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सोमवार, 11 जनवरी 2021

महिला अत्याचार के 46% मामलाें में एफआर, 1 साल में दर्ज हुए 58 हजार मामलाें काे पुलिस ने गलत माना

सरकार ने थानाें में फ्री रजिस्ट्रेशन शुरू करने के साथ ही आपराधिक मामले तेजी से बढ़े हैं लेकिन जब धीरे धीरे पुलिस ने इन मामलाें की जांच की ताे 40 से 50 प्रतिशत मामले झूठे निकले। महिलाओं की ओर से दर्ज कराए गए मामलाें में पुलिस जांच में सामने आया कि करीब 46 प्रतिशत मामले गलत दर्ज कराए गए थे। यही स्थिति एससी एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलाें की रही।

अनुसूचित जातियाें पर अत्याचार संबंधी मामलाें में करीब 50 प्रतिशत जांच में गलत पाए गए। नवंबर माह तक प्रदेश भर में दर्ज हुए एक लाख 79557 मामलाें में से 57 हजार 160 मामले जांच में गलत पाए गए। जिन पर पुलिस ने एफआर लगा दी। 46 हजार 254 मामलाें पर जांच जारी है। महिलाओं के अपहरण संबंधी 70 प्रतिशत मामले गलत पाए गए। संपत्ति संबंधी अपराधाें में भी करीब 28 प्रतिशत मामलाें में पुलिस ने एफआर लगा दी।

काेराेना संक्रमण के चलते प्रदेश में 15 प्रतिशत मामले कम दर्ज हुए। 2019 में 2 लाख 13 हजार 70 मामले दर्ज हुए थे। इस साल 1 लाख 90 हजार मामले दर्ज हुए। फ्री रजिस्ट्रेशन करने और मामला दर्ज नहीं करने वाले थाना प्रभारियाें के खिलाफ कारवाई करने के चलते गत वर्ष 50 हजार मामले ज्यादा दर्ज हुए थे। 2020 में सबसे ज्यादा अपहरण के मामलाेंं में कमी अाई। 2019 में जहां 7617 मामले दर्ज हुए थे वहीं वर्ष 2020 में नवंबर माह तक 5736 मामले ही सामने आए।

महिला अत्याचार के 32106 मामले दर्ज हुए, 10851 मामलाें में एफआर
प्रदेश में नवंबर माह तक महिला अत्याचार के 32106 मामले दर्ज हुए। इनमें जांच में 10851 मामले गलत पाए गए। साथ ही 12767 मामलों में पुलिस ने चालान पेश कर दिया। 8488 मामलाें पर पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। इनकी जांच की जा रही है। यानी की करीब 46 प्रतिशत मामले पुलिस जांच में गलत पाए गए। दहेज हत्या के दर्ज हुए 450 में से 94 मामले जांच में गलत निकले। इसी तरह से महिला उत्पीडन, दहेज प्रताड़ना के दर्ज मामले 12926 मामलाें में से 4147 मामले गलत पाए गए।

अनुसूचित जाति पर अत्याचार के 6545 मामले, 2295 में लगाई एफआर

अनुसूचित जाति पर अत्याचार संबंधी मामलाें में पुलिस ने करीब 50 प्रतिशत मामले गलत माने हैं। 2020 में नवंबर माह तक प्रदेश में अनुसूचित जाति पर अत्याचार के 6545 मामले दर्ज हुए। इनमें से पुलिस ने जांच के बाद 2295 में एफआर लगा दी। साथ ही 1919 मामलांे पर पुलिस अनुसंधान कर रही है। हत्या के 73 मामलाें में पुलिस ने सात काे जांच में गलत माना।

इसी तरह से दुष्कर्म के 440 मामलाें में से 148 काे गलत माना। जबकि 109 की जांच की जा रही है। 3एससी एसटी एक्ट के 117 मामलाें में से 63 मामलाें में पुलिस ने एफआर लगा दी।27 में पुलिस अभी जांच कर रही है। इसी तरह से अनुसूचित जनजाति के 1755 मामले दर्ज कराए गए। इनमें से 577 मामले जांच में गलत पाए गए। 643 मामलाें में पुलिस ने आराेप प्रमाणित माने। जबकि 535 में पुलिस अभी तक किसी नतीजे पर हनीं पहुंच सकी है।



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In 46% cases of female atrocities, the FR is considered wrong by the police, 58 thousand cases filed in 1 year
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प्रदेश में औसतन 15 हजार आवेदन आते थे; अब सिर्फ 1500, उदयपुर से 95

हज यात्रा के आवेदन का मंगलवार को अंतिम दिन था, लेकिन मुस्लिम समाज के लोगों ने बहुत कम रुचि दिखाई। प्रदेश में हर साल औसतन 15 हजार से ज्यादा आवेदन आते हैं, लेकिन इस बार महज 1549 ने ही आवेदन किया है।

उदयपुर से 450 तक आवेदन होते थे लेकिन अब सिर्फ 95 ही मिले। ये हालात तब हैं, जबकि कम आवेदन को देखते हुए इसकी तारीख भी 10 दिसंबर से बढ़ाकर 10 जनवरी की गई थी। इसके अलावा एक साल के गेप के बाद यह यात्रा हो रही थी। हज के लिए प्रदेश का पांच हजार तथा उदयपुर का 125 यात्रियों का कोटा है। कोटे की तुलना में प्रदेश में 31% तथा उदयपुर में 76% लोगों ने आवेदन किया।

तारीख बढ़ाने की सूचना नहीं : सीईओ
प्रदेश में 20 साल में पहली बार कोटे से इतने कम आवेदन मिले हैं। राज्य हज कमेटी के सीईओ डॉ. महमूद खान ने बताया कि आवेदन की तारीख बढ़ाए जाने को लेकर अभी सूचना नहीं है।

आवेदन कम आने के पीछे ये अहम कारण
1. इस बार 18 से 65 आयु वर्ग के लोगों को ही मौका, जबकि आवेदनों में सबसे ज्यादा संख्या बुजुर्गों व बच्चों की रहती है।
2. गर्भवतियों और गंभीर बीमार को मौका नहीं दिया गया।
3. 15 साल में पहली बार जयपुर की जगह दिल्ली से फ्लाइट।
4. पहले यात्रा खर्च 2.5 लाख था, इस बार 3.44 लाख।
5. खर्च के लिए हज कमेटी की ओर से पहले 40 हजार रु मिलते था। इस बार 28 हजार ही मिलेंगे।
6. यात्रा के लिए 40 दिन के बजाय 30 दिन ही मिलेंगे। इसमें भी 6 से 14 दिन क्वारेंटाइन में गुजारने होंगे।
7. चयनित होने के बाद पहली किश्त 81 हजार की बजाय 1.50 लाख जमा कराने होंगे।



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फाइल फोटो
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को-वैक्सीन का ट्रायल पूरा, एसएमएस के किसी डॉक्टर ने नहीं लगवाया ट्रायल टीका

कोरोना वैक्सीन लगाने का काम शुरू होने की पूरी तैयारी है। जयपुर में चल रहा को-वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल भी लगभग पूरा हो गया है। 1494 पर ट्रायल होने के बाद अब कंपनी को भी सभी सब्जेक्ट का पूरा डेटा सबमिट कर दिया जाएगा। तीन दिन बाद कंपनी के आला अधिकारी जयपुर पहुंचेंगे और पूरा फीडबेक लेने के बाद वैक्सीन के उपयोग पर अंतिम सहमति देंगे।

हालांकि को-वैक्सीन को प्रथम दृष्टया मंजूरी मिल चुकी है, और जयपुर में भी किसी सब्जेक्ट पर कोई अधिक साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है। ऐसे में तय माना जा रहा है कि इस वैक्सीन को जयपुर से भी हरी झंडी मिल जाएगी। इन सब में चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरे ट्रायल के दौरान एसएमएस अस्पताल के किसी भी डॉक्टर ने ट्रायल नहीं दिया। वहीं हजारों के नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन या अन्य में से भी केवल तीन जनों ने ही ट्रायल दिया।

एसएमएस के किसी भी डॉक्टर की ओर से ट्रायल नहीं देना सभी को चौंका रहा है। इसके पीछे बताई जाने वाली वजहों में कई डॉक्टर्स का पॉजिटिव आना एक है। इस कारण से वे ट्रायल पर नहीं जा सके। दूसरी वजह में डॉक्टर्स का ट्रायल पर विश्वास नहीं था और तीसरी वजह में वे किसी भी निजी अस्पताल जाकर ट्रायल नहीं कराना चाहते थे। ऐसे में न केवल सीनियर डॉक्टर बल्कि रेजीडेंट और मेडिकल स्टूडेंट भी ट्रायल के नहीं गए।

^ एसएमएस से तीन नर्सिंग स्टाफ ने ही ट्रायल दिया है। ट्रायल का काम लगभग पूरा हो गया है और अब तीन दिन में कमेटी आएगी, जिसे रिपोर्ट सौंपी जाएगी। हर आयु के व्यक्ति ने ट्रायल दिया है जो कि काफी उत्साहजनक है।
डॉ. मनीष जैन, प्रिंसीपल इंवेस्टीगेटर, क्लीनिकल ट्रायल

