कोरोना महामारी की रोकथाम की दृष्टि से जिले में घोषित लॉकडाउन का असर अदालतों पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। पिछले सवा दो माह से जिले के न्यायालय परिसर के अधिकांश प्रवेश द्वारों और वहां स्थित अधिकांश अदालतों पर ताले लटके हुए हैं। वहीं अधिवक्ताओं और परिवादियों के अदालतों में आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। लॉकडाउन के दौरान इतिहास में पहली बाद अदालतों को रोस्टर प्रणाली से चलाया जा रहा है। न्यायालयों में ई-मेल, व्हाट्सएप के जरिए परिवाद दर्ज किए जा रहे हैं, वहीं न्यायाधीशों द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए ही सुनवाई की जा रही और अधिवक्ता पैरवी कर रहे हैं। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष माधोसिंह मदेरणा ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान सवा दो माह की अवधि में जिले के न्यायालयों में विभिन्न प्रकृति के 870 नए प्रकरण दर्ज हुए हैं। जिनमें 500 प्रकरण जमानत प्रार्थना पत्र, 150 सुपुर्दगी प्रार्थना पत्र तथा 220 अन्य प्रकरण दर्ज हुए हैं।

इधर विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किए गए लीगल एड डिफेंस काउंसलिंग सिस्टम द्वारा लॉक डाउन की अवधि के दौरान 251 लोगों को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राजेंद्र चौधरी ने बताया कि कार्य व्यवस्था में लगाए गए अधिवक्ताओं द्वारा लॉक डाउन अवधि के दौरान 137 मामलों में बेल व रिमांड अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। इसी तरह जेलों में निरुद्ध कैदियों की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 के तहत 55 कैदियों के व धारा 439 के तहत 38 कैदियों के जमानत आवेदन भरकर न्यायालयों में पैरवी की है। तथा जेलों में निरुद्ध 25 कैदियों को जमानत का लाभ दिलवाया गया है। इसी प्रकार पोक्सो न्यायालयों में तीन अपील प्रस्तुत की हैं। तीन प्रकरणों में सुपुर्दगी पर वाहन रिलीज करवाए गए हैं। इसी प्रकार किशोर न्याय बोर्ड में 9 इनमेट्स की ओर से जमानत आवेदन प्रस्तुत किए गए हैं।



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