डीजीपी पद पर भूपेन्द्र यादव की नियुक्ति व सेवाकाल बढ़ाने के सुप्रीम कोर्ट में लंबित अवमानना मामले में प्रार्थी नागरिक संरक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ. कौस्तुभ दाधीच ने कहा है कि वे डीजीपी के वीआरएस लेने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में देंगे। साथ ही मामले में जल्द सुनवाई के लिए अर्जी भी दायर करेंगे।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कोरोना संक्रमण के चलते पिछले सात महीने से सुनवाई नहीं हो पा रही है। वे किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सिस्टम के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीजीपी को वीआरएस देकर राज्य सरकार ने किसी अन्य पद पर लगाया तो वह भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना हा़े सकती है। गौरतलब है कि अवमानना याचिका मेें डीजीपी पद पर यादव की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया है।

राज्य सरकार ने यादव की नियुक्ति को बताया था सही: इस मामले में राज्य सरकार के तत्कालीन सीएस डीबी गुप्ता ने जनवरी महीने में सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दायर कर कहा था कि डीजीपी पद पर डॉ. भूपेन्द्र यादव की नियुक्ति यूपीएससी की सलाह से और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार की है। साथ ही राज्य सरकार ने अदालत के आदेशोें व दिशा-निर्देशों का किसी भी तरह उल्लंघन नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार डीजीपी को कब हटाया जा सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह अन्य व यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य मामले में स्पष्ट किया है कि दो साल के भीतर इन पुलिस अफसरों को तब ही हटाया जा सकता है जब इन्हें ऑल इंडिया सर्विस रूल्स में दोषी पाया गया हो, या किसी मामले में कोर्ट ने उन्हें भ्रष्टाचार या किसी अन्य आपराधिक केस में सजा दी गई हो या फिर पुलिस अफसर शारीरिक रूप से कार्य करने में अक्षम हो।

झारखंड के डीजीपी काे हटाने का मामला भी लंबित

झारखंड राज्य सरकार द्वारा भी डीजीपी को कार्यकाल पूरा हुए बिना हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित चल रहा है। दरअसल झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने 16 मार्च, 2020 को अचानक ही तत्कालीन डीजीपी केएन चौबे को महज नौ माह के कार्यकाल के बाद हटाकर दिल्ली में आधुनिकीकरण का ओएसडी बना दिया और उनकी जगह एमवी राव को प्रभारी डीजीपी नियुक्त कर दिया।

राज्य सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रहलाद नारायण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे अदालत की अवमानना बताया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त महीने में केंद्र सरकार, यूपीएससी, झारखंड सरकार और मौजूदा डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब देने का निर्देश दिया था।



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भूपेन्द्र यादव (फाइल फोटो)
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