(पंकज मित्तल) काेराेनाकाल से जूझ रहे प्रदेश के किसानाें के लिए जुलाई व अगस्त में टिड्डियां सबसे बड़ा खतरा साबित हाे सकती हैं। कृषि विभाग के अनुसार इन दाे महीनाें में प्रदेश में कराेड़ाें टिड्डियां बार-बार हमला कर सकती हैं। इस बार चिंता ज्यादा है क्याेंकि ये टिड्डियां अंडे भी देंगी। टिड्डियाें का दल पाकिस्तान के रास्ते गुजरात आएगा और वहां से राजस्थान में एंट्री करेगा।

समय रहते इन पर काबू नहीं किया ताे फसलाें के लिए भी यह ज्यादा खतरनाक हाेंगी। टिड्‌डी दलों के हमलों में अभी तक लगभग 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अब हमले ज्यादा बड़े और बार-बार होंगे। इन हमलों से यदि प्रदेश की 10 प्रतिशत फसल भी बर्बाद हुई तो नुकसान का आंकड़ा लगभग 4 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है।
टिड्डियाें ने इस साल श्रीगंगानगर, जयपुर, अजमेर, उदयपुर, जाेधपुर तथा काेटा संभाग में भी बार-बार हमले किए हैं। केवल भरतपुर, दाैसा, कराैली, धाैलपुर के आसपास के कुछेक जिले ही इनसे बचे हुए हैं। अभी तेज धूप के चलते इनकी गति कम हुई है।

पहले जहां टिड्डियाें का दल एक दिन में 100 से 150 किमी तक उड़ता था, वे अब धूप के कारण महज 50 से 60 किमी का सफर ही कर पा रहा है। बारिश के दिनाें में इनके उड़ने की रफ्तार बढ़ जाती है। हालांकि चिंता ज्यादा इसलिए है क्योंकि अब जो टिडि्डयां आएंगी वो यहीं अंडें देंगी। इससे उनकी संख्या और ज्यादा बढ़ेगी। दैनिक भास्कर ने एक्सपर्ट से बात करते हुए टिड्डियाें पर अभी तक की सबसे बड़ी रिपाेर्ट तैयार की है। इसमें टिड्डियाें से जुड़ी हर छाेटी बड़ी जानकारी के साथ दाे महीने में हाेने वाले नुकसान का आंकलन भी किया गया है।

चाैंकिए मत, टिड्डियाें का 1 दल खा जाता है 35 हजार लाेगोंका खाना

एक एडल्ट टिड्डी अपने वजन (2 ग्राम) के बराबर रोज खा सकती है। एक किलोमीटर के टिड्डी दल में करीब 4 करोड़ टिड्डियां होती हैं। वो एक दिन में उतना खा सकती हैं जितना 35 हजार लोग एक दिन में खाएंगे। यह भी माना जाता है कि एक छोटा टिड्डी का झुंड एक दिन में इतना खाना खा जाता है जितना दस हाथी, 25 ऊंट या 2500 व्यक्ति खा सकते हैं। टिड्डियां पत्ते, फूल, फल, बीज, तने और पौधों को खाकर नुकसान पहुंचाती हैं और ये समूह में बैठती हैं तो इनके भार से पेड़ तक टूट जाते हैं।

दुनिया में 10000 से ज्यादा प्रजातियां
दुनियाभर में टिड्डियों की 10,000 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। अंटार्कटिका को छोड़कर सभी प्रायद्वीपों पर पाई जाती हैं। दुनिया की 10% आबादी को प्रभावित करती हैं। एक टिड्डी दल में 10 अरब टिड्डियां हो सकती हैं, जबकि ये 1 बार में 200 किलोमीटर तक का रास्ता तय कर सकती हैं।

हेलीकाॅप्टर से होगा कंट्राेल
कृषि विभाग के सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि टिड्डियों को नष्ट करने के लिए 40 से 50 फायर बिग्रेड तैयार हैं। 15 ड्राेन लगाए गए हैं। केंद्र सरकार से दाे हेलीकाॅप्टर मिल रहे हैं। 700 से 800 ट्रैक्टर किराए पर ले लिए गए हैं। किसानों को कीटनाशक दिए गए हैं।