इन्होंने दिखाया सबसे अधिक उत्साह
ट्रायल के लिए 18-30 आयु के 558 लोगों ने ट्रायल दिया। इसके अलावा 31 से 50 आयु के 704 लोगों ने ट्रायल दिया। यह संख्या काफी अधिक रही। इसमें भी 40 वर्ष से अधिक आयु के केस अधिक रहे। वहीं 51 वर्ष से अधिक उम्र के 232 लोगों ने ही ट्रायल दिया। वहीं सामने यह भी आया कि 55 वर्ष से अधिक आयु के काफी अधिक लोग ट्रायल के लिए आए लेकिन कोविड होने, डायबिटीज, कार्डियो, न्यूरो या अन्य कई दवाइयां चलते रहने की वजह से उनका ट्रायल नहीं किया जा सका।

इन्होंने भी दिया ट्रायल में सहयोग

कुल 70 डॉक्टर्स ने ट्रायल दिया और उनके परिवार के सदस्यों ने भी ट्रायल दिया। वहीं विभिन्न जगहों के 52 नर्सिंग स्टाफ, पेरामेडिकल स्टाफ भी वैक्सीनेशन ट्रायल का हिस्सा बने। एसएमएस के केवल तीन नर्सिंग स्टाफ आगे आया।



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Co-vaccine trial complete, no SMS doctor has administered trial vaccine
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घर से दफ्तर जा रहे थे अतुल, मांझे ने पहुंचा दिया अस्पताल

सर्दी के दिन। धूप सेंकने और पतंगबाजी के दिन। हमेशा की तरह इस बार भी लोग छतों पर चढ़ चुके हैं। आसमान पतंगों से भरने लगा है और मांझा हवा में तैरता हुआ सड़कों पर गिर रहा है। नतीजा- हादसा। रविवार को खिली धूप और छुट्‌टी का असर रहा कि जयपुर में मकर संक्रांति की पतंगबाजी का रिहर्सल-सा हो गया। खुले मौसम और तेज हवा में दिनभर खूब पतंगें उड़ीं। दो हादसे भी हो गए।

सिरसी रोड के हर्षवर्धन बजरी मंडी रोड से जा रहे थे। अचानक मांझा आ गया। मांझा इतना तेज खिंचा कि जुगलर वेंस और सांस की नली कट गई। गनीमत रही कि लोग तुरंत पास के ही हॉस्पिटल ले गए। तुरंत ऑपरेशन के बाद उन्हें बचाना संभव हुआ। डॉ. अम्बरीश गुप्ता ने बताया कि मांझा जरा भी और अंदर जाता या लाने में देरी हो जाती तो बचाना मुश्किल था।

मानसरोवर से जयपुर डेयरी में ड्यूटी पर आ रहे अतुल जैन (38) की बाइक पर गोपालपुरा पुलिया चढ़ते ही मांझा गिरा। वे संभल पाते इससे पहले ही मांझा उनके हेलमेट के ग्लास के नीचे ऐसा खिंचा कि आंखें और माथे पर चीरा लग गया। खून बह चला। बाइक से गिर पड़े। गनीमत रही कि पीछे कोई गाड़ी नहीं आ रही थी।

बेहाल होकर फुटपाथ पर बैठ गए। देखने वालों ने संभाला। स्कूटी से जा रही मां-बेटी ममता शर्मा और नंदिनी ने वहीं स्कूटी खड़ी की, ऑटोरिक्शा रुकवाकर अतुल जैन को अपने साथ जयपुरिया अस्पताल ले गईं। यहां अतुल जैन को 12 टांके लगाने पड़े। ममता शर्मा ने बताया- दो साल पहले उनके पति के गले पर भी मांझा फिर गया था, वो इस दर्द से परिचित हैं।

घर से दफ्तर जा रहे थे अतुल, मांझे ने पहुंचा दिया अस्पताल

जनवरी 2020 में वैशाली नगर में ड्यूटी पर जा रहे ट्रैफिक पुलिसकर्मी दिनेश कुमार पर मांझा फिर गया। उनकी नाक पर गहरा चीरा लगा। लोगों ने संभाला और हॉस्पिटल पहुंचाया। 8 टांके लगे थे। गत वर्ष मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाते समय गिरने से या मांझे से कटने से 103 लाेग घायल हुए थे, जाे एसएमएस अस्पताल पहुंचे थे। इनमें से 28 काे गंभीर होने पर भर्ती करना पड़ा था।

2014 में मकर संक्रांति के दिन पांच साल की चंचल पिता प्रमाेद व मां के साथ बाइक पर जा रही थी। बरकत नगर के पास चंचल के गले पर मांझा खिंचा। सांस की नली कटने से उसकी माैत हाे गई थी।
बाइक के हैंडल में लोहे की ताड़ी लगा लें तो डोर आप तक पहुंच ही नहींं पाएगी, मफलर-हेलमेट जरूर पहनें

बाइक के हैंडल में लोहे की ताड़ी लगा लें तो डोर आप तक पहुंच ही नहींं पाएगी, मफलर-हेलमेट जरूर पहनें

1. बाइक, स्कूटी या दुपहिया वाहन के हैंडल पर दो फीट की लोहे की ताड़ी लगवा लें या खुद बांध ले। ये अकेला ऐसा उपाय है जो डोर को आप तक नहीं पहुंचने देगा।
2. दुपहिया चला रहे हैं तो मत भूलिए...पतंगबाजी के दिन हैं। फुल साइज हेलमेट पहनें। गले को मफलर या कपड़े से कवर कीजिए कि मांझा फंसे भी तो कोई नुकसान नहीं हो।

3. भूलकर भी बच्चों को बाइक-स्कूटी पर आगे ना बिठाएं। पीछे भी मुंह-गला ढककर ही रखें।
4. रफ्तार धीमी रखें, ताकि डोर पड़े तो आपको संभलने का मौका मिले।



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Atul was going to office from home, Manjhe reached hospital
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पीजी की 80% सीटों पर यूजी संबंधित विषय लेने वाले को ही प्रवेश

राजस्थान यूनिवर्सिटी कोरोना की वजह से बिना एंट्रेंस टेस्ट लिए पीजी में प्रवेश दे रही है। यूनिवर्सिटी ने निर्णय लिया है कि पीजी की 80% सीटों पर यूजी से संबंधित सब्जेक्ट वाले कोर्स में ही प्रवेश दिया जाएगा। यूजी में जो विषय पढ़ें हैं, पीजी में भी वही कोर्स मिलेगा। 20% सीटों पर ही अलग विषय वाले प्रवेश होंगे। पिछले साल तक एंट्रेंस टैस्ट होता था जिससे किसी भी सब्जेक्ट का स्टूडेंट कोई भी पीजी कोर्स कर सकता था। कोई स्टूडेंट दूसरी बार पीजी करना चाहता है तो उसके पीजी में 60% या यूजी में 55% अंक होने चाहिए।

यूनिवर्सिटी के 37 विभागों में पीजी की 3400 सीटें हैं। जिनके लिए इस बार करीब 22,600 फॉर्म आए हैं। सोमवार को पहली मेरिट लिस्ट निकलेगी। 12- 13 जनवरी को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होंगे। पीजी एडमिशन की कन्वीनर डॉ. रश्मि जैन ने बताया- एंट्रेंस टैस्ट विषयवार होता था, जिससे विषय के बारे में छात्र की समझ की परख हो जाती थी। अब बिना एंट्रेंस के तो 20% सीटों पर ही अलग विषय में प्रवेश मिलेगा।



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नामांतरण से जुड़े 83 लंबित मामले निपटाए, 41 नए आवेदन

नगर निगम में रविवार को लगे विशेष शिविर में नामांतरण से जुड़े लंबित 83 मामलाें का निस्तारण किया गया। निगम आयुक्त हिम्मतसिंह बारहठ ने बताया कि सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले शिविर में 150 आवेदक आए।

लाेगाें की सुविधा के लिए शिविर स्थल पर ही ई-मित्र डेस्क, नाेटरी और स्टांप वेंडर भी व्यवस्था भी की गई, ताकी आवेदक काे इनसे जुड़े काम के लिए भटकना नहीं पड़े। संबंधित शाखाओं के सभी अधिकारी और कर्मचारी भी माैजूद रहे। ताकी किसी भी फाइल में कोई कमी हाे ताे उसे मौके पर ही सुधारा जा सके। पत्रावलियाें में आवश्यक पूर्ति कर 83 लंबित प्रकरणाें का निस्तारण किया गया। साथ ही 41 नए आवेदन भी लिए गए। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सभी निकायों को नामांतरण से जुड़े लंबित मामलाें का निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। शिविर में भवन अनुमति समिति अध्यक्ष आशीष काेठारी, डीटीपी नीलम वर्मा, एटीपी सिराजुद्दीन भी माैजूद थे।



