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सोमवार, 31 जनवरी 2022

अब बाड़मेर में भी मिलेगी तीरंदाजी सीखने की सुविधा



स्प्रिंट आर्चरी एकेडमी बाड़मेर का हुआ विधिवत उद्घाटन.

महावीर आचार्य बाड़मेर।।
अब बाड़मेर के खेल प्रेमी एथलीट को मिलेगा बाड़मेर में ही आर्चरी तीरंदाजी का प्रशिक्षण बाड़मेर में हाल ही में राज्य स्तरीय तीरंदाजी में मेडल प्राप्त कर चुके भूर सिंह द्वारा स्प्रिंट आर्चरी एकेडमी की शुरुआत चोहटन रोड स्थित गांधीनगर ग्राउंड के पास शुरुआत की गई है इसमें प्रशिक्षित राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय खिलाड़ियों द्वारा बाड़मेर के युवाओं व बच्चों को आर्चरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसके द्वारा बाड़मेर में पहली बार अच्छे तीरंदाज खिलाडी तैयार होंगे जो कि विद्यालय तथा राष्ट्रीय लेवल के प्रतियोगिताओं में भाग लेकर बाड़मेर का गौरव बढाएंगे।




 संस्था के देवेन्द्र सागर ने बताया कि वर्तमान में 8 वर्ष से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। एकेडमी जोइन करने के लिए कार्यालय समय में फार्म भरकर जमा किए जा रहे हैं। संस्था का उद्देश्य है कि वे बाड़मेर में तीरंदाजी में रूचि रखने वाले एथलीट को एक ऐसा प्लेटफार्म उपलब्ध कराएं जिससे भविष्य के ओलंपिक खिलाड़ी तैयार हो और भारत को गोल्ड मैडल जीता कर देश व परिवार सहित बाड़मेर का नाम रोशन करें।

रविवार, 23 जनवरी 2022

अमर शहीद लाला हुक्मचन्द जैन का बलिदान विस्मरणीय - मुकेश बोहरा अमन

अमर शहीद लाला हुक्मचन्द जैन का बलिदान विस्मरणीय
- मुकेश बोहरा अमन


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सन 1857 की क्रान्ति के दूसरे शहीद हुक्मचन्द जैन, अंग्रेजों ने चाचा-भतीज को सरे-आम दी फांसी

सन 1857 की क्रान्ति भारतीय आजादी के संघर्ष में मील का पत्थर रही है । सन् 57 की क्रान्ति से हिन्दुस्तान का बच्चा-बच्चा वाकिफ है । हर भारतवासी के जहन् में आजादी की प्रथम लड़ाई आज भी गुंज रही है । सन् 1857 की क्रान्ति में भारतीय सैनिकों एवं हजारों देशभक्त युवाओं ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अपनी आवाज बुलन्द की। जिसमें सैंकड़ों देशभक्तों को अपना बलिदान देना पड़ा । जिसमें पहला नाम अमर शहीद मंगल पाण्ड़े का आता है । वहीं इसी क्रान्ति में शहीद होने वाले देशभक्तों में दूसरा नाम अमर शहीद लाला हुक्मचन्द जैन का आता है । जिन्होंनें अंग्रेजी शासन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और देशभक्त युवाओं को संगठित कर संघर्ष किया ।

करीब-करीब 164 वर्ष पहले 19 जनवरी, 1858 के दिन निष्ठुर अंग्रेजों ने देशभक्त लाला हुक्मचन्द जैन, मुनीर बेग और हुक्मचन्द जैन के भतीज फकीरचन्द जैन को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। जिनका गुनाह देश की आजादी की मांग था । जिन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया । ऐसे अमन शहीदों को आज पूरा देश कोटि-कोटि नमन और अभिनन्दन करता है । 

  लाला हुकुमचंद जैन का जन्म सन 1816 में हांसी (हिसार) में दुनीचंद जैन के घर हुआ था। इनकी आरम्भिक शिक्षा हांसी में हुई । अपनी शिक्षा व प्रतिभा के बल पर इन्होंने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफ़र के दरबार में पद प्राप्त कर लिया। सन 1841 में मुगल बादशाह ने इनको हांसी और करनाल जिले के इलाकों का कानूनगो व प्रबंधकर्ता नियुक्त किया। सात साल तक मुगल बादशाह के दरबार में रहे। इसके बाद हांसी लौट आए। अमर शहीद लाला हुकुमचंद जैन का परिवार वर्तमान में हरियाणा के हांसी (हिसार) में ही रहता है । जहां डडल पार्क के सामने उनकी हवेली है। 19 जनवरी को लाला हुकुम चंद जैन का बलिदान दिवस हांसी की डडल पार्क में मनाया जाता है । 

  सन 1857 की क्रांति में लाला हुकुमचंद जैन ने बेहद कम संसाधनों के बावजूद अंग्रेजी सरकार के खिलाफ युद्ध का बिगुल बजाया और अंग्रेजों के खिलाफ आमजन में देशभक्ति की भावना का संचार किया । उन्होंने फारसी भाषा में एक पत्र लिखकर बादशाह बहादुरशाह जफर से सहायता मांगी। यह गुप्त पत्र अंग्रेजों के हाथ लग गया। इसी बीच दिल्ली पर अंग्रेजों ने कब्जा कर मुगल सम्राट को गिरफ्तार कर लिया। 15 नवंबर 1857 को अंग्रेजों के हाथ लाला हुकुमचंद और मिर्जा मुनीर बेग के हस्ताक्षरों वाला वह पत्र लग गया। दिल्ली के कमिश्नर सीएस सांडर्स ने हिसार के कमिश्नर नव कार्टलैंड को वह पत्र भेजते हुए कठोर कार्रवाई के लिए लिखा। 

