( शिवांग चतुर्वेदी )कोविड डेडीकेटेड अस्पतालों में कार्यरत स्वास्थ कर्मी (हैल्थ वर्कर्स) जान जोखिम में डालकर दिन-रात मरीजों की सेवा कर रहे हैं। इन्हीं हैल्थ वर्कर्स से रेलवे ने खाने के पैसे वसूलने का आदेश जारी कर दिया है। खाना-खाने वाले प्रत्येक हैल्थ वर्कर से 140 रुपए वसूले जाएंगे और यह राशि उनके वेतन से काटी जाएगी। कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद रेलवे बोर्ड ने खाना निशुल्क उपलब्ध करवाने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन आदेश नहीं निकाले हैं। गौरतलब है कि एसएमएस सहित किसी भी कोविड डेडीकेटेड अस्पताल में कार्यरत चिकित्साकर्मियों को स्टे और खाना निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
12 मई को आदेश जारी होने के बाद विवाद
हसनपुरा स्थित केंद्रीय रेलवे अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डा.एमएल चौधरी ने 12 मई को आदेश जारी कर दिया गया। इसमें रेलवे के अस्पतालों में क्वारेंटाइन और कोविड ड्यूटी में लगे चिकित्सा कर्मियों से खाने का भुगतान लिया जाएगा। इसके तहत प्रति व्यक्ति 140 रुपए वसूल किए जाएंगे। कर्मचारियों से इसका भुगतान नगद न लेकर वेतन में से काटा जाएगा। रेलवे के डिप्टी सीपीओ आरके मीना ने जैसे ही चारों मंडलों एवं कारखानों के प्रमुखों को यह पत्र जारी कर पालना के निर्देश दिए, वैसे ही मामला सामने आ गया।
यूनियन बोले...आदेश वापिस लिया जाए
हैल्थ वर्कर्स के खाने से जुड़ा यह मामला जैसे ट्रेड यूनियन एनडब्लयूआरईयू और यूपीआरएमएस तक पहुंचा, उन्होंने विरोध दर्ज कराया। यूनियन के महामंत्री मुकेश माथुर और मजदूर संघ के महामंत्री विनोद मेहता ने फेडरेशन को पत्र लिखकर रेलवे बोर्ड से कोविड में ड्यूटी कर रहे हैल्थ वर्कर्स को खाना निशुल्क उपलब्ध कराने की मांग की है।
रेलवे बोर्ड से विचार का अनुरोध किया है
केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के मुताबिक ही निर्णय लिया गया है। हालांकि हमने रेलवे बोर्ड को भी इस निर्णय पर पुन विचार करने का आग्रह किया है। आदेश आने पर कर्मचारियों को खाने के पैसे लौटा देंगे। -आनंद प्रकाश, जीएम उपरे
हॉस्पिटल एमडी एमएल चौधरी से प्राप्त जानकारी के अनुसार हैल्थ वर्कर्स लिए खाने की दर न्यूनतम रखी गई है। फिर भी रेलवे बोर्ड से निर्देश आते ही खाने का पैसा वापिस कर दिया जाएगा। - अभय शर्मा, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे
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