हाड़ौती की दो दिवसीय विजिट पर आए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डर्न एमएल मीना ने बूंदी रामगढ़ सेंचुरी के बाद रविवार को मुकंदरा रिजर्व की विजिट कर यहां के हालात जाने। उन्होंने यहां बाघों के अनुकूल हैबीटाॅट से लेकर अन्य स्थितियों, परिस्थितियों का निरीक्षण कर स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए। मुकंदरा में दूसरा बाघ लाने के मामले में कहा कि एनटीसीए की रिपोर्ट का इंतजार है।
इसके बाद ही आगे की प्रोसेस हो सकेगी। साथ ही मुकंदरा में बाघों के अनुकूल हैबीटाॅट विकसित किया जाएगा। कोटा से उन्होंने बोराबास सेल्जर, कोलीपुरा, गिरधरपुरा, दामोदरपुरा, लक्ष्मीपुरा, दरा पहुंचे। इस रूट में बाघों के अनुकूल हैबीटाॅट से लेकर वन्यजीवों के लिए सुविधाएं व संसाधनों की हालत भी देखे। उन्होंने कहा कि बाघ लाने से पहले प्रेबेस बढ़ाया जाएगा।
एमटी-4 बाघिन का मूवमेंट देखा
उन्होंने दरा पहुंचने में एमटी-4 बाघिन का मूवमेंट देखा। उन्होंने अधिकारियों को रेगुलर गश्त करने एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। इस दौरान रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर सेडूराम यादव, डीसीएफ बीजो जोय, एसीएफ आरएस भंडारी, विजयपाल, रेंजर सहित फील्ड स्टाफ मौजूद रहे।
सीधी बात : एनटीसीए की रिपोर्ट आने के बाद लाएंगे बाघ
सवाल: मुकंदरा में एक बाघिन है। दूसरा बाघ कब तक लाया जाएगा?
जवाब: अभी एनटीसीए की रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद ही आगे की प्रोसेस होगी।
सवाल: मुकंदरा में गांवों की रिलोकेशन प्रोसेस धीमी है। आगे के क्या प्रयास है?
जवाब : इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। गिरधरपुरा, दामोदरपुरा, मशालपुरा का स्वैच्छिक रिलोकेशन प्राथमिकता में हैं। इसके लिए स्थानीय लोगों का सहयोग लिया जाएगा। प्रयास रहेगा कि जो लोग यहां से स्वैच्छिक रिलोकेशन में जाए। उनके लिए बेहतर स्थिति हो। उनके परिवार यहां से अच्छा महसूस कर सके।
सवाल: स्टाफ की कमी हैं। ग्रामीणों को वाॅलेंटियर लगाने के लिए क्या प्रयास होंगे?
जवाब: भर्ती की प्रोसेस जारी हैं। स्थानीय फंड की स्थिति के अनुसार यह प्रक्रिया होती है।
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