शहर में आवारा पशुओं का आतंक कम हाेने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी सिस्टम इनके आगे फेल हाे चुका है। हर साल बारिश में सड़काें पर पशुओं का जमावड़ा बढ़ जाता है। इनकी चपेट में आकर लाेगाें की जान जाती है। ताजा मामले में थेगड़ा राेड पर गायाें की टक्कर से एक युवक 14 दिन से काेमा में है। इसी राेड पर बाेरखेड़ा के एक व्यापारी भी गाय के कारण जख्मी हाे चुके हैं।
आस्था नगर बाेरखेड़ा निवासी 35 वर्षीय नीरज सचदेव 2 अगस्त की रात 8.30 बजे बजरंगनगर स्थित अपने मामा के यहां से थेगड़ा राेड से लाैट रहे थे। मारुति वर्कशाॅप के पास पशुओं के झुंड बैठे हुए थे। वहां राेड लाइट भी नहीं थी। अचानक अंधेरे में एक गाय सामने आ गई और बाइक उससे टकरा गई। नीरज उछलकर सड़क पर गिर गए। इससे उनके सिर में गंभीर चाेट आ गई। आसपास के लाेगाें की सूचना पर परिजनाें ने उन्हें तलवंडी के स्थित निजी अस्पताल ले गए।

वहां डाॅक्टराें ने बताया कि सिर पर चाेट की वजह से ब्रेन हेमरेज हाेने से नीरज काेमा में है। रिकवरी में काफी वक्त लगेगा। उनके दाेस्त अजय दरड़ा ने बताया कि करीब एक माह पहले ही नीरज ने कांच और एल्युमिनियम विंडाे का काम शुरू किया था। उसके ऊपर ही बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी व बेटे की जिम्मेदारी है। इलाज में काफी खर्च आ रहा है जाे उसके चाचा, दाेस्त व रिश्तेदार मिलकर उठा रहे हैं।

8 दिन तक बिस्तर पर पड़े रहे व्यापारी राजकुमार

पिछले सप्ताह बाेरखेड़ा निवासी राजकुमार असरिया भी थेगड़ा राेड हाेते हुए गुमानपुरा से अपने घर जा रहे थे। रास्ते में गाय-सांडाें का जमघट लगा था। अचानक कुछ गाय दाैड़ती हुई आई और उन्हें टक्कर मार दी। जिससे वे काफी दूर तक गाड़ी के साथ घिसटते हुए चले गए। उनके हाथ-पैर पूरी तरह से छिल गए। जगह-जगह जख्म हाे गए। लाेगाें ने उन्हें उठाया और अस्पताल पहुंचाया। 8 दिन बाद वे बिस्तर से उठ सके।

आवारा पशुओं पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। पशुओं काे पकड़ने के साथ बाहर से जाे पशु आ रहे हैं उन पर भी अंकुश के लिए शीघ्र ही नाकाबंदी शुरू की जाएगी। - वासुदेव मालावत, आयुक्त उत्तर नगर निगम

भास्कर पड़ताल : प्रदेश में 4 साल में 124 लोगों की जान ले चुके आवारा मवेशी

  • आवारा जानवरों की वजह से होने वाले हादसों में 2014 से 2017 के बीच प्रदेश में 124 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार इस अवधि में देश में 3342 लोगों की मौत हुई।
  • आवारा पशुओं से हाेने वाली माैताें के मामले में अधिकारी सरकार काे भी गुमराह करते रहे हैं। 2018 में काेटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा ने विधानसभा में सवाल लगाया था, जिसके जवाब में सरकार ने बताया था कि काेटा में आवारा जानवराें से काेई माैत नहीं हुई।
  • विधायक भरत सिंह के सवाल के जवाब में 2019 में यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल ने बताया थाा कि काेटा में आवारा जानवर 2 लाेगाें की जान ले चुके हैं। हालांकि धारीवाल ने भी ये माना कि कोटा में माैताें की संख्या इससे कहीं ज्यादा है।

अफसरों की लापरवाही पड़ रही भारी, 2 साल में आवारा पशुओं ने 6 लोगों की जान ली

2019 में इनकी हुई थी दर्दनाक मौत
7 जुलाई : रामपुरा निवासी लोकेश जैन को बारां रोड पर गाय ने टक्कर मारी। 7 दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई।
8 अगस्त : कोटा मेगा हाईवे पर गाय की टक्कर से गोपालपुरा निवासी 40 वर्षीय प्रहलाद मीणा की मौत हो गई।
11 अगस्त : अनंतपुरा रोड पर गाय की टक्कर से गोविंदनगर निवासी गफूर की मौत हो गई और सोनू घायल हो गया।
13 अगस्त : गाय की टक्कर से सीमा की अस्पताल में मौत हो गई। 5 दिसंबर को बोरखेड़ा में बुजुर्ग मांगीलाल की मौत हुई।

2020 में हो चुके 4 हादसे, एक की मौत
31 जुलाई : सूरसागर कॉलोनी निवासी शक्ति अपने दोस्त भुवनेश के साथ जा रहा था। चम्बल औद्योगिक क्षेत्र में अचानक गाय सामने आई। हादसे में शक्ति की दर्दनाक मौत हुई।
2 अगस्त : बाेरखेड़ा के नीरज सचदेव काे थेगड़ा रोड पर मारुति वर्कशाॅप के पास गाय ने टक्कर मारी। जिससे वाे अभी तक काेमा में है। 8 अगस्त को इसी रोड पर राजकुमार घायल हुए
13 अगस्त : सुभाषनगर के पार्क में सांड ने रणजीत दत्त काे उठाकर फेंक दिया। जिससे उनके पैर में गंभीर चाेट अाई।

शहर में आवारा पशुओं के आतंक के 3 कारण

पशुपालकाें पर कार्रवाई नहीं
पिछले साल कई हादसे हाेने के बाद निगम ने फैसला किया था कि पशुओं की टैगिंग की जाएगी। पहली बार पशु पकड़े गए तो मालिकों पर पेनल्टी होगी। दूसरी बार एफआईआर होगी, लेकिन हुआ कुछ नहीं।

ग्रामीण छाेड़ जाते हैं जानवर
आसपास के इलाकाें से ग्रामीण पशुओं काे काेटा में छाेड़कर चले जाते हैं। इनकी राेकथाम के लिए निगम चेकपाेस्ट तक नहीं बना पाया। वहीं पिछले कई महीने से आवारा पशुओं काे पकड़ा भी नहीं जा रहा है।

राजनीतिक दबाव भी है एक वजह
अफसराें का कहना है कि आवारा पशुओं काे पकड़ने पर नेताओं के फाेन आ जाते हैं। ऐसे में उन्हें कम पैसे में या निशुल्क छाेड़ना पड़ता है। हालांकि अब पशुओं के पकड़े जाने पर 5 हजार जुर्माना लगता है।



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अस्पताल में भर्ती नीरज।
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