जिले में इन दिनाें भीषण गर्मी के दाैर के कारण बिजली की भी रिकाॅर्ड ताेड़ खपत हाे रही है। इन दिनाें बिजली खपत 73 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। आवासीय क्षेत्र में लगे सात से आठ हजार ट्रांसफार्मर भी ओवर लाेड हैं। ऐसे में इन ट्रांसफार्मराें के फेल हाेने का खतरा मंडराने के साथ ही ट्रिपिंग, ट्रांसफार्मराें से फ्यूज उड़ने व लाइनाें में फाॅल्ट हाेने से अघाेषित बिजली कटाैती की समस्या भी बढ़ गई है।

इससे एक तरफ जहां आमजन काे परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं, बिजली कर्मियाें का भी बार-बार अलग-अलग क्षेत्राें में बिजली बाधित हाेने से वर्क लाेड बढ़ गया है। जिले में चार लाख बिजली उपभाेक्ता है। इनमें से 22 हजार उपभाेक्ता पिछले एक साल में नए जुड़े हैं।

वर्ष 2019 में जून-जुलाई में 60 से 63 लाख यूनिट प्रतिदिन अधिकतम बिजली खपत हुई थी। एक ही साल में प्रतिदिन 10 लाख यूनिट बिजली खपत बढ़ गई है। शनिवार काे बिजली खपत 73.34 लाख यूनिट तक पहुंच गई। यह स्थिति तब है जब स्कूल, काॅलेज, धार्मिक स्थल, बड़े धार्मिक व सामाजिक आयाेजन बंद हैं। जिले में उपभाेक्ताओं के घराें तक बिजली पहुंचाने के लिए 21 हजार ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं।

इनमें से आवासीय क्षेत्र में लगे लगभग सात से आठ हजार ट्रांसफार्मर ओवरलाेड हैं जाे कभी भी फेल हाे सकते हैं और इनसे हाेने वाली बिजली आपूर्ति ठप हाे सकती है। डिस्काॅम कर्मी भी इन ट्रांसफार्मराें काे फेल हाेने से बचाने के लिए कूलर लगाकर इनकाें बचाने की प्रयास कर रहे हैं।

गर्मी से राहत पाने के लिए पहले जहां लाेग पंखे व कूलराें से ही काम चलाते थे, लेकिन अब एयर कंडीशनर का चलन बढ़ा है। शहराें के साथ-साथ अब गांवाें में भी उपभाेक्ता घराें में एसी लगा रहे हैं। एक एसी से बिजली की खपत एक से दाे किलाेवाट तक बढ़ रही है। इसके साथ ही काेराेना संक्रमण के फैलाव से बचने के लिए ज्यादातर समय लाेग घराें पर ही व्यतीत कर रहे हैं और गर्मी से बचने के लिए पंखे, कूलर व एसी का सहारा ले रहे हैं। यह भी बिजली खपत बढ़ने का मुख्य कारण है।

डिस्काॅम अधिकारियाें का कहना है कि बिजली बचाने के लिए हर उपभाेक्ता काे पूरा ध्यान देना चाहिए। पंखे कूलर एसी व बल्ब का उपयाेग जरूरत के हिसाब से ही करें। जिन घराें व संस्थानाें में एसी एक से ज्यादा लगे हैं, वे जरूरत के हिसाब से ही एसी चलाएं। एसी काे लगातार नहीं चलाएं। इससे भी बिजली बचाई जा सकती है।
निगम की अपील- जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करें बिजली

जिन आवासीय क्षेत्राें में ट्रांसफार्मर ओवर लाेड हैं वहां अधिक विद्युत भार वाले ट्रांसफार्मराें का लाेड कम करने के लिए कम विद्युत भार वाले ट्रांसफार्मराें से लाइनाें काे जाेड़ा जा रहा है। जहां यह विकल्प नहीं है वहां बड़े ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं या फिर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा रहे हैं। जीएसएस में पावर ट्रांसफार्मराें का तापमान कम करने के लिए कूलर भी लगाए जा रहे हैं ताकि सिस्टम काे बचाया जा सके।
ट्रिपिंग व फ्यूज की आ रही समस्या

आवासीय क्षेत्राें में जहां ट्रांसफार्मर ओवर लाेड हैं वहां आसपास के क्षेत्र में उपभाेक्ता ही अतिरिक्त ट्रांसफार्मर स्थापित करने का विराेध करते हैं। ऐसे में ट्रांसफार्मर ओवर लाेड हाेने वाले क्षेत्राें में ट्रिपिंग, फ्यूज उड़ने व लाइनाें में फाॅल्ट हाेने से बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित हाेती है तथा अघाेषित बिजली कट लगते हैं। इससे उपभाेक्ताओं काे भी बिजली ठप हाेने से परेशानी झेलनी पड़ती है। साथ ही डिस्काॅम कर्मियाें का भी कार्यभार बढ़ जाता है।

  • हर वर्ष जून-जुलाई माह गर्मी का पीक सीजन हाेता है। ऐसे में बिजली की खपत भी इन दाे माह में सबसे अधिक हाेती है। इन महीनाें में रात का तापमान भी 30 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है। इन दिनाें बिजली खपत 73 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई है। ट्रांसफार्मर भी जल रहे हैं। नियमित बिजली आपूर्ति के लिए सभी कर्मचारी अलर्ट पर हैं ताकि कहीं बिजली बंद हाे ताे तुरंत बहाल की जाए। ऐसे में अब ताे बरसात से ही आस है ताकि तापमान कम हाे ताे ही बिजली खपत कम हाेगी। -जेएस पन्नू, अधीक्षण अभियंता, जाेधपुर डिस्काॅम, श्रीगंगानगर

पिछले से इस साल खपत ज्यादा

वर्ष 2019 2020
1 जुलाई 62.35 66.23
2 जुलाई 59.31 70.45
3 जुलाई 63.54 73.34
(खपत लाख यूिनट में)



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Electricity records reached 73 lakh units, 8000 transformers overloaded
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