हाईकोर्ट ने एसएमएस अस्पताल सहित प्रदेश के अन्य अस्पतालों में अव्यवस्थाओं के मामले में राज्य के चिकित्सा सचिव व एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक को जवाब देने के लिए कहा है। अदालत ने इनसे पूछा है कि अस्पतालों के खराब हालातों में किस तरह सुधार किया जा सकता है। सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस एसके शर्मा की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश पब्लिक अंगेस्ट करप्शन संस्था की याचिका पर दिया।

अधिवक्ता पीसी भंडारी व टीएन शर्मा ने बताया कि प्रदेश के सबसे बडे सरकारी अस्पताल एसएमएस में पूरे प्रदेश से मरीजों को रेफर किया जाता है, लेकिन सबसे बड़े इस अस्पताल की ही दयनीय स्थिति है। सालाना रख-रखाव पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद अस्पताल के आईसीयू में चूहे घूम रहे हैं। वहीं प्रदेश के छोटे शहरों के सरकारी अस्पतालों के हालात और भी विकट हैं।

गंगापुर सिटी, झुंझुनूं जैसे शहरों में महामारी के करीब दस महीने बाद भी न तो वेंटीलेटर है और न ही उचित संसाधन है। इस कारण मरीजों को अधिक खर्च कर इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। याचिका में कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में उचित संसाधन मुहैया कराए जाए ताकि मरीजों का इलाज सही तरह से हो सके। वहीं अस्पतालों के मौजूदा हालातों की जांच के लिए हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाए।



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High court seeks response from government on dislocations in government hospitals
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