भीलवाड़ा पुलिस द्वारा शिक्षा बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति की प्रदेशाध्यक्ष को कोरोना को लेकर नोटिस देकर पाबंद किए जाने की कार्रवाई का विरोध जताते हुए निजी शिक्षण संस्थान संघ ने राज्यपाल को ज्ञापन भेजा है।
संघ सचिव अनिल शर्मा की ओर से पुलिस द्वारा भेदभाव पूर्ण और असंवैधानिक कार्य किए जाने के तहत पुलिस महानिदेशक से जवाब-तलब कर प्रकरण में तत्काल उचित कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन के अनुसार प्रदेशाध्यक्ष को नोटिस जारी किया गया कि कोविड-10 महामारी में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के पालना एक लिखित नोटिस दिया किया है।
कोई भी आयोजन प्रतिबंधित है और चेताया कि अगर बिना किसी जिला प्रशासन की अनुमति के अगर कोई धरना प्रदर्शन किया तो हमारे विरुद्ध विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस तरह का नोटिस पूरी तरह यह दर्शाता है कि राज्य की पुलिस द्वारा भेदभाव किया जा रहा है, जिस दिन नोटिस दिया गया उसी दिन बिना प्रशासन की अनुमति के राज्यपाल भवन के सामने राज्य के विधायकों का धरना जारी था एवं 100 से अधिक लोग इस राजभवन के घेराव में शामिल थे।

यह कानून का स्पष्ट उल्लंघन है तथा उक्त धरने के बाद पुलिस द्वारा कोई भी कानूनी कार्रवाई पुलिस द्वारा नहीं की गई। पुलिस की कार्यशैली से यह जाहिर होता है कि कि राज्य में कानून व्यवस्था सिर्फ आम नागरिकों के लिए है बाकी विधायकों के लिए नहीं। इस संघर्ष समिति से 11 लाख शिक्षक और कर्मचारी जुड़े हुए हैं। जिनको शिक्षा विभाग के आदेशों के कारण पिछले पांच माह से वेतन नहीं मिला है और जिन्होंने कई वर्षों से राज्य में शिक्षा का योगदान दिया है।



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