कोरोना संक्रमण के कारण देश में लगे लॉकडाउन में मार्च से जून तक दिल्ली-मुंबई रेल लाइन स्थित गंगापुर सिटी खण्ड में रेल जनित हादसों की संख्या में कमी आई है। 2020 के मार्च से जून माह तक मात्र पांच जनों की ट्रेनों की चपेट में आने से मौत हुई। जबकि वर्ष 2018 व 2019 के मुकाबले में देखा जाए तो इसका आंकड़ा चौंकाने वाला है। 2018 में 28 जनो की जबकि 2019 मार्च से जून तक 21 जनों की मौत हुई थी।

हालांकि लॉकडाउन के वक्त सवारी गाड़ी नाममात्र की ही संचालित हो रही थी और यात्रियों की भी कमी होने से गाडिय़ों खाली चल रही थी लेकिन मालगाडिय़ों की संख्या आम दिनों के मुकाबले उन दिनों में ज्यादा थी।
लॉकडाउन से पहले पटरियों पर होने वाली मौतों का आंकड़ा डाराने वाला था।

गंगापुर खण्ड में आए दिन पटरियों पर मौत होती है तथा दर्जनों लोग घायल होते हैं। वर्ष 2019 में ट्रेन से कटकर 56 जनों ने अपनी जान गंवाई है। राजकीय रेलवे पुलिस के अनुसार इनमें से कई मौत तो ट्रेनों के पायदान पर बैठकर यात्रा करने वालों की हुई है। वहीं किसी की ट्रेन से गिरकर तो किसी की लाइन पार करते समय ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई।

पटरियों के दाेनों ओर फेंसिंग नहीं, आबादी क्षेत्र भी निकट

हादसे बढ़ने का प्रमुख कारण रेल लाइन के पास आबादी क्षेत्र का होना है। यहां लोगों की आमद रफ्त रहती है। साथ ही पटरियों के दोनों ओर फंेसिंग भी नहीं है। जानकारों का कहना है कि अगर लाइन के किनारे रेलवे प्रशासन फंेसिंग करा दे तो दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। रेलवे प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

रेलवे फाटक, तीन पुलिया, बी केबिन पर सबसे ज्यादा मौतें
गंगापुर में करौली, हिंडौन रेलवे फाटक, रेलवे तीन पुलिया व बी केबिन पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। करौली रेलवे फाटक पर ओवर ब्रिज नहीं है और लोग फाटक बंद होने के बावजूद पटरियां पार करते हैं। रेलवे तीन पुलिया में पानी भरा होने के कारण लोग रेलवे लाइन पार करते समय भी मौत हो जाती है। लोग रेलवे प्रशासन से कई बार रेलवे पुलिया के स्थान पर अंडरपास बनाने की मांग कर चुके हैं, इसके बावजूद रेलवे प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। क्योंकि बारिश होने पर पुलिया में पानी भर जाता है और आवागमन बंद हो जाता है।

लोगों की लापरवाही भी एक बड़ा कारण
ऐसा नहीं है कि इन दुर्घटनाओं के लिए रेलवे प्रशासन ही जिम्मेदार है, लोगों की लापरवाही भी एक बड़ा कारण है। यात्री एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए सीधे ही पटरियों को पार करते हैं जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। आरपीएफ का कहना है कि सीधे रेलवे लाइन पार करने पर 200 से लेकर 300 रुपए तक जुर्माना किया जाता है। यात्रियों से पटरियां पार करने के लिए मना किया जाता है फिर भी लोग फुट ओवर ब्रिज का उपयोग कम करते हैं।

ट्रेनों में गेट पर बैठने वाले यात्रियों को समझाती है जीआरपी
ट्रेनों में गेट पर बैठने वाले यात्रियों को समय-समय पर समझाइश जीआरपी करती है। लॉकडाउन में ट्रेनों व यात्रियों की संख्या कम होने के कारण मार्च से जून तक पांच जनों की ट्रेन से कटकर मौत हुई है।
-जगदीश सिंह, कार्यवाहक थाना प्रभारी, राजकीय रेलवे पुलिस गंगापुर सिटी



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Mobility decreased in lockdown, then the death toll in train accidents decreased by 5 times
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