बयाना व रूपवास तहसील इलाके में स्थित सैंड स्टोन की खानों को पिछले लंबे समय से पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) नहीं मिलने से पत्थर उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। खानों से पत्थर निकासी नहीं होने से जहां खान मालिक परेशान हैं वहीं, बयाना के रीको एरिया स्थित स्टोन कटिंग इकाई संचालक व्यापारी भी खासे चिंतित हैं। समस्या से परेशान रीको व्यापारियों ने शनिवार को कस्बे के डाक बंगला परिसर में सांसद रंजीता कोली से मुलाकात की।

व्यापारियों ने सांसद कोली को बताया कि बयाना व रूपवास इलाके में सेंड स्टोन की 44 खदानें हैं। लेकिन काफी समय से इंतजार के बावजूद इन खदानों को एनवायरमेंट क्लीयरेंस (ईसी) नहीं मिल पा रही है। जिससे यह खानें पूरी तरह से बंद पड़ी हुई हैं। पत्थर निकासी नहीं होने से रीको एरिया में करीब 300 करोड़ की लागत से लगीं स्टोन कटिंग इकाइयां ठप पड़ी है। कटिंग के लिए पत्थर नहीं आने से व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। यहां तक की बिजली का बिल भी भरना संभव नहीं हो पा रहा है तथा इकाई लगाने के लिए बैंक से लिए गए लोन की किश्तें भी जमा नहीं हो पा रही हैं।

अगर यही हालात रहे तो जल्द ही रीको एरिया पर लॉक लग सकता है। इस पर सांसद कोली ने व्यापारियों को बताया कि व्यापारियों की समस्या को देखते हुए उन्होंने पहले भी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से पत्र लिखकर इलाके में स्थित सभी 44 पत्थर खानों को जल्दी पर्यावरण स्वीकृति दिए जाने की मांग की थी। सांसद ने भरोसा दिलाया कि वे अब व्यक्तिगत रूप से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री व सीएम गहलोत से मिलकर व्यापारियों की समस्या से अवगत कराएंगी और ईसी जारी करने के लिए गठित सिया कमेटी से लंबित फाइलों का निस्तारण कराएंगी।

उन्होंने व्यापारियों को आश्वासन दिया कि इस मामले में वे पूरी तरह से उनके साथ हैं और इलाके के पत्थर उद्योग को पहले की तरह बहाल करने के लिए पूरी कोशिश करेंगी। सांसद ने बताया कि वन्य जीव अभ्यारण से 25 मीटर की दूरी के कानून में भी संशोधन किया जा चुका है। बैठक में रीको व्यापारी प्रमोद जैन, अशोक गर्ग, धर्म सिंह चौधरी, मुकेश सिंघल, नरेश बारैठा, गोविंद बिहारी शर्मा, गिरीश गर्ग आदि मौजूद रहे।

अवैध खनन पर रोक से भी पड़ा असर
गौरतलब है कि बयाना-रूपवास इलाके में 44 खदानें हैं लेकिन पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने से यह खदाने पूरी तरह से बंद पड़ी हुई हैं। पहले अवैध खनन भी हो रहा था। पिछले कई महीनों से सरकार व प्रशासन ने अवैध खनन पर शिकंजा कस रखा है। इससे इलाके का पत्थर उद्योग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। जिससे व्यापारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने के पीछे बांध बारैठा वन्य जीव अभ्यारण को मुख्य रोड़ा बताया जा रहा है।

अभ्यारण क्षेत्र में खनन अनुमत नहीं होने से दिक्कतें आ रहीं हैं। हालांकि यह अलग बात है कि इस वन्य जीव अभ्यारण में वर्तमान में ऐसे कोई वन्यजीव भी नहीं है और ना ही सरकार ने इलाके को अभ्यारण घोषित करने के बाद इसके विकास को लेकर कोई सुध ली है। उधर, इलाके के सैंड स्टोन का उपयोग अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर में किया जाना है। पत्थर खनन पर रोक के कारण मंदिर निर्माण के लिए भी सैंड स्टोन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।



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300 million stone cutting units stalled, district's stone industry in crisis
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