कोरोना संक्रमण के इस दौर में खानपुर क्षेत्र में गरीब किसानों से बड़ी ठगी की वारदात अंजाम दी गई। ठग गांव-गांव घूमे और 52 किसानों से 92 लाख रुपए के लहसुन की खरीद कर ली। बाकायदा किसानों को 15 दिनों में भुगतान होने की बात कहते हुए इसके चेक भी दिए, फिर ये लोग चंपत हो गए। किसानों को अपने साथ ठगी का पता तब चला, जब इनके दिए हुए चेक बाउंस हो गए।
अब स्थिति यह है कि किसान क्रेडिट कार्ड से लेकर साहूकारों का कर्ज किसान नहीं चुका पा रहे हैं। इधर, प्रशासन और पुलिस ने भी किसानों की बात सुनने के बजाय हाथ खड़े कर दिए हैं। 30 जून को ही प्रशासन और पुलिस को सूचना मिली, इसके बाद भी अब तक कार्रवाई की बात तो दूर, जांच तक नहीं हो पा रही है। किसान अब दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
दरअसल, इस साल किसानों ने लहसुन की बंपर पैदावार की, लेकिन लॉकडाउन लग गया तो लहसुन की बिक्री में काफी कमी आई। किसानों ने अपना माल स्टॉक करना शुरू कर दिया। इसी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने गांव-गांव जाकर महंगे दामों के लहसुन की खरीद की बात कर ली। किसी से 4800 रुपए प्रति क्विंटल तो किसी से 5300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से लहसुन की खरीद की। इस दौरान किसानों से 92 लाख रुपए के लहसुन खरीद लिए। अभी तक इन लहसुन का भुगतान नहीं हो पाया है।

इस तरह किसानों को लिया झांसे में
किसानों ने बताया कि करनवास निवासी व्यापारी सियाराम नागर, उसके साथी मरायता निवासी हुकमचंद पांचाल, देवेंद्र गुर्जर और दीपेंद्र गुर्जर कंवरपुरा मंड, बिलासरा, मालनवासा, करनवास, मरायता गांव गए। इन्होंने इन गांवों में किसानों से संपर्क किया और उनके लहसुन के बाजार दर से अधिक दाम लगा दिए। व्यापारी होने के चलते किसान भी इनके झांसे में आ गए। किसानों ने अपनी मेहनत का पूरा माल इनको दे दिया।

किसानों की पीड़ा : हमें लहसुन का एक रुपया भी नहीं मिला, हम तो बर्बाद हो गए
1 लाख 43 हजार का चेक दिया, बाउंस हो गया, अब फोन भी स्विच ऑफ आ रहा

बिलासरा निवासी किसान पूरनमल नागर ने बताया कि उनसे 46 कट्‌टे लहसुन खरीदा गया। 5300 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 1 लाख 43 हजार रुपए भुगतान देना था, इसका चेक भी दिया। जब बैंक में चेक लगाया तो वह बाउंस हो गया। अब व्यापारी का फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। हमें सहकारी ऋण चुकाना था, उसको भी नहीं चुका पा रहे हैं। हम तो बर्बाद हो गए

2 लाख 28 हजार रुपए का लहसुन बेचा, एक रुपया नहीं आ पाया, जमीन की रजिस्ट्री अटक गई
बिलासरा निवासी किसान रामचंद्र नागर ने बताया कि उससे 8400 कट्‌टे लहसुन 4800 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीद कर ली। 2 लाख 28 हजार रुपए का चेक दिया, लेकिन जब चेक को बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गया। व्यापारियों को फोन कर रहे हैं, लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ आ रहा है। ऐसे में अब जिस जमीन की खरीद की थी, उसकी रजिस्ट्री अटक चुकी है।

केवीसी भी जमा नहीं हो पा रही
मालनवासा गांव के किसान मुकेश नागर ने बताया कि उसने 80 हजार रुपए का लहसुन व्यापारियों को बेचा, लेकिन उसके पैसे अभी तक नहीं आ पाए। चेक दिया गया था, जो बाउंस हो चुका है। अब किसान क्रेडिट कार्ड के पैसे जमा करवाने हैं, वह भी जमा नहीं हो पा रहे।

कच्ची पर्ची पर हिसाब बनाकर दिया
कंवरपुरा के किसान मुकेश नागर ने बताया कि उनसे 50 हजार रुपए से अधिक का लहसुन खरीदा। कच्ची पर्ची पर इसका हिसाब बनाकर दिया, लेकिन जब पैसे देने की बारी आई तो इन व्यापारियों का कोई पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे में साहूकारों का कर्ज भी नहीं चुका पा रहे हैं।

15 दिन में पैसे देने की बात कही, अभी तक एक रुपया भी नहीं मिला
बिलासरा निवासी किसान बबलू भील का कहना है कि उन्हें 15 दिन में पैसे देने की बात कहकर लहसुन की खरीद कर ली गई। इसके बाद से ही व्यापारियों का मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है। जब उनके गांव ढूंढने गए तो वहां भी उनका पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे में लहसुन की मेहनत का एक पैसा नहीं मिल पाया, उल्टा नुकसान भुगतना पड़ रहा है।

जिम्मेदारों का यह है कहना
^ किसानों का ज्ञापन मेरे पास नहीं आ पाया है और न ही मुझे इनके प्रदर्शन की जानकारी है।
-प्रमोद कुमार सिंघव, एसडीएम, खानपुर
^मेरे पास किसान परिवाद देने आए थे, लेकिन मामला सारोला थाना क्षेत्र में होने के कारण मैंने उन्हें वहां भेज दिया।
कमलचंद मीणा, सीआई, खानपुर



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