  इसके आधार पर अंग्रेजी सरकार ने लाला हुकुमचंद जैन और उनके साथी मुनीर बेग को उनके घर के सामने ही 19 जनवरी 1858 को फांसी पर लटका दिया। लाला हुकुमचंद के भतीजे फकीरचंद को अदालत से बरी होने के बाद भी फांसी दे दी गई। लाला हुकुमचंद जैन के शव को धर्म विरूद्ध जलाने की जगह दफनाया गया जबकि मुनीर बेग के शव को दफनाने की बजाय जलाया गया । वहीं लाला हुक्मचन्द जैन की सम्पति का नीलाम कर दिया गया । 

  सन् 1857 की क्रान्ति के ऐसे बेजोड़ नायकों ने अपने वतन की आजादी की खातिर अपने प्राणों की आहूति दे दी । ऐसे देशभक्त वीरों को देश हमेशा याद करता रहेगा । अमर शहीद लाला हुक्मचन्द जैन का देश की आजादी के लिए दिया गया बलिदान सदियों-सदियों के लिए अविस्मरणीय रहेगा ।ऐसे में देशभक्तों की शहादत व उपस्थिति से ही भारत आज स्वतंत्रता की पताका फहरा रहा है । उनकी स्मृति में अलग-अलग सथानों पर स्मारक आदि बने हुए है । लाला हुक्मचन्द जैन जैसे अमर शहीदों की शहादत को भारत के हर गांव-गांव, शहर-शहर में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए ताकि वर्तमान पीढ़ी को हमारे स्वर्णिम इतिहास व अमर वीरों के बारे में जानकारी मिल सके तथा वे उनकी देशभक्ति से प्रेरणा ले सके । 

मुकेश बोहरा अमन
साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता

शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

केकडी के प्रबोधक आचार्य व नोलखा , शुक्ला,राजोरा व सारस्वत ने भीलवाड़ा व चित्तौडगढ़ मे पतंगे डोर व लड्डु बाटे

केकडी के प्रबोधक आचार्य व नोलखा , शुक्ला,राजोरा व सारस्वत ने भीलवाड़ा व चित्तौडगढ़ मे पतंगे डोर व लड्डु बाटे


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         भीलवाड़ा व चित्तौडगढ़ जिले मे शुक्रवार को मकरसंक्रांति का पर्व परम्परागत तरीके से मनाया गया।केकडी के विश्व शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री धर्मचन्द आचार्य केकडी ने  भीलवाड़ा व चित्तौडगढ़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पतंग व डोर,तिल के लड्डु, अमरूद आदि का वितरण किया गया ।भीलवाड़ा मे शास्त्री नगर मे आयोजित पतंग समारोह मे मुख्य अतिथी श्री श्यामसुंदर नोलखा अध्यक्ष मोटर पार्ट्स डीलर  एसोसिएशन भीलवाड़ा, अध्यक्षता विश्व शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री धर्मचन्द आचार्य केकडी विशिष्ट अतिथी श्री मति लीला देवी नोलखा,श्री मति नीलम सारस्वत भारतीय जीवन बीमा निगम,सुश्री किरण राणावत  युवा नेत्री , रेणु जेन उपस्थित थे।


हरणी महादेव भीलवाड़ा मे आयोजित समारोह मे मुख्यअतिथि श्री धर्मेन्द्र सिंह राजोरा,अध्यक्षता श्री धर्मचन्द आचार्य केकडी, विशिष्ट अतिथि श्री मति नीतू  श्री मति राजकुमारी, श्री मति सुनीता राव, श्री मति अंजना व श्री घनश्याम माली अलवर आदि ने बच्चो को पतंग, डोर,तिल के लड्डु व अमरूद वितरित किये।चित्तौडगढ़ जिले मे आयोजित पतंग महोत्सव मे ग्राम कल्पवृक्ष धाम फलोदी, ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा, पंचायत समिति गंगरार मे आयोजित समारोह मे श्री ज्ञानेश्वर शुक्ला प्रधानाध्यापक, समाजसेवी श्री धर्मेद्र सिंह राजोरा,प्रबोधक श्री धर्मचन्द आचार्य , समाजसेवी श्री नारायण सिंह,श्री पप्पू सिंह,श्री मति प्रमिला,श्री मति नीतू, श्री मति संगिता,श्री मति श्वेता उपस्थित थे।


ज्ञात हो कि श्री आचार्य के द्वारा प्रत्येक वर्ष भीलवाड़ा व चित्तौडगढ़ के फलोदी, चन्दनपुरा, लिरडी खेडा,आदि मे पतंग डोर,तिल के लड्डु व अमरूद , चप्पले व जुटे, स्टेशनरी आदि जरुरतमंद लोगों ग्रामीण क्षेत्र मे वितरित किये जाते हैं ।वर्तमान में श्री धर्मचंद आचार्य राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कल्प वृक्ष धाम फलोदी ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा, पंचायत समिति गंगरार,जिला चित्तौडगढ़, राजस्थान मे प्रबोधक के पद पर कार्यरत हैं ।और विभिन्न समाजसेवी लोगो/ संस्थाओ से मिलकर जरुरतमंद लोगों की सेवा कर रहे हैं।

