जिले भर में शुक्रवार को विभिन्न गांवों में मनरेगा पर काम करने के इच्छुक युवाओं से आवेदन लिए गए। इसके लिए अधिकारी बाकायदा गांवों में पहुंचे। दरअसल, कोरोना के कारण जिले में हजारों की संख्या में प्रवासी लौटे हैं। ये सभी दूसरे राज्यों में अपनी योग्यता के अनुसार काम करते थे, लेकिन अब इनका रोजगार जा चुका है।

ऐसे में अधिकांश ने मनरेगा को चुना। पिछले कुछ दिनों से इसके आवेदन बढ़ गए। इस बीच प्रशासन को शिकायत मिली कि कई स्थानों पर ग्राम सचिव व एलडीसी जरूरतमंदों को रोजगार नहीं दे रहे हैं। इसलिए प्रशासन ने अधिकारियों को गुरुवार काे पंचायत मुख्यालय पर भेज कर लोगों से आवेदन लिए। इस एक ही दिन में जिले भर में आठ हजार आवेदन आए। सबसे अधिक आवेदन नवलगढ़ व उदयपुरवाटी में मिले। खास बात ये है कि इनमें कई लोग ग्रेजुएट भी हैं और जो कम पढ़े लिखे हैं वे भी कुशल श्रमिक हैं।

भामरवासी व नारी पंचायत में लगे रहे ताले, एक दिन का वेतन कटेगा

आवेदन करने वालों में शहरों में गाड़ियां चलाने वाले ड्राइवर, सेलून में बाल काटने वाले, सब्जी बेचने वाले भी शामिल हैं। दूसरे राज्यों में ये जहां काम कर रहे थे। वहां काम बंद हो गया। ऐसे में यहां लौट आए। सूरजगढ़ क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में 476 जॉब कार्ड धारकों ने आवेदन किए। इनमें 23 ग्रेजुएट भी शामिल हैं। बीडीओ अरविंद गौड़ ने बताया कि टीमों ने क्षेत्र की 28 पंचायतों में पहुंच कर कार्रवाई देखी।
कुछ पंचायतों में ताले, नोटिए दिए

भामरवासी व नारी पंचायत में सुबह पाैने ग्यारह बजे तक कार्यालय के ताले लगे थे। जिला परिषद सीईओ काे इसकी सूचना दी। मुख्यालय पर नहीं रहने वाले ग्राम सचिव व एलडीसी काे नाेटिस देने व एक दिन का वेतन काटने के आदेश दिए गए।
500 मजदूरों से 38 हजार हुए

लाॅकडाउन के समय महज 500 से 700 मजदूर मनरेगा में काम कर रहे थे, लेकिन फिलहाल करीब 38 हजार मजदूर काम कर रहे हैं। जिले के लोग बड़ी संख्या में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तेलगांना, बंगाल, दिल्ली में काम करते हैं। काेराेना की वजह से बिगड़े हालात के कारण जिले में 29 हजार प्रवासी लौटे हैं।



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