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शिविर में नामांतरण से जुड़े मामलों को देखते हुए अधिकारी।
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एमबीबीएस फर्स्ट-सेकंड ईयर, फार्मेसी, फिजियोथैरेपी, लैब टेक्नीशियन की क्लासें अाज से लगेंगी, मेडिकल कॉलेजों ने पहले ही करवा ली स्टूडेंट्स की काेराेना जांच

काेराेना महामारी के चलते इस सत्र में साेमवार काे पहली बार एमबीबीएस फर्स्ट-सेकंड ईयर के 2500 स्टूडेंट्स के साथ नर्सिंग, फार्मेसी, फिजियोथैरेपी, लैब टेक्नीशियन के 2400 स्टूडेंट्स की क्लासेज लगेंगी। प्रदेश सरकार के आदेश पर आरएनटी, गीतांजलि, पेसिफिक भीलों का बेदला, पेसिफिक उमरड़ा, जीबीएच बेड़वास और अनंता मेडिकल कॉलेज में क्लासेज लगेंगी।

आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डाॅ. लाखन पोसवाल और अनंता मेडिकल कॉलेज के रजिस्ट्रार नितिन शर्मा ने बताया कि अमूमन छात्राें की काेराेना जांच कर ली है। जिनकी रिपोर्ट निगेटिव है, उन्हें क्लास में बैठाया जाएगा। जाे स्टूडेंट्स रह गए हैं, उनकी जांच करवाई जाएगी। रिपोर्ट निगेटिव आने के पांच दिन बाद फिर कोरोना जांच होगी। दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उन्हें क्लास में बैठाया जाएगा। 180-180 क्षमता के लेक्चर थिएटर्स में 50-50 स्टूडेंट्स को बैठाया जाएगा।

एमबीबीएस प्रथम वर्ष के स्टूडेंट्स को कोरोना वायरस संक्रमण, बचाव, पेंडेमिक, एपिडेमिक, कोरोना जांच, उपचार और वैक्सीन निर्माण तक की प्रक्रिया का पाठ पढ़ाया जाएगा। बता दें, एमबीबीएस फ्री फाइनल-फाइनल ईयर की कक्षाएं पहले से ही संचालित हैं।

नर्सिंग, फार्मेसी, फिजियोथेरेपी, लैब टेक्नीशियन के स्टूडेंट्स की क्लासेज एक दिन छोड़कर लगेंगी
सोमवार से नर्सिंग, फार्मेसी, फिजियोथैरेपी, लैब टेक्नीशियन के स्टूडेंट्स को एक दिन छोड़कर काॅलेज बुलाया जाएगा। उदयपुर कॉलेज ऑफ नर्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश राजानी ने बताया कि नर्सिंग, फार्मेसी, फिजियोथैरेपी, लैब टेक्नीशियन के स्टूडेंट्स की कोरोना जांच भी कराई जाएगी। इन सभी क्लासेज में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाने के लिए एक दिन की क्लासेज को दो दिन में बदल दिया गया है। सभी 22 नर्सिंग कॉलेजों के 2200 स्टूडेंट्स को घर या हॉस्टल से भोजन लाना होगा। मास्क, सेनेटाइजेशन, सोशल डिस्टेंस के नियमों की पालना करनी होगी।

स्कूल-कॉलेज और कोचिंग संस्थान 18 से खुलेंगे, स्कूल प्रबंधन को लेकर कलेक्टर आज लेंगे ऑनलाइन बैठक
सुविवि, विद्यापीठ, पेसिफिक, बीएन विश्वविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालय और कोचिंग संस्थान भी 18 जनवरी से खुल जाएंगे। सोमवार शाम चार बजे कलेक्टर चेतन देवड़ा संबंधित विभागीय अधिकारियों की वीसी से बैठक लेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक शिवजी गौड़ ने इसमें जिला परिषद सीईओ, आईसीडीएस उपनिदेशक, सीएमएचओ, सीडीईओ, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक व माध्यमिक), समग्र शिक्षा के अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक उपस्थित रहेंगे।

ब्लॉक स्तर पर समस्त उपखंड अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षाधिकारी, मुख्य ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सीडीपीओ और विकास अधिकारी मौजूद रहेंगे। सुविवि सहित सभी विश्वविद्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को अभिभावकों की लिखित अनुमति के बाद भी बुलाया जा सकेगा। क्लासेज में मास्क, दो गज की दूरी सहित अन्य कोविड गाइडलाइन की पालना करनी होगी। खाना घर से लाना हाेगा।



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मेडिकल कॉलेज में कॉलेज शुरू होने से पहले क्लास रूम को सेनिटाइज करते हुए कर्मचारी।
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बोला-तुम्हारा नाम हत्या के केस में; एक लाख रुपए लगेंगे, हटवा दूंगा

जान पहचान के एक युवक का नाम हत्या के केस में आने का हवाला देकर पिता से 1 लाख रुपए की मांग कर 50 हजार रुपए ठगने वाले एक युवक को पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया,जहां से उसे जेल भेज दया।

युवक ने पिता से दो किश्तों में 10 हजार और 40 हजार रुपए लिए थे, जो पुलिस ने बरामद कर लिए हैं। राजवीर उर्फ पिन्टू पुत्र मांगी लाल सुथार ने पुलिस से मिलकर मर्डर केस से नाम हटवाने की एवज में कड़िया निवासी भगवान लाल सुथार से 50 हजार रुपये ऐंठे है। बता दें कि 5 जनवरी को डुलावतों का गुड़ा में उदयपुर निवासी सूर्यदेव सिंह की हत्या हुई थी, जिसमें एक आरोपी कड़िया का था, जो कि प्रार्थी भगवान लाल के बेटे लोकेश के सम्पर्क में था।



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आरोपी
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तीसरे दिन भी घना कोहरा; दिन का पारा 4.6 डिग्री बढ़ा, फिर भी ठंडा

शहर में रविवार सुबह घने काेहरे के बीच हुई बूंदाबांदी ने दिन को रात से ज्यादा सर्द बना दिया। फिर भी दिन के तापमान में शनिवार के मुकाबले 4.6 डिग्री सेल्सियस का उछाल दर्ज हुआ। दोेपहर होते-होते कोहरा छंटा और धूप भी निकली, लेकिन हवा में नमी और हल्की शीतलहर के चलते ठंड वहीं की वहींं रही।

अधिकतम तापमान 23.1 डिग्री और रात का 14.4 डिग्री दर्ज हुआ। इधर, घने कोहरे के कारण बेकरिया थाना क्षेत्र के उदयपुर-पालनपुर फोरलेन पर रविवार सुबह तीन ट्रेलर आपस में भिड़ गए, जिसमें सात लोग घायल हो गए।



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Also dense fog on the third day; The mercury rose by 4.6 degrees, still cold
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कोरोनाकाल में बंद हुए महाकाल मंदिर को अब तक नहीं खोले जाने पर छिड़ा विवाद

काेराेना काल में लाॅकडाउन की वजह से बंद हुए शहर के सभी प्रमुख मंदिर खुल चुके हैं, लेकिन भक्ताें काे अब भी रानी राेड स्थित महाकालेश्वर मंदिर खुलने का इंतजार है। इसकाे लेकर बजरंग दल ने महाकाल मंदिर न्यास काे चेतावनी दी है कि अगर भक्ताें के लिए दर्शन नहीं खाेले गए ताे साेमवार काे संगठन के कार्यकर्ता मंदिर के दरवाजे खुलवाएंगे।

वहीं न्यास का कहना है कि अभी प्रशासन की अनुमति नहीं मिली है, जबरदस्ती हाेने पर कार्रवाई की जाएगी। बजरंग दल का कहना है कि मार्च से मंदिर बंद है, साेमवार काे भी नहीं खुला ताे कार्यकर्ता शाम 5 बजे मंदिर के दरवाजे खुलवाएंगे। इसकाे लेकर दल के प्रांत संयोजक दीपक प्रजापत सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने ट्रस्ट को ज्ञापन भी दिया।

1 अक्टूबर से दर्शन खुलना संभावित था, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की तैयारी भी पूरी
1 अक्टूबर से दर्शन खुलना संभावित था। इसमें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद भक्ताें को दर्शन की अनुमति मिलनी थी। बैरिकेडिंग, अभिषेक करने और प्रसाद चढ़ाने पर पाबंदी जैसी तैयारियां की थी।

हम प्रशासन की ही मानेंगे
मंदिरदेवस्थान विभाग ने अनुमति दी है। प्रशासन के निर्देश का इंतजार है। हम भी चाहते है मंदिर जल्द खुले और तैयारी भी पूरी है। कोई भी संगठन बलपूर्वक मंदिर नहीं खुलवा सकता है। ऐसा होता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -चंद्रशेखर दाधीच, सचिव सार्वजनिक प्रन्यास, मंदिर

सब खुले तो ये क्यों बंद : संगठन
कोविड गाइडलाइन के साथ शहर के प्रमुख धर्मस्थलों को खोला जा चुका है तो यह मंदिर क्यों बंद है। ऐसा आपसी राजनीति की वजह से हो रहा है। शहरवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रवेश की अनुमति देनी चाहिए। राजेंद्र परमार, विभाग संयोजक, बजरंग दल