1 टिड्डी देती है 200 से अधिक अंडे

एक वयस्क मादा टिड्डी अपने 3 महीने के जीवन चक्र में 3 बार अंडे देती हैं। एक बार में करीब 70 से 80 अंडे देती हैं, ऐसे में अगर यह अंडे नष्ट नहीं हुए तो 4 से 8 करोड़ तक टिड्डियां प्रति वर्ग किलोमीटर में पैदा हो सकती हैं। एक वर्ग मीटर में एक हजार अंडे हो सकते हैं। नर टिड्डे का आकार 60-75 एमएम और मादा का 70-90 एमएम तक हो सकता है।

यह रहेंगे रूट

  1. राजस्थान में पाकिस्तान की ओर से आने वाली टिड्डियां, बाड़मेर, जैसेलमेर के रास्ते श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ के रास्ते अजमेर, जयपुर हाेते हुए हाड़ाैती की संभाग की ओर से आएंगी।
  2. वहीं अफ्रीका के रास्ते आने वाली टिड्डियां समुद्र के रास्ते कच्छ से बांसवाड़ा, उदयपुर, राजसमंद हाेते हुए चित्ताैड़गढ़, भीलवाड़ा से रावतभाटा पहुंचेंगी। यहां से हाड़ाैती में आएंगी।

प्री-मानसून में अच्छी बारिश से समय से पहले हो रहे हमले
कृषि विभाग के सचिव ओम प्रकाश का कहना है कि टिड्डियाें का अभी तक 32 जिलाें मेंप्रकाेप हाे चुका है। अभी तक इसने गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर सहित अन्य आसपास के इलाकाें में कपास और मक्का की फसल काे खराब किया है। इसके अलावा सब्जियाें व फलाें की फसलाें काे भी नुकसान पहुंचाया है।

भारत में वर्ष 1978, 1983, 1986, 1989, 1993, 1997, 2005, 2010 व 2019 में टिड्डी दल ने हमला किया है। हालांकि प्रदेश में 1993 के बाद बड़े रूप में नहीं आई हैं। बेमौसम बारिश भी भारत में टिड्डियों के आने की प्रमुख वजहों में से एक है। मानसून से पहले बारिश से टिड्डियों का प्रजनन स्थान भी बदल रहा है और समय से पहले हमले हो रहे हैं।

रेगिस्तानी टिडि्डयां सबसे खतरनाक
कृषि अधिकारी डाॅ. रामावतार शर्मा का कहना है कि रेगिस्तानी टिड्डी ही भारत में प्रवेश कर रही हैं और यह झुंड में ही चलती हैं। यह प्रजाति ही सबसे खतरनाक है। इसका झुंड पूरी फसल नष्ट कर सकता है। जानकाराें का कहना है कि रेगिस्तान में ग्वार, बाजारा, मूंग, माेठ, कपास की फसलाें काे नुकसान पहुंचा सकती हैं। वहीं हाड़ाैती में मक्का, साेयाबीन और धान की फसल काे नुकसान हाेगा। यहां टिड्डियां आई ताे हाड़ाैती में करीब 500 कराेड़ की साेयाबीन और धान की फसल काे नुकसान पहुंच सकता है।

यह करनेहाेंगे किसानाेंकाे उपाय

  • खेत में बैठने न दिया जाए, खेत में आने लगें ताे थाली बजाकर, तेज हाॅर्न बजाकर शाेर के साथ उन्हें उड़ा दें।
  • डीजे और तेज साउंड वाले स्पीकर बजाएं।
  • वाहनाें की आवाजाही तेज कर दें और उनके हाॅर्न भी तेजी से बजाएं। मंदिराें के घंटे और अन्य तेज आवाज करने वाली चीजें बजाएं ताे वे शाेर से दूर भागेंगी।
  • खेत में जगह-जगह आग जलाकर धुआं करें, इससे भी टिड्डियों का दल नीचे नहीं आता है।
  • डेल्टामेथलिन 2.8% ईसी, क्लोरेपायरिफॉस 20% ईसी, क्लोरेपायरिफॉस 50% ईसी तथा लेबडासायलोथिन 5 % ईसी में से किसी भी एक को पानी में घोलकर स्प्रे करवाएं।

