ये हैं गुरों का तालाब। गर्मी में अक्सर सूख जाता है। ऐसे में मछलियों और जलीय जीवों को बचाना मुश्किल हो जाता है। पंडित जीवराज श्रीमाली और उनकी टीम ने 2016 से 2018 तक तीन साल में गर्मियों में टैंकरों से तालाब में पानी सप्लाई किया और जलचर अपना जीवन बचा सके। ये स्थाई समाधान नहीं था। ऐसे में श्रीमाली और उनकी टीम ने कुछ अलग करने का सोचा।
राह निकली, ट्यूबवेल खोदा अब जलचरों से बढ़ी रौनक
पंडित जीवराज श्रीमाली ने बताया कि हर साल गर्मी में तालाब जब सूख जाता तो जलचरों को बचाना मुश्किल हो जाता था। आखिर टैंकर भी कब तक डलवाते? ऐसे में आइडिया आया कि समीप ही ट्यूबवेल खुदवा दिया जाए। जनवरी 2019 में यहां पर ट्यूबवेल खुदवाया, लेकिन पानी नहीं आया। बाद में रोकड़िया बालाजी मंदिर के पास खुदाई की तो पानी निकल आया। हमारी टीम खुश थी।

अब प्रतिदिन 50 हजार लीटर पानी इसमें लिफ्ट किया जाता है। नतीजा यह हुआ कि तालाब पर जलचरों की किलोल से यहां आने वाले लोगों को सुकून मिलता है। तालाब में मछलियां, कछुआ, जलीय पक्षियों की संख्या बढ़ रही है। पानी डालने का सिलसिला तब तक चलेगा जब तक बरसात से तालाब में पानी नहीं आ जाता। वर्तमान में तालाब के पास कई पौधे भी लगाए हैं। समय पर पानी मिलने से यह पनप भी रहे हैं।



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In order to save aquatic organisms in summer, tankers were put in the pond for 3 years, now 2 thousand years, tubewells lift 50 thousand liters of water daily
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