(समकित जैन) कोरोना संक्रमण की वजह ने पुलिसिंग में कई बदलाव कर दिए हैं। कोरोना काल में पुलिस के सामने कई चुनौतियां खड़ी हाे गई हैं। पुलिस काे संक्रमण काे राेकने के लिए विभिन्न क्षेत्राें में लगाए जा रहे कर्फ्यू और सड़काें पर गाइडलाइन की पालना के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है, वहीं अपराधाें पर अंकुश लगाने और बदमाशाें काे सलाखाें के पीछे डालने की चुनाैती है।
सबसे ज्यादा परेशानी फील्ड में तैनात सिपाहियों और एएसआई स्तर के पुलिसकर्मियों को आ रही है। क्याेंकि फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियाें और अधिकारियाें काे बदमाशाें काे गिरफ्तार कर सबूत भी एकत्रित करना है और काेराेना गाइडलाइन की पालना भी करना है। पुलिस के सामने अब एक और सबसे बड़ी चुनाैती खड़ी हाे गई है काेर्ट के आदेश के बावजूद बदमाश काे जेल भेजना।
क्याेंकि काेटा जेल में लगातार काेराेना पाॅजिटिव आ रहे हैं और जेल में पहले से ही क्षमता से अधिक कैदी हैं। भास्कर ने जब शहर के सिपाही से लेकर डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारियों से बात की तो सबका दर्द छलक आया। पुलिसकर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर ऐसी-ऐसी परेशानियों का खुलासा किया जो वास्तव में काफी गंभीर हैं।
पुलिस के सामने ये 5 बड़ी चुनौतियां
घटनास्थल पर जाना : पुलिस का सबसे पहले तो क्राइम सीन या घटनास्थल पर जाना ही चुनौती है। वारदात स्थल पर गए और सबूत दिखा भी तो उसे कैसे उठाएंगे? क्योंकि कोरोना का खतरा रहता है। वस्तु पर वायरस हुआ तो जब्ती बनाने वाले सिपाही का संक्रमित होना तय। वहीं, घटनास्थल पर समय पर जाना भी जरूरी हैं क्योंकि उसके बगैर पुलिसिंग ही नहीं चलेगी।
बदमाशों को पकड़ना : बदमाश को डायरेक्ट पकड़ना ही चुनौती है, क्योंकि क्या पता वो पॉजिटिव है या निगिटिव..? अगर कोई बदमाश वारदात कर भाग रहा है तो उसे पकड़ने के पहले सोचना पड़ेगा। नियमानुसार तो पकड़ ही नहीं सकता, क्योंकि दूरी बनानी है। दूरी बनाई तो बदमाश ही भाग जाएगा। बदमाश पॉजिटिव आ गया तो पुलिसकर्मी भी संक्रमित हो सकते हैं।
गिरफ्तारी डालना : बदमाश को पुलिस ने पकड़ भी लिया और थाने भी ले आई तो इससे बड़ी परेशानी है। क्योंकि जब तक कोविड-19 की जांच नहीं होगी उसे जेल में दाखिला नहीं मिलेगा। जांच आने में 12 घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है। 12 घंटे से पहले कोर्ट में पेश करना जरूरी है। इसलिए गिरफ्तारी दिखाई तो समस्या हो जाएगी। नहीं दिखाई ताे अवैध हिरासत की बड़ी समस्या आ गई।
कोर्ट पेशी व रिमांड: जब तक कोविड-19 की रिपोर्ट नहीं आती तो कोर्ट में पेश करने में डर है। कोर्ट में पेश करने के पहले पूरे कागज बनाने पड़ते हैं। कोर्ट में पेश करके कई मामलों में बरामदगी व अन्य कानूनी प्रकियाओं के लिए उनका रिमांड लेना पड़ता है, जिसमें भी डर है। अनंतपुरा थाने पुलिस द्वारा गिरफ्तार दुष्कर्म के आरोपी का रिमांड के दौरान पॉजिटिव आना इसका बड़ा उदाहरण हैं।
जेल दाखिल कराना : कोविड-19 की रिपोर्ट के बगैर जेल में बदमाश को एंट्री नहीं है। अगर कोर्ट ने जेल की सजा सुना दी और रिपोर्ट नहीं आई तो पुलिस क्या करे। ऐसे में सिपाही कोरोना और कानून के बीच फंसकर रह जाता है। इसलिए पुलिस ज्यादातर रिमांड पर ले रही है। वहीं, दूसरा रास्ता रिपोर्ट आने तब उसे कैदी वार्ड में रखने का है, लेकिन वहां भी गार्ड तो तैनात होगी ही इसलिए खतरा बरकरार है।
पुलिस के यह चार काम हो रहे प्रभावित
- थानों पर लोग शिकायत करने आने से घबराने लगे हैं। थाने पर लोग पहले की तरह नहीं आ रहे है। इस वजह से वारदातों का खुलासा करने में मदद नहीं मिल रही है।
- पुलिस ने अपराध रोकथाम वाली धाराओं में बदमाशों को पकड़-पकड़कर जेल में डालना पहले की अपेक्षा कम कर दिया है।
- पुलिस अफसर डाक और रजिस्टरों के कागजों पर साइन करने से घबरा रहे हैं, ऐसे में काफी काम पेडिंग हो गए हैं और काम प्रभावित हो रहा हैं।
- पुलिस ने 60 और 90 दिन के पहले चालान करना लगभग बंद सा कर रखा है, ऐसे में पेडेंसी बढ़ रही है। इससे जांच अधिकारी भी परेशान हो रहे हैं।
पुलिस का अब बड़े अपराधियों पर फोकस
शहर पुलिस ने कुछ दिनों के लिए सामान्य गिरफ्तारी कम कर दी है। इसके सबसे बड़े दो कारण हैं। पहला- लगातार पुलिसकर्मी पॉजिटिव आ रहे हैं और दूसरा- जेल में भी काफी पॉजिटिव आ गए हैं। इसकाे देखते हुए उच्च पुलिस अधिकारियों ने थानाधिकारियों और थाना पुलिस को फिलहाल ऐसी गिरफ्तारियों पर रोक लगाने को कहा है। पुलिस अब बड़े मामलाें में बदमाशों पर फोकस कर रही है। थानाधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं, लेकिन वे और उच्च अधिकारी कोई भी इस विषय में अधिकारिक रूप से बोलने को तैयार नहीं हैं।
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