90 डिग्री एंगल पर पहाड़ी पर सीधी चढ़ाई और दुश्मन द्वारा लगातार की जा रही गोलियों की बौछार के बीच अपने आपको बचाते हुए चोटी पर तिरंगा फहराने का जज्बा ही था कि इतने भयानक मंजर के बीच भी 26 जुलाई को हमने दुश्मन के 15 सैनिकों को ढेर करते हुए विजय हासिल की। कारगिल युद्ध के संस्मरण सुनाते हुए तसीमों के रामौतार पुत्र रामसिंह ने बताया कि 10 दिन पहले भारतीय सेना के उच्चाधिकारियों ने आदेश दिया कि टाइगर हिल के पास वाली पोस्ट पर कब्जा किए दुश्मन सैनिकों को वहां से हटाना है।

इस पर 25 जुलाई की सुबह 4 बजे भारतीय सेना के 25 जवानों ने पहाड़ी पर चढ़ाई शुरू कर दी। इस बीच दुश्मन सैनिकों की ओर से लगातार गोलीबारी जारी रही। इस दौरान हमने भी जवाबी फायर किए और किसी तरह अपने आपको बचाते हुए लगभग 8 घंटे की चढ़ाई के बाद टाइगर हिल के पास वाली दुश्मन सैनिकों के कब्जे वाली भारतीय पोस्ट पर पहुंच गए और दुश्मन पर धावा बोल दिया। इस बीच हमारी टुकड़ी ने पोस्ट पर पीछे से पहुंचकर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान हिमाचल प्रदेश के सैनिक राकेश कुमार की गर्दन में गोली लगी और वे शहीद हो गए।

वहीं झुंझुनूं के भंवरसिंह देवड़ा और कानपुर के नागेंद्र गौतम भी गोलीबारी में शहीद हो गए। हमारे 5 साथी गोली लगने से गंभीर घायल हो गए। इसके बावजूद हमने अटैक जारी रखते हुए 50 से 60 ग्रेनेड फेंककर दुश्मन के बंकर व कैंप को तहस-नहस कर दिया। इस बीच 30 सैनिकों की एक और टुकड़ी हमारी मदद के लिए पहुंच गई। हमने पाकिस्तान के 9 सैनिकों को मार गिराया। अपने सैनिकों को मरता देख पाकिस्तानी सैनिक घबरा गए और अपनी जान बचाते हुए पोस्ट छोड़कर वहां से भाग निकले।

इस तरह भारतीय सैनिकों ने 26 जुलाई को उस पोस्ट पर तिरंगा फहरा दिया। इस पोस्ट को जीतने के बाद भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर हमला कर उसे भी दुश्मन के कब्जे से आजाद करा लिया। रामौतार ने बताया कि 90 डिग्री एंगल की पहाड़ी पर सीधी चढ़ाई और दुश्मन की गोलियों से अपने आपको बचाते हुए दुश्मन को मार भगाना बेहत ही चुनौतीभरा टास्क था, लेकिन देश प्रेम के जज्बे के सामने सारी चुनौतियां कमजोर पड़ गईं।



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3 companions lost in Galibari, hoisted 15 enemies tricolor
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