि क्या मिलेगा, किसे मिलेगा, कैसे मिलेगा और कब तक मिल सकेगा...




*वित्त मंत्री की 77 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस में 11 घोषणाएं*


*1. एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 1 लाख करोड़ रुपए का फंड*

*क्या मिलेगा*: फसल कटाई, कोल्ड चेन, स्टोरेज सेंटर जैसी ‘फार्म गेट’ सुविधाएं मजबूत करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए की फाइनेंसिंग की जाएगी।

*किसे मिलेगा*: एग्रीकल्चरल इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रायमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसयटी और खेती से जुड़े स्टार्टअप्स को यह मदद दी जाएगी।

*कैसे मिलेगा*: यह पैसा शॉर्ट टर्म लोन के जरिए मिलेगा।

*कब मिलेगा:* सरकार का कहना है कि तुरंत ही यह फंड बना लिया जाएगा।


*2. माइक्रो फूड एंटरप्राइज के लिए 10 हजार करोड़ रुपए*

*क्या मिलेगा*: लोकल के लिए वोकल के नारे को ध्यान में रखते हुए माइक्रो फूड एंटरप्राइज को 10 हजार करोड़ रुपए की मदद दी जाएगी ताकि वे फूड स्टैंड्‌डर्स का ध्यान रखते हुए ब्रांडिंग और मार्केटिंग कर सकें।

*किसे मिलेगा*: ऐसी 2 लाख यूनिट्स को इसका फायदा मिलेगा। कश्मीर का केसर हो, उत्तर प्रदेश का आम हो, पूर्वोत्तर का बांस हो, आंध्र प्रदेश की मिर्ची हो या बिहार का मखाना हो, इस तरह के उद्यमों को इसमें मदद मिलेगी।

*कैसे मिलेगा:* कृषि उपज संस्थाओं, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और सहकारी संस्थाओं के जरिए यह मदद दी जाएगी।

*कब मिलेगा*: सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है।

*3. मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए*

*क्या मिलेगा:* प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिए 20 हजार करोड़ रुपए की मदद मिलेगी। इसमें 11 हजार करोड़ रुपए मछली पालन और 9 हजार करोड़ रुपए बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने के लिए मिलेंगे।

*किसे मिलेगा*: यह योजना मछुआरों के लिए है ताकि उन्हें मछली पालन में मदद मिल सके। द्वीप वाले राज्यों, हिमालयी राज्यों, पूर्वोत्तर और मछली पालन में आगे रहने वाले जिलों को यह मदद मिलेगी।

*कैसे मिलेगा*: मंडियों, हार्बर और कोल्ड चेन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पैसा खर्च होगा। 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। 1 लाख करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हो सकेगा।

*कब मिलेगा*: सरकार को उम्मीद है कि इससे 5 साल में 70 लाख टन ज्यादा मछली पालन हो सकेगा।




*4. पशुओं के टीकाकरण के लिए 13 हजार 343 करोड़ रुपए*

*क्या मिलेगा:* गाय, भैंस, भेड़, बकरी, सूअरों काे टीका लगाया जाएगा। इस पर 13 हजार 343 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

*किसे मिलेगा*: 53 करोड़ पशुओं को ये टीके लगेंगे। इन्हें पालने वालों को सरकार मदद देगी।

*कैसे मिलेगा*: जिन पशुओं को पाला जाता है, उन्हें मुंह और खुर की बीमारियां न हो, इसके लिए टीके लगाए जाएंगे। अभी तक 1.5 करोड़ गाय-भैंस को यह टीका लगाया जा चुका है।

*कब मिलेगा:* सरकार ने यह अभी साफ नहीं किया है।


*5. पशुपालन सेक्टर में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 15 हजार करोड़ रुपए*

*क्या मिलेगा:* पशुपालन सेंटरों के लिए बुनियादी ढांचा बनेगा। इस पर 15 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।

*किसे मिलेगा*: डेयरी चलाने वालों को। इस पैसे से दूध के लिए प्रोसेसिंग इंडस्ट्री लगेंगी। डेयरी सेक्टर में निजी इन्वेस्टमेंट हो सकेगा।

