हर्ष खटाना. अवैध बजरी खनन करने वाले लोगों को ई रवन्ना देना होता है। सरकारी रिकार्ड के अनुसार 35 रु. प्रति टन के हिसाब से ये चुकाया जाता है और एक गाड़ी की 1200 से 1400 रुपए तक ई रवान्ने की पर्ची कटती है। ऐसे में अवैध बजरी भरकर ले जाने वाले ट्रक को 5 से 7 जगहाें पर 200-200 या इससे अधिक भी चुकाना हाेता है। यानी की एक ट्रक काे 1000 से 1800 रुपए तक गांवाें काे चुकाना पड़ता है। नदी से बजरी भरने का अलग खर्चा करना पड़ता है। इस लिहाज से अवैध वसूली की राशि कई बार सरकारी ई रवन्ना के बराबर हो जाती है।
ऐसा इसलिए क्योंकि एक जगह मंदिर तो दूसरी जगह गोमाता के नाम से चंदा चुकाना पड़ रहा है। वहीं इस राशि की रसीद तक दी जाती है। उधर इस काम में जुटे युवाओं काे प्रतिदिन दाे से पांच हजार रुपए तक मिलते है। प्रति गांव में बजरी माफिया से इस तरह से लाखों रुपए की अवैध वसूली का खेल चल रहा है।
इन इलाकों में सामने आ रही गड़बड़ियां
अवैध वसूली के मामले नागौर के गांव सबसे ज्यादा चर्चा में है। इनमें रियाबड़ी आलनियावास, झिंटियां, बडालयी, काेडिया, टहेला, सैसड़ा, सथाना सहित कई गांव शामिल है। इसी तरह मारवाड़ में लूणी, गुढामलानी के अलावा सिराेही, भीलवाड़ा जिलाें के कई गांव इस अवैध वसूली में शामिल हाे गए हे। पुलिस प्रशासन काे इसकी जानकारी हाेते ही भी अवैध वसूली करने वालाें के खिलाफ काेई कार्रवाई नहीं हाेना पुलिस व खान विभाग के अधिकारी - कर्मचारियाें की वर्किंग पर सवाल उठा रहे है। साथ ही मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
दाैरे पर निकली सुप्रीम कोर्ट की कमेटी से लेकर खान विभाग के अफसर तक हैरान:
पिछले माह सुप्रीमकोर्ट की कमेटी व खान विभाग के अफसरों ने अवैध बजरी खनन, भंडारण व ट्रांसपोर्टेशन के बिंदुओं पर मारवाड़, चित्तौड़ और भीलवाड़ा का दौरा किया था। इस टीम ने जब गांवों में पूछताछ की तो अवैध बजरी खनन का खेल तो सामने आया ही था साथ ही अवैध माइनिंग कराने वालों से गांवों में अवैध तरीके से चल रही वसूली के मामले भी उजागर हुए थे। तब भी ये ही बात आई थी कि गांवों के युवाओं को कई लोग गलत दिशा में ले जा रहे है और इस तरह की अवैध वसूूली में शामिल करा रहे है।
^ये बात इतने बड़े पैमाने पर हाे रही है, इसका अंदाजा नहीं है। बहरहाल किन-किन जिलाें में ऐसे हालात बने है, इस पर रिपाेर्ट लेकर विभागीय कार्यवाही तय की जाएगी -केबी. पंड्या, निदेशक खान विभाग
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