काेराेना काल में शादियाें की रंगत फीकी हाे गई है। अप्रैल से जून तक 25 सावे थे, उम्मीद थी कि इस दाैरान करीब 5000 शादियां हाेंगी, लेकिन लाॅकडाउन के कारण बहुत से लाेगाें ने शादियां टाल दीं। जाे शादियां हुईं भी प्रतिबंधाें के कारण वाे घर में ही हुईं। इसका असर शादियाें के बाजार पर पड़ा है। माेटे अनुमान के मुताबिक मैरिज गार्डन, इवेंट मैनेजमेंट, काेरियाेग्राफर, टेंट, हलवाई और बाजे वालाें का करीब 270 कराेड़

का सालाना टर्नओवर होता है। पिछले साल के मुकाबले इस बार लगभग 10 प्रतिशत ही काराेबार हुअा है। यानी अब तक केवल 27 करोड़ का ही कारोबार हुआ है। बुकिंग के लिए सभी अपने ऑफिस खाेलकर बैठे हैं। काेराेना के डर के कारण बुकिंग नहीं हाे रही है। अब नवंबर और दिसंबर में 8 सावाें से ही सुधार की उम्मीद है।

काेराेना काल से पहले आम ताैर पर 800 से 1500 लाेगाें के लिए शादी समाराेह हाेते थे, लेकिन अब समाराेह में 50 से ज्यादा लाेगाें के शामिल हाेने पर राेक है। ऐसे में लाेग घराें में ही सादगी से शादी करने पर जाेर दे रहे हैं। यही वजह है कि मैरिज गार्डन, बैंड, घाेड़ी-बघ्घी या वाहनाें की बुकिंग नहीं हाे रही है। हलवाइयाें काे छाेटी-माेटी बुकिंग मिल रही हैं, लेकिन उससे खर्च निकलना भी मुश्किल हाे रहा है। ज्याेतिष अमित जैन के

अनुसार 25 नवंबर से 11 दिसंबर तक 8 सावे हैं। 15 दिसंबर के बाद मलमास लग जाएगा। वहीं अप्रैल, मई व जून में 25 सावे थे, लेकिन काेराेना के कारण लाेगाें ने शादियां आगे खिसका दी थी। शहर में हर साल लगभग 10 हजार शादियां होती हैं।

मैरिज गार्डन : सिर्फ 10 प्रतिशत रह गई बुकिंग

शहर में यूआईटी और नगर निगम के छाेड़कर 150 प्राइवेट मैरिज गार्डन हैं। पिछले साल सावाें में हालत ये थी कि इनमें बुकिंग मिलना मुश्किल था। इस बार वीरानी छाई हुई है। एक मैरिज गार्डन का साल का औसतन 20 लाख का भी काराेबार मानें ताे साल में करीब 30 कराेड़ का टर्नओवर हाेता था। मैरिज गार्डन एसाेसिएशन के अध्यक्ष जतिन गाैरी के अनुसार इस बार ताे केवल 10 प्रतिशत बुकिंग हुई है। जिन्हाेंने अप्रैल-मई में बुकिंग कैंसिल की थी, वाे नवंबर-दिसंबर के लिए अा रहे हैं, लेकिन बुकिंग करने से डर रहे हैं। पहले सावे शुरू हाेने से 4 से 6 महीने पहले ही एडवांस बुकिंग हाे जाती थी।

इवेंट मैनेजमेंट : खर्च चलाना भी मुश्किल हुआ

पिछले साल इवेंट मैनेजमेंट से लेकर काेरियाग्राफर तक के पास समय नहीं था। इवेंट एवं काेरियाेग्राफर एसाेसिएशन से जुड़े कुलदीप सिंह व नीलेश अग्रवाल बताते हैं कि इस बार केवल 20% काम रह गया। पिछले साल 3-3 कराेड़ तक के काम मिले थे। शहर में 70 से अधिक इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां हैं, जिनका पिछले साल औसतन 1 कराेड़ का काराेबार हुआ था। पूरे साल में लगभग 70 कराेड़ का टर्नओवर हुआ था। पहले जाे काम 5 लाख में हाेते थे अब 2 लाख में हाे रहे हैं। अब इवेंट कंपनियाें के पास काम नहीं है। फाेटाे शूट, साउंड सिस्टम, फ्लाॅवर डेकाेरेशन का काम भी ठप है। खर्च तक निकलना मुश्किल हो रहा है।

ट्रैवल्स : वाहनों का टैक्स और किश्त भी जेब से दे रहे संचालक

काेराेना में शादियों कम हाेने, बारात नहीं ले जाने, कम लाेगाें का आना-जाना हाेने का असर ट्रैवल्स बिजनेस पर भी पड़ा है। काेटा बस मालिक संघ के उपाध्यक्ष अशाेक चांदना के अनुसार छाेटी-बड़ी सभी तरह की गाड़ियाें काे मिलाकर 25 प्रतिशत बुकिंग रह गई है। हालत यह हाे गई कि केवल डीजल का खर्च निकल पा रहा है। न टैक्स का पैसा निकल रहा न किश्त का। बारात की जगह केवल घर-परिवार के लाेग ही जाकर रशादी करके आ रहे हैं। अनुमान के मुताबिक ट्रैवल्स और बैंड वालाें का सावाें में करीब सालभर में 5 कराेड़ का टर्नओवर हाे जाता था।

टेंट व्यवसाय : 90 कराेड़ से 9 करोड़ पर पहुंच गया काराेबा

टेंट के बिना शादियां भी अधूरी हैं, लेकिन इन दिनाें इस बिजनेस पर भी काेराेना की मार है। टेंट एसाेसिएशन के अध्यक्ष साैरभ पाेरवाल के अनुसार शहर में 300 से ज्यादा टेंट व्यवसायी हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार केवल 10 प्रतिशत काम रह गया। पहले जहां 1000 लाेगाें की व्यवस्था आम बात थी, वहीं अब 50 लाेगाें के समारोह हो रहे हैं। इतने छाेटे कार्यक्रम के लिए लाेग ज्यादा सजावट पर जाेर नहीं देते हैं। अाम दिनाें में एक टेंट का साल में करीब 30 लाख का टर्नओवर हाेता था। यानी साल भर में करीब 90 कराेड़ का काराेबार हाेता था।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Corona effect; Band-Baja-Baaraat ended its run, 270 crores business was reduced to 27 crores
Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf

Advertisement

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
Top