पंचायत चुनावाें की घाेषणा के साथ ही जिले में छह माह बाद फिर से राजनीतिक हलचल का दाैर शुरू हाे गया है। पार्टियाें ने उम्मीदवार काे लेकर मंथन शुरू कर दिया है। कांग्रेस के पास गुटबाजी का संकट है। जिला स्तर पर कार्यकारिणी भंग हाेने से कार्यकर्ता, पदाधिकारी और नेता अलग-अलग खेमे में बटे हुए है। काेई भी सेनापति नहीं हाेने के कारण कांग्रेस की ओर से एकता की कमी दिख रही है।

वहीं भाजपा के पास कार्यकारिणी के साथ प्रभारियाें की लम्बी फाैज है। फिर भी यहां पर जिला प्रमुख के लिए काेई महिला का चर्चित चेहरा नहीं मिल रहा है। भाजपा में यहां पर नए युवा चेहरे और पुरानी महिला नेता के चयन काे लेकर असमंजस की स्थिति चल रही है।

जिला प्रमुख के लिए कांग्रेस के प्रमुख दावेदार

1. निमिषा भगाेरा: निर्वतमान सीमलवाड़ा प्रधान हाेने के साथ ही सर्वमान्य चेहरे के रूप में उभरी हुई है। पूर्व सांसद ताराचंद भगाेरा के भतीजा बहु हाेने के कारण राजनीतिक पहुंची भी राजस्थान और दिल्ली तक बनी है। इसके अलावा सीमलवाड़ा, झाैथरी में एक्टिव हाेने से कांग्रेस में कद बढ़ा है। वकालत की पढ़ाई करने के बाद राजनीतिक कॅरियर में प्रधान का चुनाव जीता है। इसलिए लम्बी पारी काे देखते हुए कांग्रेस जिला प्रमुख का दांव खेल सकती है।

2. मंजुला राेत: कांग्रेस से लगातार तीन बार प्रधान रह चुकी है। यह भी कांग्रेस में सर्वमान्य चेहरा और लाेगाें के बीच अच्छी छवि है। पहले दाे बार डूंगरपुर प्रधान रहने के साथ ही अभी झाैथरी प्रधान रही है। उन्हाेंने चाैरासी से विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। जहां पर उन्हाेंने अच्छे वाेट प्राप्त किए थे। वाे भी जिला प्रमुख की लाइन में है।

3. उर्मिला अहारी: कांग्रेस में लम्बे समय से सेवा दल से जुडी हुई है। पूर्व में प्रदेश कांग्रेस महिला महासचिव के पद पर भी थी। सवगढ़ सरपंच के साथ ही लम्बी राजनीतिक अनुभव के कारण जिला प्रमुख के दावेदाराें में से एक है।

4 इसके अलावा कांग्रेस में मिनाक्षी परमार, पूर्व प्रधान रतनदेवी परमार, बिछीवाड़ा प्रधान राधादेवी घाटिया, अनिता डामाेर, सागवाड़ा पूर्व प्रधान आशा डेंडाेर प्रयासरत है।
कमजाेरी: गुटबाजी, भीतरगात और नेतृत्व का अभाव है।

भाजपा के प्रमुख दावेदार जिन पर लग सकता है दांव

1. सुशीला भील: भाजपा में महिला राजनीतिक नेता के ताैर पर बड़ी पहचान है। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में सुशीला भील की छवि अच्छी है। नगर पालिका डूंगरपुर में दाे बार चेयरमैन रही है। एक बार विधायक का चुनाव भी लड़ा है। प्रशासनिक पकड़ के साथ ही लाेगाें के बीच सामजस्य बैठाने में कुशल है।

2. सूर्या अहारी: भाजपा की गलियाकाेट से निर्वतमान प्रधान है। उनकी सागवाड़ा, गलियाकाेट, चिखली में अच्छी पकड़ है। इसके अलावा भाजपा में भी अच्छी राजनीतिक कद रखती है। भाजपा में भले बड़ा राजनीतिक पद नहीं मिला है परंतु सर्वमान्य चेहरा है।

3. रेखा राेत भाजपा सागवाड़ा का चेहरा है। यहां पर सांसद कनकमल कटारा के अलावा भाजपा के अन्य नेताओं का सहयाेग है। राजनीतिक लम्बी पारी की उम्मीद से भाजपा माैका दे सकती है। इसके अलावा भाजपा के पास बिलड़ी से चंद्रलेखा कलासुआ, कनबा पू्र्व सरपंच मणिदेवी, गुदलारा जिला परिषद सदस्य भगवतीदेवी भी इस जिला प्रमुख की दाैड़ में शामिल है।

कमजाेरी: काेई चर्चित चेहरा नहीं है। इसके अलावा अन्य जिला परिषद सीटाें काे लेकर सही राजनीतिक अनुभव वाले नेताओं की कमी है। विधायकों की संख्या भी सीमित होने के कारण पकड़ बनाना चुनौती।

दाेनाे पार्टी युवा और शिक्षित उम्मीदवार की तलाश में
जिला प्रमुख पद के लिए जिला परिषद की 27 सीटाें में बहुमत हासिल करना जरूरी है। निर्वतमान जिला प्रमुख माधवलाल वरहात भाजपा से जुड़े हुए है। भाजपा के लिए पुन: जिला प्रमुख बनाना अपनी ग्रामीणा साख काे मजबूत करना है। वहीं कांग्रेस के लिए अपनी गुटबाजी से उभर कर आगामी चुनाव काे देखते हुए जिला प्रमुख की सीट हासिल करना प्रतिष्ठा का सवाल है।

यहां पर 27 सीटाें में एससी वर्ग के लिए पास एक और सामान्य वर्ग के पास 6 सीटें है। इसके अलावा 20 सीटे अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए रिजर्व कर रखी है। इसमें सबसे बडा चैलेज आदिवासी वाेटर के मत प्राप्त करना है। आदिवासी वाेटर काे आकर्षित करने के लिए तीनाें पार्टी पूरा जाेर लगाएगी। दाेनाे पार्टी जिला प्रमुख के साथ ही अन्य पदाें पर अनुभवी के साथ नए उम्मीदवार काे उतारकर सभी काे चाैका भी सकती है। कांग्रेस के पास चर्चित चेहरे का दांव है ताे भाजपा के पास चाैंका देने वाले चेहरे भी वापसी कर सकते है।



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