गुरुवार, 13 जनवरी 2022

आचार्य "राष्ट्रीय स्वामी विवेकानन्द सम्मान " से हुए सम्मानित

 
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       भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलवाने वाले युगप्रवर्तक व आजादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत स्वामी विवेकानन्द जी की 159 वी जयंती 12जनवरी 2022 को राष्ट्रीय स्तर पर गोण्डा उत्तरप्रदेश भारत मे समारोह पूर्वक मनाई गई।राष्ट्रीय युवा दिवस के एतिहासिक समारोह मे राजस्थान राज्य के विश्व शांति पुरस्कार से सम्मानित केकडी, जिला अजमेर ,निवासी श्री धर्मचंद आचार्य को" राष्ट्रीय स्वामी विवेकानन्द पुरस्कार" से सम्मानित किया गया है।श्री आचार्य को लगभग 10 वर्षों से सामाजिक कार्यो,जरूरतमन्द लोगो को निशुल्क वस्त्र,मास्क,स्टेशनरी,शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र मे उल्लेखनीय कार्यो,कोरोनकाल मे स्वय के जीवित शरीर पर टीके/ वेक्सिन का प्रयोग करने की अनुमति राजस्थान सरकार को अपील की है आदि के लिए उत्तरप्रदेश मे देश के सभी राज्यो से लगभग 30 सर्वश्रेष्ठ शिक्षको/ चिकित्सकों/ समाजसेवको को सम्मानित किया गया है ।
राजस्थान से केकडी के आचार्य के उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कृत किया गया है ।समारोह मे मुख्य अतिथी पदम श्री डॉ विजय शाह महाराष्ट्र,संयोजक श्री सुशील कुमार आनंद अंतराष्ट्रीय पर्यावरण योध्दा सम्मान से सम्मानित,अध्यक्ष श्री मति पिंकी देवी शान्ति फाऊंडेशन गोण्डा उत्तरप्रदेश,विशिष्ट अतिथि डॉ विनय कंसल पर्यावरणविद दिल्ली,सचिव श्री गया प्रसाद आनंद ,सहसंयोजक डॉ यस वी सवट,रमेश आनंद चित्रकार, डॉ ज्ञानप्रकाश पासी प्रवक्ता,कवयित्री अन्नपूर्णा मालवीय भी उपस्थित थे ।वर्तमान में श्री धर्मचन्द आचार्य राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कल्प वृक्ष फलोदी,ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा, पंचायत समिति गंगरार, जिला चित्तौडगढ़ राजस्थान मे प्रबोधक के पद पर कार्यरत हैं।और देश व विदेश की अनेक संस्थाओ से जुडकर जरूरतमंद लोगो की सेवा कर रहे हैं।
आचार्य ने राष्ट्रीय स्वामी विवेकानन्द पुरस्कार का श्रेय समस्त प्रबोधक / शिक्षक वर्ग एवं आचार्य ब्राह्मण समाज़ के लोगो को दिया हैं जिनके आशीर्वाद से आचार्य आज देश व विदेश तक पहुंचे है और समाजसेवा का कार्य कर रहे हैं।

मंगलवार, 11 जनवरी 2022

रोजगार विहीन होते गांव, पलायन के पथ पर जिन्दगी

- मुकेश बोहरा अमन

ग्राम्य जीवन पर रोजगार का संकट, शहरों पर बढ़ता बोझ


  भारत गाँवों का देश है। भारत की अधिकतम जनता गाँवों में निवास करती हैं। महात्मा गाँधी जी कहते थे कि वास्तविक भारत का दर्शन गाँवों में ही सम्भव है जहाँ भारत की आत्मा बसती है। यह बातें अपनी जगह ठीक है मगर वर्तमान के दौर के हालात और परिस्थितियों का गहनता से अध्ययन करे तो वस्तुस्थिति ठीक इसके उलट आती है । ग्राम्य क्षेत्रों में अनेकानेक प्रकार की छोटी-बड़ी समस्याएं आज भी जस की तस है । उन सबमें गांवों में रोजगार की समस्या नासूर बनकर उभर रही है ।
 आधुनिकता की चकाचौंध व पैसे के बोलबाले ने ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत अर्थव्यस्था को झकझोर कर रख दिया है । ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और घटते रोजगार के अवसरों ने आमजन के सम्मुख आजीविका की समस्या खड़ी कर दी है । केन्द्र व राज्य सरकारे अपने-अपने स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को लेकर कई प्रयास व प्रयोग करती रही है । सरकारों का अनुमान रहता है कि इन प्रयासों से गाँवों से शहरों की ओर होने वाला पलायन रुकेगा। तथा गांवों में जरूरतमंद को रोजगार मिल सकेगा । 

  वैश्विीकरण के इस दौर में गांवों में रोजगार के ऐसे बहुत कम अवसरों का निर्माण हो रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीण युवाओं को रोजगार प्राप्त हो सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षित व अशिक्षित वर्ग के लिए रोजगार एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है । यह चिंताजनक है कि गांवों में ऐसे शिक्षित-अशिक्षित युवाओं की एक बहुत लम्बी कतार खड़ी है, जिसे यह समझ में नहीं आ रहा है कि वह कहां और कैसे रोजगार प्राप्त करे ? गांवों में जिनके पास बहुत कम जमीन है अथवा जो भूमिहीन हैं वे रोजगार के अभाव में चिंताग्रस्त हैं तथा वे रोजगार की तलाश में शहरों क ओर पलायन कर रहे है । 

गांव से शहरो की ओर पलायन जिम्मेदार कौन
  वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार हमारे देश की कुल जनसंख्या 121.02 करोड़ आंकलित की गई है जिसमें 68.84 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है और 31.16 प्रतिशत जनसंख्या शहरों में निवास करती है। स्वतंत्र भारत की प्रथम जनगणना 1951 में ग्रामीण एवं शहरी आबादी का अनुपात 83 प्रतिशत एवं 17 प्रतिशत था। 2001 की जनगणना में ग्रामीण एवं शहरी जनसंख्या का प्रतिशत 74 एवं 26 प्रतिशत हो गया। इस प्राकर इन आंकड़ों के आधार पर भारतीय ग्रामीण लोगों का शहरों की ओर पलायन तेजी से बढ़ रहा है। 

