नगर निगम की बिजली शाखा द्वारा जेडीए की 22 हजार लाइटे हैंडओवर करने से सरकार को हर माह 30 लाख की चपत लगने की मामले की नया मोड़ आ गया है। निगम की सतर्कता शाखा ने दस दिन में दो पेज की रिपोर्ट पढ़कर टिप्पणी करने के बजाए कमेटी द्वारा तैयार गोपनीय रिपोर्ट को वायरल कर दिया है। हैरानी की बात यह कि रिपोर्ट उन अफसरों के पास वाट्सएप की है, जो लाइटों को हैंडओवर करने के जिम्मेदार हैं।
जबकि कमेटी में शामिल अन्य निगम के अफसर मान चुके हैं कि लाइटों का हैंडओवर गलत किया गया है और इससे लाखों का नुकसान हुआ है क्योंकि मेंटिनेंस जेडीए को करना था। बिजली शाखा के अफसरों ने घटिया क्वालिटी की लाइटें होने के बाद 89 जगहों पर लगी लाइटें बिना मेंटिनेंस चार्ज लिए हैंडओवर कर ली थी।
हर साल साढ़े तीन करोड़ रुपए का नुकसान
पड़ताल में आया जेडीए द्वारा लगाई गई 22129 एलईडी लाइटाें की सुपुर्दगी लेकर निगम के अफसर खुद एक फर्म काे टैंडर देकर मेंटिनेंस करा रहे है। फर्म काे एक साल के लिए हर माह 30 लाख का भुगतान होगा। यानि एक साल में साढ़े तीन करोड़ का भार बढ़ा लिया। इन लाइटों को मेंटिनेंस उसी फर्म को तीन साल तक करना था, जिसको जेडीए ने टैंडर दिया था। लेकिन निगम ने इस अवधी से पहले ही लाइटों को खुद के अधीन लेकर सरकार को चपत लगा दी।
सतर्कता शाखा में 10 दिन पहले दी भेज दी थी फाइल
अफसरों ने जांच के बाद फाइल सतर्कता शाखा में 10-12 दिन पहले ही भेज दी थी। फाइल को देखकर टिप्पणी करनी थी। लेकिन अभी तक फाइल पड़ी हुई है।
- मातादीन, वरिष्ठ लेखाधिकारी, निगम
5 दिन पहले फाइल मिली
पढ़ने में टाइम लगता है। पांच दिन पहले ही फाइल आई थी। फाइल पढ़ने के बाद ही कार्रवाई हाेगी।
राकेश यादव, इंस्पेक्टर सतर्कता निगम
फाइल मंगवाता हूं
शायद कमेटी ने जांच कर ली है। फाइल विजिलेंस में कई दिनों से पड़ी है तो मैं पता करके खुद मंगवाता हूं। - विजयपाल सिंह, सीईओ, नगर निगम
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