सरकार के हर सिर को पक्की छत देने के प्रोजेक्ट पर भी बूंदी में काम चल रहा है। मुख्यमंत्री जन आवास योजना में कुल 1232 पक्के मकान बनाए जाने हैं, इनमें 712 फ्लैट कम आय वर्ग वाले (एलआईजी) परिवारों के लिए और 520 उच्च आय वर्ग वाले (ईडब्ल्यूएस) परिवारों के लिए हैं। 575 फ्लैट्स के लिए लॉटरी निकाली जा चुकी है, जबकि 657 फ्लैट्स के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं।
हालांकि 2108 में सभी 1232 फ्लैट्स की लॉटरी निकाली गई थी, पर लोगों ने बाद में मन बदल लिया और कई किश्तें नहीं दे पाए। ऐसे में अब भी 657 फ्लैट्स बुक नहीं हुए हैं, जिनके लिए आवेदन किया जा सकता है। एलआई के 384 फ्लैट्स में अभी 192 फ्लैट्स का निर्माण अभी चल रहा है। इनमें 104 फ्लैट्स की छत डाली जा चुकी है जबकि 64 फ्लैट्स की फिनिशिंग का काम चल रहा है।
वहीं ईडब्ल्यूएस के 416 फ्लैट्स में से 96 फ्लैट्स का काम कम्पलीट हो चुका है। 144 फ्लैट्स की छत डालने का काम चल रहा है। इस तरह 240 फ्लैट्स का काम जल्द पूरा हो जाएगा। वहीं 176 फ्लैट्स का निर्माण बरामदे के लेवल तक आ चुका है। उम्मीद है कि वर्ष 2021 में सभी फ्लैट्स तैयार हो जाएंगे।
शहर में नई कॉलोनी डेवलप होगी, 6-7 जनवरी को ओपन नीलामी
शहर में कुंभा स्टेडियम के पास छत्रपुरा रोड पर नगरपरिषद नई कॉलोनी काटने जा रही है। खसरा नंबर 143 और 144 में एक लाख 4457 स्क्वायर फीट में यह कॉलोनी काटी जाएगी। आयुक्त महावीरसिंह सिसोदिया ने बताया कि टाउन प्लानर से इसकी अप्रूवल मिल चुकी है। इस कॉलोनी में कुल 37 प्लॉट होंगे। इनमें 14 प्लॉट कामर्शियल रखे गए हैं, जिनका साइज 25 बाई 55 और 25 बाई 48 है।
इसमें साधारण आयवाले एलआईजी और उच्च आयवाले ईडब्ल्यूएस प्लाॅट्स शामिल हैं। इनका अलग-अलग साइज है। इसके अलावा इस कॉलोनी में 2571 और 2592 स्क्वायर फीट में पार्क के अलावा पार्किंग और पब्लिक यूटिलिटी जैसा कम्युनिटी हॉल भी बनाया जाएगा। कॉलोनी में 30 से 40 फीट चौड़ी सड़कें होंगी। आयुक्त सिसोदिया ने बताया कि इसी महीने 6 और 7 जनवरी को नगरपरिषद कार्यालय में ओपन नीलामी होगी। इसके अलावा नैनवां रोड पर आईटीआई के पास भी एक कॉलोनी प्रस्तावित है।
कर्मचारियों की सैलरी तक नहीं दे पा रही नगरपरिषद
नगरपरिषद को इस कॉलोनी से 6 करोड़ रुपए आय की उम्मीद है। पिछले दो-तीन साल से आर्थिक बदहाली से गुजर रही नगरपरिषद के पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने तक का पैसा नहीं है। हालत यह है कि नगरपरिषद अपने कर्मचारियों को पांच-छह महीनों से सैलरी तक नहीं दे पा रही है।
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