कोरोनाकाल में हुए लॉकडाउन में हर हाथ मदद के लिए उठे। जाति..धर्म से उठकर एक-दूसरे की मदद का जज्बा भी दिखाया। इस दौरान एसएमएस अस्पताल प्रशासन के आगे समस्या ब्लड की आई। हर दिन यहां साढ़े तीन सौ यूनिट खून की जरूरत मरीजों को पड़ती है।
इनमें से भी थैलीसीमिया और ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए हर दिन 100 यूनिट से अधिक ब्लड चाहिए होता है। मरीजों की परेशानी और एसएमएस प्रशासन की अपील पर समाजसेवी संगठन ‘साथी सेवा संस्थान’ आगे आया। संस्था ने लॉकडाउन में 27 मार्च से 3 मई तक 817 यूनिट ब्लड एकत्र कर एसएमएस को दिया। संस्था के अध्यक्ष मुकेश वर्मा (कुमावत) बताते हैं हम हमेशा ब्लड कैंप लगाते हैं लेकिन जब हमें पता चला थैलीसीमिया और कैंसर पेशेंटों के लिए ब्लड बैंक में ब्लड की किल्लत है तो हमने इसे एक मिशन के रूप में लिया।
बड़ी चुनौती थी कि कोरोना के डर से आखिर लोगों को खून दान के लिए कैसे तैयार करें...लेकिन शहर में दानवीरों की कमी नहीं है। पहल पर रक्तदान करने वालों की कतार लग गई। कई स्थानों पर तो हमें मना तक करना पड़ा। क्योंकि खून को बहुत दिनों तक स्टोर करके नहीं रखा जा सकता है।
मुकेश का कहना है कि सरकार को ब्लडबैंक बोर्ड का गठन करना चाहिए ताकि इसकी पूरी मॉनिटरिंग की जा सके और जरूरतमंद खून के लिए परेशान न हों। एसएमएस ब्लडबैंक की हेड डॉ. सुनीता बुंदस कहती हैं थैलीसीमिया और कैंसर पेंशेंटों को ब्लड की चिंता थी। 600 बच्चे थैलीसीमिया के रजिस्टर्ड हैं और इन्हें ताजा ब्लड ही चाहिए। कुछ को तो महीने में 2 बार खून चाहिए। लॉकडाउन में 817 यूनिट ब्लड मिलने से काफी राहत मिली। उन्होंने अपील की एसएमएस कोरोना फ्री है,आइए और ब्लड डोनेट कीजिए। हमने पिछले साल 1.51 लाख यूनिट ब्लड मरीजों को चढ़ाया था।
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