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Controversy erupted over the yet-to-be-opened Mahakal temple, which was closed in the coronary
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72 साल पहले 12 जजों से शुरू हुए हाईकोर्ट में स्वीकृत पद 50 हुए, पर कभी नहीं हो पाई सभी पदों पर नियुक्तियां

राजस्थान हाईकोर्ट की 29 अगस्त 1949 को सीजे सहित 12 जजों के साथ हुई स्थापना के 72 साल बाद भी स्वीकृत सभी पदों पर नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। हाईकोर्ट में स्वीकृत 50 पदों की तुलना में आधे से भी कम पदों पर जज हैं। फिलहाल सीजे इन्द्रजीत महान्ति सहित 23 जज ही हैं। हालांकि न्यायिक अधिकारी कोटे व वकील कोटे से हाईकोर्ट जज बनने के लिए बीस नामों की फाइल हाईकोर्ट कॉलेजियम ने केन्द्र को भेज रखी है।

ऐसे में हाईकोर्ट में कई दशकों से जजों की कमी के चलते लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ रही है। हाईकोर्ट में नवंबर 2020 तक लंबित केसों की संख्या पांच लाख से भी ज्यादा पहुंच गई है। दूसरी ओर, साल 2021 के अक्टूबर व नवंबर महीने में सीनियर जज जस्टिस संगीत राज लोढ़ा व जस्टिस गोवर्धन बाढ़दार का भी रिटायरमेंट है। ऐसे में इस साल यदि नए जजों की नियुक्तियां नहीं हुई तो हाईकोर्ट में सीजे सहित केवल 21 जज ही रह जाएंगे।

हर जज पर 22,387 केस का भार, 50 जज होते तो होते 10,298 केस

राजस्थान हाईकोर्ट में नए जजों की नियुक्तियां नहीं होने और पुराने जजों के रिटायरमेंट से सीजे सहित हर जज पर केसों का भार बढ़ता जा रहा है। हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में 2,02,895 केस और जयपुर पीठ में 3,12,025 केस लंबित हैं। यानी दोनों पीठों में 514920 मामले पेंडिंग हैं। हालत यह है कि मुख्य न्यायाधीश सहित हर जज पर 22,387 केसों का भार है। यदि स्वीकृत 50 पदों पर पूरे जज होते तो हर जज पर केवल 10,298 केसों का ही भार होता। ऐसे में जल्द नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो केसों का लगातार भार बढ़ता ही रहेगा।
जजों की नियुक्ति की समय सीमा तय हो, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम भी दिशा-निर्देश जारी करे
हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस पानाचंद जैन का कहना है हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए समय सीमा तय हो। कोई जज रिटायर होने वाले हैं तो रिटायरमेंट से छह महीने पहले ही जजों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम भी खाली पदों पर जजों की नियुक्ति को लेकर दिशा-निर्देश जारी करे।

हाईकोर्ट जज बनने की प्रक्रिया में प्रशासनिक कार्य व्यवस्था में भी अनावश्यक देरी नहीं हो
बीसीआर के पूर्व चेयरमैन चिंरजीलाल सैनी व सीनियर एडवोकेट हनुमान चौधरी का कहना है कि हाईकोर्ट जज बनने की प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक कार्य व्यवस्था में भी अनावश्यक देरी नहीं हो। जजों की नियुक्ति के लिए टाइम बाउंड शैड्यूल बनाया जाए ताकि जजों की नियुक्ति समय पर हो सके।

यह है हाईकोर्ट जज बनने की प्रक्रिया
हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति न्यायिक अधिकारी व वकील कोटे से होती है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित दो अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों का कॉलेजियम नाम तय करता है। हाईकोर्ट कॉलेजियम तय नाम केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय और राज्य के गवर्नर व मुख्यमंत्री को भेजता है। राज्य सरकार हाईकोर्ट कॉलेजियम से आए नामों की राज्य की आईबी से जांच करवा कर अनुशंसा मंत्रालय भेज देती है।

केन्द्रीय विधि मंत्रालय में राज्य सरकार से भेजे गए नामों की पुन: आईबी से जांच करवाता है और जांच के बाद नामों को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों के कॉलेजियम को भेज देता है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम हाईकोर्ट जज के लिए नामों की अनुशंसा के बाद उन्हें पीएमओ भेज देता है और पीएमओ की अनुशंसा के बाद अंत में राष्ट्रपति हाईकोर्ट जज की नियुक्ति आदेश जारी करते हैं।



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5 लाख केस लंबित।
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इलेक्ट्रिक-सीएनजी बसों को बढ़ावा देने की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट में खरीदी जा रहीं 100 डीजल बसें

बढ़ते पॉल्यूशन पर रोक के लिए प्रदेश के एक तरफ तो इलेक्ट्रिक बसों और सीएनजी को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके तहत इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की तैयारी की जा रही है। डीजल ऑटो रिक्शा के परमिटों पर रोक लगा रखी है। दूसरी ओर, दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने यात्री एवं भारी कॉमर्शियल डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है, जबकि राजधानी के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इलेक्ट्रिक-सीएनजी बसों को छोड़कर 100 डीजल बसों की खरीद की जा रही है।

यह स्थिति तो तब है जबकि राजधानी में सबसे अधिक प्रदूषण लो फ्लोर बसों से फैल रहा है। बसाें के पीछे वाहन चलाने वाला धुंआ से काला हाे जाता है। हालांकि इतना जरूर है कि अभी खरीदी जा रही बसों का इंजन पीछे की अपेक्षा आगे रहेगा। इस मामले में कई बार सवाल उठ चुके है।

दूसरी ओर जेटीसीएल की डीजल बसें खरीदने को लेकर पूरा मामला सवालों के घेरे मे है। जेसीटीसीएल ने 100 डीजल बसों का टेंडर भी कर चुका है। इन बसों के संचालन के लिए जेसीटीएसएल ठेकेदार को प्रति किमी के हिसाब से भुगतान करेगी। इसमें एसी बसों को 38.45 तो एनएसी बसों को 36.45 रुपए प्रति किमी के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।

इसके अतिरिक्ति बसों की खरीद पर जेसीटीएसएल 15 करोड़ रुपए का सब्सिडी देगा। बाकी भुगतान ठेकेदार की ओर से किया जाएगा। बसों पर ड्राइवर ठेकेदार के तो कंडक्टर जेसीटीएसएल के होंगे। बसों से किराया के रूप में आने वाली राशि जेसीटीएसएल को मिलेगी। ठेकेदार बसों का संचालन 8 साल के लिए करेगा।
50 बसें 20 जनवरी से पहले
शहर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट नए साल में रफ्तार पकड़ने जा रहा है। शहर के लोगों को नए साल में 200 बसें मिलने जा रही है। इसमें 100 इलेक्ट्रिक है तो 100 डीजल बसें आ रही है। 100 डीजल बसों में से 50 बसों की सौगात शहर के लोगों के 20 जनवरी से पहले मिल सकेगी। नई-पुरानी बसों के बाद जेसीटीएसएल के पास कुल मिलाकर 400 बसें हो जाएगी।

वर्तमान में जेसीटीएसएल करीब 190 बसों का संचालन कर रहा है। वहीं 100 डीजल बसों के अतिरिक्त जेसीटीएसएल के पास 100 इलेक्ट्रिक बसों भी जल्द मिलेगी। ये बसें अप्रैल तक मिलेगी। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सांगानेर डिपो से किया जाएगा। यही पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे।
जेसीटीएसएल का वर्कशॉप 10 साल में भी नहीं बन सका है
शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में लो फ्लोर बसों का संचालन वर्ष 2010 में हुआ था। 10 साल बाद भी जेसीटीएसएल खुद का वर्कशॉप नहीं बना सका है, जबकि वर्कशॉप के नाम पर जमीन आवंटित है, लेकिन बसों के मेंटीनेंस का ठेका प्राइवेट कंपनियों को देखा है। कंपनी समय पर बसों का मेंटीनेंस नहीं कर पाती। इससे शहर में प्रदूषण फैल रहा है।

इस बारे में जेसीटीएसएस के ओएसडी वीरेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि 100 डीजल बसों में से 50 बसें 20 जनवरी से पहले मिल जाएंगी, वहीं डीजल बसें नहीं खरीदने की राज्य सरकार की कोई पॉलिसी नहीं बनी हुई है। सरकार मना कर देगी तो डीजल बसें नहीं खरीदी की जाएगी। हालांकि हम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि प्रदूषण को रोका जाएगा।



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राजधानी में सबसे अधिक प्रदूषण लो फ्लोर बसों से फैल रहा है।
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दिल्ली से ग्वालियर तक की फ्लाइट को किया जा रहा है डायवर्ट