*कैसे मिलेगा*: पशुओं को रखने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनेगा। लोकल मार्केट और एक्सपोर्ट के लिए भी पैसा इस्तेमाल होगा। अगर एक्सपोर्ट करना चाहते हैं तो प्लांट के लिए इंसेंटिव मिलेगा।

*कब मिलेगा*: सरकार ने यह अभी साफ नहीं किया है।

*6. औषधीय पौधों के लिए 4 हजार करोड़ रुपए*

*क्या मिलेगा*: हर्बल प्रोड्यूस के लिए 4 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे।

*किसे मिलेगा*: मेडिसिनल प्लांट की खेती करने वाले किसानों को फायदा मिलेगा। 10 लाख हेक्टेयर यानी करीब 25 लाख एकड़ में खेती हो पाएगी।

*कैसे मिलेगा:* यह खेती करने पर किसानों की 5 हजार करोड़ रुपए की आमदनी होगी। क्षेत्रीय मंडियों पर पैसा खर्च होगा। गंगा किनारे भी औषधीय पौधे लगाने की मुहिम चलाई जाएगी। गंगा किनारे ऐसे पौधों का 800 हेक्टेयर का कॉरिडाेर बनाया जाएगा।

*कब मिलेगा*: अगले दो साल में यह पैसे खर्च होंगे।़


*7. मधुमक्खी पालने वालों के लिए 500 करोड़ रुपए*

*क्या मिलेगा:* मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। शहद की सप्लाई बढ़ेगी। किसानों के लिए यह उनकी आमदनी का अतिरिक्त जरिया होगा।

*किसे मिलेगा*: मधुमक्खी पालने वाले 2 लाख लोगों को इसका फायदा मिलेगा।

*कैसे मिलेगा*: महिलाओं को इसमें ज्यादा मौका दिया जाएगा। शहद के कलेक्शन, स्टोरेज और मार्केटिंग में मदद मिलेगी।

*कब मिलेगा:* सरकार ने यह अभी साफ नहीं किया है।




*8. TOP यानी टमाटर, आलू, प्याज योजना में अब सब्जियां और फल भी*

*क्या मिलेगा*: टमाटर, आलू और प्याज के मामले में ऑपरेशन ग्रीन चलता है ताकि किसानों को इसका ठीक पैसा मिले। अब यह योजना फल और सब्जियों पर भी लागू होगी।

*किसे मिलेगा*: उन किसानों को फायदा मिलेगा, जो आलू, प्याज और टमाटर के अलावा फल और सब्जियां भी उगाते हैं, लेकिन जिन्हें कई बार इनके सही दाम नहीं मिल पाते।

*कैसे मिलेगा*: इसके लिए 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 50% सब्सिडी ट्रांसपोर्टेशन और 50% सब्सिडी स्टोरेज और कोल्ड स्टोरेज पर दी जाएगी।
कब मिलेगा: छह महीने का पायलट प्रोजेक्ट होगा।


*9. आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव होगा*

*क्या मिलेगा*: खेती में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और किसानों को अच्छे दाम देने के लिए 1955 के आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव किया जाएगा।

*किसे मिलेगा*: तिलहन, दलहन, आलू, प्याज उगाने वाले किसानों और खाने का तेल बेचने वालों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। इन्हें रेगुलेशन के दायरे से बाहर किया जाएगा।

*कैसे मिलेगा*: इन चीजों के लिए किसानों पर कोई स्टॉक लिमिट नहीं थोंपी जाएगी। प्रोसेसर और वैल्यू चेन में शामिल लोगों के लिए स्टॉक लिमिट नहीं होगी। स्टॉक लिमिट सिर्फ राष्ट्रीय आपदा जैसे असाधारण मामलों में ही लागू की जाएगी।

*कब मिलेगा:* सरकार ने यह नहीं बताया कि कानून में संशोधन कब होगा।


*10. एग्रीकल्चर मार्केटिंग रिफॉर्म*

*क्या मिलेगा*: एक केंद्रीय कानून बनेगा ताकि किसानों के पास अच्छी कीमतों पर उपज बेचने का मौका रहे।

