देश के आला सैन्य अफसर रहे लोग किस तरह पर्यावरण के साथ बचपन की पाठशाला चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल को जहन में रखते हैं। इसका उदाहरण है यह अनूठा तोहफा है। करीब 50 साल पहले के बैच ने 10 बीघा में आम का बगीचा तैयार कर स्कूल को साैंपा। इसमें 500 पौधे लगा गए। छठी कक्षा के हर छात्र को एक पौधे के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई। जिससे ये पौधे इस गर्मी में भी फलफूल रहे हैं।
गत वर्ष 1969 में पास आउट पूर्व छात्रों का सम्मेलन था। जो पहला गोल्डन जुबली बैच भी था। इनमें थल सेना उपाध्यक्ष रहे नरेंद्रसिह अति उत्तम विशिष्ट सेवा मेडल और लेफ्टिनेंट जनरल एनसी मारवाह परम विशिष्ट सेवा और उत्तम सेवा मेडल प्राप्त कर चुके। इन दोनों के साथ शौर्य चक्र विजेता कर्नल मेहरसिंह भी सम्मेलन में आए। स्कूल के प्रशासनिक भवन के पीछे खाली 10 बीघा जमीन में आम का बगीचा तैयार किया। जिम्मेदारी छठी कक्षा के छात्रों को दी। हर छात्र 12वीं कक्षा तक पांच-पांच पौधों की देखभाल करेगा। ताकि उसके लिए यह जीवन की याद बन जाएं। प्रिंसीपल कर्नल राजेश राघव, उपाचार्य मनीष चौधरी, पूर्व छात्र राव नरेंद्रसिंह, शरद गंगवार, केएस कंग सहित पूर्व वयोवद्व शिक्षक भी यह देख अभिभूत हुए। इस स्कूल में 25 एकड में हरियाली, खेत व बगीचे हैं। 3 साल पहले करीब 5 बीघा में नींबू का बगीचा स्थापित किया। जहां भी 500 आम के, 400 जामुन तथा 100 नीम और गुलमोहर के पौधे लगाए।
आमदनी होगी, अब ट्री एंबुलेंस भी देंगे
पूर्व छात्र कर्नल सतीश सिंह व रातुल शिवहरे ने बताया कि आम का स्कूल मैस में उपयोग होने के अलावा अधिक उपज बेची जा सकेगी। अनुमान है कि एक पेड़ सालाना दस हजार यानी बगीचा कुल पांच लाख साल की आमदनी देगा। हम स्कूल को एक ट्री एंबुलेंस भी देंगे। ट्री एंबुलेंस में कीटनाशक सहित अन्य सामान रहेंगे।
एनडीए सलेक्शन का रिकाॅर्ड अब तक अजेय
सैनिक स्कूल का 1969 बैच इसलिए भी अहम रहा कि तब देश में सबसे ज्यादा 32 छात्रों का चयन एनडीए में चयन इसी जगह से हुआ। दो छात्र एनसी मारवाह और नरेंद्रसिंह लेफ्टिनेंट जनरल बने तो 7 ब्रिगेडियर, 7 नेवी में कैप्टन विंग कमांडर आदि बने। एक साथ इतने छात्रों के एनडीए में प्रवेश का रिकाॅर्ड अब तक नहीं टूटा है।
आम का बगीचा भेंट करने का कारण पूछने पर पूर्व छात्रों ने कहा कि सैनिक स्कूल की पहचान हरियाली और पर्यावरण से भी है। कुछ समय पूर्व प्रशासनिक भवन और सीसी रोड निर्माण के लिए कुछ पेड़ काटने की नौबत आई। मौजूदा प्रिंसिपल इसे लेकर चिंतित हुए। हमें यह पता लगा तो तय किया कि आम का बगीचा लगाकर देंगे। कई पूर्व छात्रों ने तो यहां आकर इसके लिए गड्ढे खोदने में सहभागिता निभाई। कोटा से खुद पौधे लाए और लगवाए। इन पूर्व छात्रों ने 70 हजार की लागत से विजय स्तंभ की ट्राॅफी व इतनी ही राशि के सैनिक स्कूल का ध्वज भी स्कूल को भेंट कर रखा है।
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