  स्थानीय स्तर पर खेती के अलावा अन्य काम-धंधों के अभाव के कारण दूरदराज के शहर, कस्बों में पलायन ही आजीविका का प्रमुख विकल्प बन गया है। ऐसे में रोजगार की तलाश में कुशल व अकुशल बेरोजगार गांवों से शहरों की ओर पलायन कर रहे है । वें मात्र इस उम्मीद में अपने मूल स्थानों को छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे है कि उन्हें शहर में अलग-अलग उद्योगों व निर्माण से जुड़े कार्याें में रोजगार मिल सकेगा। 

पलायन के कारण
                    गांव से शहरों की तरफ पलायन करने का सिलसिला नया नहीं है । गांवों में घटते रोजगार के अवसरों के चलते ग्रामीण शहरों की ओर मुंह कर कर रहे हैं । गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी होने के कारण रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क, आवास, संचार स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं शहरों की तुलना में कम है । गांवों में लघु व कुटीर उद्योगों का लगातार क्षरण अथवा कमी होना, खेती-किसानी में बढ़ती अरूचि, गांवों में मजूदरी का अभाव, खेती का अधिक फायदेमंद न होना सहित कई बिन्दु जिन कारणों से ग्रामीण रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे है । 
                     
पलायन पर अंकुश के उपाय
  गांवों रोजगार सृजन एवं गांवों से शहरों की ओर पलायन को रोकने लिए सरकार, प्रशासन व समुदाय स्तर पर सबको मिलकर प्रयास करने की जरूरत है । जिसमें गांवों में शहरों के जैसे उच्च या तकनीकी शिक्षा के संस्थान खोलना, स्थानीय उत्पादों के मद्देनजर ग्रामीण अंचलों में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना, परिवहन सुविधा, सड़क, चिकित्सालय, शिक्षण संस्थाएं, विद्युत आपूर्ति, पेयजल सुविधा, रोजगार तथा उचित न्याय व्यवस्था के साथ-साथ बुनियादी शिक्षा में गुणात्मक सुधार सहित अन्य आवश्यक व मूलभूत सुविधाओ ंका सृजन करना जरूरी है । गांवों मे मजदूरों तथा अन्य बेरोजगार युवकों के लिए स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता एवं गांवो मे उनके लिए प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाएं। रोजगार के लिए बुनाई, हथकरघा, कुटीर उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की जाए। स्वयं सहायता समूह, सामूहिक रोजगार प्रशिक्षण, मजदूरों को शीघ्र मजदूरी तथा उनके बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

  सचमुच उदारीकरण के वर्तमान दौर में रोजगार विहीन विकास की चुनौतियों के बीच गांवों में रोजगार अवसर बढ़ाने के लिए हमें नए सिरे से वर्तमान परिस्थितयों के अनुरूप भागीरथी प्रयास करने होंगे। गांवों में काफी संख्या में जो गरीब और अर्धशिक्षित को रोजगार देने के लिए निम्न तकनीक विनिर्माण में लगाना होगा। साथ ही इस पर भी पर्याप्त चिन्तन करने की जरूरत है कि गांवों के लिए जितना धन आवंटित हो, उसका सार्थक इस्तेमाल हो। यह जरूरी है कि सरकार एक ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंके और ग्रामीण रोजगार योजनाओं को सार्थक रूप से कार्यान्वित करें, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण युवाओं का भी दायित्व है कि वे नए रोजगार बाजार के अनुरूप अपने को शिक्षित-प्रशिक्षित और प्रतिस्पर्धी बनाएं । ऐसा होने पर ही करोड़ों ग्रामीण बेरोजगारों को गांव में ही रोजगार मिल सकेगा तथा पलायन जैसी समस्या से मुकाबला किया सकेगा । 

मुकेश बोहरा अमन
साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता 
बाड़मेर।

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

अद्भूत्, अनुपम व अलौकिक सौन्दर्य का पावन धाम है गढ़ गिरनार


हरवर्ष लाखों जैन अनुयायी आते है नेमीनाथ के द्वार गढ़ गिरनार


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*देश ही नही* बल्कि दुनिया भर में अपने अद्भूत, अनुपम व अलौकिक सौन्दर्य , ऐतिहासिक विरासत व धार्मिक आस्था से जाना जाता है गढ़ गिरनार । गुजरात के जूनागढ़ जिले में गिरनार पर्वत स्थित है । इस पर्वत पर जैन व हिन्दु धर्म के मन्दिर बने हुए है । जहां पर जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर नेमीनाथ भगवान का भव्य व मन को अनूठी शान्ति व शक्ति देने वाला जिन मन्दिर बना हुआ । भगवान नेमीनाथ के अलावा अन्य तीथंकरों के भी मन्दिर बने हुए है । गिरनार की तलहटी से पर्वत की ऊंचाई 3500 फीट है । गिरनार आने वाले नेम भक्तों को गिरनार पर्वत के ऊपर बने मंदिर के दर्शन के लिए 9999 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं । हालांकि अब सुविधाओं ने काफी विस्तार ले लिया है जिसके चलते गिरनार पर्वत पर देश का सबसे बड़ा रोपवे बना चुका है । जो वर्तमान में संचालन में है । इससे उम्रदराज श्रद्धालुओं को गिरनार पर्वत की यात्रा में काफी आसानी व सहूलियत होती है ।