सर्दी के बीच उत्तर भारत के कई शहरों में घना कोहरा देखने को मिल रहा है। इससे विमानन सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उत्तर भारत के कई प्रमुख एयरपोर्ट्स के लिए इन दिनों जयपुर एयरपोर्ट वरदान साबित हो रहा है। जयपुर एयरपोर्ट पर विमानों के संचालन के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।

एयरपोर्ट का रनवे उच्च श्रेणी का बना हुआ है। रनवे की लंबाई 11500 फुट है, जिस पर कैटेगरी ई के विमान भी आसानी से लैंड हो सकते हैं। कैटेगरी ई यानी 335 से लेकर 420 यात्री क्षमता के बड़े आकार के विमान भी यहां सुगमता से लैंड हो सकते हैं। इसके अलावा विमानों की घने कोहरे में भी लैंडिंग के लिए कैटेगरी 3-बी लाइटिंग सिस्टम लगा हुआ है।

कैटेगरी 3-बी लाइटिंग सिस्टम लगा होने से मात्र 75 मीटर की दृश्यता में भी विमानों की लैंडिंग करवाना संभव है। कई बार जब दिल्ली एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंजेशन के हालात होते हैं या फिर कोहरे की वजह से दिल्ली एयरपोर्ट पर दृश्यता 50 मीटर से कम हो जाती है, उस दौरान वहां लैंड होने वाले विमानों को जयपुर में लैंड कराया जाता है। उदयपुर, आगरा, किशनगढ़, ग्वालियर के विमान भी डायवर्ट होकर जयपुर आ रहे हैं।
किशनगढ़ में राडार नहीं, हल्के कोहरे पर भी विमान डायवर्ट
दरअसल दिल्ली से जयपुर के लिए विमानों का डायवर्जन अक्सर होता रहता है। एयर ट्रैफिक कंजेशन या मौसम खराब होने की स्थिति में दिल्ली एयरपोर्ट के लिए जयपुर एयरपोर्ट को स्थाई रूप से स्टैंड बाई एयरपोर्ट घोषित किया हुआ है। किशनगढ़ एयरपोर्ट पर राडार नहीं होने से यहां हल्का कोहरा होने पर भी विमान जयपुर के लिए डायवर्ट किए जाते हैं। इसी तरह उदयपुर, आगरा और ग्वालियर एयरपोर्ट भी जयपुर के 300 नॉटिकल माइल के दायरे में होने से विमान जयपुर के लिए ही डायवर्ट होते हैं। हालांकि उदयपुर एयरपोर्ट के लिहाज से अहमदाबाद एयरपोर्ट की दूरी कम है, ऐसे में विमान अहमदाबाद जाने चाहिए।

लगातार फ्लाइट डायवर्ट होकर आ रही है जयपुर

  • 7 दिसंबर को दिल्ली में मौसम खराब होने पर बेंगलूरु-दिल्ली फ्लाइट एसजी-7084 जयपुर पहुंची।
  • 31 दिसंबर को दिल्ली में कोहरा होने पर दुबई-दिल्ली फ्लाइट एसजी-137 जयपुर पहुंची।
  • 31 दिसंबर को ग्वालियर में कोहरा होने पर हैदराबाद-ग्वालियर फ्लाइट एसजी-3731 जयपुर पहुंची।
  • 1 जनवरी को उदयपुर-दिल्ली फ्लाइट जयपुर पहुंची।
  • 2 जनवरी को किशनगढ़ में कोहरे के चलते अहमदाबाद-किशनगढ़ फ्लाइट एसजी-3014 जयपुर पहुंची।
  • 3 जनवरी को दिल्ली में खराब मौसम से जबलपुर-दिल्ली फ्लाइट 9आई-618 जयपुर पहुंची।
  • 7 जनवरी को उदयपुर में खराब मौसम से दिल्ली-उदयपुर फ्लाइट 6ई-2153 जयपुर पहुंची।
  • 8 जनवरी को किशनगढ़ में खराब मौसम से हैदराबाद- किशनगढ़ फ्लाइट डायवर्ट होकर जयपुर पहुंची


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Flight from Delhi to Gwalior is being diverted
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एमबी अस्पताल की छत से प्लास्टर गिरा, छुट्‌टी होने से बड़ा हादसा टला

संभाग के सबसे बड़े एमबी अस्पताल के रेडियाेलाॅजी डिपार्टमेंट में एमआरआई और साेनाेग्राफी रूम के बीच सुबह 11.12 मिनट पर छत का प्लास्टर उखड़कर गिरा। गनीमत रही कि जब प्लास्टर गिरा तब वहां कोई नौनिहाल, गर्भवती महिला या बुजुर्ग मौजूद नहीं था।

नहीं तो अनहोनी हो सकती थी। अवकाश का दिन हाेने से मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही भी नहीं थी। सामान्य दिनों में यहां हर वक्त लोगों की आवाजाही रहती हैं। 60 साल पुराने एमबी अस्पताल की छतों से प्लास्टर गिरने की घटना बारिश के सीजन में अक्सर घटती रहती है।



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Plaster fell from roof of MB hospital, major accident averted due to holiday
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आरपीएफ में फरवरी में बदल दिए जाएंगे 25 थानों के इंजार्च

रेलवे में इन दिनों तीन साल से अधिक समय से एक जगह डटे थाना प्रभारियों यानि आईपीएफ को 3 आवधिक स्थानांतरण नीति के तहत हटाए जाने की योजना बनाई जा रही है। जिसके तहत उत्तर पश्चिम रेलवे के (राजस्थान का 90 फीसदी क्षेत्रफल) 31 आरपीएफ थानों/पोस्ट में से करीब 25 थाना प्रभारियों का फरवरी माह में तबादला कर दिया जाएगा।

इस संबंध में आईजी अरोमा सिंह ने डिप्टी सीएससी भवप्रीता सोनी और जयपुर कमांडेन्ट एमएम खान सहित अन्य तीनों मंडलों के कमांडेन्ट से सूची मांगी है। तो वहीं इस संबंध में मुख्यालय द्वारा चारों मंडलों से लगातार बैठक भी की जा रही है।

जयपुर सहित सभी महत्वपूर्ण थाना प्रभारी बदलेंगे

इस बदलाव प्रक्रिया का जयपुर मंडल में बड़ा असर देखने को मिलेगा। मंडल का सबसे बड़ा थाना/पोस्ट जयपुर के प्रभारी का भी तबादला इस सूची में किया जाएगा। ऐसे में इस थाने में पोस्टिंग के लिए मुख्यालय में लॉबिंग शुरू हो गई है। इसके अलावा फुलेरा, गांधीनगर, बांदीकुई, अलवर, रेवाड़ी और सीकर थानों के भी प्रभारी बदले जाएंगे।



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काेविड-19 संक्रमण; 36 केस नए, शहरी क्षेत्र में 22 व ग्रामीण में 14 मरीज

काेराेना संक्रमण के रविवार काे 36 नए मामले सामने आए हैं। हालांकि राहत की खबर यह है कि रविवार काे काेई माैत नहीं हुई है। सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने बताया कि 398 एक्टिव केस और 181 को होम आइसोलेट किया है। शहरी क्षेत्र में 22 और ग्रामीण में 14 संक्रमित मिले हैं।

काेविड-19 प्रभारी डॉ. शंकर बामनिया ने बताया कि 40 वर्षीय नर्सिंग स्टाफ, न्यू कॉलोनी सवीना निवासी 30 वर्षीय महिला पटवारी, 23 वर्षीय एंबुलेंस ड्राइवर, 24 अाैर 47 वर्षीय पुलिसकर्मी और 27 वर्षीय लैब टेक्नीशियन में संक्रमण की पुष्टि हुई है। अन्य संक्रमित क्षेत्र : ज्ञान नगर सेक्टर-4 हिरण मगरी, नवरत्न काॅम्पलेक्स-बेदला, पलाश नियर-खेमली, हर्ष नगर-सीसारमा, न्यू फ्लोरा काॅम्पलेक्स -पुला, भुवाणा, विनायक नगर कृष्णा कॉलोनी, माहेश्वरी मोहल्ला-मावली, तितरड़ी, बड़गांव, गरीब नवाज कॉलोनी-मल्लातलाई, मीरा नगर-ढीकली, आनंद नगर-यूनिवर्सिटी राेड, आउटसाइड ब्रह्मपोल, आनंद विहार-मनवाखेड़ा, केशव नगर यूनिवर्सिटी राेड, जय श्री कॉलोनी बोहरा गणेश जी, गांधीनगर के पास मल्लातलाई, जवाहर नगर-सेक्टर 11, अंबामाता स्कीम, माधव कॉलोनी यूनिवर्सिटी राेड में नए संक्रमित मिले।



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Cavid-19 infection; 36 cases new, 22 in urban area and 14 patients in rural
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डोज रखने की क्षमता 5 लाख से बढ़ाकर 6.80 लाख हुई, जल्द 8.60 लाख होगी

काेराेना वैक्सीनेशन की 16 जनवरी से शुरुआत हाेने जा रही है। इसी बीच प्रदेश सरकार ने उयपुर काे बड़ी जिम्मेदारी साैंपी है। इसके बाद उदयपुर सहित राजसमंद, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई उदयपुर काे ही करनी हाेगी।

