फतहसागर और पीछाेला झील के आसपास नियंत्रित निर्माण निषेध क्षेत्र में राेक के बावजूद नए निर्माणाें काे राेकने के लिए हाल ही में बनाई निगरानी कमेटी से कलेक्टर चेतन देवड़ा ने हर महीने रिपाेर्ट लेना तय किया है। इसके लिए हर 15 दिन में बैठक हाेगी। कलेक्टर देवड़ा ने बताया कि झीलाें के आसपास राेक के बावजूद नए पक्के निर्माण हाे रहे हैं। इसमें व्यवसायिक उपयाेग के लिए हाेने वाले निर्माण भी शामिल हैं।
इसकाे लेकर 28 अक्टूबर काे अधिकारियाें की निगरानी कमेटी बनाई गई। इस कमेटी से अब हर महीने यह रिपाेर्ट ली जाएगी कि झीलाें के आसपास काेई भी नया निर्माण नहीं चल रहा है। यदि कहीं निर्माण हाेता पाया गया ताे निगरानी कमेटी में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। इस कमेटी में यूआईटी के भूमि अवाप्ति अधिकारी, एसई, नगर निगम के एसई, गिर्वा-यूआईटी तहसीलदार और नगर निगम-यूआईटी के एईएन काे शामिल किया है।
शिकायत : फतहसागर किनारे तन गई दाे मंजिला इमारत
फतहसागर किनारे राजीव गांधी पार्क से कुछ ही दूर लाॅकडाउन में माैका देखकर चट्टानाें काे काटा गया और अब वहां दाे मंजिला भवन का स्ट्रक्चर खड़ा हाे चुका है। जागरूक झील प्रेमियाें ने कलेक्टर से इसकी शिकायत भी की, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया है। अधिकारियाें के पंचायतीराज चुनावी कार्य में व्यस्तता की आड़ में इस निर्माणाधीन भवन का काम फिर से शुरू हाेने का अंदेशा जताया जा रहा है। उधर, चांदपाेल-नागानगरी क्षेत्र में भी पीछाेला के आसपास लाेग व्यावसायिक उद्देश्य से रुक-रुक काम कर रहे हैं।
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