देश की टॉप लॉ यूनिवर्सिटी एनएलएसआईयू, बेंगलुरु प्रवेश के लिए अपना अलग एग्जाम नेशनल लॉ एडमिशन टेस्ट(एनलैट) आज आयोजित कर रही है। एनएलयू दिल्ली की प्रवेश परीक्षा पहले ही अलग थी। इस बार एआईएलईटी 26 सितंबर को है। अब बची हुई 21 एनएलयू क्लैट (28 सितंबर) के जरिए प्रवेश देंगी।
बेंगलुरु के अलग होने से अब तीन परीक्षाएं देनी होंगी। बता दें कि 2008 में पहला क्लैट एनएलएसआईयू ने ही आयोजित किया था। अलग होने की वजह एनएलएसआईयू ने बताई है कि उसने क्लैट में देरी का मुद्दा कई बार कन्सोर्टियम के सामने रखा। परीक्षा से जुड़े उसके सुझावों को भी रिजेक्ट कर दिया गया।
बेंगलुरु के वीसी प्रो. सुधीर कृष्णास्वामी को कंसोर्टियम के सचिव-कोषाध्यक्ष पद से हटाकर संस्थान की सदस्यता भी समाप्त कर दी गई। अब जिम्मेदारी नलसार हैदराबाद के वीसी प्रो. फैजान मुस्तफा के पास है। इस विवाद के बीच एनलैट को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई जिसमें कोर्ट ने परीक्षा आयोजन की स्वीकृति दे दी, लेकिन रिजल्ट व प्रवेश एससी के निर्णय के अधीन रहेगा। इस पूरे मसले पर दैनिक भास्कर ने प्रो. सुधीर व प्रो. फैजान से बात की।
क्लैट वर्सेस एनलैट 2020 : क्या छात्रों की मुश्किलें बढ़ेंगी?
एनएलएसआईयू टॉप लॉ इंस्टीट्यूट्स में से एक है। अब इसके लिए एनलैट देना होगा और दूसरी एनएलयू के लिए क्लैट भी। क्या छात्रों को परेशानी नहीं होगी?
छात्र बिना किसी प्रतिबंध के दोनों परीक्षाओं के लिए योग्य हैं। दोनों परीक्षाएं समान हैं व स्टूडेंट्स उनके फॉर्मेट से परिचित हैं। इसलिए दोनों की तैयारी में उन्हें परेशानी नहीं आएगी।
दूसरी यूनिवर्सिटीज भी अलग परीक्षा लें तो छात्रों के लिए कठिन नहीं होगा?
कई निजी यूनिवर्सिटीज पहले ही अलग परीक्षाओं से प्रवेश दे चुकी हैं। कई पब्लिक यूनिवर्सिटीज ने बिना एग्जाम के ही एडमिशन दे दिए हैं। छात्रों के पास चुनने के लिए कई विकल्प हैं।
भविष्य में कन्सोर्टियम से दोबारा जुड़ने की कोई योजना है?
क्लैट 2020 से अलग होने के लिए एनएलएसआईयू ने कन्सोर्टियम से रिक्वेस्ट की है। हमें इस मामले में अभी तक कोई लिखित प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
आपको देरी का वास्तविक कारण क्या लगता है?
कोविड से देरी हुई है लेकिन हाल में परीक्षाएं सफलतापूर्वक भी हुई हैं। सभी संस्थानों को अपनी प्रवेश प्रक्रिया समय पर पूरी करनी है।
एनएलएसआईयू बेंगलुरु की तर्ज पर क्या अन्य यूनिवर्सिटीज भी भविष्य में अलग हो सकती हैं?
एनएलयू दिल्ली कन्सोर्टियम से कभी नहीं जुड़ी, वह अपना अलग टेस्ट लेती है। कोई भी यूनिवर्सिटी जो कन्सोर्टियम की सदस्य नहीं है, वह अलग टेस्ट ले सकती है। लेकिन कन्सोर्टियम के सदस्य विश्वविद्यालय ऐसा नहीं कर सकते। कन्सोर्टियम ने स्पष्ट किया है कि बेंगलुरु को छोड़कर कोई यूनिवर्सिटी अलग टेस्ट नहीं लेगी।
बेंगलुरु ने अपने ट्रायमेस्टर सिस्टम को भी एक वजह बताया है, यह सिस्टम एनएलयू भोपाल में भी है तो क्या वह भी अलग परीक्षा ले सकती है?
इस साल भोपाल में यह सिस्टम खत्म होगा।
क्या क्लैट को ऑनलाइन होम बेस्ड एंट्रेंस एग्जाम की तरह आयोजित नहीं किया जा सकता?
होम टेस्ट सुरक्षित नहीं है और इसके लिए डिवाइसेज की जरूरत होती है जो कि संभव है कि गरीब छात्रों के पास न हों। 78,000 छात्रों की परीक्षा इस मोड में नहीं ली जा सकती।
क्लैट कंसोर्टियम में एक दरार नजर आती है?
ऐसा नहीं है सिर्फ बेंगलुरु अलग हुआ है।
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