टीकों के परिवहन के लिए इन सभी जिलों को एक-एक वैन मिल चुकी हैं। उदयपुर काे वैक्सीन की पहली खेप जयपुर से मिलेगी, इसके बाद हवाई जहाज के जरिए सीधे दिल्ली से ही मिलेगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेश डॉ. जुल्फिकार काजी ने बताया कि उदयपुर संभाग में 391 कोल्ड चेन स्थापित कर दी गई हैं।

पहले चरण में उदयपुर सहित संभागभर के 81849 हैल्थ वर्कर्स को टीका लगेगा। जिसकी तैयारियां पूरी कर ली गई है। बड़ी स्थित सीएमएचओ कार्यालय की स्टोरेज यूनिट में 4500 लीटर क्षमता का डब्ल्यूआईसी यानी वॉकर इन कूलर है, 4500 लीटर क्षमता का ही डब्ल्यूआईएफ यानी वॉक इन फ्रिज है। उदयपुर में फिलहाल वैक्सीन की 6.80 लाख डोज रखने की क्षमता है। जिसे बढ़ाकर अब 8.60 लाख डोज किया जा रहा है।

सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी बताते हैं कि बड़ी स्थित ड्रग वेयरहाउस की वैक्सीन स्टोरेज यूनिट में एक बार में 5 लाख से ज्यादा कोरोना वैक्सीन के डोज एक साथ रखने के लिए आईएलआर और डब्ल्यूआईसी स्टोरेज पूरी तरह रिजर्व कर दिए हैं। इसके अलावा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की एक वैन की स्टोरेज क्षमता 1.80 लाख डोज है। वर्तमान में वैक्सीन स्टोरेज यूनिट और एक वैक्सीन वैन के साथ उदयपुर में वैक्सीनेशन स्टोरेज की क्षमता 6.80 लाख डोज है। दूसरी वैक्सीन वैन आते ही यह क्षमता बढ़कर 8.60 लाख हो जाएगी।

यहां से संभाग के सभी 6 जिलों में वैक्सीन की सप्लाई के लिए 2 से 8 डिग्री नियत तापमान वाली वैक्सीन वैन को पूरी तरह तैयार कर रखा है। एक अन्य वैक्सीन वैन हिंदुस्तान जिंक सीएसआर स्कीम के तहत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने जा रहा है।

को-विन एप पर लगातार अपडेट हो रहा वैक्सीनेशन कराने वालों आंकड़ा
को-विन एप पर वैक्सीन लगवाने वाले हैल्थ वर्कर्स की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। सबसे पहले संभाग में 81849 हैल्थ वर्कर्स को टीका लगेगा। इसके अलावा पुलिस, 50 वर्ष से ज्यादा उम्र के प्रायरिटी ग्रुप और हाई रिस्क ग्रुप को भी पहले फेज में ही वैक्सीन लगेगी।



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2 से 8 डिग्री तापमान वाली विशेष वैन
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गुजरात में पब्लिक प्लेस पर उत्तरायण मनाने पर राेक, हमारे रिसॉर्ट-होटलों ने खोले दरवाजे, पैकेज तैयार, अब यहां गरबा-पतंगें

कोरोना के बीच लेकसिटी के पर्यटन को एक और अवसर मिला है। गुजरात में पब्लिक प्लेस पर उत्तरायण महोत्सव मनाने पर लगाई गई रोक को उदयपुर के रिसोर्ट-होटल व्यवसायी भुनाने में जुट गए हैं। गुजरातियों से संपर्क कर अब इस महोत्सव के सभी कार्यक्रम उदयपुर में कराए जाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं।

गुजरात में मकर संक्रांति पर 14 से 17 जनवरी तक यह महोत्सव मनाया जाता है। इसके तहत 4 दिन की छुट्‌टी होती है और पतंगबाजी-गरबा कार्यक्रम जैसे कार्यक्रम होते हैं। अब उदयपुर में ही इन कार्यक्रमों का आयोजन करने के अलावा गुजरातियों के लिए उन्हीं के व्यंजनों के लिए गुजरात से शेफ बुलाए जा रहे हैं। इस महोत्सव से उदयपुर के पर्यटन को बल मिलेगा। हजारों गुजरातियों के यहां आने की संभावना है। बता दें कि गुजरात में हाईकोर्ट ने परिवार के साथ घरों या सोसायटी में ही उत्तरायण मनाने की सलाह दी है। डीजे औैर गरबा पर भी पाबंदी लगा रखी है।

2 से 3 दिन के पैकेज तैयार, गुजराती व्यंजन भी, पारंपरिक स्वाद के लिए गुजरात से बुलाए शेफ
गुजराती पर्यटकों की डिमांड काे देखते हुए हाेटल संचालक उत्तरायण फेस्टिवल के लिए 2 रात 3 दिन का पैकेज दे रहे हैं। इसमें काइट फ्लाइंग, डीजे नाइट औैर गरबा का आयोजन होगा। इस दौरान वे राजस्थान औैर गुजराती व्यंजनों का लुत्फ भी उठा सकेंगे। गुजरात में उत्तरायण पर गुंजा मिठाई खायी जाती है। पर्यटकों काे मिठाई का पारंपरिक स्वाद देने के लिए गुजरात से शेफ बुलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही जलेबी, फाफड़ा औैर खमण बनाने की भी तैयारी की है। स्पैक्ट्रम रिसाेर्ट के जीएम वैभव टंडन ने बताया कि बच्चाें के लिए भी रिक्रिएशन औैर फन एक्टिविटी हाेगी।

शहर के 150 बड़े होटल-रिसोर्ट में फेस्टिवल की तैयारी, 70 प्रतिशत तक पहुंची बुकिंग
हाेटल संस्थान दक्षिणी राजस्थान के सचिव राकेश चाैधरी ने बताया कि शहर के बाहर स्थित 150 बड़े रिसाेर्ट में उत्तरायण फेस्टिवल की तैयारी की है। अभी हाेटलों में 20 से 30 प्रतिशत ऑक्यूपेंशी चल रही है। कुंभगलढ़ हाेटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जमना शंकर आमेटा ने बताया हाेटलाें में 70 प्रतिशत बुकिंग हाे गई है। आगामी दिनाें में बुकिंग बढ़ने की उम्मीद है। कुंभलगढ़ में 45 रिसाेर्ट हैं। गौरतलब है लॉकडाउन से उदयपुर का होटल व्यवसाय लंबे समय तक ठप रहा था। त्योहारी सीजन में इसमें तेजी आई। इसके बाद नए साल में भी खुब पर्यटक उदयपुर पहुंचे।



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Rake on celebrating Uttarayan at the public place in Gujarat, our resort-hotels opened doors, packages ready, now garba-kites here
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आईआईटी रुड़की और कानपुर नहीं बचा पाए एक भी रुपया, आवेदन की जितनी राशि आई उतनी ही खर्च

आईआईटी दिल्ली ने साल 2020 में कोरोना काल में भी जेईई एडवांस्ड करवाकर करीब दो लाख रुपए बचा लिए, जबकि नॉन कोविड काल में एडवांस्ड करवाने वाली आईआईटी रुड़की व कानपुर एक रुपया तक नहीं बचा पाईं। चौंकाने वाली बात यह है कि रुड़की व कानपुर के पास जितना पैसा आवेदनों के जरिए आया, उतना ही पैसा एग्जाम में खर्च कर दिया गया।

साल 2019 में रुड़की व 2018 में आईआईटी कानुपर ने एडवांस्ड का एग्जाम करवाया था। उस समय कोविड नहीं था। साल 2020 की परीक्षा आयोजित करने के लिए आईआईटी दिल्ली को सेंटर्स बढ़ाने के साथ अतिरिक्त मैनपावर भी लगानी पड़ी थी। वहीं सैनेटाइजर और अन्य इंतजामों में भी काफी राशि खर्च हुई थी।

इसके बावजूद आईआईटी दिल्ली ने कुछ राशि बचा ली। 2018 में 1,60,716 स्टूडेंट्स परीक्षा के लिए रजिस्टर्ड हुए थे। साल 2019 और 2020 में रजिस्टर्ड छात्रों की संख्या इतनी ही थी। फीस में भी बहुत अधिक अंतर नहीं था। साल 2020 में आईआईटी दिल्ली के पास आवेदनों से कुल 34.84 करोड़ रुपए आए थे। जबकि एग्जाम्स में 34.82 करोड़ ही खर्च किए गए।

यानि लगभग दो लाख रुपए की बचत आईआईटी दिल्ली ने की। साल 2021 में आईआईटी खड़गपुर को जेईई एडवांस्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जेईई मेन के बाद ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होगी। रजिस्ट्रेशन जून में शुरू होने की संभावना है। हालांकि एडवांस्ड का ब्रोशर पहले ही जारी किया जा सकता है।

