बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा महोत्सव इतिहास में पहली बार नहीं मनाया जाएगा। नगर निगम प्रशासन की और से हर साल आयोजित किए जाने वाले दशहरा महोत्सव पर इस साल काेराेना महामारी की छाया नजर अा रही है। 31 अक्टूबर तक सभी प्रकार के धार्मिक आयोजनों पर राेक हाेने के कारण निगम प्रशासन ने इस साल दशहरा महोत्सव नहीं मनाने का निर्णय लिया है।
इस साल पटेल मैदान में आयोजित हाेने वाला रावण दहन का कार्यक्रम भी नहीं हाेगा। इतिहास में यह पहला माैका हाेगा जब पटेल मैदान में रावण, कुंभकरण या मेघनाथ के पुतले नहीं मनाए जाएंगे। हर साल रावण का अठाहस, आंखाें से चिंगारी बरसाने, तलवार घूमाने सहित वहां आकर्षक आतिशबाजी देखने के लिए लाेगाें का हुजूम जमा हाेता है।
निगम की और से आयोजित हाेने वाले दशहरा महोत्सव पर हर साल 50 लाख तक की राशि खर्च हाेती है, लेकिन काेराेना काे लेकर राज्य सरकार की और से 31 अक्टूबर तक सभी प्रकार के धार्मिक आयोजनों पर राेक लगाए जाने और धारा 144 के आदेशों के चलते निगम प्रशासन ने इस बार ठेका भी जारी नहीं किया है।
ना डांडिया हाेंगे ना रामजी की सवारी निकलेगी
हर साल दशहरा महोत्सव के मौके पर शारदीय नवरात्रा के पहले दिन मां दुर्गा के सभी रुपाें की सवारी निकाली जाती है। पटेल मैदान में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित हाेती है। शाम काे नाै दिन तक गरबा रास कार्यक्रम हाेता है। वहीं जवाहर रंगमंच या नगर निगम परिसर में रामलीला का मंचन किया जाता है। उत्तर प्रदेश के कलाकार इसमें शामिल हाेते हैं। उतार घसेटी से भगवान राम की सवारी निकाली जाती है। पटेल मैदान में भगवान राम और रावण के युद्ध से पहले लंका दहन हाेता है। लेकिन इस साल इसमें से किसी भी प्रकार के आयोजन नहीं किए जाएंगे।
नगरा और रावण की बगीची में भी नहीं हाेंगे आयाेजन: हर साल नगरा और रावण की बगीची में भी दशहरा महोत्सव पर कई आयोजन हाेते हैं, लेकिन इस साल राेक हाेने के कारण जिला प्रशासन यहां पर भी आयोजन की अनुमति नहीं देगा।
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