नशा मुक्ति केंद्र संचालक और उसके सहयाेगियाें पर सदर थाना में मुकदमा दर्ज हुआ है। परिवादी हनुमानगढ़ के बसीर गांव निवासी पीड़ित ने आराेप लगाए कि निम्मावाली स्थित महादेव नशा मुक्ति केंद्र संचालक विक्रम बेनीवाल, कल्याणसिंह व राजेद्र गाेदारा तथा अन्य ने परिवादी विजेंद्रसिंह जाट काे नशामुक्ति केंद्र में प्रताड़ित किया और बंधक बनाकर काम करवाया।
सदर पुलिस ने पीड़ित की रिपाेर्ट पर मुकदमा दर्ज किया है। जांच अधिकारी एएसआई माेहरसिंह ने बताया कि परिवादी ने रिपाेर्ट में बताया है कि उसके परिजनाें ने उसे केंद्र मे नशा छुड़वाने के लिए भर्ती करवाया था। केंद्र संचालक आराेपियाें ने परिवादी के परिजनाें से पूरी फीस ली लेकिन इसके बदले में पीड़ित काे वैज्ञानिक और चिकित्सकीय विधि से नशा छुड़वाने के उपाय के बजाय प्रताड़ित कर शारीरिक यातनाएं दीं।
आराेपियाें ने पीड़ित काे जंजीराें से बांधकर रखा। उससे अनेक बार मारपीट की गई। उसके कपड़े उतरवाकर मानसिक वेदना दी गई और बेइज्जत किया गया। परिवादी काे आराेपीगण न ताे दवा देते थे न ही अच्छा भाेजन देते थे। यहां तक कि केंद्र में रहने तक की अच्छी व्यवस्था नहीं है।
जांच अधिकारी एएसआई माेहरसिंह ने बताया कि पीड़ित विजेंद्र जाट ने रिपाेर्ट में बताया है कि महादेव नशा मुक्ति केंद्र संचालक विक्रम बेनीवाल, राजेंद्र गाेदारा और कल्याणसिंह आदि ने पीड़ित काे बंधक बनाकर रखा और अपने घर लेजाकर काम करवाया। पीड़ित काे वहीं पर माैका मिला और भागकर अपने घर पहुंचा। घर जाकर आप बीती बताई तब जाकर परिवारजनाें ने उसके साथ आकर थाने में मुकदमा दर्ज करवाया।
एएसआई माेहरसिंह ने बताया कि मुकदमे मे लगाए गए आराेपाें की जांच करने निम्मावाली स्थित महादेव नशा मुक्ति केंद्र पहुंचे। केंद्र का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था और ताला लगा हुआ था। वहां भर्ती मरीजाें तथा कर्मचारी ने बताया कि ताले की चाबी संचालक विक्रम बेनीवाल के पास है। आराेपी व उसके साथी फरार हैं। उनकाे पकड़ने के लिए पुलिस ने उनके ठिकानाें पर दबिश दी लेकिन नहीं मिले।
घर वालों ने भेजा घी व बादाम, आराेपी खा गए, केंद्र से संचालक फरार
पीड़ित विजेंद्र जाट ने जांच अधिकारी काे बताया कि नशा छुड़वाने के नाम पर भर्ती किया गया था लेकिन केंद्र में उसे राेज प्रताड़ित किया गया। पीड़ित के परिजन उसके लिए घर का तैयार किया हुआ देसी घी, काजू और बादाम जैसे ड्राईफ्रूट देकर जाते रहे लेकिन आराेपियाें ने ये सब पीड़ित काे दिया ही नहीं। आराेपियाें की गैंग ही उसके घर से आया सामान खा जाती थी। आराेपी खुद केंद्र में नशा करते हैं और राेजाना शराब आदि का सेवन करते हैं।
एएसआई माेहरसिंह के मुताबिक केंद्र संचालक नशा छुड़वाने के नाम पर 10 हजार रुपए महीना की माेटी फीस ले रहा है। इसके अलावा दवा, जांच और उपचार के नाम से अलग से रुपए वसूले जाते हैं। इतनी माेटी फीस वसूलने के बावजूद मरीजाें का वैज्ञानिक तरीके से इलाज कर नशा छुड़वाने के नाम पर बहुत यातनाएं दी जाती हैं। नशा मुक्ति केंद्राें के खिलाफ छुट्टी लेकर घर गए मरीजाें ने भी ऐसे ही आराेप लगाए हैं।
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