*जैन धर्म के लिए क्यों खास है गिरनार ?*

*पालिताना और* सम्मेद शिखर के बाद गिरनार जैन धर्म का प्रमुख तीर्थ हैं। यह एक बहुत ही पवित्र व रम्य स्थान है । जहां जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर नेमीनाथ को केवलज्ञान व निर्वाण प्राप्त हुआ था । गिरनार जैन धर्माबलंबियों के साथ-साथ हिन्दू धर्मावलम्बियों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। हरे-भरे गिर वन के बीच पर्वत-शृंखला धार्मिक गतिविधि के केंद्र के रूप में बनती जा रही है। इन पहाड़ियों की औसत ऊँचाई 3,500 फुट है पर चोटियों की संख्या अधिक है। यहां पर जैन धर्म के आठ मुख्य मन्दिर अथवा स्थल है । जिसमें पांच टूंक शामिल है । यहां मल्लिनाथ और नेमिनाथ के मंदिर बने हुए हैं । यहीं पर सम्राट अशोक का एक स्तंभ भी है । भगवान नेमिनाथ की मंदिर की प्रतिमा वर्तमान में लगभग 84785 साल पुरानी है ।


*एशियाई सिंहों* के लिए विख्यात गिर वन राष्ट्रीय उद्यान इसी पर्वत के जंगल क्षेत्र में स्थित है। यहाँ के सिंहों की नस्ल भी अधिक विख्यात है जिनकी संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है। गिरनार में कई प्राचीन व ऐतिहासिक महत्व के शिलालेख भी मिले है । पहाड़ी की तलहटी में एक बृहत चट्टान पर अशोक के मुख्य 14 धर्मलेख उत्कीर्ण हैं। इसी चट्टान पर क्षत्रप रुद्रदामन् का लगभग 150 ई. का प्रसिद्ध संस्कृत अभिलेख है। इन सब के अलावा ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी गिरनार का काफी महत्व है। गिरनार को जैन धर्म का सिद्ध क्षेत्र कहा जाता है ।


*नेमीनाथ में वैराग्य का पुण्योदय*

*जैन ग्रंथों के* अनुसार 22वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ का विवाह जूनागढ़ की राजकुमारी के साथ तय हुआ। वहीं बारात के समय में नेमीनाथ ने कई पशुओं को बंधा देखकर इसके बारे में पूछा, जिसके बाद पता चला कि कई मांसाहारी राजाओं के लिए इन बेजुबान और निर्दाेष पशुओं का मांस बनाया जाएगा, यह सुनकर तीर्थकर नेमीनाथ काफी दुखी हुए । इससे आहत् होकर उन्होंनें सांसारिक जीवन त्याग का निर्णय लिया और वे गिरनार पर्वत पर तपस्या करने चले गए । जहां उन्हें कठोर पस्या उपरांत केवल्यज्ञान की प्राप्ति हुई । नेमीनाथ का निर्वाण अर्थात् मोक्ष भी गिरनार पर्वत पर ही हुआ । उन्हें यहां निर्वाण प्राप्त हुआ ।


*गौरतलब है कि* प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को बड़े ही विशाल व भव्य स्तर पर गिरनार की परिक्रमा होती है, इस परिक्रमा में गिरनार के भव्य और विशाल के जंगल के दर्शन होते हैं। इस परिक्रमा के दौरान अन्य कई तीर्थस्थल भी पड़ते हैं। वर्ष में हर मौसम में यहां श्रद्धालु आते रहते है । गढ़ गिरतार की प्राकृति छटा व रम्यता सही मायनों में सदाबहार है । यहां जितनी बार आओ, उतनी बार नया और मन को शुकून देने वाला लगता है । इस पवित्र गिरनार जैसे पवित्र व पावन सिद्ध क्षेत्र से 22वें तीर्थकर नेमीनाथ समेत अनेकोनेक मुनियों ने भी मोक्ष प्राप्त किया था। इन सब की वजह से गढ़ गिरनार का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है और दूर-दूर से लोग इसके दर्शन के लिए यहां आते हैं। साथ ही ऐसी मान्यता भी है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन व सच्चे भाव से गिरनार के दर्शन करता है, उसकी मांगी गई हर मुराद, हर मनोकामना पूरी होती है।



*मुकेश बोहरा अमन*
*साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता*
बाड़मेर राजस्थान

राज्य में आखिर कब थमेगा सड़क दुर्घटनाओं का दर्द ? - मुकेश बोहरा अमन



*परिवहन विभाग का नाम नया पर ढ़र्रा वही पुराना


*राजस्थान सरकार* ने अपने परिवहन विभाग का नाम बदलकर परिवहन विभाग और सड़क सुरक्षा तो कर दिया है लेकिन सड़क पर सुरक्षित परिवहन को लेकर आज भी स्थिति जस की तस है । राज्य में अलग-अलग स्थानों पर आएं दिन हो रही सड़क दुर्घटनाएं कम होने का नाम नही ले रही है । सरकार आलीशन दफतरों में बैठकर बहुत कुछ कर लेती नजर आ रही है मगर धरातल पर इसका असर देखने को नही मिल रहा है । जिसके चलते दिन-प्रतिदिन राज्य में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी विभाग के प्रयास नाकाफी ही नही बल्कि कहीं कार्यरूप में परिणित होते भी नजर नही आ रहे है ।  


  बाड़मेर जिले के बालोतरा क्षेत्र में हाल ही 10 नवम्बर 2021 को हुई भीषण सड़क दुर्घटना की चर्चा और चिन्ता पूरे देश भर में हुई । यहां तक कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से लेकर स्वयं मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने भी इस दुर्घटना पर दुख जाहिर किया, अपनी सांत्वना प्रकट की । परन्तु उस दुर्घटना के कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों अथवा अधिकारियों पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही अमल नही लाई गई । बस दुर्घटना में कई यात्रियों की मौत हुई है । प्रदेश की सड़कों पर दौड़ रहे सरकारी एवम् निजी क्षेत्र से जुड़े परिवहन के साधनों की फिटनेस, बीमा आदि को लेकर परिवहन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई होती नजर नही आ रही है । जिसके चलते अवैध तरीके से सैंकड़ों वाहन प्रतिदिन सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे है ।
 