इसमें इस साल की फीस का पता चलेगा। हर साल आईआईटी सभी कैटेगिरी में क्वालिफाय करने वाले छात्रों की संख्या पहले ही निर्धारित करता है। यानि जनरल व आरक्षित कैटेगिरी के छात्रों की संख्या पहले ही निर्धारित कर दी जाती है। एडवांस्ड की रैंक के आधार पर छात्रों को देश भर की आईआईटीज में दाखिला मिलता है।

34.15 करोड़ आए, नौ करोड़ जोनल में ही खर्च

साल 2018 में जेईई एडवांस्ड का आयोजन करने वाले आईआईटी कानपुर को कुल 34.15 करोड़ रुपए मिले थे। ऑर्गेनाइजिंग और जोनल खर्चों को मिलाकर कुल 34.15 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसके तहत करीब 24 करोड़ रुपए ऑर्गेनाइजिंग एक्टिविटीज में और नौ करोड़ रुपए जोनल में खर्च हुए थे।

2019 में 35.50 करोड़ का खर्चा
साल 2019 में आईआईटी रुड़की ने एग्जाम करवाया था। आईआईटी रुड़की को आवेदनों से 35.50 करोड़ रुपए मिले थे। इतनी ही राशि एग्जाम करवाने में खर्च कर दी गई। सवाल यह है कि क्या आवेदनों से मिली राशि के अनुसार ही आईआईटी एग्जाम की तैयार करती है। आईआईटी रुड़की को इस साल कुल 35,50,02,253 रुपए मिले थे। ठीक यही राशि खर्च कर दी गई। एक रुपया भी ऊपर-नीचे नहीं हुआ। यह सबसे चौंकाने वाली बात है।

^आईआईटी दिल्ली ने खर्च की राशि बचाई है। लेकिन आईआईटी रुड़की और कानपुर ने पूरा का पूरा पैसा एग्जाम पर ही खर्च कर दिया। इस पर संदेह उत्पन्न होता है। यह थोड़ा आश्चर्यजनक भी है। जबकि आईआईटी दिल्ली ने तो विषम परिस्थतियों में परीक्षा करवाकर भी पैसा बचा लिया।

-विवेक पांडे एजुकेशन एक्टिविस्ट

इस साल सोशल डिस्टेंसिंग व सेंटर्स बढ़ाने से खर्चा बढ़ गया था, लेकिन अन्य खर्चों में काफी कटौती की गई। शिक्षकों को दी जाने वाली राशि में भी कटौती की गई थी। कुछ जोन में काफी छात्रों ने अप्लाय किया था। कोशिश थी कि जितना पैसा आए, उतने में ही एग्जाम हो जाए।
-प्रो. रामगोपाल राव डायरेक्टर, आईआईटी दिल्ली

34-35 करोड़ रुपए औसतन खर्च हो रहे हैं जेईई एडवांस्ड एग्जाम के आयोजन में पिछले तीन साल में।



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IIT Roorkee and Kanpur could not save even a single rupee, the amount spent for the application
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पिछले छह सालों में नए स्कूल खोलने में राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर, 2014 से 2020 तक खुले 2016 नए स्कूल

शिक्षकों की कमी के बीच राजस्थान नए स्कूल खोलने में देश में नंबर-3 रहा। यहां साल 2014 से लेकर 2020 तक 2016 नए स्कूल खोले गए। इसी अवधि में कर्नाटक में 2416 व मध्यप्रदेश में 2140 नए स्कूल खोले गए। एक्सपर्ट का कहना है कि अधिक से अधिक छात्रों को शिक्षा देने के लिए नए स्कूल खोले जाना अच्छा प्रयास है, लेकिन राज्य सरकारों को शिक्षक भर्ती पर भी ध्यान देना चाहिए।



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Rajasthan ranks third in opening new schools in last six years, 2016 new schools opened from 2014 to 2020
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भारतीय रेलवे को साल 2021 में मिल सकते हैं 1.40 लाख नए कर्मचारी

रेलवे को ग्रुप डी के 1 लाख 3 हजार सहित 1 लाख 40 हजार 640 पदों पर कर्मचारी इस साल मिल सकते हैं। रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) अजमेर सहित देश भर के 21 आरआरबी के माध्यम से तीन प्रमुख भर्ती परीक्षाओं के जरिए इन पदों पर भर्ती करेगा। एक भर्ती परीक्षा का आयोजन हो चुका है, दूसरी जारी है और तीसरी भर्ती ग्रुप डी के 1 लाख 3 हजार पदों के लिए ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन 15 अप्रैल से होने जा रहा है। इस परीक्षा में भी एक करोड़ से अधिक उम्मीदवारों के शामिल होने की संभावना है।

आरआरबी द्वारा वर्ष 2019 की भर्ती परीक्षाएं अब आयोजित की जा रही हैं। इनके आयोजन का सिलसिला 15 दिसंबर 2020 से ही शुरू कर दिया गया था। पहले चरण में मिनिस्ट्रियल व आइसोलेटेड कैटेगरी के 1636 पदों के लिए 15 से 18 दिसंबर 2020 तक आयोजन हो चुका है। अभी नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगरी यानी एनटीपीसी के 35 हजार पदों के लिए ऑनलाइन परीक्षा की प्रक्रिया जारी है।

इस परीक्षा के लिए 1.25 करोड़ अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। आरआरबी अजमेर के अध्यक्ष केआर चौधरी ने बताया कि 1.03 लाख पदों के लिए रेलवे ग्रुप डी (लेवल-1) की भर्ती परीक्षा 15 अप्रैल से जून 2021 के बीच आयोजित की जाने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में रेलवे भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव भी संकेत दे चुके हैं। इसलिए युवाओं को भर्तियों की उम्मीद है। इन 1 लाख 3 हजार पदों में आरआरबी अजमेर के करीब 4.5 हजार पद हैं।

दो कराेड़ से अधिक फॉर्म आए थे, परीक्षा में नकल रोकने के लिए किए गए पुख्ता इंतजाम
आरआरबी अध्यक्ष के आर चौधरी के अनुसार स्टेनो व अध्यापकों के 1663 पदों (मिनिस्ट्रियल और आइसोलेटेड कैटेगरी) के लिए 15 से 18 दिसंबर 2020 के बीच कंप्यूटरीकृत परीक्षा आयोजित की जा चुकी है। साथ ही ग्रुप डी, एनटीपीसी और मिनिस्ट्रियल और आइसोलेटेड कैटेगरी के कुल 1,40,640 पदों के लिए देश भर से रेलवे भर्ती बोर्ड को 2 करोड़ 44 लाख आवेदन मिले। परीक्षा में नकल रोकने के लिए भी 500 परीक्षा केंद्रों पर सेंट्रलाइज्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा जा रहा है।

^रेलवे भर्ती बोर्ड के अधिकारी अजमेर सहित देश भर के परीक्षा केंद्रों को लाइव देख रहे हैं व मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। इसके लिए अजमेर के 46 सहित देश के करीब 500 परीक्षा केंद्रों को सेंट्रलाइज्ड सीसीटीवी कैमरों से जोड़ा गया है। इसकी कमान सेंटर रेलवे भर्ती बोर्ड अजमेर सहित विभिन्न भर्ती बोर्ड को सौंपी गई है। अकेले आरआरबी अजमेर में ही 46 परीक्षा केंद्रों को 800 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से जद में रखा गया है।
-केआर चौधरी, अध्यक्ष, आरआरबी अजमेर



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-केआर चौधरी, अध्यक्ष, आरआरबी अजमेर।
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हनुमान चाैक के पास 12 इंची पेयजल पाइप लाइन टूटी, नाै से अधिक काॅलाेनियाें में आधे घंटे कम हाे पाई पानी की सप्लाई

नगर विकास न्यास क्षेत्र में रविवार काे हनुमान चाैक के पास 12 इंची पेयजल पाइप लाइन फट गई। इससे सड़क व आसपास के खाली प्लाॅटाें में पानी भर गया। पेयजल पाइप लाइन टूटने से नाै से अधिक काॅलाेनियाें में दाे की बजाय डेढ़ घंंटे ही पेयजल सप्लाई हाे पाई।

शाम सात बजे तक टूटी पाइप लाइन काे पुन: मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति शुरू की गई। हनुमान नगर में पेयजल सप्लाई के लिए बने उच्च जलाशय टंकी में पानी भरने के लिए नाथांवाली से इस टंकी की सप्लाई वाली पेयजल पाइप लाइन हनुमान चाैक के पास सुबह साढ़े छह बजे पानी का प्रेशर अधिक हाेने के कारण टूट गई।