*किसे मिलेगा*: उन किसानों काे, जो अब तक लाइसेंस रखने वाली एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर मार्केट कमेटी में ही अपनी उपज बेच पाते थे।

*कैसे मिलेगा*: किसान दूसरे राज्यों में जाकर भी बिना रोकटोक कृषि उपज बेच सकेंगे। वे ई-ट्रेडिंग भी कर सकेंगे।

*कब मिलेगा*: सरकार ने यह अभी साफ नहीं किया है।


*11. किसानों के लिए कानून में बदलाव होंगे*

किसानों को अभी फसल बोते वक्त यह नहीं पता होता कि उसे इसके कितने दाम मिलेंगे और पूरी उपज बिकेगा या नहीं। सरकार चाहती है कि हर सीजन से पहले किसानों को यह पता रहे कि उसे अपनी उपज का कितना दाम मिलेगा। किसानों को आमदनी की गारंटी देने के लिए सरकार कानून में बदलाव कर ऐसी व्यवस्था बनाएगी जिसके तहत फूड प्रोसेसर, एग्रीगेटर्स, रिटेलर्स और एक्सपोर्टर्स के साथ किसान अपनी उपज का दाम पहले ही तय कर सकेगा। मकसद यह है कि मेहनती किसानों का उत्पीड़न न हो और वे जोखिम रहित खेती कर सकें।

गुरुवार, 14 मई 2020

शहर में श्री राम ग्रुप ने लगाए परिंडे


बाड़मेर/14.05.2020
कलेक्टर बंगला के पास और महावीर नगर में अपनी दुकान के आगे परिडे लगाए और कोरोना महामारी के बचाव में सरकारी नियमों का पालन करने के साथ साथ  पशु पक्षियों  के लिए सेवा दे रहे हैं ऐसे ही एक अभियान की  शुरुआत मनु स्मृति संस्थान  के अध्यक्ष के द्वारा  की गई गोकुल चौधरी बताया की प्रत्येक  दुकान एक परिंडा का अभियान शुरू किया गया की युवा साथी को  दुकानों या शहर में घरो के आगे एक परिंडे की अपील की साथ में उपस्थित गणेश पलिवाल, लुणाराम, राज बैनिवाल, जुगु सारण उण्डखा उपस्थित थें.

बुधवार, 13 मई 2020

जून में होने वाली यूजीसी नेट परीक्षा 2020 कैंसिल, जल्द नई तारीखों का होगा ऐलान

15 से 20 जून तक आयोजित होने वाले नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) को कोरोनो वायरस के बढ़ते प्रसार को देखते हुए निरस्त कर दिया गया है......

नई दिल्ली।
देशभर में जारी लॉकडाउन के कारण परीक्षाओं के स्थगन का सिलसिला लगातार जारी है. इसी क्रम में अब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की तरफ से आयोजित होने वाली यूनिवर्सिटी ग्रांड कमीशन राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा 2020 (यूजीसी नेट 2020) को भी स्थगित कर दिया गया है. इसके बाद जून में होने वाली यह परीक्षा अब आयोजित नहीं की जाएगी।

इस बारे में मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने लाइव बातचीत ‌वेबिनार के दौरान कहा कि जून में प्रस्‍तावित यह परीक्षा तय शेड्यूल पर आयोजित नहीं होगी. परीक्षा की संशोधित तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी.

*आवेदन की तारीख बढ़ी*

15 से 20 जून तक आयोजित होने वाले नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) को कोरोनोवायरस के बढ़ते प्रसार को देखते हुए निरस्त कर दिया गया है. संक्रमण के कारण देशभऱ् में बने हालातों को मद्देनजर केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता के रूप में रखते हुए यह परीक्षा भी स्थगित की जाएगी. इसके साथ ही एनटीए ने फिलहाल यूजीसी नेट और सीएसआईआर नेट की आवेदन की समय सीमा बढ़ा दी है.