  राज्य की राजधानी जयपुर एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में ट्रैफिक दुर्घटनाओं एवं दुर्घटना में हुई मौतों के मामले में टॉप टेन में हैं । देश के कई महत्वपूर्ण शहरों को भी राज्य की राजधानी जयपुर सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पीछे छोड़ती नजर आ रही है । जहां एक ओर सरकार की सड़क दुर्घटनाओं के रोकथाम को लेकर सख्त नीति नही होने के साथ-साथ सड़कों पर बेपरवाह होकर चल रहे नगारिकों की भी उतनी की उतनी जिम्मेदारी बनती है । आम नागरिकों को सजग व सतर्क होकर वाहनों का संचालन तथा पैदल अथवा वाहन में होने पर यातायात के नियमों की जागरूकता से पालना करने की जरूरत है ।

  बाड़मेर जिले में हाल ही में हुई भीषण सड़क दुर्घटना के बाद एक बार फिर से परिवहन विभाग पर कई सवाल खड़े हुए हैं । जिसमें महत्वपूर्ण यह है कि विभाग और विभागीय अधिकारियों की ओर से सिर्फ राजस्व अर्जित करने को ही लक्ष्य बना रखा है । जबकि परिवहन व सड़क सुरक्षा विभाग की नाक के नीचे सैंकड़ों वाहन मनमर्जी व नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहे है । यदि इन वाहनों के दस्तावेजों की गंभीरता से जांच की जाये तो भी सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है।


सड़क दुर्घटनाओं के कारण
  सड़क दुर्घटना सबसे अधिक ओवर स्पीडिंग अर्थात तेज गति की वजह से होती है । जिस चलते चालक ऐनवक्त पर वाहन को नियंत्रित नही कर पाता है और वह हादसे को अंजाम देता है । जिस पर नियंत्रण गहुत जरूरी है । साथ ही ड्राइविंग के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन, पर्याप्त आराम नही मिलना, असुरक्षित वाहन, खराब सड़कें व मौसम, नशे में गाड़ी चलाना, ओवर स्पीड़िंग व ओवर लॉडिंग, आपातकालीन चिकित्सीय सुविधाओं का अभाव, निगरानी की कमी, गुणवत्तापूर्ण ड्राइविंग स्कूलों की कमी, ट्रैफिक इंजीनियरिंग, आदि सड़क हादसों के कारण रहते है । वहीं सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों को लेकर मंथन किया जाए तो एक मूल बात निकल सामने आती है कि सड़क दुर्घटना में घायल अथवा गम्भीर घायलों को समय पर अस्पताल नही पहुंचाने व इलाज नही मिलने के कारण भी मौतें हो रही हैं ।


सड़क दुर्घटना रोक के उपाय
  राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाना बहुत ही जरूरी होता जा रहा है जिसके लिए समय पर अति-आवश्यक व कड़े कदम उठाएं जाने की जरूरत है । ऐसे में राज्य में यातायात नियमों की सख्ती से पालना, नशे में धुत ड्राईविंग पर कड़ाई से कार्यवाही, जागरूकता और जिम्मेदारी जरूरी, विभागीय अधिकारियों की सड़कों पर भूमिका बढ़ाना, अधिक सड़़क हादसों वाले स्थानों की पहचानकर उचित कार्यवाही करना, ओवर लॉडिंग पर सख्त कार्यवाही, विद्यालय स्तरीय पाठ्यक्रमों में सड़क सुरक्षा को स्थान दिलाना सहित तमाम आवश्यक कानूनों को प्रस्थािपत कर सड़क हादसों पर कुछ हद तक रोक लगाना सम्भव है ।
 
  निष्कर्ष रूप में इतना ही कहते सकते है कि राज्य में बढ़ रहे सड़क हादसे चिन्ता का विषय है । जिससे प्रतिवर्ष सड़क हादसों में बहुत बड़ी तादाद में जान-माल की हानि होती है । इस विषय पर हमें नए सिरे एवं नए नजरिए से विचार-मंथन कर निष्कर्ष निकालने जरूरत है । जिस हेतु आवश्यक कानूनों के साथ विभागीय अधिकारियों को दिलचस्पी लेकर कार्य करना अब बहुत ही जरूरी हो गया है । वहीं सड़कों पर नियमों की अनदेखी व उल्लंघन कर दौड़ रहे वाहनों पर बड़ी कार्यवाही से ही सड़क हादसों पर रोकथाम सम्भव हो पायेगी । साथ ही आमजन में यातायात के नियमों के  प्रति जन-जागरूकता लाने  के साथ-साथ स्वयं आमजन को भी सजग होने की भी सख्त जरूरत है ।



मुकेश बोहरा अमन
साहित्यकार व सामाजिक कार्यकर्ता

बुधवार, 5 जनवरी 2022

मनोज आचार्य बने चोहटन ब्लोक ध्यक्ष

आचार्य समाज चौहटन व रामसर तहसील के अध्यक्ष पद पर मनोज आचार्य को मनोनीत किया गया


Acharya samachar online Barmer
अखिल भारतीय महा ब्राह्मण समाज के जिला अध्यक्ष जीवराज शर्मा ने तहसील चौहटन व रामसर के अध्यक्ष पद हेतु मनोज आचार्य को मनोनीत किया । इस दौरान आचार्य ने अध्यक्ष पद का संभालने के बाद कार्यकारिणी की घोषणा की जिसमें उपाध्यक्ष राहुल आचार्य कोषाध्यक्ष रजनी आचार्य, प्रसार-प्रसार मंत्री तुलसीदास आचार्य व सदस्यों में आईदान, राम स्वरूप, दिलीप, दिनेश, रामचंद्र, रमेश, स्वरूप, माला राम को नियुक्त किया गया।


