मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एमटी-2 बाघिन द्वारा दो शावकों के जन्म देने के बाद एमटी-4 बाघिन के शावकों को जन्म देने की चर्चा है। मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व प्रशासन ने शावकों के जन्म देने की पुष्टि नहीं की है। हालांकि, उच्चाधिकारियों ने खुशखबरी की संभावना जताई है। तीन महीने पहले एमटी-2 ने दो शावकों को जन्म दिया था। इसकी खबर भास्कर ने सूत्रों के हवाले से लगाई थी, उस समय भी अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की थी। बाद में शावक बढ़े हो गए तो विभाग ने उनकी साइटिंग बताकर इसे मीडिया में जारी किया था।
जानकारी के अनुसार पिछले 14 महीने से मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के ओपन एरिया में फ्री मूवमेंट कर रही मछली की नातिन एमटी-4 (टी-83 लाइटनिंग) के शावकों के जन्म देने की चर्चा बनी हुई है। इस बाघिन को यहां टाइगर रिजर्व में 1 मई 2019 को एमटी-3 बाघ के साथ ओपन एरिया में रिलीज किया था। तभी से दोनों साथ-साथ मूवमेंट कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस बाघिन ने तीन शावकों को जन्म दिया है। लेकिन, अधिकारिक रूप से उच्चाधिकारियों ने पूरी तरह इनकार कर दिया है। हालांकि, इस बाघिन के एक शावक के जन्म देने की बात वन मंत्री सुखराम विश्नोई कर चुके हैं।
उन्होंने कहा था मुकंदरा में 4 से 6 बाघ हो चुके हैं। एक और शावक आने की जल्दी खुशखबरी मिलेगी। वहीं, दूसरी ओर इसके बाद इस बाघिन के तीन शावक को जन्म देने की इन दिनों चर्चा है। लेकिन, अभी तक साइटिंग नहीं हो पाई है।
शावकों के फोटो और कैमरा ट्रैप में नजर नहीं आए हैं। पिछले दिनों विभाग के उच्चाधिकारियों ने इसकी फिजिकली स्थिति को देखते हुए प्रेग्नेंट बताया था। लेकिन, इसके शावक होने की अधिकारिक रूप से अभी तक पुष्टि नहीं की है। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो इसके शावक आने की बहुत बड़ी खुशखबरी होगी।
अधिकारी बोले-दो ढाई महीने पहले लगा था प्रेग्नेंट हुई, लेकिन अभी संशय से है
रिजर्व के ओपन एरिया में मूवमेंट कर रही इस बाघिन के लिए रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आनंद मोहन ने कहा कि ढ़ाई महीने पहले लगा था। यह प्रेग्नेंट हुई थी। लेकिन, अभी इस संबंध में कुछ भी नहीं कह सकते। टीम रेगुलर मॉनिटरिंग कर रही है।
स्टाफ अलर्ट, ई-सर्विलांस सिस्टम से चौकसी
भले ही विभाग ने पुष्टि नहीं की, लेकिन यहां पहले से ज्यादा सुरक्षा कर दी गई है। यहां बंदूकधारी बॉर्डर होमगार्ड तैनात हंै। अन्य स्टाफ रेगुलर मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग कर रहे हैं। बाघिन के शावक होने की पुष्टि पहले मई में की जा चुकी है। लेकिन, अभी तक इनकी साइटिंग नहीं हुई है। इस संबंध में रणथंभौर के ट्रैकर भी शावकों की पुष्टि के लिए आ चुके हैं। लेकिन, उन्हें भी इनके एविडेंस नजर नहीं आए हैं।
पहले भी दे चुकी है शावकों को जन्म
मुकंदरा में 12 अप्रैल 2019 को एंट्री करने वाली मछली बाघिन की यह नातिन है। यह है रणथंभौर टाइगर रिजर्व में भी दो शावकों को जन्म दे चुकी है। लेकिन, वो सरवाइव नहीं कर सके थे। वहीं, दूसरी ओर इसकी बहन एरोहेड ने वहां पर नवंबर 2018 में दो फीमेल शावकों को जन्म दिया था। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि एमटी - 3 बाघ के साथ 14 महीने से रह रही है।
लापरवाह है बाघिन, शावकों की भी नहीं रखती चिंता
रणथंभौर टाइगर रिजर्व के एक्सपर्ट बताते हैं कि लाइटनिंग बाघिन सबसे अधिक साइटिंग देने वाली है। लेकिन, यह है अपने शावकों को लेकर अधिक लापरवाह है। ऐसे में इसके व्यवहार को लेकर भी अधिकारियों को चिंता रहती है। यह अपने शावकों की भी चिंता नहीं करती है।
एक्सपर्ट: दौलत सिंह शक्तावत का कहना
एमटी- 4 बाघिन पहले दो शावकों को जन्म दे चुकी है। यदि अभी इसने शावकों को जन्म दे दिया है तो मुकंदरा के लिए बहुत बड़ी खुशी की बात है। ऐसे में अब बाघों की बढ़ती हुई संख्या को देखते हुए विभाग को स्वैच्छिक विलेज रिलोकेशन के लिए भरसक प्रयास करना चाहिए। क्योंकि आने वाले 2 सालों में नए बाघ अपने लिए टेरिटरी बनाएंगे। ऐसे में यहां पर स्वैच्छिक विलेज रिलोकेशन हुआ तो नए बाघों को बेहतर हैबिटेट मिल सकेगा। रणथंभौर के लिए यही सबसे बड़ा प्लस पॉइंट था कि वहां 12 गांव स्वैच्छिक विलेज रिलोकेशन के लिए निकल गए थे और बाघों के लिए नेचुरल हैबिटेट हो गया था। इससे आज वहां बाघों की बेहतर अच्छी संख्या है।
मुकंदरा: स्वैच्छिक रिलोकेशन के लिए 82 लाख का बजट आया
टाइगर रिजर्व के लिए बड़ी खुशी की बात है कि लंबे समय से घाटी और लक्ष्मीपुरा गांव के स्वैच्छिक रिलोकेशन के लिए 82 लाख रुपए का बजट आ चुका है। विभागीय नियमानुसार संबंधित योग्यताधारी को इस बजट की राशि मिल सकेगी। मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आनंद मोहन और डीसीएफ टी मोहन राज के प्रयास से यह बजट लॉकडाउन के दौरान विभाग को मिला है। यह टाइगर रिजर्व के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी बताई जा रही हैं। घाटीगांव के स्वैच्छिक रिलोकेशन के लिए एक फैमिली है। ऐसे में यह फैमिली के लिए अच्छा अवसर है। जबकि वहां पर रहने वाले 14 परिवारों का स्वैच्छिक रिलोकेशन हो चुका है।
अब मशालपुरा के लिए 7 करोड़ बजट की प्लानिंग
भविष्य में घाटी के स्वैच्छिक रिलोकेशन के बाद अब मशालपुरा की तैयारियां चल रही है ।सर्वे संबंधी औपचारिकताएं अंतिम चरण में है। ऐसे में अब एमटी-4 के शावक होने पर यह एरिया उनके फ्री मूवमेंट के लिए बेहतर हो सकेगा। मशालपुरा में करीब 80 प्रतिशत से अधिक लोग स्वैच्छिक रिलोकेशन को तैयार है। ऐसे में यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्दी इस गांव के स्वैच्छिक रिलोकेशन के लिए भी बजट मिलने की उम्मीद है। रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आनंद मोहन ने बताया कि इस गांव के स्वैच्छिक रिलोकेशन के लिए करीब 5 से 7 करोड़ की प्लानिंग है। इसके जल्द प्रयास किए जाएंगे।
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