राज्य के 272 कॉलेजों में स्थाई प्राचार्य नहीं है। वहीं तीन साल से पदोन्नति भी नहीं हुई है। केवल 18 कॉलेजों में ही स्थाई प्राचार्य है। अधिकांश कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य नहीं होने के कारण न केवल शिक्षक अपने पदोन्नति अधिकार से वंचित हैं बल्कि महाविद्यालयों के सामान्य प्रशासनिक एवं अकादमिक कार्य भी ठीक प्रकार से संपन्न नहीं हो पा रहे हैं। राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) ने कॉलेज शिक्षा में प्राचार्य पद पर अविलंब डीपीसी करने की मांग की है।
इस संबंध मे संगठन के प्रदेश महामंत्री डॉ. नारायण लाल गुप्ता ने बताया कि उच्च शिक्षा मंत्री ने नवीन अकादमिक सत्र से पूर्व सभी महाविद्यालयों में प्राचार्य पद पर नियुक्ति का आश्वासन दिया था। लेकिन अभी तक कोई प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई है। उन्होंने ने बताया कि विगत 30 मार्च 2017 तक की रिक्तियों पर पात्र शिक्षकों को प्राचार्य पद पर पदोन्नत किया गया था।

इसके बाद यूजीसी रेगुलेशन के अनुरूप प्राचार्य पद पर चयन के नियम बदले गए तथा यूजीसी के नियमानुसार तथा देशभर के राज्यों में प्राचार्य पद की योग्यता के प्रावधानों को दृष्टिगत रखते हुए राज्य सरकार ने प्राचार्य पद के लिए पीएचडी की अनिवार्यता लागू की ।

विस्तृत नियम बनने के कुछ ही समय बाद विधानसभा चुनाव 2018 की आदर्श आचार संहिता लागू हो गई । नई सरकार को डेढ़ वर्ष से अधिक का समय हो गया है। लेकिन अभी तक प्राचार्य पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई है।

  • पीएचडी की अनिवार्यता के साथ अथवा पीएचडी के बिना जिस प्रकार भी हो प्राचार्य पद पर अविलंब नियुक्ति की जानी चाहिए। संगठन की ओर से इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री को अवगत कराया गया है। -डॉ. दिग्विजय सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, रुक्टा राष्ट्रीय


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