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सोमवार, 4 जनवरी 2021

4000 भवन मालिकों को नोटिस निर्माण लागत का 1% सेस चुकाओ

श्रम विभाग ने शहर में भवन मालिकों को मकानों का वैरिफिकेशन किए बिना ही सेस की वसूली के हजारों नोटिस थमा दिए। नोटिस में लिखा है कि निर्माण समय से 30 दिन में विभाग को निर्माण लागत का एक प्रतिशत सेस चुकाना होगा। कोरोना लॉकडाउन और इसके बाद के आर्थिक हालातों के कारण लोग समय पर श्रम विभाग में सेस का रुपए जमा नहीं करवा पाए।

अब भवन मालिकों पर सेस का रुपए जमा नहीं करवाने के कारण निर्माण समय से निर्माण लागत के एक प्रतिशत पर 24 प्रतिशत ब्याज पेनल्टी जमा करवाने की तलवार लटक गई है। गत वर्ष शहर में करीब 4000 भवन मालिकों को सेस वसूली के नोटिस दिए जा चुके हैं। विभाग में चर्चा है कि ये नोटिस किसी मंत्री या बड़े सरकारी अफसर को नहीं दिए गए, जिन्होंने करोड़ों रुपए के बंगले बना रखे हैं।
^ अगर किसी को गलत नोटिस मिला है तो वे संभागीय श्रम आयुक्त कार्यालय में प्रमाण सहित जानकारी दें। उनकी शिकायत को दूर किया जाएगा।

- धर्मपाल सिंह, संभागीय श्रम आयुक्त, जयपुर

आवासीय में 10 लाख से अधिक में कुल लागत का 1% सेस

प्रदेश में भवन निर्माण से जुड़े श्रमिकों से जुड़ी योजनाओं को चलाने के लिए सरकार ने 27 जुलाई 2009 को बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर (बीओसीडब्लू) बोर्ड गठित किया था। बोर्ड ने अपनी आमदनी के लिए अपने गठन की तारीख के बाद प्रदेश में बन रहे ऐसे मकानों पर एक प्रतिशत सैस लागू कर दिया।

व्यावसायिक निर्माण में जितनी भी कीमत का निर्माण होता है, उसका एक प्रतिशत और आवासीय भवन निर्माण में 10 लाख रुपए से अधिक की कीमत के निर्माण पर एक प्रतिशत सेस श्रम विभाग में जमा करवाना अनिवार्य होता है। जो भवन मालिक सेस का रुपए जमा नहीं करवाते, उन पर निर्माण समय से एक प्रतिशत सेस पर 24 प्रतिशत का ब्याज पेनल्टी के रूप में चुकाना होता है। नियमानुसार यह नोटिस जुलाई 2009 के बाद निर्मित भवनों के लिए दिए जाते हैं। श्रम विभाग के इंस्पेक्टरों ने ऐसे भवन मालिकों को भी नोटिस भेज दिए, जिन्होंने इस अवधि से पहले ही मकान बना लिए थे।

लोगों की समस्या- निर्माण पुराने, भुगतान बिल नहीं हैं
श्रम विभाग का आदेश है कि ऐसे भवन मालिक जिनका निर्माण 2009 से पहले हो चुका, वे संभागीय श्रम आयुक्तालय में जाकर प्रमाणित करें। इसके बाद ही उनसे नोटिस वापस लिए जाएंगे। इधर, मकान मालिकों का कहना है कि मकान निर्माण काफी समय पहले होने से अब भुगतान के बिल नहीं है। ऐसे में किस प्रकार प्रमाणित किया जाए कि उनका मकान 2009 से पहले ही बन चुका।

श्रमिकों के बच्चों के लिए सेस से जुटाते हैं राशि
आवासीय और व्यावसायिक निर्माण इकाइयों से वसूली गई सेस की राशि को श्रमिक कल्याण कोष में जमा कराई जाती है। इस राशि को श्रमिकों के बच्चों के कल्याण के लिए खर्च किया जाता है। श्रमिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति, विवाह व अन्य योजनाओं में पैसा दिया जाता है। सेस से जयपुर में करीब 100 करोड़ रुपए सालाना अाय होती है। वहीं, श्रम विभाग को 400 करोड़ रुपए की आय हो जाती है।



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Notice to 4000 building owners to pay 1% cess of construction cost
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