*जेईई मेन और नीट का शेड्यूल जारी*

दिसंबर 2019 में हुए यूजीसी नेट में 10 लाख से ज्यादा उम्‍मीदवारों ने आवेदन किया था, जिसमें से सिर्फ 7.39 लाख ही इसमें उपस्थित हुए थे. परीक्षा में शामिल उम्‍मीदवारों में से 60147 उम्मीदवार असिस्‍टेंट प्रोफेसर के लिए क्‍वालिफाई हुए, जबकि 5092 ने जेआरएफ के लिए परीक्षा पास की. इसके अलावा शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि जेईई मेन 18 से 23 जुलाई तक आयोजित की जाएगी और नीट 26 जुलाई को आयोजित की जाएगी.



क्या आपको पढ़ाई करते समय आलस व नींद आती है ?

#क्या #आपको #पढ़ाई #करते #समय #नींद #परेशान #करती #है?
क्या आप अक्सर किताबों पर मुंह रखकर सोते पाए जाते हैं? प्यारे विद्यार्थियों, पढ़ाई करते समय नींद आना एक बहुत ही आम समस्या है. जैसे ही हम पढ़ने बैठते हैं तो नींद आने लगती है जिसकी वजह से हमारा दिमाग काम करना बंद कर देता है. आंखों मे नींद घुलने पर हम कुछ समय तो जबरदस्ती पढ़ने की कोशिश करते हैं किंतु अंत में जब सब कुछ हमारे बस से बहार हो जाता है तो हमें बेबस होकर ‌‌‌सोना ही पड़ता है या फिर कभी-कभी पता ही नहीं चलता कि कब आँख लग गयी. नींद आने की इस समस्या के कारण विद्द्यार्थी चाहकर भी अपने स्टडी टारगेट को पूरा नहीं कर पाते.



विद्यार्थियों की इसी समस्या का हल निकालते हुए, हम इस लेख में 8 ऐसे सरल उपाए बताने जा रहे हैं जो आपको बिना सोये प्रभावशाली तरीके से पढ़ाई करने में काफ़ी मददगार साबित होंगे:

1. कम रौशनी में कभी ना पढ़ें

बहुत से विद्द्यार्थी सिर्फ़ एक स्टडी लैंप जला कर ही पढ़ाई करते हैं जिसकी वजह से कमरे के बाकी हिस्से में तकरीबन अंधेरा रहता है. अब आप ही बताओ कि मद्धम सी रौशनी, उसपे शांतिप्रद व आरामदायक परिवेश, ऐसे वातावर्ण में नींद आना तो अति स्वभाविक है. ऐसी स्थिति को उत्पन्न होने से रोकने के लिए अपने स्टडी रूम को अच्छे से प्रकाशित रखें

2. बेड पर लेटकर पढ़ने से बचें

पढ़ाई करते समय आपका आसन और बैठने का तरीका भी बहुत महत्व रखता है. बेड पर लेटकर कभी ना पढ़ें. इससे आपको आलस आ सकता है, जो कि नींद को आमंत्रित करता है. इसलिए पढ़ाई करते समय हमेशा कुर्सी पर सही ढंग से पीठ सीधी करके ही बैठें. सामने एक टेबल रखें और किताब गोद में रखकर पढ़ने की बजाए सामने टेबल पर रखकर पढ़ें. कुर्सी पर बैठे समय भी अपने हाथ या पाँव कुछ-कुछ समय बाद हिलाते रहें. इससे आपके अन्दर सक्रियता बनी रहेगी.

3. अत्यधिक खाने से हो सकता है नुकसान

आप अकसर महसूस करते होंगे कि भर पेट भोजन करने के बाद शरीर में भारीपन, सुस्ती या आपको नींद आने लगती है जो कि शरीर में शुरू होने वाली पाचन प्रक्रिया की वजह से होता है. इसलिए बेहतर होगा कि आप कम खाएं और तीन बार खाने की बजाये दिन में पाँच बार खाएं. कभी भी भूखे पेट ना पढ़ें. इससे आपके दिमाग की याद करने की क्षमता कम हो जाती है. भोजन करने के तुरंत बाद पढ़ने के लिए ना बैठें.

