वन विभाग ने दुर्लभ प्रजाति के घायल पक्षी इंडियन ग्रे हॉर्नबिल का रेस्क्यू किया। खंडेला के बामनवास में यह पक्षी घायल मिला। अक्सर ये पक्षी पूर्वी भारत में पाया जाता है। इंडियन ग्रे हॉर्नबिल (वैज्ञानिक नाम ओसीसेरस बाईरोस्ट्रिस) मध्यम आकार के स्लेटी रंग का पक्षी होता है जो सामान्यतया लंबे वृक्षों पर निवास करता है तथा केवल भोजन व घोंसला बनाने के लिए मिट्टी के टुकड़े आदि लेने नीचे आता है।
रेंज ऑफिसर देवेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि यह पारिस्थितिकी तंत्र में बीज प्रसारक के रूप में अहम भूमिका निभाता है। बरगद, गूलर जैसे वृक्ष प्रजातियों के बीजो के फैलाव के लिए ये पक्षी अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। इस पक्षी की रोचक बात ये है कि प्रजनन काल में मादा पक्षी खोखले तने में अपने मल तथा गीले कीचड़-मिट्टी आदि से घोंसला बनाती है, जिसे आगे से बंद कर खुद इस घोंसले में बंद हो जाती है। इस घोंसले में केवल एक पतला दरारनुमा द्वार छोड़ा जाता है, जिसके द्वारा नर पक्षी अंदर बंद मादा को भोजन उपलब्ध कराता है।
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