दो साल पहले एक युवक ने युवती से शादी होने का दावा किया था। जब वह इस गुहार को लेकर हाईकोर्ट पहुंचा तो युवती ने विवाह से इनकार कर दिया था। इस पर युवक को 10 हजार की कॉस्ट चुकानी पड़ी थी। दो साल के इंतजार के बाद जब हाल ही में फेसबुक पर युवती से फिर चैटिंग हुई तो उसने विवाह कबूल लिया।
उम्मीद में युवक ने फिर याचिका दायर की और कॉस्ट के रूप में 2 लाख रुपए भी जमा करवाए। गुुरुवार को युवती कोर्ट के समक्ष पेश हुई। युवती ने विवाह को स्वीकार करने के साथ ही याचिकाकर्ता के साथ जाने की इच्छा भी जताई। हालांकि पिछली बार जांच अधिकारी ने कहा था कि युवती ने विवाह होने के तथ्य से इनकार किया है।
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता अंगद ने दो साल पहले बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कोर्ट को बताया था कि उसने एक युवती से गाजियाबाद में आर्य समाज रीति से विवाह किया था। उसे उसके पिता ने बंधक बनाकर रखा है। इस पर कोर्ट ने युवती को बुलाकर पूछा तो उसने विवाह से इनकार कर दिया था।
ऐसे में कोर्ट ने 20 अप्रैल 18 को याचिका को खारिज करते हुए युवक से बतौर कॉस्ट 10 हजार रु. विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के आदेश दिए थे। युवक इस बार फिर याचिका दायर की तो कोर्ट ने 2 लाख रु. जमा कराने के आदेश दिए थे।
पिता के साथ आई थी, युवक के साथ जाने की इच्छा जताई
गुुरुवार को युवती अपने पिता के साथ कोर्ट में पेश हुई। जस्टिस संदीप मेहता व कुमारी प्रभा शर्मा की खंडपीठ ने बंद कमरे में (इन कैमरा) युवती से बातचीत की तो उसने याचिकाकर्ता से उसकी मर्जी से विवाह होना स्वीकार किया। युवती ने युवक के साथ जाने की इच्छा भी जताई। कोर्ट ने कहा कि युवती बालिग और शिक्षित है।
उसके पास बीए व बीबीए की डिग्री है। कोर्ट ने युवती के बयानों के आधार पर उसे उसके पति के साथ जाने की अनुमति दी। जांच अधिकारी को निर्देश दिए कि युवती को उसकी बताई जगह पर ले जाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करें। कोर्ट ने युवक द्वारा जमा करवाए गए 2 लाख रु. भी उसे लौटाने के निर्देश दिए।
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