पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित उनके गुट के कांग्रेस के बागी 19 एमएलए को दिए विधानसभा स्पीकर के अयोग्यता नोटिस विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को स्पीकर ने अपनी मौजूदा एसएलपी को वापस ले लिया। स्पीकर की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सर्वाेच्च अदालत से कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट ने विस्तृत आदेश दिया है। हम 24 जुलाई को दिए गए अंतिम अंतरिम आदेश को चुनौती देंगे।

21 जुलाई के अंतरिम आदेश भी अंतिम अंतरिम आदेश में विलय हो गया है। इसलिए हम मौजूदा एसएलपी को वापस लेना चाहते हैं। अदालत ने स्पीकर को एसएलपी वापस लेने की मंजूरी देते हुए एसएलपी को इस आधार पर खारिज कर दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा, बीआर गवई व कृष्ण मुरारी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
पायलट खेमे के अधिवक्ता राजेश गोस्वामी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से स्पीकर की एसएलपी वापस लेने के बाद हाईकोर्ट का 24 जुलाई को स्पीकर के नोटिस की क्रियान्विति पर यथास्थिति का आदेश बरकरार है। हाईकोर्ट ने मामले में पक्षकारों की बहस सुनने के बाद 13 बिन्दुओं को सुनवाई के लिए तय किया है।

मामले में केन्द्र सरकार के पक्षकार बनने के बाद एएसजी आरडी रस्तोगी केन्द्र की ओर से जवाब देंगे। अन्य पक्षकारों की ओर से भी लिखित बहस पेश की जाएगी। हाई कोर्ट ने 24 जुलाई के अंतिम अंतरिम आदेश में 14 जुलाई को 19 एमएलए को अयोग्यता नोटिस पर यथास्थिति का आदेश दिया था।

भाजपा विधायक मदन दिलावर की याचिका सारहीन; खारिज की गई, फिर से दायर कर सकेंगे

हाईकोर्ट ने बसपा एमएलए के दल-बदल के खिलाफ स्पीकर के समक्ष लंबित शिकायत याचिका का निपटारा नहीं होने को चुनौती देने वाली बीजेपी एमएलए मदन दिलावर की याचिका को भी सारहीन मानते हुए सोमवार को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रार्थी चाहें तो नए सिरे से याचिका दायर कर सकते हैं। जस्टिस महेन्द्र गोयल ने यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान दिलावर की ओर से एडवोकेट हरीश साल्वे ने कहा कि विधानसभा स्पीकर के समक्ष बसपा एमएलए के कांग्रेस में जाने को लेकर प्रार्थी की शिकायत याचिका करीब 4 महीने से लंबित है।

बसपा ने पक्षकार बनने की अर्जी दी, कोर्ट ने मना किया
बसपा की ओर से मामले में पक्षकार बनने की अर्जी दायर की। जिस पर अदालत ने कहा कि पक्षकार बनने की क्या जरूरत है, वह याचिका ही तय कर देती है। जिस पर बसपा एमएलए ने अदालत को बताया कि स्पीकर ने प्रार्थी की शिकायत खारिज कर दी है। प्रार्थी के एडवोकेट ने साल्वे ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है। अदालत ने एएजी आरपी सिंह को कहा कि वे अदालत को वस्तुस्थिति बताएं। एएजी ने अदालत को बताया कि स्पीकर ने प्रार्थी की याचिका खारिज कर दी है।

राजनीतिक पार्टियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की ओर से 6 वकील भी कोर्ट में

हाईकोर्ट में विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी, विधानसभा सचिव व चीफ व्हिप सहित कुल आठ पक्षकार हैं। पहले सिर्फ चार ही पक्षकार थे, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद केन्द्र सरकार सहित तीन अन्य को भी पक्षकार बनाया है। इन तीन में पब्लिक अंगेस्ट करप्शन, मोहन नामा व अधिवक्ता प्रताप सिंह सिरोही शामिल हैं। इन पक्षकारों का कहना है कि इस केस में वे आमजन का प्रतिनिधित्व करने और जनप्रतिनिधियों के दल-बदल व भ्रष्टाचार को रोकने के लिए शामिल हुए हैं।

पब्लिक अंगेस्ट करप्शन संस्था की ओर से अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी, टीएन शर्मा व अभिनव भंडारी ने हाईकोर्ट में पक्षकार बनने के लिए बहस की। प्रार्थी संस्था प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम लड़ रही है। यह मामला राजनीतिक पार्टियों से जुड़ा है और इसमें आमजन का प्रतिनिधित्व नहीं था। इसलिए प्रार्थी संस्था आमजन के हितों के लिए पक्षकार बनी है। प्रार्थी संस्था ने अदालत से आग्रह किया है कि वह दल-बदल करने वाले जनप्रतिनिधियों को छह साल के लिए अयोग्य घोषित करे और चुनाव पर खर्च हुई राशि भी उससे ही वसूले।

कोर्ट ने पूछा- आप कौन? जवाब मिला- देश के नागरिक

मामले में पक्षकार बनने के लिए मोहन नामा के प्रार्थना पत्र पर सीजे ने उनके अधिवक्ता विमल चौधरी व योगेश टेलर से पूछा कि आप किसकी ओर से हैं और क्या चाहते हैं? जवाब में अधिवक्ता चौधरी ने कहा कि हम देश के नागरिक हैं, जो संविधान की रक्षा के लिए पक्ष रखना चाहते हैं।
अन्य पक्षकार प्रताप सिंह के वकील अभिमन्यु बोले कि आमजन पार्टियों के दल-बदल से परेशान है। स्पीकर की ओर से एजी सिंघवी ने पक्षकार बनने का विरोध किया।



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प्रतीकात्मक फोटो।
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