4. भरपूर मात्रा में पानी पीने से होगा फ़ायदा

पढ़ाई करते समय ज्यादा पानी पीना न तो सिर्फ़ आपकी सेहत के लिए फ़ायदेमंद होगा बल्कि इससे आपको एक और फायदा मिलेगा. ज़्यादा पानी पीने से आप को कुछ-कुछ देर बाद अपनी सीट से उठकर मूत्र के लिए जाना पड़ेगा जिससे आपके शरीर की निष्क्रयता टूटेगी और आप सक्रिय बने रहेंगे. साथ ही ज़्यादा पानी पीने से दिमाग हाइड्रेटेड व तरोताज़ा रहता है और इसकी सक्रियता बनी रहती है जिससे आसानी से पाठ याद करने में सहायता मिलती है




5. जल्दी सोने और जल्दी उठने का रूटीन अपनाएं

अंग्रेजी की एक मशहूर कहावत है “Early to bed, early to rise makes a man healthy, wealthy and wise” जिसका मतलब है कि जल्दी सोने और जल्दी उठने से शारिरिक तंदरुस्ती, समृद्धि व दिमागी शक्ति में बढ़ावा होता है. विद्यार्थी जीवन में भी इस कथन का उतना ही महत्व है जितना एक आम आदमी के जीवन में. रात को जल्दी सोने से आप प्रयाप्त नींद ले सकते हैं जिससे आप सुबह बिलकुल तरोताज़ा उठेंगे. फ्रेश माइंड से चीज़ें याद रखना बहुत ही आसान होता है. और फिर पर्याप्त समय तक सोने के बाद पढ़ाई करते वक्त फिर से नींद आने का कोई मतलब नहीं बनता.

6. दोपहर के बाद एक छोटी झपकी रखेगी आपको तारोताज़ा

इम्तिहान के दौरान सुबह में लगातार पढ़ने के बाद अगर आप बाद दोपहर भी अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं तो शायद थके हुए दिमाग के साथ आपके लिए याद करना मुश्किल हो जायेगा. इसलिए बेहतर होगा कि दोपहर का खाना खाने के बाद घंटे भर के लिए सो जायें. इससे आपकी सुस्ती व उनींदापन दूर होगा और आपका दिमाग नए तरीके से चीज़ों को याद करने के लिए तरोताज़ा हो जायेगा.

7. रात के समय पढ़ने के लिए चुनें अपना पसंदीदा विषय

रात के समय पढ़ने के लिए सिर्फ़ वही विषय चुनें जो आपके फेवरेट हैं और जिन्हें आप आसानी से समझ व याद कर सकते हैं. सरल विषय या टॉपिक्स को रात में याद करने के लिए आपको ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी जिससे आपको बोरियत भी नहीं होगी और आप ज़्यादा देर तक बैठकर पढ़ाई कर पाएंगे.




8. बोल-बोल कर तथा लिखकर करें पढ़ाई

यह तरीका पढ़ाई करते वक्त होने वाली बोरियत तथा आने वाली नींद को दूर भगाने में काफ़ी हद तक कारगार सिद्ध होता है. हर विषय को इस तरह से बोल बोल कर पढ़ें जैसे कि क्लास में टीचर पढ़ाते हैं. इससे आपका दिमाग सतर्क बना रहता है और नींद आने की सम्भावना भी कम हो जाती है. इसके अलावा खुद को एक्सप्लेन करके पढ़ने से चीज़ों को याद करना भी बहुत आसान हो जाता है. इसके साथ ही पाठ को सिर्फ़ मौखिक रूप से याद करने की बजाये मुश्किल उत्तरों या सवालों को लिखकर भी याद करें. इससे भी आपकी सतर्कता बनी रहेगी और चीज़ें याद करने में भी आसानी होगी.

इस तरह से प्यारे विद्यार्थिओं, अगर आप और ज़्यादा अंक प्राप्त करने के लिए अधिक घंटों तक बैठकर पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन नींद आपके लक्ष्य तक पहुँचने के बीच बाधा डाल रही है तो ऊपर दिए गये टिप्स व सुझाव निश्चित रूप में आपकी मदद करेंगे.