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गुरुवार, 5 नवंबर 2020

हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, प्रशासन का खौफ नहीं होने से हौंसले बुलंद

ग्रामीण अंचल में काफी समय से हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। प्रशासन का खौफ नहीं होने से इनके हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं। अजीतगढ़ के ग्रामीणों की सजगता से इनके खिलाफ कार्रवाई के बाद अब माफिया ने गीली लकड़ी के परिवहन करने के रास्ते बदल लिए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

जानकारी के मुताबिक अजीतगढ़ क्षेत्र में वन विभाग कार्मिकों व अधिकारियों की अनदेखी के चलते प्रतिदिन 10 से 15 ट्रैक्टर-ट्राॅली हरे पेड़ों को काटकर थोई पहुंचा रहे हैं। विगत दिनों ग्रामीणों की सजगता के बाद अजीतगढ़ मुख्य बाजारों से होकर आवागमन करने वाले वाहनों को रोक कर प्रशासन को सूचना देकर कार्रवाई के बाद वाहन चालकों ने रास्ता बदल लिया है।

यहां से होकर शाम ढलते ही दौड़ती है गीली लकड़ी लिए ट्रैक्टर-ट्राॅली
ग्रामीणों ने बताया कि अजीतगढ़ मुख्य बाजारों व स्टैंड से होकर आवागमन करने वाले वाहनों के सीसीटीवी फुटेज कैमरों में कैद होने के साथ ही ग्रामीणों के विरोध के बाद पुलिस व प्रशासन द्वारा दो-तीन बार कार्रवाई की गई। इसके बाद अब लकड़ी माफिया अजीतगढ़ मुख्य स्टैंड व बाजारों से कम बल्कि अजीतगढ़ के चौमूं रोड स्थित विनायक काॅलोनी से ढाणी पठानवाली, दिवराला रोड से राजश्री ईंट-भट्टा, बंशी ईंट उद्योग से ढाणी केरली, कांकरिया प्याऊ, गढ़टकनेत, आसपुरा से होकर थोई जा रही हैं। दूसरी ओर खटकड़, किशोरपुरा से नारे होकर झाड़ली व वहां से थोई पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इन माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों ने फोटो व वीडियो कर रहे हैं शेयर

अब रास्ते बदलने के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों ने अन्य रास्तों से होकर आवागमन करने वाले इन वाहनों के फोटो व वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



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Indiscriminate felling of green trees, due to lack of fear of administration
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