आचार्य ने कार्यकारिणी का आभार जताते हुए कहा कि वह पूरी निष्ठा से समाज के विकास में तन मन धन धन से सबको साथ लेकर संगठित समाज को आगे बढ़ाएंगे तथा समाज के भवनों, मंदिर व सम्पत्ति को सहेज उनका पुनरोद्धार करवाएंगे। समाज में शिक्षा को बढ़ावा देते हुए बच्चों व प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। साथ ही साथ समाज में व्याप्त कुरितियों को समाप्त कर आधुनिक युग में समाज के मूल्यों व आदर्शों को आत्मसात करने का प्रयास किया जाएगा। इसकी पहल पूर्व में मृत्यूभोज जैसी कुप्रथा पर रोक लगाकर समाज द्वारा अच्छा प्रयास किया गया है।

केकडी की प्रधानाचार्या सुना, पाली की आचार्य, जयपुर की डॉ मीणा,भीलवाड़ा की ओझा व चित्तौडगढ़ की सालवी बेस्ट टीचर अवार्ड से गुजरात में हुए सम्मानित

केकडी की प्रधानाचार्या सुना, पाली की आचार्य, जयपुर की डॉ मीणा,भीलवाड़ा की ओझा व चित्तौडगढ़ की सालवी बेस्ट टीचर अवार्ड से गुजरात में हुए सम्मानित 


ASO news barmer
    आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर उच्च शिक्षा प्रबंधन,शिक्षा के क्षेत्र मे सर्वश्रेष्ठ कार्य,कला,संस्कृति, घर पर सिखाने के प्रतिफल,पर्यावरण, क्विज,कोरोना काल मे श्रेष्ठतम सामाजिक सरोकार के तहत भारत देश की प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फ़ूले जी की जयंती के अवसर पर भारत देश मे प्रमुख 50 शिक्षिकाओ को सावित्रीबाई फुले बेस्ट टीचर अवार्ड से सम्मानित किया गया है ।


स्टार टीम मंथन गुजरात के राजस्थान प्रभारी समाजसेवी शिक्षक श्री धर्मचन्द आचार्य केकडी ने बतलाया कि शेक्षिक व समाजिक क्षेत्रो में उल्लेखनीय योगदान के लिए राजस्थान की प्रमुख शिक्षिकाओ को भरुच, गुजरात ,भारत में सम्मानित किया गया है इसमे रीथा सुना प्रधानाचार्या केकडी, मन्जू शर्मा पाली डॉ आरती मीणा जयपुर,रुचि ओझा भीलवाड़ा,प्रेमलता सालवी चित्तौडगढ़,विदुषी न्याती, कृष्णा शर्मा व प्रियंका कच्छावाकेकडी,व रितु सारस्वत नीमच मध्यप्रदेश को सम्मानित किया गया है ।


एतिहासिक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि श्री शेलेष एन प्रजापति नेशनल टीम मोटीवेटर टीम मंथन गुजरात भारत व अध्यक्षता श्री मति सुशीला देवी स्टेट गाईड टीम मंथन गुजरात भारत व विशिष्ट अतिथि श्री धर्मचन्द आचार्य केक डी राजस्थान "विश्व शांति पुरस्कार से सम्मानित "थे ।सभी ने बालिका शिक्षा, मिशन शक्ति व बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा बुलंद करने का प्रण लिया ।


मंगलवार, 4 जनवरी 2022

त्यौहार खुशियां बांटनेे के लिए, लूटने के लिए नही :- साध्वीश्री

*तीन दिवसीय अहिंसा अभियान के पोस्टर का हुआ विमोचन,*


*त्रिदिवसीय अहिंसा अभियान का आगाज 1 नवम्बर से।*

महावीर आचार्य (बाड़मेर)
इंडिया अगेंस्ट वॉयलेंस, बाड़मेर की ओर से प्रतिवर्ष की भांति होने वाले पटाखा बहिष्कार, ईको दीपावली व पर्यावरण संरक्षण को लेकर *इंडिया अगेंस्ट वाॅयलेंस एवं भारतीय जैन संगठना* के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय अहिंसा अभियान के *पोस्टर का विमोचन रविवार को आराधना भवन में परम पूज्या साध्वी श्री मृगावतीश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा एवं संयोजक मुकेश बोहरा अमन, भारतीय जैन संगठना बाड़मेर शाखा के सचिव चन्द्रप्रकाश बी. छाजेड़, खरतरगच्छ चातुर्मास समिति के सदस्य गौतमचंद डूंगरवाल*, रवि सेठिया, प्रवीण जैन, उदय गुरूजी, रक्षा मालू की उपस्थिति में हुआ। वहीं इसी क्रम में आराधना भवन में चल रही *श्री कुशल विचक्षण जैन धार्मिक पाठशाला* में भी अहिंसा अभियान के पोस्टर का विमोचन हुआ और बच्चों को पटाखा नही फोडने, पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया गया।

 *साध्वी मृगावतीश्रीजी म.सा.* ने कहा कि त्यौहार के रूप में मनाए जाने वाले जीवन के ये दिन न सिर्फ उन पलों को खूबसूरत बनाते हैं बल्कि हमारे जीवन को अपनी खुशबू से महका जाते हैं। हमारे सारे त्यौहार न केवल एक दूसरे को खुशियाँ बाँटने का जरिया हैं बल्कि वे अपने भीतर बहुत से सामाजिक संदेश देने का भी जरिया हैं। *त्यौहार खुशियां बांटने के लिए है, खुशियां छीनने के लिए नही।* त्यौहार हमारे जीवन में खुशियां लाते है और हमें जीवन मिल-जुलकर भाईचारे के साथ रहने का संदेश देते है। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि *हम हमारी संस्कृति व परम्पराओं को विकृतियों से दूर रखते हुए सबको खुशियां बांटे।* साध्वीश्री ने कहा कि सुरक्षित त्यौहार से ही हमारे जीवन में अपार खुशियों का आगमन होता है । हम आतिशबाजी से दूर रहकर प्रकृति व असंख्य सूक्ष्म जीवों को जीवनदान प्रदान कर सकते है । आतिशबाजी के क्षणिक मनोरंजन से असंख्य जीवों की हिंसा होती है ।