मुआवजा भी कम देती है सरकार
सरकार ने राज्य आपदा प्रबंधन फंड (एसडीआरएफ) के तहत जिलावार कलेक्टर की अगुवाई में फसल नुकसान का आंकलन करने के बाद किसानों को प्रति हैक्टेयर 13,500 रुपये का मुआवजा देती है। ये राहत राशि सिर्फ दो हेक्टेयर तक ही सीमित है। इसका मतलब है कि किसान की चाहे कितने हैक्टेयर फसल बर्बाद हुई हो, राज्य सरकार अधिकतम दो हैक्टेयर तक ही मुआवजा देगी।

यदि ये माना जाए कि किसानों को अधिकतम मुआवजा यानि कि 27,000 रुपए (13,500 प्रति हेक्टेयर) मिलेगा। इस हिसाब से केंद्र के पैकेज से न्यूनतम 25,425 किसानों काे 68.65 करोड़ रुपए (प्रति किसान 27,000 रुपए) का लाभ मिलेगा और राज्य सरकार के पैकेज से 40,740 किसानों काे 110 करोड़ रुपए की राहत मिल सकती है।

अभी तक हुआनुकसान
वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान सिर्फ राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में ही टिड्डियों के हमले के कारण करीब दो लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हुई थी। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा 13 मार्च 2020 को राज्यसभा में पेश किए गए लिखित जवाब के मुताबिक 2019-20 के दौरान राजस्थान में 179,584 हैक्टेयर फसल बर्बाद हुई थी। वहीं इस दौरान गुजरात में कुल 19,313 हैक्टेयर फसलों को नुकसान पहुंचा था।

राजस्थान में नुकसान
टिड्डियों द्वारा हमले के कारण राजस्थान में सबसे ज्यादा जैसलमेर जिला प्रभावित हुआ, जहां 54,979 हैक्टेयर फसल बर्बाद हुई, वहीं जालौर जिले में टिड्डी हमले के कारण 53,682 हैक्टेयर फसल बर्बाद हुई। इसी तरह श्रीगंगानगर जिले में 22,257 हैक्टेयर, बाड़मेर में 38,029 हैक्टेयर, बीकानेर जिले में 5,801 हैक्टेयर, जोधपुर जिले में 2,308 हैक्टेयर और सिरोही जिले में 12 हैक्टेयर फसलों को टिड्डी दल के कारण नुकसान पहुंचा है।

अब तक 200 कराेड़ से अधिक टिड्डियां संभाग में कर चुकी हैं हमला, अब बड़े हमले की आशंका
काेटा संभाग में अभी तक 23 बार हमले हाे चुके हैं और करीब 200 कराेड़ से अधिक टिड्डियाें ने हमला किया है। इसमें पेड़ाें की पत्तियाें काे नुकसान पहुंचाया है। अब बड़ी मात्रा में बार-बार हमले हाे सकते हैं। अभी तक के सबसे बड़े हमले होंगे। इसके लिए विभाग ने पूरी तैयारी की हुई है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। केमिकल व वाहनाें काे तैयार किया हुआ है। इस बार मादा टिड्डियां ज्यादा आने वाली हैं। ऐसे में रेतिले और मिट्टी वाले इलाके में ज्यादा खतरा है। हालांकि किसानाें व अधिकारियाें काे इसके लिए ट्रेंड किया जा रहा है।
- डाॅ. रामावतार शर्मा, ज्वाइंट डायरेक्टर कृषि विभाग



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फाइल फोटो।
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