(भीकम शर्मा)
विश्व व्यापी कोरोना महामारी का सीधा असर पुष्कर के विश्व प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर में चढ़ावे से होने वाली आमदनी पर पड़ा है। कोरोना संक्रमण के कारण मंदिर में जहां श्रद्धालुओं की आवक घटी है, वहीं मंदिर में आने वाला चढ़ावा भी कम हो गया है। आलम यह है कि छह माह के लॉकडाउन के बाद मंदिर को खुले तीन माह से अधिक हो गए हैं। अभी तक एक बार भी मंदिर के दान पात्र नहीं खोले गए हैं, जबकि लॉकडाउन से पहले प्रति माह मंदिर के दान पात्र खोल कर चढ़ावा गिनती की जाती थी।


ब्रह्मा मंदिर के गर्भगृह के सामने दो बड़े दान पात्र लगाए गए है। मंदिर परिसर में करीब छोटे-बड़ी 15 दान पेटियां रखी गई हैं। कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित अस्थायी मंदिर प्रबंधन कमेटी की ओर से प्रति माह दान पात्र खोल कर कर्मचारियों के सहयोग से चढ़ावा की गिनती की जाती है। लॉकडाउन से पहले जहां प्रति माह चढ़ावा गिना जाता था।

लॉकडाउन के चलते 18 मार्च को मंदिर बंद कर दिया गया। इसके बाद से ही चढ़ावा गिनती बंद हो गई। अनलॉक दर्शन के चलते गत 7 सितंबर को मंदिर फिर से खोला गया तथा मंदिर में श्रद्धालुओं की आवक भी शुरू हो गई। वापस मंदिर खुले हुए तीन माह से अधिक का समय बीत गया मगर मंदिर के दान पात्र एक बार भी नहीं खोले गए। यानी मंदिर के दान पात्र अभी भी खाली हैं। कुछ छोटे दान पात्र चढ़ावा राशि से भर गए है। उनकी जगह कमेटी की ओर से दूसरे दान पात्र लगा दिए हैं। कमेटी की ओर से मंदिर की व्यवस्था में नियुक्त कर्मचारियों का कहना है कि शीघ्र ही दान पात्र खोल कर चढ़ावा गिना जाएगा।

प्रतिमाह 15 लाख रुपए का आता था चढ़ावा
लॉकडाउन से पहले ब्रह्मा मंदिर के दान पात्रों में प्रति माह करीब 15 लाख रुपए का चढ़ावा आता था। यानी मंदिर को चढ़ावे से प्रतिमाह 15 लाख रुपए की आमदनी होती थी। यह आमदनी बीते 9 माह से थम गई है। लॉकडाउन के शुरुआती 6 माह तो मंदिर बंद होने के कारण मंदिर में आमदनी शून्य रही। बीते तीन माह से मंदिर में फिर से श्रद्धालुओं की आवक के साथ चढ़ावा आना शुरू हो गया है। अनलॉक दर्शन के बाद मंदिर में वास्तविक चढ़ावे से होने वाली आय का तो दान पात्र खुलने के बाद ही पता चल सकेगा। माना जा रहा है कि मंदिर में चढ़ावा घट कर आधे से भी कम रह गया है।



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In the last month of the Karaikanal, many donation boxes were empty, the offering was calculated every month before lockdown.
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