*इंडिया अगेंस्ट वॉयलेंस, बाड़मेर के जिला संयोजक मुकेश बोहरा अमन* ने बच्चों को अहिंसा एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाते हुए कहा कि जीवन में ज्ञान व जानकारी के अभाव में कई गलतियां एवं भूलें हो जाती है मगर हमें इस भाग-दौड़ की जिन्दगी में जीवन के दिशा व दशा के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। हमारी सजगता के सहारे अहिंसा के माध्यम से ही पर्यावरण संरक्षण सहित विभिन्न ज्वलंत वैश्विक समस्याओं का निराकरण सम्भव है। *उन्होंनें कहा कि पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न अंग है, जिसका संरक्षण करना हमारा प्रथम दायित्व है।*

*इंडिया अगेंस्ट वॉयलेंस, बाड़मेर के जिला प्रवक्ता चन्द्रप्रकाश बी. छाजेड़* ने बताया कि इंडिया अगेंस्ट वायलेंस, बाड़मेर व भारतीय जैन संगठना के संयुक्त तत्वावधान में *जिला मुख्यालय पर 1 नवम्बर से 3 नवम्बर तक साधु-साध्वी भगवन्तों की पावन निश्रा में कोविड-19 के निर्देशों कीे पालना करते हुए कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगें।* वही इंडिया अगेंस्ट वायलेंस, बाड़मेर व भारतीय जैन संगठना के संयुक्त तत्वावधान में जिला मुख्यालय पर पटाखा बहिष्कार एवं पर्यावरण संरक्षण को संकल्प दिलवाने के साथ-साथ आॅनलाईन संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगें। वहीं शहर में जरूरतमन्दों की मदद में *नेकी की दीवार* तैयार की जायेगी। *त्रिदिवसीय कार्यक्रम के अन्तर्गत 1 नवम्बर को दोपहर में 2 बजे आराधना में पर्यावरण संरक्षण पर नारा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन, 2 नवम्बर को पौधारोपण व परिन्डा लगाने व 3 नवम्बर को रविकुमार जगदीशचंद सेठिया व प्रकाशचंद नेमीचंद वडेरा परिवार के सहयोग से कच्ची बस्तियों में जरूरतमंद परिवारों को मिठाई व कपड़ें प्रदान कर इस त्यौहार की खुशियों का इजहार किया जायेगा।* साथ ही *पौधारोपण, स्वदेशी अभियान, पर्यावरण संरक्षण, कोरोना जागरूकता एवं बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ को लेकर कई कार्यक्रम* आयोजित होंगें।

सहयोग सेवार्थ फाऊंडेशन भीलवाड़ा के सहयोग से केकडी के आचार्य ने बांटे स्वेटर व वस्त्र



सहयोग सेवार्थ फाऊंडेशन भीलवाड़ा के सहयोग से केकडी के आचार्य ने बांटे स्वेटर व वस्त्र
महावीर आचार्य बाड़मेर
       आज दिनांक 4 जनवरी 2022, मंगलवार को  सहयोग सेवार्थ फाऊंडेशन भीलवाड़ा के द्वारा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कल्प वृक्ष धाम फलोदी ,ग्राम पंचायत रघुनाथपुरा,पंचायत समिति गंगरार, जिला चित्तौड़गढ़, राजस्थान मे बच्चो को स्वेटर व वस्त्र वितरित किये गये।कार्यक्रम मे मुख्यअतिथी  पूर्व वार्ड पंच श्री भेरु लाल कुम्हार, अध्यक्षता प्रधानाध्यापक  श्री ज्ञानेश्वर शुक्ल विशिष्ट अतिथि श्री नारायण सिंह श्री भेरु लाल रेगर,थे। सहयोग सेवार्थ फाऊंडेशन भीलवाड़ा के सचिव श्री गोपाल विजयवर्गीय ने बतलाया कि वर्तमान में सर्दी के मौसम को देखते हुये सहयोग सेवार्थ फाऊंडेशन भीलवाड़ा के तत्वावधान में  राजस्थान के भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ व अजमेर जिलों मे  बच्चो,शहरी व ग्रामीण लोगों को सर्दी से बचाव के लिए स्वेटर व वस्त्र वितरण अभियान चलाया जा रहा है और जरुरतमंद लोगों ग्रामीण व शहरी क्षेत्र मे वस्त्र वितरण किया जा रहा है ।


विधालय के समाजसेवी प्रबोधक श्री धर्मचंद आचार्य केकडी ने बतलाया कि सहयोग सेवार्थ फाऊंडेशन भीलवाड़ा द्वारा कोरोना काल मे भी लगभग 10 लाख मास्क व वस्त्र आदि जरुरतमंद लोगों को वितरित किये गये हैं।

इस अवसर पर विधालय के श्री धर्मेन्द्र सिंह राजोरा,श्री मति प्रमिला,श्री मति नीतू , श्री मति संगीता, श्री मति श्वेता व श्री अमित सुथार व श्री  भगवत सिंह उपस्थित थे।श्री आचार्य द्वारा अनेक राष्ट्रीय संस्थाओ से जुडकर कई वर्षो से बच्चो, व जरुरतमंद लोगों की सेवा की जा रही है वर्तमान मे आचार्य राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कल्प वृक्ष धाम फलोदी मे प्रबोधक पद पर कार्यरत हैं ।