जेएनवीयू के कर्मचारियों ने वित्तीय नियंत्रक की एक स्कीम के विरोध में ऐतराज जताते हुए मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि पीएफ फंड की राशि को राजकीय राजकोष में डालने की साजिश की जा रही है। इसका विरोध किया जाएगा। क्योंकि अब तक यह राशि विवि के पास रहती थी। ऐसे में कर्मचारियों को समय पर राशि मिल जाती थी, लेकिन अब पुरानी व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

इधर, इस मुद्दे पर विवि ने एक कमेटी का गठन किया है, जिसकी बैठक 12 दिसंबर को होगी। दरअसल पीएफ फंड की राशि राजकोष में संधारित करने की कवायद को लेकर कर्मचारियों के एक धड़े ने विरोध शुरू कर दिया है। कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष अनिल पंवार ने पीएफ फंड की राशि ट्रेजरी में ट्रांसफर करने को नियम विरुद्ध बताया है और कहा कि अगर ऐसी प्रक्रिया को रोका नही गया तो भविष्य में कर्मचारियों को बहुत नुकसान होगा। अगर कोई सेवानिवृत्त होता है तो उसे कुछ ही दिनों में पीएफ राशि का भुगतान कर दिया जाता था, क्योंकि फंड विवि के पास ही रहता था।

अगर यह फंड राजकीय कोष में चला गया तो वहां से राशि आने में कई सप्ताह और माह लग सकते हैं। पंवार ने विश्वविद्यालय प्रशासन सिंडिकेट में पूर्व में लिए गए निर्णयों का भी हवाला दिया है। गौरतलब है कि विवि में पुरानी परंपरा से पीएफ फंड की राशि विवि के खाते में ही संधारित रहती है।

वहीं हाल ही में कार्यवाहक वित्तीय नियंत्रक ने 12 दिसंबर को एक बैठक प्रस्तावित कर पीएफ फंड की राशि राजकोषीय फंड में संधारित करने का एजेंडा निर्धारित कर दिया। 12 दिसंबर को होने वाली बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी, सिंडिकेट सदस्य प्रो. संगीता लूंकड़, प्रो. चैनाराम चौधरी और प्रो. आरके गेनवा सहित कुलसचिव, अशैक्षणिक सदस्य के तौर पर प्रफुल्ल मेहता, नरेश गहलोत व कार्यवाहक वित्तीय नियंत्रक मंगलाराम विश्नोई शामिल होंगे।
बैठक में ये होंगे मुद्दे
वर्ष 2018-19, 2019-20 व 2020-21 का ईपीएफ ब्याज दर का निर्धारण, ईपीएफ फंड को राजकीय कोष में डालना, ईपीएफ अग्रिम भुगतान प्रणाली व ब्याज दर, ईपीएफ के अंतिम भुगतान कटौती के संबंध में चर्चा, ईपीएफ ऑनलाइन मॉड्यूलर डेवलप पर वेबसाइट पर डालना आदि है।



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