प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र योजना के तहत मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए दवा दुकान जनाना अस्पताल में तो खोल दी गई है, लेकिन आरबीएम अस्पताल में नहीं खोली गई है। इसका नुकसान मरीजों को हो रहा है। 600 की ओपीडी वाले जनाना अस्पताल में जेनरिक दवाएं 60 से 70 प्रतिशत छूट पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं 1200 मरीजों की ओपीडी वाले आरबीएम अस्पताल में मरीजों को बाजार की दवाएं महंगी कीमत पर खरीदनी पड़ रही हैं।
दरअसल, योजना के तहत सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली जैनेरिक दवाइयों के दाम बाजार मूल्य से कम रखे गए हैं। जैनेरिक दवाइयां ब्रांडेड या फार्मा की दवाइयों के मुकाबले सस्ती होती हैं, जबकि असरदार उनके बराबर ही होती हैं। इनकी क्वालिटी किसी प्रकार कम नहीं है।
योजना में आमजन को बाजार से 60 से 70 प्रतिशत कम कीमत पर दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। जन औषधि केन्द्र शुरू करने के लिए अस्पताल में जगह देनी होती है, उसके अलावा अस्पताल प्रशासन पर कोई न खर्चा करना होता है और न ही किसी प्रकार का उसको किराया दिया जाता है।
दवा दुकानदार को भी निर्धारित जगह से जन औषधि की सप्लाई करने वाली फर्म से सीधे खरीदकर दवाएं भेजी जाती हैं। जिन पर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना लिखा होता है, जो डब्ल्यूएचओ से सर्टिफाइड होने की मोहर भी लगी होती है।
ये दवाएं हाल ही में जनाना अस्पताल में खोले गए प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केन्द्र पर उपलब्ध कराई गई हैं, जबकि आरबीएम अस्पताल से मरीजों को दवाएं खरीदने के लिए जनाना अस्पताल 3 किलोमीटर दूर आना पड़ता है या फिर महंगी दर पर बाजार से लेनी पड़ रही हैं।
उपभोक्ता भंडार को लिखा पत्र: पीएमओ
^जन औषधि केन्द्र के लिए कमेटी बनी है, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। यह दवा की दुकान आरएमएस या एनजीओ या उपभोक्ता भंडार से चलायी जा सकता है। हाल ही में 29 दिसंबर को पत्र लिखा है, जबाव आने पर आरबीएम में भी खोली जाएगी। इस व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारी डा. प्रणव गुप्ता को बनाया गया है।
डा. नवदीप सैनी, पीएमओ, आरबीएम अस्पताल
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