जिले में अनलॉक होते ही जिला एसआरजी अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। ओपीडी में प्रतिदिन 1300 और इनडोर में 180 नए मरीज आ रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने और वार्डों को सम्मिलित करने से भर्ती मरीजों की भी परेशानी बढ़ गई है। मरीजों को भर्ती करने के लिए वार्डों में बेड कम पड़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बेड के बीच में बेंचें लगाकर, तो तीमारदारों के बैठने की कुर्सियों पर भर्ती करना पड़ रहा है।
इसके अलावा अब भी 50 प्रतिशत स्टाफ को ही अस्पताल आने की अनुमति है। इस कारण भी भर्ती मरीजों की पूछ-परख ठीक से नहीं हो रही है। वार्ड इंचार्ज द्वारा अस्पताल प्रशासन को अवगत कराया गया है कि मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में उनके वार्ड में शामिल अन्य विभाग के वार्ड को अलग किया जाए, ताकि वे अपने वार्ड की व्यवस्था को सुचारू चला सकें, लेकिन अभी तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जल्दी करना पड़ रहा है डिस्चार्ज: वार्डों में मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर भी मान रहे हैं कि मरीज अधिक आने पर जल्दी डिस्चार्ज करना पड़ रहा है।
सर्जरी व आर्थोपेडिक वार्ड में मरीज अधिक आने पर पूर्व में भर्ती मरीजों को जल्दी ही डिस्चार्ज किया जा रहा है, ताकि आने वाले मरीजों को भर्ती किया जा सके। जिन मरीजों का ऑपरेशन हो गया है, उनको जहां पहले चार से पांच दिन भर्ती रखा जाता था, अब दो से तीन दिन में डिस्चार्ज कर घर पर आराम करने को कहा जा रहा है और ड्रेसिंग अपने क्षेत्र की सीएचसी पर कराने को कहा जा रहा है।
मेडिसिन विभाग...ओपीडी में रोज आ रहे 400 से अधिक मरीज, भर्ती पेशेंट 60
मौसम बदलने से भी मेडिसिन विभाग ओपीडी में 400 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा भर्ती मरीजों की संख्या भी 60 से अधिक है। प्रतिदिन नए मरीज आने से मेडिसिन विभाग के इनडोर में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ गए हैं। ऐसे में बेडों के बीच में अतिरिक्त बेंचें व कुर्सियों पर मरीजों को भर्ती कर उनको ड्रिप चढ़ाई जा रही थी।
आर्थोपेडिक को उसके वार्ड में शिफ्ट किया जाए
सर्जरी विभाग में ही आर्थोपेडिक विभाग को संचालित कर दोनों के मरीज एक ही वार्ड में भर्ती किए जा रहे हैं। ऐसे में दोनों विभागों को परेशानी आ रही है। सर्जरी विभाग के इंचार्ज व ड्यूटी नर्सिंग स्टाफ द्वारा अधीक्षक को लिखित में दिया गया है कि वार्ड में मरीज अधिक आ रहे हैं, ऐसे में उनके वार्ड में शामिल आर्थोपेडिक वार्ड को उनके वार्ड में शिफ्ट किया जाए, ताकि वे अपना वार्ड सुचारू रूप से चला सकें।
इनडोर के मरीजों को ज्यादा परेशानी, रात को हालात खराब
लाॅकडाउन खुलने के बाद लोग बाहर निकलने लगे हैं। ऐसे में सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं। इसके कारण जिला एसआरजी अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा मौसम भी बदल रहा है। खांसी, सर्दी, जुकाम व वायरल फीवर के कारण मेडिसिन विभाग में भी इनडोर व आउटडोर दोनों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सबसे ज्यादा परेशानी इनडोर के मरीजों को आ रही है।
अभी पूरा स्टाफ नहीं आने और आर्थोपेडिक वार्ड को कोरोना मरीजों के लिए रिजर्व रखा है। ऐसे में आर्थोपेडिक विभाग को सर्जरी विभाग के साथ संचालित किया जा रहा है। यानी दोनों विभागों के मरीज एक ही वार्ड में भर्ती हो रहे हैं। ऐसे में बेड कम पड़ रहे हैं। रात को तो हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। ऐसे में मरीजों को दूसरे वार्डों में शिफ्ट करना पड़ रहा है। वहीं ईएनटी, आई, न्यूरो सर्जरी भी एक साथ संचालित हो रहे हैं, लेकिन वहां फिलहाल मरीजों की संख्या कम होने से ज्यादा परेशानी नहीं है।
50 प्रतिशत स्टाफ की अनुमति
जिले में अनलॉक के बाद अब भी अस्पताल में 50 प्रतिशत स्टाफ को ही आने की अनुमति दी है। ऐसे में मरीज तो अधिक संख्या में आ रहे हैं, लेकिन स्टाफ कम होने से कार्यरत स्टाफ की भागदौड़ भी ज्यादा हो रही है। ऐसे में वार्डों में भर्ती मरीजों की पूछ-परख भी कम हो रही है। स्टाफ दूसरे कार्य में व्यस्त हो जाता है तो मरीजों को इंतजार करना पड़ता है।
^ अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर के समक्ष रिव्यू किया जाएगा। जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। जल्दी ही आर्थोपेडिक वार्ड को शिफ्ट कर दिया जाएगा।
डॉ. राजेश गुप्ता, अधीक्षक
फैक्ट फाइल
- अस्पताल में ओपीडी मरीज : 1300 प्रतिदिन
- अस्पताल में इनडोर मरीज : 180 प्रतिदिन
- अस्पताल में शामिल वार्ड : सर्जरी, ऑर्थोपेडिक एक साथ, इधर आई, ईएनटी, न्यूरो सर्जरी एक साथ
- मेडिसिन विभाग में आ रहे प्रतिदिन मरीज : 400
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