पुलिस और रेलवे की तरह अब मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में भी बीट गाॅर्ड से लेकर रिजर्व का माॅनिटिरिंग स्टाफ वायरलेस हैंड सेंट पर कंट्राेल सर..., कैरिऑन सर..., राेजर सर, ओवर सर.. कुछ इस तरह की लैंग्वेज वाॅकी-टाॅकी से सुनाई देने लगी हैं। मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 12 दिन में बाघाें की माैत और शावकाें के लापता हाेने के बाद अब माॅनिटिरिंग सिस्टम सुधारने के लिए मजबूत वायरलेस सिस्टम की फिर से शुरूआत की हैं। पहले चरण में बाघ-बाघिन के मूवमेेंट वाले एरिया दरा और गागराेन रेंज में इसकी शुरूआत कर दी हैं।
बीट गार्ड के पास वायरलेस सेट यानी वाॅकी-टाॅकी सिस्टम दे दिए हैं। अब रिजर्व में जहां माेबाइल के नेटवर्क नहीं आने से माॅनिटिरिंग और ट्रेकिंग सूचना जल्दी से भिजवाने में प्राेब्लम हाेती थी। अब यह आसान हाेने लगेगी। रिजर्व के अधिकारी इस कार्य में जुटे हुए है। हालांकि रिजर्व में धीरे धीरे सिस्टम के सुधार हाेने से अब फिर से माॅनिटिरिंग काे मजबूती देने के लिए नई उम्मीद बंधी है। रिजर्व एरिया में वायरलेस सिस्टम गागराेन से दरा तक कार्य करने लगा हैं। इससे माॅनिटिरिंग से लेकर सूचनाओं के आदान-प्रदान हाेने लगा हैं। दरा और गागराेन रेंज में बीट गार्ड के पास अब वायरलेस हैंडसेट हैं।
पहले सिस्टम सही नहीं था, अब इसमें सुधार की उम्मीद है
मुकंदरा रिजर्व में पहले वायरलेस सिस्टम प्राॅपर नहीं था। अब इसमेें दरा और गागराेन में सुधार किया है। अब इसकी रेंज में भी सुधार कर बढ़ाई हैं। करीब 50 किमी से अधिक तक फ्रिक्वेंसी आने लगी है। इससे कम्युनिकेशन सिस्टम बेहतर दिखने लगा है। जहां नेटवर्क नहीं आता है। वहां के लिए रिपीटर सिस्टम यानी संबंधित बीट गार्ड की सूचना काे दूसरे तक पहुंचाने के लिए कार्य की उम्मीद है। इसके लिए रिपीटर सिस्टम उपयाेगी साबित हाेगा। सावनभादाै डेम और कनवास एरिया में भी रिपीटर लगना जरूरी है।
इससे की रिजर्व एरिया में मवेशियाें की चराई पर राेकथाम से लेकर रिजर्व एरिया में पूरी चाैकसी तक हाे सकेगी। किसी भी तरह की घटना पर तत्काल कार्रवाई हाे सकेगी, जबकि माेबाइल में नेटवर्क नहीं आने से काफी परेशानी हाेती है। अब यह सिस्टम मजबूत हुआ ताे मुकंदरा काे माॅनिटिरिंग में काफी राहत मिल सकेगी।
^इस संबंध में डीसीएफ काे निर्देश दिए हैं। वायरलेस सिस्टम काे अभी दरा और गागराेन रेंज में सुव्यवस्थित करवा दिया है। सभी बीट गार्ड के पास वायरलेस हैंड सेट है। जाे पूरी तरह वर्किंग कर रहे हैं। इसके बाद अन्य रेंज में भी नेटवर्क काे मजबूत किया जाएगा।
- सेडूराम यादव, फील्ड डायरेक्टर मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व एवं सीएफ
रणथंभाैर टाइगर रिजर्व में है मजबूत वायरलेस सिस्टम; वहां के उदाहरण से समझिए कैसे की जाती है टाइगर की प्रभावी मॉनिटरिंग
रणथंभाैर में बाघाें की माॅनिटिरिंग के लिए मजबूत सिस्टम है। यह वहां का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट हैं। वायरलेस सिस्टम से लेकर वाॅकी-टाॅकी सिस्टम में अपडेट, हैंडसेट, बैट्रियां हर बीटगार्ड के पास है। वहां फील्ड डायरेक्टर कार्यालय में वायरलेस का कंट्राेलरूम बना है। इसके लिए वहां तीन स्टाफ आठ-आठ घंटे की ड्यूटी, एक रिलीवर है। हर बीटगार्ड का हर दिन अपनी बीट की स्थिति और हर तरह का अपडेट कंट्रोल रूम को बताता है। इसके लिए वहां पर रजिस्टर मैंटेन है।
हर दिन डीसीएफ उस रजिस्टर काे जांचता है। इससे उस एरिया में बाघ की स्थिति, लाेकेशन किसी भी तरह की घटना से लेकर बीट स्टाफ का वर्किंग सहित अन्य जानकारियां मिलती है। साथ ही जिस बीट एरिया में बात नहीं हाेती है ताे इसके लिए रिपीटर सुविधा भी है। इसके माध्यम से सभी बीटगार्ड से लेकर अधिकारी काेडवर्ड में बात करते हैं। इसमें बाघ की साइटिंग से लेकर अन्य विभागीय गाेपनीय जानकारियां अधिकारियाें काे तत्काल मिल जाती है। सबसे बड़ी बात है कि यहां वायरलेस सैट पर पुलिस की तरह मजबूत स्थिति है कि अधिकारी दफ्तर में बैठै ही बीटगार्ड की लाेकेशन से लेकर बात तक कर सकते हैं।
यही नहीं अधिकारियाें की गाड़ियाें में वायरलेस सेट शाेपीस न हाेकर वर्किंग वाले हैं। इससे की बीटगार्ड सीधे अफसर से भी बात कर सकते हैं। इनकी फ्रिक्वेंसी भी अच्छी है। साथ ही वहां पर बीटगार्ड जंगल की भाषा में अपने मैसेज एक दूसरे से शेयर करते हैं। वहां के स्टाफ का कहना है कि वायरलेस सिस्टम से हमारी ड्यूटी आसान हाे गई हैं। यह बहुत बेहतर है। साथ ही यह हमारे रेगुलर सिस्टम में शामिल है।
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