पाइप लाइन टूटने से सड़क व खाली प्लाॅटाें में भर गया पानी, पानी के प्रेशर से फट गई थी पाइप, नाथांवाला हेड से सप्लाई बंद करवाई
पाइप लाइन टूटने से सड़क व खाली प्लाॅटाें में पानी भर गया। आसपास काे लाेगाें ने पाइप लाइन टूटने की सूचना जलदाय विभाग के अधिकारियाें काे दी। इस पर नाथांवाला हेड वाटरवर्क्स से पानी की सप्लाई बंद करवाई गई। माैके पर पहुंची जलदाय विभाग कार्मिकाें की टीम ने टूटी पेयजल पाइप लाइन की मरम्मत शुरू की। शाम सात बजे तक पाइप लाइन की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति बहाल की गई। विभाग के एईएन मुंशीराम मनचंदा ने बताया कि पानी के प्रेशर से पाइप लाइन फटी थी। इसकी मरम्मत कर आपूर्ति पुन: बहाल की गई है।

शाम काे सात बजे क्षेत्र में दाेबारा शुरू की गई आपूर्ति
एईएन के मुताबिक हनुमान नगर टंकी से जुड़े एरिया रामदेव काॅलाेनी, हनुमान नगर, बिरथलियांवाली, अग्रवाल काॅलाेनी, नाेजगे स्कूल एरिया, पांच व सात ई छाेटी, विद्युत नगर, डाॅक्टर काॅलाेनी, चाैधरी काॅलाेनी, नाईयांवाली व श्रीराम काॅलाेनी एरिया में सुबह पांच से सात बजे तक पेयजल सप्लाई की जाती है, लेकिन सुबह साढ़े छह बजे पाइप लाइन टूटने से इस क्षेत्र में आधा घंटा पेयजल आपूर्ति बाधित रही। शाम काे सात बजे पुन: पेयजल आपूर्ति इस क्षेत्र में शुरू की गई है।



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श्रीगंगानगर। हनुमान चाैक के पास टूटी पेयजल सप्लाई की लाइन।
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11 जी गुरुद्वारा से ले जाए गए श्रीगुरु ग्रंथ साहिब मामले में तख्त श्री दमदमा साहिब पहुंची चूनावढ़ पुलिस

गुरुद्वारा 11 जी सतकरतार साहिब से ले जाए गए गुरु ग्रंथ साहिब के मामले में चूनावढ़ पुलिस तख्त दमदमा साहिब पहुंच गई है। पुलिस ने तख्त और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी काे पत्र देकर रिकाॅर्ड मांगा है। इधर, इस वारदात के मुख्य सूत्रधार निर्मलसिंह खरलियां और गाेलूवाला निवासी हरमीतकाैर से रिमांड के दाैरान वारदात काे लेकर पूछताछ की जा रही है।

एसपी राजन दुष्यंत ने बताया कि चूनावढ़ एसएचओ परमेश्वर सुथार टीम के साथ रविवार काे बठिंडा जिला स्थित तख्त दमदमा साहिब भेजे गए हैं। एसएचओ ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी काे इस घटना में ले जाए गए गुरुग्रंथ साहिब के संबंध में पूछताछ की है तथा कमेटी से रिकाॅर्ड मांगा है। घटना के बाद आराेपियाें ने ही वीडियाे साेशल मीडिया पर सार्वजनिक कर बताया था कि गुरुद्वारा 11 जी छाेटी सतकरतार साहिब से उठाए गए गुरुग्रंथ साहिब काे तख्त दमदमा साहिब में पहुंचा दिया है। आराेपिया गुरमीतकाैर और लवप्रीतसिंह सहित अन्य आराेपियाें के इसी गुरुद्वारा के सीसी कैमराें के फुटेज भी वायरल हुए थे। रिकाॅर्ड की जांच के बाद यदि सामने आया कि गुरुग्रंथ साहिब यहीं विराजमान हैं, ताे गुरुग्रंथ साहिब काे वापस लाैटाने काे अर्जी दाखिल की जाएगी।

मुकदमे के जांच अधिकारी चूनावढ़ एसएचओ परमेश्वर सुथार ने बताया कि गिरफ्तार की गई हरमीतकाैर अाैर निर्मलसिंह ने इस डकैती की याेजना काे तीन बैठकें कीं। तीनाें बैठकें गाेलूवाला गुरुद्वारा में हुईं। पहली बैठक 11 नवंबर काे हुई। इस बैठक में निर्मलसिंह ने सूरतगढ़ निवासी हिस्ट्रीशीटर आत्माराम काे मदद के लिए बुलाने पर सहमति बनी। अगली मीटिंग 28 नवंबर काे हुई। इसमें आत्माराम काे बुलाया गया। आखिरी बैठक 30 नवंबर काे हुई। इसमें वारदात काे अंजाम देने के रास्ते, तरीके और हर आदमी की डयूटी तय हुई। एक दिसंबर की रात काे वारदात काे अंजाम ही दे दिया गया।

आत्माराम काे हर व्यक्ति के 50 हजार रुपए देकर साैदा किया तय
इस वारदात काे अंजाम देने काे निर्मलसिंह और हरमीतकाैर ने आत्माराम से 50 हजार रुपए प्रति व्यक्ति के साहिब से रेट तय किया था। आत्माराम अपने साथ गैंग के 6 लाेग और लेकर वारदात करवाने आया था। उसकी गैंग का एक आराेपी अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। शेष आराेपियाें काे काबू कर लिया गया है।

वारदात के मुख्य आराेपी लवप्रीतसिंह और संदीपसिंह अाज कर सकते हैं अदालत में समर्पण
इधर इसी घटना के सूत्रधार लवप्रीतसिंह और संदीपसिंह साेना साेमवार काे काेर्ट में सरेंडर कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इन दाेनाें ने शुक्रवार काे भी स्वयं काे अदालत में पेशकर दिया था। लेकिन जांच अधिकारी और केस डायरी के काेर्ट में उपस्थित नहीं हाेने के कारण अदालत ने इनकाे साेमवार काे आने काे कहा था। जांच अधिकारी एसएचओ परमेश्वर सुथार उस दिन गुरुद्वारा आनंदपुर साहिब में हरमीतकाैर और निर्मलसिंह काे गिरफ्तार करने गए हुए थे। इस बात का यहां पता चलने पर एसएचओ काे काेर्ट में बुलाने का दबाव भी बनाया गया था।



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श्रीगंगानगर। तख्त श्रीदमदमा साहिब गुरुद्वारा में पहुंची चूनावढ़ पुलिस टीम।
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रविवार, 10 जनवरी 2021

शहर में जीबी सिंड्रोम का पहला मामला, जो इम्युन सिस्टम बीमारी से बचाता है, अब वही दे रहा लकवा

कोरोना रिकवरी के बाद मरीजों में पोस्ट-कोविड इफैक्ट के केस में अब जीबी (गिलैन बारे) सिंड्रोम भी सामने आया है। दूसरे कई वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन में जीबी सिंड्रोम के केस तो मिलते थे, लेकिन शहर में कोविड से रिकवर हुए मरीज में इस सिंड्रोम का पहला केस है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विशेषज्ञ प्रोफेसर महेश दवे ने बताया कि पिछले दिनों शहर के जगदीश चौक क्षेत्र निवासी 64 वर्षीय पुरुष में यह सिंड्रोम पाया गया है।

राेगी काे कोरोना रिकवरी के कुछ दिनों के बाद ही पैरो में दर्द की शिकायत शुरू हो गई थी। इसके बाद इन्हें लकवा हाे गया। दाे सप्ताह हाॅस्पिटल में भर्ती रखकर इलाज किया गया। इलाज के दौरान इन्हें इंजेक्शन के कई डोज दिए गए। इसके बाद रिकवरी होनी शुरू हुई।
डॉक्टर बताते हैं कि संक्रमण के बाद एंटी बॉडी शरीर के खिलाफ ही काम करने लगती है। इम्युन सिस्टम नसों पर हमला करता है। जिससे सांस लेने वाली मांस पेशियां कमजोर हो जाती है। मरीज के पैर और हाथ के मूवमेंट में तकलीफ, झुनझुनाहट, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाती है।


पहले पैर सुन्न होते हैं, फिर शरीर के ऊपरी हिस्से पर असर

जीबी सिंड्रोम में सबसे पहले मरीज के पैरों में कमजोरी आती है। दो से तीन दिन के अंदर पैरों के मूवमेंट में परेशानी होना शुरू हो जाती है। पैर में लकवे जैसा सुन्नपन आने लगता है। यही सुन्नपन धीरे-धीरे शरीर के ऊपरी हिस्से की ओर बढ़ने लगता है। सिंड्राेम के असर से मरीज के गर्दन के नीचे का हिस्सा कुछ ही दिन दिनाें में लकवाग्रस्त हो जाता है।

80 फीसदी मरीज शुरुआती दौर में ही हो जाते हैं रिकवर
चिकित्सकाें के मुताबिक यह सिंड्रोम आम तौर पर बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण से होता है। करीब 1 लाख मरीजों में से 1 में जीबी सिंड्रोम के लक्षण सामने आते हैं। शुरुआती स्टेज में ही इलाज से 80% मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते हैं। जबकि 20% सांस लेने में तकलीफ के बाद वेंटिलेटर पर शिफ्ट करना पड़ता है। हालांकि मरने वालों की संख्या बेहद कम है।



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The first case of GB syndrome in the city, which protects against the immune system disease, is now giving paralysis
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