कोरोनाकाल की आपदा को बाड़मेर के किसानों ने अवसर में बदल दिया है। खरीफ की बंपर पैदावार के बाद रबी सीजन में जीरा,ईसबगोल, सरसों की 95 फीसदी बुवाई कर चुके हैं। मौसम ने साथ दिया तो रबी का रिकॉर्ड उत्पादन की संभावना है। इस बार जीरे के भावों में मंदी के चलते किसानों ने दूसरी फसलों को ज्यादा तवज्जो दी है। जिले में 3.40 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हुई है। गत साल के मुकाबले 10 फीसदी अधिक बुवाई हो चुकी है।
जिले में गत साल के मुकाबले रबी की 10 फीसदी अधिक बुवाई से बंपर पैदावार की उम्मीद है। दीपावली से पहले ही किसानों ने जीरे की बुवाई शुरू कर दी थी। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में जीरा की 2 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है। वहीं ईसबगोल की 1 लाख, सरसों 15 हजार, गेहूं 15 हजार, चना 2 हजार, मैथी व अन्य फसलों की 5 हजार हेक्टेयर में बुवाई की गई है। इस बार जीरे की बुवाई 10 फीसदी घटी है। वहीं ईसबगोल के प्रति किसानों का क्रेज बढ़ा है। हर साल ईसबगोल की 70 हजार हेक्टेयर में ही बुवाई होती थी, लेकिन इस बार एक लाख हेक्टेयर में बुवाई की गई है। वहीं सरसों, गेहूं व अन्य फसलों के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है।
शीतलहर से अरंडी की फसल में 10 फीसदी नुकसान की आशंका
जिले में बीते दिनों चली शीतलहर ने अरंडी की फसल को नुकसान पहुंचाया है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में अरंडी की फसल में 10 फीसदी खराब हुआ है। हालांकि अब मौसम में बदलाव से पारा लगातार बढ़ रहा है। इस स्थिति में नुकसान की आशंका कम है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अरंडी को पाले से बचाने के लिए किसानों को सिंचाई करनी चाहिए। साथ ही छिड़काव भी।
मंदी से घटा जीरे के प्रति रूझान
जिले में रबी की सीजन में जीरे की रिकॉर्ड तोड़ बुवाई होती है। गत साल कोरोनाकाल शुरू होने की वजह से जीरे के भाव कम हो गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डिमांड नहीं होने के कारण भाव लगातार गिरते गए। इस दौरान 10 से 12 हजार रुपए प्रति क्विंटल के भाव से जीरा किसानों को बेचना पड़ा था। इस स्थिति में किसानों ने इस सीजन में ईसबगोल व अन्य फसलों की बुवाई की है। यानी जीरे की गत साल के मुकाबले 10 फीसदी बुवाई कम हुई है।
रबी फसलों का ट्रेंड भी बदल रहा है
^किसानों का रबी फसलों का ट्रेंड भी बदल रहा है। आमतौर पर किसान जीरे की बुवाई में रूचि ज्यादा लेते हैं, लेकिन इस बार ईसबगोल को प्राथमिकता दी है। फसलचक्र में बदलाव भी जरूरी है। समय के साथ बुवाई का ट्रेंड भी बदलना चाहिए।इसके साथ सरसों, गेहूं समेत अन्य फसलों की बुवाई की है। अभी मौसम अनुकूल है। इस वजह से रबी फसलों की ग्रोथ अच्छी होगी। अरंडी को छोड़ किसी भी फसल में खराबा नहीं हुआ है। दिन का पारा 20 से 25 डिग्री तक रहने से फसलों का फायदा होगा। वहीं रात का तापमान 10 से 12 डिग्री तक अनुकूल रहता है। बावजूद इसके ज्यादा सर्दी शुरू होने पर सिंचाई जल्दी करने व छिड़काव से फसलों को पाले से बचाया जा सकता है। इस बार मौसम ने साथ दिया तो रबी की बंपर पैदावार होगाी।
-डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक।
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